Film: बौलीवुड के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर विक्रम भट्ट और उस की दूसरी पत्नी श्वेतांबरी सोनी और कई अन्य लोगों को उदयपुर पुलिस ने 30 करोड़ रुपए की ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है. यह ठगी उन्होंने जानेमाने डौक्टर और इंदिरा आईवीएफ चेन के फाउंडर डा. अजय मुर्डिया को एक झांसे में ले कर की. आखिर ठगी का शिकार बने डा. अजय मुर्डिया किस तरह आरोपियों के जाल में फंसे? पढ़ें, यह चौंकाने वाली कहानी.

उदयपुर शहर में स्थित इंदिरा आईवीएफ हौस्पिटल के मालिक डा. अजय मुर्डिया पिछले कई दिनों से परेशान थे. यह परेशानी उन को चैन से बैठने नहीं दे रही थी. इस की वजह यह थी कि उन के साथ 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई थी. यह धोखाधड़ी करने वाले बौलीवुड के बड़े लोग थे. डा. अजय ने पुलिस में जा कर रिपोर्ट दर्ज कराने का मन बनाया.

डा. अजय एक हस्ती थी. मगर वह दिवंगत पत्नी डा. इंदिरा पर बायोपिक बनवाने के चक्कर में ठगी और धोखाधड़ी का शिकार हो गए थे. 8 नवंबर, 2025 को डा. अजय उदयपुर जिले के एसपी योगेश गोयल से मिले और अपने साथ हुई धोखाधड़ी के बारे में उन्हें बताया.

एसपी योगेश गोयल ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा, ”डौक्टर साहब, आप अपने क्षेत्र के भुपालपुरा थाने पर जा कर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करा दें. बाकी काम हम पर छोड़ दो, आरोपी चाहे कितने भी बड़े ओर ताकतवर क्यों न हों, बचेंगे नहीं.’’

”ठीक है साहब, मैं थाने जा कर रिपोर्ट दर्ज करवा देता हूं.’’ कहने के साथ डा. अजय उदयपुर के भुपालपुरा थाने गए और एसएचओ आदर्श कुमार को तहरीर देते हुए अपने साथ की गई 30 करोड़ रुपए की ठगी की कहानी बता दी. डा. अजय की तहरीर पर थाने में 8 नवंबर, 2025 को बौलीवुड फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और उस की पत्नी श्वेतांबरी सोनी, बेटी कृष्णा समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कर ली गई.

डा. अजय ने 200 करोड़ की कमाई का झांसा दे कर ठगी करने का आरोप लगाया. डा. अजय मुर्डिया ने इस एफआईआर में जिन लोगों को आरोपी बनाया, उन में फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट, उस की पत्नी श्वेतांबरी, बेटी कृष्णा निवासी अंधेरी वेस्ट, मुंबई, दिनेश कटारिया निवासी सहेली नगर उदयपुर, प्रोड्यूसर महबूब अंसारी निवासी ठाणे, मुदित बुट्टान निवासी दिल्ली, गगेश्वर लाल श्रीवास्तव डीएसपी चेयरमैन, अशोक दुबे जनरल सेक्रेट्री, फेडरेशन औफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लाइज मुंबई के नाम थे.

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. इंदिरा आईवीएफ हौस्पिटल उदयपुर के मालिक डा. अजय मुर्डिया अपनी दिवंगत पत्नी डा. इंदिरा से बहुत प्यार करते थे. पत्नी की याद को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए वह उन के जीवन पर बायोपिक बनाना चाहते थे.

फंसे डौक्टर जाल में

इस के लिए उन्होंने उदयपुर के दिनेश कटारिया से संपर्क किया. कटारिया के कहने पर उस के साथ वह 25 अप्रैल, 2024 को मुंबई गए. दिनेश कटारिया ने डा. अजय को कहा था कि उस की डायरेक्टर विक्रम भट्ट से अच्छी जानपहचान है. वह उन से कह कर उस की दिवंगत पत्नी की बायोपिक बनवा देगा.

कटारिया ने डा. अजय की मुंबई के वृंदावन स्टूडियो में विक्रम भट्ट से मुलाकात कराई. बायोपिक बनाने पर उन के बीच चर्चा हुई. विक्रम भट्ट ने कहा था कि फिल्म निर्माण से जुड़े सभी कार्य वह कर लेंगे और आप बस रुपए भेजते रहना. विक्रम भट्ट ने यह भी कहा कि उन की पत्नी और बेटी दोनों फिल्म निर्माण के कार्य में एसोसिएट हैं. उन्होंने अपनी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट के नाम से एक वीएसबी एलएलपी नाम से रजिस्टर्ड फर्म बना रखी है.

दिनेश कटारिया ने डा. अजय से कहा कि आप की पत्नी डा. इंदिरा की बायोपिक से अन्य लोगों को आप के कार्यों और सोच की जानकारी भी मिलेगी. ऐसे में फिल्म की लागत का 4-5 गुना लाभ भी मिलेगा.

इस लाभ को देखते हुए डा. अजय झांसे में आ गए. इस के बाद उन्होंने विक्रम भट्ट के साथ 2 फिल्मों के निर्माण में रुपए लगाने की सहमति दी, जिस के बाद भट्ट ने अपनी पत्नी की फर्म वीएसबी एलएलपी और इंदिरा इंटरप्राइजेज के बीच 2 फिल्मों बायोपिक और महाराणा-रण के निर्माण का 40 करोड़ रुपए का एग्रीमेंट करवाया.

विक्रम भट्ट और उस की पत्नी ने 2 करोड़ 50 लाख रुपए मांगे, जो डा. अजय ने 31 मई, 2024 को आरटीजीएस करवा दिए. कुछ दिनों बाद विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट उदयपुर आए. उन्होंने डा. अजय से कहा, ”7 करोड़ रुपए और फाइनेंस कर के वे 4 फिल्में 47 करोड़ रुपए में बना सकते हैं. इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा.’’

फिर 2 जुलाई, 2024 को इंदिरा एटरटेनमेंट नाम से एक नई एलएलपी का रजिस्ट्रैशन करवाया. उन के स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए. इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए. वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया. जबकि 4 फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था.

इस में डा. अजय और श्वेतांबरी के बीच 50-50 प्रतिशत की भागीदारी तय हुई. सभी वेंडरों और खर्चों का भुगतान उन्हें सीधे ही इंदिरा एंटरटेनमेंट के जरिए किया जाना तय हुआ, जो श्वेतांबरी और दिनेश कटारिया (इंदिरा एंटरटेनमेंट) दोनों की सहमति पर भुगतान होता था. विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी सोनी ने केवल 2 फिल्मों का निर्माण कर रिलीज करवाया. तीसरी फिल्म ‘विश्व विराट’ लगभग 25 प्रतिशत ही बनाई गई. वहीं चौथी फिल्म ‘महाराणा- रण’ की अभी तक शूटिंग भी चालू नहीं हुई.

वहीं डायरेक्टर ने फिल्म ‘महाराणा- रण’ के ही 25 करोड़ हड़प लिए. आरोपियों के वाउचर तैयार किए. ऐसे में आरोपियों ने मिलीभगत से सहमति कर इंदिरा एंटरटेनमेंट से भुगतान कराया और रुपए हड़प लिए. आरोप है कि फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट एवं अन्य ने फिल्म बनाने के नाम पर 44.28 करोड़ का भुगतान कराया.

इस में से करीब 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की. फरजी क्लेम के आधार पर डौक्टर की कंपनी इंदिरा एंटरटेनमेंट को नोटिस दिलवा कर 11 करोड़ के और भुगतान का दबाव बनाया. साजिश कर फरजी, ओवर वैल्यूड बिल और फरजी लोगों के वाउचर तैयार कराए. नामचीन हस्तियों ने मिलीभगत से इंदिरा एंटरटेनमेंट से भुगतान करा कर 30 करोड़ रुपए हड़प लिए.

डा. अजय ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने फिल्म से जुड़ी शटर स्टौक्स, कौस्ट्यूम, आईपीआर, औड डाइंस, रा और एडिटेड फुटेज, म्यूजिक मास्टर फाइल, स्क्रिप्ट राइटर, सिनौप्सिस आदि कब्जे में ले रखे हैं. 11 करोड़ रुपए नहीं देने पर सामग्री नहीं दे रहे हैं. 4 फिल्में बनाए जाने का कौन्ट्रैक्ट हुआ था. लेकिन कौन्ट्रैक्ट के अनुसार प्रोड्क्शन हाउस ने फिल्में नहीं बनाईं.

विक्रम भट्ट और उन के सहयोगियों पर आरोप है कि पैसा जिस उद्ïदेश्य के लिए प्रोड्क्शन हाउस को दिया गया था, उस पैसे को फिल्म बनाने की जगह अपने हितों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल किया था. यह भी आरोप हैं कि जिस फिल्म पर सब से अधिक पैसे लगे थे, उस फिल्म का निर्माण उन्होंने शुरू ही नहीं किया था. शिकायत के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई. उदयपुर के एसपी योगेश गोयल के दिशानिर्देशन एवं डीएसपी छगन राजपुरोहित के नेतृत्व में भुपालपुरा के एसएचओ आदर्श कुमार मामले की जांच करने लगे.

पुलिस वित्तीय लेनदेन की जांच कर पता लगाने में जुट गई कि डा. अजय के साथ 30 करोड़ की धोखाधड़ी हुई या नहीं? धोखाधड़ी मामले में डा. अजय की ओर से पुलिस को उपलब्ध कराए गए सबूतों की जांच में पुलिस को धोखाधड़ी होने का पता चला. जांच में पता चला कि वेंडर के माध्यम से पेश बिल विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी, कोप्रोड्यूसर महबूब अंसारी और सहेली नगर उदयपुर के दलाल दिनेश कटारिया की ओर से सत्यापित किए जाते थे. इस के बाद ही इंदिरा एंटरटेनमेंट के अकाउंट से भुगतान होता था, जिस में गड़बड़ी हुई.

डीएसपी छगन राजपुरोहित के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम मुंबई गई और धोखाधड़ी के आरोपियों की तलाश शुरू की. स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट के कोप्रोड्यूसर महबूब उस्मान अंसारी और वेंडर को 17 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार कर पुलिस उदयपुर ले आई.

ऐसे खेला गया खेल

भुपालपुरा थाने में दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई. आरोपियों ने अपना जुर्म कुबूल किया. विस्तृत पूछताछ के लिए 18 नवंबर, 2025 को पुलिस ने दोनों आरोपियों महबूब उस्मान अंसारी और संदीप विश्वनाथ त्रिभुवन को उदयपुर के कोर्ट में पेश कर 5 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया और थाने ला कर  उन से कड़ी पूछताछ की गई.

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि फिल्म बनाने के नाम पर डा. अजय से फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उन के साथी फरजी वेंडरों के खातों में औनलाइन पेमेंट लेते थे. ये पेमेंट फरजी वेंडरों के खाते से विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट के अकाउंट में ट्रांसफर करवाया जाता था. रिमांड के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि डा. अजय को फरजी बिल दे कर औनलाइन पेमेंट लिया जाता था. फरजी बिलों के भुगतान के लिए पेंटरों, औटोवालों, छोटे दुकानदररों तक को फरजी वेंडर बना रखा था. 25 से ज्यादा बार फरजी वेंडरों के नाम पर पेमेंट उठाया गया था.

एक बार में करीब 2 लाख रुपए औनलाइन लेते थे. इस में से 1 लाख 40 हजार रुपए विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी के बैंक खाते में ट्रांसफर करवा दिए जाते थे. बचे हुए 60 हजार रुपए वेंडर रख लेते थे.

दोनों आरोपियों महबूब अंसारी एवं संदीप विश्वनाथ की गिरफ्तारी की भनक विक्रम भट्ट और उन के साथियों को लगी तो वे अपने बचाव के लिए वकीलों से रायमशविरा करने लगे. पुलिस पीडि़त डा. अजय और विक्रम भट्ट के बीच डील करवाने वाले उदयपुर के रहने वाले दलाल दिनेश कटारिया की तलाश में जुट गई. आरोपी दिनेश कटारिया मामला खुलने पर फरार हो गया था. कटारिया के मुंबई में छिपे होने की जानकारी मिली. धोखाधड़ी मामले में नामजद एवं अन्य आरोपियों की गतिविधियों पर पुलिस ने नजर रखनी शुरू कर दी.

जांच में इन की भूमिका का पता लगाने के बाद पुलिस आगे की काररवाई करने को तैयार है. फरजीवाड़े के खुलासे के बाद निर्देशक विक्रम भट्ट पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है. जांच में पता चला कि गिरफ्तार वेंडर संदीप का वेतन 60 हजार रुपए महीना था, मगर इंदिरा एंटरटेनमेंट से 2 लाख रुपए तक भुगतान करवाया.  खाते में 2 लाख रुपए आने पर संदीप अपने वेतन के अलावा के 1 लाख 40 हजार रुपए श्वेतांबरी के खाते में ट्रांसफर करता था. अन्य फरजी वेंडर भी इसी तरह श्वेतांबरी को पेमेंट नकद या अकाउंट में करते थे. मुख्य आरोपी की ओर से राशि अपने खातों में डलवाई गई.

विक्रम भट्ट का आरोप

2 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद निर्देशक विक्रम भट्ट ने धोखाधड़ी के आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया. विक्रम भट्ट ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पुलिस को गुमराह किया गया है, जो बातें एफआईआर में लिखी हैं, वह बिलकुल गलत हैं. विक्रम भट्ट ने यह भी कहा कि पुलिस को विश्वास दिलाने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया होगा.

फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट ने दावा किया कि डौक्टर ने ‘विराट’ फिल्म को आधे में ही रोक दिया और टेक्नीशियनों के करोड़ों रुपए अभी तक नहीं चुकाए. यह मामला यही दिखाता है कि भुगतान से बचने के लिए ऐसा किया गया है. विक्रम भट्ट ने कहा कि वह पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे और जो तथ्य हैं, उन्हें सामने रखेंगे. विक्रम भट्ट ने कहा कि एफआईआर के बाद में 17 नवंबर को पता चला था. भट्ट ने कहा राजस्थान पुलिस को गुमराह किया जा रहा है.

विक्रम भट्ट ने तो यहां तक कह दिया कि वह डा. अजय को जानता तक नहीं. पुलिस जांच में सच सामने आ रहा है. डा. अजय के आरोप पुलिस जांच में सही पाए जा रहे हैं. अगर डौक्टर के आरोप सही हैं तो विक्रम भट्ट यह कह कर बच नहीं सकता कि वह डौक्टर को जानता नहीं.

डौक्टर से 30 करोड़ की धोखाधड़ी के खुलासे के बाद आरोपी फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट गिरफ्तारी से बचने के लिए बौंबे हाईकोर्ट में ट्रांजिट बेल के लिए गया और अग्रिम जमानत के लिए अरजी लगाई. अगर विक्रम भट्ट ने डा. अजय से मूवी बनाने के नाम पर धोखाधड़ी नहीं की तो वह बौंबे हाईकोर्ट अग्रिम जमानत के लिए क्यों गया? यह बड़ा सवाल है.

गिरफ्तार आरोपियों महबूब अंसारी एवं संदीप विश्वनाथ ने रिमांड अवधि के दौरान पुलिस पूछताछ में जो कुछ बताया. कथा लेखक ने पुलिस सूत्रों से जानकारी हासिल की. डा. अजय के साथ धोखाधड़ी की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार है—

उदयपुर के सुभाषनगर मोहल्ले के रहने वाले डा. अजय मुर्डिया कुम्हारों का भट्टा चौराहा में इंदिरा आईवीएफ हौस्पिटल स्थित है. डा. अजय का जन्म 12 नवंबर, 1952 को राजस्थान के उदयपुर में हुआ था. वह पढ़ाई के बाद डौक्टर बन गए. यह कहानी शुरू होती है 47 साल पहले अगस्त, 1978 से डा.  अजय का पुरुषों के प्रजनन से संबंधित विषय पर एक रिसर्च पेपर विश्व प्रतिष्ठित जर्नल ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित हुआ.

उसी साल ब्रिटेन में पैट्रिक स्टेप्टो, राबर्ट एडवड्र्स और जिन पर्डि की तिकड़ी ने इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक के जरिए दुनिया के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी लुइस ब्राउन को जन्म दिलाने में सफलता हासिल की थी.

डा. अजय को वहीं से यह तकनीक भारत में लाने और इसे जनजन तक पहुंचाने की प्रेरणा मिली, पर ऐसी विशिष्ट तकनीक को उन दिनों भारत तक लाना आसान नहीं था. आर्थिक पक्ष तो एक बात थी,  सामाजिक पहलुओं पर भी डा. अजय को संघर्ष करना था. खैर, 1988 में उन्होंने उदयपुर में अपने पहले इंदिरा इनफर्टिलिटी क्लीनिक ऐंड रिसर्च सेंटर की शुरुआत की. यह वह दौर ऐसा था, जब शादीशुदा जोड़े को बच्चा न होने के लिए सिर्फ पत्नी को ही जिम्मेदार माना जाता था.

इसी सोच को चुनौती देने के लिए उन्होंने निस्संतानता भारत छोड़ो अभियान की शुरुआत की. इस अभियान के तहत डा. अजय ने 25 राल्यों के 752 शहरों में 3,242 फ्री इनफर्टिलिटी कंसल्टेशन कैंप किए और 75 हजार से ज्यादा जोड़ों की मदद की. इस अभियान के दौरान डा. अजय को समझ आया कि निस्संतानता की समस्या कितनी व्यापक है. आईवीएफ बेशक इस का समाधान था, लेकिन इस की सब से बड़ी बाधा यह थी कि उस समय आईवीएफ में औसतन 5 से 6 लाख रुपए का खर्च आता था. इसलिए यह समृद्ध परिवारों तक ही सीमित था.

आईवीएफ की सुविधा सिर्फ बड़े शहरों में ही उपलब्ध थी. इसलिए गांव या छोटे शहर में लोगों के लिए वहां जा कर आईवीएफ कराने में और भी ज्यादा पैसे खर्च हो रहे थे.

दिनेश बना बिचौलिया

डा. अजय ने 2011 में इंदिरा आईवीएफ की शुरुआत की. उन्होंने आईवीएफ के खर्च को 5-6 लाख रुपए से घटा कर डेढ़ से 2 लाख रुपए तक ला दिया. इस से आर्थिक बाधा खत्म हुई. अब भौगोलिक बाधा दूर करने के लिए डा. अजय ने छोटे शहरों का रुख किया. आज 155 से ज्यादा सेंटर हैं. इन में 70 फीसदी से ज्यादा टियर-2 और टियर- 3 के शहरों में हैं.

आईवीएफ का खर्च कम करने के लिए डा. अजय ने ‘क्लोज्ड वर्किंग चैंबर’ और ‘क्लाउड मौनिटरिंग सिस्टम’ जैसी तकनीक पर आयात निर्भरता कम करने की ठानी. सरकार के साथ मिल कर उन्होंने स्थानीय स्तर पर टेक्नोलौजी विकसित की. डा. अजय की शादी डा. इंदिरा से हुई थी. पतिपत्नी कंधे से कंधा मिला कर चलते थे. पत्नी डा. इंदिरा की मौत होने के बाद डा. अजय उन्हें भुला नहीं पा रहे थे.

इंदिरा आईवीएफ के फाउंडर डा. अजय की पत्नी स्वर्गीय डा. इंदिरा की याद में स्वरांजलि संगीत कार्यक्रम में डा. अजय की मुलाकात सहेली नगर, उदयपुर निवासी दिनेश कटारिया से हुई थी. कार्यक्रम के दौरान दिनेश कटारिया ने डा. अजय से कहा, ”डौक्टर  साहब, आप अपनी पत्नी डा. इंदिरा की बायोपिक बनवा लीजिए. इस से आप के काम के बारे में लोगों को पता चलेगा और पत्नी की याद भी स्थाई होगी.’’

यह बात सुन कर डा. अजय ने कहा, ”मैं बायोपिक बनाने वालों को जानता तक नहीं, तब भला कैसे बायोपिक बने.’’

”मैं बौलीवुड के तमाम निर्मातानिर्देशकों को जानता हूं. निर्देशक विक्रम भट्ट तो मेरे खास मित्र हैं. आप मेरे साथ चलना, मैं आप को उन से मिलवा दूंगा.’’ दिनेश कटारिया ने अपना बखान करते हुए कहा था.

”बायोपिक पर कितना खर्च आएगा.’’ डा. अजय ने जानना चाहा.

तब दिनेश बोला, ”बायोपिक बनाने पर जितना खर्च आएगा, उस से ज्यादा करीब 4-5 गुना कमाई हो जाएगी.’’

”अच्छा, यह बात है तो एक दिन टाइम निकाल कर मुंबई चलो और निर्देशक विक्रम भट्ट से मिलाओ.’’ डा. अजय ने कहा.

”आप जब कहेंगे, उस दिन चलने को तैयार हूं.’’ दिनेश कटारिया बोला.

दिनेश कटारिया के झांसे में आ कर डा. अजय अप्रैल 2024 में मुंबई जा कर विक्रम भट्ट से वृंदावन स्टूडियो में मिले. डा.  अजय ने कहा कि वह दिवंगत पत्नी डा.  इंदिरा पर बायोपिक बनवाना चाहते हैं.

इस पर विक्रम भट्ट ने बायोपिक और एक ऐतिहासिक फिल्म ‘महाराणा- रण’ बनाने का डा. अजय को प्रस्ताव दिया. बायोपिक और ‘महाराणा- रण’ का खर्च 40 करोड़ रुपए बता कर निर्देशक विक्रम भट्ट ने कहा, ”बायोपिक और रण फिल्म की लागत 40 करोड़ है, मगर यह गारंटी है कि ये फिल्में 100 से 200 करोड़ रुपए रिलीज के बाद कमा लेंगी.’’

यह सुन कर डा. अजय को लगा कि वह 40 करोड़ रुपए खर्च कर के उस का 4-5 गुना कमा सकते हैं. ऐसे में उन्होंने बायोपिक और ‘महाराणा- रण’ फिल्म का अनुबंध कर लिया. 40 करोड़ के टर्म शीट के बाद 4 फिल्मों के लिए 47 करोड़ का नया समझौता हुआ. इंदिरा इंटरप्राइजेज के स्थान पर इंदिरा एंटरटेनमेंट एलएलपी का गठन किया गया.

इस में डा. अजय 50 प्रतिशत, श्वेतांबरी 50 प्रतिशत के भागीदार बने. समस्त वेंडरों व खर्चों का भुगतान उन्हें सीधे ही इंदिरा एंटरटेनमेंट के द्वारा किया जाना तय हुआ, जो श्वेतांबरी एवं दिनेश कटारिया (इंदिरा एंटरटेनमेंट) दोनों के अनुमोदन पर भुगतान होता था.

डा. अजय तो अपनी दिवंगत पत्नी डा. इंदिरा पर बायोपिक बनवाना चाहते थे. मगर 25 अप्रैल, 2024 को मुंबई जा कर दिनेश कटारिया के जरिए विक्रम भट्ट से मुलाकात करने पर विक्रम भट्ट ने डौक्टर से कहा, ”डौक्टर साहब, आप बायोपिक में अपना रुपया लगा रहे हैं तो मेरे पास एक और फिल्म का प्रोजेक्ट है. उस में भी आप फाइनैंस कर दें तो आप को बड़ी कमाई हो सकती है. मैं आप को यकीन दिलाता हूं कि उन की पत्नी और बेटी भी फिल्ममेकिंग के काम में एसोसिएट हैं.’’

विक्रम भट्ट ने 2 फिल्मों बायोपिक और महाराणा (रण) के निर्माण का 40 करोड़ रुपए का टर्म शीट करवाया, जिस में बायोपिक निर्माण का बजट 15 करोड़ रुपए था. और बाकी के 25 करोड़ ‘महाराणा- रण’ फिल्म के लिए थे. उस एग्रीमेंट में विक्रम भट्ट, उस की पत्नी श्वेतांबरी ने बेटी कृष्णा का भी नाम डलवाया था. बायोपिक की रिलीज डेट 23 मार्च, 2025 लिखी गई थी.

विक्रम और उस की पत्नी श्वेतांबरी ने फिल्म पर काम शुरू करने के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपए मांगे थे, जोकि डा. अजय ने ट्रासफर करवा दिए थे. लेकिन कुछ दिन बाद विक्रम और उन की पत्नी उदयपुर आए और डा. अजय से 7 करोड़ रुपए की और डिमांड की. कहा कि अगर वह यह रुपए देते हैं तो वह 47 करोड़ में 4 फिल्में बना  सकते हैं और उस से 100-200 करोड़ रुपए का मुनाफा होगा.

हालांकि डौक्टर को यह बात खटकी कि जब 2 फिल्में 40 करोड़ में बन रही हैं तो 7 करोड़ और देने पर 4 फिल्में कैसे बन सकती हैं. लेकिन सब ने उन्हें समझाया और यकीन दिलाया कि 47 करोड़ से ज्यादा बजट नहीं जाएगा और मुनाफा 100-200 करोड़ रुपए होगा. डौक्टर भट्ट के झांसे में आ गए और डा. अजय ने उन्हें वह रकम भी दे दी. लेकिन इस के बाद भी पैसों की डिमांड होती रही. विक्रम भट्ट और उस की पत्नी श्वेतांबरी ने रोजाना के खर्चों का हवाला देते हुए कुछ लोगों के जोकि वेंडर न हो कर उन के स्टाफ में थे, के नाम के अकाउंट्स में अलगअलग कई बार 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए और ब्लैंक चैक, जिस पर डा. अजय और श्वेतांबरी के साइन थे, उस से भी 10 लाख 50 हजार रुपए विदड्रा किए.

डौक्टर को किया सचेत

विक्रम भट्ट ने चारों फिल्मों के वीएफएक्स के लिए 41 लाख रुपए हर महीने देने के लिए कहा. 11 अक्तूबर, 2024 से 15 मई, 2025 तक कुल 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए न्युब स्टूडियो को ट्रांसफर किए गए. लेकिन डायरेक्टर ने 4 की बजाय 5वीं फिल्म के वीएफएक्स का खर्चा जोड़ दिया था, जोकि ‘हैक्ड-2’ थी. और जब डा. अजय को शक हुआ तो विक्रम ने शूटिंग रोक दी और पैसे देने पर ही काम शुरू करने को कहते थे.

तब तक डौक्टर 42 करोड़ रुपए से ज्यादा का अमाउंट उन्हें दे चुके थे. लेकिन फिर विक्रम भट्ट के ही औफिस के एक व्यक्ति ने डा.  अजय को बताया कि उन के साथ धोखाधड़ी हो रही है. और सारे सबूत दिखाए. तब जा कर डा. अजय को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला. तब डा. अजय ने 8 नवंबर, 2025 को भुपालपुरा थाने (उदयपुर) में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने इस मामले में विक्रम भट्ट के कोप्रोड्यूसर महबूब अंसारी और वेंडर संदीप विश्वनाथ त्रिभुवन को 17 नवंबर, 2025 को मुंबई से गिरफ्तार किया और उदयपुर ला कर रिमांड पर ले कर पूछताछ की तो आरोपियों ने कई राज खोले.

आरोपियों ने बताया कि ठगी का तरीका बेहद चालाकी भरा था. फरजी वेंडरों का इस्तेमाल विक्रम भट्ट और उन के साथी असली फिल्म प्रोडक्शन के बजाय फरजी वेंडरों (सप्लायर्स) के नाम पर पैसे मांगते थे. ये वेंडर कागजों पर तो मौजूद दिखाए जाते थे, लेकिन हकीकत में वे भट्ट के कंट्रोल में ही थे.

डा. अजय से औनलाइन पेमेंट लिया जाता था, जो सीधे इन फरजी खातों में जाता था. फरजी वेंडरों के खातों से पैसे तुरंत विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी के व्यक्तिगत बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए जाते.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, करोड़ों रुपए के ऐसे ट्रांसफर हुए, जिन की जांच चल रही है. यह तरीका इसलिए अपनाया गया, ताकि ट्रेल छिपाया जा सके और पैसे को ‘लीगल’ दिखाया जा सके. आरोपी महबूब अंसारी ने यह भी कुबूला कि विक्रम भट्ट खुद इस स्कीम के मास्टरमाइंड थे. वे मीटिंग्स में डौक्टर अजय को भरोसा दिलाते. एक प्रमुख वेंडर के रूप में काम करने वाले संदीप त्रिभुवन ने भी इसी तरह के खुलासे किए.

पुलिस का कहना है कि विक्रम भट्ट मुंबई में छिपे हो सकते हैं और उन की तलाश के लिए टीमें भेजी गईं. श्वेतांबरी भट्ट के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया चल रही है. उदयपुर जिले के एसपी ने बताया कि यह मामला केवल डा. अजय तक सीमित नहीं लगता.

जांच में पता चला है कि विक्रम भट्ट और उन के नेटवर्क ने पहले भी कई निवेशकों को इसी तरह ठगा है. उदयपुर पुलिस डिजिटल ट्रेल्स,बैंक स्टेट्मेंटस और कौल रिकौड्र्स की जांच कर रही है. गिरफ्तार किए आरोपियों से रिमांड अवधि के दौरान महबूब और संदीप से फिल्म प्रोजेक्ट के फरजी डौक्यूमेंट्स, ईमेल्स और मीटिंग रिकौड्र्स बरामद किए गए हैं.  पुलिस का अनुमान है कि कुल ठगी की राशि 30 करोड़ से अधिक हो सकती है, क्योंकि कुछ पेमेंट्स कैश में भी लिए गए थे. डा. अजय ने बयान दिया है कि उन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट, कास्टिंग और शूटिंग शेड्यूल दिखाए गए थे, लेकिन सब कुछ फरजी था.

धोखाधड़ी की यह घटना बौलीवुड में निवेश के जोखिमों को उजागर कर रही है. विक्रम भट्ट, जो ‘1920’, ‘हांटेड’, ‘राज’ जैसी हौरर फिल्मों के लिए मशहूर है, अब विवादों के केंद्र में है. डा. अजय मुर्डिया जैसे गैरफिल्मी निवेशकों को लुभाने के लिए अकसर ऐसे प्रोजेक्ट का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह केस सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार को सामने ला रहा है.

12 अगस्त, 2024 को विक्रम भट्ट ने एक कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जहां उन्होंने डा. अजय की अध्यक्षता वाली इंदिरा एंटरटेनमेंट के साथ अपने सहयोग की घोषणा की. अभिनेता अनुपम खेर, ईशा देओल, अदा शर्मा और इश्वाक सिंह भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे. विक्रम भट्ट और महेश भट्ट ने एक भव्य कार्यक्रम में 4 फिल्में लांच कीं. ऐतिहासिक ‘रण’, वन्यजीव थ्रिलर ‘विराट’ और रोमांटिक ड्रामा ‘तू मेरी पूरी कहानी’ और ‘तुम को मेरी कसम’.

फिल्म ‘तुम को मेरी कसम’ डा. अजय (अनुपम खेर) ने भारत में आईवीएफ तकनीक को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. फिल्म डा. अजय के संघर्ष, मेहनत और सफलता की दास्तान को दिखाई है.

यह फिल्म मार्च 2025 में रिलीज हुई, मगर फ्लौप रही. इसी तरह डा. अजय ‘तू मेरी प्रेम कहानी’ के निर्माता थे. यह फिल्म भी रिलीज हो चुकी है. डा. अजय व विक्रम भट्ट की प्रस्तुति में बनी यह फिल्म भी कोई कमाल नहीं कर सकी.

‘विराट’ और ‘रण’ का अतापता नहीं. डा. अजय ने जिस धमाके के साथ बौलीवुड में एंट्री मारी थी. वह अब धोखाधड़ी के शिकार बन कर न्याय की मांग कर रहे हैं.

23 नवंबर, 2025 को भुपालपुरा थाना पुलिस ने आरोपियों महबूब अंसारी और संदीप विश्वनाथ त्रिभुवन को रिमांड अवधि समाप्त होने पर उदयपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन दोनों आरोपियों को फिर से कोर्ट ने पहली दिसंबर, 2025 तक पुलिस रिमांड पर सौंपा गया.

विक्रम भट्ट हुआ अरेस्ट

वहीं नामजद आरोपियों विक्रम भट्ट, श्वेतांबरी भट्ट, कृष्णा भट्ट एवं अन्य 3 आरोपियों को पुलिस ने नोटिस जारी कर 8 दिसंबर तक उदयपुर पुलिस के सामने पेश होने का आदेश दिया था. पेश न होने पर पुलिस इन के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेगी. पहली दिसंबर को रिमांड पर चल रहे आरोपियों महबूब अंसारी और संदीप को पुलिस उदयपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों आरोपियों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.

राजस्थान पुलिस ने 8 दिसंबर, 2025 को डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उस की पत्नी श्वेतांबरी को भी मुंबई से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. इन दोनों आरोपियों से भी पूछताछ के बाद पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

कथा लिखे जाने तक आरोपियों की जमानत नहीं हुई थी. धोखाधड़ी मामले की जांच डीएसपी छगन राजपुरोहित कर रहे थे. Film

 

 

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