Bihar Crime Story: कभी बिहार के सीवान में आतंक की बदौलत अपनी सरकार चलाने वाले शहाबुद्दीन के लिए कहा जाता है कि अपराध उन के लिए धंधा नहीं, मनोरंजन था. शायद इसीलिए वहां के लोग उन का नाम लेने से डरते थे. अगर कभी जरूरत पड़ती थी तो लोग उन्हें साहब कहते थे. आज वही साहब अपने किए की सजा जेल में भुगत रहे हैं.

11 दिसंबर, 2015 को सीवान की जिला जेल की विशेष अदालत के बाहर सुबह से ही काफी गहमागहमी थी. जेल परिसर से 300 मीटर की दूरी तक पुलिस फैली हुई थी. शहर में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. इस की वजह यह थी कि उस दिन 11 साल पहले सीवान में दिल दहला देने वाले तेजाब कांड का फैसला आने वाला था. इस दोहरे हत्याकांड में सीवान के बाहुबली शहाबुद्दीन प्रमुख अभियुक्त थे.

पीडि़त चंद्रकेशर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू, उन की पत्नी कलावती, अभियुक्तों के घर वाले, तमाम पत्रकार और फोटोग्राफर जेल के बाहर बेचैनी से टहल रहे थे. इस हत्याकांड में सीवान के बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन उर्फ शहाबु उर्फ साहब के अलावा 10 अन्य लोग शामिल थे, जिन में से 7 अभियुक्तों के फैसले सुरक्षित रखे गए थे. साढ़े 11 बजे विशेष अदालत के चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव जेल पहुंचे. विशेष लोक अभियोजक जयप्रकाश सिंह और बचाव पक्ष के वकील अभय कुमार राजन भी समय से पहुंच गए थे. अभियुक्त शहाबुद्दीन और उन के 3 साथी शेख असलम, शेख आरिफ हुसैन उर्फ मुन्ना मियां उर्फ सोनू और राजकुमार साह, जिन्हें सजा सुनाई जानी थी, अदालत के कटघरे में खड़े थे.

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