Hindi Stories: रिजवाना खूबसूरत महिला थी. उस की खूबसूरती के जाल में उलझ कर नूर हसन ने मर्यादाओं को तोड़ दिया. लेकिन तलाक के डर से उस ने प्रेमी नहीं पति का साथ दिया. घर तो बचा लिया, लेकिन जेल जाने से नहीं बच सकी. एक रात नूर हसन जब अचानक लापता हो गया तो उस के घर वालों की परेशानी बढ़ गई. वह घर वालों के साथ ही सोया था,
सुबह देखा तो वह बिस्तर से गायब था. वह कहां चला गया? कोई नहीं जानता था. घर वालों को भी उस ने कुछ नहीं बताया था. हैरानी की बात यह थी कि उस का मोबाइल भी स्विच औफ आ रहा था. घर वालों ने अपने हिसाब से उस की खूब खोजबीन की. लेकिन जब उस का कुछ पता नहीं चला तो उस के चाचा अब्दुल हमीद ने थाना डोईवाला में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी.
38 वर्षीय नूर हसन उत्तराखंड के डोईवाला कस्बे के गांव कुडकावाला निवासी दिवंगत सकी जान का बेटा था. वह घर के पास ही परचून की दुकान चलाता था. उस के परिवार में पत्नी शबनम के अलावा 2 बच्चे थे, जिन में एक 2 साल की बेटी और दूसरा 6 माह का दुधमुंहा बेटा था.
नूर हसन 6 अगस्त की देर रात लापता हुआ था. उस की गुमशुदगी दर्ज कर के थानाप्रभारी संदीप नेगी ने इस मामले की जांच में एसएसआई प्रदीप चौहान व अन्य को लगा दिया था. पुलिस को लग रहा था कि नूर हसन शायद पत्नी से नाराज हो कर कहीं चला गया होगा, इसलिए पुलिस ने शबनम से पूछताछ की. पुलिस को उस ने बताया था कि वे दोनों हंसीखुशी से रहते थे. नाराजगी जैसी उन के बीच बिलकुल बात नहीं थी. वह लगभग 9 बजे बच्चों के साथ सो गई थी. सुबह नूर हसन गायब था और घर का दरवाजा खुला हुआ था. सुबह उस ने सोचा कि वह टहलने गए होंगे.
लेकिन जब 11 बजे तक वह नहीं आए, तो उस ने उन का मोबाइल नंबर मिलाया. मोबाइल स्विच औफ होने से उसे फिक्र हुई और उस ने अपने घर वालों को यह बात बताई. पूछताछ में एक बात बिलकुल साफ हो गई थी कि नूर हसन घर से अपनी मरजी से गया था. आखिर ऐसी क्या वजह थी, जो उस ने पत्नी को भी नहीं बताई. पुलिस ने जांच के लिए उस का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया. मोबाइल की काल डिटेल्स के लिए कंपनी को लिख दिया गया.
पुलिस नूर हसन का कुछ पता लगा पाती, उस से पहले ही 3 दिनों बाद यानी 11 अगस्त, 2015 को लोगों ने इस्तेमाल में न आने वाले कुएं में एक शव देखा. कुएं से बदबू फैलने के बाद लोगों ने उस में देखा था. इस की सूचना पुलिस को दी गई. सूचना पा कर थानाप्रभारी संदीप नेगी मय पुलिस बल के मौके पर पहुंच गए थे. कुआं गहरा था और उस में पानी के साथ गंदगी भी अटी पड़ी थी. ऐसे कुएं में जहरीली गैसें होती हैं, यह पुलिस जानती थी, इसलिए आक्सीजन सिलेंडर किट के जरिए अग्निशमन दल के कांस्टेबल दीपक थपलियाल को उस में उतारा गया.
अंतत: कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाल लिया गया. शव सड़ने लगा था. कुएं से शव मिलने की सूचना से गांव में सनसनी फैल गई थी. थोड़ी देर में वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई. कुएं से जो शव बरागद हुआ था, उस की शिनाख्त नूर हसन के रूप में हो गई. नूर हसन की कनपटी और सिर में पीछे की तरफ चोट के निशान थे. मामला सीधेसीधे हत्या का था. पुलिस का अनुमान था, किसी बहाने से उसे कुएं तक बुलाया गया था और वहीं उस की हत्या कर के शव कुएं में फेंक दिया गया था. सूचना पा कर एसपी (देहात) जी.सी. ध्यानी व पुलिस उपाधीक्षक अरुण पांडे ने भी मौका मुआयना किया था.
पुलिस ने लिखापढ़ी कर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस के साथ ही अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर के इस की विवेचना एसएसआई प्रदीप चौहान को सौंप दी गई. एसएसपी पुष्पक ज्योति ने इस मामलें में अधीनस्थों को त्वरित काररवाई कर के केस का खुलासा करने के निर्देश दिए. नूरहसन की हत्या के खुलासे के लिए थानाप्रभारी संदीप नेगी के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया गया, जिस में एसएसआई प्रदीप चौहान, एसआई संजीत कुमार, कांस्टेबल मनोज कुमार, विपिन सैनी, सुरेश रमोलसा , नवनीत, धन सिंह व महिला कांस्टेबल सुलेखा को शामिल किया गया.
इस बीच मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई, जिस में मृत्यु की वजह सिर में किसी भारी वस्तु से लगी चोट से हुआ ब्रेन हैमरेज व पानी में डूबना बताया गया था. एक दिन बाद मृतक की काल डिटेल्स भी पुलिस को मिल गई थी. पुलिस ने काल डिटेल्स की जांच की तो पाया कि लापता होने वाली रात नूर हसन की 1:33 और 1:38 बजे एक नंबर पर बात हुई थी. पुलिस समझ गई कि हत्या का राज उसी नंबर में छिपा है, जिस ने फोन किया था. पुलिस को लगा कि संदिग्ध नंबर के मालिक तक पहुंचते ही केस का खुलासा हो जाएगा.
पुलिस ने उस नंबर का कंपनी से पता हासिल किया तो वह चौंकी, क्योंकि वह नंबर भी नूर हसन के नाम पर ही था. उस नंबर से केवल नूर हसन से ही बात की जाती थी. लापता होने वाली रात से दोनों ही नंबर बंद थे. दूसरा नंबर या तो नूर हसन के परिवार में होना चाहिए था या किसी ऐसे खास शख्स के पास, जो उस के बेहद नजदीक था. ऐसा भी संभव था कि उस ने दूसरा नंबर अपनी पत्नी को दिया हो. पुलिस ने उस की पत्नी से पूछताछ की तो उस ने उस नंबर के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार कर दिया. उस ने यह भी बताया कि नंबर कौन इस्तेमाल कर रहा था, वह यह भी नहीं जानती. इस से हत्या की गुत्थी सुलझाने के बजाय और उलझ गई. देखतेदेखते कई दिन बीत गए.
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जिस मोबाइल में वह संदिग्ध नंबर इस्तेमाल किया गया था, उस में 2 सिमकार्ड इस्तेमाल होते थे. पुलिस ने दूसरे सिमकार्ड का नंबर हासिल कर के उस के मालिक का पता लगाया तो वह कुडकावाला के ही फिरोज के नाम निकला. इस से हत्या का मामला सुलझता नजर आया. 19 अगस्त को पुलिस उस के पास पहुंची तो पता चला कि वह मोबाइल उस की पत्नी रिजवाना इस्तेमाल करती थी. रिजवाना खूबसूरत महिला थी. पुलिस को सामने देख पतिपत्नी, दोनों बुरी तरह घबरा गए. पुलिस दोनों को हिरासत में ले कर थाने आ गई. थाने में दोनों से पूछताछ की गई तो उन्होंने ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया कि पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई.
नूर हसन रिजवाना के हुस्न में उलझा हुआ था. यही हुस्न उसे बड़ी खामोशी और चालाकी से मौत की दहलीज तक ले गया. विस्तृत पूछताछ में चौंकाने वाली जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस प्रकार थी. रिजवाना देहरादून के महूवाला क्षेत्र की रहने वाली थी. करीब 10 साल पहले उस का निकाह फिरोज के साथ हुआ था. रिजवाना तेजतर्रार खूबसूरत युवती थी. उसे पा कर फिरोज खुशी से फूला नहीं समाया था. समय के साथ रिजवाना 2 बच्चों की मां बनी. फिरोज गांव में ही छोटा सा हेयरकटिंग सैलून चलाता था. उस का छोटा सा परिवार हर तरह की खुशिया समेटे हुए था. रिजवाना उन युवतियां में थी, जो अपनी खूबसूरती पर नाज करती हैं.
रिजवाना के पड़ोस में ही नूर हसन रहता था. वह पहले शहर में वेल्डिंग का काम करता था, लेकिन यह काम उसे रास नहीं आया तो एक साल पहले उस ने गांव आ कर परचून की दुकान खोल ली. एक दिन रिजवाना नूर हसन की दुकान पर आई तो वह उसे देखता रह गया. एक ही मोहल्ले का होने के कारण दोनों एकदूसरे को पहले से ही जानते थे, लेकिन उस दिन नूर हसन की नजरें उस पर अटक गई थीं. उस का मन किया कि रिजवाना के हुस्न की तारीफ करे, लेकिन वह यह सोच कर खामोश रहा कि कहीं वह बुरा न मान जाए. जिन हसरत भरी निगाहों से उस ने रिजवाना को देखा था, उस से रिजवाना को अपनी खूबसूरती पर और भी नाज हो गया था.
कहते हैं कि मर्द की नजरों को पहचानने में औरत का कोई सानी नहीं होता. दूसरे शब्दों में यह कुदरती हुनर होता है. अगले कुछ दिनों में रिजवाना की समझ में आ गया कि कुछ तो है, जो नूर हसन के दिल में चल रहा है. तभी वह उसे ऐसी नजरों से देखता है. यूं तो नूर हसन खुद भी 2 बच्चों का पिता था, परंतु रिजवाना की खूबसूरती उसे लुभा रही थी. उस ने मन ही मन तय कर लिया कि वह कभी मौका मिलने पर उस की खूबसूरती की तारीफ जरूर करेगा. एक दिन रिजवाना फिर उस की दुकान पर आई तो वह तारीफ करते हुए बोला,‘‘आप बुरा न माने तो एक बात कहूं भाभीजान?’’
‘‘हां कहो?’’ रिजवाना बोली.
‘‘पहले वादा कीजिए कि आप नाराज नहीं होंगी. इस से मुझे जो दर्द होगा, मैं खुद को कभी माफ नहीं कर सकूंगा.’’ यह बात उस ने इतने गंभीर लहजे में कही कि रिजवाना के मन में जिज्ञासा जाग गई और वह भी गंभीर हो गई, ‘‘ऐसी क्या बात है, जो तुम कहना चाहते हो?’’
‘‘बस यही कहना था कि आप बहुत खूबसूरत हैं. जो हुस्न आप ने पाया है, वह सब को नहीं मिलता. फिरोज खुशनसीब है, जो उसे आप जैसी शरीकेहयात मिली है.’’
तारीफ के अल्फाज हर किसी को खुश कर देते हैं. रिजवाना के साथ भी ऐसा ही हुआ. अपनी तारीफ सुन कर वह अंदर ही अंदर बहुत खुश हुई. वेसे भी नूर हसन की हसरतपूर्ण निगाहों ने उस के दिल में पहले ही जगह बना ली थी. इस के बाद जब दोनों मिलते, बातें कर लिया करते. एकाध बार ऐसा भी हुआ, जब नूर हसन फिरोज की अनुपस्थिति में किसी काम के बहाने उस के घर गया. रिजवाना कोई नादान नहीं थी. वह समझ गई कि नूर हसन उसे चाहता है. अब तक नूर हसन उसे भी अच्छा लगने लगा था. दोनों के दिलों में जो पनप रहा था, उसे एक दिन प्यार का नाम दे कर दोनों ने इजहार कर दिया.
इस के बाद दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया और अकसर बातें करने लगे. कुछ समय ऐसे ही चलता रहा. इस के बाद दोनों एकदूसरे से मिलने का बहाना तलाशने लगे. रिजवाना सामान लेने के बहाने उस की दुकान पर आती तो वह भी किसी न किसी बहाने उस के घर पहुंच जाता. जमाने से उन्होंने अपने दिलों में पनपते प्यार को छिपाया हुआ था. रिजवाना ऐसी गलती कर चुकी थी, जो उसे नहीं करनी चाहिए थी. रिजवाना के मोबाइल में अकसर बैलेंस कम होने लगा तो फिरोज उस से सवालजवाब करने लगा. इस से उसे शक हो सकता था.
रिजवाना सतर्क हो गई. उस ने यह बात नूर हसन को बताई तो उस ने अपने नामपते से एक नया सिम कार्ड खरीदा और उसे रिजवाना को दे दिया, साथ ही ताकीद भी कर दी कि इस नंबर से वह सिर्फ उस से ही बात करेगी. रिजवाना के पास ड्यूल सिमकार्ड वाला मोबाइल था. उस के बाद वह नूर हसन से सिर्फ उसी नंबर से बात करने लगी. वह भी उसी नंबर पर बात करता था. दूसरी ओर फिरोज को पता भी नहीं था कि उस की बीवी क्या गुल खिला रही है. खुफिया मुलाकातों के दौर में एक दिन रिजवाना व नूर हसन ने मर्यादाओं की दीवार को गिरा दिया. दोनों शादीशुदा थे, नैतिक व सामाजिक नजरिए से यह गलत था, लेकिन दिल के हाथों की मजबूरी बहाना बन गई.
पतन की दलदल ऐसी होती है, जो इस में एक बार गिरता है, वह गिरता ही जाता है. उन दोनों के साथ भी ऐसा ही हुआ. उन के रिश्ते अकसर बनने लगे. वह पकड़े जा सकते थे. इस का रास्ता भी दोनों ने खोज निकाला. रिजवाना को जिस रात नूर हसन के आगोश में समाना होता था, उस रात वह॒॒फिरोज को खाने में नींद की गोलियां दे दिया करती थी. जब वह गहरी नींद में हो जाता था तो वह नूर हसन को फोन कर के बुला लेती थी. दोनों के बीच यह आए दिन का सिलसिला बन गया था. ऐसे रिश्ते छिपाए नहीं छिपते. दोनों को ले कर लोगों में चर्चाएं होने लगीं. फिरोज को पता चल गया कि दिन में नूर हसन उस के घर जाता है. उस ने रिजवाना को डांटाफटकारा.
कुछ दिन तो रिजवाना सही रास्ते पर रही, लेकिन बहुत जल्द उस ने पुराना ढर्रा अपना लिया. फिरोज को किसी ने बताया था कि नूर हसन रात में भी उस की पत्नी से चोरीछिपे मिलता है. रिजवाना की गतिविधियों पर उसे शक तो हो ही गया था, इस तरह की बातों ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया. एक दिन उस ने नूर हसन को अपने घर से निकलते हुए देख लिया. वह घर के अंदर दाखिल हुआ तो रिजवाना चौंक गई. फिरोज उस की हालत देख कर समझ गया कि वह गलत डगर पर है. फिरोज गुस्से वाला युवक था. उस का खून खौल उठा. उस ने रिजवाना की जम कर पिटाई की और तलाक की धमकी दे डाली.
रिजवाना को अपना घर टूटता नजर आया तो वह त्रियाचरित्र पर उतर आई. उस ने रोरो कर बताया कि नूर हसन ने उसे अपने जाल में उलझा लिया था और उसे बदनाम करने की धमकी देता था, इसलिए वह खामोशी से अपने साथ होने वाले जुल्मों को सहती रही. फिरोज को उस के नाटक और आंसुओं पर भरोसा हो गया. उस ने रिजवाना को तो माफ कर दिया, लेकिन उसी दिन मन में ठान लिया कि वह नूर हसन को सबक सिखा कर रहेगा.
रिजवाना समझ गई थी कि घर टूटने से बेहतर अपने कदम संभालने में ही भलाई है. उस ने नूर हसन से बातें करनी बंद कर दीं. फिरोज अपमान की आग में झुलस रहा था. उस ने रिजवाना से कह दिया कि वह नूर हसन को जिंदा नहीं छोड़ेगा. वह जानता था कि रिजवाना के माध्यम से ही वह नूर हसन को उलझा सकता है. दोनों ने उसे मारने की योजना बना डाली.
योजना के अनुसार, 6 अगस्त की शाम रिजवाना ने उसे फोन कर के कहा, ‘‘मुझे तुम से कुछ बात करनी है.’’
‘‘कह दो इस में सोचने की क्या बात है?’’ नूर हसन ने कहा.
रिजवाना राजदराना अंदाज में बोली, ‘‘मैं फोन पर नहीं कह सकती.’’
‘‘तो आज रात आ जाता हूं.’’ नूर हसन ने कहा तो वह उसे समझाते हुए बोली, ‘‘नहीं, तुम्हारा घर आना ठीक नहीं है. एक गड़बड़ हो गई है. मैं रात को मौका देख कर फोन करूंगी. तुम कुएं पर आ जाना, हम वहीं मिल लेंगे.’’
‘‘ठीक है.’’ नूर हसन ने कहा.
कई दिनों से दोनों के बीच रिश्ते नहीं बने थे. नूर हसन के मन में मिलने की तड़प थी. वह उस पर पूरा भरोसा करता था. रात में वह उस के फोन का बेसब्री से इंतजार करने लगा. उस की पत्नी व बच्चे सो चुके थे. देर रात एक बजे के बाद रिजवाना का फोन आया और उस ने उसे कुएं पर आने के लिए कहा. नूर हसन को ख्वाब में भी उम्मीद नहीं थी कि रिजवाना आज उसे मौत का पैगाम दे रही है. वह चुपके से घर से निकल गया.
उधर नूर हसन को फोन कर के फिरोज व रिजवाना कुएं पर पहुंच गए. रात के गहरे सन्नाटे में वहां कोई नहीं था. फिरोज छिप कर खड़ा हो गया, जबकि रिजवाना उस का इंतजार करने लगी. कुछ ही मिनटों में नूर हसन वहां आ गया. रिजवाना को अकेली पा कर उसे सुकून मिला. रिजवाना ने उसे बातों में उलझा लिया, तभी फिरोज ने एक पत्थर उठाया और तेजी से उस के सिर व कनपटी पर वार कर दिए. अचानक हुए वार को नूर हसन सह नहीं पाया. वह बेहोश हो कर नीचे गिर गया. फिरोज ने रिजवाना की मदद से उसे उठाया और कुएं में डाल कर घर चले आए. बाद में नूर हसन का शव मिलने पर फिरोज न सिर्फ कुएं पर गया, बल्कि उस के परिवार के गम में भी शरीक हुआ. उन्होंने सोचा भी नहीं था कि पुलिस कभी उन तक पहुंच पाएगी, लेकिन उन की यह सोच गलत साबित हुई और वह गिरफ्त में आ गए.
पूछताछ के बाद पुलिस ने अगले दिन दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को एसएसपी पुष्पक ज्योति ने ढाई हजार रुपए का इनाम देने की घोषण भी की.
नूर हसन ने दूसरे की बीवी से रिश्ते बना कर विश्वास न किया होता और रिजवाना ने गलती कर के त्रियाचरित्र न दिखाया होता तो ऐसी नौबत कभी नहीं आती. अब उन के बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है. कथा लिखे जाने दोनों हत्यारोपियों की जमानत नहीं हो सकी थी और पुलिस उन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही थी. Hindi Stories






