Dark Secret of Marriage. मैं खूबसूरत थी, अच्छे परिवार से थी. फिर भी शादी के बाद मेराज मुझे पत्नी का वह दरजा नहीं दे सके. इस का राज तब खुला जब मेरे देवर ने हमें जबरन नैनीताल घूमने भेजा और मेराज मेरे करीब आए. 

ठंडी बर्फीली हवा के झोंके तन को भिगो रहे थे, मन की उड़ान सातवें आसमान को छू रही थी. पहाड़ों की शीतलता का अहसास, बादलों से आंखमिचौली करती गुनगुनी धूप, सब कुछ बहुत दिलकश था.

चीड़ और देवदार के वृक्षों के इर्दगिर्द चक्कर काटते धुंधभरे बादलों को देख कर हम दिल्ली की तपती गर्मी को भूल गए थे. होटल की लौबी से जब मैं नैनी झील पर तैरती रंगबिरंगी कश्तियां देखती तो सोचती उन पर बैठे हर शख्स की जिंदगी कितनी हसीन है.

क्यारियों में खिले रंगबिरंगे फूल और उन पर मंडराती तितलियां मन को कल्पनालोक की सैर करा रही थीं. लौबी से अंदर आ कर मैं कमरे का जायजा लेने लगी. तभी वेटर चाय और गरमगरम पकौडे़ ले आया. जब हम चाय पी रहे थे तभी मेरी नजर मेराज पर पड़ी. उन की आंखों में मुझे प्यार का सागर लहराता नजर आया. जिस चाहत भरी नजर के लिए मैं सालों से तरसती रही थी, आज वही नजर मुझ पर मेहरबान सी लगी.

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सचमुच हम दोनों जिंदगी की भीड़ में गुम हो गए थे. देवर और ननदों को संभालने और बड़ा करने की जिम्मेदारी में शायद हम यह भी भूल गए थे कि हम पतिपत्नी भी हैं. अचानक मेराज उठे और शौल ला कर मेरे कंधों पर डाल दी. मैं ताज्जुब से सिहर सी गई. यह स्वाभाविक भी था क्योंकि जिस ने सालों से मेरी परवाह नहीं की, वह आज मुझे सपनों के शहर में ले आया था. अचानक मेराज मुझ से बोले, ‘‘फ्रेश हो जाओ, नीचे लेक पर चलते हैं, फिर कहीं बाहर डिनर करेंगे.’’

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