Uttar Pradesh Crime: अमनमणि त्रिपाठी ने घर वालों की मरजी के बिना संभ्रांत परिवार की लड़की सारा सिंह से कोर्टमैरिज तो कर ली लेकिन बाद में ऐसे क्या हालात हुए कि वह उस से किनारा करने की सोचने लगा? फिर एक दिन…

पौ फटते ही सूरज की किरणें धरती को चूमने लगी थीं. चिडि़यों के मधुर कलरव से फिजाएं गूंज उठी थीं. कलियां भी मुसकान बिखरने लगी थीं तो वहीं चंचल मकरंद कलियों पर मंडराने लगे थे. चिडि़यों के मीठे स्वर जब सारा के कानों से टकराए तो वह अंगड़ाइयां लेती हुई बिस्तर से उतरी और तरोताजा होने के लिए गुसलखाने की ओर बढ़ी. कुछ देर बाद वहां से लौटी तो दीवार पर टंगी घड़ी पर नजर दौड़ाई. उस वक्त सुबह के साढ़े 6 बज रहे थे. फिर एक नजर घर में दौड़ाई, घर के बाकी लोग सो रहे थे.

फटाफट तैयार हो कर उस ने नाश्ता किया. उस समय वह बहुत खुश थी. बारबार दीवार घड़ी पर नजर डाल कर वह दरवाजे से ही सड़क की तरफ इस तरह से देखती जैसे उसे किसी के आने का इंतजार हो. दरवाजे से आ कर वह बेचैनी से लौन में चहलकदमी कर ने लगती. उस की जूतियों की खटपट से सारा की मां सीमा सिंह की नींद टूट गई.

बेटी को अलसुबह तैयार हुआ देख कर उन्होंने उस से पूछा, ‘‘बेटी, इतनी जल्दी तैयार हो कर कहां जा रही हो? रात तुम ने मुझे बताया नहीं कि सुबह तुम्हें कहीं जाना है?’’

‘‘जी मां, मैं बताना भूल गई थी. दरअसल बात यह है कि शादी की दूसरी सालगिरह पर अमन ने दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला जाने का कार्यक्रम बनाया है. आज हम पहले दिल्ली जाएंगे. फिर वहां से आगे की तैयारी करेंगे.’’

‘‘ठीक है, बेटा. जाओ, पर इतना लंबा सफर तुम कैसे तय करोगे?’’ सीमा सिंह बोलीं.

‘‘मां, हम ने इस बार कार से जाने का मन बनाया है.’’ सारा मां को बता रही थी कि उसी समय उसे दरवाजे के बाहर किसी गाड़ी के आने की आवाज आई. वह कमरे से दरवाजे की तरफ गई. वहीं से वह चहक कर बोली, ‘‘मां गाड़ी आ गई.’’

सीमा सिंह ने बाहर की तरफ देखा तो एक कार के पास सफेद कमीज पहने दामाद अमनमणि त्रिपाठी खड़ा था. सारा अपना सूटकेस उठा कर मां को ‘बाय’ कहती हुई घर से निकल कर सफेद रंग की मारुति स्विफ्ट कार नंबर यूपी-53-बीआर-0060 में जा कर बैठ गई. सास को बायबाय कर के अमनमणि वहां से चला गया. इस के बाद अमनमणि ने कार दिल्ली की ओर दौड़ा दी. यह बात 9 जुलाई, 2015 की है. सीमा सिंह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर के घोसडि़या चौराहे के पास स्थित आलीशान कोठी में अपने परिवार के साथ रहती थीं.

उन के परिवार में 4 बच्चे थे, जिन में बेटी सारा तीसरे नंबर की थी. सीमा सिंह के पति अशोक कुमार सिंह की कई साल पहले स्वाभाविक मौत हो चुकी थी. उन की मौत के बाद बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी सीमा सिंह के कंधों पर आ गई थी. सीमा सिंह कोई मामूली हैसियत वाली महिला नहीं थीं. वह अधिवक्ता के अलावा अखिल भारतीय कांगे्रस पार्टी की सदस्य भी थीं. वह एक रईस खानदान की बहू थीं. धनदौलत की उन के घर में कोई कमी नहीं थी. बेटी सारा चंचल और बला की खूबसूरत थी. अपने आजादखयाल के चलते ही सारा सिंह ने कद्दावर नेता अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि त्रिपाठी से अलीगंज स्थित आर्य समाज मंदिर में 27 जुलाई, 2013 को शादी की थी.

शादी की दूसरी सालगिरह को यादगार बनाने के लिए वह पति के साथ घूमने निकली थी. वैसे सारा लंबी दूरी की यात्रा हवाई जहाज से ही करती थी. लेकिन आज लंबे सफर के लिए कार से निकलने पर सीमा सिंह को हैरानी हुई. उसी दिन सीमा सिंह अपने बच्चों के साथ दोपहर का खाना खा रही थीं कि उसी बीच उन के छोटे बेटे सिद्धार्थ सिंह के मोबाइल पर किसी अंजान नंबर से काल आई. सिद्धार्थ ने जैसे ही उस काल को रिसीव किया, काल डिसकनैक्ट हो गई. कुछ क्षण बाद उसी नंबर से फिर काल आई. सिद्धार्थ ने जैसे ही ‘हैलो’ कहा, दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘तुम्हारे बहनोई का एक्सीडैंट हो गया है.’’ इतना कहने के बाद दूसरी ओर से फोन डिसकनैक्ट हो गया.

सिद्धार्थ कुछ समझ नहीं पाया. उस ने मोबाइल मां की तरफ बढ़ाते हुए कहा कि किसी ने फोन कर के बताया है कि बहनोई का एक्सीडैंट हो गया है. बेटे के मुंह से एक्सीडैंट की बात सुन कर सीमा अचंभित हुई. क्योंकि अमनमणि के साथ उन की बेटी सारा भी थी.

बेटी की चिंता करते हुए वह उसी नंबर को रिडायल करने लगीं, जिस नंबर से बेटे के मोबाइल पर फोन आया था. वह नंबर मिला ही रही थीं कि उसी दौरान उन के मोबाइल पर सारा के मोबाइल से काल आई. सीमा सिंह ने झट काल रिसीव कर के कहा, ‘‘हैलो, बेटा सारा, क्या हुआ?’’

‘‘मम्मी सारा नहीं, मैं अमन बोल रहा हूं,’’ रोते हुए अमन बोला, ‘‘मम्मी हमारे साथ बड़ी दुर्घटना घट गई है.’’

‘‘रोओ मत बेटा, बताओ क्या हुआ?’’ सीमा सिंह बोलीं.

‘‘मम्मीजी, सारा अब इस दुनिया में नहीं रही. मैं इस के बिना कैसे जीऊंगा.’’ इतना कह कर अमनमणि बिलख-बिलख कर रोने लगा.

बेटी की मौत की खबर सुन कर सीमा सिंह एकदम सन्न रह गईं. वह बोलीं, ‘‘यह तुम क्या कह रहे हो?’’

रोतेरोते अमनमणि त्रिपाठी ने उन्हें बताया कि फिरोजाबाद के पास सिरसागंज इलाके में उस की कार का एक्सीडैंट हो गया.

‘‘नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, यह झूठ है.’’ कहते हुए वह भी रोने लगीं. बहन की मौत की खबर पर सिद्धार्थ की आंखों से भी आंसू टपकने लगे.

सिद्धार्थ ने यह खबर बड़े भाई हर्ष को भी फोन कर के दे दी. वह शहर में किसी काम से निकला था. बड़े बेटे के घर आने के बाद सीमा सिंह बेटे व अपने शुभचिंतकों के साथ फिरोजाबाद के लिए रवाना हो गईं. शाम करीब 6-7 बजे वह फिरोजाबाद के सिरसागंज थाने पहुंच गईं. थानाप्रभारी अतर सिंह से उन्होंने बेटी और दामाद के बारे में पूछा. उन्होंने बताया कि एक्सीडैंट बहुत खतरनाक था. सारा की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी. उस की डेडबौडी पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दी गई है और अमनमणि को ऋषि कुमार पांडेय के अपहरण वाले मामले में हिरासत में ले लिया गया है. सीमा सिंह दामाद से मिलना चाहती थीं, लेकिन थानाप्रभारी ने मिलने से मना कर दिया.

सीमा सिंह की समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि पुलिस उन्हें दामाद से मिलने क्यों नहीं दे रही है? वह अमनमणि से मिल कर जानना चाहती थीं कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई? उन के काफी अनुरोध करने के बाद पुलिस ने उन्हें अमनमणि से मिलने की इजाजत दी. अमन को एक कमरे में कैद कर के रखा गया था. अमन ने सीमा सिंह को बताया कि गाड़ी तेज गति से जा रही थी कि अचानक सामने से साइकिल सवार एक लड़की आ गई. उस लड़की को बचाने के चक्कर में गाड़ी पलटी खा कर गिर गई और सारा सदा के लिए चिरनिद्रा में चली गई.

दामाद की बात सीमा सिंह के गले नहीं उतर रही थी. क्योंकि दुर्घटना में अमनमणि को भी थोड़ीबहुत चोट आनी चाहिए थी, लेकिन उस के शरीर पर एक खरोंच तक नहीं आई थी. उस के कपड़ों पर धूलमिट्टी ही लगी हुई थी, जबकि वह खुद भी उसी कार में था. सीमा सिंह को तब और आश्चर्य हुआ, जब उन्हें थाने में ही अमनमणि त्रिपाठी के बाबा पूर्व विधायक श्यामनारायणमणि त्रिपाठी सहित गोरखपुर के उस के तमाम शुभचिंतक मिले. यह आश्चर्य की बात इसलिए थी कि गोरखपुर से फिरोजाबाद वे लोग इतनी जल्दी कैसे पहुंच गए? इस से सीमा सिंह को लगने लगा कि यह दुर्घटना नहीं हो सकती, बल्कि उन की बेटी सारा को सुनियोजित तरीके से मारा गया है.

अमनमणि त्रिपाठी समाजवादी पार्टी का नेता था, इसलिए सूचना मिलते ही मीडिया से जुड़े लोग वहां पहुंच गए. मीडिया ने इस मामले को खूब उछाला, जिस से यह मामला हाई प्रोफाइल बन गया. घटना की सूचना मिलते ही सारा के मामा एस.के. रघुवंशी, जो अखिलेश सरकार में गृहसचिव के पद पर तैनात हैं, वह भी मौके पर पहुंच गए. उन्हें भी कार दुर्घटना पर संदेह हो रहा था. सारा सिंह के मायके वाले उस की मौत को साजिश के तहत की गई हत्या मान रहे थे. 2 दिनों बाद सारा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को मिली, जिस में सारा की मौत की वजह सिर और छाती में आई बड़ी चोट बताई गई.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के 9 दिनों बाद सीमा सिंह ने फिरोजाबाद के एसएसपी पीयूष श्रीवास्तव से मुलाकात की. उन्होंने उन्हें एक तहरीर देते हुए कहा कि उन की बेटी को इन लोगों ने एक साजिश के तहत मारा है. उस तहरीर के आधार पर एसएसपी ने सिरसागंज थाने में भादंवि की धारा 498ए, 302, 120बी के तहत अमनमणि त्रिपाठी, उस के पिता अमरमणि त्रिपाठी, मां मधुमणि त्रिपाठी आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया. सपा के युवा नेता अमनमणि त्रिपाठी और रसूख खानदान की बेटी सारा सिंह की दोस्ती कैसे हुई? दोस्ती के रास्ते वे पतिपत्नी के रिश्ते में कैसे बंधे? इन सवालों के जवाब पाने के लिए हमें इन के अतीत के पन्नों में झांकना होगा.

30 वर्षीय अमनमणि त्रिपाठी पूर्व मंत्री और मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में आजीवन सजा काट रहे सपा के कद्दावर नेता अमरमणि त्रिपाठी का बेटा है. अमनमणि के अलावा उन की 2 बेटियां थीं. अमनमणि दूसरे नंबर का था. अमरमणि त्रिपाठी की दोनों बेटियों को राजनीति से कोई सरोकार नहीं था, लेकिन बेटा अमनमणि त्रिपाठी पिता की राजनीतिक विरासत को आगे संभाल कर रखना चाहता था. पिता से ही उस ने राजनीति के सारे गुर सीख लिए थे. इस में उस के बाबा पूर्व मंत्री श्याम-नारायणमणि त्रिपाठी भीष्मपितामह के रूप में उस के साथ रहे.

धीरेधीरे अमनमणि का राजनीतिक कद बढ़ता गया. वह भी पिता के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मीपुर में लोगों का चहेता बनता गया. इस से अमनमणि लोकसभा चुनाव लड़ने की जुगत में लग गया. उस की मेहनत रंग लाई और पिछले लोकसभा चुनाव में उसे टिकट भी मिल गया. लेकिन उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा. उस के पिता के राजनीतिक बैरी कांगे्रस के कद्दावर नेता अखिलेश सिंह ने बाजी मार ली. चुनावी जंग में अमनमणि के साथ उस के खास दोस्त अमित कुमार उर्फ मानू पांडेय, संदीप त्रिपाठी, रवि शुक्ला, गौरव त्रिपाठी, संतोषमणि त्रिपाठी, आशीष शाही, राज त्रिवेदी, त्रिपुरारी मिश्रा, अनूप शंकर पांडेय, पंकज तिवारी, राजीव ऋषि तिवारी, के. सी. पांडेय, अरुण शुक्ला और अमरदीप शुक्ला ने जीजान से मेहनत की. ये हर वक्त साए की तरह उस के पीछेपीछे चलते रहे.

अमनमणि त्रिपाठी फेसबुक का शौकीन था. बात वर्ष 2012-13 की है. फुरसत के समय वह अपना काफी समय सोशल साइट फेसबुक पर बिताता था. सारा सिंह भी फेसबुक पर दोस्तों से बातें करती रहती थी. अमनमणि त्रिपाठी ने फेसबुक पर सारा सिंह का फोटो देखा तो उस की खूबसूरती पर वह ऐसा लट्टू हुआ कि उस ने उसी समय उसे अपने दिल में बसा लिया. अमनमणि त्रिपाठी के सब से करीबी कहे जाने वाले व्यवसाई मित्र दयालमुनि पांडेय थे. उस ने दयालमुनि पांडेय को सारा सिंह का फोटो दिखाते हुए अपने मन की बात बताई. दयालमुनि पांडेय सारा सिंह को अच्छी तरह से जानते थे. लिहाजा एक दिन उन्होंने सारा सिंह और अमनमणि का आमनेसामने परिचय करा दिया. उस के बाद अमनमणि और सारा सिंह के बीच दोस्ती हो गई.

बताया जाता है कि सारा सिंह की एक व्यवसाई से शादी पक्की हो चुकी थी. उसी बीच अमनमणि और सारा सिंह के बीच दोस्ती की जड़ें गहराई तक पहुंच रही थीं. लखनऊ में अमरमणि त्रिपाठी की लारेंस टैरेस, हजरतगंज में आलीशान कोठी थी.  गोरखपुर छोड़ कर अमनमणि त्रिपाठी लखनऊ रहने लगा. उन दोनों की दोस्ती प्यार में बदल चुकी थी. अमनमणि सारा को पागलपन की हद तक चाहने लगा था. सारा भी उस पर जान छिड़कती थी. पैसों की उस के पास कोई कमी नहीं थी. वह उस पर दोनों हाथों से पानी की तरह दौलत बहाने लगा था. उस पर इतना पैसा खर्च कर दिया कि उस का हाथ खाली हो गया. वह उसे बहुत ज्यादा चाहता था.

उस से सारा की दूरियां सही नहीं जाती थीं. वह जल्द से जल्द उस से शादी करना चाहता था. सारा का भी हाल कुछ ऐसा ही था. सारा ने अपनी प्रेम कहानी मां से बताई तो सीमा सिंह चौंक गईं. उन्होंने बेटी से कहा, ‘‘क्या तुम अमरमणि त्रिपाठी के बारे में जानती हो? वह मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. ऐसे आदमी से मैं रिश्ता कतई नहीं जोड़ सकती.’’

मां का टका सा जवाब सुन कर सारा असमंजस में पड़ गई कि वह क्या करे? उस ने यह बात अमनमणि को बताई तो उस ने साफ तौर पर कह दिया कि लोग उस के परिवार के बारे में बिना सिरपैर की बातें करते हैं. उसने सारा से कह दिया कि वह उसे बेपनाह मोहब्बत करता है और शादी उसी से करेगा. उस के बाद वह सारा पर शादी का दबाव बनाने लगा. सारा भी अमनमणि को चाहती थी, लेकिन मां वाली बात से वह फैसला नहीं ले पा रही थी. अंत में उस ने अमनमणि के शादी के प्रस्ताव को स्वीकार कर ही लिया. इस के बाद 27 जुलाई, 2013 को अलीगंज के आर्य समाज मंदिर में अमनमणि ने सारा सिंह से विवाह कर लिया. उस विवाह में अमनमणि के गांव के 2 दोस्त गवाह के रूप में मौजूद थे. दोनों ने ही इस शादी की भनक अपने घर वालों तक को नहीं लगने दी.

शादी के 10 दिनों बाद अमनमणि त्रिपाठी सारा से मिलने उस की आलीशान कोठी पर पहुंचा. उस वक्त सीमा सिंह घर पर मौजूद थीं और सारा अपने कमरे में थी. अपने यहां अमनमणि को देख कर सीमा चौंक गईं. वह सीमा सिंह से बोला, ‘‘आंटी सारा कहां है? मैं उसे लेने आया हूं.’’

‘‘लेने.’’ सीमा सिंह चौंकते हुए बोलीं, ‘‘तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे तुम्हारा उस पर कोई अधिकार हो.’’

‘‘हां अधिकार है, तभी तो कह रहा हूं. वह मेरी पत्नी है, यकीन न हो तो यह देख लो.’’ कह कर उस ने अपनी पैंट की जेब से मोबाइल फोन निकाला और उस ने मंदिर में सारा के साथ की गई शादी की फोटो दिखाए, जिस में वह सारा की मांग में सिंदूर भरता हुआ नजर आ रहा था.

फोटो देख कर सीमा सिंह को विश्वास नहीं हुआ. उन्होंने सारा को आवाज दी. मां की आवाज सुन कर सारा आई. उन्होंने अमनमणि द्वारा दिखाए फोटो के बारे में पूछा तो सारा ने सारी बात बता दी. बेटी का जवाब सुन कर उन्होंने अपना माथा पकड़ लिया. बेटी को जो करना था, सो वह कर चुकी थी. बात को तूल देने के बजाय सीमा चुप रहीं और अंत में उन्होंने उस रिश्ते को मजबूरी में स्वीकार कर लिया. लेकिन बेटी के इस फैसले से वह खुश नहीं थीं. समाज में सीमा सिंह की भी अपनी इज्जत थी. इस इज्जत को बनाए रखने के लिए वह सामाजिक रीतिरिवाज से यह शादी करना चाहती थीं.

इस संबंध में बात करने के लिए वह गोरखपुर पहुंच कर मैडिकल कालेज में अमनमणि के मातापिता अमरमणि त्रिपाठी और उन की पत्नी मधुमणि से मिलीं. सीमा सिंह ने उन से अमनमणि और सारा द्वारा कोर्ट में शादी करने की बात बताई तो वे भड़क गए. उन्होंने साफ कह दिया कि यह शादी हरगिज मंजूर नहीं है. सीमा के साथ अमनमणि भी था. बेटे की इस करतूत पर अमरमणि ने वहीं पर बेटे के 2-4 थप्पड़ भी जड़ दिए. बात न बनने पर सीमा सिंह वहां से वापस लखनऊ लौट गईं. अमनमणि भी उन्हीं के साथ लखनऊ आ गया. मांबाप से नाखुश अमनमणि 4 महीने तक गोरखपुर नहीं लौटा.

बेटे के इस कदम को अमरमणि त्रिपाठी अपनी बेइज्जती समझ रहे थे. उन्होंने और उन के रिश्तेदारों ने अमनमणि को समझाते हुए सारा से रिश्ता तोड़ने के लिए दबाव डाला, पर अमनमणि सारा को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ. संकट की इस घड़ी में अमनमणि के नजदीकी दोस्त मानू पांडेय ने उस की सब से ज्यादा मदद की. बाद में अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि को जब पता चला कि मानू ही अमनमणि की आर्थिक मदद कर रहा है तो अमरमणि ने मानू को आगाह करते हुए बेटे से दूर रहने की हिदायत दी. ऐसा न करने पर उसे मधुमिता शुक्ला जैसा हश्र करने की चेतावनी भी दे डाली.

मानू पांडेय अमरमणि त्रिपाठी के रुतबे से अच्छी तरह परिचित था. डर की वजह से उस ने अपने जिगरी दोस्त अमनमणि का साथ छोड़ दिया. वह उस से दूर हो गया. मानू के दूर होते ही अमनमणि की आर्थिक तंगी बढ़ गई. अमनमणि को पता नहीं था कि मानू उस से दूरी क्यों बना रहा है? वह मानू को जब भी बुलाता, वह कोई न कोई काम का बहाना बना देता था. मानू का यह व्यवहार उसे कतई पसंद नहीं था. इसी बात पर अमनमणि मानू से खफा हो गया.

दरअसल मानू पांडेय गोरखपुर जिले के थरुवापार गांव के रहने वाले ऋषि कुमार पांडेय का बेटा था. वैसे उस का नाम अमित कुमार पांडेय था, लेकिन प्यार से सब उसे मानू कहते थे. ऋषिकुमार पांडेय नगर निगम के रजिस्टर्ड ठेकेदार थे. मानू छात्र जीवन से ही नेता था. उसी दौरान वह बसपा के कद्दावर नेता रामभुआल निषाद के संपर्क में आया. इस के बाद उस का अनेक राजनीतिज्ञों के संपर्क होता गया. मानू पांडेय और अमनमणि के बीच दोस्ती होने की भी एक अलग कहानी है. बात 7 मई, 2012 की है. दोपहर के समय बाहुबली पप्पू निषाद नाम का प्रौपर्टी डीलर अपने मुकदमे की तारीख निपटा कर स्कौर्पियो से कचहरी से लौट रहा था. उस की गाड़ी में 5-6 लोग और सवार थे.

वह कचहरी से करीब 500 मीटर पूरब दिशा में पहुंचा था कि तभी 3 मोटरसाइकिलों पर सवार 6 जनों ने उस की कार को चारों तरफ से घेर लिया. उन के हाथों में हथियार थे. इस से पहले कि पप्पू निषाद कुछ समझ पाता, उन लोगों ने उस की गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. अपनी जान बचाने के लिए पप्पू निषाद गाड़ी से कूद कर छात्रसंघ चौराहे के पास स्थित मेगामार्ट में फिल्मी स्टाइल में शीशा तोड़ कर घुस गया. तब कहीं जा कर उस की जान बची. पप्पू निषाद ने इस मामले में पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद, उस के भाई मनोज निषाद के अलावा सूरज निषाद, मनीष कन्नौजिया, रामजीत यादव, गुड्डू कटाई और दिनेशचंद यादव को नामजद किया था.

लेकिन पुलिस तफ्तीश में अमित कुमार पांडेय उर्फ मानू पांडेय का नाम भी सामने आ रहा था. पुलिस ने नामजद आरोपियों को तो गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था, लेकिन मानू पांडेय का कहीं पता नहीं लग पा रहा था. उस की तलाश में पुलिस जीजान से जुटी थी. पुलिस से बचने के लिए मानू इधरउधर छिप रहा था. उसी दौरान उस के दोस्तों ने सलाह दी कि समाजवादी पार्टी के किसी कद्दावर नेता की मदद ली जाए तो बात बन सकती है. क्योंकि प्रदेश में सपा की सरकार थी. मानू सोचने लगा कि वह किस नेता से संपर्क करे. मानू के नाना हड़बड़ शुक्ला अमरमणि त्रिपाठी का कारोबार पिछले 25 सालों से देख रहे थे. उन दिनों अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि त्रिपाठी की राजनीति भी चमक रही थी. मानू अमनमणि से परिचित तो था, लेकिन संबंध ज्यादा गहरे नहीं थे.

नाना की मार्फत मानू की जब अमनमणि से मुलाकात हुई तो मानू ने उसे अपनी परेशानी बताते हुए मदद मांगी. बताया जाता है कि अमनमणि के संपर्क में आने के बाद पुलिस मानू को गिरफ्तार नहीं कर पाई. इस के बाद उन दोनों की दोस्ती काफी मजबूत हो गई थी. लेकिन इस गलतफहमी की वजह से उन के बीच दूरियां बढ़ गई थीं. उसी दौरान एक नई घटना घट गईं अमनमणि और सारा की शादी के समय मांग में सिंदूर भरते हुए फोटो फेसबुक पर किसी ने डाल दी. फिर वहीं से वह फोटो स्थानीय अखबार हिंदुस्तान ने अपने सभी संस्करणों में छाप दी. फोटो छपते ही अमनमणि बौखला गया.

उसे पता था कि शादी की यह फोटो मानू के अलावा और कि॒सी के पास नहीं है. इसलिए उसे विश्वास हो गया कि यह सब मानू पांडेय ने ही किया होगा. उस ने तय कर लिया कि वह उसे इस का सबक जरूर सिखाएगा. मानू पांडेय और अमनमणि त्रिपाठी की दोस्ती में दरार पड़ चुकी थी. यह दरार उन्हें दुश्मनी के मुकाम तक ले गई. अमनमणि त्रिपाठी एक रसूखदार बाप की औलाद था. बताया जाता है कि मानू की हत्या के लिए उस ने शूटर लगा दिए. अपनी जान की सलामती के लिए मानू और उस के घर वाले भूमिगत हो गए. उन के इधरउधर रहने के बाद उन का अंधियारीबाग वाला मकान खाली पड़ा था.

मौके का फायदा उठाते हुए अमनमणि ने उस मकान पर कब्जा जमा लिया. मानू को जब पता चला तो वह उस से अपना मकान खाली कराने में लग गया. एक साल की कड़ी मशक्कत के बाद उसे अपना मकान वापस मिला. उसी दौरान मानू की मां शीला पांडेय की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. उन्हें एक गंभीर बीमारी हुई थी. मानू पांडे और उस का बड़ा भाई अनुराग पांडेय दिल्ली में अपनी बहन के पास थे. दोनों भाइयों ने अपने पिता से कह दिया कि वह मां को दिल्ली ले कर आ जाएं. तब ऋषि पांडेय अपनी स्कौर्पियो से पत्नी को दिल्ली के लिए ले कर चल दिए.

5 अगस्त, 2014 की रात को मानू की मां शीला की तबीयत बेहद नाजुक हो गई. उस समय ऋषि पांडेय और उन की बड़ी बहू प्रियंका ही घर पर थे, वे उन्हें ले कर दिल्ली के लिए निकल गए. उन्होंने आक्सीजन मास्क लगवा दिया था, ताकि रास्ते में शीला को कोई परेशानी न हो. कहीं से यह सूचना अमनमणि त्रिपाठी को मिल गई तो वह अपने साथियों संदीप त्रिपाठी व रवि शुक्ला के साथ लालबत्ती लगी फौरच्यूनर गाड़ी से निकल गया. रात डेढ़ बजे के करीब लखनऊ के आवास विकास मुख्यालय के सामने उस ने अपनी गाड़ी ऋषि पांडे की गाड़ी के सामने रोक दी और पिस्टल की नोक पर ऋषि पांडेय का अपहरण कर के अपनी गाड़ी में बैठा लिया.

पत्नी की सीरियस हालत का हवाला देते हुए ऋषि पांडेय ने छोड़ने की काफी मनुहार की, लेकिन अमनमणि का दिल नहीं पसीजा. वह उन्हें हजरतगंज में स्थित अपनी कोठी में ले गया. वहां ले जा कर उस ने ऋषि पांडेय को एक कमरे में बंद कर दिया. उन तीनों ने उन की जम कर धुनाई की. फिर अमनमणि ने उन से 1 लाख रुपए की मांग की. वह जानता था कि पत्नी के इलाज के लिए दिल्ली जा रहे हैं तो उन के पास पैसे जरूर होंगे. अमनमणि त्रिपाठी उन पर पैसों के लिए दबाव बना रहा था कि तभी पता नहीं उस के दिमाग में क्या बात आई कि उस ने उन्हें अपने घर में रखना उचित नहीं समझा. उसी वक्त उन्हें गाड़ी में बैठा कर दूसरे ठिकाने पर ले जाने लगा. वह बीच रास्तें में था कि उस के किसी दोस्त का फोन आया.

उस ने बताया कि पुलिस को तुम्हारे बारे में पता चल चुका है. फोन आते ही अमनमणि ने अपनी योजना बदल दी. उस ने अपनी गाड़ी का रुख वीवीआईपी इलाके की तरफ कर दिया और वहीं पर चलती गाड़ी से धक्का मार कर उन्हें गिरा दिया और साथियों सहित फरार हो गया. उधर अनुराग पांडेय की पत्नी प्रियंका ने अपने ससुर के अपहरण की खबर पुलिस के अलावा दिल्ली में मौजूद अपने पति और देवर को दे दी थी. पिता के अपहरण की सूचना मिलते ही अनुराग और मानू रात में ही कार से लखनऊ के लिए रवाना हो गए. पुलिस भी ऋषि पांडेय को खोजने में जुट गई.

आखिर रात 3 बजे के करीब ऋषि पांडेय वीवीआईपी इलाके में सड़क के किनारे पड़े मिल गए. उन्होंने पुलिस को बता दिया कि अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि त्रिपाठी ने ही अपने साथियों के साथ मिल कर उन का अपहरण किया था. जिस इलाके में ऋषि पांडेय मिले थे, वह इलाका थाना कैंट क्षेत्र में आता था. इसलिए वहीं पर अमनमणि त्रिपाठी, रवि शुक्ला और एक अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 304, 386, 323, 504, 506 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी.

पुलिस ने थोड़े प्रयास के बाद रवि शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया. उस से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया. 30 अगस्त, 2014 को पुलिस ने उस के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया. पुलिस की पकड़ से अमनमणि त्रिपाठी और संदीप त्रिपाठी अभी भी दूर थे. पुलिस संदीप त्रिपाठी के ऊपर 5 हजार रुपए इनाम भी घोषित कर चुकी थी. 20 दिसंबर, 2014 को उत्तर प्रदेश एसटीएफ की गोरखपुर इकाई के प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह ने संदीप त्रिपाठी को गोरखपुर के खोराबार इलाके के खिरवनिया गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया. उस के अन्य साथी भागने में सफल रहे.

टीम ने उस के कब्जे से एक पिस्टल, 5 कारतूस, 3 मोबाइल फोन और 6 सिम बरामद किए. 22 दिसंबर, 2014 को पुलिस ने उस के खिलाफ भी न्यायलय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया. तीसरे आरोपी अमनमणि की पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही थी. मार्च, 2015 में विधानसभा अध्यक्ष माताप्रसाद पांडेय का एक कार्यक्रम सिद्धार्थनगर जिले में आयोजित हुआ. वहां प्रदेश के बड़ेबड़े नेता पहुंचे थे. मंत्री शिवपाल यादव के ठीक बगल वाली सीट पर अमनमणि त्रिपाठी भी नजर आया तो प्रैस फोटोग्राफरों ने उस का फोटो खींच लिया.

दूसरे दिन समाचार पत्रों में इस तसवीर को प्रमुखता से छापा गया. पुलिस फिर उसे गिरफ्तार करने के लिए सक्रिय हुई तो वह फिर से भूमिगत हो गया. अदालत ने अमनमणि त्रिपाठी को भगोड़ा घोषित कर दिया. इस के बाद पुलिस ने अदालत से उस के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 82/83 (कुर्की) आदेश करा कर उस के गोरखपुर के कोतवाली इलाके के दुर्गाबाड़ी रोड आवास पर नोटिस चस्पा कर दिया. इस बीच सारा, पति की हकीकत जान चुकी थी. उसे जब पता चला कि उस का पति आपराधिक छवि का है तो उस के दिल को काफी ठेस पहुंची.

उस ने पति को समझाने की काफी कोशिश की कि वह गुनाह के रास्ते से तौबा कर के अच्छे रास्ते पर चले, पर वह पत्नी की बात एक कान से सुन कर दूसरे से निकाल देता. जब वह यही बात बारबार कहती तो वह उस की पिटाई कर देता. सारा यह सारी बातें मां से कह देती थी, तब सीमा सिंह नाराज होते हुए अमनमणि को फटकार सुनाती थी. ऐसा कई बार हुआ था. जब वह सारा की आए दिन पिटाई करने लगा तो सीमा सिंह ने गोमतीनगर में एक फ्लैट किराए पर दिलवा दिया और कहा कि जब तक तुम्हारे मांबाप इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर लेते, तब तक तुम सारा को ले कर वहां रह सकते हो. लेकिन अमनमणि ने ऐसा नहीं किया.

वह इधरउधर रह कर सिर छिपाता रहा तो सारा मायके में रही. धीरेधीरे सारा और अमन के बीच दूरियां बढ़ती गईं. दूरियां बढ़ने की एक वजह यह भी थी कि अमन उस पर शक करने लगा था कि उस की पत्नी का झुकाव कहीं उसी व्यवसाई की ओर तो नहीं हो रहा है, जिस से उस की शादी होने वाली थी. शक के दौरान वह मौका मिलने पर पत्नी के दोनों मोबाइल के चारों नंबरों की काल डिटेल्स चेक करता रहता था. कोई भी नंबर उसे अंजान लगता तो वह उसे ले कर सारा के साथ झगड़ा और मारपीट करता. इन सब के पीछे खास वजह यह थी कि वह जान चुका था कि उस की सच्चाई पत्नी के सामने खुल चुकी है. वह उस की आपराधिक छवि को जान चुकी है.

पति से आजिज हो कर सारा मां से कहने लगी कि वह किसी तरह से अमनमणि से तलाक दिला दें. वह उस के साथ जीवन नहीं बिता सकेगी. रातरात भर वह अवारा दोस्तों के साथ घूमता है. बेटी की बात सुन कर सीमा सिंह को काफी आघात पहुंचा था. उन्होंने बेटी को तलाक दिलाने का फैसला ले लिया. बेटी ने जो गलती की थी, उस की सजा उसे मिल चुकी थी. इसलिए एक दिन उन्होंने अमनमणि को समझाते हुए कहा कि वह सारा को तलाक दे दे. अमनमणि ने उस समय तो उन की बात का जवाब नहीं दिया, पर बाद में उस ने सारा से कह दिया कि वह चाहे जो कर ले, पर उसे किसी कीमत पर तलाक नहीं देगा. यह बात जून, 2015 की थी.

उस के बाद पता नहीं क्या हुआ कि अचानक अमनमणि के व्यवहार में परिवर्तन आ गया. उस ने सीमा सिंह से वादा किया कि वह सारा को अब कोई परेशानी नहीं होने देगा, उसे बड़े प्यार से रखेगा. उस पर कभी हाथ भी नहीं छोड़ेगा. यही नहीं, उस ने हमेशाहमेशा के लिए अपने मांबाप का घर छोड़ने का भी वादा कर लिया. पति के अंदर आए इस बदलाव से सारा काफी खुश हुई. कोमल दिल की सारा ने पति को माफ कर दिया और नए तरीके से जिंदगी शुरू करने के ख्वाब देखने लगी.

अमन ने उस से कहा कि वह पिछली सालगिरह पर कोई खुशी नहीं मना पाया. उन की खुशियों में कोई भी शामिल नहीं हुआ. इस बार वह सालगिराह बड़ी धूमधाम से मनाएगा. उस ने इस मौके पर दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला घूमने का प्रस्ताव सारा के सामने रखा तो सारा ने हां कर दी. वह बड़ी खुश थी. लेकिन उसे क्या पता था कि जो खुशी पाने के लिए वह फूली नहीं समा रही, वह खुशी उसे कभी नहीं मिलेगी. पूरी योजना बनाने के बाद 9 जुलाई, 2015 की सुबह सफेद कलर की मारुति स्विफ्ट कार ले कर अमनमणि सारा की कोठी के सामने पहुंच गया. सारा चहकते हुए उस में बैठ गई.

अमनमणि उसे ले कर लखनऊ से दिल्ली जाने के लिए कह कर निकला. और दिन के एक बजे के करीब फिरोजाबाद के सिरसागंज इलाके में एक लड़की को बचाने के चक्कर में एक्सीडैंट हो गया. सारा की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, लेकिन अमन को एक खरोंच तक नहीं आई. बहरहाल, घटना के बाद पुलिस ने अमनमणि त्रिपाठी को ऋषिकुमार पांडेय के अपहरण के केस में गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस को उस की पिछले 11 महीने से तलाश थी. मृतका सारा सिंह की मां सीमा सिंह से टेलीफोन पर बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि सारा की दुर्घटना में हुई मौत एक बड़ा षडयंत्र है.

यह स्वाभाविक मौत नहीं, बल्कि सीधेसीधे हत्या है. यह हत्या पूर्व मंत्री और आपराधिक छवि के सपा नेता अमरमणि त्रिपाठी और उन की पत्नी मधुमणि त्रिपाठी ने मिल कर की है. जिस क्षेत्र में घटना घटी है, उस के आसपास का क्षेत्र अमरमणि के प्रभाव वाला है. उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में अमरमणि के रिश्तेदार भी रहते हैं. उन्होंने इस की सीबीआई जांच कराने की मांग की है.

कथा लिखे जाने तक मामले की जांच थाना पुलिस कर रही थी. कथा संकलन तक प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति नहीं की थी. Uttar Pradesh Crime

—कथा में दयालमुनि पांडेय परिवर्तित नाम है, कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.

 

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