Illegal Adoption Scam.  संतानहीन दंपत्तियों की नीरस जिंदगी को सरस बनाने के लिए झोला छाप डाक्टर तापेश गुप्ता ने दूर की कौड़ी लाकर खेल तो अच्छा खेला था, लेकिन वह भूल गया था कि बुरे काम का नतीजा भी बुरा ही होता है...

10  अप्रैल का दिन, दोपहर होतेहोते जून जैसा लगने लगा था. गरमी पूरे शबाब पर थी. ग्वालियर स्थित मुरार जिला चिकित्सालय के जच्चाबच्चा वार्ड में बैठी आशा कार्यकर्ता सीमा बारबार दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देख रही थी. सीमा पास के गांव से एक महिला को प्रसूति के लिए ले कर आई थी.

जिस महिला को बच्चा होने वाला था, वह दर्द से कराह रही थी. लेकिन अस्पताल का स्टाफ उस की तरफ उतना ध्यान नहीं दे रहा था, जितना गएगुजरे सरकारी अस्पतालों में दिया जाता है.

प्रसूति के लिए लाई गई महिला के पति और सास को परेशान देख कर सीमा उस के पति के पास जा कर चिंता भरे स्वर में बोली, ‘‘पहले बच्चे में देर तो लगती ही है, लेकिन इतनी भी देर नहीं कि केस बिगड़ जाए. मेरी बात मानो तो उसे सामने वाले प्राइवेट अस्पताल में ले चलते हैं, वहां मेरी जानपहचान है, बहुत कम पैसों में काम हो जाएगा.’’

सीमा की बात को उचित मान लड़के ने अपनी मां से बात की. संयोग से इसी बीच उस की पत्नी ने बिना किसी परेशानी के एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे दिया. बच्चे के जन्मते ही पिता और दादी के चेहरे तो खुशी से खिल उठे, लेकिन सीमा कुछ निराश सी हो गई. उस ने एक बार फिर घड़ी की ओर देखा और वहां से निकल कर ठीक सामने बने 3 मंजिला निजी नर्सिंगहोम पलाश की सीढि़यां चढ़ कर ऊपर चली गई.

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