Love Crime: पति जौनी को छोडऩे के बाद 30 वर्षीय उमा को 25 वर्षीय बिलाल से मोहब्बत हो गई थी. उस के बाद वह लिवइन रिलेशन में रहने लगी. फिर एक दिन जंगल में उमा की सिरविहीन और निर्वस्त्र लाश मिली. उमा की जब किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी तो आखिर किस ने और क्यों किया उस का मर्डर? पढ़ें, लव क्राइम की यह हैरतंगेज कहानी.

उमा को खत्म करने की बिलाल की योजना किसी कागज पर नहीं थी, वह उस के दिमाग में बनी एक अंधेरी भूलभुलैया थी. उस ने सोचा कि पहले उमा को भरोसे में लिया जाए, फिर उसे सुनसान जगह ले जा कर उसे खत्म किया जाए. फिर उस की लाश के टुकड़े कर अलगअलग फेंक दिया जाए. इस से उस की शिनाख्त भी नहीं हो पाएगी और यह राज भी राज ही बन कर रह जाएगा. प्रेमिका को ठिकाने लगाने का बिलाल ने यही प्लान बना लिया.

14 दिसंबर, 2025 को बिलाल की शादी होने जा रही थी. बारात उतराखंड के रुड़की जानी थी. लेकिन इस निकाह में बिलाल की हिंदू प्रेमिका बाधा बन सकती थी और ऐसे में उस ने प्रेमिका उमा को रास्ते से हटाने का प्लान तैयार कर लिया था.

बिलाल ने अपनी शादी से ठीक 8 दिन पहले यानी 6 दिसंबर को उस ने उमा से कहा, ”चलो, कहीं घुमा कर लाता हूं.’’

उस के खौफनाक इरादों से अनजान उमा राजी हो गई. शाम का वक्त था, अंधेरा हो चला था. उमा रोमांच महसूस कर रही थी, जबकि उस के मन में कुछ और ही चल रहा था. 6 दिसंबर, 2025 को शाम करीब 6 बजे स्विफ्ट कार ले कर वह उमा के कमरे पर गया था. बोला, ”सरप्राइज है, चलो तुम्हें बाहर घुमा कर लाता हूं.’’

हथिनीकुंड बैराज में यूपी और हरियाणा को जोडऩे वाला पुल है. वह उसी रास्ते से कार लाया. पहले हिमाचल की तरफ कार घुमाई, फिर उस ने पहले हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब की तरफ कार मोड़ ली. उमा लगातार उस से बातें किए जा रही थी. वह उसे प्यारभरे अंदाज में उस की बातों का जवाब दे रहा था. दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था.

रात के करीब 8 बज गए थे. रात का स्याह अंधेरा छा गया था. कलेसर नैशनल पार्क से गुजर रहे थे. नैशनल हाइवे से गाडिय़ां आजा रही थीं. उस दिन शनिवार था. वीकेंड पर अकसर पर्यटक इस इलाके में ज्यादा घूमने जाते हैं. उस ने कहा कि कोई होटल देखते हैं, वहां शाम बिताएंगे. पांवटा में रूम तलाशने की कोशिश की, लेकिन पर्यटक काफी थे. कहीं कोई कमरा किराए पर नहीं मिला. उसे डर लगा कि कहीं पकड़ा न जाए. अचानक प्लान बदल दिया.

इस के बाद उस ने हरियाणा की सीमा की तरफ कार मोड़ ली. बोला कि चलो, जंगल की तरफ चलते हैं, उधर भी अच्छे होटल हैं. उमा तो उस पर आंखें मूंद कर भरोसा करती थी, इसलिए राजी हो गई. कलेसर जंगल के एरिया से निकलते ही आबादी शुरू हो जाती है. यहां प्रतापनगर के गांव बहादुरपुर की सीमा से पहले ही उस ने कार रोक ली. उमा ने पूछा कि कार क्यों रोक दी?

उस ने कहा कि आबादी आने वाली है. सीट बेल्ट लगाना जरूरी है. यह बहाना बना कर वह पिछली सीट पर चला गया. उस वक्त उमा अगली सीट पर बैठी अपनी धुन में मस्त थी. तभी अचानक (25 वर्षीय) बिलाल ने 30 वर्षीय प्रेमिका उमा के गले में सीट बेल्ट डाल दी और गला घोंटने लगा. उमा के पास बचने या चिल्लाने का ज्यादा मौका नहीं था. उमा का शरीर बेजान हो गया. उसे मरा मान बिलाल तुरंत अगली सीट पर आया. उस ने कार आगे बढ़ा दी. करीब आधा किलोमीटर दूर गया तो सामने गांव बहादुरपुर की लाइटें नजर आने लगीं.

बिलाल को अब शव ठिकाने लगाने की जल्दी थी. उस के मन में पकड़े जाने का भी डर था, इसलिए उस ने गरदन से सिर काटने की सोची. साथ में वह मीट काटने वाला छुरा ले कर आया था. लाश को सड़क किनारे खेतों में बनी पौपुलर की नर्सरी में ले गया. वहां सिर धड़ से अलग किया और लाश के कपड़े उतार लिए, ताकि उस की पहचान न हो. कटे सिर और उतारे गए कपड़ों को पौलीथिन के थैले में डाल कर अगली सीट पर रख लिया. सिर कटी लाश उस ने वहीं छोड़ दी थी.

उस वक्त रात के करीब 11-साढ़े 11 बजे होंगे. अब उसे ऐसी जगह की तलाश थी, जहां सिर व कपड़े फेंक सके ताकि शिनाख्त की संभावना न बचे. बिलाल ने सिर फेंकने के लिए इसी जगह को चुना. यहां सिर फेंकने के बाद बिलाल ने कार घुमाई और हथिनीकुंड बैराज के पुल से होते हुए अपने घर चला गया.

बिलाल ने मर्डर के बाद घर पहुंच कर सब से पहले अपना मोबाइल फारमेट कर दिया, जिस से कि उस के मोबाइल में उमा की फोटो और कौन्टैक्ट नंबर सब डिलीट हो गए. आधी रात के बाद बिलाल सो गया और सुबह फेमिली वालों से कहा कि अब निकाह की तैयारियों में रहूंगा. अब कहीं नहीं जाऊंगा.’’ योजना पर अमल कर के उस ने उमा की जिंदगी हमेशा के लिए खत्म कर दी. यह मामला हरियाणा के यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से जुड़ा एक सनसनीखेज हत्याकांड है, जिस में प्रेम प्रसंग, लिवइन रिलेशनशिप और शादी के दबाव के चलते बेरहमी से हत्या की गई है.

सहारनपुर के हलालपुर गांव में एक परिवार रहता है. उस परिवार की उमा 18 साल की हो चुकी थी. उस की जवानी अब फूल की तरह पूरी तरह खिल चुकी थी. उमा के घर से सिर्फ 2-4 घर छोड़ कर  एक 19 साल का युवक जौनी रहता था. पेशे से मजदूर था और रंगाईपुताई का काम किया करता था. जौनी मामूली सा विकलांग था. उस की पर्सनैलिटी ऐसी थी कि कोई उस की कमजोरी पर ध्यान ही नहीं देता. जौनी मेहनती और हंसमुख था.

उमा के घर में रंगाईपुताई का काम चल रहा था. उमा के पापा ने जौनी को बुलाया था, क्योंकि वह पड़ोस में ही रहता था. पहली बार जब जौनी उमा के घर आया तो वह सीढ़ी पर चढ़ कर दीवारों को रंग रहा था. विकलांग होने के बावजूद वह बड़े सलीके से काम कर रहा था, जैसे कोई कलाकार अपनी पेंटिंग बना रहा हो. उमा उस वक्त घर में थी. बचपन से ही वो जौनी को ‘जानी वाकर’ कह कर चिढ़ाती थी और जौनी मुसकरा कर उस की कलाई पकड़ लेता. दोनों साथ खेलते हुए बड़े हुए.

परंपरा, मानवता और पड़ोसी होने के नाते वह चाय ले कर किचन से बाहर आई और जौनी को देखा. उस के माथे पर पसीने की बूंदें, हाथों में ब्रश और चेहरे पर एक हलकी मुसकान.

”ओए जौनी, ले चाय पी ले,’’ उमा ने शरमाते हुए कहा.

जौनी ने मुड़ कर देखा और उस की आंखें उमा की मासूमियत पर ठहर गईं.

”धन्यवाद, उमा. लेकिन मैं तो मजदूर हूं.’’ उस ने हंसते हुए कहा.

”मजदूर को भी हमारी परंपरा के अनुसार दिन में 2 बार चाय पिलाते हैं.’’

उमा की पर्सनैलिटी ऐसी थी कि वह छोटीछोटी बातों से प्रभावित हो जाती थी. जौनी की सादगी और मेहनत ने उसे छू लिया. उस दिन से दोनों की बातचीत शुरू हुई. बचपन की पुरानी यादें, यही सब बातों के विषय होते. धीरेधीरे ये मुलाकातें रोमांटिक रंग लेने लगीं. इस के बाद उन की मुलाकातें भी होने लगीं. जौनी उमा को अपनी जिंदगी की कहानियां सुनाता, कैसे वह विकलांग होने के बावजूद कभी हारा नहीं, कैसे वह सपने देखता है एक बेहतर जिंदगी के. उमा उस की ताकत से प्रभावित होती और उसे चूमती, पहले गाल पर, फिर होंठों पर.

उन के चुंबन में एक जुनून था, जैसे दोनों की आत्माएं मिल रही हों. जौनी की मजबूत बांहें उमा को घेर लेतीं और उमा की नरम अंगुलियां उस के बालों में घूमतीं. वे घंटों बातें करते, हंसते और कभीकभी चुपके से एकदूसरे को छूते, एक स्पर्श जो बिजली सी दौड़ाता.

जौनी ने उमा का हाथ पकड़ा और बोला, ”उमा, तुम मेरी जिंदगी हो. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’

उमा ने उस के सीने पर सिर रखा और कहा, ”जौनी, तुम्हारी कमजोरी मेरी ताकत है. हम साथ हैं, हमेशा.’’

उन का रोमांस अब गहरा हो गया था. उमा और जौनी के बीच का प्यार एक खामोश नदी की तरह बहता था. गहरा, शांत और हर किसी की नजरों से छिपा हुआ.

शादी के दिन हुई फरार

रातें उन की थीं. जब मोहल्ला सो जाता, उमा अपनी छत पर आती. जौनी दीवार फांद कर उस के पास पहुंच जाता. ऐसे ही 5 साल गुजर गए. 5 साल की अनगिनत रातें, अनकही बातें, चुराए गए चुंबन और वो सांसें जो सिर्फ एकदूसरे के लिए रुकी थीं. उमा के फेमिली वाले उमा की शादी के लिए बहुत चिंतित थे. आखिरकार एक लड़का उमा के लिए फेमिली वालों ने पसंद कर के शादी तय कर दी. यह बात सन 2010 की है. सभी धार्मिक औपचारिकताओं के बाद बारात आने की तारीख तय हो गई. अभी तक उमा की तरफ से किसी तरह का कोई विरोध फेमिली वालों के सामने नहीं आया.

सूरज की पहली किरणों ने अभीअभी गांव की सड़कों को छुआ था, जब उमा के घर में हलचल मच गई. आज वह दिन था, जिस का इंतजार पूरे परिवार को था. उमा की शादी. लेकिन कमरे में सन्नाटा था. जब मां ने दरवाजा खटखटाया और भीतर झांका तो पल भर में सब कुछ समझ में आ गया. अलमारी खुली थी, कुछ कपड़े गायब थे, उमा भी गायब थी. दुलहन का लहंगा बिस्तर पर बिखरा पड़ा था. मेज पर रखा वह छोटा सा कागज, ‘मम्मी, हम मजबूर थे. माफ करना.’

जौनी और उमा, 2 प्रेमी दिल, रात की आड़ में घर से निकल चुके थे. उन के पैरों की धूल अब दूर किसी अनजान रास्ते पर उड़ रही थी, जहां प्यार की उड़ान ने परिवार की इज्जत को पीछे छोड़ दिया था. पापा की आंखें फैल गईं, भाई दौड़ कर बाहर निकले. ”कहां गई वो? जौनी भी गायब है!’’ चाचा की आवाज कांप रही थी.

पूरे गांव में तलाश शुरू हो गई. कुएं के पास, मंदिर में, बस स्टैंड पर. सभी रिश्तेदार मिल कर तलाश कर रहे थे. पड़ोसी जुट गए, फोन घूमने लगे. उन के मुंह से एक ही बात निकली, ‘भाग गए दोनों…’

ये शब्द हवा में जहर की तरह फैल गए, उमा के पापा का चेहरा पीला पड़ गया, मम्मी रोरो कर बेहाल हो रही थी.

‘उमा और जौनी की प्यार की आग में सब जल गया. अब इज्जत का क्या होगा?’ सोच कर पापा ने सिर थाम लिया.

तभी मामामामी आगे आए. उन की आवाज कांपी, पर नीयत मजबूत थी. दोनों ने उमा की मम्मी और पापा को समझाया. कहा, ”हम हैं आप के साथ. चिंता की कोई बात नहीं है. मेरी बेटी है. अगर आप कहें तो आज हम उमा की जगह अपनी बेटी को विदा कर देंगे. पूरे समाज में आप की इज्जत का सवाल है. यह त्याग हम कर सकते हैं.’’

दोनों में से किसी ने आंखें उठा कर नहीं देखा. अब हर तरफ फुसफुसाहटें थीं. उमा की मम्मी आंसू पोंछते हुए बोली, ”भाभी, क्या करूं? मेरी बेटी ने तो हमें डुबो दिया. बारात लौट गई तो गांव में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.’’

आंसू बिना आवाज के गिरते रहे. मां ने एक पल को भाई की ओर देखा और फिर धीरे से सिर हिला दिया. समय बीतता गया, सूरज चढ़ता गया. बारात की धुन दूर से सुनाई देने लगी. ढोल की थाप, शहनाई की मधुर स्वरलहरियां. दूल्हा, घोड़ी पर सजाधजा, मुसकराता हुआ आ रहा था अनजान इस तूफान से. घर के दरवाजे पर बारात रुकी. बारात आई. ढोलनगाड़ों की आवाज ने उस खालीपन को ढक लिया, जो आंगन में पसरा था. स्वागत हुआ, आवभगत निभाई गई. सभी के चेहरे पर नकली मुसकानें थीं, पर आंखों में प्रश्न.

परंपराएं चलीं, फेरों का समय आया. मामा की बेटी लाल जोड़े में आई. कांपती नहीं, बल्कि विश्वास से भरी थी. फेमिली वालों के चेहरे पर मुसकान चिपकी हुई थी, लेकिन आंखें बता रही थीं कि दिल टूटा हुआ है.

पापा ने आगे बढ़ कर दूल्हे का स्वागत किया, ”आओ जी, स्वागत है!’’

बाहर बारात नाच रही थी, अंदर फैसला हो चुका था. मामामामी की बेटी को बुलाया गया. वह हैरान थी, लेकिन परिवार की इज्जत के लिए तैयार हो गई.

”अगर इस से सब की लाज बचती है तो मैं कर लूंगी,’’ उस ने धीरे से कहा.

मेकअप किया गया. उमा का ही लहंगा पहनाया गया. अब  मंडप सजा, पंडितजी मंत्र पढऩे लगे. दूल्हे को बताया गया कि ‘परिवार की रस्म है, दुलहन का नाम बदल गया.’ वह मुसकराया. शायद अनजान, शायद समझदार. फेरों के समय उमा की मम्मी की आंखों से आंसू बह रहे थे, खुशी के नहीं, दर्द के. पापा ने दुलहन का हाथ दूल्हे को सौंपा, मन में उमा की याद थी, ‘बेटी, तू जहां भी है, खुश रह,’ उन्होंने मन ही मन कहा.

इस तरह अपनी इज्जत की आरती को बचा कर इस घर से उमा की जगह उस की ममेरी बहन को विदा कर दिया गया. शादी संपन्न हुई. बारात विदा हुई. लेकिन घर में सन्नाटा था. रात को जब सब सो गए तब उमा की मम्मी ने पति से कहा, ”क्या हम ने सही किया?’’

उन्होंने सिर हिलाया, ”हां, इज्जत बचाई. लेकिन दिल टूटा है. जौनी और उमा, काश वे समझते.’’

इस अप्रत्याशित मोड़ ने एक नई कहानी शुरू की, दर्द की, बलिदान की और उम्मीद की.

निर्वस्त्र मिली लाश

हरियाणा के यमुनानगर के प्रताप नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव पड़ता है बहादुरपुर. 7 दिसंबर, 2025 की सुबह के करीब  9 बजे के आसपास इसी बहादुरपुर गांव के एक व्यक्ति ने प्रताप नगर थाने में फोन कर कहा, ”साहब, मेरे गांव के बाहर पौपुलर की एक नर्सरी है. एक महिला की डैडबौडी पड़ी है, जिस का न तो वहां पर सिर मौजूद है और न ही उस के शरीर पर कोई कपड़ा मौजूद है.’’

एसएचओ नरसिंह गुर्जर को जैसे ही सूचना मिली, वह फौरन अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. वहां पर पहले से ही काफी तादाद में लोग मौजूद थे. पुलिस भीड़ को हटा कर डैडबौडी के पास पहुंची. डैडबौडी को देखने के बाद खुद पुलिस भी एकदम से चौंक गई. पुलिस ने घटनास्थल का बड़ी बारीकी से मुआयना किया, लेकिन महिला का सिर बरामद नहीं हुआ.

पर सवाल यह था कि आखिरकार वह मरने वाली महिला कौन थी? घटनास्थल पर काफी सारे लोग मौजूद थे. उन सभी से पूछताछ की, पर कोई भी व्यक्ति उस डैडबौडी की शिनाख्त नहीं कर सका. घटनास्थल पर कोई ऐसा डौक्यूमेंट्स और न ही कोई ऐसा पहचानपत्र मिला, जिस से उस मरने वाली महिला के बारे में कुछ पता चल सके. उस के शरीर पर भी कहीं कोई टैटू, नाम या अन्य कोई चिह्नï या गुदा नहीं था.

पुलिस ने डैडबौडी को अपने कब्जे में लेने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. एसएचओ नरसिंह गुर्जर ने तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी. यमुनानगर के एसपी कुलदीप गोयल घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को भी बुला लिया गया. पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने के बाद केस की जांचपड़ताल शुरू कर दी. 72 घंटे का समय बीत जाने के बावजूद मृतका की शिनाख्त नहीं हुई तो इस सिरविहीन धड़ का अंतिम संस्कार सेवा समिति के माध्यम से करा दिया गया.

एसपी कुलदीप गोयल ने केस का खुलासा करने के लिए एसआईटी का गठन कर दिया. साथ ही सर्विलांस टीम, फोरैंसिक टीम, डौग स्क्वायड सभी अपनीअपनी तरह से प्रयास करने में जुट गए, ताकि इस हत्याकांड का खुलासा हो सके. यह एक तरह से ब्लाइंड मर्डर था और इस का पता चल पाना मुश्किल हो रहा था. एसपी कुलदीप गोयल ने एसआईटी के हैड डीएसपी रजत गुलिया को नियुक्त किया था. रजत गुलिया के नेतृत्व में पुलिस ने प्रयास करने शुरू कर दिए. 500 से ज्यादा  सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए. पुलिस द्वारा उन्हें बारबार देखा जा रहा था.

इस केस की जांचपड़ताल करते हुए 3 दिन का समय गुजर गया, लेकिन पुलिस के हाथ कोई सबूत नहीं मिला. 3 दिनों के बाद पुलिस फिर से उस घटनास्थल पर गई. जब आसपास के लोगों से पूछताछ की तो बहादुरपुर गांव के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस से कहा कि साहब मैं दावे के साथ तो नहीं कह सकता, लेकिन ठीक एक दिन पहले 6 दिसंबर, 2025 को रात के करीब 11-साढ़े 11 बजे इस रोड पर मैं ने एक कार को देखा था. मुझे उस कार का नंबर तो याद नहीं है, लेकिन उस कार के नंबर प्लेट पर यूपी का नंबर लिखा हुआ था.

निकाह से पहले अरेस्ट

पुलिस ने इसी को आधार बना कर जब इस केस की जांचपड़ताल करते हुए आगे जा कर जब रोड पर लगे हुए सीसीटीवी की फुटेज को चैक किया तो आखिरकार एक सीसीटीवी में वह कार जाते हुए दिखाई दी. उस का नंबर भी साफसाफ दिखाई दे गया. पुलिस गाड़ी के उस नंबर के माध्यम से उस के मालिक तक पहुंच गई. कार के मालिक से पता चला कि उस गाड़ी के ड्राइवर का नाम बिलाल है, जो मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नकुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत टिडोली गांव का रहने वाला है.

13 दिसंबर, 2025 को शाम के करीब 7 बजे के आसपास हरियाणा की पुलिस अपनी टीम के साथ बिलाल के घर पहुंच गई. उस दिन बिलाल की छोटी बहन की बारात आई हुई थी. कुछ बाराती चले गए थे. कुछ बाराती वहां मौजूद थे. उस वक्त बिलाल की बहन की विदाई का कार्यक्रम चल रहा था. बड़ी संख्या में पुलिस बल देख कर घर में अफरातफरी मच गई. पुलिस ने बिलाल के अब्बा फुरकान से संपर्क किया. उन से पूछा कि आज तुम्हारे यहां क्या फंक्शन है? उन्होंने बता दिया कि आज उन की बेटी की विदाई हो रही है.

पुलिस के कहने पर फुरकान ने अपने बेटे बिलाल को पुलिस के सामने पेश कर दिया.  पुलिस वालों ने जब उस से सवाल करने शुरू किए तो बिलाल सवालों के जवाब नहीं दे पा रहा था. सर्दी में भी उसे पसीना आने लगा. फुरकान समझ गया कि कुछ न कुछ उस के बेटे ने गड़बड़ की है. तभी बिलाल ने वहां से भागने की कोशिश की. उसे पता नहीं था कि चारों तरफ से वह पुलिस से घिरा हुआ है.

पुलिस ने बिलाल को गिरफ्तार कर लिया. तभी काफी संख्या में मौजूद रिश्तेदार पुलिस का विरोध करने लगे. सभी रिश्तेदार जानना चाहते थे कि बिलाल को पुलिस क्यों गिरफ्तार करने आई है. तब पुलिस ने उन्हें बता दिया कि इस ने एक महिला की हत्या की है. पुलिस उसे गिरफ्तार कर लौट आई. थाने में जब उस महिला की हत्या के बारे में पूछताछ की तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने उमा नाम की महिला की हत्या कर उस की सिरविहीन लाश हरियाणा के यमुना नगर क्षेत्र में डाल दी थी और उस का सिर हरियाणा हिमाचल प्रदेश के बौर्डर पर कलेसर जंगल में एक खाई में डाल दिया था.

पुलिस ने रविवार 14 दिसंबर, 2025 को बिलाल की निशानदेही पर हरियाणा हिमाचल के बौर्डर पर कलेसर जंगल में स्थित लालढांग की खाई से उमा का सिर बरामद किया गया. हालांकि वहां छुरा बरामद नहीं हुआ. पुलिस ने अदालत में पेश कर के बिलाल को 4 दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया था. रिमांड अवधि पर उस ने पुलिस को उमा की हत्या करने की जो कहानी बताई, वह हैरान करने वाली निकली—

हमदर्दी ने प्यार जगाया

बिलाल 4 भाईबहन हैं. वह पहले ट्रक और डंपर चलाता था. इन दिनों कार की ड्राइविंग कर रहा था. पेशेवर तरीके से कार की बुकिंग कर के यात्रियों को उन की बताई हुई मंजिल तक पहुंचाता था. रोज की तरह उस दिन भी वह एक फैक्ट्री में किसी सवारी को छोडऩे आया था. फैक्ट्री के गेट के बाहर एक महिला बेंच पर बैठी हुई थी. करीब 30 साल की, उस का चेहरा पीला था. आंखों में थकान और बेचैनी साफ झलक रही थी.

बिलाल का ध्यान उस पर चला गया. वह आदतन संवेदनशील था. उस ने पास जा कर उस से धीरे से पूछा, ”आप ठीक तो हैं? कुछ परेशान लग रही हैं.’’

महिला ने कमजोर सी मुसकान के साथ कहा, ”बुखार आ रहा है, सिर घूम रहा है. इसी फैक्ट्री में काम करती हूं. छुट्टी ले कर घर जा रही थी. चला नहीं गया, इसलिए अकेली बैठी हूं. अगर हो सके तो मुझे गंगोत्री कालोनी में घर तक छोड़ दीजिए.’’

घर पहुंचने पर बिलाल ने मैडिकल स्टोर से ला कर बुखार की दवा भी खिला दी. 2 घंटे में बुखार उतर गया तो बिलाल अपने घर चला गया. अगले कुछ दिनों में बिलाल हालचाल पूछने आने लगा. कभी दवा लाता, कभी फल. बातचीत का सिलसिला बढ़ा तो अहसासों की गरमाहट भी. दोनों ने अपनेअपने संघर्ष, अकेलापन और सपने साझा किए. उमा को बिलाल की सादगी और ईमानदारी भा गई और बिलाल को उमा की समझदारी और आत्मसम्मान.

एक दिन उमा ने बिलाल को अपनी जिंदगी की दुखभरी कहानी सुनाई. 13 साल पहले की बात है. मैं ने अपने पड़ोस के एक युवक जौनी के साथ भाग कर शादी की थी. मेरे एक बेटा भी है, जो अपने पापा के साथ रहता है. घर से बाहर 10 साल हम ने इधरउधर बिताए. उस के बाद हम लौट कर सहारनपुर आ गए. मेरे फेमिली वालों ने मुझ से संबंध खत्म कर दिए थे.

सहारनपुर आने पर मैं अपने पति के साथ  रमजानपुर में रहती थी. मैं काफी गुरबत में समय बिता रही थी. मोहल्ले के ही एक युवक से मेरा संपर्क हुआ. उस ने मुझे सहारनपुर में एक फैक्ट्री में नौकरी दिला दी. एक मोहल्ले के ही होने के कारण कभीकभी मैं उस के साथ चली जाती और कभीकभी वापसी में भी हम साथसाथ ही आ जाते. इस से पति मेरे ऊपर शक करने लगा. मैं ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन पति जौनी के दिमाग से शक दूर नहीं हुआ.

इस बात को ले कर हम दोनों के बीच झगड़ा होने लगा. दिलों में खटास पैदा हो गई. मैं ने गंगोत्री में किराए पर मकान लिया और पति से अलग इस किराए के मकान में अकेली रहने लगी. बात तलाक तक पहुंच गई. इस तरह हम दोनों के बीच संबंध विच्छेद हो गया. कुछ दिनों बाद युवक ने फैक्ट्री से काम छोड़ दिया. मेरा संपर्क उस से टूट गया. पति ने मेरी कभी कोई खबर नहीं ली. इस तरह मैं अकेली पड़ गई.

मैं एक दिन अपने पति के कमरे पर अपने बेटे से मिलने के इरादे से गई. पता चला कि वह मकान खाली कर के अपने गांव वापस चला गया है. उमा की आंखों में आंसू आ गए. दोनों एकदूसरे के करीब आए. उन के दिलों में एक नई गरमाहट जाग रही थी. धीरेधीरे मामला प्यार में बदल गया.

सहारनपुर की गलियों में एक नई कहानी शुरू हो चुकी थी 2 अकेले दिलों के मिलन की. बिलाल और उमा अब साथ थे. वे लिवइन में रहने लगे. बिलाल अपने घर कोई न कोई बहाना बना कर उमा के साथ रातें बिताया करता था. घर का सारा खर्च बिलाल ही उठाता था.

परिजनों ने तोड़ा संबंध

बिलाल को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने सब से पहले उस से सवाल किया कि यह महिला कौन है और इस की हत्या क्यों की? बिलाल ने पुलिस को अपनी मोहब्बत की शुरुआत की सारी कहानी बता दी. सिर को भी पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. शेष धड़ का तो पहले ही पोस्टमार्टम हो चुका था. सिरविहीन धड़ लावारिस घोषित हो जाने के कारण सेवा समिति ने बगैर सिर के अज्ञात मान कर पश्चिम यमुना नहर के पास श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया था.

क्योंकि अब उमा की शिनाख्त हो गई थी. उस के परिवार का पता लग गया था, इसलिए पुलिस पोस्टमार्टम के बाद सिर को ले कर उमा के गांव हलालपुर पहुंची तो उस का भाई टिंकू मिला. टिंकू ने बताया कि साहब करीब 15 साल पहले उमा की शादी हो रही थी. हम लोगों को पता ही नहीं चला, जिस दिन उस की बारात आने वाली थी, उसी दिन मौका पाते ही वो जौनी के साथ घर से भाग गई थी. उसी रात हम ने फैसला ले लिया था कि हम अब उमा को कभी याद नहीं करेंगे. उमा से हमारा कोई वास्ता नहीं है. उमा से हमारा कोई रिश्तानाता नहीं है.

पुलिस वाले जब उस का सिर ले कर पहुंचे तो इंसानियत के नाते टिंकू ने पुलिस वालों और रिश्तेदारों के कहने पर सिर का अंतिम संस्कार कर दिया. गांव के लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि आखिरकार यह सब कैसे हो गया. फिर पुलिस उस के पति जौनी के पास गई. जौनी बोला कि मुझे पता चला है कि वह किसी बिलाल नाम के युवक के साथ रह रही थी. उस ने ही उस का कत्ल कर दिया है. जौनी ने कहा कि मुझे उस के मर्डर का दुख तो है, लेकिन मेरा उस से कोई वास्ता या सरोकार नहीं रहा. कानूनन मेरा उमा से तलाक हो चुका था.

बिलाल इस समय जेल में है. पुलिस का दावा है कि उस ने सारे सबूत एकत्र कर लिए हैं. आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी. Love Crime

 

 

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