Hindi Kahani: थानेदार ने तफ्तीश कर के रिपोर्ट पेश कर दी थी कि जमील की मौत हादसा है, लेकिन उस की मां का कहना था कि जमील की मौत हादसा नहीं, साजिश के तहत की गई हत्या है. जब इस मामले की जांच दूसरे थानेदार इंसपेक्टर अहमदयार खान ने की तो यह बात सच भी निकली.

दिल्ली की सीआईए (क्राइम ब्रांच) में तैनात एसपी पी.एल. थांपसन को हिंदुस्तानी सिपाही ही नहीं, अंगरेज अफसर भी बास्टर्ड कहा करते थे, क्योंकि वह बहुत सख्त अधिकारी था. थांपसन के चेहरे पर कभी मुसकराहट नहीं आती थी. अनुशासन के मामले में वह इतना सख्त था कि अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को कुछ नहीं समझता था. किसी मजबूरी की वजह से भी किसी से कोई गलती हो जाती थी तो उस की मजबूरी को समझते हुए भी वह उसे माफ नहीं करता था.

थांपसन हर समय काम में लगा रहता था और किसी दूसरे को भी खाली नहीं बैठने देता था. अपने स्टाफ से वह सप्ताह में एक बार जरूर कहता था कि लोगों की इज्जत और जानमाल की सुरक्षा की जिम्मेदारी तुम्हारी है. अगर कोई घटना हो जाए तो अपराधी को पकड़ने के लिए तब तक काम में लगे रहो, जब तक वह पकड़ा न जाए. वह अपने अफसरों को तांगे के घोड़ों की तरह काम में लगाए रखता था. मैं ने भी उस से सब से अच्छी बात जो सीखी थी, वह यह थी कि जो भी काम करो, लगातार और मेहनत से करो. निराशा को पास मत आने दो. जिस किसी पर जरा भी शक हो, उसे मत छोड़ो. तुम्हारी सारी सहानुभूति पीडि़त के साथ होनी चाहिए.

जिस अधिकारी को हम बास्टर्ड कहा करते थे, वह बहुत न्यायप्रिय और अपने काम को अपना नैतिक कर्तव्य समझता था. एक दिन मेरे साथी इंसपेक्टर टेनिसन ने मुझे बुला कर एक कागज पकड़ाते हुए कहा, ‘‘इसे पढ़ो.’’

वह एक महिला का प्रार्थना पत्र था, जिस का जवान बेटा जिस ईंटों के भट्ठे पर काम करता था, उसी में गिर कर जल कर मर गया था. इस बात को 2 महीने बीत चुके थे. थांपसन ने बताया था कि यह प्रार्थना पत्र उसे एक बड़े सम्मानित व्यक्ति ने दिया था. जिस औरत का पत्र था, वह संबंधित थाने में जाती रही थी. उसे शक था कि उस का बेटा खुद गिर कर नहीं मरा, बल्कि उसे गिरा कर मारा गया है. थाने का थानेदार उसे यह कह कर टालता रहा कि उस ने तफतीश कर ली है, उस का बेटा मारा नहीं गया था, बल्कि खुद गिर कर मरा था. जिस सम्मानित व्यक्ति ने यह कागज दिया था, वह हाईकोर्ट में एडवोकेट थे. वह अपने एक मित्र डीएसपी के साथ थांपसन से मिले थे. उस आदमी ने एसपी थांपसन को बताया था कि वह भट्ठे के मालिक को जानते हैं और उन्हें लड़के  की मौत पर शक है.

थांपसन ने इस मामले में उस इलाके के थानेदार से बात की थी, लेकिन वह थानेदार की बात से संतुष्ट नहीं थे. एसपी ने कहा कि तुम दोनों इस केस की तफ्तीश करो, अगर थानेदार ने जानबूझ कर कोई गलती की है या बिना तफतीश किए रिपोर्ट में उस की मौत संयोगवश लिख दी है तो उसे गिरफ्तार कर के मुझे रिपोर्ट करो. थांपसन के कहे अनुसार, मैं और टेनिसन उस इलाके के थाने गए, जिस इलाके में भट्ठा था. थानेदार सदाकत अली खान अंबाला का रहने वाला था. वह मौजमस्ती करने वाला अनुभवी आदमी था. उस का परिवार काफी असरदार था.

थाने पहुंच कर हम ने उसे अपने आने के बारे मे बताया तो उस ने कहा, ‘‘उस औरत ने तो मेरी नाक में दम कर रखा है. यह सच है कि उस का जवान बेटा मरा है, मैं ने उसे संतुष्ट करने की बहुत कोशिश की, लेकिन अब पता चला कि वह ऊपर पहुंच गई है. आप लोगों को उस ने बिना वजह कष्ट दिया.’’

‘‘मां तो कभी संतुष्ट नहीं होगी, लेकिन आप हमें संतुष्ट करने के लिए केस की फाइल दिखा दें.’’ मैं ने कहा तो वह फाइल ले आया.

फाइल के अनुसार, किसी व्यक्ति ने आ कर बताया था कि उस का एक नौकर पांव फिसलने से भट्ठे में गिर गया और जल कर मर गया. वह घटनास्थल पर पहुंचा और लाश देखी. वह इतनी बुरी तरह जल गई थी कि पहचानी नहीं जा सकती थी. उस ने मौके पर 3 लोगों से पूछताछ की, जिन्होंने बताया कि वह फिसलने से ही भट्ठे में गिर कर मरा था. थानेदार ने इस घटना को संयोगवश हुई घटना बता कर केस बंद कर दिया था.

‘‘खान साहब, आप ने जबानी तौर पर मालूमात कर के जो तफतीश की थी, वह भी हमें सुना दो.

उस ने बताया, ‘‘पहली बात तो यह पता चली कि मरने वाला जमील अहमद विधवा मां का बेटा था. उस ने 2, ढाई साल पहले मैट्रिक की परीक्षा पास की थी और उस के बाद भट्ठे के मालिक के यहां नौकर हो गया था. भट्ठे का मालिक बहुत बड़ा ठेकेदार था, जो सरकारी ठेके ले कर निर्माण कार्य कराता था.’’

मैं ने थानेदार से पूछा, ‘‘इस के अलावा और कुछ बताएंगे?’’

‘‘आप पूछिए, बताता हूं.’’ उस ने कहा तो टेनिसन ने पूछा, ‘‘मरने वाले को भट्ठे पर क्या काम दिया गया था?’’

थानेदार ने कहा, ‘‘मैं ने यह नहीं पूछा था कि उसे क्या काम दिया गया था, बस इतना पता चला था कि वह वहां नौकर था.’’

‘‘आप को जरा भी शक नहीं हुआ कि मरने वाले की वहां किसी से दुश्मनी रही हो और उसे भटठे में धक्का दे दिया गया हो?’’

‘‘मैं ने फाइल में तो नहीं लिखा, लेकिन मैं ने पता किया था. उस की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी.’’

मैं ने नोट किया था कि यह कहते हुए थानेदार की जबान साथ नहीं दे रही थी. इस का मतलब वह झूठ बोल रहा था.

‘‘सदाकत भाई, हम तफतीश करने आए हैं, अगर कोई संदेह वाली बात हो तो हमें बता दो या यह कह दो कि आप ने तफ्तीश में उतनी रुचि नहीं ली, जितनी लेनी चाहिए थी. आप का यह कह देना काफी नहीं है कि वह मां है, इसलिए तंग कर रही है.’’

सदाकत अली बेचैन हो गया. उस के चेहरे के भावों से साफ लग रहा था कि उस से गलती हुई थी. अगर मेरे साथ अंगरेज अफसर नहीं होता तो शायद वह मुझ से बिना झिझके बात करता. अंगरेज अफसरों से हिंदुस्तानी अफसर डरते थे. इंसपेक्टर टेनिसन ने कहा कि वह हमें उस औरत के घर तक पहुंचा दे, क्योंकि पुरानी दिल्ली में किसी का मकान ढूंढना आसान नहीं था.

सदाकत अली ने हमें एक हेडकांस्टेबल के साथ उस औरत के घर भेज दिया. जाते वक्त टेनिसन ने कहा, ‘‘एक काम करना खान, ठेकेदार खलील से कहना कि वह थाने आ जाए. हम वापस थाने आएंगे.’’

उस औरत के घर पहुंच कर हम ने घर का दरवाजा खटखटाया. 5-6 मिनट बाद एक अधेड़ उम्र की औरत ने दरवाजा खोला. चेहरेमोहरे और पहनावे से वह मिडिल क्लास की अच्छीभली महिला लग रही थी. इस उम्र में भी वह काफी सुंदर थी. वह हमें घर के अंदर ले गई. औरत का नाम राशिदा था. उस के पति को मरे 4-5 साल हो गए थे. उस का भाई कुछ पैसे दे दिया करता था, जिस से घर का खर्च चलता था. उस का बेटा जमील दसवीं पास कर के भट्ठे पर नौकरी करने लगा था.

‘‘आप यह बताइए कि आप को कैसे शक हुआ कि आप का बेटा भट्ठे में खुद नहीं गिरा, बल्कि उसे धक्का दे कर आग में गिराया गया था?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मेरा बेटा हर रात मेरे सपने में आता है और मुझ से कहता है कि मेरे हत्यारों को पकड़वाओ, मैं खुद नहीं गिरा.’’ उस ने भावुक हो कर कहा.

‘‘क्या वह यह नहीं बताता कि उसे किस ने धक्का दिया था?’’

‘‘नहीं, मैं पूछती हूं, तब भी नहीं बताता.’’ उस ने कहा, ‘‘लेकिन उस के इस तरह सपने में आने से मुझे पूरा यकीन है कि वह खुद नहीं गिरा.’’

यह एक मां के उदगार थे. उस की बात काटने के बजाय मैं ने और इंसपेक्टर टेनिसन ने कहा कि हम सच्चाई का पता लगाना चाहते हैं, जिस से कि हम हत्यारे को पकड़ सकें. मैं ने राशिदा से पूछा, ‘‘जमील भट्ठे पर कितने दिनों से काम कर रहा था, वह वहां क्या काम करता था?’’

‘‘मेरा बेटा वहां 3 सालों से काम कर रहा था, वह वहां नौकर नहीं, मुंशी था. ठेकेदार के घर भी जाता था और घरपरिवार की जरूरत की चीजें भी ला कर देता था. ठेकेदार की एक बेटी कालेज में पढ़ती थी, उसे लाने ले जाने के लिए एक तांगा लगा था. मेरा बेटा सुबह को उस लड़की को ले कर जाता था और शाम को वापस घर लाता था. ठेकेदार इस काम का उसे अलग से पैसे देता था. 5-6 दिनों से वह भट्ठे पर जा रहा था. उस ने बताया था कि भट्ठे का मुंशी छुट्टी गया है और उस के आने तक उसे ही वहां का हिसाबकिताब रखना पड़ेगा.’’

इंसपेक्टर टेनिसन ने पूछा, ‘‘ठेकेदार को आप के बेटे पर पूरा भरोसा था?’’

‘‘हां जी, भरोसा था तभी तो खलील अपनी बेटी को मेरे बेटे के साथ भेजता था. भरोसे की एक वजह यह भी थी कि ठेकेदार हमारा दूर का रिश्तेदार था. पहले उस का यही एक भट्ठा था. तब मकान कम बनते थे, इसलिए काम भी कम था. जब हिंदूमुसलमानों ने मकान बनाने शुरू किए तो उस के भट्ठे का काम बढ़ गया और खलील ठेकेदार भी बन गया.

‘‘आदमी होशियार और चालाक था, हर किसी को खुश करना जानता था. इसलिए जल्दी ही उस का कारोबार फैलता गया. 2 साल पहले उस ने नई दिल्ली में अपनी कोठी भी बना ली. मेरे पति के मरने के बाद उस ने हमारे ऊपर एक उपकार यह किया कि दसवीं पास करते ही मेरे बेटे को नौकरी पर रख लिया. जमील जल कर मर गया तो ठेकेदार ने मुझे 5 हजार रुपए भिजवाए, लेकिन मैं ने यह कह कर लेने से मना कर दिया कि मैं अपने बेटे की कीमत नहीं लूंगी.’’

‘‘आप को ठेकेदार पर तो शक नहीं है?’’ टेनिसन ने पूछा.

‘‘नहीं, उस पर शक नहीं है,’’ राशिदा ने कहा, ‘‘लेकिन उस से शिकायत जरूर है.’’

‘‘कैसी शिकायत?’’ मैं ने पूछा तो उस ने कुछ ऐसी बातें बताईं, जिन पर वह खुद भी मुतमईन नहीं थी.

‘‘अगर तुम्हें ठेकेदार पर शक है तो साफ बता दो और अग

नहीं है तो कह दो कि शक नहीं है.’’ मैं ने थोड़ी झुंझलाहट में कहा.

‘‘ठेकेदार पर शक का कोई कारण नहीं है,’’ राशिदा ने कहा, ‘‘इतने अमीर आदमी के साथ हमारी क्या दुश्मनी हो सकती है? उसे जमील पर भरोसा था, तभी वह अपनी जवान बेटी को उस के साथ भेजा करता था.’’

‘‘यह भी तो एक कारण हो सकता है कि उस की बेटी जवान थी और आप का बेटा भी. हो सकता है ठेकेदार ने उन दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया हो.’’

‘‘मैं यह नहीं मान सकती, मेरा बेटा इतना होशियार और चालाक नहीं था. अगर ऐसी बात होती तो ठेकेदार मुझ से शिकायत करता या उसे नौकरी से निकाल देता. उसे पता था कि हमारे लिए यही सजा बहुत है.’’

बातोंबातों में राशिदा ने हमें बताया था कि ठेकेदार ने पहले उसे 5 हजार रुपए देने चाहे थे, बाद में यह रकम बढ़ा कर 8 हजार कर दी थी. आजकल हजार रुपए कुछ नहीं हैं, लेकिन उस जमाने के एक हजार रुपए आज के एक लाख रुपए के बराबर होते थे. राशिदा ने यह रकम नहीं ली थी और थाने पहुंच गई थी.

2 महीने गुजर गए, जमील का चालीसवां होने के बाद ठेकेदार ने अपनी बेटी की शादी कर दी थी. राशिदा 3-4 बार थाने गई. उस ने हमें बताया कि थानेदार कभी तो उस से बड़े प्यार से बातें करता था, कभी उसे थाने से निकाल देता था. जिस एडवोकेट ने उस का प्रार्थना पत्र एसपी थांपसन के पास पहुंचाया था, वह उस के पति का दोस्त था. राशिदा से हमें कोई सबूत नहीं मिला. बस एक ही बात जो शक पैदा कर रही थी, वह यह थी कि जमील ठेकेदार की बेटी को स्कूल ले जाता और ले आता था. हमें यह पता करना था कि ठेकेदार की लड़की का चरित्र कैसा था.

मैं और टेनिसन लौट कर थाने पहुंचे तो खलील ठेकेदार थानेदार के पास बैठा था. उस की उमर 50-60 साल के लगभग थी. शक्ल और सूरत से वह सम्मानित व्यक्ति लगता था. मेरी राय में वह या तो बहुत सभ्य और सम्मानित आदमी था या फिर पक्का गुरुघंटाल था. मैं ने और टेनिसन ने तय कर लिया था कि उसे भट्ठे पर ले जा कर बात करेंगे, क्योंकि हमें भट्ठा भी देखना था. हम ने उस से कहा कि वह हमें अपने भट्ठे पर ले चले. उस का भट्ठा दिल्ली के बाहरी इलाके में था.

ठेकेदार खलील के भट्ठे पर पहुंच कर हम ने उस से वह जगह दिखाने को कहा, जहां से जमील आग में गिरा था. उस ने हमें वह जगह दिखाई. मैं ने और टेनिसन ने भट्ठे का किनारा ध्यान से देखा. वहां फिसलने लायक नहीं था. ठेकेदार ने हमें बताया कि जमील किनारे तक चला गया था.

‘‘उस समय वह अकेला था?’’ मैं ने पूछा.

‘‘नहीं,’’ ठेकेदार ने जवाब दिया, ‘‘मजदूर बहुत होते हैं, उन पर एक मेट होता है, जो उन्हें संभालता है. उस समय वही उस के साथ था. उसी ने मुझे यह सब बताया था.’’

‘‘तब आप को जरा भी शक नहीं हुआ कि उसे किसी ने गिरा दिया होगा?’’ मैं ने पूछा.

‘‘आप का मतलब है कि उस की किसी से दुश्मनी रही होगी,’’ ठेकेदार ने कहा, ‘‘उस बेचारे की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती थी. उसे तो भट्ठे पर आए 4 दिन हुए थे.’’

ठेकेदार का पूरा बयान हमें बाद में लेना था, अभी तो हम घटनास्थल देखने आए थे. हमें यह भी देखना था कि कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह था या नहीं? जिस मेट के साथ होने की बात ठेकेदार ने कही थी, वह वहीं था. मजदूर चले गए थे, चौकीदार आ गए थे. हम ने ठेकेदार से कहा कि वह रात को 9 बजे मेट को ले कर क्राइम ब्रांच औफिस आ जाए. हम दोनों रात 10 बजे हेडक्वार्टर पहुंचे. ठेकेदार मेट को लिए हमारे इंतजार में बैठा था. हम ने उसे 9 बजे का समय दिया था, लेकिन हम एक घंटा लेट आए थे. हम ने ठेकेदार को बुलाया. हमारे सवालों के जवाब में उस ने जमील के बारे में वही बातें बताईं, जो उस की मां बता चुकी थी.

‘‘साहब, मुझे इस लड़के के मरने का इतना दुख है कि आप अंदाजा नहीं लगा सकते. बेचारा अनाथ था, छोटे भाई और मां का एकलौता सहारा. मेरे पास इतना कुछ है कि मैं उस लड़के को नौकरी पर लगा कर सब से ज्यादा वेतन दिया करता था. बहुत सज्जन और भरोसे का लड़का था. उस के रहते मुझे किसी बात की चिंता नहीं थी. मेरी जवान बेटी को कालेज ले जाता था. मैं उस की मां का सामना नहीं कर सकता.’’

यह सब कहते हुए ऐसा लग रहा था, जैसे वह अभी रो पड़ेगा. मैं ने उस से पूछा, ‘‘तुम ने उस की मां को देने के लिए 5 हजार रुपए भेजे थे, लेकिन उस ने लेने से मना कर दिया. उस के बाद तुम ने 3 हजार और बढ़ा कर भेजे, लेकिन वह भी उस ने लेने से मना कर दिया. तब तुम ने उसे धमकी दी कि वह दूसरे बेटे को भी खो दोगी, यह धमकी तुम ने क्यों दी?’’

‘‘नहीं साहब, मैं ने उसे कोई धमकी नहीं दी. मैं ने तो कहा था कि उस का दूसरा बेटा मैट्रिक पास कर ले तो उसे मैं नौकरी दे दूंगा.’’ यह बातें कहने में वह घबरा रहा था, ‘‘असली बात यह है साहब कि वह मां है, उस का जवान बेटा मर गया है. उसे शक है कि उस के बेटे को किसी ने उठा कर आग में फेंक दिया है. ऐसी स्थिति में मैं उसे अकेला नहीं छोड़ सकता. हो सकता है, मैं ने उसे थाने जाने से रोकने के लिए कोई सख्त बात कह दी हो और वह उसे धमकी समझ बैठी हो. मैं ने खुद ही पुलिस को बुलाया था. थानेदार साहब ने इस मामले की बहुत मेहनत से तफ्तीश की थी.’’

‘‘जमील तुम्हारे दूसरे काम करता था, फिर तुम ने उसे भट्ठे पर क्यों भेजा था?’’ इंसपेक्टर टेनिसन ने पूछा.

‘‘भट्ठे का मुंशी 7-8 दिनों के लिए छुट्टी पर चला गया था. जो नौकर थे, वे पैसों में गड़बड़ कर देते थे, जमील मेरे घर का मेंबर था, इसलिए उसे भेजा था.’’

‘‘तुम्हारा मुंशी इस के पहले कब छुट्टी पर गया था?’’ इंसपेक्टर टेनिसन ने पूछा.

अचानक पूछे गए इस सवाल से उस की जबान जरा हकला सी गई, ‘‘यह मैं पूछ कर बताऊंगा.’’

इस के बाद मैं ने और टेनिसन ने उस पर सवालों की बौछार कर दी, जिस से वह घबरा गया. घबराहट उस के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी. अपने सवालों और उस के जवाबों से हम कई बातें समझ गए थे.

‘‘खलील साहब, मैं तुम्हें भाई की हैसियत से सलाह देता हूं कि अभी तुम्हारे पास समय है. अगर तुम हमें सच्ची बात बता देते हो तो तुम्हारे लिए आसानी रहेगी, क्योंकि हमें बाद में सच्चाई पता चली तो तुम्हारे लिए ठीक नहीं रहेगा. यह बात अच्छी तरह समझ लो कि इस केस की तफ्तीश सीआईए कर रही है. अभी तो तुम से बहुत आदर से बातें हो रही हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर हम दूसरे तरीके भी अपना सकते हैं.’’

‘‘आप को क्या शक है साहब?’’ उस ने पूछा.

‘‘शक नहीं, हमें पूरा यकीन है कि जमील को आग में फेंका गया है और तुम्हें इस की पूरी जानकारी है.’’

‘‘नहीं, मुझे कुछ नहीं मालूम. लेकिन जब आप कह रहे हैं कि उसे आग में फेंका गया है तो मैं इस बात का पता लगाऊंगा.’’ ठेकेदार ने कहा.

‘‘ठेकेदार साहब, हम तुम्हें कल शाम तक का समय देते हैं. अगर तुम्हारे दिल में कोई बात हो तो हमें बता दो.’’ कह कर ठेकेदार को घर भेज दिया.

ठेकेदार के जाने के बाद हम ने उस के मेट को बुलाया. वह 35-36 साल का छरहरे बदन का आदमी था. उस ने अपना नाम सिराज बताया. लेकिन सब उसे सागर के नाम से पुकारते थे. उस ने बताया कि वह पिछले 10 सालों से खलील के भट्ठे पर काम कर रहा था.

‘‘एक बात ध्यान में रख लो सागर, झूठ बोलोगे तो पिस जाओगे. यह धनी लोग अपना पाप गरीबों के खाते में डाल देते हैं. यहां भी मुझे ऐसा ही दिखाई दे रहा है. अच्छा यह बताओ कि जमील को ठेकेदार ने अन्य कामों से हटा कर भट्ठे पर क्यों लगाया था?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मुंशी छुट्टी चला गया था, उस की जगह जमील आया था.’’ उस ने कहा.

‘‘मुंशी कब से काम कर रहा है?’’ मैं ने पूछा.

‘‘हुजूर, कोई 6-7 साल से काम कर रहा है.’’ उस ने जवाब दिया.

‘‘वह इस के पहले कब छुट्टी गया था?’’ मैं ने पूछा.

‘‘जहां तक मुझे याद है 3 साल पहले गया था.’’ उस ने जवाब दिया.

‘‘क्या उस समय भी ठेकेदार ने जमील को या किसी और को उस की जगह भट्ठे पर भेजा था?’’ मैं ने सवाल किया.

‘‘नहीं साहब.’’ उस ने कहा.

‘‘अच्छा यह बताओ, भट्ठे पर पैसे कौन खाता है?’’ मैं ने पूछा.

‘‘कोई नहीं खा सकता, क्योंकि मेमो बनता है.’’ उस ने कहा.

‘‘झूठ बोल रहे हो. पैसे तुम मारते हो,’’ मैं ने उसे भड़काने के लिए कहा, ‘‘ठेकेदार ने जमील को भट्ठे पर इसीलिए भेजा था.’’

‘‘क्या यह बात ठेकेदार ने कही है?’’ उस ने चौंक कर पूछा.

‘‘यही नहीं, ठेकेदार ने तुम्हारी बहुत सी करतूत बताई हैं.’’ मेरे इतना कहते ही उस के चेहरे का रंग बदलने लगा.

मैं ने और टेनिसन ने उस दौरान भी उस से कई सवाल पूछे. वह उन के जवाब तो दे रहा था, लेकिन हम उस के जवाब के बजाय उस के चेहरे के उतारचढ़ाव को देख रहे थे. इस से हमें लगा कि उस के दिल में कोई बात है. मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए हम ने कुछ देर के लिए उसे दूसरे कमरे में भेज दिया और हम दोनों आपसी विचारविमर्श करने लगे. भट्ठे के मजदूरों पर जो मेट लगाए जाते हैं, उन में ज्यादातर अपराधी प्रवृत्ति के होते हैं. ठेकेदार खलील का यह मेट भी मुझे ऐसा ही लग रहा था. मैं ने और टेनिसन ने विचारविमर्श कर के तय किया कि इस मेट को भट्ठे पर न जाने दिया जाए, वरना इस के डर से कोई मजदूर सही बात नहीं बताएगा.

मेट सागर को हम ने दोबारा अपने कमरे में बुलाया और उस से पूछा कि जमील का चरित्र कैसा था? उस ने बताया कि उस का चरित्र ठीकठाक था. वह अपने काम से काम रखता था. उस ने यह भी बताया कि जमील ठेकेदार का दूर का रिश्तेदार था, इसलिए सब उस का सम्मान करते थे. मैं ने अपने शक की बिना पर उस से पूछा कि ठेकेदार की लड़की से जमील का क्या चक्कर चल रहा था?

‘‘मैं इस मामले में कुछ नहीं जानता सरकार. जमील उन के घर भी जाता था और उन की बेटी को कालेज भी ले जाता था और ले भी आता था.’’ उस ने कहा.

‘‘और लड़की के बारे में तुम्हारा क्या खयाल है?’’ मैं ने पूछा.

‘‘लड़की परदे में रहती थी, कालेज भी बुरका पहन कर जाती थी. वैसे हुजूर, मैं आप को बता दूं कि ठेकेदार की सभी औरतें परदे में रहती हैं.’’ वह बोला.

‘‘जमील जब भट्ठे में गिरा था, उस समय तुम उस के साथ थे. तब तुम ने उसे आगे जाने से रोका क्यों नहीं?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मैं ने उसे रोका था साहब, लेकिन उस का पांव ऐसा फिसला कि वह उस में गिर गया. मुझे लगा कि जैसे वह भट्ठे की आग देखने जा रहा है.’’ सागर ने बताया.

अगले दिन सुबह 8, साढ़े 8 बजे हम भट्ठे पर गए. ठेकेदार को हम ने नहीं बताया था कि हम वहां जाएंगे. वहां वही मुंशी मिल गया, जिस की जगह पर जमील को लगाया गया था. हम ने उस की बातचीत से महसूस किया कि मुंशी सागर से डरासहमा रहता था.

‘‘तुम पिछली बार छुट्टी पर कब गए थे?’’ मैं ने पूछा.

‘‘कोई 3 साल हो गए होंगे.’’ वह बोला.

‘‘इन 3 सालों में तुम्हें छुट्टी नहीं मिली या तुम खुद नहीं गए?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मैं कहीं दूर का आदमी नहीं हूं साहब,’’ उस ने हाथ के इशारे से कहा, ‘‘वह जो गली दिखाई दे रही है, उसी में रहता हूं.’’

‘‘अब शायद कोई लंबा काम आ पड़ा था, इसीलिए छुट्टी पर चले गए थे?’’ मैं ने पूछा.

‘‘नहीं साहब, मुझे कोई काम नहीं था. वह तो एक दिन सागर ने मुझ से कहा कि तुम्हारे छुट्टी न लेने से ठेकेदार तुम्हें मैडल तो देगा नहीं. इसलिए छुट्टी लो और घूमोफिरो, मौजमस्ती करो. इस के बाद उस ने ठेकेदार से मुझे 8 दिनों की छुट्टी दिलवा दी थी.’’

जब मैं छुट्टी से लौटा तो पता चला कि जमील भट्ठे की आग में गिर कर मर गया. उस की मौत के बारे में जान कर मुझे बहुत दुख हुआ. मुंशी की बातों से साफ लग रहा था कि मुंशी को छुट्टी भिजवाना जमील की हत्या के षडयंत्र की एक कड़ी थी. अब हमें यह पता करना था कि यह साजिश अकेले सागर की थी या उस में ठेकेदार खलील भी शामिल था.

‘‘तुम बड़े काम के आदमी हो. ठेकेदार का यह भट्ठा तुम्हीं चला रहे हो. सागर तो कुछ काम करता नहीं, वह तो सिर्फ गुंडागर्दी करता रहता है.’’ उस की पीठ थपथपाते हुए मैं ने उस के अंदर खूब हवा भरी, जिस से वह कुछ और उगल दे. इंसपेक्टर टेनिसन ने भी उस की प्रशंसा के बड़ेबड़े पुल बांधे.

‘‘एक बात बताओ इदरीस,’’ मैं ने मुंशी से कहा, ‘‘जमील को मरे 2 महीने से ज्यादा हो गए हैं, जब तुम छुट्टी से लौट कर आए तो तुम ने मजदूरों से पूछा होगा कि जमील आग में कैसे गिरा? इस के बाद तुम ने सागर से पूछा होगा?’’

‘‘सब को हैरानी इस बात पर थी कि वह आग में गिरा कैसे? इतनी तेज आग के पास तो कोई जाता तक नहीं.’’ मुंशी ने जवाब दिया.

मैं ने कहा, ‘‘इदरीस कहीं ऐसा तो नहीं कि जमील का यहां किसी लड़की से चक्कर चल रहा हो और उस लड़की को सागर भी चाहता हो?’’ मैं ने पूछा.

‘‘साहब, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है और सही बात यह है कि सागर के विरुद्ध यहां कोई जबान नहीं खोल सकता. मैं भी उस से डरता हूं,’’ मुंशी ने कहा.

‘‘कहां है सागर?’’ इंसपेक्टर टेनिशन ने पूछा.

‘‘वह अभी आ जाएगा, वह साढ़े 10 बजे तक आता है.’’ मुंशी ने बताया.

‘‘वह अब नहीं आएगा, वह हवालात में बंद है.’’ टेनिसन ने कहा.

मुंशी हैरान हो कर देखने लगा.

‘‘हैरान न हो इदरीस,’’ मैं ने कहा, ‘‘सागर को हम ने गिरफ्तार कर लिया है.’’

हमारे साथ एक हेडकांस्टेबल और एक कांस्टेबल भी था. हम ने उन से कहा कि वे सागर को हथकड़ी लगा कर यहां ले आएं. मुंशी को जब पक्का यकीन हो गया कि उन का मेट गिरफ्तार हो गया है तो उस ने कहा, ‘‘साहब, अब मेरी समझ में आ गया कि सागर छुट्टी जाने के लिए मेरे पीछे क्यों पड़ा था. सच बात तो यह है कि यहां का हर मजदूर सागर से डरता है. यह आदमी मनमानी करता है.’’

पूछने पर मुंशी ने दिल्ली स्थित उस के घर का पता भी बता दिया था. इस के बाद मुंशी ने वहां काम करने वाले 5 मजदूरों को भी बुला लिया. हम ने उन सभी के बयान लिए. उन से पता चला कि सागर ही एक योजना के तहत जमील को भट्टे पर उस जगह ले गया था, जहां आग जल रही थी और उस ने उसे उस आग में धकेल दिया था. हम मजदूरों से पूछताछ कर रहे थे कि ठेकेदार आ गया. मैं ने उसे वहां से हटा दिया. ठेकेदार वहां से चला गया तो हम मजदूरों से और पूछताछ करने लगे. कुछ देर में पुलिस कांस्टेबल सागर को हथकड़ी लगाए ले आए. मैं ने देखा, मजदूर काम छोड़ कर हैरानी से सागर को हथकड़ी में बंधा देख रहे थे. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि इतना दबंग आदमी भी गिरफ्तार हो सकता है.

इस के बाद हम ने मजदूरों से सागर के बारे में पूछा तो उन्होंने उस के गंदे कामों से परदा उठाना शुरू कर दिया. वह सभी मजदूरों से 5 रुपए हर महीने कमीशन लेता था. उन की लड़कियों को अपनी नौकरानी समझता था. हमें जो कुछ पता करना था, कर लिया था. फिर उसे हेडक्वार्टर ले आए. सागर पुरानी दिल्ली का रहने वाला था. मैं ने उस इलाके के थानेदार को उस का नामपता बता कर उस के बारे में और जानकारी जुटाने को कहा, साथ ही यह भी कहा कि अगर उस का कोई जानकार हो तो उसे भी साथ ले आएं.

थानेदार ने मुझे फोन पर ही बता दिया कि यह आदमी थाने के रिकौर्ड में है और एक बार इसे सजा भी हो चुकी है. सागर के आपराधिक रिकौर्ड की पूरी रिपोर्ट उन्होंने एक कांस्टेबल द्वारा मेरे पास भिजवा दी. उस सिपाही की सागर से दोस्ती थी. उस ने सागर की पूरी कहानी हमें सुना दी. उस ने जीबी रोड की एक वेश्या का नाम भी बताया, जिस के पास सागर अकसर जाता रहता था. मैं ने उस कांस्टेबल से उस वेश्या का पता ले लिया.

अगले दिन मैं हेडक्वार्टर गया तो टेनिसन को थानेदार द्वारा सागर के बारे में दी गई रिपोर्ट दिखाई और कांस्टेबल ने जो बातें जुबानी बताई थीं, वह भी बता दीं. टेनिसन ने उस वेश्या को बुलाने के लिए एक एएसआई को भेजा. यहां मैं आप को अपराधियों की मानसिकता के बारे में बता दूं कि इस तरह के लोग मन बहलाने के लिए वेश्याओं के पास जा कर शराब पीते हैं और लूटे हुए माल से ऐश करते हैं. छोटीमोटी घटनाएं ऐसे लोगों की आदत में शामिल होती हैं, लेकिन हत्या ऐसी घटना होती है, जिसे कोई भी हजम नहीं कर सकता. आम तौर पर देखा गया है कि पेशेवर हत्यारे भी हत्या कर के अपनी प्रिय वेश्या के पास जा कर शराब के नशे में बड़े घमंड से वेश्या को बता देते हैं कि वे हत्या कर के आए हैं.

हम ने उस वैश्या को इसी आशय से बुलाया था कि उस से हत्या का कोई सुराग जरूर मिल जाएगा. लगभग एक घंटे बाद वह वेश्या आ गई. 35 की उमर रही होगी उस की. बहुत सुंदर थी वह. हम ने उसे बिठाया. उस के चेहरे पर घबराहट और डर था. हम ने उसे सामान्य करने के लिए इधरउधर की बातें कीं. वह एक वेश्या थी, जिस का सोसाइटी में न कोई स्थान था और न आदरसम्मान. मेरे इज्जत देने पर वह गुब्बारे की तरह फूलती चली गई. कुछ देर बाद बोली कि उसे यहां क्यों बुलवाया गया है?

‘‘तुम्हारा यार सागर फांसी चढ़ रहा है.’’ मैं ने कहा, ‘‘उस रात सागर तुम्हारे पास गया था, तब उस ने तुम्हें पूरी घटना बता दी थी. यह बात वह कुबूल कर चुका है. तुम्हें केवल पुष्टि के लिए बुलाया है.’’

‘‘हां.’’ उस ने एक ठंडी सांस ले कर कहा, ‘‘उस रात वह बहुत अधिक पी कर आया था. उल्टीसीधी बकबक कर रहा था. उस ने कहा था कि आज बहुत पैसे कमाए हैं. एक लड़के को जिंदा जला कर भस्म कर दिया है. मैं समझी कि डींगे मार रहा है.’’

‘‘नहीं, डींगें नहीं, वह सच कह रहा था. तुम्हें उस ने कितनी रकम बताई थी?’’ मैं ने पूछा.

‘‘5 हजार रुपए बता रहा था, लेकिन मैं ने विश्वास नहीं किया कि इतनी रकम कौन देगा.’’

इस के बाद सागर को हवालता से निकलवा कर उस के कारनामों का पुलिंदा रख दिया, साथ ही वेश्या की बात भी उसे बता दी. इस के बाद उस से अपराध कबूलवाने के लिए कहा, ‘‘सागर, तुम ने किस आदमी पर भरोसा किया. उस ठेकेदार पर, जिस ने बयान में कहा है कि तुम ने जमील को धक्का दिया था. ठेकेदार ने हमें गवाह भी उपलब्ध करा दिए हैं. जिस वेश्या पर तुम ने भरोसा किया था, अभीअभी बयान दे कर गई है. इसलिए गनीमत इसी में है कि तुम अपना जुर्म स्वीकार कर लो, वरना तुम्हारी जुबान खुलवाने के लिए हमें दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा.’’

यह सुनते ही उस ने ठेकेदार को गालियां देते हुए कहा कि उसी के कहने पर ही उस ने इतना बड़ा अपराध किया था और वही मेरे खिलाफ बयान दे गया. इस के बाद उस ने पूरी कहानी बयां कर दी. सिराज उर्फ सागर ठेकेदार का बौडीगार्ड था, साथ ही भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों को भी कंट्रोल करता था. किसी व्यक्ति को डरानेधमकाने या रुकी हुई रकम निकलवाने के लिए ठेकेदार उसी को इस्तेमाल करता था. एक दिन ठेकेदार ने सागर से कहा कि जमील को जमींदोज करना है. सागर ने कारण पूछा तो उस ने कहा कि उस की बेटी को जमील ने प्रेमजाल में फांस लिया है. उन का यह चक्कर बचपन से चल रहा है. लेकिन वह उसे स्कूल ले आने और ले जाने लगा तो उसे मिलने का मौका मिल गया.

शाइस्ता के लिए एक बहुत अच्छा रिश्ता आया था. लड़का शिक्षित और धनी व्यापारी का बेटा था. ठेकेदार ने रिश्ते के लिए हां कर दी. लेकिन शाइस्ता ने मां से साफ कह दिया कि वह जमील के अलावा किसी और से शादी नहीं करेगी. अगर उस के साथ जबरदस्ती की गई तो वह निकाह के समय मना कर देगी. उसे मांबाप और बहनों ने बहुत समझाया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही. ठेकेदार ने उस की पढ़ाई छुड़वा कर शादी की तैयारियां शुरू कर दीं. शाइस्ता ने अपनेआप को एक कमरे में बंद कर लिया. उस ने धमकी दी कि वह दरवाजा तभी खोलेगी, जब जमील आ कर कहेगा. उस ने खानापीना तक छोड़ दिया.

बेटी की हालत देख कर ठेकेदार ने जमील को बुलाया. अब ठेकेदार को जमील दुश्मन दिख रहा था. उस ने सागर से कहा कि जमील को इस तरह से मारा जाए कि उस की बेटी को पता न चले कि उस की हत्या हुई है. सागर ने उसे 2-3 तरीके बताए, लेकिन ठेकेदार ने यह कह कर मना कर दिया कि इस से हत्या और अपहरण का शक होगा. तब ठेकेदार ने ही बताया कि जमील को भट्ठे की आग में डाल दिया जाए. यह तरीका सागर को भी आसान लगा. ठेकेदार ने उसे भरोसा दिया कि काम हो जाने पर वह उसे 5 हजार रुपए देगा.

सागर और ठेकेदार ने जमील को भट्ठे की आग में जलाने की योजना बनाई. इस के बाद योजना के अनुसार सागर ने मुंशी इदरीस को छुट्टी पर भेज कर उस की जगह जमील को काम पर लगवा दिया. 2-3 दिनों में सागर ने जमील से दोस्ती कर ली और एक दिन जमील के पास आ कर बोला, ‘‘आओ, मैं तुम्हें दिखाऊं कि भट्ठे में कच्ची ईंटें कैसे रखी जाती हैं और आग कैसे जलाई जाती है.’’

जमील सागर की बातों में आ कर उस के साथ भट्ठे पर चला गया. सागर ने मजदूरों को दूर भेज दिया. जमील को भट्ठे के किनारेकिनारे ले जाते हुए सागर उसे वहां ले आया, जहां तेज आग जल रही थी. जमील आग की गरमी से दूर हटने लगा तो सागर ने जमील को कूल्हे से इतनी जोर से धक्का मारा कि जमील आग में जा गिरा. जिस जगह वह गिरा था, वह जगह 10 फुट गहरी थी. जमील की केवल एक चीख सुनाई दी.

सागर ने शोर मचाया तो मजदूर इकट्ठा हो गए. तब तक जमील जल कर कोयला हो चुका था. आग में पानी फेंका गया. आग तो बुझ गई, लेकिन यह पता नहीं चल सका कि उस में आदमी जला है या पेड़ की टहनी. ठेकेदार को सूचना दी गई, वह आया और उस ने थाने को सूचना दी. इलाके का थानेदार सदाकत अली भट्ठे पर आया और थोड़ीबहुत पूछताछ कर के चला गया. मैं ने सागर से पूछा, ‘‘थानेदार ने तफतीश तो की होगी?’’

‘‘अजी उस ने कोई तफतीश नहीं की, 5 सौ रुपए ले कर लिख दिया कि मौके का निरीक्षण करने पर पता चला कि मौत दुर्घटना के कारण हुई थी. हम तो खुश थे कि मामला खतम हो गया. लेकिन जमील की मां की आहें रंग लाईं और असलियत सामने आ गई.’’

सागर के इस खुलासे के बाद ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया गया. जब उसे पता चला कि सागर ने सारा खुलासा कर दिया है तो उस के सामने भी अपना अपराध स्वीकार करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं था. पूरा मामला खुल चुका था. दोनों अभियुक्त भी गिरफ्तार किए जा चुके थे. इस में सदाकत अली की भूमिका संदिग्ध दिखी. इंसपेक्टर टेनिसन ने एसपी थांपसन के सामने दोनों अभियुक्तों को पेश किया. उन्होंने भी उस से पूछताछ की. जांच के बाद एसपी ने थानेदार सदाकत अली को निलंबित कर दिया. यह हत्या शाइस्ता की वजह से हुई थी, इसलिए उस का बयान भी जरूरी था. हम ने उसे भी थाने बुलवा लिया.

लेकिन उस की जगह उस का पति आया. मैं ने कहा, ‘‘आप शाइस्ता को हमारे पास भेजें. आप निश्चिंत रहें, हम उस से दोएक बातें पूछ कर उसे आप के साथ भेज देंगे.’’

दरअसल, शाइस्ता को आप के पास भेजने से पहले मैं आप को एक जरूरी बात बताना चाहता हूं. आप मेरी बात सुन लें, फिर शाइस्ता से जो चाहें, पूछ लें.’’

मैं ने इंसपेक्टर टेनिसन की ओर देखा. उन्होंने सिर हिलाया. इस के बाद उस ने कहा, ‘‘मैं आप को ऐसी बात बताने जा रहा हूं, जिसे सुन कर आप हैरान रह जाएंगे. शाइस्ता से शादी के बाद मैं बहुत खुश था. लेकिन शादी की पहली रात उस ने मुझ से कहा, ‘आप ने न मेरा अपहरण किया है और न ही आप के मातापिता ने मेरे साथ कोई ज्यादती की है. इस में आप का कोई दोष नहीं है, इसलिए आप को यह बताना जरूरी है कि मैं ने आप को दिल से कबूल नहीं किया है. लेकिन मैं आप को मायूस नहीं करूंगी. मेरा शरीर आप का है, आप इसे जिस तरह चाहे प्रयोग करें, लेकिन भावनात्मक तौर पर मैं आप का साथ नहीं दे सकूंगी.’

‘‘मैं उस की बातें सुन कर हिल गया. मैं ने उस से पूछा कि क्या तुम किसी और को पसंद करती हो? उस ने कहा, ‘आप ने सुना होगा कि हमारे भट्ठे पर जमील नाम का एक लड़का आग में गिर कर मर गया था. मैं उसी से प्यार करती थी. वह दुर्घटना नहीं, बल्कि उसे मेरे घर वालों ने साजिश रच कर मारा है. लेकिन कोई भी ताकत उसे मेरे दिल से नहीं निकाल सकती. मैं आप से बागी नहीं हो सकती, आप का हर हुक्म मानूंगी.’

‘‘पता नहीं क्या हुआ सर, उस की हृदयस्पर्शी बातें सुन कर मैं ने मन ही मन तय कर लिया कि मैं शाइस्ता को उस के अतीत की बातें अपने मातापिता को भी पता नहीं चलने दूंगा. मुझ से जमील के बारे में कितनी भी बातें करे, मैं बुरा नहीं मानूंगा. मैं वही करूंगा जो वह कहेगी. उस ने मेरे दोनों हाथ अपने हाथों में ले कर आंखों से लगाए और बहुत रोई. आज हमारी शादी को 20-21 दिन हो गए हैं, मैं ने उसे बिलकुल भी हाथ नहीं लगाया है.’’

उस की बातों को हम ने बड़े गौर से सुना और ताज्जुब भी हुआ. हमें शाइस्ता से बात करनी थी, इसलिए उसे हम ने कमरे में बुला लिया और उस से बात होने तक उस के पति को बाहर बैठ कर इंतजार करने को कहा. उस के जाने के बाद मैं और इंसपेक्टर टेनिसन एकदूसरे का मुंह देखते रहे. मैं ने अपनी सर्विस में बहुत से लोग देखे थे, लेकिन यह आदमी सब से अलग और अनोखा था. इंसपेक्टर टेनिसन ने शाइस्ता से बात करनी शुरू की. इंसपेक्टर टेनिसन ने कहा, ‘‘क्या तुम्हें अपने पिता की गिरफ्तारी पर दुख नहीं है?’’

‘‘नहीं,’’ उस ने दांत पीस कर कहा, ‘‘मुझे उस आदमी से नफरत है, उसे सख्त सजा दी जानी चाहिए.’’

2-3 बातें और पूछने के बाद हम ने कहा, ‘‘इस के लिए तुम्हें अदालत में गवाही देनी पड़ेगी.’’

‘‘मैं अदालत चलूंगी और वहां चिल्लाचिल्ला कर कहूंगी कि यह हत्यारा है और हत्या की वजह भी बताऊंगी.’’

सागर और ठेकेदार को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया गया. इस के बाद न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई. शाइस्ता ने अपने पिता के खिलाफ गवाही दी. मुकदमे की लंबी काररवाही के बाद जज ने सागर को मृत्युदंड और ठेकेदार को 8 साल की सजा सुनाई. दोनों ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन उन की अपील निरस्त कर दी गईं. लगभग एक साल बाद मैं अपनी पत्नी और बच्चों के साथ आगरा घूमने गया तो इत्तफाक से वहां शाइस्ता और उस का पति मिल गया.

शाइस्ता ने बताया कि सागर को फांसी देने के बाद उस के पिता को जेल में 3 महीने बाद फालिज का अटैक पड़ा, जिस में उस की मौत हो गई. उस की लाश घर आई तो उस की ससुराल के सब लोग गए थे, लेकिन वह नहीं गई. बाप के मरने से उस के दिल को बहुत सुकून मिला था. अब वह पति के साथ खुश है. मैं ने उस के पति की ओर देखा, वह मुसकरा रहा था. उस के चेहरे से ही लग रहा था कि वह संतुष्ट है. Hindi Kahani

 

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