Hindi Crime Story: मोहब्बत में तकलीफ तो होती है पर बेवफाई ऐसा घाव देती है जो सारी उम्र नहीं भरता. जमाल ने भी मोहब्बत के नाम पर एक साजिश में फंस कर इतना बड़ा धोखा खाया कि जिंदगी बरबाद हो गई. महबूबा की मदद के चक्कर में वह खुद ही जेल पहुंच गया.
‘‘ज माल, क्या तुम मुझ से मोहब्बत करते हो?’’ सोनिया की प्यार भरी आवाज में हकीकत जानने की उत्सुकता थी. उस की बड़ीबड़ी खूबसूरत आंखें मेरे चेहरे पर टिकी थीं. उस का सिर मेरे कंधे पर रखा था. मैं ने गरदन घुमा कर उस के हसीन चेहरे पर नजरें जमाते हुए कहा, ‘‘सोनिया तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं. देखो, मैं कसम खा कर यकीन दिलाने के पक्ष में नहीं हूं.’’
सोनिया इठला कर बोली, ‘‘मैं कैसे यकीन कर लूं कि तुम मुझ से इतनी मोहब्बत करते हो?’’ उस के इस सवाल ने मुझे बेचैन कर दिया. मैं शायर तो था नहीं जो उस के हुस्न और चाहत में शेर सुनाता या गजलें गाता.
‘‘क्या तुम मेरे लिए जान दे सकते हो?’’ उस ने अचानक प्रश्न किया तो मैं ने अपने प्यार के मद्देनजर कह दिया, ‘‘यकीनी तौर पर जान दे सकता हूं.’’
यह सुन कर सोनिया मुसकरा दी, फिर तुनक कर बोली, ‘‘तुम पुलिस अफसर हो. फर्ज की बात हो तो तुम किसी अनजान आदमी के लिए भी जान दे सकते हो.’’
‘‘मेरा खयाल है, अपना फर्ज पूरा करते हुए मैं जान भी दे सकता हूं. निस्संदेह मैं एक कर्त्तव्यनिष्ठ अफसर हूं. तुम यह बात अच्छी तरह जानती थीं कि मैं पुलिस वाला हूं, फिर भी तुम ने मुझ से मोहब्बत की, इस की कोई खास वजह थी क्या?’’
‘‘ये तो दिल का मामला है बस, तुम पर दिल आ गया.’’
‘‘अच्छा ये बताओ कि तुम कैसे कह सकती हो कि तुम्हें भी मुझ से मोहब्बत है?’’ मैं ने पूछा.
सोनिया ने मेरी आंखों में झांका और दिल पर हाथ रख कर बड़े मीठे स्वर में बोली ‘‘तुम से मिल कर यहां खुशी होती है और तुम्हारी जुदाई के खयाल से यहां तकलीफ होती है. तुम से अलग हो कर जब भी मैं अपने डैडी को देखती हूं, और मन में ये खयाल आता है कि वह कभी भी तुम्हें कुबूल नहीं करेंगे, तो दिल डूबने लगता है. बड़ी तकलीफ होती है, मन बेचैन हो जाता है. इस बिना पर मैं कह सकती हूं कि मैं तुम से मोहब्बत करती हूं.’’
चांद की सफेद चांदनी में सोनिया की आंखें चमक रही थीं, चेहरे पर प्यार के रंग थे.
‘‘ठीक है जानम, आई एम सौरी. मुझे तुम्हारी मोहब्बत पर यकीन हो गया. तुम्हारी यह बात सही है कि मैं पुलिस अफसर हूं और किसी अनजान शख्स के लिए भी जान दे सकता हूं, लेकिन तुम्हारे लिए मैं एक काम कर सकता हूं. ऐसा काम जो मैं किसी और के लिए हरगिज नहीं करूंगा.’’ मैं ने पूरे विश्वास से कहा.
यह सुन कर सोनिया मेरे कंधे से सिर उठा कर बोली, ‘‘कौन सा काम?’’
‘‘मैं तुम्हारी खातिर कत्ल कर सकता हूं.’’ मैं ने धमाका सा किया. मेरी बात सुन कर सोनिया का मुंह खुला का खुला रह गया, जैसे उसे अपने कानों पर यकीन न हुआ हो.
‘‘तुम मजाक कर रहे हो जमाल.’’
‘‘नहीं, मैं सचमुच तुम्हारे लिए किसी का भी कत्ल कर सकता हूं.’’ मैं ने गंभीरता से कहा.
सोनिया एकदम उठ कर पार्क के गेट की तरफ बढ़ी.
‘‘सुनो, तुम कहां जा रही हो?’’ मैं ने उसे टोका.
‘‘तुम्हें इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए.’’ इतना कह कर वह अपनी कार का दरवाजा खोल कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गई. मैं ने झुक कर उस का हाथ पकड़ कर बाहर निकाला. इसी बीच मेरा सर्विस रिवाल्वर नीचे गिर पड़ा. उसे उठा कर मैं ने सोनिया का हाथ पकड़ा और उसे प्यार करते हुए बोला, ‘‘तुम यूं अचानक बिना कुछ कहे जा रही थीं, क्यों? क्या हुआ तुम्हें?’’
‘‘मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि क्या करूं. मैं एकदम शौक्ड रह गई थी. दरअसल, मैं खुद भी कत्ल का ही सोच रही थी.’’
‘‘क्या मतलब है तुम्हारा?’’ मैं ने चौंक कर पूछा.
वह मुझ से अलग होते हुए बोली, ‘‘मेरा यही मतलब है, सचमुच मैं कत्ल के बारे में ही सोच रही थी. तुम जानते हो, मैं कभी भी तुम्हारी नहीं हो सकती. मेरे डैडी तुम से मेरी शादी करने के लिए कभी भी राजी नहीं होंगे, यह बात मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही है.’’ उस ने उदास स्वर में कहा.
‘‘तुम्हारे डैडी अभी तक मुझ से मिले नहीं हैं, फिर तुम यह बात इतने यकीन से कैसे कह सकती हो कि वह मुझे पसंद नहीं करेंगे?’’ मैं ने पूछा.
‘‘मैं उन्हें अच्छी तरह समझती हूं, जानती हूं इसलिए.’’
‘‘तुम्हारी उम्र 23 साल है. तुम बालिग हो, समझदार हो, वह जो भी कहते हैं उसे भाड़ में डालो. तुम वहां से चली आओ, हम शादी कर के आराम से अलग रहेंगे. अगर वह तुम्हें कुछ देना चाहे तो दें, वरना हमें कुछ नहीं चाहिए.’’ मैं ने उसे समझाना चाहा.
‘‘ये सब इतना आसान नहीं है.’’ वह परेशान सी हालत में बोली.
‘‘इतना मुश्किल भी नहीं है, क्योंकि शादी के बाद तुम मेरी जिम्मेदारी होगी.’’ मैं ने उसे यकीन दिलाते हुए कहा.
‘‘क्या तुम मेरी इस महंगी कार की किस्तें भर सकोगे? मेरे क्रेडिट कार्ड के बिल पे कर सकोगे? ऊपर से मेरी पढ़ाई का खर्चा, क्या ये सब कर सकोगे?’’
‘‘नहीं.’’ मैं ने होंठ भींच लिए.
‘‘तो फिर इंतजार करो. मेरी कालेज की पढ़ाई पूरी होने में अभी 3 साल बाकी हैं. जब मुझे डिग्री मिल जाएगी तो अच्छी जौब मिलने में आसानी होगी. फिर मैं वहां से निकल आऊंगी और हम एक हो जाएंगे.’’ उस ने सोच कर कहा.
‘‘और तब तक?’’ मैं ने बेचैनी से पूछा.
सोनिया की आंखों में आंसू भर आए. उस ने रोनी आवाज में कहा, ‘‘बेहतर यही होगा तब तब हम एकदूसरे से मिलना छोड़ दें.’’
मैं एक झटके से पीछे हट गया, मेरे दिल में दर्द सा उठा, पेशानी पर पसीना आ गया. मुझे उस से बहुत मोहब्बत थी, न मिलने के खयाल से ही मुझे तकलीफ होने लगी. मैं उस की परेशानी को भी समझ रहा था.
‘‘इतनी लंबी जुदाई मुझ से बरदाश्त नहीं होगी. इस का कोई न कोई हल तो होगा?’’ मैं ने मायूसी से कहा.
‘‘नहीं इस का कोई हल नहीं है.’’ वह बोली.
मेरी आंख से गिरने वाला हर आंसू मेरे गुरूर को मिटा रहा था. मैं ने सोनिया को देखे बगैर कहा, ‘‘अगर इस बारे में मैं तुम्हारे डैडी से बात करूं तो?’’
‘‘ऐसा हरगिज न करना, अगर उन्हें पता चल गया कि मेरा कोई बौयफ्रैंड है तो वह मुझे कत्ल कर देंगे. इस मामले में वह बहुत ज्यादा स्ट्रिक्ट हैं.’’ वह सिहर कर बोली.
‘‘तुम ने मुझे बताया था कि वह मुझे इसलिए नापसंद करते हैं क्योंकि मेरा ताल्लुक पुलिस से है.’’
‘‘हां.’’ सोनिया ने सिर हिलाया.
‘‘तब वह तुम्हें सिर्फ इस बात पर क्यों कत्ल कर देंगे कि तुम्हारा कोई बौयफ्रैंड है?’’
इस सवाल पर सोनिया ने एक गहरी सांस ले कर कहा, ‘‘ये एक उलझा हुआ मसला है.’’
‘‘मुझे बता कर देखो, शायद कोई हल निकल आए?’’
‘‘मैं नहीं बता सकती, वह सच में मुझे कत्ल कर देंगे और कोई भी कुछ नहीं कर सकेगा. वह बहुत पावरफुल और रसूख वाले आदमी हैं.’’
‘‘ठीक है, उन का अपना बिजनैस है, बहुत पैसा है पर इस से क्या होता है? ये बातें उन्हें कानून से ऊपर तो नहीं कर सकती.’’
‘‘उन का करोड़ों का कारोबार है, जो विदेशों तक फैला हुआ है. तुम अच्छी तरह जानते हो, पैसा कानून को भी खरीद सकता है.’’
मैं ने जज्बाती हो कर उस का चेहरा दोनों हाथों में थाम लिया और पूछा, ‘‘क्या तुम सचमुच ये चाहती हो कि हम अपनी मोहब्बत को भूल जाएं.’’
‘‘हां, पर अगर…’’ वह कहतेकहते रुक गई.
‘‘अगर क्या? बोलो, तुम्हें मेरी कसम?’’
‘‘जमाल, मैं ने कई रातें जाग कर गुजारी हैं. जब भी नींद लगी, मैं ने उन्हें जहर देने का ख्वाब देखा है.’’ सोनिया ने धीमे से कहा.
‘‘तुम्हारा मतलब उन के कत्ल से है?’’
सोनिया ने हां में सिर हिलाया.
‘‘लेकिन वह तुम्हारे डैडी हैं.’’
‘‘नहीं, वह मेरे डैडी नहीं, बल्कि एक वहशी दरिंदा है.’’ सोनिया गुस्से से फट पड़ी. फिर मेरे कंधे पर सिर रख कर फूटफूट कर रो पड़ी.
उस की खूबसूरत आंखों से आंसू मोतियों की तरह झड़ रहे थे. उस की हालत ने मुझे परेशान कर दिया. मैं ने प्यार से उस का सिर सहलाया, तो वह मुझ से लिपटते हुए हलकी चीख भरी रोंआसी आवाज में बोली, ‘‘वो मेरे साथ जबरदस्ती करता है, मुझ से गलत संबंध बनाता है.’’ उस की सिसकियां तेज हो गईं.
मेरे दिल की धड़कन जैसे थम सी गई. मेरी रगों में दौड़ता खून जैसे बरफ बन गया.
‘‘ये क्या कह रही हो, मुझे सबकुछ ठीक से बताओ.’’ मेरे दुलारने पर वह थोड़ा संभली, फिर एक आह भर कर बोली, ‘‘वह मेरे साथ उस वक्त से ज्यादती कर रहा है, जब मैं सिर्फ 14 साल की थी. मम्मी के मरने के बाद से ही उस ने ये घिनौना काम शुरू कर दिया था.’’
‘‘तुम ने किसी को बताया क्यों नहीं?’’ अगर मैं ऐसा करती तो वह मुझे मार डालता. वैसे भी इतने बड़े आदमी के सामने मेरी बात पर कौन यकीन करता? सोनिया ने एक झुरझुरी ले कर कहा.
‘‘यकीन तो कोई तब करता जब तुम बतातीं.’’
‘‘उस ने मुझे पूरी तरह अपने चंगुल में फंसा लिया था. जब मैं 15 साल की थी तभी उस ने जोड़ जुगत कर के मेरे दिमागी मरीज होने की पूरी हिस्ट्री बनवा ली थी. मेरे पागल होने के कागज, डाक्टर के सर्टिफिकेट सब कुछ था उस हिस्ट्री में. मेरे हलफिया बयान के बाद भी जज और अदालत उसे मुजरिम करार नहीं देती, हां मुझे पागलखाने जरूर भेज दिया जाता. अब मेरे पास दो ही रास्ते बचे हैं. या तो मैं ये सब बरदाश्त करती रहूं या उसे जहर दे दूं.’’
‘‘तुम उसे जहर नहीं दे सकती, ऐसा करने से सब को पता चल जाएगा कि जहर तुम ने दिया है. तब यकीनी तौर पर तुम्हें जेल जाना पड़ेगा और हम एकदूसरे से कभी नहीं मिल सकेंगे.’’ मैं ने उसे समझाया.
‘‘उस के सैंकड़ों दुश्मन हैं, कोई भी ये काम कर सकता है. फिर मुझ पर ही शक क्यों जाएगा?’’ सोनिया ने कहा.
‘‘उस के दुश्मनों में कुछ ऐसे लोग हैं, जो इतना बड़ा खतरा उठा सकते हैं?’’ मैं ने कुछ सोचते हुए सोनिया से पूछा.
सोनिया ने एक आह भर कर कहा, ‘‘हां, हैं तो लेकिन मेरा खयाल है मुझे ये सब बरदाश्त करना ही पड़ेगा.’’
मेरा खून खौल उठा. नफरत के तेजाब ने मेरे दिल को जला कर रख दिया. मेरी नजर उस लड़की पर टिकी हुई थी जिसे मैं ने जीजान से प्यार किया था. उस की इज्जत की धज्जियां उड़ाने वाले उस के बाप के बारे में जान कर, दिल दिमाग नफरत से जल उठा. चांदनी रात में चांदनी से भीगा उस का उदास चेहरा मेरे दिल की गहराई में उतर आया था. मैं ने उसे प्यार करते हुए कहा, ‘‘तुम घबराओ मत, जल्द ही ये डरावना ख्वाब खत्म हो जाएगा और वह दरिंदा अपने अंजाम पर जरूर पहुंचेगा.’’ मेरी आवाज में जहर घुला हुआ था. उसी वक्त मैं ने सोनिया से कुछ जरूरी बातें पूछी. उस से जानकारी लेने के बाद मैं ने एक योजना बनाई और उसे बता दिया कि उसे क्या करना है.
उसी योजना के अनुसार 2 हफ्तों बाद सोनिया पार्क में फिर मुझ से मिली. हम दोनों एक बेंच पर बैठ गए. उस ने मुझे एक पेपर थमाते हुए कहा, ‘‘ये मकान का पूरा नक्शा है, जो मैं ने बड़ी सावधानी से बनाया है.’’
मैं ने नक्शे को ध्यान से देखा. वाकई उसे बड़े कायदे से बनाया गया था. मैं ने उस से कहा, ‘‘ये तो ठीक है, अलार्म वगैरह और सुरक्षा के इंतजाम कैसे हैं?’’
सोनिया ने मुसकरा कर कहा, ‘‘उसे अपनी ताकत और पहुंच पर बड़ा घमंड है. उसे लगता है कि कोई उस का बाल भी बांका नहीं कर सकता. इसलिए उस ने न तो पहरेदार रखे हैं, न अलार्म लगवाए हैं.’’
‘‘तुम उस की आयरन गोल्फ स्टिक लाई हो.’’ मैं ने पूछा.
सोनिया ने ‘हां’ में सिर हिलाया.
‘‘उस वक्त वो कहां होगा?’’
‘‘सोफे पर मदहोश पड़ा होगा.’’
‘‘क्या तुम्हें यकीन है कि आज रात को भी वह पोकर खेलेगा?’’
‘‘हर थर्सडे की रात वो देर तक पोकर खेलता है.’’ उस की बात सुन कर मैं ने एक बार फिर गौर से नक्शा देखा.
‘‘वह घर कब तक वापिस आता है?’’
‘‘आधी रात के वक्त, कभीकभी जल्दी भी आ जाता है.’’
‘‘क्या वो नशे में होगा?’’
‘‘एक बात तो पक्की है, एक बार पीने के बाद जब वह मदहोश हो कर सोता है, तो फिर उसे कोई तूफान भी नहीं उठा सकता.’’
‘‘ओके, क्या तुम ने रिपोर्ट दर्ज करा दी?’’ मैं ने नक्शा जेब में रखते हुए पूछा.
‘‘हां, मेरी इंसपेक्टर दुर्रानी से बात हुई थी.’’
‘‘वह बड़ा तेज व कर्मठ इंसपेक्टर है, उसे कोई शक तो नहीं हुआ?’’
‘‘मेरे खयाल से तो नहीं, क्यों?’’
‘‘वह और उस का असिस्टेंट कामरान बड़े काबिल और तेज तर्रार पुलिस अफसरों में गिने जाते हैं. खैर छोड़ो, ये बताओ तुम ने उसे क्या बताया?’’
‘‘मैं ने उसे कहा कालेज में कोई मेरा पीछा करता है और मुझे शक है कि उस ने मेरे घर का पता लगा लिया है.’’
‘‘इस के अलावा और कुछ?’’
‘‘हां, मैं ने ये भी बताया कि 2 दिन पहले मैं ने एक अजीब से आदमी को अपने घर के पास देखा था, ये वही हो सकता है जो कालेज में मेरा पीछा करता है.’’
तुम ने उस का हुलिया क्या बताया है?
‘‘मैं ने एक ऐसे आदमी का हुलिया बयान कर दिया जो एक टैक्सी से जा रहा था.’’
‘‘फिर इंसपेक्टर दुर्रानी ने क्या कहा?’’
उन्होंने सब कुछ लिख लिया और कहा कि 2 से ज्यादा पुलिस वालों को पेट्रोलिंग ड्यूटी पर लगा देगा. मैं ने संतुष्ट हो कर सिर हिलाया. उस रात मेरी ड्यूटी नाइट शिफ्ट में थी और सोनिया का बंगला मेरी पेट्रोलिंग की हद में आता था.
‘‘और कुछ तो नहीं पूछना है?’’ सोनिया ने कहा.
सोनिया के साथ होने वाली ज्यादती और जुल्म ने मुझे बुरी तरह तड़पा दिया था और मैं ने उसे उस शैतान से निजात दिलाने का इरादा कर लिया था. यह सारी प्लानिंग सोनिया की ही थी. मैं ने सोनिया को तसल्ली दे कर कहा, ‘‘आज की रात तुम घर पर नहीं रहोगी.’’
‘‘आज रात मेरी सहेली की मेहंदी का फंक्शन है. हम सारी फ्रैंड्स रात वहीं गुजारेंगी, खूब हल्लागुल्ला होगा, डांसपार्टी भी है. मेरी वहां मौजूदगी के कई गवाह मिल जाएंगे.’’
‘‘ओके.’’ मुझे तसल्ली हो गई. फिर हम दोनों वहां से उठ गए. मैं ने सोनिया का हाथ मजबूती से थामते हुए कहा, ‘‘अगली बार जब हम मिलेंगे तो तुम उस वहशी दरिंदे के चंगुल से आजाद होगी.’’
सोनिया ने मेरी आंखों में झांका और बोली, ‘‘जानते हो, मुझे तुम्हारी बात पर यकीन नहीं आया था.’’
‘‘कौन सी बात पर?’’ मैं ने चौंकते हुए पूछा, तो वह बोली, ‘‘जब तुम ने मुझ से कहा था कि तुम मुझ से इस हद तक मोहब्बत करते हो कि मेरी खातिर किसी का कत्ल भी कर सकते हो.’’
‘‘यकीनन करूंगा, लेकिन इस कत्ल के पीछे एक अच्छा मकसद होगा.’’ मैं ने जोश से कहा. बातचीत के बाद वह चली गई.
मैं मन ही मन आगे की प्लानिंग के बारे में सोचते हुए लौट आया. उस रात जब मैं ड्यूटी पर था तो मैं ने घड़ी पर नजर डाली, रात का 1 बज रहा था. यह मेरे काम के लिए सही वक्त था. मैं ने अपना वाकीटाकी औन किया, ‘‘वन थ्री सिक्स, हेड क्वार्टर.’’
वाकीटाकी में कुछ देर खड़खड़ हुई फिर डिसपैचर की आवाज उभरी. ‘‘गो अहेड, वन थ्री सिक्स.’’
‘‘टेन फोर सेवेन – टेन फोर टू,’’ मैं ने कहा ताकि वह यह समझे कि मैं घर पर खाना खा रहा हूं.
‘‘टेन फोर वन थ्री सिक्स.’’
मैं अपनी पेट्रोल कार से नीचे उतर आया. वाकीटाकी की आवाज कम कर दी. अब मेरे पास एक घंटे का वक्त था. मैं ने खास टोपी, एक लबादा (ढीले ओवर कोट जैसा) दस्ताने व नरम जूते पहन लिए. फिर सीट के नीचे से गोल्फ आयरन स्टिक निकाल कर एक गहरी लंबी सांस ली. मेरे काम का वक्त हो गया था. मैं दौड़ता हुआ सोनिया के फादर मुबारक डायमंड की कोठी तक जा पहुंचा. एक नजर मैं ने अपनी पुलिस पेट्रोलिंग वाली कार पर डाली जो कोठी से दूर झाड़ों की आड़ में खड़ी थी और नजरों से ओझल थी. जोशोजुनून में मैं ने कत्ल का इरादा कर लिया था. मुझ पर सोनिया की मोहब्बत भले ही हावी थी. पर यह एक संगीन जुर्म था.
मैं कोठी के पिछले दरवाजे के पास पहुंच कर रुक गया. मेरा दिल बुरी तरह धड़क रहा था, हाथ कांप रहे थे. मैं ने आज तक किसी का कत्ल नहीं किया था. बेशक मैं ने कत्ल के बारे में, उस के अंजाम के बारे में जरूर सोचा था और प्लानिंग पूरी सावधानी से की थी. मैं ने कत्ल के मंजर को बारबार दिमाग में लाने की कोशिश की पर मेरा दिमाग खाली स्लेट की तरह हो गया था. पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं वापसी के लिए पलटा, लेकिन फिर सोचा सोनिया को क्या जवाब दूंगा, मैं ठिठक कर रुक गया. अचानक मेरी आंखों के आगे सोनिया की इज्जत लुटने का, उस के बाप की ज्यादती और जुल्म का दृश्य उभर आया. मुझे याद आई सोनिया की मजबूरी और बेबसी.
मेरा खून खौलने लगा और मैं अचानक पलटा और कोठी के दरवाजे पर पहुंच गया. मैं ने दरवाजे पर जोर की एक लात मारी, तो दरवाजा खुल गया. मैं तेज कदमों से अंदर दाखिल हो कर नक्शे के मुताबिक लिविंगरूम की तरफ बढ़ा, तो मुझे टीवी की आवाज सुनाई दी. मतलब सोनिया ने नक्शा सही बनाया था, टीवी चलने की वजह से कमरे में खासी रोशनी थी. मैं आयरन स्टिक संभाल कर सोफे की तरफ बढ़ा, मेरी सांस सीने में अटक सी गई. वह सोफे पर मौजूद नहीं था. सोफा खाली पड़ा था.
तभी एक आवाज गूंजी, ‘‘कौन हो तुम? मेरे घर में क्या कर रहे हो?’’
मैं तेजी से आवाज की तरफ घूम गया. मुबारक डायमंड एक हाथ में शराब की बोतल और दूसरे हाथ में टीवी का रिमोट लिए मुझे घूर रहा था. मैं वहीं जम कर रह गया. मेरे सामने वह शैतान खड़ा था, जिस ने मेरी महबूबा की इज्जत तारतार की थी.
‘‘मैं ने तुम से पूछा कि तुम कौन हो और क्यों आए हो?’’
उस ने पूछा तो मैं ने एक कदम आगे बढ़ाया और स्टिक को बेस बाल के बैट की तरह पूरी ताकत से घुमाया. इस के साथ ही एड़ी पर जोर डालते हुए मैं ने उस पर जोरदार वार किया. वार इतना जोरदार था कि जब स्टिक उस के सिर से टकराई, तो मेरा हाथ झनझना गया. उस के सिर से खून बहने लगा और वह जमीन पर ढेर हो गया. शराब की बोतल जमीन पर गिर कर टूट गई. मैं ने चारों तरफ नजर दौड़ाई, सबकुछ ठीक दिखाई दे रहा था. मैं ने एक गहरी सांस ले कर एक बार फिर आयरन स्टिक मुबारक डायमंड के सिर पर दे मारी और फिर मारता ही चला गया. उस ने एक झुरझुरी ली और उस का जिस्म स्थिर हो गया. मैं ने झुक कर उस की नब्ज देखी तो वह बंद हो चुकी थी. मैं ने तेजी से उस का पर्स और ज्वेलरी समेटी और बाहर निकल गया.
मैं बाहर निकला तो ठंडी हवा मेरे चेहरे से टकराई. मुझे उबकाई सी आ रही थी. मैं लड़खड़ाता हुआ दौड़ पड़ा. मैं ने वहां कोई सुबूत नहीं छोड़ा था. उस वक्त मेरा गला सूख रहा था. कुछ अजीब सी हालत हो रही थी. मैं ने अपनी पुलिस कार के पास पहुंच कर दस्ताने, जूते, लबादा उतारा और मुबारक डायमंड की ज्वैलरी, मनीपर्स एक प्लास्टिक बैग में ठूंस दिए. मेरी सांसें अभी भी तेजतेज चल रही थीं. मैं ने लंबीलंबी सांसें लीं तो कुछ अच्छा लगा. प्लास्टिक बैग कार की डिक्की में डाल कर मैं ने कार स्टार्ट की और वहां से रवाना हो गया. रास्ते में एक वीराने में मैं ने चीजों सहित प्लास्टिक बैग एक गड्ढे में रख कर जला दिया. गड्ढा मैं ने बंद कर दिया. यह जगह मैं ने पहले से देख रखी थी. घर पहुंच कर मैं ने शावर ले कर कपड़े बदले, फिर डिस्पैचर को बताया कि मुझे आने में थोड़ी देर हो सकती है. उस ने कहा, ‘‘मैं संभाल लूंगा, पर मेरे लिए बर्गर ले कर आना.’’
मैं रात के ढाई बजे औफिस पहुंचा. वहां से फिर अपनी पेट्रोलिंग कार में लौट आया. मैं ने कुछ देर अपने आगे के प्लान के बारे में सोचा. मेरे पेट में अजीब सी गुड़गुड़ हो रही थी. दिल भी घबरा रहा था. कुछ देर मैं यूं ही बैठा रहा. फिर सीधा मुबारक डायमंड की कोठी की तरफ रवाना हो गया. उस का नाम तो मुबारक था पर शायद डायमंड पहनने की वजह से उस के नाम के साथ डायमंड जुड़ गया था. मैं ने गाड़ी उस की कोठी के पास ले जा कर रोक दी. फिर वाकीटाकी पर कहा, ‘‘वन थ्री सिक्स हेडक्वार्टर.’’
‘‘यस.’’
‘‘मैं मुबारक डायमंड के बंगले के पास हूं. रूटीन निरीक्षण करने जा रहा हूं.’’ उधर से आवाज आई. ‘‘टेन फोर.’’
मैं गाड़ी से नीचे उतर कर बंगले के पीछे वाले दरवाजे पर पहुंच गया. फिर एक गहरी सांस ले कर वाकीटाकी चालू कर के कहा, ‘‘मुझे बंगले का एक दरवाजा खुला दिख रहा है, लगता है नकब लगी है. मैं अंदर देखने जा रहा हूं. हेलो हेडक्वार्टर, मुझे मदद की जरूरत पड़ सकती है.’’
‘‘ओ.के.’’
मैं सीधा अंदर पहुंचा. मुबारक डायमंड जमीन पर अपने ही खून में भीगा पड़ा था. यकीनन वह मर चुका था. मैं ने एक झटके से वाकीटाकी औन किया, ‘‘हैलो हेडर्क्वाटर, अंदर एक लाश पड़ी है. जल्दी से मैडिकल स्टाफ भेजो. पुलिस वायरलैस में जिंदगी दौड़ गई, धड़ाधड़ संदेश और आदेश शुरू हो गए.’’
मैं ने झुक कर मुबारक की गरदन को छुआ और जानबूझ कर अपनी उंगलियों के निशान यहांवहां छोड़ दिए ताकि बाद में निशान मिलने पर कोई सवाल न उठे. फिर मैं ने मुलजिम की तलाश के बहाने पूरे बंगले का चक्कर लगाया. साथ ही लाश के आसपास खास किस्म का टेप लगा दिया और बरामदे में रुक कर टीम के आने का इंतजार करने लगा. थोड़ी देर बाद मैडिकल स्टाफ और फोर्स आ गई.
‘‘जब तुम्हें इस वारदात का पता चला, उस वक्त क्या बजा था?’’ इंसपेक्टर दुर्रानी ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद पूछा. मैं ने खुद को सामान्य रखते हुए कहा, ‘‘पौने 3 बजे होंगे.’’
फ्लैश लाइट की रोशनी में उस की ब्राउन रंग की चालाक आंखें एकएक चीज को ध्यान से देख रही थीं.
‘‘तुम्हें इस इलाके में एक्सट्रा पेट्रोलिंग के बारे में मेरे आर्डर मिल गए थे?’’ दुर्रानी ने जानना चाहा.
‘‘जी हां, मिल गए थे. इसलिए मैं हर एक घंटे के बाद यहां की गश्त लगा रहा था.’’ मैं ने बताया.
‘‘हर बार, वक्त नोट करवा रहे थे?’’
‘‘जी हां.’’
‘‘कोई शक की बात दिखाई दी थी?’’
‘‘जी नहीं, हर तरफ सन्नाटा था.’’ मैं ने जवाब दिया.
इंसपेक्टर दुर्रानी हर बात नोट कर रहा था.
‘‘अजीब बात है, खुद की गोल्फ स्टिक से खुद की मौत.’’ मैं ने सवाल उठाया.
‘‘वह मुबारक डायमंड की स्टिक नहीं थी, उस की अपनी गोल्फ आयरन स्टिक्स गिनी जा चुकी हैं, सब अपनी जगह पर मौजूद हैं.’’
‘‘ओह, मैं समझा लाश के पास पड़ी है, उसी की होगी.’’ मैं ने अपनी हैरानी छुपाते हुए कहा.
‘‘वह कमीना बड़ा दीदादिलेर और शातिर था, तुम हर एक घंटे में गश्त लगा रहे थे. फिर भी उस ने अपना काम कर दिखाया. क्या तुम ने खाने के बे्रक की खबर दी थी?’’ दुर्रानी का लहजा अजीब सा था.
‘‘मैं हमेशा पैगाम दर्ज करा देता हूं.’’ मैं ने गौर से उस का चेहरा देखा. वह सोच में डूबा हुआ था. मैं ने फिर पूछा, ‘‘क्या सोच रहे हो?’’
‘‘हां, वह मर चुका है.’’ वह फोन ले कर टहलते हुए बाहर निकल गया. इतना मैं ने इतना जरूर सुना, ‘‘मामला डकैती का लगता है, पर कोई चीज मुझे खटक रही है. कहीं न कहीं कोई गड़बड़ है. हमें इस की बेटी को ढूंढ़ना है, वह पहले ही एक रिपोर्ट दर्ज करा चुकी है.’’
दुर्रानी पलट कर अंदर की जांच करने आया और कमरे की तरफ बढ़ गया. मैं ने अपनी ड्यूटी संभाल ली. प्राथमिक काररवाई के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर सब थाने लौट आए. मैं ने लौगबुक में उस वक्त की सारी बातें दर्ज कर दीं, जब मेरा रिलीवर आ गया तो मैं ने लौग बुक उसे सौंपते हुए कहा, ‘‘अंदर इंसपेक्टर दुर्रानी जांच में लगे हैं, मैं चलता हूं.’’
सुबह 6 बजे मैं पुलिस कार में घर के लिए निकल गया. घर पहुंच कर कपड़े बदल कर मैं गहरी नींद सो गया. अचानक मैं एक झटके से बिस्तर पर उठ बैठा. मुझे समझने में 2-3 सेकेंड लगे कि मैं कहां हूं? मुझे सब याद आ गया. ये मैं ने क्या कर दिया? एक पुलिस वाला हो कर प्यार में ये क्या कर बैठा? अभी मैं सोच में था कि दरवाजा धड़धड़ बजने लगा. आवाजें भी आ रही थीं.
‘‘इंसपेक्टर जमाल दरवाजा खोलो मैं इंसपेक्टर कामरान हूं.’’
मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा, मैं बड़बड़ाया, ‘‘ये कमबख्त यहां क्या लेने आ गया. इसे मेरी क्या जरूरत पड़ गई.’’ मैं ने जल्दी से शर्ट पहन कर दरवाजा खोला तो मेरे होश उड़ गए. कामरान के साथ 5-6 सिपाही घेरा बना कर खड़े थे. इंसपेक्टर कामरान ने मेरी कलाई खींच कर एक झटके से मुझे बाहर घसीट लिया. मैं ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की तो उस ने मेरा बाजू मरोड़ कर मेरा हाथ पीठ से लगा दिया. फिर एक झटके से मेरे दोनों हाथों में हथकडि़यां लगा दीं. मैं लड़खड़ाया.
‘‘ये सब क्या हो रहा है?’’ मैं ने पूछा, तो इंसपेक्टर र्दुरानी ने आगे आ कर कहा, ‘‘जमाल, तुम्हें चुप रहने का हक हासिल है, तुम जो कहोगे वह तुम्हारे खिलाफ भी जा सकता है.’’
मुझे घबराहट होने लगी, सिर चकराने लगा. मुझे मेरे अधिकार बता कर पुलिस कार में धकेल दिया गया. मैं ने जाली में से सामने लगे आइने पर नजर डाली. एसपी सुहेल मुझे घूर रहा था, ‘‘ये तुम ने क्या कर डाला? पुलिस वाले हो कर ऐसा जुर्म?’’
मैं ने बेबसी से कहा, ‘‘सर, ये मेरे साथ क्या हो रहा है?’’
‘‘जमाल, बेवकूफों जैसी बातें न करो, न ही हमें उल्लू बनाओ. इन लोगों ने तुम्हें रंगे हाथों पकड़ा है. इन से बात कर के मामला तय करो, शायद सजा में कुछ कमी हो जाए.’’
‘‘सर, सच में मैं ने कुछ नहीं किया है.’’
‘‘इन के पास बतौर सुबूत तुम्हारी वीडियो मौजूद है.’’
‘‘ऐसा कैसे हो सकता है सर.’’
‘‘लगता है डायमंड ने अपने बंगले के अंदर बाहर खुफिया कैमरे लगा रखे थे. मैं ने वह वीडियो टेप खुद देखी है, जिस में सफेद लबादे, ब्राउन टोपी में तुम सारी हरकतें कर रहे हो. तुम्हारे एक्शन और फोटो एकदम साफ आए हैं. लबादे से भी तुम्हारी पहचान छिप न सकी, क्योंकि चेहरा बिलकुल साफ नजर आ रहा था. पहचानने में कोई मुश्किल नहीं हुई, अब झूठ मत बोलो.’’
सदमे और हैरत से मेरी हालत खराब हो गई. मैं आंखें गाड़े आतीजाती गाडि़यों को देख रहा था.
मुझे अपने पकड़े जाने का यकीन ही नहीं हो रहा था. ये कैसे हो गया? मुझे लग रहा था ये एक डरावना सपना है, जल्द ही मेरी आंख खुल जाएंगी, फिर मैं इस ख्वाब पर खूब हंसूंगा. हेड क्वार्टर पहुंच कर एसपी सुहेल ने उतरने में मेरी मदद की. वह शुरू से मुझ पर मेहरबान था. हां, कामरान और र्दुरानी से जरूर मेरी तनातनी चलती रहती थी. पर इस में कोई शक नहीं कि दोनों ही बेहद जमीन और अपने काम और ड्यूटी में परफेक्ट थे. मैं शर्मसार सा सीढि़यां चढ़ कर औफिस में आया. मेरी नजरें जमीन पर गड़ी हुई थीं. मेरे साथियों की नजरें मेरे चेहरे पर तीर सी चुभ रही थीं. मैं हैरान था कि वह…
‘‘ये वही है, वही है, ओ माय गाड.’’ एक जानीपहचानी आवाज सुन कर मुझे झटका सा लगा. मेरी निगाहें कमरे में घूम गईं. ‘वह’ वहां मौजूद थी. एक सिपाही उस की हिफाजत के लिए तैनात था.
वह सोनिया थी और हाथ उठा कर मेरी तरफ इशारा कर रही थी, साथ ही उस की आंखों से आंसू भी बह रहे थे. वह रोतेरोते कह रही थी, ‘‘यही है वह आदमी. जो मेरा पीछा करता था.’’ फिर एकदम मेरी तरफ देख कर चीखते हुए मुझ पर झपटी, ‘‘तुम कमीने हो, तुम ने मेरे बाप को कत्ल किया है. मेरे बाप को कत्ल कर के तुम ने मुझे अनाथ कर दिया, तुम खुद भी मौत के पंजे से नहीं बच सकोगे. तुम्हारा अंत भी बुरा होगा.’’
मैं ने अपनी आंखें खोल दीं. मेरे हाथ में हथकड़ी थी. सुहेल मेरे सामने था, मैं ने एकदम घबरा कर पूछा, ‘‘मुझे क्या हो गया था?’’
‘‘तुम बेहोश हो कर गिर पड़े थे.’’
मैं ने अपना बदन समेटा और उठते हुए कराह कर कहा, ‘‘ये सब क्या हो रहा है, ये कैसा मजाक है?’’
‘‘अगर ये मजाक है तो इस में सब से ज्यादा मजा सामने खड़ी लड़की उठा रही है, जिस ने तुम पर इल्जाम लगाया है.’’ एसपी सुहेल ने कहा.
‘‘सोनिया.’’ मैं ने हैरान हो कर कहा.
‘‘तुम इसे जानते हो?’’ उस ने पूछा.
‘‘इस के साथ मेरा इश्क चल रहा है.’’ मैं ने कहा.
‘‘सुहेल ने सिर को झटका दिया और हंस पड़ा.’’
‘‘यह बात जज को बताना शायद वह कुछ करे.’’
‘‘ये सच है.’’ मैं ने गंभीरता से कहा.
‘‘किसी का पीछा करना, फिर उस से इश्क करना एक ही बात नहीं हो सकती जमाल. सोनिया अभी बहुत दुखी है, बाप के मरने का सदमा है. पर जब उसे पता लगेगा कि उसे पूरी जिंदगी कुछ करने की जरूरत नहीं है. तो उस के आंसू सूख जाएंगे. वह करोड़ों की एकलौती वारिस है. पता चला है कि उस का बाप फालतू खर्चों के लिए उसे ज्यादा पैसे नहीं देता था. पर एक अच्छा बाप था. अब इतना छोड़ गया है कि दोनों हाथों से लुटाएगी तो भी कम नहीं पड़ेगा.’’
एसपी सुहेल ने पूरी बात बताई. मैं मुंह फाड़े उस की सूरत ताकने लगा. उस ने आगे कहा, ‘‘जमाल तुम ने उस की तकदीर बना दी, कहां वह थोड़े से पैसों के लिए तरसती थी, अब बेशुमार दौलत की अकेली मालिक है. और ये दौलत तुम ने अपने हाथों से उस की झोली में डाली है, उस के बाप को कत्ल कर के. उस की राह का रोड़ा हटा कर. क्या खूब काम किया तुम ने.’’
मेरा मुंह खुला का खुला रह गया. मेरे दिमाग में वह सारी बातें घूमने लगीं जो सोनिया ने मुझ से कही थीं अब सब कुछ साफसाफ मेरी समझ में आ गया. कितनी आसानी से उस ने मोहब्बत का नाटक कर मुझे उल्लू बनाया. उस का बाप उसे मनमाना खर्च नहीं देता था. कितनी चालाकी से उस पर झूठा घिनौना इल्जाम लगा कर उस ने मुझे उस के कत्ल के लिए उकसाया. उस ने जो कुछ मुझ से कहा था, सब झूठ था. इस झूठ में उस ने अपने बाप को भी नहीं छोड़ा. उस ने अपना मकसद हासिल करने के लिए मुझे बेवकूफ बनाया. उस ने बाप पर घिनौना इलजाम लगा कर उसे एक शैतान एक दरिंदा बना कर मेरे सामने पेश किया, जिस बात ने मुझे जुनूनी बना दिया और मैं एक जघन्य अपराध कर बैठा.
सोनिया ने अपने बाप के साथसाथ मुझे भी रास्ते से हटा दिया था ताकि उस के गुनाह का कोई सुबूत, कोई गवाह न रहे. उस ने वीडियो कैमरे के बारे में मुझे न बता कर मेरी मौत का सामान कर दिया. कितनी चालाकी से उस ने मेरे खिलाफ साजिश की और मैं एक पुलिस वाला होने के बावजूद उस की मोहब्बत की खातिर उस के इशारों पर नाचता रहा और अपने आप को बरबाद कर बैठा. उस की सारी बातें झूठ थीं सिवाय एक बात के कि मोहब्बत तकलीफ देती है. उस की झूठी मोहब्बत और बेवफाई ने मुझे बेमौत मार दिया. Hindi Crime Story






