Hindi Story: देवेश वर्मा एक ऐसा शातिर ट्यूटर था, जो अपने प्रोफेशन की आड़ में ड्रग्स बेचने का धंधा करता था. वह ट्यूशन पढऩे आने वाली धनाढ्य परिवार की लड़कियों को ड्रग मिली चौकलेट खिला कर नशे का गुलाम बना देता था. इस के बाद उन्हें मोटी रकम में चौकलेट बेचता. इच्छा भी उस के जाल में फंस चुकी थी. इस जाल से निकलने के लिए इच्छा ने अपनी फ्रेंड ङ्क्षरकी के साथ मिल कर ऐसी चाल चली कि...

''इच्छा... ओ इच्छा... अरे अभी उठी कि नहीं? घड़ी देख, 7 बज गए हैं. अब जल्दी से उठ जा.’’ इच्छा की मम्मी सोनालिका इस तरह चिल्लाईं मानो इच्छा के नाम की माला जप रही हों, लेकिन सुबहसुबह इच्छा को मम्मी की आवाज कौवे की आवाज की तरह कर्कश लगती थी. केवल उस का नाम ही इच्छा था. बाकी कुछ भी उस की इच्छा से नहीं होता था. पूरी रात उस के सिर का बोझ उठाने वाले तकिए में इच्छा ने सिर डाल दिया. पर यह क्या, मम्मी की आवाज इतनी तेज थी कि उस ने तकिए को बेध कर उस के कानों के परदे को हिला दिया.

इतने पर भी उस की मम्मी को तसल्ली नहीं हुई. वह दरवाजा पीटते हुए बोलीं, ''इच्छा, उठ जा अब. तुझे उठाने के अलावा मुझे और भी बहुत सारे काम हैं.’’

इतना सुन कर इच्छा ने चादर किनारे फेंकी और दोनों पैर हवा में उछाल कर बिस्तर पर ही बैठ गई. पर दिल में अभी भी एक उम्मीद थी कि शायद मम्मी ऊब कर चली जाएंगी तो थोड़ा और सोने को मिल जाएगा. उस दिन रविवार था. इसी एक दिन तो थोड़ा शांति से सोने को मिलता था. पर उस की मम्मी को उस दिन भी संतोष नहीं होता था. उन्होंने जोर से दरवाजे पर मुक्का मारा. इच्छा ने उठ कर दरवाजा खोला, ''शांत मम्मी. अब मैं उठ गई हूं.’’

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