Lucknow News: सायरा लखनऊ में देहधंधे की बड़ी धुरी थी. दूसरे की बेटियों को वेश्यावृत्ति की आग में झोंकने वाली सायरा अपनी बेटियों पर इस धंधे की छाया भी नहीं पड़ने देना चाहती थी. लेकिन उस की करतूतों की सजा बेटी को उठानी ही पड़ गई.  सायरा जितनी खूबसूरत थी उतनी ही चंचल और शोख हसीन भी. अन्य लड़कियों की तरह शादी को ले कर उस के भी सुनहरे सपने थे. लेकिन उस के सारे सपने उस वक्त चकनाचूर हो गए जब उस की शादी सीतापुर जिले के महमूदाबाद कस्बे के हुसनैन के साथ हुई. उस का मायका भी इसी कस्बे के दूसरे मोहल्ले का था.

हुसनैन मेहनतमजदूरी करता था. वह जो पैसे कमाता था उस से उस के घर का केवल खर्च ही चल पाता था. ऐसे में उस ने अपने सपनों को एक तरफ सरका दिया और अपनी घरगृहस्थी में रम गई. लेकिन जब कभी वह गहने या अच्छे कपड़े पहनी हुई अन्य महिलाओं को देखती तो उस के दिल में टीस सी उठती थी. तब वह सोचती कि उस के सपने भी कभी पूरे होंगे या जिंदगी ऐसे ही अभावों में कटेगी.

जब उसे निश्चित हो गया कि कस्बे में रह कर उस के सपने पूरे नहीं हो सकते तो उस ने लखनऊ जाने की ठान ली और इस के लिए उस ने पति को भी किसी तरह तैयार कर लिया. इस के बाद सायरा और हुसनैन महमूदाबाद से लखनऊ पहुंच गए. पुराने लखनऊ में उन्होंने एक कमरा किराए पर ले लिया. शहर में जाते ही कोई काम मिलना आसान नहीं होता, इसलिए हुसनैन रिक्शा चलाने लगा. इस से उसे पहले से ज्यादा कमाई होने लगी पर शहर में रहने की वजह से उन के खर्च भी बढ़ने लगे थे. इस के बावजूद भी दोनों वहां खुश थे.

सायरा खुद भी अपने लिए कामधंधे की तलाश में लग गई. किसी जानकार के माध्यम से उसे एक ब्यूटीपार्लर में काम मिल गया. उस की शादी को 8 साल हो हो चुके थे और वह 4 बच्चों की मां भी बन गई थी. ब्यूटीपार्लर में काम करने की वजह से वह बनठन कर रहती थी. इस से पता नहीं लग पाता था कि वह 4 बच्चों की मां है. उसी ब्यूटीपार्लर में काम करने वाली परवीन नाम की एक औरत से उस की दोस्ती हो गई. सायरा परवीन से अपने घर के हालात बताती रहती थी.

एक दिन परवीन ने उस से कहा, ‘‘सायरा, तुम्हारी गरीबी देख कर मुझे दया आ रही है. वैसे मेरे पास एक काम है. इस में पैसा खूब है लेकिन यह बात तुम अपने तक ही रखना.’’

‘‘क्या काम है और इस में मुझे करना क्या होगा?’’ सायरा ने अचंभे से पूछा.

‘‘देख, करना कुछ नहीं है. बस यह समझ ले कि जिस काम को तू हुसनैन के साथ मुफ्त में करती है, उसी को तुझे दूसरी जगह करना है. 3 से 4 घंटे में ही तुझे उतने पैसे मिल जाएंगे, जितने ब्यूटीपार्लर में 15 दिन में नहीं कमाती होगी.’’

‘‘अच्छा…’’ सायरा हंसते हुए बोली.

‘‘मैं तो कई सालों से इसे मजे से कर के पैसे कमा रही हूं.’’ परवीन ने बताया.

‘‘फिर तुम ब्यूटीपार्लर में नौकरी क्यों करती हो?’’ सायरा ने पूछा.

‘‘वह तो सिर्फ दिखावे के लिए है. इस बहाने मैं घर से बाहर आ जाती हूं.’’

‘‘इस में कोई रिस्क तो नहीं है?’’ सायरा ने पूछा.

‘‘रिस्क कैसा. तू मेरे साथ रहेगी तो सब जान जाएगी. हम दोनों मिल कर यह काम करते हैं.’’ परवीन ने कहा तो सायरा ने हां कर दी. इस के बाद दोनों मिल कर जिस्मफरोशी का धंधा करने लगीं.

सायरा के पति हुसनैन को पता नहीं था कि उस की बीवी क्या काम करती है. जबकि उस की गतिविधियों से मोहल्ले वाले उस के चालचलन को जान चुके थे. मगर इस की उस ने चिंता नहीं की. उस का मकसद पैसे कमाना था, इसलिए लोगों की बातों को अनसुना कर वह अपने मिशन में जुटी रही. परवीन के साथ रह कर सायरा भी इस क्षेत्र की खिलाड़ी बन गई. धंधे की सारी जानकारी हो जाने के बाद सायरा परवीन से अलग रह कर काम करने लगी.

फिर उस ने पुराना मोहल्ला का कमरा छोड़ कर मडियांव इलाके में दूसरा कमरा किराए पर ले लिया. यहां उस ने एक प्लौट भी खरीद लिया. मडियांव इलाके में घनी आबादी नहीं थी. वह एक नई कालोनी बस रही थी. इस कारण वहां पर कौन किस के पास आजा रहा है, इस का किसी को पता भी नहीं चल रहा था. कोई भी गलत काम ज्यादा दिनों तक छिपा नहीं रह सकता. यानी उस के पति हुसनैन को भी उस के धंधे की भनक लग गई. उस ने उसे डांटा और उस के काम का विरोध किया पर सायरा को बिना कोई ज्यादा मेहनत किए अच्छी आमदनी हो रही थी इसलिए उस ने पति के विरोध की परवाह नहीं की.

हुसनैन भी गैरतमंद था, अपनी बात पर अड़ते हुए उस ने पत्नी को कई चेतावनियां भी दीं. इस का भी उस पर असर नहीं हुआ तो वह उस से अलग हो कर दूसरी जगह रहने लगा. अब सायरा की लगाम कसने वाला कोई नहीं था. वह अपने घर पर ही ग्राहकों को बुलाने लगी. इसी दौरान उस की मुलाकात हरदोई जिले के लालबहादुर मिश्रा से हुई. सायरा को एक ऐसे आदमी की जरूरत थी जो उस के साथ रहे और कोई मुसीबत आए तो उस का साथ दे. सायरा के काम से वाकिफ होते हुए भी लालबहादुर मिश्रा ने सायरा से शादी करने के लिए मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया. फिर उस ने अपना नाम शम्सुद्दीन रख लिया.

लालबहादुर का साथ मिलते ही सायरा की कमाई तेजी से बढ़ने लगी. अब उस ने अपने साथ दूसरी लड़कियां भी रख लीं. इस से उसे और ज्यादा कमाई होने लगी. कुछ दिनों बाद उस ने मडियांव की ही बसंत विहार कालोनी में एकएक कर के 4 प्लौट खरीद लिए. इन में से 2 प्लौट अपने नाम से और 2 लालबहादुर के नाम पर थे. करीब 1 हजार वर्गमीटर के इन प्लौटों पर उन्होंने 28 कमरे बनवाए. सारे कमरों को होटल के कमरों की तरह से तैयार कराया गया था. सभी कमरों में होटल की तरह सभी सुविधाएं मौजूद थीं.

कमरों में एसी, फ्लोर टाइल्स, छतों पर पीओपी की पूरी कारीगरी, दीवारों पर महंगा पेंट और कमरों में आरामदायक बेड डाले गए थे. कमरे इस तरह से बनाए गए थे कि आपातकाल में वहां से सुरक्षित निकला जा सके. मडियांव में हिंदुओं की आबादी ज्यादा थी इस वजह से वह हिंदू औरत की तरह रह रही थी. उस के मोहल्ले में भी किसी को यह पता नहीं था कि उस का पति हिंदू से मुस्लिम बन गया है. सायरा ने अपने घर के सामने एक मंदिर भी बनवा रखा था. वह खुद भी सुबहशाम उस मंदिर में पूजा करने जाती थी. सायरा के इस काम से मोहल्ले वाले भी प्रभावित रहते थे.

दूसरी ओर सायरा अपने धंधे को और बढ़ाने का काम भी कर रही थी. उस के पास दूसरे शहरों से भी लड़कियां आने लगीं. वह लड़कियां उस के मकान में ही ठहरती थीं. मोहल्ले वालों से उन लड़कियों को किराएदार बताती. किसीकिसी को वह अपनी रिश्तेदार तक बता देती थी. वहां जो ग्राहक आते, उन से कमरों का किराया भी वसूलती थी. इस तरह उस की आमदनी दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी. धीरेधीरे सायरा के संबंध दूसरे राज्यों में जिस्मफरोशी का धंधा करने वाले लोगों से भी हो गए. दिल्ली, मुंबई व अन्य शहरों की सी-ग्रेड की मौडल भी उस के यहां आने लगीं. कुछ दलाल उस के यहां नाबालिग लड़कियों को भी छोड़ जाते थे. उन्हें वह अपने घर के तहखाने में ठहराती थी.

तहखाने में भी एसी लगे थे. जब कोई लड़की देहधंधे के लिए तैयार नहीं होती तो उस को डरायाधमकाया जाता था. उसे भूखाप्यासा रखा जाता था. वहां रहने वाले मुस्टंडे उस के साथ बलात्कार करते. ऐसी प्रताड़नाओं को सह कर ज्यादातर नाबालिग लड़कियां सायरा की बात मानने को तैयार हो जाती थीं. तब वह उन्हें ग्राहकों के पास भेज देती थी. सायरा के ग्राहकों में पुलिस, बिल्डर, माफिया और छोटे नेता तक शामिल थे. ये उस के यहां आते थे तो कई अपने पास ही लड़कियां बुलवाते थे. अपने धंधे को चलाने के लिए उस ने लखनऊ में ही अलगअलग जगहों पर कुछ और कमरे भी किराए पर ले रखे थे.

वह दूसरों की लड़कियों को देहधंधे में लगाने का काम करती थी. लेकिन उस ने अपनी लड़कियों को इस से दूर रखा. अपनी बड़ी बेटी सना की वह शादी कर चुकी थी. अपनी छोटी बेटी सोनी और बेटे साजिद को वह अपने साथ रखती थी. उस के यहां बाहरी लोगों का ज्यादा आनाजाना हो गया तो मोहल्ले वाले भी उस की असलियत समझ गए. फिर तो उस के यहां आए दिन छापे पड़ने लगे. सायरा की जिंदगी ऊपर से भले ही सरल दिख रही थी, पर उस की परेशानियां भी कम नहीं थीं. मोहल्ले वालों की शिकायत पर उस के अड्डे पर कई बार पुलिस के छापे भी पड़े, जिस में सायरा और लालबहादुर को जेल भी जाना पड़ा. बाद में वे लोग जमानत पर जेल से बाहर आ गए.

उन के ऊपर कई मुकदमे चल रहे थे. लालबहादुर पर गुंडा एक्ट भी लगा हुआ था. उसे जिला बदर भी किया गया था. इस के बावजूद भी वह पुलिस से चोरीछिपे अपने घर पर रह रहा था. सायरा ग्राहकों की मांग पर अपने घर के कमरों को खास किस्म की थीम से भी सजाती थी. इस के लिए ग्राहक को अलग से पैसा देना पड़ता था. जैसे किसी ग्राहक को सुहागरात जैसा कमरा चाहिए तो वह फूलों से सजा कर कमरे को तैयार करा देती थी.

पहली जून, 2015 की रात करीब साढ़े 8 बजे सायरा कहीं बाहर से घर लौटी थी. लालबहादुर और बेटा साजिद कुछ सामान लेने के लिए बाजार गए थे. घर में अंदर घुसने के बाद सायरा ने अपनी साड़ी उतार कर मैक्सी पहन ली. उस की 16 साल की बेटी सोनी किचन में खाना बना रही थी. उसी समय दरवाजे पर दस्तक हुई. सायरा ने दरवाजा खोला तो सामने 2 लोग थे. सायरा उन में से एक को जानती थी. इसलिए उस ने उन्हें घर में बुला लिया. तभी उन में से एक युवक ने बड़ी फुरती से सायरा की कनपटी और गरदन पर गोली मार दी.

गोलियों की आवाज सुन कर बेटी सोनी किचन से बाहर आई तो बदमाशों को देख कर डर की वजह से वह बाथरूम में घुस गई. लेकिन वह बाथरूम का दरवाजा बंद कर पाती, उस से पहले ही बदमाश उस के पीछेपीछे पहुंच गए. दरवाजा खोल कर उन्होंने सोनी के माथे पर गोली मार कर हत्या कर दी. 2 लोगों की हत्या कर के बदमाश वहां से भाग गए. आधे घंटे बाद सायरा का बेटा साजिद घर लौटा तो घर का गेट खुला देख कर उसे कुछ अजीब लगा. वह अंदर दाखिल हुआ तो मां को खून से लथपथ देख कर उस की चीख निकल गई. फिर वह अपनी बहन सोनी की तलाश करने लगा.

बाथरूम में वह भी मृत अवस्था में मिली. दोनों लाशें देख कर वह जोरजोर से रोने लगा. उस के रोने की आवाज सुन कर आसपास के कुछ लोग वहां आ गए. उन के सहयोग से वह मां और बहन को मैडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर ले गया, जहां डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. अस्पताल की तरफ से सूचना थाना मडियांव पुलिस को दे दी गई. सूचना मिलने के बाद थानाप्रभारी संतोष सिंह भी अस्पताल पहुंच गए. पुलिस ने घटनास्थल का भी निरीक्षण किया.

मडियांव थाने से महज कुछ दूरी पर हुए दोहरे हत्याकांड से पुलिस भी हैरान रह गई. खबर मिलने पर सीओ राजेश यादव और डीआईजी आर.के. चतुर्वेदी मौके पर पहुंच गए. साजिद ने पुलिस को बताया कि उस की मां हर समय ज्वैलरी पहने रहती थीं. पर उन की लाश पर एक भी ज्वैलरी नहीं थी. हत्यारे उस की मां के सारे गहने भी उतार कर ले गए. घटनास्थल की काररवाई निपटाने के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर के आवश्यक काररवाई शुरू कर दी. इस केस को खोलने के लिए एक पुलिस टीम बनाई गई. टीम में इंसपेक्टर संतोष सिंह, एसएसआई अक्षय कुमार सिंह, हेडकांस्टेबल अमरेश त्रिपाठी, सिपाही अनिल सिंह, हमीदुल्लाह, राजीव पांडेय, लवकुश, रामनरेश कनौजिया आदि को शामिल किया गया.

पुलिस ने सायरा के धंधे और उस से जुड़े हर पहलू की छानबीन शुरू की. दिन पर दिन बीतते रहे लेकिन घटना से संबंधित कोई सुराग नहीं मिला. इस बीच लखनऊ में राजेश पांडेय को एसएसपी के रूप में तैनात किया गया. एसएसपी ने टीम के साथ मिल कर केस की समीक्षा की. सर्विलांस सेल को भी टीम के साथ लगाया गया. फिर सायरा के नजदीकियों से एकएक कर के पूछताछ की. इस का नतीजा यह निकला कि पुलिस टीम हत्यारे तक पहुंच गई. हत्यारा भी और कोई नहीं सायरा की खास सहेली फिरोजा का पति शिवओम निकला. उस ने इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी.

शिवओम मडियांव थाने के ही नौबस्ता का रहने वाला था. वह आपराधिक किस्म का था. सन 2003 में उस ने अपनी पहली पत्नी पंचमाला उर्फ सुमन की हत्या कर के उस की लाश भी ठिकाने लगा दी थी. पंचमाला के साथ शिवओम की शादी सन 1996 में हुई थी. उस के एक बेटी भी हुई. बेटी के पैदा होने के बाद शिवओम घर से दूर रहने लगा था. पंचमाला ने जब पति की छानबीन की तो पता चला कि उस ने धर्म बदल कर खदरा की रहने वाली फिरोजा से निकाह कर लिया है. तब 2 मई, 2003 को पंचमाला ने शिवओम के खिलाफ विकास नगर थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया. रिपोर्ट दर्ज होते ही शिवओम डर गया. पुलिस के डर से उस ने पत्नी के साथ समझौता कर लिया और उसे अपने घर ले आया.

9 जुलाई, 2003 को पंचमाला अचानक कहीं लापता हो गई. पुलिस ने जब शिवओम से पूछताछ की तो उस ने सारी सच्चाई बयां कर दी. उस ने बताया कि वह पंचमाला की हत्या कर के लाश को ठिकाने लगा चुका है. तब पुलिस ने पत्नी की हत्या के आरोप में उसे जेल भेज दिया. अदालत में केस चलने के बाद उसे 7 साल की सजा हुई, लेकिन बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह बाहर आ गया. शिवओम की दूसरी पत्नी फिरोजा की सायरा से अच्छी दोस्ती थी. फिरोजा की 2 बेटियां थीं. कई बार फिरोजा सायरा के पास जाती तो अपनी दोनों बेटियों को भी ले जाती थी.

शिवओम सायरा के धंधे से वाकिफ था, इसलिए फिरोजा का उस के यहां जाना उसे पसंद नहीं था. उसे शक था कि सायरा कहीं उस की पत्नी और दोनों बेटियों को भी देहधंधे में न लगा दे. उस ने पत्नी से कहा कि वह सायरा से नहीं मिला करे लेकिन सायरा फिरोजा की गहरी दोस्त थी, इसलिए उस ने पति की बात नहीं मानी. शिवओम ने कई बार सायरा को भी समझाया था कि वह उस की पत्नी और बेटियों से न मिला करे. लेकिन सायरा ने उस की बात को अनसुना कर दिया. तब उस ने सायरा को ही रास्ते से हटाने की योजना बना ली.

पहली जून, 2015 की देर शाम को योजना के अनुसार शिवओम अपने दोस्त आमिर के साथ सायरा के घर पहुंच गया. दरवाजा बंद था. दस्तक देने पर सायरा ने दरवाजा खोला तो शिवओम ने उसे 2 गोली मारी, जिस से उस का वहीं काम तमाम हो गया. तभी सायरा की बेटी सोनी वहां आ गई. चूंकि वह शिवओम को पहचानती थी, इसलिए न चाहते हुए मजबूरी में उस की हत्या करनी पड़ी. सायरा के शरीर पर सोने के काफी गहने थे. शिवओम ने उस के सारे गहने उतारे और भाग गया. गहने गायब होने से पुलिस को शुरू में यह शक हुआ था कि कहीं हत्या की वजह लूट तो नहीं थी. लेकिन पुलिस ने जब जांच की तो मामला दूसरा ही निकला.

एसएसपी राजेश पांडेय ने केस का खुलासा करने वाली टीम की सराहना की है. जिस देहधंधे ने सायरा को गरीबी से उठा कर ऐशोआराम की जिंदगी मुहैया कराई, वही धंधा उस की मौत का कारण बना. इस तरह की घटनाओं से यही सीख मिलती है कि बुरे काम का अंजाम बुरा ही होता है. बुराई का अंजाम उस व्यक्ति को ही नहीं, उस के पूरे परिवार को उठाना पड़ता है. Lucknow News

—कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

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