Meerut Triple Murder. रिया ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को काबू में रख कर साधारण जिंदगी जी होती और गुप्ता दंपति ने भी उस के गलत काम में उस का साथ न दिया होता तो जो हुआ, शायद इस की नौबत नहीं आती.
उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ में तरहतरह की वारदातों का होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन 18 जून, 2016 की शाम एक ऐसी वारदात हुई, जिस ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी. वह वारदात थी नौचंदी थानाक्षेत्र के पौश इलाके शास्त्रीनगर में बेरहमी से हुए 3 कत्ल. कत्ल इतनी क्रूरता से किए गए थे कि शहरवासी दहशत में आ गए. खबर मिलने पर मकान के बाहर सैकड़ों लोग एकत्र हो गए.
जिस मकान में वारदात हुई थी, वह चंद्रशेखर गुप्ता का था. वह नैशनल इंश्योरेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर थे और उन की तैनाती सहारनपुर जिले में थी. शनिवार व रविवार को छोड़ कर वह प्रतिदिन रेल से अपने औफिस जातेआते थे. उन के परिवार में पत्नी पूनम गुप्ता के अलावा एक बेटी और एक बेटा था. बेटी बड़ी थी, जिस का वह विवाह कर चुके थे. वह डाक्टर थी. बेटा नोएडा में एक कंपनी में बतौर सौफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी करता था.
गुप्ता परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह समृद्ध था. घर में चंद्रशेखर ही पत्नी के साथ रहते थे. 3-3 हत्याओं की वारदात का पता तब चला था, जब पड़ोसी युवक अमित वहां पहुंचा था. उसी के शोर मचाने पर वहां भीड़ उमड़ पड़ी थी. भीड़ में से किसी व्यक्ति ने पुलिस को इस वारदात की सूचना दे दी थी.
वारदात बड़ी थी, लिहाजा मौके पर थाना पुलिस के अलावा आईजी सुजीत पांडेय, डीआईजी लक्ष्मी सिंह, एसएसपी जे. रविंदर गौड़, एसपी (सिटी) ओमप्रकाश, सीओ बी.एस. वीरकुमार और थानाप्रभारी हरशरण शर्मा समेत अन्य अधिकारी व कई थानों की पुलिस वहां पहुंच गई थी.






