उस मोड़ पर : क्या अपने गुनाहगार को बचा पाई पारुल
कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो कभी नहीं भरते. डा. पारुल के साथ भी ऐसा ही था. जब वह शख्स डा. पारुल के सामने आया तो उन के जख्म हरे हो गए.
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