Best Crime Story: देवेंद्र को जहां सहानुभूति और आत्मीयता की जरूरत थी, वहीं ममता को धैर्य और विश्वास  की. आखिर  ऐसा क्या हुआ  था कि न उसे सिंपथी मिली   और न वह धैय से काम ले  सकी. कुछ दिनों पहले कानपुर के एक नामीगिरामी इंजीनियरिंग संस्थान के गर्ल्स हौस्टल में कुछ ज्यादा ही चहलपहल थी, क्योंकि अगले दिन रविवार होने की वजह से संस्थान में छुट्टी थी. अधिकतर लड़कियां हौस्टल के बरामदे में बैठी गपशप कर रही थीं तो कुछ अगले दिन पिकनिक मनाने का प्रोग्राम बना रही थीं. अचानक किसी लड़की के चीखने की आवाज ने सभी को चौंका दिया.

लड़कियां यह जानने की कोािशश करने लगीं कि चीख की आवाज आई कहां से. काजोल, ज्योति और निशा अपनेअपने कमरे से निकल कर बाहर आईं. काजोल ने कहा, ‘‘शायद आवाज कमरा नंबर 212 से आई है.’’

वह कमरा एमटेक की छात्रा ममता शुक्ला का था. ज्योति और निशा ने ममता को आवाज दे कर दरवाजा खटखटाया. लेकिन कमरे के अंदर से कोई जवाब नहीं आया. दरवाजा अंदर से बंद था. तब तक कई अन्य लड़कियां वहां आ गई थीं. उन में से एक लड़की ने कहा, ‘‘रोशनदान से झांक कर देखो कि ममता दरवाजा क्यों नहीं खोल रही है.’’

कुछ लड़कियां एक मेज उठा लाईं. मेज पर कुरसी रख कर 2 लड़कियों ने उसे मजबूती से पकड़ लिया. दीप्ति ने कुरसी पर खड़े हो कर दरवाजे के ऊपर लगे रोशनदान से अंदर झांका. लेकिन कमरे के अंदर कुछ दिखाई नहीं पड़ा. तब दीप्ति ने रोशनदान का शीशा तोड़ दिया और अंदर हाथ डाल कर दरवाजे की सिटकनी खोल दी. दरवाजा खुलते ही काजोल और ज्योति कमरे के अंदर गईं. अंदर का दृश्य देख कर वे स्तब्ध रह गईं. तब तक दीप्ति और अन्य कई लड़कियां भी अंदर पहुंच गईं. अंदर का हाल देख कर सभी डर गईं. दीप्ति ने सभी लड़कियों को कमरे से बाहर निकाल कर दरवाजा बाहर से बंद कर दिया. उस ने निशा और ज्योति को दरवाजे के बाहर रुकने को कहा और खुद काजोल के साथ वार्डन को सूचना देने चल पड़ी.

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