Hindi Story : 10 साल में सुलझी सुहागरात की गुत्थी

Hindi Story : 2011 में शकुंतला से शादी करने के डेढ़ महीने बाद भी रवि की सुहागरात मनाने की हसरत पूरी नहीं हुई थी. इसी दौरान वह रहस्यमय ढंग से गायब हो गया. कोर्ट के आदेश पर चली जांच में दिल्ली पुलिस के 7 जांच अधिकारी भी बदल गए, लेकिन रवि का पता नहीं चला. 10 साल तक चली विभिन्न जांचों के बाद आखिर रहस्यों की गुत्थी में उलझे रवि हत्याकांड का ऐसा खुलासा हुआ कि..

अपने बेटे की तसवीर के सामने खड़े जयभगवान की आखें बारबार डबडबा रही थीं. हाथ में पकड़े रूमाल से आंखों में छलक आए आंसुओं की बूंदों को साफ करते हुए वह बारबार एक ही बात बुदबुदा रहे थे, ‘‘बेटा, आज मेरी लड़ाई पूरी हो गई. तेरे एकएक कातिल को मैं ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है. तू जहां भी है देखना कि तेरा ये बूढ़ा बाप तेरे कातिलों को उन के किए की सजा दिला कर रहेगा.’’

कहतेकहते जयभगवान अचानक फफकफफक कर रोने लगे. रोतेरोते उन की आंखों के आगे अतीत के वह लम्हे उमड़घुमड़ रहे थे, जिन्होंने उन की हंसतीखेलती जिंदगी को अचानक आंसुओं में बदल दिया था.  बाहरी दिल्ली के समालखा में रहने वाले जयभगवान प्राइवेट नौकरी करते थे. उन के 2 ही बेटे थे. बड़ा बेटा रवि और छोटा डैनी. 10वीं कक्षा तक पढ़े रवि ने 18 साल की उम्र में पिता का सहारा बनने के लिए ग्रामीण सेवा वाले आटो को चलाना शुरू कर दिया था. 3 साल बाद मातापिता को रवि की शादी की चिंता सताने लगी. समालखा की इंद्रा कालोनी में रहने वाला शेर सिंह जयभगवान की ही बिरादरी का था.

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शेर सिंह की पत्नी कमलेश राजस्थान के अलवर जिले में टपूकड़ा की रहने वाली थी. उस ने अपनी साली शकुंतला का रिश्ता रवि से करने की सलाह दी थी. जिस के बाद दोनों पक्षों में बातचीत शुरू हुई. कई दौर की बातचीत के बाद रवि का शेर सिंह की साली  शकुंतला से रिश्ता पक्का हो गया. शकुंतला के पिता पतराम और मां भगवती के 6 बच्चे थे, 3 बेटे और 3 बेटियां. सब से बड़ी बेटी कमलेश की शादी शेरसिंह से हुई थी. शकुंतला 5वें नंबर की थी. उस से छोटा एक और लड़का था, जिस का नाम था राजू.

दोनों परिवारों की पसंद और रजामंदी से 8 फरवरी, 2011 को सामाजिक रीतिरिवाज के साथ रवि और शकुंतला की शादी हो गई. लेकिन शादी की पहली रात को रवि कुछ रस्मों के कारण अपनी दुलहन के साथ सुहागरात नहीं मना सका. संयोग से अगले दिन कुछ नक्षत्र योग के कारण शकुंतला को पगफेरे की रस्म के लिए अपने मायके जाना पड़ा. नक्षत्रों के फेर के कारण शकुंतला को एक महीने तक मायके में ही रहना पड़ा. किसी तरह एक माह गुजरा और 21 मार्च, 2011 को रवि अपनी पत्नी शकुंतला को अपनी ससुराल अलवर से अपने घर समालखा दिल्ली वापस ले आया.

शकुंतला थकी थी, लिहाजा उस रात भी रवि की पत्नी के साथ सुहागरात की मुराद पूरी नहीं हो सकी. अगली सुबह शकुंतला ने घर में पहली रसोई बना कर पूरे परिवार को खाना खिलाया, जिस के बाद जयभगवान अपनी नौकरी के लिए चले गए. दोपहर को शकुंतला अपने पति रवि को साथ ले कर इंद्रानगर कालोनी में रहने वाली बड़ी बहन कमलेश से मिलने के लिए उस के घर चली गई. लेकिन शाम के 7 बजे तक जब बेटा और बहू घर नहीं लौटे तो जय भगवान ने बेटे रवि के मोबाइल पर फोन मिलाया. उस का फोन स्विच्ड औफ मिला.

जयभगवान छोटे बेटे को ले कर रवि के साढ़ू शेर सिंह के घर पहुंचे तो शकुंतला ने बताया कि रवि को रास्ते में ग्रामीण सेवा चलाने वाले कुछ दोस्त मिल गए थे. रवि उसे घर के पास छोड़ कर यह कह कर चला गया था कि कुछ ही देर में वापस लौट आएगा. लेकिन उस के बाद से ही वह वापस नहीं लौटा है. जयभगवान बहू शकुंतला को उस की बहन के घर से अपने साथ घर ले आए. लेकिन पूरी रात बीत जाने पर भी रवि घर नहीं आया. अगली सुबह 23 मार्च, 2011 को जयभगवान ने कापसहेड़ा थाने में अपने बेटे की गुमशुदगी की सूचना लिखा दी.

रवि के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद अगले दिन शकुंतला के घर वाले भी अपने पड़ोसी कमल सिंगला को ले कर हमदर्दी जताने के लिए जयभगवान के घर पहुंचे. उन सब ने भी जयभगवान के साथ मिल कर रवि की तलाश में इधरउधर भागदौड़ की. कई दिनों तक जब रवि का कोई सुराग नहीं मिला तो 10 दिन बाद मायके वाले शकुंतला को अपने साथ वापस अलवर ले गए. इसी तरह वक्त तेजी से गुजरने लगा. कापसहेड़ा पुलिस ने लापता लोगों की तलाश के लिए की जाने वाली हर काररवाई की. घर वालों ने जिस पर भी रवि के लापता होने का शक जताया, उन सभी को बुला कर पूछताछ की गई. मगर कोई सुराग नहीं मिला.

बेटे का सुराग नहीं मिलता देख जयभगवान ने उच्चाधिकारियों से भी मुलाकात की फिर भी कोई फायदा नहीं हुआ. लिहाजा उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की. जिस पर दिल्ली पुलिस को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया. कोर्ट के आदेश पर हुई जांच शुरू  नोटिस जारी होते ही दिल्ली पुलिस के उच्चाधिकारियों के कान खड़े हुए और इसी के आधार पर पीडि़त जयभगवान की शिकायत पर 16 अप्रैल, 2011 को रवि की गुमशुदगी के मामले को कापसहेड़ा पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 365 (अपहरण) की रिपोर्ट दर्ज कर ली.

जयभगवान से पूछा गया तो उन्होंने पुलिस के सामने शंका जाहिर की कि उन्हें शकुंतला के भाई राजू और उन के पड़ोसी कमल सिंगला पर शक है. वह कोई ठोस कारण तो नहीं बता सके, लेकिन उन्होंने बताया कि शादी होने से पहले कमल ही शंकुतला के घर वालों के साथ हर बार उन के घर आया, जबकि वह उन का रिश्तेदार भी नहीं है. हालांकि पुलिस के पास कोई पुख्ता आधार नहीं था, लेकिन इस के बावजूद उन दोनों को बुला कर पूछताछ की गई. मगर ऐसी कोई संदिग्ध बात पता नहीं चल सकी, जिस के आधार पर उन से सख्ती की जाती.

पुलिस ने शकुंतला, उस की बहन कमलेश, जीजा शेर सिंह और भाई राजू के साथ कमल सिंगला के अलावा भी अलवर जा कर कुछ और लोगों से पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा. पुलिस को आशंका थी कि कहीं रवि की शादी उस के घर वालों ने बिना उस की मरजी के तो नहीं की थी, जिस से वह पत्नी को छोड़ कर खुद कहीं चला गया हो. इस बिंदु पर भी जांचपड़ताल हुई, लेकिन पुलिस को कोई सिरा नहीं मिला. रवि के पिता ने कमल सिंगला नाम के जिस युवक पर आरोप लगाया था, वह उस समय 19 साल का भी नहीं हुआ था. इसलिए पुलिस उस के साथ सख्ती से पूछताछ भी नहीं कर सकती थी. वैसे भी पुलिस को कमल के खिलाफ ऐसा कोई आधार नहीं मिल रहा था कि वह रवि के अपहरण का आरोपी ठहराया जा सके.

जांच में यह भी पता चला था कि वारदात वाले दिन कमल अलवर में ही था. रही बात राजू के इस वारदात में शामिल होने की तो वह भला अपनी ही बहन के पति का अपहरण क्यों करेगा, जिस की शादी एक महीना पहले ही हुई है. दोनों के खिलाफ न तो कोई सबूत मिल रहा था और न ही रवि के अपहरण या हत्या के पीछे पुलिस को कोई आधार दिख रहा था. पुलिस को साफ लग रहा था कि रवि की लाइफ में ऐसा कुछ जरूर है, जिसे परिवार वाले छिपा रहे हैं और उस के लापता होने का ठीकरा उस की पत्नी व दूसरे लोगों पर फोड़ रहे हैं.

पुलिस को लगा कि या तो शादी से पहले रवि का किसी दूसरी लड़की से संबध था या उस का अपने पेशे से जुड़े ग्रामीण सेवा के किसी ड्राइवर से पुराना विवाद था और शायद इसी वजह से उस की हत्या कर दी गई हो. कापसहेड़ा पुलिस ने उस इलाके के ग्रामीण सेवा चलाने वाले कई ड्राइवरों और रवि के टैंपो के मालिक से भी कई बार पूछताछ की. उस के चरित्र और दुश्मनी के बारे में भी जानकारी हासिल की गई, लेकिन कहीं से भी ऐसा कोई सुराग हाथ नहीं लगा कि जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता मिलता.  इस दौरान हाईकोर्ट में सिंतबर, 2011 में पुलिस को जांच की स्टेटस रिपोर्ट देनी थी तो उस में कोई प्रगति न पा कर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को इस मामले की जांच एक सक्षम एजेंसी को सौंपने के लिए कहा.

अदालत का आदेश आने के बाद पुलिस आयुक्त ने अक्तूबर 2011 में रवि के अपहरण की जांच का जिम्मा एंटी किडनैपिंग यूनिट के सुपुर्द कर दिया. उन दिनों एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को एंटी किडनैपिंग यूनिट के नाम से जाना जाता था. बदलते रहे जांच अधिकारी इस मामले की जांच का काम सब से पहले इस यूनिट के एसआई हरिवंश को सौंपा गया. फाइल हाथ में लेने के बाद उन्होंने इस का गहन अध्ययन किया और उस के बाद नए सिरे से सभी संदिग्धों को बुला कर उन से पूछताछ का काम शुरू किया. इस काम में 2 महीने का वक्त गुजर गया. इस से पहले कि वह जांच को आगे बढ़ाते अपराध शाखा से उन का तबादला हो गया.

इस के बाद जांच का काम एसआई रजनीकांत को सौंपा गया. रजनीकांत को लगा कि कमल सिंगला जैसे एक अमीर इंसान की एक निम्नमध्यमवर्गीय परिवार से ऐसी घनिष्ठता के पीछे कोई वजह तो जरूर होगी. उन्हें रवि के पिता जयभगवान के आरोपों में कुछ सच्चाई दिखी. अभी तक की पूछताछ में हर अधिकारी के सामने इस मामले के 3 मुख्य संदिग्ध कमल सिंगला, शकुंतला, उस का भाई राजू एक ही कहानी सुना रहे थे. अगर वे झूठ बोल रहे थे तो सच्चाई बाहर लाने का अब एक ही रास्ता बचा था कि उन का लाई डिटेक्टर टेस्ट करा लिया जाए.  वैसे भी रजनीकांत को लगा कि इस मामले में शकुंतला और कमल की मिलीभगत की आशंका ज्यादा हो सकती है. इसलिए तीनों संदिग्धों से लंबी पूछताछ के बाद रजनीकांत ने अदालत से आदेश ले कर 2 मार्च, 2012 को शकुंतला, उस के भाई राजू और कमल का पौलीग्राफ टेस्ट कराया.

लेकिन पौलीग्राफ परीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद जांच अधिकारी रजनीकांत की उम्मीदों पर पानी फिर गया, क्योंकि तीनों ही संदिग्ध परीक्षण में खरे उतरे थे. लेकिन न जाने क्यों रजनीकांत इन नतीजों से संतुष्ट नहीं थे. पर उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और दूसरे पहलुओं को टटोलते हुए जांच को आगे बढ़ाते रहे. रवि के परिवार की तरफ से शकुंतला और उस के परिवार पर आरोप लगाए जाने के बाद उन्होंने जयभगवान के घर आना भी बंद कर दिया. संयोग से जांच अधिकारी रजनीकांत का भी तबादला हो गया तो उस के बाद एसआई सूरजभान आए. कुछ महीनों के बाद उन का भी तबादला हो गया तो एसआई धीरज के हाथ में जांच आई,

कुछ महीनों तक जांच उन के हाथ में रही फिर उन के तबादले के बाद एसआई पलविंदर को जांच का काम सौंपा गया. फिर 2017 के शुरू होते ही उन का भी तबादला हो गया. इस के बाद जांच की जिम्मेदारी मिली एसआई जोगेंद्र सिंह को.  इस दौरान मार्च, 2017 में इस केस की स्टेटस रिपोर्ट देख कर हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि तीनों संदिग्धों की ब्रेनमैपिंग (नारको टेस्ट) कराया जाए. टीम ने अलवर में डाला डेरा एसआई जोगेंद्र ऐसे ही किसी मौके का इंतजार कर रहे थे. उन्होंने तीनों के इस टेस्ट  की प्रक्रिया शुरू कर दी. अदालत में तीनों आरोपियों को पेश कर जोगेंद्र सिंह ने ब्रेनमैपिंग के लिए उन की हामी भी हासिल कर ली.

जिस के बाद तीनों का 2 नवंबर, 2017 से 6 नवंबर, 2017 के बीच गुजरात के गांधी नगर में ब्रेनमैपिंग टेस्ट कराया. वहां जा कर कमल और राजू ने तो टेस्ट करा लिया, मगर शकुंतला ने तबीयत बिगड़ने की बात कह कर ब्रेन मैपिंग कराने से इनकार कर दिया. लेकिन बे्रनमैंपिग के जो परिणाम पुलिस के सामने आए, उस ने जोगेंद्र सिंह को सोचने पर मजबूर कर दिया. हालांकि राजू ब्रेनमैपिंग टेस्ट में सत्य पाया गया. लेकिन ऐसे कई सवाल थे, जिन के कारण कमल सिंगला पर अब इस मामले में शामिल होने का शक शुरू हो गया था. एसआई जोगेंद्र सिंह समझ गए कि इस जांच को आगे ले जाने के लिए उन्हें अलवर में डेरा डालना पड़ेगा.

वे आगे की काररवाई कर ही रहे थे कि मार्च 2018 में अचानक उन का भी तबादला हो गया. जोगेंद्र सिंह की जांच से कम से कम अनुसंधान का काम एक कदम आगे तो बढ़ गया था और जांच के लिए एक टारगेट भी तय हो गया था. इसी बीच जांच के नए अधिकारी के रूप में एसआई करमवीर मलिक को रवि के अपहरण केस की फाइल सौंपी गई. उन्होंने जांच का काम हाथ में लेते ही पहले पूरी फाइल का अध्ययन किया. केस की बारीकियों को गौर से समझने के बाद उन्होंने अपने 2 सब से खास एएसआई जयवीर और नरेश के साथ कांस्टेबल हरेंद्र की टीम बनाई. इस के बाद टीम को उन तीनों संदिग्धों को लाने के लिए अलवर रवाना किया, जिन का नाम बारबार इस केस में सामने आ रहा था.

जयवीर और नरेश जब अलवर के टपूकड़ा गए तो वहां संयोग से उन्हें राजू मिल गया. राजू ने पूछताछ में जो कुछ बताया, उस के बाद एक अलग ही कहानी सामने आई. पता चला कि ब्रेन मैपिंग टेस्ट होने के बाद जब शकुंतला और कमल गुजरात से वापस लौटे तो कुछ रोज बाद ही अचानक शकुंतला घर से भाग गई. पिछले कुछ समय से कमल जिस तरह शकुंतला के करीब आ रहा था और शकुंतला भी ज्यादा वक्त उस के ही साथ बिताने लगी थी, उसे देख कर घर वालों को लगा कि शकुंतला के भागने में कमल का हाथ है.  इसीलिए उन्होंने कमल से शकुंतला के बारे में पूछा. लेकिन वह साफ मुकर गया कि उसे शकुंतला के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

लिहाजा परिवार वालों ने कमल सिंगला के खिलाफ शकुंतला के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. लेकिन कमल पुलिस के हाथ आने से पहले ही फरार हो गया. अलवर पुलिस कमल को तलाश कर ही रही थी कि इसी बीच कमल के एक ड्राइवर बबली ने राजस्थान हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र दिया कि उस ने शकुंतला से शादी कर ली है और पुलिस बिना वजह उस के मालिक को परेशान कर रही है. जांच में आया नया मोड़ बबली ने साथ में आर्यसमाज मंदिर में हुई शकुंतला से अपनी शादी का प्रमाण पत्र भी दिया था. उसी के साथ में शकुंतला की तरफ से भी एक शपथ पत्र संलग्न था, जिस में उस ने बबली से शादी करने की पुष्टि की थी.

हाईकोर्ट ने अलवर पुलिस को कमल के खिलाफ दर्ज अपहरण के मामले को खत्म करने का आदेश दे दिया. जिस के बाद उस के खिलाफ एफआईआर रद्द हो गई. शकुंतला के भाई राजू ने जो कुछ बताया था, उसे जानने के बाद एएसआई जयवीर की मामले में दिलचस्पी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई. कमल से मिलने की उन की बेताबी बढ़ गई. लेकिन इस से पहले बबली से मिलना जरूरी था. क्योंकि उस ने शकुंतला से शादी की थी, जिस कारण अब संदेह के  दायरे में सब से पहले वही आ रहा था. पुलिस टीम ने टपूकड़ा थाने जा कर जब कमल के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर के बारे में जानकारी हासिल की तो उस केस की फाइल में बबली नाम के उस के ड्राइवर के घर का पता मिल गया. एएसआई जयवीर ने बबली के घर का पता हासिल किया और उस के गांव बाघोर पहुंच गए.

बबली के घर उस के मातापिता के अलावा पत्नी और 3 बच्चे भी मिले. बबली की पत्नी से मिलने के बाद तो एएसआई जयवीर का सिर ही चकरा गया. क्योंकि उस की पत्नी शकुंतला नहीं बल्कि कोई अन्य महिला थी और वह भी 3 बच्चों की मां. कहानी में अब दिलचस्प मोड़ आ गया था. पुलिस टीम ने जब परिजनों से बबली के बारे में पूछा तो पता चला कि लूटपाट के एक मामले में बबली कोटा जेल में बंद है. अब तो बबली से मिलना क्राइम ब्रांच के लिए बेहद जरूरी हो गया था. जयवीर और नरेश ने परिजनों से बबली के बारे में तमाम जानकारी ले कर कोटा की अदालत में उस से जेल में मुलाकात कर के पूछताछ करने की अनुमति मांगी.

पुलिस टीम को पूछताछ की इजाजत मिल गई और जयवीर सिंह अपनी टीम के साथ कोटा जेल में जब बबली से मिले तो रवि के अपहरण केस की तसवीर पूरी तरह साफ हो गई. बबली ने बताया कि वह तो पहले से ही शादीशुदा है. उस के 3 बच्चे भी हैं. वह डेढ़ साल से कमल सिंगला के पास ड्राइवर की नौकरी कर रहा है. कुछ महीने पहले अचानक जब शकुंतला के घर से भागने के बाद उस के घर वालों ने कमल के खिलाफ शकुंतला के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई तो कमल ने बबली को कुछ रुपए दे कर दबाव डाला कि वह हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र दाखिल कर दे कि उस ने शकुंतला से शादी कर ली है. बबली ने खुलासा किया कि वकील कराने से ले कर शकुंतला का शपथ पत्र और शकुंतला से उस की शादी का आर्यसमाज मंदिर का प्रमाण पत्र कमल ने ही उसे उपलब्ध कराया था.

चूंकि वह नौकरी और पैसे के लालच में मजबूर था, इसलिए उस ने कमल के कहने पर ये काम कर दिया था. इसी के कारण कमल के खिलाफ दर्ज शकुंतला के अपहरण का मामला खत्म हो गया था. पुलिस जिस कमल को मासूम मान रही थी, उस का शातिर चेहरा सामने आ चुका था. पुलिस को यकीन हो गया कि रवि के अपहरण और उस की हत्या में भी कमल का ही हाथ होगा. एएसआई जयवीर की टीम बारबार अलवर में कमल सिंगला और शकुंतला की तलाश करने के लिए जाती. लेकिन उन दोनों का कोई सुराग नहीं मिल रहा था.

क्राइम ब्रांच की इस टीम में एक कांस्टेबल हरेंद्र संयोग से राजस्थान का ही रहने वाला था. उस की मदद से पुलिस टीम को स्थानीय स्तर पर ऐसे लोगों की मदद मिलने लगी, जिस से कमल व शकुंतला के बारे में छनछन कर जानकारियां सामने आने लगी थीं. लेकिन इस पूरी कवायद में कई महीने गुजर गए. इसी बीच एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के एसीपी सुरेंद्र गुलिया ने रवि के अपहरण की जांच करने वाले इंसपेक्टर अमलेश्वर राय और एसआई करमवीर सिंह, एएसआई जयवीर सिंह, नरेश कुमार तथा कास्टेबल हरेंद्र से जांच में तेजी लाने के लिए कहा. तब तक पुलिस टीम को कमल सिंगला के मोबाइल का नंबर हासिल हो चुका था.

कमल के फोन नंबर की मौनिटरिंग शुरू हो गई और उस की काल डिटेल्स खंगालने का काम शुरू कर दिया गया. रवि के अपहरण में कमल की भूमिका होने की पुष्टि हो चुकी थी, इसलिए पुलिस ने उस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट हासिल कर लिया. लेकिन जब वह कहीं नहीं मिला तो उसे भगोड़ा घोषित कर के उस के ऊपर 50 हजार का ईनाम दिल्ली पुलिस ने घोषित कर दिया. इस दौरान पुलिस ने उस के घर की कुर्की के वारंट भी जारी करवा लिए. पुलिस की एक टीम ने स्थाई रूप से अलवर में ही डेरा डाल दिया. मोबाइल की लोकेशन और उस से बात करने वाले हर शख्स की जानकारी अलवर में बैठी पुलिस टीम को मिल रही थी. लेकिन इसे संयोग कहें या कमल की किस्मत कि पुलिस टीम के पहुंचने से पहले ही वह मौजूद जगह से निकल जाता था.

लेकिन पुलिस जब किसी को पकड़ने की ठान लेती है तो देर से ही सही, चालाक अपराधी भी पुलिस के चंगुल में फंस ही जाता है. आखिरकार 27 सितंबर, 2019 को कमल सिंगला (27) को अलवर की शालीमार कालोनी से गिरफ्तार कर लिया गया. यहां भी उस का एक घर था, जहां छिप कर वह रह रहा था. हालांकि शकुंतला उस के साथ नहीं थी. लेकिन कमल का पकड़ा जाना भी पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि थी. दिल्ली ला कर जब पुलिस टीम ने उस से पूछताछ शुरू की तो वह हमेशा की तरह पुलिस को अपने झूठ के जाल में उलझाने की कोशिश करता रहा.

लेकिन इस बार जांच दल के पास उस के खिलाफ ब्रेनमैपिंग टेस्ट की रिपोर्ट से ले कर बबली से अदालत में शकुंतला की शादी से जुड़ा गलत शपथपत्र दिलाने जैसे कई ठोस सबूत मौजूद थे. जिन का उस के पास कोई उत्तर नहीं था. पुलिस टीम ने थोड़ी सख्ती की तो कमल सिंगला सब कुछ तोते की तरह बताने लगा. पूछताछ में पता चला कि रवि का अपहरण कर उस की हत्या कर दी गई थी और इस काम में उस की मदद उस के ड्राइवर गणेश महतो ने की थी. गणेश को उस ने 2012 में ही नौकरी से हटा दिया था, जिस के बाद वह बिहार चला गया. कमल यह तो नहीं बता सका कि ड्राइवर गणेश किस गांव का है और उस का फोन नंबर क्या है, लेकिन दिल्ली में रहने वाले उस के जीजा अनिल का नंबर पुलिस को कमल से मिल गया.

पुलिस टीम ने उसी दिन अनिल से संपर्क किया और गणेश महतो के बारे में जानकारी हासिल कर ली. अनिल को साथ ले कर पुलिस टीम तत्काल बिहार के समस्तीपुर में करवां थानांतर्गत चकमहेशी गांव पहुंची, जहां से गणेश महतो पुत्र सुरेश महतो (31) को गिरफ्तार कर लिया गया. उस ने शुरुआती पूछताछ में ही अपना गुनाह कुबूल कर लिया. पुलिस टीम गणेश को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले आई. इस के बाद कमल व गणेश से आमनेसामने बैठा कर पूछताछ की गई, फिर उन से हुई पूछताछ का मिलान किया गया. पुलिस टीम दोनों को ले कर टपूकड़ा गई, जहां स्थानीय पुलिस की मदद से कमल के औफिस के सामने एक खाली प्लौट की जेसीबी मशीनों से खुदाई करवाई, जिस में करीब 25 मानव अस्थियां बरामद हुईं, जिन्हें जांच के लिए फोरैंसिक लैब भेज दिया गया.

इश्क में अंधा हुआ कमल ये अस्थियां रवि कुमार की थीं या नहीं, यह पुष्टि करने के लिए पुलिस ने 10 अक्तूबर, 2019 को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में डीएनए जांच के लिए जयभगवान और उन की पत्नी के ब्लड सैंपल लिए.  रवि कुमार के अपहरण व हत्या के मामले की जांच जितनी पेचीदा थी, उस के अपहरण व हत्या की कहानी उस से कहीं ज्यादा चौंकाने वाली है. जिस से पता चलता है कि प्रेम में अंधा एक आशिक किस तरह शातिर अपराधी की तरह न सिर्फ अपने गुनाह को अंजाम देता रहा बल्कि 8 साल तक चली जांच में पुलिस की आंखों में भी धूल झोंकता रहा.

2010 में टपूकड़ा में रहने वाली शकुंतला अचानक कमल सिंगला के संपर्क में आई थी. कमल का ट्रांसपोर्ट और बिल्डिंग मटीरियल सप्लाई का कारोबार था. उस के कुछ ट्रक, टैक्सियां और मैटाडोर भी किराए पर चलते थे. इस के अलावा कमल प्लौट ले कर उन में फ्लैट बना कर बेचने का भी काम करता रहता था. साल 2010 में कमल ने शकुंतला के पड़ोस में एक एक खाली प्लौट ले कर उस में फ्लैट निर्माण का काम कराया तो इसी दौरान बगल के मकान में रहने वाली शकुंतला पर उस की नजर पड़ी. कमल उन दिनों ठीक से बालिग भी नहीं हुआ था, जबकि तीखे नाकनक्श और गदराए बदन वाली शकुंतला जवानी की दहलीज पर पहले ही कदम रख चुकी थी.

यहीं पर दोनों की एकदूसरे से आंखें लड़ीं और कमल ने किसी तरह शकुंतला के घर में आनाजाना शुरू कर दिया. दोनों का इश्क परवान चढ़ने लगा और नाजायज रिश्ते बन गए. जबकि परिवार बेटी की इस करतूत से अंजान था. इसी बीच 8 फरवरी, 2011 को परिवार ने शकुंतला की शादी समालखा के रवि से करा दी. कमल को जब  शकुंतला के रिश्ते की भनक लगी तो उस ने शकुंतला से इस का विरोध किया. उस पर दबाव बनाया कि वह अपने परिवार वालों से इस रिश्ते के लिए मना कर दे. लेकिन लोकलाज और मातापिता के डर से शकुंतला ऐसा न कर सकी. इसी असमंजस में उस के हाथ में किसी और के नाम की मेहंदी लग गई.

लेकिन कमल सिंगला ने तय कर लिया था कि वह शकुंतला को किसी और की होने नहीं देगा. उस के मन में एक साजिश पलने लगी. इसी साजिश के तहत रवि को देखने जाने के लिए जब शकुंतला के परिवार वाले पहली बार गए तो कमल खुद अपनी गाड़ी में परिवार के लोगों को ले कर गया था. शकुंतला की शादी होने तक जितनी बार भी उस का परिवार के रवि के घर गया, हर बार कमल ही उन्हें अपनी गाड़ी से ले कर दिल्ली गया. सुहागरात पर नहीं छूने दिया शरीर जैसेतैसे शादी हो गई. लेकिन ससुराल जाने से पहले ही कमल ने शकुंतला से वादा ले लिया कि वह ससुराल जा तो रही है लेकिन वह किसी भी कीमत पर अपना तन अपने पति को न सौंपे.

शकुंतला तो खुद ये शादी मजबूरी में कर रही थी. इसलिए उस ने भी कमल से वादा कर लिया कि ऐसा ही होगा. लेकिन तुम को मुझे अपनी बनाना है तो जल्द ही कुछ करना होगा.  शादी के बाद उस ने इसी साजिश के तहत बहाने बना कर रवि को अपना शरीर छूने तक नहीं दिया. इस दौरान कमल के दिमाग में रवि को रास्ते से हटाने की साजिश तैयार हो चुकी थी. साजिश के मुताबिक 20 मार्च, 2011 को रवि अपनी ससुराल टपूकड़ा, अलवर पहुंचा तो कमल भी दोस्त की तरह उस से मिला और दोस्त की तरह घुमायाफिराया. अगले दिन सुबह ही रवि शकुंतला को ले कर दिल्ली में अपने घर समालखा चला गया. इस दौरान कमल ने शकुंतला को अपनी साजिश समझा दी.

जिस के तहत 22 मार्च की दोपहर में शकुंतला अपनी सास से जिद कर के रवि को अपनी बहन के घर जाने के लिए साथ ले गई. कमलेश का घर करीब 3 किलोमीटर दूर था. घर से निकल कर जैसे ही रवि शकुंतला को ले कर मेनरोड पर किसी सवारी को बुलाने के लिए आगे बढ़ा तो वहां उस से पहले ही सामने अपनी सफेद सैंट्रो कार का बोनट खोल कर कमल अपने ड्राइवर गणेश के साथ खड़ा मिला. उस ने रवि और शकुंतला को देख कर चौंकने का अभिनय करते हुए कहा कि वह किसी काम से समालखा आया था, लेकिन गाड़ी बंद हो गई जो उसी वक्त ही ठीक हुई थी. कमल ने साजिश के तहत जिद कर के रवि और शकुंतला को गाड़ी में बैठा लिया और बोला कि वह उन्हें कमलेश के घर छोड़ता हुआ निकल जाएगा.

संकोचवश रवि कुछ नहीं बोला. दरअसल, कमल सोचीसमझी साजिश के तहत वहां बोनट खोल कर उन्हीं दोनों के आने का इंतजार कर रहा था. इस के बाद कमल ने गाड़ी में रवि को अपनी बातों के जाल में फंसा कर शकुंतला को कमलेश के घर के पास छोड़ने के लिए मना लिया. कमल ने रवि से कहा कि वह उस के साथ समालखा में एक परिचित के घर चले, जहां से कुछ पैसे लेने हैं. रवि इनकार नहीं कर सका. कमलेश के घर से कुछ दूर शकुंतला को छोड़ कर वे गाड़ी को आगे बढ़ा ले गए. गणेश गाड़ी चला रहा था. कमल व रवि पीछे बैठे थे.

कुछ दूर जाने के बाद प्यास का बहाना कर के कमल ने डिक्की से कोल्डड्रिंक की 2 बोतलें निकलवा कर एक खुद पी, दूसरी रवि को पिलाई. लेकिन कोल्डड्रिंक पीते ही रवि का सिर चकराने लगा था और उस पर बेहोशी छा गई. थोड़ी ही देर में रवि पूरी तरह बेहोश हो गया. कमल ने गाड़ी में बेहोश पडे़ रवि की गला दबा कर हत्या कर दी. उस ने रवि के मोबाइल फोन को बंद कर दिया और रास्ते में फोन की बैटरी, सिमकार्ड व दूसरे हिस्से तोड़ कर फेंक दिए. ड्राइवर गणेश कमल के आदेश पर गाड़ी अलवर ले आया. वहां पहुंच कर कमल ने बिल्डिंग मटीरियल के अपने गोदाम में पड़ी रोड़ी हटाई और रवि के शव को 5 फुट गहरा गड्ढा खोद कर उस में दबा दिया और उस पर फिर से रोड़ी डाल दी. कमल वारदात वाले दिन अपना मोबाइल दिल्ली नहीं ले गया था.

इधर, रवि के घर नहीं पहुंचने पर शकुंतला ने उस के परिवार वालों को वही कहानी सुना दी, जो कमल ने उसे पढ़ाई थी. पुलिस को पूछताछ में न तो शकुंतला ने और न ही उस के किसी ससुराल वालों ने ये बात बताई थी कि शकुंतला के पास मोबाइल फोन भी है. शकुंतला ने पुलिस को बताया कि शादी से पहले उस के पास एक फोन था, लेकिन वह उसे जब दोबारा आई तो अपने भाई को दे आई थी. इसलिए शुरू से ही पुलिस ने इस केस में शकुंतला के मोबाइल फोन की भी काल डिटेल्स निकालने की जरूरत महसूस नहीं की. मृतक रवि के मोबाइल की जो काल डिटेल्स पुलिस ने निकलवाई, उस में भी कोई संदिग्ध नंबर नहीं मिला था. इसलिए भी पुलिस ने मोबाइल डिटेल्स की थ्यौरी पर ज्यादा काम नहीं किया.

लेकिन जब कमल से पूछताछ हुई तो खुलासा हुआ कि साजिश के तौर पर शकुंतला अपना मोबाइल फोन छिपा कर साथ लाई थी, लेकिन उसे साइलेंट कर के उस ने पर्स में छिपा कर रखा था ताकि जरूरत पड़ने पर कमल से बात हो सके. 22 मार्च, 2011 की दोपहर को शकुंतला कमल के ड्राइवर के मोबाइल से आए एक मैसेज के बाद ही वह घर से पति रवि को ले कर निकली थी, जिस में उस ने बताया था कि वह सड़क पर उन का इंतजार कर रहा है. शकुंतला जब तक अपनी ससुराल में रही, उस ने किसी को भी यह पता नहीं चलने दिया कि वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही है. इस दौरान वह न सिर्फ छिपछिप कर कमल से बातें करती रही, बल्कि उसे वहां होने वाली हर गतिविधि की जानकारी दे कर उस से लाश ठिकाने लगा देने की जानकारी भी लेती रही.

क्राइम ब्रांच ने जब जयभगवान के शक के आधार पर कमल सिंगला को नोटिस दे कर पूछताछ के लिए बुलाया तो उसे पकड़े जाने का डर सताने लगा. लिहाजा उस ने पूछताछ के लिए जाने से पहले एक दिन औनेपौने दाम में खाली प्लौट में पड़ी रोड़ी को बेच कर ड्राइवर गणेश के साथ उस के नीचे पड़ी जमीन की खुदाई की. वहां कई फुट की खुदाई के बाद उसे रवि का शव मिल गया. 5 महीने में शव हड्डियों का ढांचा बन चुका था. कमल ने हड्डियों के ढांचे को गड्ढे से निकाल कर प्लास्टिक की बोरी में भरा. अस्थिपंजर बटोरना बेहद मुश्किल था. लेकिन उस ने सावधानी से अस्थियों को बटोर कर हड्डियों से भरी बोरी को अपने एक ट्रक में रखवाया और उस की छत पर खुद बैठ गया.

अलवर से रेवाड़ी के रास्ते में 70 किलोमीटर के रास्ते पर एकएक हड्डी को बोरी से निकाल कर जंगल की तरफ फेंकता चला गया. रवि की हड्डियों को ठिकाने लगाने के बाद कमल ने अपने ड्राइवर गणेश को 70 हजार रुपए दिए और उस से कहा कि अब वह अपने गांव चला जाए और कभी वापस न आए. क्योंकि हो सकता है पुलिस उसे पकड़ ले. डर कर गणेश अपने गांव चला गया. इस दौरान शकुंतला भी अलवर में आ चुकी थी. कुछ दिन तक तो कमल उस से छिपछिप कर ही मिलता रहा. लेकिन बाद में उस ने उस के परिवार से हमदर्दी का दिखावा कर के कहा कि उस का एक ड्राइवर है, जो कुंआरा है. वह शकुंतला की शादी उस के साथ करवा देगा.

कमल ने बेहद शातिराना ढंग से अपने ड्राइवर बबली के साथ शकुंतला की शादी का ढोंग रचा और उस के बाद टपूकड़ा में ही एक दूसरे इलाके में मकान ले कर दे दिया. लेकिन वहां बबली की जगह वह खुद शकुंतला के साथ पति की तरह रहता था. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि कमल और शकुंतला का एक बच्चा भी हो चुका है. हालांकि समाज के सामने कमल शकुंतला को बबली की ही बीवी बताता था. जब कमल का ब्रेन मैपिंग टेस्ट हुआ और उस से शकुंतला के साथ उस के संबंधों को ले कर सवालजवाब हुए तो पुलिस को पहली बार उन के नाजायज संबंधों पर शक हुआ था. इसी टेस्ट की रिपोर्ट के बाद से वह पुलिस की नजर में चढ़ गया था.

ब्रेन मैपिंग टेस्ट के बाद से ही शकुंतला और कमल पकड़े जाने के डर से फरार हो गए, जिस से पुलिस का शक यकीन में बदल गया. वे किसी भी स्थान पर कुछ दिन से ज्यादा नहीं रुकते थे. महीनों से कमल व शकुंतला लगातार अपने फोन नंबर बदल रहे थे.  क्राइम ब्रांच ने कड़ी मशक्कत के बाद कमल के खाली प्लौट की खुदाई करवा कर उस की रीढ़, कूल्हे और कमर के हिस्से की हड्डियां और पसलियों के 25 टुकड़े बरामद कर लिए. जिन का टेस्ट कराया गया तो वे उस के पिता के डीएनए से मैच कर गईं. क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अपहरण की धारा 364 के साथ हत्या की धारा 302, सबूत नष्ट करने की धारा 201 व साजिश रचने की धारा 120बी जोड़ कर कमल व गणेश को जेल भेज दिया.

इधर शंकुतला ने अपनी गिरफ्तारी पर कोर्ट से स्टे ले लिया. लेकिन जब अदालत में रवि के अपहरण व हत्या के मामले में शकुंतला के शामिल होने के साक्ष्य पेश किए तो अदालत ने उस का स्टे खारिज कर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए. शकुंतला को जब इस की भनक लगी तो एक बार फिर उस ने दिल्ली पुलिस के साथ लुकाछिपी का खेल शुरू कर दिया. पुलिस छापे मारती रही, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगी तो दिल्ली पुलिस आयुक्त ने उस की गिरफ्तारी पर भी 50 हजार का ईनाम घोषित कर दिया. ईनाम घोषित होने के बाद क्राइम ब्रांच की कई टीमें महीनों से शकुंतला की गिरफ्तारी के प्रयास में लगी थीं. 17 जुलाई को क्राइम ब्रांच के स्पैशल औपरेशन स्क्वायड-2 में तैनात एएसआई प्रदीप गोदारा को अपने एक मुखबिर से शकुंतला के अलवर में ही एक स्थान पर छिपे होने की जानकारी मिली. प्रदीप गोदारा ने अपने इंसपेक्टर राजीव रंजन को सारी बात बताई.

राजीव रंजन ने जब इस बारे में अपने एसीपी डा. विकास शौकंद को बताया तो उन्होंने राजीव रंजन और प्रदीप गोदारा के साथ एएसआई कुलभूषण, नरेश, कांस्टेबल राजेंद्र आर्य, दिनेश, हिमांशु, विनोद महिला कांस्टेबल ममता को अलवर रवाना कर दिया. संयोग से बताए गए स्थान पर शकुंतला मिल गई और पुलिस उसे गिरफ्तार कर दिल्ली ले आई. अदालत में पेश कर उसे 2 दिन के लिए पुलिस रिमांड में जब पूछताछ की गई तो उस ने भी रवि के अपहरण व हत्याकांड की वही कहानी सुनाई, जो कमल पहले ही बता चुका था. शकुंतला की गिरफ्तारी के बाद 10 साल पहले हुए रवि कुमार हत्याकांड का पटाक्षेप हो गया. Hindi Story

(कथा पुलिस की जांच, रवि के परिजनों से बातचीत और आरोपियों से पूछताछ पर आधारित)

 

उज्बेक डांसर का दुखद अंत

उज्बेक डांसर का दुखद अंत – भाग 3

इस के बाद पुलिस ने गगन को 6 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले कर गहराई से पूछताछ की. पूछताछ में उस ने जो कुछ बताया, उस से इन हत्याओं का जो राज सामने आया, वह कुछ इस तरह से था.

गगन एक बड़ा सैक्स रैकेट चलाता था. उस के नेटवर्क में देसी ही नहीं, विदेशी लड़कियों की भी खूब डिमांड थी. सोनू पंजाबन के लिए काम कर चुके गगन के नेटवर्क में काफी रशियन लड़कियां थीं, जिन्हें वह दिल्ली, एनसीआर के अलावा चंडीगढ़, जयपुर और मुंबई की रेव पार्टियों में भेजता था. इस के लिए वह रूस में सैक्स रैकेट से जुड़े लोगों से संपर्क कर के लड़कियों को टूरिस्ट वीजा पर 3 महीने के लिए भारत बुलाता था.

भारत में रशियन लड़कियों की डिमांड पूरी करने के लिए सैक्स रैकेट से जुड़े लोग सीआईएस (कौमनवैल्थ औफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स) से जुड़े देशों जैसे उज्बेकिस्तान व कजाकिस्तान की गरीब लड़कियों को अच्छी जिंदगी का लालच दे कर टूरिस्ट वीजा पर भारत ला कर देह धंधे के कारोबार से जोड़ देते थे.

गगन और उस की पत्नी माशा के इस धंधे की पार्टनर नाज उज्बेकिस्तान की रहने वाली थी. माशा लोगों को ब्लैकमेल करने में माहिर थी. नाज पहले खुद अपनी देह बेचती थी, उम्र ढलने पर उस की डिमांड कम हुई तो वह दूसरी लड़कियों से धंधा करवा कर उन की कमाई से कमीशन लेने लगी. वह ज्यादातर उज्बेक लड़कियों को ही पटाने की कोशिश करती थी.

शाखनोजा को देखते ही नाज उस पर लट्टू हो गई थी. उसे उस ने देहधंधे में उतारने की कोशिश भी की. इस कोशिश में जब उसे लगा कि वह ऐसीवैसी लड़कियों में नहीं है, तब उस ने उस की रूममेट बन कर उसे अपने जाल में फंसाने की कोशिश की. अमीर एवं प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखने वाली शाखनोजा एक प्रतिभावान कलाकार थी. उस की कला की कदर भी बढ़ रही थी. अपने नृत्य कार्यक्रमों से उसे अच्छा पैसा मिलने लगा था.

नाज के माध्यम से ही वह माशा और उस के पति गगन के संपर्क में आई. उसे इन की असलियत मालूम नहीं थी. अलबत्ता ये सभी उस से उम्र में बड़े थे, इस वजह से वह इन लोगों की बहुत इज्जत करती थी. शाखनोजा स्वभाव से थोड़ा भोली थी, जिस का फायदा उठाते हुए ये लोग उस से पैसे उधार मांगने लगे, जो बढ़तेबढ़ते 8 लाख रुपए तक पहुंच गए.

एक दिन शाखनोजा ने इन से अपने पैसे वापस मांगे तो नाराज हो कर इन लोगों ने उसे धमकाने के लिए 24 सितंबर, 2015 की रात धोखे से साउथ एक्सटेंशन में एक जगह बुला लिया. वहां थोड़ाबहुत हडक़ा कर इन लोगों ने उसे अपनी गाड़ी में जबरदस्ती बैठा लिया और चले गए.

कार गगन चला रहा था. माशा उस की बगल वाली सीट पर बैठी थी. पिछली सीट पर नाज लगातार शाखनोजा की पिटाई करते हुए उस का गला दबा कर उसे डरा रही थी. उसी बीच उबडख़ाबड़ जगह पर कार थोड़ा उछली तो नाज के हाथों का दबाव बढ़ गया, जिस की वजह से शाखनोजा की मौत हो गई.

ये लोग शाखनोजा को मारना नहीं चाहते थे, लेकिन जब वह मर गई तो उस की लाश को दिल्ली में फेंकना खतरे से खाली नहीं था. उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए इन्होंने एक सूटकेस का इंतजाम किया और उस में लाश को रख कर रात ही में पानीपत के कस्बा समालखा में एक जगह उस सूटकेस और लाश पर पैट्रोल छिडक़ कर आग लगा दी. इस तरह इन लोगों ने शाखनोजा से छुटकारा पा लिया.

इस घटना से गगन और माशा जरा भी नहीं घबराए, लेकिन नाज के दिलोदिमाग पर इस का गहरा असर पड़ा. उसे पकड़े जाने का भय सताने लगा. हालांकि कुछ दिनों बाद एक बार पुलिस उस से पूछताछ भी कर चुकी थी. तब गगन उस के लिए ढाल बन गया था. इस के बाद गगन को लगा कि यह डरपोक औरत खुद तो फंसेगी ही, अपने साथ उन्हें भी फंसाएगी. रहीसही कसर शाखनोजा के उस पत्र ने पूरी कर दी, जिस में उस ने अपनी जिंदगी से जुड़ी तमाम घटनाओं का जिक्र करते हुए एंबेसी को लिखा था. यह पत्र पुलिस को बाद में शाखनोजा के सामान से मिला था.

खैर, नाज को अपने लिए खतरा बनते देख गगन ने 5 अक्टूबर, 2015 को उसे भी गला घोंट कर मार दिया और उस की लाश को उत्तर प्रदेश के हापुड़ ले जा कर एक सुनसान जगह में पैट्रोल डाल कर जला दिया. पूछताछ के बाद गगन को उन दोनों जगहों पर ले जाया गया, जहां उस ने लाशें जलाई थीं. वहां के थानों में अधजली लाशें मिलने के मामले दर्ज थे. बरामदगी के नाम पर स्थानीय पुलिस को इन महिलाओं की अस्थियां ही मिल पाई थीं.

शाखनोजा की पहचान के लिए पुलिस ने उस की हड्डी एवं उस की मां शोखिस्ता का डीएनए टैस्ट करवाया है. मामले का खुलासा होने पर माशा भूमिगत हो गई थी. उस से पूछताछ के लिए पुलिस उस की तलाश कर रही थी. गगन से शाखनोजा की कुछ आपत्तिजनक तसवीरें मिली हैं. ये तसवीरें उस ने उसे ब्लैकमेल करने के लिए 16 अगस्त को तब खींची थीं, जब एक नृत्य आयोजन के बाद उसे बेहोशी की दवा मिला कोला पिलाया गया था. यह षडयंत्र गगन का रचा था.

बहरहाल, जमिरा का कहना है कि उस की बहन को बैले डांसर कह कर उस की प्रतिभा का अपमान न किया जाए. वह एक अच्छी नर्तकी थी, जो अपनी कला को निखारने के लिए इंडिया आई थी. लेकिन यहां आ कर उसे बदनामी और निर्मम मौत मिली.

उज्बेक डांसर का दुखद अंत – भाग 2

पुलिस ने इन लोगों के अलावा अन्य कई लोगों को भी संदेह के दायरे में रख कर पूछताछ की थी. लेकिन शाखनोजा के बारे में कहीं से कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी. शाखनोजा की मां व दोनों बहनों ने तब तक दिल्ली में ही रुके रहने का फैसला कर लिया, जब तक उस का पता न चल जाए. इस के लिए उन्होंने एक फ्लैट किराए पर ले लिया. इंसाफ की चाहत लिए एक दिन वे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मिलीं. दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से तो वे रोजाना ही मिल रही थीं. इन लोगों द्वारा शाखनोजा के बारे में टुकड़ों में बताई गई बातों से उस का परिचय कुछ इस तरह से सामने आया.

घर में छोटी होने की वजह से शाखनोजा सब की लाडली थी. उस ने ताशकंद में रह कर स्कूली शिक्षा हासिल की थी, जहां अच्छे एकैडमिक ग्रेड हासिल करने के साथ वह डांस प्रतियोगिताओं में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी.

दरअसल, शाखनोजा का जन्म ऐसे कलाकारों के परिवार में हुआ था, जहां सभी को गीतसंगीत का शौक था. उस के पिता जानेमाने संगीतकार थे, लेकिन अज्ञात बीमारी के चलते वह तब दुनिया को अलविदा कह गए थे, जब शाखनोजा केवल 2 साल की थी. लेकिन शोखिस्ता ने अपनी इस बेटी को कभी भी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी थी.

शाखनोजा छुटपन से ही डांस विधा की ओर अग्रसर होने लगी थी. उस का शौक देखते हुए उस का दाखिला एक अच्छे डांस स्कूल में करवा दिया गया था, जहां उस ने बैले डांस से ले कर भारतीय फिल्मों के गीतों तक पर डांस करना सीखा. देखतेदेखते उस ने इंडियन फिल्मी गीतों पर डांस करने में महारत हासिल कर ली.

माधुरी दीक्षित अभिनीत ‘देवदास’ के गीत ‘मार डाला…’ पर तो वह इतना बढिय़ा डांस किया करती थी कि देखने वाले को एक बार विश्वास ही नहीं होता था कि डांस करने वाली लडक़ी भारतीय न हो कर विदेशी होगी. शायद इन नृत्यों की वजह से ही उसे भारत और यहां के कल्चर से प्यार हो गया था.

शाखनोजा सब से पहले एक एंबेसी इवेंट में भाग लेने के लिए सन 2008 में भारत आई थी. उन दिनों वह उज्बेकिस्तान में कोरियोग्राफी का एक विशेष क्रैश कोर्स कर रही थी. इस कोर्स को बीच में ही छोड़ कर वह इंडिया आ गई थी, जहां की संस्कृति ने उसे इस कदर मोह लिया था कि उस का मन यहीं बसने को बेचैन हो उठा था.

इस के बाद वह टूरिस्ट वीजा पर अकसर इंडिया आने लगी थी. इस से उसे दिल्ली की काफी जानकारी हो गई थी. वह जब भी भारत आती थी तो वह पहाडग़ंज के होटलों में या फिर किशनगढ़ के अपार्टमेंट्स में रुकती थी. किशनगढ़ में उस की मुलाकात नाज से हुई थी. बाद में दोनों रूममेट बन कर रहने लगी थीं.

नाज का पूरा नाम था एटाजहानोवा कुपालबायवेना. वह भी उज्बेकिस्तान की रहने वाली थी. नाज के माध्यम से शाखनोजा की दिल्ली में रहने वाले तमाम उज्बेकियों से जानपहचान हो गई थी. वह उन लोगों के पारिवारिक समारोहों में खूब बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने लगी थी. इसी सिलसिले में उस की मुलाकात एक अन्य उज्बेक युवती माशा व उस के भारतीय पति गगन से हुई थी.

शाखनोजा करीब रोजाना ही अपनी मां को फोन कर के एकएक बात के बारे में बताया करती थी. शोखिस्ता उस से मिलने एकदो बार दिल्ली भी आई थीं और बेटी के इधर के कई दोस्तों से मिली थीं. उन्होंने महसूस किया था कि यहां उन की बेटी ने अपनी अच्छी जगह बना ली है. उस की प्रशंसा करने वालों की कमी नहीं है.

शाखनोजा ने तब मां को बताया था कि यहां के सांस्कृतिक समारोहों के सहारे वह जल्दी ही भारतीय फिल्मों में भी काम हासिल कर लेगी. शोखिस्ता बेटी की सफलताओं से खुश हो कर उस के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हुई खुशीखुशी उज्बेकिस्तान लौटी थीं.

कुछ समय बाद एक दिन शाखनोजा ने फोन कर के उन्हें बताया कि उस के डांस प्रोग्राम इस कदर पसंद किए जाने लगे हैं कि वह मांग को पूरा करने में खुद को असमर्थ महसूस कर रही है. कभीकभी मोटे पैसों का लालच दिए जाने के बावजूद उसे कार्यक्रम छोडऩे पड़ते हैं. ऐसे ही एक बार शोखिस्ता को बेटी की ओर से इंडिया में बौयफ्रैंड बनाने और उस से गर्भ ठहरने का समाचार मिला. इस से शोखिस्ता को लगा कि शाखनोजा अब वहीं अपना घर बसा कर भारत में रह जाएगी. वैसे उन्हें इस बात का पहले से ही अहसास था कि शाखनोजा की जान इंडिया में अटकी रहती है.

फोन पर ऐसी ही बातों के बीच एक दिन शाखनोजा ने मां को कुछ ऐसा बताया, जिसे सुन कर वह परेशान हो गईं. शाखनोजा ने उन्हें बताया कि 16 अगस्त, 2015 को हुई एक पार्टी में वह इतना नाची कि थक कर चूर हो गई. डांस खत्म होने पर जब वह वहां बिछे एक काउच पर बैठी तो किसी ने उसे पीने को कोक का गिलास दिया, जिसे वह एक ही सांस में पी गई.

उसे पीने के बाद उस पर बेहोशी छाने लगी. उस के बाद जब वह चेतना में लौटी तो उस ने खुद को एक दूसरी जगह पर पाया. उस के शरीर पर कपड़े भी पहले वाले नहीं थे. वहां 2 लड़कियां थीं, जिन्होंने उसे बताया कि तंग कपड़ों की वजह से उस की तबीयत खराब हो गई थी. इसीलिए उसे यहां ला कर उस के उन कपड़ों को उतार कर ये ढीले कपड़े पहनाए गए हैं.

इस घटना के बाद से शाखनोजा थोड़ा परेशान रहने लगी थी. उस की बातें सुन कर शोखिस्ता भी बेचैन हो जाती थीं. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि इस मामले में वह बेटी से क्या कहें? कुछ कहने से वह और ज्यादा चिंता में पड़ सकती थी. इसलिए उन्होंने शाखनोजा से इतना ही कहा कि आगे से कहीं इतना न नाचे कि तबीयत खराब हो जाए.

उन्होंने बेटी को भले ही चेता दिया था, लेकिन उन्हें उस की चिंता सताती रहती थी कि अकेली रहते हुए वह कहीं किसी षडयंत्र का शिकार न हो जाए. इस के बाद शोखिस्ता इंडिया जा कर मामले की तह में पहुंचने का विचार करने लगी थीं.

इस घटना को घटे अभी सवा महीना ही बीता था कि 24 सितंबर की रात उन्हें बेटी के अपहरण की सूचना ने झकझोर कर रख दिया. वह तुरंत अपनी दूसरी बेटियों के साथ दिल्ली पहुंचीं और बेटी की तलाश में जुट गईं. पुलिस पर वह लगातार दबाव डालती रहीं कि इस मामले को वह हलके में न ले कर उन लोगों से सख्ती से पूछताछ करे, जिन पर उसे शक है.

शोखिस्ता का कहना था कि इस मामले को पुलिस हल्के में ले कर संदिग्ध लोगों से गंभीरता से पूछताछ नहीं कर रही है. आखिर पुलिस ने अपना रवैया बदला और संदिग्ध लोगों को फिर से थाने बुला कर सख्ती से पूछताछ शुरू की. दूसरे लोगों के अलावा जब गगन से भी सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उस ने शाखनोजा को ही नहीं, नाज को भी मौत के घाट उतार कर उस की भी लाश जला दी है. यह सुन कर पुलिस दंग रह गई.

उज्बेक डांसर का दुखद अंत – भाग 1

25 सितंबर, 2015 की सुबह की बात है. समालखा, पानीपत की पुलिस को सूचना मिली कि जीटी रोड स्थित गांव करहंस में पूर्व मंत्री करतार सिंह भड़ाना की कोठी के पास वाले खेतों में जला हुआ एक बड़ा सूटकेस पड़ा है. मामला कुछ गंभीर लग रहा था, इसलिए डीएसपी गोरखपाल राणा पुलिस टीम के साथ मौके पर जा पहुंचे.

जला हुआ सूटकेस आजाद सिंह के खेतों में पड़ा था. पुलिस ने देखा तो उस में से एक विदेशी युवती की अधजली लाश बरामद हुई. इस का मतलब था कि उसे किसी दूसरी जगह कत्ल कर के वहां ला कर जलाया गया था. जले हुए सूटकेस और शव को अपने कब्जे में ले कर समालखा पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201/23 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. यह मुकदमा खेत मालिक आजाद सिंह की तहरीर पर दर्ज हुआ.

इस तरह के केसों में तफ्तीश का सब से पहला चरण होता है शव की पहचान. लेकिन समालखा पुलिस के तमाम प्रयासों के बाद भी मृतका के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी. आखिरकार समालखा पुलिस चुप हो कर बैठ गई. दूसरी ओर उज्बेकिस्तान में 24 सितंबर, 2015 को ही इस घटना का सूत्रपात हो चुका था यानी लाश मिलने से काफी पहले.

24 सितंबर की रात करीब 10 बजे 60 वर्षीया शोखिस्ता डिनर से अभी फारिग हुई थीं कि उन के फोन की घंटी बज उठी. काल इंडिया से थी. फोन करने वाले ने उन से कहा, “मैं शाखनोजा का दोस्त बोल रहा हूं. मैं ने आप को यह बताने के लिए फोन किया है कि आप की बेटी गंभीर हादसे का शिकार हो गई है.”

“गंभीर हादसा, वह भी शाखनोजा के साथ? कैसा हादसा?” शोखिस्ता ने घबरा कर पूछा.

“शाखनोजा का सरेशाम अपहरण कर लिया गया है.” फोन करने वाले ने बताया.

यह खबर सुन कर शोखिस्ता के लिए अपने पैरों पर खड़े रह पाना मुश्किल हो गया था. वह धम्म से वहीं जमीन पर बैठ गईं. काल अभी भी डिसकनेक्ट नहीं हुई थी. किसी तरह उन्होंने पूछा, “कब हुई किडनैपिंग?”

“अभी 2 मिनट पहले. मैं वहीं घटनास्थल के पास हूं. किडनैपिंग देखते ही मैं ने तुरंत आप का नंबर मिलाया है.”

“पुलिस को इनफौर्म नहीं किया?”

“अभी कर रहा हूं.” कहने के साथ ही दूसरी ओर से फोन कट गया.

शोखिस्ता के 5 बच्चों में शाखनोजा सब से छोटी थी. वह जब 2 बरस की थी, तभी उस के सिर से पिता का साया उठ चुका था.शोखिस्ता ने ही उसे मांबाप दोनों का प्यार दे कर पाला था. शोखिस्ता खुद एक कलाकार थीं. अपने बच्चों को भी वह कला के क्षेत्र में लाने के लिए प्रयासरत रहीं. उन्हें सब से ज्यादा प्रतिभा शाखनोजा में दिखाई देती थी.

भारतीय गीतों पर वह बहुत अच्छा नृत्य करने लगी थी. शायद यही वजह थी कि वह अपनी कला का प्रदर्शन भारत में करने को लालायित रहती थी. भारत जैसे उस के सपनों का देश था. आखिर वह अपने सपनों के देश में जा ही पहुंची थी, जहां से अब उस के अपहृत हो जाने की खबर आई थी.

शोखिस्ता ने इस बारे में अपने कुछ रिश्तेदारों व परिचितों को बताया तो उन्होंने उन से उज्बेक एंबेसी से संपर्क करने को कहा. अगली सुबह ऐसा ही किया गया. एंबेसी अधिकारियों ने आगामी काररवाई के लिए शोखिस्ता की शिकायत दर्ज कर ली. शायद इसी का असर था कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दिलचस्पी दिखाते हुए थाना कोटला मुबारकपुर में डीडीआर दर्ज कर के 26 सितंबर को एक टैक्सी ड्राइवर प्रीतम सिंह को पूछताछ के लिए थाने में तलब कर लिया.

प्रीतम सिंह अपनी टैक्सी से शाखनोजा को दिल्ली घुमाया करता था. उस ने पुलिस को बताया कि 24 सितंबर की सुबह शाखनोजा के बुलाने पर वह पहाडग़ंज स्थित उस के होटल गया था. उस रोज शाखनोजा दिन भर उस के साथ रही थी और दिल्ली में कई जगहों पर गई थी.

प्रीतम सिंह ने आगे बताया, “रात 10 बजे शाखनोजा मुझे साउथ एक्सटेंशन ले गई. एक जगह गाड़ी रुकवा कर उस ने मुझे इंतजार करने को कहा और वह सामने वाली दिशा में चली गई. वहां नीले रंग की इंडिका कार खड़ी थी, जिस के पास गुरविंदर उर्फ गगन अपनी पत्नी माशा व एक अन्य औरत नाज के साथ खड़ा था. ये तीनों शाखनोजा को पहले से जानते थे. मैं भी उन्हें जानता था. उन लोगों के अंदाज से लग रहा था कि उन्होंने शाखनोजा को बुला रखा था और वे वहां खड़े उसी का इंतजार कर रहे थे.”

प्रीतम ने आगे अपना स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “शाखनोजा के वहां पहुंचते ही वे लोग पहले तो उस से बहस करने लगे. फिर उसे जबरन गाड़ी में धकेलते हुए वहां से गाड़ी भगा ले गए.”

“चूंकि शाखनोजा ने किसी खतरे की बात मुझ से नहीं बताई थी. वैसे भी वे लोग पहले से एकदूसरे के परिचित थे. इस से मुझे लगा कि शायद वे आपस में हंसीठिठोली कर रहे होंगे. इसलिए मैं ने इस बारे में पुलिस को फोन कर के बताना जरूरी नहीं समझा. लेकिन अब मुझे अपनी गलती का अहसास हो रहा है. उन लोगों ने वाकई शाखनोजा का अपहरण कर लिया था.”

भारत में पुलिस अपने ढंग से काम कर रही थी. उधर उज्बेकिस्तान में शोखिस्ता का दिल उसी दिन से बैठा जा रहा था, जिस दिन उन्हें शाखनोजा के अपहरण की खबर मिली थी. उन की एक बेटी जमिरा पूर्व फ्लाइट अटेंडेंट थी और इन दिनों ताशकंद में रह रही थी. भारत में बहन का अपहरण हो जाने की बात सुन कर वह मां के पास उज्बेकिस्तान चली आई थी. जमिरा के आते ही शोखिस्ता ने उस से दो टूक कहा, “जैसे भी हो, मुझे इंडिया ले चलो. शाखनोजा को ले कर मेरे मन में बहुत बुरे खयाल आ रहे हैं.”

फिर उन्होंने अपने कुछ राज साझा करते हुए जमिरा से कहा, “शाखनोजा ने इंडिया में अपना एक बौयफ्रैंड बना लिया था, जिस से उसे गर्भ ठहर गया था. मेरे हिसाब से उसे अब तक 6 सप्ताह की गर्भवती होना चाहिए.”

जमिरा अपनी मां की फिक्र को समझ रही थी. उस ने प्रयास कर के वीजा वगैरह लगवाया और मां को ले कर 5 अक्टूबर को दिल्ली पहुंच गई. शोखिस्ता की सब से बड़ी बेटी नोदिरा अमेरिका में अपने पति व जवान बेटे के साथ रहती थी. वह अकेली वहीं से उड़ान भर कर मां के पास सीधे दिल्ली आ पहुंची.

दिल्ली में इन लोगों ने उज्बेक एंबेसी के अफसरों से ले कर पुलिस कमिश्नर भीमसेन बस्सी तक से मुलाकात कर के शाखनोजा का पता लगाने की गुहार लगाई. शाखनोजा का अपहरण अभी तक रहस्य ही बना हुआ था. पुलिस का कहना था कि टैक्सी ड्राइवर प्रीतम के बयान के आधार पर गगन, माशा व नाज को भी थाने बुलवा कर उन से पूछताछ की गई थी. मगर इस पूछताछ में कुछ निकल नहीं पाया था.

अपने बयानों में इन्होंने यही बताया था कि उस रात शाखनोजा मस्ती के मूड में अपनी खुशी से उन के साथ गई थी. फिर एक जगह गाड़ी से उतर कर एक अन्य नौजवान के साथ उस की बड़ी सी गाड़ी में बैठ कर चली गई थी. इस के बाद वह उन से नहीं मिली थी.

उन का आरोप था कि प्रीतम नाहक बढ़ाचढ़ा कर बयान दे रहा था. अगर उस ने हम लोगों को शाखनोजा को अपने साथ जबरन ले जाते देखा था तो उस ने शोर क्यों नहीं मचाया? इस मामले को उस ने इतनी सहजता से क्यों लिया? 100 नंबर पर फोन कर के पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया? आखिर वह कोई अनपढ़ गंवार न हो कर दिल्ली जैसे महानगर का टैक्सी ड्राइवर था.

इन लोगों का कहना था कि किन्हीं कारणों से प्रीतम से उन की नहीं बनती. इसी वजह से वह उन्हें परेशान करने के लिए ऐसी बातें कर रहा है, वरना शाखनोजा के गायब होने से तो हम खुद परेशान हैं. वह हर महफिल में रौनक जमाने वाली हमारी खास साथी थी.