विकृत : कौन समझेगा दुष्कर्म की पीड़ा? – भाग 3
‘‘नहीं बेटी, हम इन के जैसे घिनौने और विकृत नहीं है.’’ डाक्टर ने पिस्तौल फेंकते हुए कहा. दोनों के हाथों के बंधन इतने ढीले कर दिए कि उन के जाने के बाद वे स्वयं को बंधन मुक्त कर सकें.
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