Love Crime: 22 वर्षीय तैयबा ने फैसल चौधरी से इसलिए कोर्ट मैरिज कर ली थी, क्योंकि उस ने खुद को कुंवारा बताया था, जबकि हकीकत में वह 2 बच्चों का बाप था. प्यार में छली गई तैयबा के सामने पछतावे के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इस के बावजूद तैयबा ने छलिया फैसल से जब उस के घर में जगह मांगी तो…
रात के 8 बज गए थे, लेकिन तैयबा अभी तक अपने काम से घर नहीं लौटी थी. उस की अम्मी के पेशानी पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही थीं. वह अपने बड़े बेटे अदनान के कमरे में पहुंची और परेशान होते हुए बोली, ”अदनान, अभी तक तैयबा घर नहीं लौटी है.’’
”अरे!’’ अदनान हैरान होते हुए बोला, ”तैयबा तो 7-साढ़े 7 बजे तक घर आ जाती है, क्या तुम ने उसे फोन नहीं किया?’’
”किया था. मैं ने साढ़े 7 बजे उसे फोन किया था तो कह रही थी थोड़ा लेट हो जाऊंगी, मैं 9 बजे तक आ जाऊंगी, लेकिन अब तो साढ़े 9 बज गए.’’
अदनान ने तैयबा का नंबर मिलाया तो दूसरी तरफ घंटी बजने के थोड़ी देर बाद ही तैयबा ने फोन उठा लिया. उस ने पूछा, ”कैसे फोन कर रहे हो भाई, सब ठीक तो है?’’
”सब ठीक है यहां. अम्मी तुम्हें ले कर परेशान हैं. तुम कहां पर हो?’’
”मैं अपने काम पर ही हूं भाईजान. मुझे यहां थोड़ा वक्त और लगेगा. आप लोग मेरी चिंता मत करो. खाना खा कर सो जाओ. मेरा खाना अम्मी ढक कर रख देगी. आऊंगी तो गरम कर के खा लूंगी.’’ तैयबा ने कहने के बाद कौल डिसकनेक्ट कर दी.
”तुम बेकार में परेशान हो रही हो अम्मी. तैयबा अपनी ड्यूटी पर ही है. उसे आने में देर हो जाएगी.’’ अदनान ने अम्मी को समझाया.
अदनान के अब्बू अहमद भी घर आ गए थे. तैयबा के अभी तक घर न आने पर उन्होंने लापरवाही से कहा, ”कंपनी में काम निकल आया होगा, तैयबा पहले भी कई बार देर से घर लौटी है. चिंता मत करो, आ जाएगी.’’
रात 11 बजे तक सभी खाना खा कर चारपाई पर आ गए और उन्हें नींद भी आ गई. केवल तैयबा की अम्मी की आंखों से नींद उड़ी हुई थी. तैयबा के लिए वह बेचैन थी. लेकिन नींद तो नींद होती है, रात को कब उसे भी नींद आ गई, मालूम ही नहीं चला, वह अधकच्ची नींद में सोती रही.
अचानक पौने 3 बजे उस की नींद खुल गई. वह घबरा कर बिस्तर पर उठ बैठी. तैयबा अभी भी घर नहीं आई थी. सिरहाने रखा मोबाइल उठा कर तैयबा की अम्मी ने उसे फोन लगाया. घंटी बजी और फोन को तैयबा ने उठा कर कहा, ”हैलो अम्मी! आप अभी तक सोई नहीं हैं क्या?’’
”तू कहां पर है तैयबा?’’ अम्मी ने पूछा.
”मैं यहां एक दोस्त के साथ होटल में चाय पीने आई हूं अम्मी, यह मेरा दोस्त मेरे साथ ही काम करता है. चाय पी कर मैं बस घर के लिए ही निकलूंगी. आप सो जाइए.’’ तैयबा ने बताने के बाद फोन काट दिया. अम्मी को तसल्ली हुई कि बेटी ठीकठाक है और अब जल्दी घर भी आ जाएगी. फोन सिरहाने रख कर उन्होंने आंखें बंद कर लीं तो फिर नींद ने उन्हें अपने आगोश में समेट लिया.

सुबह का उजाला फैला, तब तैयबा की अम्मी की आंखें खुलीं. तैयबा आ गई होगी. यह सोच कर उन्होंने तैयबा के बिस्तर पर नजर दौड़ाई. वह खाली था. अम्मी ने तैयबा को फिर फोन मिलाया, लेकिन तैयबा के फोन के स्विच औफ होने की रिकौर्डिंग सुनाई देने लगी. अम्मी ने कई बार ट्राई किया, किंतु तैयबा का फोन नहीं लगा. घबरा कर अम्मी ने अदनान और पति को जगा दिया. अदनान के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. वह बोला, ”अब्बा! मुझे अब तैयबा के लिए ज्यादा चिंता हो रही है. पूरी रात वह घर नहीं आई. आखिर वह कहां रुक गई है. मालूम करना पड़ेगा.’’
अदनान ने दूसरे कपड़े पहने और बोला, ”मैं उस की कंपनी में जा कर पता करता हूं.’’
अदनान स्कूटी ले कर बहन तैयबा का पता लगाने दिलशाद गार्डन चला गया. तैयबा दिलशाद गार्डन में स्थित एक कंपनी में काम करती थी. अदनान ने तैयबा की कंपनी में जा कर मालूम किया तो उसे बताया गया कि तैयबा शाम को ही कंपनी से छुट्टी कर के चली गई थी. अदनान की चिंता बढ़ गई. इस का मतलब तैयबा झूठ बोल रही थी कि कंपनी में ओवरटाइम है, जबकि वह 5 बजे ही कंपनी से छुट्टी कर के निकल गई थी. आखिर वह कहां गई?
अदनान ने तैयबा की कुछ परिचित सहेलियों के यहां जा कर मालूम किया. तैयबा उन से नहीं मिली थी. हर संभावित जगहों पर तलाश करने पर भी जब वह नहीं मिली तो अदनान घर लौट आया और अब्बू को साथ ले कर उत्तरपूर्वी दिल्ली के दयालपुर थाने में उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने चला गया. तैयबा 22 साल की जवान युवती थी. थाना दयालपुर में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली गई. यह सूचना 28 नवंबर को तैयबा के अब्बा अहमद की तरफ से लिखवाई गई थी. उन्हें तैयबा के अपहरण होने का शक था.
दयालपुर थाने के एसएचओ परमवीर दहिया ने तैयबा के लापता होने की घटना को गंभीरता से लिया. उन्होंने यह जानकारी उत्तरपूर्वी डीसीपी आशीष मिश्रा को भी दे दी. इंसपेक्टर परमवीर दहिया डीसीपी के निर्देश पर तैयबा की कंपनी में पहुंच गए और वहां तैयबा के बारे में कंपनी के मालिक से पूछताछ न कर, वहां तैयबा के साथ काम करने वाली एक अन्य युवती को अपने पास बुला कर बड़े प्यार से पूछा, ”तुम तैयबा के साथ काम करती हो, तुम्हारा नाम क्या है?’’
”जी, मेरा नाम रुखसाना है.’’ युवती ने बताया फिर पूछा, ”तैयबा के विषय में क्यों छानबीन कर रहे हैं साहब?’’
”तैयबा कल से घर नहीं लौटी है रुखसाना. उस के अब्बू ने उस की गुमशुदगी थाने में लिखवाई है. क्या तुम्हें लगता है तैयबा का कोई अपहरण कर सकता है?’’
”नहीं साहब,’’ रुखसाना बोली, ”भला उस का अपहरण कोई क्यों करेगा. तैयबा खुद उस के साथ चली गई होगी.’’
”किस के साथ?’’ इंसपेक्टर दहिया ने चौंकते हुए पूछा.
”जिसे वह प्यार करती है. क्या आप ने उस की इंस्टाग्राम पर होटल वाली रील नहीं देखी साहब?’’ कहने के बाद रुखसाना ने अपने मोबाइल में इंस्टाग्राम खोल कर एक रील इंसपेक्टर दहिया के सामने कर दी.
इस रील में तैयबा किसी होटल में एक युवक के साथ बैठी चाय पीती नजर आ रही थी. तैयबा अपने मोबाइल से उस युवक के साथ विभिन्न पोज में रील बना रही थी. युवक का चेहरा इस रील में काफी स्पष्ट दिखाई दे रहा था.
”इस का नाम तुम्हें मालूम है रुखसाना?’’ इंसपेक्टर ने पूछा.
”फैसल चौधरी है इस का नाम, मुस्तफाबाद में कहीं रहता है. मुझे तैयबा ने यह बात बताई थी.’’
इंसपेक्टर दहिया ने डीसीपी आशीष मिश्रा को यह जानकारी थाने लौट कर दे दी. उन्होंने अपनी देखरेख में थाने के तेजतर्रार इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद की एक टीम बना कर इंसपेक्टर परमवीर दहिया को फैसल चौधरी को ढूंढ निकालने का आदेश दे दिया.
इंसपेक्टर परमवीर दहिया ने इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद को साथ ले कर पहले तैयबा के परिजनों से फैसल चौधरी के विषय में पूछताछ की. उन्होंने तैयबा द्वारा होटल में चाय पीने की वह इंस्टाग्राम वाली रील तैयबा के परिजनों को दिखा कर पूछा, ”क्या इस युवक को आप जानते हैं?’’
”यह तो फैसल चौधरी है.’’ अदनान ने तुरंत कहा, ”मैं ने इसे पहले भी देखा है. यह मुस्तफाबाद में रहता है. इस के पिता आलम चौधरी प्रौपर्टी का काम करते हैं. मैं एक परिचित के साथ इन के औफिस में गया था, परिचित को एक मकान खरीदना था, लेकिन यह फैसल मेरी बहन तैयबा के साथ कैसे?’’
”यह रील देख कर अदनान तुम्हें समझ लेना चाहिए कि तैयबा इस के संपर्क में थी और इस से उस का प्रेम संबंध भी था. यह रील खुद तैयबा ने अपने मोबाइल से बनाई है.’’ इंसपेक्टर दहिया ने गंभीर स्वर में कहा तो अदनान ने सिर झुका लिया और धीरे से बोला, ”मैं इस विषय में नहीं जानता.’’
पुलिस टीम अदनान को साथ ले कर मुस्तफाबाद आलम चौधरी के प्रौपर्टी डीलर वाले औफिस में पहुंच गई. आलम चौधरी अपने औफिस में ही मिल गए. पुलिस को अपने औफिस में देख कर वह चौंकते हुए कुरसी से खड़े हो गए.
”आप फैसल को जानते हैं?’’ इंसपेक्टर राजेश ने पूछा.
”फैसल मेरा बेटा है तो मैं क्या अपने बेटे को नहीं जानंूगा साहब.’’ आलम मुसकराने का प्रयास करते हुए बोले, ”आप उस के विषय में क्यों पूछताछ कर रहे हैं.’’
”वह एक लड़की तैयबा को ले कर आया है. हमें फैसल से मिलवाइए.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कड़क स्वर में कहा.
आलम चौधरी चौंक कर बोले, ”मेरा बेटा फैसल शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है जनाब. वह किसी लड़की को क्यों ले कर आएगा? आप लोगों को अवश्य गलतफहमी हुई है.’’
”हमें फैसल से मिलवाओ. उसी के मुंह से हम उस की करतूत आप को सुनवाएंगे. बुलाइए उसे.’’ इंसपेक्टर दहिया शुष्क स्वर में बोले.
आलम चौधरी का घर पास में ही था. वह घर गए और कुछ ही देर में वापस आ गए.
”सर, अभी फैसल घर पर नहीं है…’’
”क्या सुबह वह घर पर था?’’ इंसपेक्टर दहिया ने पूछा.
”मुझे मालूम नहीं. मैं सुबह ही फ्रेश हो कर औफिस में आ जाता हूं. जब मैं घर से निकला था, शायद फैसल सो रहा होगा.’’
”क्या मैं उस की बीवी से पूछताछ कर सकता हूं?’’ इंसपेक्टर दहिया ने आलम चौधरी से पूछा.
”बेशक, आप आइए मेरे साथ.’’ आलम ने कहा.
इंसपेक्टर दहिया अकेले आलम चौधरी के साथ उस के घर की तरफ चले आए. बाकी दोनों इंसपेक्टर और पुलिस कांस्टेबल वहीं औफिस में बैठ गए.
आलम चौधरी ने घर आ कर इंसपेक्टर दहिया के सामने अपनी बहू को हाजिर कर दिया.
इंसपेक्टर दहिया ने सीधा सवाल किया, ”तुम्हारा पति फैसल कहां पर है?’’
”ज…जी, वह कल से ही घर नहीं आए हैं. शाम को कह कर गए थे कि किसी जरूरी काम से जा रहा हूं. क्या काम है और कहां पर जा रहे हैं, यह मैं कभी नहीं पूछती हूं उन से.’’ फैसल की बीवी ने जवाब में कहा. फिर पूछा, ”आप उन के बारे में क्यों पूछताछ कर रहे हैं?’’
”फैसल एक लड़की को ले कर गायब हुआ है. लड़की का नाम तैयबा है. यदि फैसल घर आए तो तुम हमें फोन करोगी. मैं तुम्हें फोन नंबर दे कर जा रहा हूं.’’
इंसपेक्टर दहिया ने अपना मोबाइल नंबर एक कागज पर लिख पर फैसल की बीवी को थमाया तो उन्होंने महसूस किया कि फैसल की बीवी धीरेधीरे सिसक रही थी. शायद पति की करतूत सुनने के बाद वह नर्वस हो गई थी. इंसपेक्टर दहिया आलम चौधरी के साथ औफिस में लौट आए. आलम चौधरी से फैसल के दोस्तों और रिश्तेदारों के पते नोट कर के पुलिस टीम ने उसी वक्त से इन पतों पर दबिश देनी शुरू कर दी. फैसल चौधरी इन पतों पर नहीं था.
पुलिस टीम ने फैसल के संभावित उठनेबैठने की जगहों पर भी छापेमारी की, लेकिन फैसल कहीं भी नहीं मिला. निराश हो कर पुलिस टीम वापस हो गई. पुलिस की छापेमारी जारी थी, तभी उन्हें कड़कडड़ूमा कोर्ट से मैसेज मिला कि फैसल चौधरी ने 25 नवंबर, 2025 को कोर्ट में सरेंडर कर दिया है. पुलिस टीम ने कोर्ट में जा कर फैसल चौधरी को अपनी कस्टडी में ले लिया. उस का 2 दिन का रिमांड पुलिस ने कोर्ट से प्राप्त कर लिया. फैसल चौधरी को अपने साथ ले कर पुलिस दयालपुर थाने में आ गई.
इंसपेक्टर दहिया, इंसपेक्टर राजेश और इंसपेक्टर आनंद ने डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में फैसल चौधरी से तैयबा के संबंध में पूछताछ शुरू की तो फैसल ने चौंकाने और होश उड़ाने वाला राज खोलते हुए कहा, ”तैयबा की मैं ने गोली मार कर हत्या कर दी है साहब. वह अब इस दुनिया में नहीं है.’’
फैसल चौधरी के मुंह से यह सच्चाई सुन कर सभी स्तब्ध रह गए. इंसपेक्टर दहिया ने फैसल को घूरते हुए पूछा, ”तुम ने यदि तैयबा की गोली मार कर हत्या कर दी है तो उस की लाश कहां पर है?’’
”तैयबा की लाश बागपत के पास सरूरपुर कलां के जंगल में मैं ने फेंक दी थी साहब.’’
”चलो, हमें तैयबा की लाश बरामद करवाओ.’’ इंसपेक्टर दहिया ने कहा.
”ठीक है साहब,’’ फैसल चौधरी ने कहा.

पुलिस टीम फैसल चौधरी को वैन में बिठा कर बागपत पहुंची. सरूरपुर कलां के जंगल में तैयबा की लाश फैसल चौधरी ने जहां फेंकी थी, वह अभी भी वहीं पड़ी हुई थी, लेकिन लाश 3 दिन में काफी खराब हालत में हो गई थी. तैयबा की कनपटी पर गोली का सुराख था, जहां से खून बह कर काला पड़ चुका था. इंसपेक्टर दहिया ने बागपत पुलिस थाने से संपर्क कर के वहां से पुलिस और फोरैंसिक टीम बुलवा कर तैयबा की लाश की जांच करवाई. फिर कागजी काररवाई पूरी कर के लाश को बागपत पुलिस से अपने अंडर में ले लिया.
तैयबा की लाश ले कर दयालपुर थाने की पुलिस टीम थाने में लौट आई. तैयबा की फैसल चौधरी ने हत्या कर दी है, यह जानकारी तैयबा के फेमिली वालों को दे दी गई. थोड़ी ही देर में तैयबा के फेमिली वाले थाना दयालपुर आ गए. तैयबा की अम्मी, अब्बू अहमद और भाई अदनान का रोरो कर बुरा हाल था. उन के सामान्य होने पर डीसीपी आशीष मिश्रा की उपस्थिति में एक बार फिर फैसल चौधरी से पूछताछ की गई. उस की तैयबा से क्या दुश्मनी थी और उस ने तैयबा की हत्या क्यों की? यह पूछे जाने पर फैसल ने बताया, ”साहब, तैयबा मेरी दूसरी पत्नी थी.’’

इस जानकारी पर तैयबा के फेमिली हैरान रह गए. उन्हें यह विश्वास ही नहीं हुआ कि 2 बच्चों के बाप फैसल से तैयबा ने शादी कर ली थी.
”यह झूठ बोल रहा है साहब. मेरी बहन तैयबा इतनी नादान नहीं थी कि वह 2 बच्चों के पिता को अपना शौहर बनाएगी.’’ अदनान ने गुस्से में कहा.
”मेरे पास कोर्ट का सार्टिफिकेट है साहब.’’
उस ने पुलिस के सामने अपने अब्बा को फोन कर कहा कि उस ने तैयबा नाम की लड़की से दूसरी शादी कर ली थी और कोर्ट द्वारा जारी मैरिज सर्टिफिकेट अलमारी के लौकर में रखा है. वह आप थाना दयालपुर में ले कर आ जाएं. यह सुन कर आलम चौधरी सकते में आ गए. फैसल की पहली बीवी ने सिर पीट लिया.
आलम चौधरी आधे घंटे में साकेत कोर्ट द्वारा तैयबा और फैसल की कोर्ट मैरिज का सर्टिफिकेट ले कर थाने में आ गए. डीसीपी मिश्रा ने सर्टिफिकेट की सत्यता की जांच करने के बाद फैसल से पूछा, ”यदि तुम ने तैयबा से छिप कर शादी कर ली थी तो तुम ने उस की हत्या क्यों कर दी?’’
”साहब, मेरी मुलाकात तैयबा से क्लब में हुई थी. तैयबा पहले वहीं काम करती थी. तैयबा खूबसूरत नवयौवना थी. मैं उस की खूबसूरती पर मर मिटा. मैं ने रोज क्लब में जाना शुरू किया और तैयबा से जानपहचान बनाने की कोशिश करने लगा.
”तैयबा थोड़े ही दिनों में मेरी तरफ आकर्षित हो गई. मेरी उस की दोस्ती हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई. तैयबा को मैं ने बताया था कि मैं कुंवारा हूं. मैं तैयबा पर खूब पैसा खर्च करने लगा. तैयबा मुझे दिल से चाहने लगी. उस ने मेरे साथ शादी का प्रस्ताव रखा तो मैं ने उस के साथ अप्रैल, 2025 में साकेत कोर्ट में शादी कर ली. मैं ने तैयबा से कहा कि यह शादी मेरे परिवार से छिपा कर की गई है, इसलिए मैं उसे तुरंत घर नहीं ले जा सकता. घर वालों को धीरेधीरे मैं समझा लूंगा तो तुम्हें वहां बहू का दरजा दिलवा दूंगा.
”मैं तैयबा से बाहर होटलों में मिलता रहा. हम अपनी हसरतें इन होटलों में पूरी करते रहे. धीरेधीरे समय गुजरने लगा तो तैयबा मुझ पर घर ले चलने का दबाब बनाने लगी. मैं उसे बहाने बना कर टालता रहा. तैयबा को घर ले जाना नहीं चाहता था मैं, क्योंकि घर में मेरी बीवी और 2 बच्चे थे.’’
फैसल कुछ देर के लिए रुका फिर बताने लगा, ”तैयबा 10-12 दिन से ज्यादा जिद करने लगी थी कि मैं उसे घर ले चलूं. मैं परेशान हो गया तो मैं ने तैयबा से पीछा छुड़ाने का उपाय तलाशना शुरू कर दिया. बहुत सोचने के बाद मैं ने निर्णय लिया कि मैं तैयबा की हत्या कर के उस से पिंड छुड़ा लूं.
”मैं ने योजना बना कर एक देशी रिवौल्वर खरीदा, फिर 22 नवंबर को मैं ने अपने एक दोस्त से आई20 कार मांग ली और शाम से पहले तैयबा की कंपनी के सामने दिलशाद गार्डन पहुंच गया. तैयबा को मैं ने फोन कर के बता दिया कि मैं कार लाया हूं, आज हम सैरसपाटा करेंगे. तुम घर में कोई बहाना बना डालो.

”तैयबा शाम को कंपनी से निकल कर मुझ से मिली. उस ने घर में कह दिया था कि आज कंपनी में काम ज्यादा है, देर से घर आएगी. मैं तैयबा को ले कर फिल्म देखने एक थिएटर में गया. मैं ने उस के साथ रात का शो देखा. फिर इधरउधर घूमने के बाद मैं तैयबा को एक होटल में ले गया. वहां हम ने चाय पी. तैयबा बहुत खुश थी. उस की अम्मी का होटल में फोन आया तो तैयबा ने कह दिया वह होटल में चाय पी रही है, जल्दी घर लौटेगी.
”चाय पी लेने के बाद मैं तैयबा को कार में बिठा कर बागपत की तरफ ले गया. रात काफी निकल चुकी थी. सरूरपुर कलां के पास सन्नाटा मिला तो मैं ने पास में बैठी तैयबा के सिर में गोली मार दी. वह मर गई तो मैं ने उस की लाश जंगल में फेंक दी और घर लौट आया. मुझे तैयबा की हत्या करने का बहुत अफसोस है साहब.’’
पुलिस ने फैसल चौधरी से रिवौल्वर और आई20 कार बरामद कर ली. कार की सीट धो कर खून साफ कर दिया गया था, किंतु फोरैंसिक टीम ने कार से तैयबा के खून के नमूने उठा लिए. पुलिस ने फैसल चौधरी के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) 3, 5 लगाई गई और उसे सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.
तैयबा की लाश का पोस्टमार्टम करवा कर लाश उस के फेमिली वालों को सौंप दी गई. उस के परिजन चाहते थे उन की बेटी को धोखे में रख कर उस से शादी करने और उस की हत्या करने वाले फैसल चौधरी को फांसी की सजा मिले. Love Crime






