Motivational Story: मानवी की हिम्मत की दाद देनी होगी कि तमाम सामाजिक बाधाएं पार करते हुए वह कालेज की प्रिंसिपल बनने के साथसाथ अभिनेत्री और लेखिका भी है...
पुरुष से महिला बनी देश की पहली ट्रांसजेंडर मानवी बंद्योपाध्याय ने 10 जून, 2015 को जब नदिया जिले के कृष्णानगर महिला कालेज की प्रिंसिपल का कार्यभार संभाला तो एक बार वह फिर चर्चा में आ गईं. चर्चा में आएं भी क्यों नहीं, किसी ट्रांसजेंडर की इस महत्त्वपूर्ण पद पर नियुक्ति का यह देश का ही नहीं, संभवत: दुनिया का पहला मामला है. मानवी को यह सम्मानजनक पद इतनी आसानी से नहीं मिला, बल्कि बचपन से ले कर अब तक उन्हें तमाम तरह की परेशानियों से जूझना पड़ा. समाज के लोगों ने उन्हें तरहतरह से प्रताडि़त किया. उन का जीना तक दूभर कर दिया, लेकिन मानवी ने हर समस्या का डट कर मुकाबला किया. आइए जानें, दुनिया भर में चर्चा का विषय बनीं मानवी बंद्योपाध्याय आखिर हैं कौन?
मानवी का जन्म एक लड़के के रूप में पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के नेहारी कस्बा में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. 2 बेटियों के बाद बेटे के जन्म पर मातापिता फूले नहीं समा रहे थे. उन्होंने उस का नाम सोमनाथ बंद्योपाध्याय रखा. बेटा 5 साल का हुआ तो पिता ने उसे स्कूल भेजना शुरू किया. मोहल्ले के अन्य लड़कों की तरह सोमनाथ भी मछली पकड़ने जाता, पेड़ पर चढ़ता और फुटबाल खेलता. इन सब के अलावा वह पढ़ाई में भी होशियार था.
उस की एक आदत थोड़ा हट कर थी. वह लड़कों के कपड़े पहनने के बजाय लड़कियों के कपड़े पहनना पसंद करता था. उसे जब भी मौका मिलता, वह अपनी बहनों की फ्रौक पहन लेता या मां की साड़ी लपेट लेता. उस की इस हरकत पर घर वाले हंसते. वह अपने लिए भी फ्रौक लाने की जिद करता. इस पर मांबाप उसे समझाते कि वह लड़का है, इसलिए लड़कों के कपड़े पहने. उन्होंने बेटे की इस आदत को गंभीरता से नहीं लिया.






