Social Story: समाज या परिवार के लिए कुछ करने की उम्र में जिन लोगों ने समाज या घर वालों से बगावत कर के बीहड़ में जा कर बंदूक उठाई, अब वही जीवन के अंतिम दौर में समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं, लेकिन समाज आज भी उन से दहशत खाता है, जिस से उन्हें अपने साथ जोड़ने से कतरा रहा है.

आज डाकू भले ही किस्सेकहानियों के पात्र बन कर रह गए हों, लेकिन कभी इन का बोलाबाला था. कुछ डाकुओं का तो इतना आतंक था कि लोग उन के नामों से कांपते थे. कुछ महिलाएं भी डाकू बनीं, जिन्हें आज दस्यु सुंदरी कहा जाता है. डाकुओं और उन की दहशत पर तमाम फिल्में भी बनी हैं, जिन में सब से चर्चित फिल्म शोले रही है.

शोले में दिखाए गए गब्बर सिंह को लोग शायद ही कभी भूल पाएंगे. फिल्म में गब्बर सिंह की भूमिका अभिनेता अमजद खान ने निभाई थी. फिल्म के तमाम डायलौग लोगों की जुबान पर चढ़ गए थे. इस के अलावा भी डाकुओं पर तमाम फिल्में बनीं, लेकिन शोले जैसी सफलता किसी दूसरी फिल्म को नहीं मिली. अब समय बदल गया है, अपराध भले ही पहले से ज्यादा हो रहे हैं, लेकिन आज अपराधों और अपराधियों का ट्रेंड बदल गया है. अब बंदूकों की बदौलत डकैती नहीं, अपहरण होने लगे हैं. डकैत बीहड़ों और जंगलों में रहते थे, जहां रहना खाना पेड़ों के नीचे या छोटीमोटी गुफाओं में होता था.

जबकि अब विकास के नाम पर जंगल उजड़ते जा रहे हैं. डकैतों का लगभग सफाया हो चुका है. अपराधों का स्वरूप बदल गया है तो अपराधी भी सुविधाभोगी हो गए हैं. घोड़ों का प्रचलन लगभग समाप्त हो चुका है, उन की जगह कारों या जीपों ने ले ली हैं.

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