Honour Killing.  कौशल्या ने शंकर से शादी कर ली तो उस के पिता चिन्नास्वामी को लगा कि उस ने दलित से शादी कर के बिरादरी में उसे जीने लायक नहीं छोड़ा. यही वजह थी कि उस ने भाड़े के हत्यारों को बेटी और उस के पति की सुपारी दे दी.

कौ शल्या और वी. शंकर स्थानीय इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ते थे. 19 वर्षीया कौशल्या शंकर से 2 साल जूनियर थी. दोनों कालेज की कैंटीन में मिले तो पहली नजर में ही उन्हें प्यार हो गया. प्यार परवान चढ़ा तो दोनों ने साथसाथ जीनेमरने की कसमें खा लीं.

दोनों ने जल्दी ही फैसला कर लिया कि शादी कर के वे साथसाथ रहेंगे. लेकिन परेशानी यह थी कि कौशल्या थेवर जाति से थी, जबकि वी. शंकर दलित सुमदाय से था. दोनों को इस बात का पूरा अंदेशा था कि उन के घर वाले उन की शादी के लिए राजी नहीं होंगे, खासकर कौशल्या के घर वाले.

तमिलनाडु सरकार के दस्तावेजों में थेवर जाति एमबीसी यानी पिछड़ी जाति के रूप में तो दर्ज है, लेकिन इस जाति को गैरदलित माना जाता है. जबकि वी. शंकर तो था ही दलित. वह उदूमालापेटाई कस्बे के पास स्थित गांव कुमारालिंगम का रहने वाला था. उस का संबंध एक साधारण खेतिहर परिवार से था.

वह ऊंची शिक्षा हासिल कर के अपना भविष्य संवारना चाहता था, लेकिन इस से पहले ही अपने से ऊंची जाति की लड़की से प्रेम कर बैठा था. विरोध की प्रबल संभावना थी. इस के बावजूद कौशल्या और वी. शंकर ने जुलाई, 2015 में गंधर्व विवाह कर लिया और छिप कर साथसाथ रहने लगे.

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