Hindi Stories: प्रतिमा ने जिस मौजमस्ती का जीवन जीने के लिए प्रवीण नाईक से शादी की थी, वह सास ऊषा नाईक और जेठानीडा. नेहा नाईक के रहते संभव नहीं था. इस कांटे को दूर करने के लिए उस ने जो किया, वह गुनाहों की प्रतिमा बन गई. पर्यटकों के लिए स्वर्ग कहे जानेवाले गोवा के जिला वास्कोडिगामा शहर से मांगोर हिल जाने वाले रास्ते के बाईं ओर पहाडि़यों से घिरा मायामोले इलाका यहां का अत्यंत पौश इलाका माना जाता है. यहां एक से बढि़या एक मकान, फार्महाऊस और बहुमंजिली इमारतें हैं. पौश इलाका होने की वजह से यहां उच्च और संभ्रांत लोग रहते हैं. इन्हीं में एक परिवार नामदेव नाईक का भी था, जो एक खूबसूरत इमारत के डुप्लेक्स फ्लैट में रहता था.

कुछ दिनों पहले बीमारी की वजह से नामदेव नाईक का निधन हो गया तो उन के पीछे परिवार में पत्नी ऊषा नाईक, 2 बेटे सिद्धार्थ  नाईक, प्रवीण नाईक और उन की बहुएं डा. नेहा नाईक तथा प्रतिमा नाईक रहती थीं. सिद्धार्थ एवं नेहा की 6 महीने की एक बेटी भी थी. परिवार संपन्न और खुशहाल था. घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. सिद्धार्थ नाईक और प्रवीण नाईक, दोनों भाई मर्चेंट नेवी में नौकरी करते थे. नौकरी की वजह से दोनों भाइयों का ज्यादातर समय समुद्र के बीच बीतता था. साल में एक या 2 बार दोनों भाई बारीबारी से छुट्टियां ले कर घर आते थे. उन की अनुपस्थिति में घर की सारी जिम्मेदारियां मां ऊषा नाईक निभाती थीं.

29 जनवरी, 2015 की रात 3, साढ़े 3 बजे जब इमारत के सभी लोग सो रहे थे, तभी दरवाजा पीटने और चीखनेचिल्लाने के शोर से सभी की आंखें खुल गईं. शोर सुन कर घबराए लोग अपनेअपने फ्लैटों का दरवाजा खोल कर बाहर आए तो ऊषा नाईक की छोटी बहू प्रतिमा नाईक को बदहवास हालत में रोतेबिलखते देख कर हैरान रह गए. वह जेठानी की दुधमुंही बच्ची को सीने से चिपटाए जोरजोर से रोते हुए कह रही थी, ‘‘मेरी मदद करो. डाकुओं ने मेरे घर को लूट लिया. मेरी सास और जेठानी को मार डाला. उन्होंने मुझे भी मारापीटा, वे मुझे भी मारना चाहते थे, लेकिन संयोग से मैं बच गई.’’

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