Mathura Violence Case. धर्म और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम की आड़ में स्वयंभू देशभक्ति का चोला पहन कर अपना साम्राज्य कायम करने का सपना देखने वाला सनकी रामवृक्ष यादव राजनीति व धर्म के साए में इतना मजबूत हो गया था कि उस ने अरबों के सरकारी जवाहर बाग पर कब्जा जमा लिया. 2 पुलिस अफसरों की शहादत और 29 लोगों की मौत के साथ बाग से कब्जा तो हट गया, लेकिन अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया. अराजक सोच वाले रामवृक्ष की चौंकाने वाली कहानी.
देश की राजधानी दिल्ली से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश की प्रमुख धार्मिक नगरी मथुरा के थाना सदर में स्थित है जवाहर बाग. करीब
300 एकड़ में फैला यह बाग हरियाली से लबरेज है. इसी जवाहर बाग के बाहर 2 जून, 2016 की शाम करीब साढ़े 4 बजे भारी पुलिस फोर्स पहुंचने लगी थी. यह बाग एक सरकारी उद्यान है, जो जिलाधिकारी औफिस के ठीक बराबर में है. जिलाधिकारी औफिस और इस बाग की बाउंड्री वाल के दरमियान महज 12 फीट चौड़ा एक रास्ता है. इस रास्ते पर भी पुलिस ने अपने वाहन लगा कर नाकेबंदी कर दी थी. अचानक बढ़ रही पुलिस की हलचल को स्थानीय लोग कौतूहल भरी निगाहों से देख कर कानाफूसी कर रहे थे.
दरअसल, पुलिस वहां एक बड़े मकसद के साथ जमा हो रही थी. वह जवाहर बाग को अपने कब्जे में लेना चाहती थी. उस सरकारी बाग पर पिछले 2 सालों से सैकड़ों लोगों ने कब्जा कर रखा था. कब्जाधारी खुद को कथित देशभक्त सत्याग्रही बताते थे. उन कब्जाधारियों की असली ताकत और मुखिया था 60 वर्षीय बाबा रामवृक्ष यादव. दुबलेपतले दरमियाने कद के इस रसूखदार शख्स का दिमाग बेहद शातिर था.






