Gangster Story: बंबीहा गैंग और लारेंस बिश्नोई गैंग के बीच बनी दुश्मनी अब चरम पर है. बंबीहा गैंग का आरोप है कि उस ने कबड्ïडी प्लेयर कंवर दिग्विजय सिंह की हत्या इसलिए कराई, क्योंकि वह लारेंस बिश्नोई गैंग के लिए पैसों की उगाही में मदद करता था. जबकि लारेंस गैंग इस के पीछे की सच्चाई कुछ और ही बता रहा है. अब देखना यह है कि क्या पंजाब पुलिस इन गैंगस्टरों पर लगाम कस पाएगी?

15 दिसंबर, 2025 सोमवार की शाम करीब 6 बजे का वक्त था. मोहाली के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के सोहाना गांव के कबड्डी ग्रांउड में 3 दिवसीय कबड्डी टूर्नामेंट हो रहा था, जिस में अलगअलग शहरों से करीब 16 कबड्डी टीमें आई हुई थीं. कबड्डी टूर्नामेंट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और वैदवान स्पोट्र्स क्लब की ओर से आयोजित किया गया था.

टूर्नामेंट की शुरुआत 13 दिसंबर, 2025 को हुई थी और 15 दिसंबर को अंतिम मुकाबले खेले गए थे. फाइनल मैच समाप्त हो चुका था. उस दिन शाम को मैदान में पहले कबड्डी का सेमीफाइनल मैच हुआ, फिर फाइनल खत्म होने के बाद पुरस्कार वितरण की तैयारी चल रही थी. राणा बलाचौरिया उर्फ कंवर दिग्विजय सिंह जो मशहूर कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं और अब कबड्डी के प्रमोटर बन गए हैं, वे भी जालंधर से टूर्नामेंट में 2 टीमें ले कर आए थे.

कंवर दिग्विजय सिंह मैच की टाई डलवाने के बाद किसी काम से मैदान से बाहर की ओर जा रहे थे. तभी 2-3 युवक उन के पास आए और खुद को उन का फैन बता कर उन से सेल्फी लेने के लिए कहा. राणा उन के साथ फोटो खिंचवाने के लिए रुक गए. 3 युवक उन के समीप पहुंचे. फोटो तो नहीं खिंची, अलबत्ता उसी समय उन में से 2 युवकों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. 4-5 फायर हुए और कंवर दिग्विजय सिंह खून से लथपथ हो कर लहलहाते हुए जमीन पर गिर पड़े.

गोलियों की आवाज सुनने के बाद कबड्डी ग्राउंड में बैठे लोगों को पहले तो लगा कि शायद किसी ने पटाखे चलाए हैं, लेकिन कुछ ही क्षणों में लोगों को समझ आ गया कि ये आतिशबाजी की नहीं, बल्कि फायरिंग की आवाजें थीं. यह समझते ही पूरे मैदान में अफरातफरी मच गई और लोग इधरउधर भागने लगे. खून से लथपथ राणा को लोगों ने आननफानन में एक गाड़ी में डाला और समीप के ही फोर्टिस अस्पताल ले गए. राणा की हालत गंभीर थी. आईसीयू में ले जा कर उन का परीक्षण किया गया तो पता चला कि वहां पहुंचने से पहले ही उन की मौत हो चुकी थी. डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

30 साल के राणा को शाम लगभग 6 बजे अस्पताल लाया गया था, पर तब तक उन की मौत हो चुकी थी. इस की सूचना कबड्डी ग्राउंड से ले कर पुलिस विभाग को मिल चुकी थी. इसलिए पुलिस को अस्पताल से ले कर खेल के मैदान तक आने में ज्यादा समय नहीं लगा. दरअसल, इलाके के डीएसपी एच.एस. बल इस कबड्डी इवेंट के मुख्य अतिथि थे और उन के कार्यक्रम वाली जगह से जाने के कुछ ही देर बाद ये गोलीबारी हुई थी.

पंजाबी सिंगर मनकीरत औलख, जो टूर्नामेंट के मुख्य आयोजक भी थे, वे प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे. उन्हें रास्ते में ही इस घटना की जानकारी मिली तो सुरक्षा कारणों से वह रास्ते से ही कार्यक्रम रद्ïद कर के वापस लौट गए. कुल मिला कर एक तरह से ये वीआईपी इवेंट था, जिस कारण वहां सुरक्षा इंतजाम के लिए पहले से ही पुलिस की मौजदूगी थी. इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से ले कर तमाम वरिष्ठ अधिकारियों को इस गोलीबारी की तत्काल सूचना मिल गई. घटनास्थल पर पुलिस का अमला जुटना शुरू हो गया.

जिस वक्त हमलावरों ने कंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया पर फायरिंग की थी तो इस वारदात में रोपड़ का रहने वाला एक अन्य युवक जगप्रीत सिंह भी घायल हुआ. वह वारदात के समय गोली लगने से जमीन पर गिरे राणा को उठाने के लिए गया था और छर्रे लगने से वह भी घायल हो गया. उसे अस्पताल में भरती कराया गया है, जहां उस का इलाज चल रहा है. वह घटना का एक अहम चश्मदीद है.

उसी ने पुलिस को बताया कि हमलावरों की संख्या 3 थी. उस ने बताया कि तीनों हमलावर एक बाइक पर सवार हो कर आए थे. उन में से एक शायद राणा को जानता था, क्योंकि उसी के अनुरोध पर वह सेल्फी देने के लिए रुके थे. उस के साथ आए 2 अन्य लोगों ने खुद को उन का फैन बताया और सेल्फी के लिए समीप पहुंचे, फिर करीब से उन के सिर व चेहरे पर गोली दाग दी.

जांच में जुटीं 12 टीमें

अगले एक घंटे के भीतर मोहाली के एसएसपी हरमिंदर सिंह हंस भी घटनास्थल कबड्डी के मैदान व अस्पताल में पहुंच गए. उन्होंने खुद घटना के चश्मदीदों से बात की. उन्होंने हत्यारों का सुराग लगाने व उन्हें पकडऩे के लिए 12 पुलिस टीमों को गठन कर दिया. घटनास्थल पर पहुंची फोरैंसिक टीमों ने घटनास्थल की जांचपड़ताल का काम पूरा कर लिया तो फोर्टिस अस्पताल से कंवर दिग्विजय सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

एसएसपी के निर्देश पर स्थानीय सोहना (अजीतगढ़) थाने की पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 101 में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. जांच का काम एसएचओ अमनदीप सिंह ने अपने हाथ में ले लिया. एसएसपी द्वारा गठित सभी 12 पुलिस टीमें उन के अधीन जांच के काम में जुट गईं.

जांच का काम शुरू करते ही पुलिस टीमों ने आरोपियों की पहचान के लिए इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी. चश्मदीदों से पूछताछ की जाने लगी. कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन करने वालों से ले कर कबड्डी टीमों के खिलाडिय़ों से पूछताछ की जाने लगी.

गोलीबारी की घटना में घायल हुए जगबीर सिंह समेत राणा की हत्या के अन्य चश्मदीदों ने बताया कि यह घटना सेक्टर-82 के मैदान में हुई, जहां कबड्डी का मैच चल रहा था. यह हमला तब हुआ, जब टूर्नामेंट लगभग खत्म हो चुका था और यूट्यूब पर इस की लाइव स्ट्रीमिंग हो रही थी. राणा को 3 से 4 गोलियां लगने की आशंका थी. पुलिस को घटनास्थल से .32 बोर का एक खाली कारतूस मिला, जिस से अनुमान लगाना सहज था कि वारदात में .32 बोर के पिस्तौल का इस्तेमाल हुआ है.

पुलिस अधिकारियों ने अपनी काररवाई के बीच जालंधर में रहने वाले कंवर दिग्विजय सिंह राणा बलाचौरिया के फेमिली वालों को सूचना दे दी गई. अगली सुबह दिग्विजय के पापा राजीव सिंह राणा बलाचौरिया, चाचा राजीव सिंह, पत्नी प्रीति, भाई अजय सिंह तथा अन्य परिजन मोहाली के सोहना पहुंच कर पुलिस से मिले. दिलचस्प बात यह है कि राणा की बहन इटली में रहती है और वह इंडिया आई हुई थी. गोलीबारी की घटना वाली रात को ही उस की इटली की फ्लाइट थी. लेकिन फ्लाइट पर चढऩे से पहले ही उसे अपने भाई की हत्या की खबर मिली तो वह वापस अपने घर लौट गई और सुबह परिजनों के साथ घटनास्थ्ल पर जा पहुंची.

पुलिस ने जब परिजनों से दिग्विजय की किसी से दुश्मनी या रंजिश के बारे में पूछा तो फेमिली वाले ऐसी कोई जानकारी नहीं दे सके, जिस से किसी पर कंवर दिग्विजय सिंह की हत्या का शक किया जा सके.

लेकिन पूछताछ में यह जानकारी जरूर मिली कि कंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया शाही परिवार से ताल्लुक रखते थे. उन का रिश्ता हिमाचल के शाही परिवार से था. कंवर दिग्विजय सिंह के परदादा ऊना के पास स्थित एक रियासत के राजा थे और उन का पूरा परिवार हिमाचल प्रदेश का ही रहने वाला था. हालांकि, अब काफी लंबे समय से वह पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर के बलाचौर (नवांशहर) में रह रहे थे.

पूछताछ में पता चला कि कंवर दिग्विजय सिंह कुश्ती से करिअर की शुरुआत कर कबड्डी के प्रमोटर बने और बाद में उन्होंने अपनी टीम भी बनाई. कंवर दिग्विजय सिंह पहले पहलवानी करते थे और फिर बाद में कबड्डी खिलाड़ी बन गए. हाल ही में उन्होंने एक मौडलिंग प्रोजेक्ट में काम करने की योजना भी बनाई थी. वह आने वाले दिनों में कुछ गानों में काम करने की योजना भी बना रहे थे.

12 दिन पहले हुई शादी

कंवर दिग्विजय सिंह की शादी महज 12 दिन पहले 4 दिसंबर, 2025 को ही हुई थी. उन्होंने उत्तराखंड के देहरादून की रहने वाली प्रीति से शादी की थी, लेकिन 12 दिन बाद ही प्रीति पत्नी का सुहाग उजड़ गया. 6 दिसंबर को उन का रिसैप्शन हुआ था. दोस्तों ने पुलिस को बताया कि वह अपनी शादी को ले कर काफी एक्साइटेड थे. इस से पहले नवंबर में उन के 2 दोस्तों की भी शादियां हुई थीं. वह अपनी शादी के बाद से काफी खुश थे. उन का एक छोटा भाई अजय सिंह है, जबकि उन की बहन विदेश में रहती है.

कंवर दिग्विजय सिंह ने पढ़ाई के दौरान ही कुश्ती खेलनी भी शुरू कर दी थी. इस के बाद उन्होंने कबड्डी की ओर रुख कर लिया था. वह भले ही संपन्न परिवार से थे, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर ही  सब कुछ हासिल किया था. मोहाली आने के शुरुआती दिनों में वह बाइक से ही घूमते थे और मेहनत के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया.

पूछताछ के बाद ही यह भी पता चला कि सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंहजी राणा के पूर्वजों के घर में रुके थे और घर में 100 साखियां भी लिखी थीं. पुलिस ये नहीं समझ पा रही थी कि जब कंवर दिग्विजय सिंह में कोई ऐब नहीं था और उन की किसी से कोई जानलेवा दुश्मनी या किसी तरह का विवाद भी नहीं था तो उन की हत्या किस ने की और हत्या का मकसद क्या था.

हालांकि शुरुआती जांच में ही पुलिस को इस बात की आशंका हो गई थी कि कंवर दिग्विजय सिंह की हत्या काफी योजनाबद्ध तरीके से की गई है. क्योंकि पुलिस को कुछ ही घंटों की तलाशी अभियान के बाद घटनास्थल से लगभग 12 किलोमीटर दूर वह बाइक लावारिस अवस्था में बरामद हो गई, जिस पर सवार हो कर हमलावर भागे थे. आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि इस बाइक पर सवार लोग बाइक को खड़ी कर के एक गाड़ी में बैठ कर कहीं चले गए थे. उन की संख्या 3 थी. इधर पुलिस जांचपड़ताल के काम में लगी थी कि इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट वायरल हुई, जिस ने जांच को एक अलग ही दिशा दे दी.

दरअसल, हत्या के कुछ घंटे बाद सोशल मीडिया पर विदेश में बैठे गैंगस्टर बंबीहा गैंग की ओर से एक पोस्ट सामने आई, जिस में राणा बलाचौरिया की हत्या की जिम्मेदारी ली गई. पोस्ट में दावा किया गया कि राणा ने सिद्धू मूसेवाला के कातिलों का साथ दिया था. हम ने उसी हत्या का बदला लिया है. उस ने मूसेवाला के हत्यारों को पनाह दी थी. राणा को मार कर हम ने अपने भाई मूसेवाला का बदला ले लिया है.

पोस्ट में दावा किया गया कि राणा लारेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया से जुड़ा था. दावा किया गया कि उन्हीं के लोगों ने दिग्विजय सिंह की हत्या की है. सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे के बाद मोहाली पुलिस ने इस दावे की जांच शुरू कर दी और गैंग के नेटवर्क को ट्रेस करने की कोशिश करने लगी. साइबर सेल इंटरनेट पर डाली गई पोस्ट के जरिए आईपी एड्रेस ट्रेस करने के प्रयास में जुट गई.

बंबीहा गैंग की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद पूरे मामले को ले कर राणा बलाचौरिया के परिवार ने भी पुलिस और मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा. दिग्विजय के पिता कुंवर राजीव सिंह और चाचा कुंवर संजीव सिंह ने कहा कि राणा बलाचौरिया न तो किसी गैंग से जुड़ा था और न ही उस ने कभी उन्हें ये बताया था कि उस को किसी गैंगस्टर से कोई धमकी मिल रही है. उन्होंने कहा कि राणा बलाचौरिया सिर्फ कबड्डी के खेल से जुड़ा था. उन्हें नहीं पता कि किस वजह से उन के बेटे की हत्या कर दी गई.

राणा के फेमिली वालों ने कहा कि उन के बेटे का सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड या उस से जुड़े किसी भी गैंग या गैंगस्टर से कोई लेनादेना नहीं है. उन्होंने कहा कि हमले के वक्त राणा बलाचौरिया के पास उस की लाइसेंसी गन, सोने के कुछ आभूषण और मोबाइल मौजूद था, जोकि घटना के बाद से गायब है. अगले दिन कंवर दिग्विजय सिंह राणा के शव का पोस्टमार्टम हो गया तो पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया. शव को परिजन नवांशहर में अपने गांव बलाचौर ले गए और गमगीन परिजनों ने भारी जनसमूह के बीच उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

इधर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि कंवर दिग्विजय सिंह को पौइंट ब्लैंक रेंज से .32 की गोली मारी गई, जो पीछे से सिर में लगी और मुंह के रास्ते बाहर निकल गई. इसी कारण उन की मौत हुई.

बंबीहा गैंग आया सामने

गैंगस्टरों की सोशल मीडिया पोस्ट व अब तक की जांच से एक बात साफ हो गई थी कि राणा बलाचौरिया की हत्या का भले ही सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से कोई लेनादेना नहीं हो, लेकिन उन की हत्या पूरी तरह से टारगेट किलिंग थी और इस में गैंगस्टरों का हाथ होने की पूरी संभावना थी.  इसीलिए एसएसपी द्वारा गठित टीमों ने आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से उठाए गए फोन के डंप डाटा और लोकल इंटैलीजेंस से इस बात का पता लगा लिया कि बलाचौरिया की हत्या के पीछे कुख्यात लक्की पटियाल गैंग का हाथ है, जिस का सीधा संबंध बंबीहा गैंग से है.

उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड में मुख्यरूप से 2 शूटरों की पहचान हुई है. पहला नाम था आदित्य कपूर उर्फ मक्खन और दूसरा करण पाठक. जांच में सामने आया है कि आदित्य कपूर और करण पाठक दोनों के खिलाफ पहले से ही कई दरजन आपराधिक मामले दर्ज हैं. दोनों शूटर जेल जा चुके हैं और लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं. दोनों का सीधा संबंध बंबीहा गैंग से है, जो पंजाब में संगठित अपराध और वर्चस्व की लड़ाई के लिए कुख्यात है.

जांच में यह भी साफ हो गया है कि यह हत्याकांड किसी निजी रंजिश या सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से जुड़ा नहीं है. खुद एसएसपी हरमनदीप सिंह हंस ने दावा किया कि राणा बलाचौरिया की हत्या का मकसद कबड्डी लीग्स और कबड्डी जगत पर गैंगस्टरों का दबदबा कायम करना था. राणा बलाचौरिया कबड्डी के बड़े प्रमोटर माने जाते थे और उन की बढ़ती लोकप्रियता व प्रभाव गैंगस्टरों को खटक रहा था. यह खुलासा कैसे हुआ, यह जानने से पहले 17 दिसंबर, 2025 बुधवार की सुबह डेराबस्सी के लेहली गांव में अंबाला लालडू हाइवे पर हुई मुठभेड़ के बारे में जानना जरूरी है, जहां डीएसपी बिक्रम बराड़ और एसएचओ सुमित मोर की अगुआई में पुलिस की एक टीम नाका लगाए बैठी थी.

इस टीम को युगराज से हुई पूछताछ के बाद मिड्ढी के वहां से गुजरने की सूचना मिली थी. इसी सूचना के बाद वहां पहुंची पुलिस ने मिड्ढी को घेर लिया. जब उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा गया तो मिड्ढी ने तुर्की में बनी जिगाना पिस्टल से पुलिस पर 8 से 10 राउंड फायरिंग कर दी. इस दौरान हैडकांस्टेबल कुमार शर्मा के पैर में गोली लगी, जबकि हैडकांस्टेबल गुलाब सिंह की छाती की ओर चली गोली उन की बुलेटप्रूफ जैकेट में अटक गई.

शूटर मुठभेड़ में हुआ ढेर

हालांकि गोली के जोर से उन्हें भी चोट आई. मिड्ढी को पेट और पैरों में गोलियां लगीं. तीनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान मिड्ढी ने दम तोड़ दिया. घायल पुलिसकर्मियों की जान किसी तरह बच गई. दरअसल, मिड्ढी ने न केवल शूटरों को लाजिस्टिक सपोर्ट दिया, बल्कि वारदात के बाद फरार होने की योजना में भी शामिल था. उसे ऐशदीप के साथ देश छोड़ कर भागना था, लेकिन पुलिस के शिकंजे से बच नहीं सका. ऐशदीप के तार कुख्यात गैंगस्टर डोनी बल और विदेशों में बैठे उस के साथियों से जुड़े हुए हैं. इन में इटली में मौजूद जोधा और अमेरिका से औपरेट कर रहा गुरलाल शामिल हैं.

डेराबस्सी में हत्या के आरोपी और पुलिस के बीच मुठभेड़ में मारा गया आरोपी हरपिंदर सिंह उर्फ मिड्ढी, तरनतारन का रहने वाला था. मिड्ढी ही वह शख्स था, जो 2 मुख्य शूटरों आदित्य कपूर उर्फ माखन और करण पाठक उर्फ डिफाल्टर करण के साथ कबड्डी टूर्नामेंट में मौजूद था. इन शूटरों ने राणा बलाचौरिया को सेल्फी लेने के बहाने पास बुलाया और फिर गोली मार कर हत्या कर दी थी. फिलहाल दोनों मुख्य शूटर अब भी फरार हैं.

हुआ यूं कि मिड्ढी को मुठभेड़ में मार गिराने से पहले पुलिस को सीसीटीवी की फुटेज, मोबाइल फोंस की ट्रैकिंग से पता चला कि कंवर दिग्विजय सिंह राणा की हत्या के मास्टरमाइंड ऐशदीप सिंह दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से ओमान भागने की तैयारी कर रहा है. पुलिस टीम ने वहां पहुंच कर उसे गिरफ्तार कर लिया. ऐशदीप मस्कट (ओमान) भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस टीम ने उसे ऐन वक्त पर धर दबोचा.

साजिश का हुआ खुलासा

पूछताछ में ऐशदीप ने कई अहम जानकारियां उगलीं, उसी के आधार पर पुलिस मिड्ढी तक पहुंचने में सफल रही. मिड्ढी भी ऐशदीप के साथ विदेश भागने वाला था, लेकिन किसी कारण वह पंजाब में ही फंस गया. लेकिन वह उस के साथ लगातार फोन पर संपर्क में था. गिरफ्तार होते ही ऐशदीप ने मिड्ढी के ठौरठिकाने बता दिए. ऐशदीप तक पुलिस युगराज के मार्फत पहुंची. पुलिस ने हत्या के बाद फरार हुए हमलावरों द्वारा लावारिस छोड़ी गई बाइक की नंबर प्लेट व चेसिस नंबर की जांच की तो पता चला कि वह बाइक युगराज की है, जो अमृतसर का रहने वाला है.

मोहाली पुलिस ने अमृतसर पुलिस को तत्काल सारी जानकारी दे कर युगराज की गिरफ्तारी के आदेश दिए. इसी आधार पर अमृतसर (ग्रामीण) पुलिस ने युगराज के घर छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर सारा राज उगलवा लिया.  उस ने बताया कि इस घटना का एक मास्टरमाइंड ऐशदीप मस्कट भागने वाला है. सर्विलांस के सहारे पीछा करते हुए पुलिस पहले ऐशदीप तक पहुंची, फिर उस से पूछताछ के बाद कडिय़ां जोड़ते हुए पुलिस ने डेराबस्सी में मिड्ढी को अपने चंगुल में फंसा लिया, जो भागने की कोशिश में मारा गया.

पुलिस अब 2 मुख्य शूटरों आदित्य कपूर उर्फ माखन और करण पाठक उर्फ डिफाल्टर करण की सरगरमी से तलाश कर रही है. गिरफ्तार किए गए ऐशदीप और युगराज से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि राणा बलाचौरिया की हत्या कबड्डी के खेल को कंट्रोल करने के लिए की गई. मारे गए राणा बलाचौरिया की जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया से करीबी भी सामने आई है, जिस के बारे मेंजांच चल रही है.

जांच में पता चला कि ऐशदीप पहले एक अपराध के बाद रूस भाग चुका था और 25 नवंबर को भारत लौटने के बाद उस ने इस हत्याकांड की साजिश रची. बलाचौरिया की हत्या की साजिश कुख्यात लक्की पटियाल गैंग ने रची थी. हरपिंदर उर्फ मिड्ढी इस हत्याकांड का ग्राउंड लेवल पर मुख्य प्लानर और हैंडलर था. वह वारदात के समय मौके पर मौजूद था. पुलिस की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि राणा बलाचौरिया ने बंबीहा गैंग के गैंगस्टरों का फोन नहीं उठाया था, यह फोन आर्मेनिया में बैठे लक्की पटियाल या उस के साथी डोनी बल ने किया था, इस की पुलिस जांच कर रही है. इसी से गुस्साए गैंगस्टरों ने उस की हत्या की साजिश रच डाली.

पूछताछ में मर्डर से ले कर हाइडआउट यानी कत्ल के बाद सब के छिपने के लिए परफेक्ट प्लानिंग की गई थी. अगर मास्टरमाइंड न पकड़ा जाता तो पुलिस को कातिलों को पकडऩे में समय लग सकता था. हालांकि मोहाली पुलिस ने विदेश फरार हो रहे मास्टरमाइंड को दबोच लिया तो सारा मामला खुल कर सामने आ गया. पूछताछ के बाद पुलिस ने हत्या के बाद शूटरों के फरार होने का रूट भी ट्रेस कर लिया है.

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मोहाली के सेक्टर-105 से होते हुए मोहाली के रायपुरकलां पहुंचे और वहां से चुन्नी गांव की ओर ग्रामीण इलाकों में भाग निकले. इस के बाद दोनों शूटर करण पाठक और आदित्य कपूर ऐशदीप से अलग हो गए थे. कथा लिखने तक पुलिस टीम मामले की तफ्तीश में जुटी थी.

गैंगस्टर डोनी बल का दावा: खिलाड़ी नहीं था राणा

राणा बलाचौरिया हत्याकांड को बंबीहा गैंग से जुड़े गैंगस्टर डोनी बल ने दावा किया है कि राणा न तो कोई कबड्डी खिलाड़ी था और न ही प्रमोटर, बल्कि वह लारेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गैंग का गुर्गा था. डोनी के अनुसार, चंडीगढ़ के एक नामी क्लब से रंगदारी वसूली के लिए राणा ने लारेंस से फोन करवाया था और यही उस की हत्या की सब से बड़ी वजह बनी.

डोनी ने दावा किया कि पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का बदला लिया जाएगा. 35 लोगों की एक सूची बनाई गई है और इन सभी को मौत के घाट उतारा जाएगा. यह बात उस ने कबड्डी खिलाड़ी कुंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया की हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए कही. राणा की हत्या के बाद डोनी ने एक निजी यूट्यूब चैनल पर जारी वीडियो में कहा है कि करीब ढाई महीने पहले राणा ने चंडीगढ़ के एक क्लब संचालक से लारेंस बिश्नोई का संपर्क कराया. फोन पर लारेंस ने क्लब संचालक से कहा था कि उस का गुर्गा हर महीने पैसे लेने आएगा और उसे इस में हिस्सा देना होगा.

डोनी का आरोप है कि राणा उस के विरोधी गैंग को फाइनेंशियल तौर पर मजबूत कर रहा था. जो भी हमारे दुश्मनों को सपोर्ट करेगा या उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाएगा, उस का अंजाम यही होगा. डोनी ने यह भी दावा किया कि हम ने किसी और खिलाड़ी को परेशान नहीं किया. राणा ही सब कुछ कर रहा था, इसलिए उसे रोका गया. उस ने यह कहा कि राणा को पहले चेतावनी दी गई थी कि वह खिलाडिय़ों पर दबाव न डाले, लेकिन उस ने बात नहीं मानी.

डोनी जिस क्लब का जिक्र कर रहा है, वह सेक्टर-26 स्थित एक बड़ा क्लब है, जो पहले भी गैंगस्टरों के निशाने पर रहा है. पुलिस रिकौर्ड के मुताबिक सेक्टर-26 क्लब एरिया लंबे समय से उगाही, धमकी भरे कौल और गैंगों की आपसी रंजिश का केंद्र बना हुआ है. डोनी ने इस हत्याकांड में शगुनप्रीत की भूमिका होने का भी दावा किया है. उस ने कहा कि वारदात के वक्त वह और शगुनप्रीत फोन पर संपर्क में थे और जिन नामों का जिक्र किया गया है, वही इस हत्या में शामिल हैं.

डोनी ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि मूसेवाला को फेम और पैसे के लिए मारा गया, जबकि उस का कोई कुसूर नहीं था. उस ने दावा किया कि मूसेवाला पंजाब की बोली और संस्कृति को आगे ले जा रहा था. क्लबों से रंगदारी और गैंगवार का यह खेल पहली बार सामने नहीं आया है. इस से पहले पहली दिसंबर, 2025 को चंडीगढ़ के सेक्टर-26 में इंद्रप्रीत सिंह उर्फ पैरी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड में भी क्लब और रंगदारी का कनेक्शन सामने आया था.

लारेंस गैंग के करीबी हैरी बौक्सर और आरजू बिश्नोई ने सोशल मीडिया पोस्ट डाल कर पैरी की हत्या की जिम्मेदारी ली थी. पोस्ट में पैरी को गद्ïदार बताते हुए लिखा गया था कि वह गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का फोन करवा कर चंडीगढ़ के क्लबों से पैसा इकट्ठा कर रहा था. चंडीगढ़ के क्लब कारोबार को दहशत में रखने के लिए गैंगस्टरों ने बम धमाकों तक का सहारा लिया. नवंबर 2024 में एक जानेमाने क्लब पर बम धमाका किया गया था, जिस की जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ ने ली थी.

पुलिस जांच में सामने आया था कि धमाके का मकसद क्लब संचालकों में डर पैदा करना और रंगदारी वसूली को मजबूती देना था. इस के बाद कई क्लब संचालकों को लगातार धमकी भरे फोन कौल आए, लेकिन इस के बावजूद गैंगस्टरों के नेटवर्क को पूरी तरह तोडऩे में पुलिस नाकाम रही.

सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ के अधिकतर बड़े क्लबों से हर महीने लाखों की रंगदारी के रूप में वसूली जाती है. जो संचालक पैसे देने से इनकार करते हैं, उन्हें धमकियां, फायरिंग, हमले और बम धमाकों के जरिए डराया जाता है. इसी वसूली को ले कर अलगअलग गैंगों के बीच टकराव बढ़ता है और यही टकराव गैंगवार और हत्याओं का रूप ले रहा है.

राणा बलाचौरिया और इंद्रप्रीत उर्फ पैरी की हत्याएं इस बात का सब से बड़ा उदाहरण हैं कि क्लबों की कमाई अब सीधे खूनखराबे से जुड़ चुकी है. Gangster Story

 

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