Mumbai News: राधे मां का मामला सामने आने के बाद यह बात साफ हो गई है कि साधुसंत हो या कोई तथाकथित अध्यात्म का ठेकेदार, सब के लिए मार्केटिंग जरूरी है. जितनी अच्छी मार्केटिंग होगी, उतना ही लाभ मिलेगा. अगर खूबसूरती पर आडंबर का आवरण चढ़ा दिया जाए तो कहना ही क्या…
वहां अनगिनत लोगों का जमावड़ा था. अधिकांश के माथे पर राधे मां के नाम की लाल पट्टी बंधी थी. भीड़ के बावजूद वहां पुलिस नहीं थी, अलबत्ता कैमरों के साथ बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी जरूर मौजूद थे. जिन में पलपल की खबर देने की होड़ सी लगी थी. जिस जगह यह जमावड़ा लगा था वह थी मुंबई में बालकेश्वर इलाके के एक बड़े मकान के सामने की खुली जगह. उस दिन तारीख थी इसी साल की 14 अगस्त. सुबह का वक्त. इस जगह को प्रैस वालों ने पिछले रोज तब से ही अपने कैमरों के फोकस पर ले रखा था, जब मुंबई की ढिंडोसी कोर्ट के माननीय सेशन जज वी.ए. राउत ने राधे मां के खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना के केस में उन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
यह आपराधिक प्रकरण मुंबई के थाना कांदिवली में 7 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था. इन में 6 लोगों से पुलिस ने पूछताछ पूरी कर ली थी, जिन्हें अदालत से अग्रिम जमानत भी मिल चुकी थी. सातवीं आरोपी राधे मां थीं, जिन से पूछताछ करने के लिए पुलिस ने सम्मन भेज कर उन्हें 14 अगस्त को दोपहर 12 बजे थाना कांदिवली बुलाया था. शुरू में राधे मां ने शायद इस सब को हल्केपन से लिया था. दरअसल, उन का मानना था कि कोई उन के खिलाफ कुछ भी कहता रहे, न तो पुलिस उन का कुछ बिगाड़ सकती है और न कोई कानून. संभवत: राधे मां को यह भी भरोसा था कि उन की कथित महानता के चलते पुलिस उन के खिलाफ कोई केस दर्ज करने की हिम्मत नहीं कर पाएगी.
उन के इस अति आत्मविश्वास का कारण था, उन के अनुयायियों में महानगर के तमाम बड़ेबड़े प्रभावशाली लोगों का होना, जिन में कई जानीमानी फिल्मी हस्तियां भी थीं. वैसे भी उन के भक्तों का दायरा इतना बड़ा था कि अपनी धर्मगुरु राधे मां के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने की स्थिति में वे जमीनआसमान एक कर सकते थे. यही वजह थी कि राधे मां के खिलाफ आवाजें उठते ही बड़ी संख्या में लोग उन के आश्रम पर एकत्रित होने लगे. कई लोग ऐसे भी थे जो फोन कर के उन्हें हर तरह से आश्वस्त कर रहे थे.
राधे मां का आश्रम बोरीवली स्थित एक विशाल इमारत के 5वें माले पर था. इस बिल्डिंग के छठें माले पर राधे मां ने अपना निजी आवास बना रखा था, जहां उन की अनुमति के बगैर कोई नहीं आजा सकता था. जिस इमारत में आश्रम और राधे मां का निवास है वह मुंबई (मलाड) की मशहूर एम.एम. मिठाईवाला चेन के मालिक मनमोहन गुप्ता की है. पूरा गुप्ता परिवार राधे मां का अनन्य भक्त है. परिवार के मुखिया मनमोहन गुप्ता राधे मां के आदेश के बिना न तो कोई व्यापारिक फैसला लेते हैं और न ही पारिवारिक.
मनमोहन गुप्ता का एक भांजा है नकुल. 30 अप्रैल, 2012 को उस की शादी मुंबई के ही कांदिवली इलाके की रहने वाली निक्की अग्रवाल से हुई थी. यह शादी राधे मां की अनुमति से ही संपन्न हुई थी. लेकिन चंद रोज बाद ही यह विवाह टूटने के कगार पर पहुंच गया था. इस की वजह बताई जा रही हैं राधे मां. कम से कम निक्की का तो यही कहना है. 16 जुलाई, 2015 को निक्की ने इस संबंध में थाना कांदिवली में भादंवि की धाराओं 498ए, 406 एवं 506 के तहत गुप्ता परिवार के 6 सदस्यों के अलावा राधे मां को भी नामजद करते हुए अपनी रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. यह प्राथमिकी पुलिस ने अदालती आदेश पर दर्ज की थी.
अपनी इस रिपोर्ट में निक्की ने जिस पर सब से ज्यादा आरोप लगाए थे, वह थीं राधे मां. निक्की के आरोप के अनुसार यह शादी न केवल राधे मां की अनुमति से हुई थी, बल्कि शादी से जुड़े अन्य मामलों में भी उन का पूरा दखल था. दानदहेज की बातें भी उन्होंने ही खुल कर की थीं. बकौल निक्की सब कुछ तय हो जाने के बाद राधे मां ने शादी में शिरकत करने के लिए वायुमार्ग से आने की बात कहते हुए एक विशेष हेलीकौप्टर, लग्जरी गाड़ी व 25 लाख रुपयों की मांग की थी, जो उस के घर वाले उन की इच्छा के मुताबिक पूरी नहीं कर पाए. निक्की के अनुसार दहेज में 25 लाख रुपए दे दिए जाने के बावजूद राधे मां शेष मांगें पूरी न होने की वजह से खफा हो गईं.
शादी हो जाने के बाद इसी की सजा देने के लिए उन्होंने उसे तब अपने यहां हाजिर होने का फरमान सुना दिया, जब वह अपने पति के साथ हनीमून पर विदेश गई हुई थी. अपनी गुरुमां के आदेश की अवहेलना करना उस के पति के बूते की बात नहीं थी. लिहाजा हनीमून बीच में छोड़ नकुल ने वापस लौट कर उसे राधे मां के सामने पेश कर दिया. निक्की द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार इस के बाद राधे मां ने उसे अपनी सेविका बना कर अपने निवास पर रख लिया, जहां उस से साफसफाई करने से ले कर कई ऐसे कार्य भी करवाए जाते थे जिन्हें करने के बारे में उस ने अपने घर में कभी सोचा तक नहीं था.
बकौल निक्की इन कामों में जरा सी भी कोताही होने पर उसे राधे मां के गुस्से का शिकार बनना पड़ता था. राधे मां उस के प्रति न केवल कठोर शब्दों का इस्तेमाल करती थीं बल्कि उस के जिस्म के हिस्सों पर अपने त्रिशूल की नोक चुभो कर उसे बुरी तरह प्रताडि़त भी करती थीं. बाद में वह उस की ससुराल वालों को बुलवा कर उन से उस की पिटाई भी करवाती थीं. उस वक्त राधे मां निक्की को संबोधित कर के कहती थीं, ‘‘आगे से कभी भी मुझे न कहने की जुर्रत मत करना.’’
निक्की ने पुलिस को बताया कि उस के परिवार वालों ने अपनी हैसियत से ज्यादा खर्चा कर के उस की शादी बड़ी धूमधाम से की थी, जिस में अच्छाखासा दहेज भी दिया गया था. लेकिन उस का जीवन नर्क बना दिए जाने के बावजूद उस की ससुराल वाले उस के मातापिता से 65 लाख रुपए नगद मांग कर रहे थे.
बकौल निक्की यह सब राधे मां के कहने पर किया जा रहा था. राधे मां ने उसे एक तरह से अपनी बंधक बना लिया था. तमाम तरह की प्रताड़नाओं की वजह से उस का जीवन नर्क बनता जा रहा था. न कोई उसे बचाने वाला था, न ही उस की बात सुनने वाला. उस के मातापिता व भाई रौनक अग्रवाल उस की दशा देख कर अलग खून के आंसू रो रहे थे. लेकिन राधे मां के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत उन में भी नहीं थी. निक्की की सोच के मुताबिक राधे मां ने शायद उस पर काला जादू कर के उसे अपने वश में कर रखा था. वह जितना भी इस जाल से निकलने का प्रयास करती, उतना ही और ज्यादा फंसती जाती थी. आखिर जैसेतैसे एक दिन वह राधे मां के जाल से निकल कर अपने घर पहुंचने में सफल हो गई.
इस के बाद उस ने वकील सन्नी वास्कर से मिल कर अपनी तहरीर तैयार की और इसे ले कर पुलिस के पास पहुंची. लेकिन जब पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की तो उस ने अदालत में अपनी याचिका लगाई. आखिर अदालत ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर के काररवाई करने का निर्देश दिया. निक्की की शिकायत पर पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर के 6 लोगों के बयान लिए और राधे मां को थाने में पेश होने का लिखित आदेश दिया.
राधे मां के पास जब यह आदेश पहुंचा तब वह बोरीवली स्थित अपने आवास पर थीं, जहां से वह अचानक गायब हो गईं. पुलिस को संदेह हुआ कि कहीं वह विदेश भागने की कोशिश न करें, लिहाजा इस संबंध में रेड कौर्नर नोटिस जारी कर के उन की फोटो के साथ सभी हवाईअड्डों को सूचित कर दिया गया. इधर यह सब चल रहा था, उधर मुंबई की एक वकील फाल्गुनी ब्रह्मभट्ट ने राधे मां पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाते हुए उन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी. इस बारे में फाल्गुनी का कहना था कि राधे मां की कथित महिमा के बारे में सुन कर वह खुद उन के दरबार में गई थीं. वहां का माहौल एकदम अभद्र व अश्लील था, जिस से आहत हो कर उन्होंने राधे मां के खिलाफ बोरीवली थाने में शिकायत दर्ज करवाई.
बकौल फाल्गुनी ब्रह्मभट्ट राधे मां अपने यहां लोगों को देर रात की पार्टियों में बुलाती हैं, जिस में वह बौलीवुड के गानों पर लोगों के साथ नाचती हैं. इतना ही नहीं, बल्कि वह अपने भक्तों खासकर पुरुषों को उन्हें गोद में उठा कर झूला झुलाने और चूमने को भी कहती हैं. मुंबई में जगहजगह राधे मां के होर्डिंग्स लगे हुए थे. उन्हें दुर्गा मां का अवतार कह कर प्रचारित किया गया था. वह रहती भी अपनी अलग वेशभूषा में थीं. निहायत कीमती लाल सुर्ख जोड़े के साथ महंगे आभूषणों से लदीफदी राधे मां के चेहरे पर फिल्मी तारिकाओं जैसी चमक और सौंदर्य झलकता था. वह गहरे लाल रंग की लिपस्टिक का इस्तेमाल करती थीं. उन के माथे पर गहरे लाल रंग की लंबी रेखा खिंची रहती थी.
केशविन्यास भी फिल्मी तारिकाओं से कम नहीं था, जिस में दाईं तरफ बालों में गुलाब का फूल टंका रहता था. इस कथित दिव्य रूप के साथ राधे मां के दाएं हाथ में गोटे वाली लाल रंग की चुनरी में लिपटा छोटा सा त्रिशूल होता था और बायां हाथ आशीर्वाद देने की मुद्रा में उठा रहता था. संभवत: मार्केटिंग को ध्यान में रखते हुए राधे मां का यही स्वरूप जनमानस को परोसा गया था. अपनी इसी छवि के साथ राधे मां आम लोगों के जेहन में समाई हुई थीं. दरअसल अगर कोई व्यक्ति उन का भक्त नहीं भी था तो भी वह उन के इस रूप को राधे मां के रूप में पहचानता था. इस कथित दिव्य चेहरे के पीछे कोई दूसरा चेहरा भी छिपा हो सकता था, इस बारे में अभी तक शायद किसी ने सोचने की जहमत नहीं उठाई थी.
लेकिन खुद को देवी का अवतार बताने वाली राधे मां के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने का जरा सा धुआं क्या उठा कि छोटे रूप में ही सही आग की चिंगारियां नजर आने लगीं. इन चिंगारियों की चमक तब और बढ़ गई जब सोशल साइट्स पर राधे मां का एक वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो में वह अपने चिरपरिचित परिधान की जगह थोड़े मौडर्न लिबास में फिल्मी गाने की धुन पर हिरणी वाले अंदाज में ठुमके लगाती हुई नजर आईं.
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई, किसी ने उन के कुछ ऐसे अभद्र चित्र भी नेट पर डाल दिए, जिन में वह निहायत आधुनिक लिबास पहने नजर आ रही थीं. ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने आधेअधूरे मौडर्न कपड़ों में मौडलिंग का सेशन करवाया हो. अभी तक यह रहस्य ही था कि आखिर राधे मां के इस तरह के फोटो जुटा कर किस ने सार्वजनिक कर दिए. इसी बीच टीवी कलाकार राहुल महाजन ने एक टीवी चैनल पर आ कर बताया कि ये फोटो उन्होंने अपने एक मित्र से हासिल कर के सार्वजनिक किए थे ताकि ऐसे ढोंगी साधुसंतों की सच्चाई लोगों के सामने आ सके.
इस के साथ ही राधे मां का हर क्रियाकलाप ब्रेकिंग न्यूज बनने लगा. सभी न्यूज चैनलों पर राधे मां पर होने वाली परिचर्चा दिखाई जाने लगी. कोई राधे मां के हक में बोल रहा था तो कोई विरोध में. अखबारों के पन्ने भी इस तरह के समाचारों से रंगने लगे थे. घरघर में राधे मां की चर्चा हो रही थी. दूसरी ओर अपने खिलाफ मामला दर्ज होने और पुलिस द्वारा थाने में पेश होने का सम्मन मिलने पर राधे मां अपने बोरीवली आश्रम कम निवास से गायब हो गईं. इस से पुलिस को संदेह हुआ कि राधे मां विदेश भागने की कोशिश कर सकती हैं. इसी के मद्देनजर उन के खिलाफ रेड कौर्नर नोटिस जारी कर दिया गया.
पुलिस को तो राधे मां की तलाश थी ही, मीडिया भी उन की खोजखबर लेने के लिए दिनरात शिद्दत से जुटा था. आखिर 8 अगस्त की भोर में कुछ मीडियाकर्मियों को पता चला कि राधे मां अपने खास भक्तों के साथ महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित एक बड़े होटल में ठहरी हैं. उन्हें यह भी पता चला कि वह होटल से सुबहसुबह नांदेड़ के लिए रवाना हो जाएंगी. इस का नतीजा यह हुआ कि जब राधे मां नांदेड़ जाने के लिए तैयार हो कर होटल से बाहर निकलीं तो पत्रकारों ने उन्हें घेर कर सवाल दागने शुरू कर दिए, जिस पर एक बार तो वह बेहोश हो कर जमीन पर गिर गईं. इस पर उन के साथी पत्रकारों को लताड़ते हुए उन्हें गोद में उठा कर उन की कार तक ले गए. इस बीच वह होश में आ गई थीं.
राधे मां के पास काले रंग की चमचमाती विदेशी जगुआर कार थी. भारतीय मुद्रा में इस कार की कीमत करीब एक करोड़ रुपए है. इस कार में ड्राइवर के साथ वाली सीट हटा कर लाल रंग का सिंहासन लगवा दिया गया था. साथ ही इस के नीचे आने वाले कार के पहिए पर भी लाल रंग पोत दिया गया था. अन्य तीनों पहिए जिस तरह के थे, उन्हें वैसा ही रहने दिया गया था. पत्रकार लगातार प्रश्न पूछते हुए राधे मां के पीछे आ गए थे. राधे मां के साथियों ने जब उन्हें ले जा कर गाड़ी में बने सिंहासन पर बैठा दिया तो वह एक बार तो अपना चेहरा हाथों में छिपा कर रोने लगीं. फिर अचानक खिड़की का शीशा नीचे करते हुए पत्रकारों से मुखातिब हो कर बोलीं, ‘‘मैं मीडिया, पुलिस और कानून का सम्मान करती हूं. मेरा न्याय मेरा भगवान करेगा.’’
इस के बाद वह अपने समर्थकों समेत नांदेड़ के लिए रवाना हो गईं. मीडिया भी उन के पीछे लगा रहा. नांदेड़ के एक बड़े गुरुद्वारे में जा कर राधे मां ने मत्था टेका और अरदास की. 9 तारीख को वह मुंबई लौट आईं. इसी दिन किसी ने उन की वेबसाइट को हैक कर लिया. मातामणि श्री राधे गुरु मां चैरिटेबल ट्रस्ट के कार्यकारी ट्रस्टी संजीव गुप्ता ने इस बारे में पत्रकारों को बताया कि किसी शरारती तत्व ने वेबसाइट हैक कर के उस पर लिख दिया था— ‘प्लीज, ढोंग करने वाले किसी तथाकथित संत को मत पूजो. आप लोग मेहनत कीजिए. राधे मां को पूजने से कुछ नहीं होगा.’
बहरहाल जल्दी ही वेबसाइट को ठीक कर दिया गया. बहरहाल, मुंबई लौट कर राधे मां एक मजार पर चादर चढ़ाने भी गईं. इस के साथ ही उन्होंने कांदिवली थाने में एक लिखित प्रार्थनापत्र दे कर इस बात की गुजारिश की कि 14 अगस्त की बजाय थाने में उन की पेशी 26 अगस्त तक के लिए मुल्तवी कर दी जाए. दरअसल राधे मां के एक बेटे को हीरो के रूप में ले कर एक फिल्म निर्माता फिल्म बना रहे थे ‘इश्क डौट कौम’. इस फिल्म की शूटिंग बैंकाक में हो रही थी, जिसे देखने के लिए राधे मां को वहां जाना था. लेकिन पुलिस ने उन का यह अनुरोध अस्वीकार करते हुए अपना सख्त आदेश भिजवा दिया कि वह किसी भी सूरत में 14 अगस्त, 2015 को दिन के ठीक 12 बजे थाने में हाजिर हो जाएं, यही उन के हित में होगा.
नांदेड़ से मुंबई लौटने पर राधे मां बोरीवली न जा कर बालकेश्वर इलाके में स्थित अपने दूसरे आवास पर जा कर ठहर गई थीं. यहीं से उन्हें थाना कांदिवली पहुंचना था. इस जगह से थाने की दूरी करीब 30 किलोमीटर थी. मुंबई के ट्रैफिक को देखते हुए डेढ़-2 घंटे का वक्त लग सकता था. लिहाजा तय हुआ कि वहां से 10 बजे निकला जाए. अपने चिरपरिचित अंदाज में राधे मां सही वक्त पर अपने इस निवास से निकल भी आईं. लेकिन बाहर आते ही उन्हें पत्रकारों ने घेर लिया, जिस पर राधे मां ने इतना ही कहा, ‘‘देखिए, मैं पूरी तरह प्योर और पायस हूं. मैं ने आज तक कभी किसी का दिल नहीं दुखाया. मैं पूरी तरह प्योर हूं.’’
फिर उन्होंने पहले तो आम प्रचलित कवितानुमा बात कही, ‘‘सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से, खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से.’’
इस के बाद राधे मां ने कबीर के इस दोहे का उल्लेख किया, ‘‘साच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप. जाके हृदय साच है ताके हृदय आप.’’
इस के बाद राधे मां ने खुद को बेकसूर कहते हुए फरमाया कि वह पैसे वाली देवी हैं, उन के श्रद्धालु उन्हें इतना चढ़ावा चढ़ाते हैं कि उन्हें पैसों की कोई कमी नहीं है. ऐसे में वह निक्की के परिवार वालों से पैसा क्यों मांगेगी? जबकि वह तो हमेशा दूसरों की मदद करती आई हैं. इसी मौके पर राधे मां ने इलैक्ट्रौनिक मीडिया के एक फोटोग्राफर से कहा, ‘‘बेटा, इस वक्त भी मेरी गाड़ी में 20 लाख रुपया पड़ा है, जिसे मैं जिसे चाहूं दे सकती हूं. तुम्हारा कैमरा अगर टूट जाए तो चिंता नहीं करना. मैं ले कर दूंगी तुम्हें नया कैमरा.’’
खैर, अपने साथियों, छोटी मां व टल्ली बाबा समेत वह अपने 60 समर्थकों सहित दिन के ठीक पौने 11 बजे कांदिवली थाने के लिए रवाना हो गईं. इस बार वह काले रंग की अपनी जगुआर कार पर न जा कर सफेद रंग की फार्चुनर गाड़ी से निकली थीं. बहरहाल, राधे मां ने थाने में क्या कहा, यह जानने से पहले उन का इतिहास खंगालने की कोशिश करते हैं. राधे मां का वास्तविक नाम है सुखविंदर कौर. कुछ लोग उन्हें बब्बो के नाम से भी जानते हैं. उन का जन्म 4 अप्रैल, 1965 को जिला गुरदासपुर (पंजाब) के गांव दोरांगला निवासी अजीत सिंह के यहां हुआ था.
उन की 3 बहनें और 2 भाई थे. अजीत सिंह पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में नौकरी करते थे. अपनी पुत्रवधू की हत्या में सजा भुगतने के बाद 2014 में उन की मृत्यु हो गई थी. सुखविंदर ने गांव के सरकारी स्कूल से 10वीं पास की थी. जब वह कुल 17 साल की थी, तभी उस की शादी कर दी गई. उस की ससुराल जिला होशियारपुर के कस्बा मुकेरियां में थी. उस का पति मोहन सिंह अपने पिता करम सिंह हलवाई के साथ दुकान पर काम करता था.
सुखविंदर को धर्मकर्म में बचपन से ही रुचि थी. शादी के बाद भी उस का धर्मकर्म के प्रति लगाव बना रहा. इत्तफाक से उस की कही कई बातें सच हो गई थीं. इसी को ध्यान में रख कर उस ने अपने पति के बारे में भी भविष्यवाणी की कि विदेश में जा कर काम करने से वह अच्छा पैसा कमा सकते हैं. मोहन सिंह पत्नी की बात मानते हुए दोहा कतर चले गए. तब तक सुखविंदर 3 बच्चों की मां बन चुकी थी.
पति के विदेश जाने के बाद घरगृहस्थी चलाने के लिए सुखविंदर ने घर पर ही कपड़े सिलने का काम शुरू कर दिया. लेकिन उस ने अपनी भक्ति में कमी नहीं आने दी. स्थानीय काली मंदिर में जा कर वह घंटों काली मां की पूजाअर्चना किया करती थी. धीरेधीरे वह अध्यात्म की दिशा में मुड़ कर मुकेरियां स्थित डेरा परमहंस बाबा के महंत रामादीन दास की शिष्या बन गई. महंत ने उसे आध्यात्मिक दीक्षा दी. साथ ही नया नाम दिया—राधे मां.
इस के बाद सुखविंदर राधे मां के रूप में सत्संग करने लगीं. वैसे भी लोग अब उन्हें राधे मां के नाम से ही जाननेपुकारने लगे थे. खानपुर में मां भगवती मंदिर राधे मां का आध्यात्मिक केंद्र बन गया. आज भी वहां के लोगों का कहना है कि इस तरह के सत्संग के दौरान वह अपने भक्तों को वरदान देती थीं, जिस से उन के संकट दूर हो जाते थे. उन दिनों खुद को देवी का अवतार कहते हुए राधे मां जागरण भी किया करती थीं. सन 2002 में राधे मां ने फगवाड़ा में ऐसे ही एक भव्य जागरण का आयोजन करवाया, जिस में उन्होंने खुद को मां दुर्गा के अवतार के तौर पर प्रचारित करने का प्रयास किया. फगवाड़ा में रहने वाले विश्व हिंदू परिषद के नेता सुरेंद्र मित्तल ने इस बात का विरोध किया.
30 मार्च 2002 को हुए जागरण के बाद राधे मां एक कारोबारी अरण नंदा के दीवान हाउस में ठहरी हुई थीं. सुरेंद्र मित्तल ने अपने साथियों के साथ वहां पहुंच कर राधे मां का विरोध किया. यह विरोध प्रदर्शन 3 घंटों तक चला. मौके पर स्थानीय पुलिस भी पहुंच गई थी. आखिर राधे मां द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगे जाने के बाद यह प्रदर्शन खत्म हो पाया. जो भी था, एक जगह राधे मां का विरोध हुआ तो 10 जगह जयजयकार भी होती रही. राधे मां प्रवचन सुनातीं व जागरण करतीं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देतीं. भक्त भी कहते रहे कि राधे मां के आशीर्वाद से उन के कष्ट दूर हो गए हैं.
कहते हैं कि ऐसा ही एक आशीर्वाद राधे मां ने मुंबई के एक भक्त मनमोहन गुप्ता को भी दिया था. काम हो जाने पर वह राधे मां से इस कदर प्रभावित हुए कि उन्हें अपने साथ मुंबई ले गए. इस तरह मुंबई का जानामाना गुप्ता परिवार राधे मां का अनन्य भक्त बन गया. मनमोहन गुप्ता का लड़का संजय गुप्ता अपनी ग्लोबल एडवरटाइजिंग एजेंसी चलाता था. यह एजेंसी बड़ेबड़े होर्डिंग्स लगाने का काम करती थी. संजय गुप्ता ने अपने इस व्यवसाय के माध्यम से राधे मां को उच्च श्रेणी की देवी बना कर लोगों के सामने पेश किया और अपने बोरीवली वाले विशाल बंगले की 2 मंजिलें उन्हें दे दीं. राधे मां को विदेशी जगुआर गाड़ी भी संजय गुप्ता ने ही भेंट की थी.
फलस्वरूप गुप्ता परिवार की बदौलत कुछ ही सालों में राधे मां की प्रसिद्धि इस तरह आसमान छूने लगी कि 2 अगस्त, 2012 को जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने गुरु पूर्णिमा पर अनुष्ठानों के साथ राधे मां को महामंडलेश्वर की पदवी से नवाज दिया. इस अलंकरण समारोह को पूरी तरह गुप्त रखा गया था. अखाड़े के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार महामंडलेश्वर पदवी मिलने के अगले ही दिन राधे मां मुंबई चली गई थीं. इस के बाद उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी दिए जाने पर कई सवाल उठने लगे.
जांच के लिए राधे मां के आध्यात्मिक गुरु स्वामी पंचनंद के नेतृत्व में 11 सदस्यीय जांच समिति बनी. समिति ने राधे मां के जीवन से जुड़े विभिन्न स्थानों पर जा कर जांच की. इस के बाद उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी से निलंबित कर दिया गया था. इस से पहले द्वारिकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राधे मां को नासिक कुंभ मेले में औपचारिक शाही स्नान में हिस्सा लेने से रोक दिया था. अखाड़ों में संतों के बीच राधे मां को ले कर भले ही कुछ भी चलता रहा हो, मुंबई में राधे मां का दबदबा तब तक पूरी तरह कायम रहा, जब तक निक्की ने उन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई थी. निक्की की उसी रिपोर्ट ने उन्हें थाने पहुंचने को मजबूर कर दिया था.
बहरहाल, 14 अगस्त 2015 को दिन के ठीक पौने 11 बजे बालकेश्वर से चला राधे मां का काफिला 12 बज कर 20 मिनट पर थाना कांदिवली जा पहुंचा. मामले की नजाकत को देखते हुए थाने में भारी पुलिस बल का प्रबंध किया गया था. राधे मां के अलावा किसी को भी थाने के भीतर नहीं जाने दिया गया. थाने के विशेष रूम में 3 महिला इंसपेक्टरों और एक पुरुष इंसपेक्टर ने राधे मां से 75 सवालों की सूची के साथ 4 घंटे 42 मिनट तक पूछताछ की. इस पूछताछ के दौरान 25 मिनट तक राधे मां रोईं और एक बार बेहोश भी हुईं. तब उन्हें वातानुकूलित कमरे में ले जा कर उन की सहायक छोटी मां को भीतर बुलाया गया जो लगातार उन्हें टेट्रापैक जूस व काजू देती रहीं.
इस बीच राधे मां के वकील अशोक गुप्ते व आबाद कोंडा उन्हें हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत दिलवाने का प्रयास करते रहे जो आखिर स्वीकार कर ली गई. यह जमानत 2 हफ्तों के लिए स्वीकार की गई. साथ ही राधे मां को इस बात का निर्देश भी दिया गया कि उन्हें तय समय पर मामले की जांच के सिलसिले में कांदिवली पुलिस थाने जाना होगा. यह सिलसिला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि इस दौरान अन्य कई जगहों पर राधे मां के खिलाफ शिकायतें दर्ज हो गईं. जगहजगह आक्रोश भी प्रकट हो रहा था.
इस सिलसिले में मुकेरियां में हिंदू संगठनों ने न केवल उन के विरोध में प्रदर्शन किया, बल्कि उन का पुतला जला कर उन के चित्रों वाले होर्डिंग्स पर कालिख पोत दी गई. तमाम संतों के बीच वह बहस का मुद्दा तो बनी ही रहीं. यहां तक कि राधे मां का मामला लोकसभा में भी गूंजा. सदन में सरकार से फरजी साधूसाध्वियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की जाती रही. मलोट कस्बे के वकील चूनीलाल भारती ने स्थानीय सिटी पुलिस में राधे मां के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज करवाते हुए आरोप लगाया कि राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर खुद को दुर्गा मां का अवतार बता कर चौकी लगाती हैं. इस से जहां वह अंधविश्वास फैला रही हैं, वहीं वह धार्मिक भावनाओं से भी खिलवाड़ कर रही हैं. बकौल वकील भारती राधे मां ने यह पाखंड रच कर 1000 करोड़ की संपत्ति एकत्र की है.
राधे मां पर एक आरोप उन के भाई के ससुराल वालों ने भी लगाया है. आरोप के अनुसार पंजाब के गांव नानोमंगल निवासी बलविंदर कौर की शादी राधे मां के भाई सुखबीर सिंह हुई थी. बलविंदर आंगनवाड़ी में सरकारी नौकरी करती थी. शादी के 6 साल बाद तक उसे बच्चा नहीं हुआ तो 6 जून, 2002 को गला दबा कर उस की हत्या कर दी गई. इस आरोप में राधे मां के पिता अजीत सिंह और भाइयों सुखबीर सिंह व निर्मल सिंह के खिलाफ कत्ल का मुकदमा दर्ज हुआ. 11 अक्तूबर 2004 को इन तीनों को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी. बलविंदर के भाई जगतार सिंह ने आरोप लगाया है कि उस की बहन की हत्या के षडयंत्र में राधे मां भी शामिल थी, लेकिन उस के खिलाफ कुछ नहीं किया गया. अब इस की विस्तृत जांच की जाए.
हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा-चंबा सीमा पर स्थित हटली राम मंदिर के महंत श्यामसुंदर ने बताया कि वह और राधे मां गुरु रामादीन दास परमहंस के शिष्य थे. गुरुजी ने ही सुखविंदर कौर को राधे मां बनाया था. महंत श्यामसुंदर का आरोप है कि गुरुजी की संपत्ति हथियाने के मकसद से राधे मां एक बार उन्हें अपने साथ विदेश ले गईं, जहां से वापस आने पर गुरुजी इस कदर बीमार हुए कि आखिर मौत की नींद ही सो गए. महंत श्यामसुंदर को आशंका है कि अब राधे मां से उन्हें भी जान का खतरा है.
14 अगस्त को फगवाड़ा निवासी सुरेंद्र मित्तल ने एसएसपी कपूरथला को लिखित शिकायत दे कर राधे मां, उस की बहन राजेंद्र कौर उर्फ रज्जी मौसी, रितु सरीन उर्फ छोटी मां, उस की पुत्रवधू मेघा सिंह व संजीव गुप्ता पर धमकाने, अश्लीलता फैलाने व आडंबर रच कर हिंदू धर्म को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाए हैं. लुधियाना में भी इस तरह की एक शिकायत अदालत में दर्ज हुई है. फिल्म अभिनेत्री डौली बिंद्रा पहले राधे मां की मुरीद थीं, अब उन्होंने भी इसी तरह की शिकायत मुंबई पुलिस में की है.
फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर खुल कर राधे मां के खिलाफ बोले, तो दिग्गज फिल्म निर्माता सुभाष घई ने उन के हक की बात की. गायक सोनू निगम तो पूरी तरह राधे मां के समर्थन में उतर पड़े. 17 अगस्त 2015 को उन्होंने राधे मां के समर्थन में एक के बाद एक ट्वीट कर के उन का समर्थन करते हुए उन की तुलना काली मां से कर डाली. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘काली मां को तो राधे मां से भी कम कपड़ों में दर्शाया गया है, यह बहुत रोचक है कि यह देश कपड़ों की वजह से एक महिला पर केस चलाना चाहता है.’ सोनू का दूसरा ट्वीट था, ‘पुरुष साधु नग्न घूम सकते हैं, अजीब तरह के डांस कर सकते हैं, लेकिन रेप का आरोप लगने के बाद ही उन्हें जेल में डाला जा सकता है. क्या यह लैंगिक समानता है?’
सोनू ने तीसरे ट्वीट में लिखा, ‘केस चलाना चाहते हैं तो अनुयायियों पर केस चलाइए. अपने आप पर केस चलाइए. महिलाओं और पुरुषों को धर्मगुरु बनाने के लिए अलगअलग नियम. यह सही नहीं है.’ इसे ले कर सोनू निगम के खिलाफ केस भी दर्ज हुआ है क्योंकि उन्होंने राधे मां की तुलना काली मां से कर दी थी. बहरहाल, इसे रोचक ही कहा जाएगा कि इस वक्त राधे मां की सर्वाधिक चर्चा फिल्मनगरी में है. कोई उन का विरोध कर रहा है तो कोई उन के हक में आवाज बुलंद कर रहा है. राधे मां के एक पूर्व अनुयायी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर जो बताया वह भी कम रोचक नहीं है, ‘सब माया का खेल था, जबरदस्त मार्केटिंग थी. प्रचार से लोग, बीड़ी कच्छा बेच कर क्या से क्या बन गए, यहां तो फिर भी…’
इसी सब के चलते 20 अगस्त को राधे को पुन: थाने बुलाया गया. इस बार उन के सामने 23 सवालों की सूची रखी गई. इस सूची में एक नया नाम ‘डैडी’ भी शामिल था. पूछताछ में राधे मां ने बताया कि डैडी उन के पति को कहा जाता है जबकि अपने और डैडी के पासपोर्ट के बारे में राधे मां ने कोई जानकारी नहीं दी. जो भी हो, ज्यादा रोचक तो इस समाचार को माना जाना चाहिए कि ‘ग्लैमरस राधे मां’ नाम से इस प्रकरण पर फिल्म की घोषणा भी हो गई है. Mumbai News






