Social Stories Hindi: षडयंत्रकारियों ने सोचा था कि सामूहिक दुष्कर्म जैसे मामले में पुलिस बिना जांच किए ही अभियुक्तों को पकड़ कर अंदर कर देगी. लेकिन पुलिस ने जांच की तो सामूहिक दुष्कर्म के इस मामले में जो झूठी कहानी सामने आई, जान कर दंग रह गई.
सुबह का आगाज होते ही लेगों की दिनचर्या शुरू हो गई थी. रात में शांत रहने वाली सड़कों पर लोगों और वाहनों की रफ्तार बढ़ने लगी थी. इसी के साथ एक घटना ने माहौल में अचानक गरमाहट पैदा कर दी थी. घटना भी ऐसी कि पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था. जिले के एसएसपी से ले कर थानाप्रभारी तक सड़कों पर आ गए थे. दरअसल, 26 अगस्त, 2015 की सुबह उत्तर प्रदेश के संवेदनशील शहरों की सूची में शुमार मेरठ में खबर फैली कि एक हिंदू युवती के साथ मुसलिम युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया है, जिसे बेहोशी की हालत में प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल में भरती कराया गया है.
शहर चूंकि संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि वहां 2 समुदायों के बीच मामूली मारपीट से ले कर हत्या तक की वारदातों में सांप्रदायिक माहौल गरमा जाता है या यूं कहें कि इंसानियत और अमन के दुश्मन ऐसे मौकों का बेसब्री से इंतजार कर के तूल देने का काम किया करते हैं. इस मामले में भी अफवाहें जंगल की आग की तरह इतनी तेजी से फैलीं कि थोड़ी ही देर में अस्पताल में भीड़ लग गई. उस भीड़ में राजनैतिक दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं से ले कर सामाजिक संगठनों के लोग भी थे. उन में घटना को ले कर काफी गुस्सा था. वे आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त काररवाई की मांग कर रहे थे.
मामला मेरठ के थाना देहली गेट का था. सूचना मिलने पर जिला अस्पताल पहुंचे थानाप्रभारी इंसपेक्टर दीपक त्यागी ने मामले की गंभीरता से पुलिस के आला अधिकारियों को अवगत करा दिया था. इसी सूचना पर एसएसपी डी.सी. दुबे, एसपी (सिटी) ओ.पी. सिंह और सीओ विनीत भटनागर भी अस्पताल पहुंच गए थे. भीड़ ने उन्हें बिगड़ती कानूनव्यवस्था को मुद्दा बना कर घेर लिया. घटना से माहौल तनावपूर्ण हो गया था. इस हालात में किसी भी अनहोनी से बचने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स और पीएसी बुला ली गई थी. पुलिस अधिकारियों ने सख्त काररवाई का वादा कर के किसी तरह हंगामा कर रहे लोगों को शांत किया.
मामला दुष्कर्म और 2 समुदायों से जुड़ा था, इसलिए माहौल गंभीर हो गया था. मेरठ जोन के आईजी आलोक शर्मा और डीआईजी रमित शर्मा ने स्थिति की जानकारी ले कर अविलंब सख्त काररवाई करने के निर्देश दिए. पुलिस जानती थी कि अफवाहें चिंगारी बन कर आग लगाने का काम करती हैं और उन्हें रोकना कठिन होता है. वे काफी तेजी से फैलती हैं, जिन की वजह से काफी नुकसान हो जाता है. इसलिए पुलिस ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया. सुरक्षा के मद्देनजर महिला पुलिसकर्मियों को भी अस्पताल बुलवा लिया गया था.
सामूहिक दुष्कर्म का शिकार युवती अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लेटी अपनी बेबसी पर सिसक रही थी. बदनामी से खुद को बचाने के लिए उस ने आंखों को छोड़ कर अपने चेहरे को नीले रंग के दुपट्टे से ढका हुआ था. उस की आंखों में दहशत, बेचारगी और लाचारी के भाव साफ झलक रहे थे. उस के गले पर एक ऐसा लाल निशान भी उभरा था, जिसे देख कर लग रहा था कि यह दबाए जाने का निशान है. शायद उस का गला भी दबाया गया था. डाक्टर उसे ड्रिप लगा चुके थे. पुलिस अधिकारी उस के नजदीक पहुंचे तो वह हाथ जोड़ कर रोते हुए गिड़गिड़ाई, ‘‘सर, मुझे इंसाफ चाहिए. उन 3 हैवानों ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा, शुक्र था कि उन्होंने मुझे जिंदा छोड़ दिया, उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए.’’
युवती के एकएक शब्द में दर्द झलक रहा था. सारे जहां की उदासी जैसे उस की बातों में सिमट आई थी. अधिकारियों ने उसे सांतवना दी. ‘‘निश्चिंत रहो, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.’’
वहां मौजूद हर आदमी की सहानुभूति युवती के साथ थी. उसे प्राथमिक मैडिकल ट्रीटमेंट देने वाले डा. यशवीर सिंह ने पुलिस को बताया था कि युवती को वहां अर्धबेहोशी हालत में ला कर भरती कराया गया था. पुलिस ने युवती से पूछताछ की तो उस ने अपने बयान में जो बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था. युवती के बताए अनुसार, उस का नाम पूजा था. वह दिल्ली के भजनपुरा की रहने वाली थी. नौकरी की तलाश में वह कुछ दिनों पहले मेरठ की कांशीराम आवासीय योजना के मकान नंबर केजी-25 में रहने वाले अपने चचेरे भाई चंदर के यहां आ गई थी.
करीब दस दिनों पहले उस के मोबाइल पर एक नंबर से मिसकाल आई. उस ने पलट कर उस नंबर पर फोन किया तो फोन करने वाले ने अपना नाम सलमान बताया. पूजा के लिए वह आदमी अंजान था, लेकिन बातों का ऐसा सिलसिला जुड़ा कि उस दिन के बाद दोनों अकसर फोन पर बातें करने लगे. उसी बातचीत में एक दिन पूजा ने कहा, ‘‘तुम्हें पता है, मैं दिल्ली से मेरठ क्यों आ गई?’’
‘‘तुम बताओगी, तब तो पता चलेगा.’’
‘‘मुझे नौकरी की जरूरत है. महंगाई के इस दौर में खर्चे पूरे करना मुश्किल हो गया है.’’
उस की इस बात पर सलमान ने हंसते हुए कहा, ‘‘बस, इतनी सी बात है.’’
‘‘मैं नौकरी के लिए कितना परेशान हूं और तुम्हें यह मामूली बात लग रही है?’’
‘‘हां, मेरे लिए यह मामूली ही बात है.’’ सलमान ने लापरवाही से कहा तो उस की बात पूजा की समझ में नहीं आई. उस ने पूछा, ‘‘तुम्हारे लिए यह मामूली बात क्यों है?’’
‘‘क्योंकि मैं तुम्हारी नौकरी लगवा सकता हूं.’’
यह सुन कर पूजा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. सलमान उसे फरिश्ते जैसा लगा. उस ने पूछा, ‘‘क्या तुम सच कह रहे हो?’’
‘‘हां बिलकुल सच, क्योंकि यह सलमान कभी झूठ नहीं बोलता. अब तुम से दोस्ती हो ही गई है तो फर्ज तो निभाना ही पड़ेगा, तुम बेफिक्र रहो, मैं तुम्हारी नौकरी का जल्द ही कोई बंदोबस्त करता हूं. कुछ ऐसा इंतजाम करूंगा कि तनख्वाह ठीकठाक मिलेगी.’’
पूजा सलमान के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती थी. बस इतना पता था कि वह मेरठ में ही कहीं रहता है. उस दिन पूजा को लगा कि सलमान से दोस्ती कर के उस ने कोई गलती नहीं की है. बातों से वह उसे ठीकठाक इंसान लगा था. इसी तरह दोनों के बीच बातों का सिलसिला चलता रहा. मुलाकात की बेसब्री न सलमान ने दिखाई, न ही पूजा ने. 25 अगस्त की सुबह सलमान का फोन आया, ‘‘मुबारक हो पूजा, मैं ने तुम्हारी नौकरी का बंदोबस्त कर दिया है.’’
उस की इस बात ने पूजा के कान में मिठास घोल दी. उस ने झट पूछा, ‘‘कहां?’’
‘‘एक अखबार के औफिस में तुम्हें नौकरी दिला दूंगा.’’
‘‘तुम सच कह रहे हो?’’
सलमान ने शिकायती अंदाज में कहा, ‘‘क्या तुम्हें मुझ पर इतना भी भरोसा नहीं है?’’
‘‘ऐसी बात नहीं है सलमान, भरोसा है तभी तो तुम से बातें करती हूं. तुम्हें अपना सब से अच्छा दोस्त भी मानती हूं.’’
‘‘इस के लिए शुक्रिया. और हां, तुम करीब 11 बजे घंटाघर आ कर मुझे फोन कर लेना.’’
‘‘ठीक है, मैं समय पर पहुंच जाऊंगी.’’ मोबाइल रखने के बाद पूजा ने घड़ी पर नजर डाली. उस समय साढ़े 10 बज रहे थे. वह जाने के लिए जल्दी से तैयार हुई. वह मन ही मन खुश थी कि सलमान ने उस के लिए वाकई एक बड़े काम की बुनियाद रख दी है.
नौकरी के बाद उस की जिंदगी आराम से गुजर जाएगी. उस ने एक खूबसूरत प्रिंटेड सूट पहना और उस की मैचिंग का नीला दुपट्टा भी गले में डाल लिया. अपना मोबाइल और पर्स ले कर वह सलमान के बताए पते पर पहुंच गई. शहर के बीच स्थित घंटाघर मुख्य बाजार और भीड़भाड़ वाला इलाका था. उस ने सलमान को फोन कर के अपनी पहचान बता दी. कुछ ही देर में वह मोटरसाइकिल से आ गया. एकदूसरे को देख कर दोनों ही खुश हुए.
सलमान उसे कुछ दूरी पर स्थित एक लस्सी की दुकान पर ले गया. वहां पहुंच कर दोनों बैठे ही थे कि एक अन्य मोटरसाइकिल से 2 लड़के और आ गए. सलमान ने पूजा से उन का परिचय कराते हुए कहा, ‘‘पूजा, ये मेरे करीबी दोस्त भूरा और आबिद हैं. इन्हीं के जरिए मैं ने तुम्हारे लिए नौकरी की बात की है. अभी कुछ देर में हम इन के साथ चलेंगे.’’
पूजा ने सवालिया निगाहों से सलमान की तरफ देखा. उस के मूक सवाल को भांप कर सलमान बोला, ‘‘अरे घबराने की कोई बात नहीं है. ये मेरे खास दोस्त हैं. वैसे भी मैं तुम्हारा भरोसे का दोस्त हूं.’’
उसी बीच सलमान ने दुकानदार को लस्सी के गिलास और्डर कर दिए थे. चारों लस्सी पीते हुए बातें करने लगे. लस्सी खत्म कर के वे पूजा को नौकरी दिलाने के लिए चल पड़े. पूजा सलमान की मोटरसाइकिल पर सवार थी, जबकि भूरा और आबिद दूसरी मोटरसाइकिल पर थे. कुछ देर तो ठीक रहा, लेकिन थोड़ी देर बाद पूजा को अपना सिर चकराता महसूस हुआ. उस के होश कब गुम हो गए, उसे पता ही नहीं चला. इस के बाद अर्धबेहोशी की हालत में उस ने खुद को एक कमरे में पाया. वहां हैवान बन कर बारीबारी तीनों ने उस की अस्मत लूटी.
उस हालत में उस के हाथोंपैरों की जैसे जान निकल चुकी थी. वह विरोध के काबिल भी नहीं थी. इस के बाद वह बेहोश हो गई. आंख खुली तो उस ने खुद को अस्पताल के बिस्तर पर पाया. वह अस्पताल कैसे पहुंची, उसे पता नहीं. उस ने अपने भाई चंदर को सूचना दी तो वह सुबह अस्पताल आया. पूजा ने जो बताया था, वह किसी युवती को विश्वास में ले कर उस की अस्मत को लूटने की गंभीर घटना थी. इस खबर के फैलते ही अस्पताल में हजारों लोग एकत्र हो गए थे. वे काररवाई के लिए हंगामा कर रहे थे. सवेरा होते ही इतने लोगों को घटना के बारे कैसे पता चल गया, इस बात को ले कर पुलिस अधिकारियों के दिमाग में सवाल कौंध रहे थे.
पुलिस ने पूजा के भाई चंदर की तहरीर पर तत्काल अपराध संख्या-210/15 पर बताए गए तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा-376, 328 व अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धारा-3 (2) (5) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया. घटना एक दलित युवती के साथ घटी थी. वह कई घंटे दरिंदों के चंगुल में रही थी. मामला ज्यादा तूल न पकड़े, इस के लिए पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू कर दी. डाक्टरों ने युवती का मैडिकल किया. युवती अस्पताल तक कैसे पहुंची, यह एक अहम सवाल था, क्योंकि वह बेहोश थी. पुलिस का अनुमान था कि आरोपी ही उसे अस्पताल के बाहर फेंक कर चले गए होंगे. अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगे थे. सुराग की तलाश में पुलिस ने रिकौर्डिंग खंगाली तो हैरान रह गए.
हैरानी वाली बात यह थी कि आरोप लगाने वाली वह पीडि़त युवती एक युवक के साथ खुद ही बातें करते हुए पैदल चल कर अस्पताल तक आई थी. कैमरा युवती के बयानों से विपरीत बयान कर रहा था. पुलिस को मामला संदिग्ध लगा, लेकिन नजाकत को भांपते हुए पुलिस खामोश रही. पुलिस ने वह रजिस्टर चैक किया, जिस में मरीज को भरती करते समय नामपता दर्ज किया जाता था. उस में युवती को भरती कराने वाले ने अपना नाम राजेंद्र, निवासी न्यूमोहनपुरी कालोनी लिखा था. पुलिस उस पते पर पहुंची तो पता चला कि वह पता फर्जी था. इन बातों से शक गहराया तो पुलिस ने पूजा के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई.
पुलिस चौंकी, क्योंकि युवती का यह नंबर करीब 2 महीने से सक्रिय था. नंबर वेस्ट यूपी से खरीदा गया था. हैरान करने वाली बात यह थी कि युवती दिल्ली की रहने वाली थी तो यूपी का नंबर क्यों इस्तेमाल कर रही थी? काल डिटेल्स में आरोपी सलमान का भी नंबर मिला था. इंसपेक्टर दीपक त्यागी ने पुलिस टीम के साथ उस के घर छापा मार कर उसे उठा लिया. पूछताछ में सलमान ने बताया कि वह युवती को जानता तक नहीं. कुछ दिनों से वह उस से मोबाइल पर बातें जरूर कर लिया करता था.
पुलिस ने उस की लोकेशन की जांच की तो पता चला कि वह सच बोल रहा था. युवती की काल डिटेल्स में एक और नंबर मिला था. वह नंबर उस के भाई चंदर के पास था. दोनों मोबाइल नंबर आगेपीछे थे. पुलिस ने पूजा और चंदर के मोबाइल की लोकेशन की जांच की. जिस समय की उस ने घटना बताई थी, उस समय की उस की लोकेशन घंटाघर इलाके से दूर की थी. मोबाइल के लोकेशन के अनुसार, चंदर उस के साथ था. जबकि युवती के बयान के अनुसार, सूचना मिलने पर वह सुबह अस्पताल आया था. इस बीच युवती की मैडिकल रिपोर्ट आ गई थी, जिस के अनुसार उस के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था. अब साफ हो गया था कि युवती झूठ बोल रही थी.
पुलिस को विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस मामले से इतनी सनसनी फैल गई थी, वह इस तरह फरजी निकलेगा. पुलिस ने युवती के साथ चंदर को भी हिरासत में ले लिया. सीओ विनीत भटनागर और इंसपेक्टर दीपक त्यागी ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो युवती अपने बयान पर अडिग रही. इस के बाद पुलिस ने उसे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज दिखाई तो उस ने झूठे गैंगरेप की ऐसी खतरनाक साजिश का सच बयां किया, जिसे सुन कर पुलिस अधिकारियों के पैरों तले से जमीन खिसक गई. युवती के बयान के आधार पर उस के सहयोगी हाजी मरगूब अली पुत्र अनवार निवासी जाकिर कालोनी, अब्दुल हमीद पुत्र अख्तर अली निवासी शास्त्रीनगर को हिरासत में ले लिया गया.
पूजा और उस के साथियों ने जो बताया था, उस हकीकत को जान कर पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए थे, क्योंकि उन के कैरियर का यह एकदम अनोखा मामला था. यह सनसनीखेज कहानी हत्या के एक मामले में गवाह बने शख्स को फंसाने के लिए रची गई थी. कहानी की पटकथा एक हत्यारोपी, जो जेल में बंद था, उस ने एक अधिवक्ता और एक कथित पत्रकार की सलाह पर लिखी थी. फिल्मी अंदाज में घटनाक्रम का डायरेक्टर भी बनाया गया और किरदार भी. दुष्कर्म के घटनाक्रम से ले कर प्रदर्शन तक की पटकथा के अंश थे.
हर किरदार की उस की अदाकारी की फीस तय थी, जिस में 2 लाख रुपए का बंटवारा भी हो चुका था. 2 बच्चों की मां होने के बावजूद पूजा ने खुद को अविवाहित युवती के रूप में पेश कर के खुद को हैवानियत की शिकार ऐसी दुखियारी बन कर सफल अभिनय किया था कि न सिर्फ पुलिस चकरा गई, बल्कि शहर भी आग में झुलसतेझुलसते बचा. झूठे रेप की पटकथा के पीछे भी एक कहानी थी. दरअसल, 28 नवंबर, 2013 की शाम मेरठ के ब्रह्मपुरी थानाक्षेत्र के खत्ता रोड पर प्रौपर्टी का कारोबार करने वाले 25 वर्षीय बिलाल पुत्र फजलू की स्कौर्पियो सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर हत्या कर दी थी.
बिलाल की अपने ही पड़ोसी हनीफ और उस के भाई अनीस उर्फ नेता से रंजिश चली आ रही थी. ये दोनों ही हिस्ट्रीशीटर अपराधी थे. हनीफ के खिलाफ विभिन्न थानों में लूट, हत्या व अपहरण जैसे 35 से ज्यादा मामले दर्ज थे. बिलाल उन के कारनामों का विरोध करता था. इस मुद्दे पर दोनों के बीच कई बार हिंसक मारपीट भी हो चुकी थी. अनीस जेल में बंद था. रंजिश के चलते बिलाल ने सन 2012 में अपने पिता, मां वकीला और 2 बहनों गुलनाज एवं बेबी को मुजफ्फरनगर जिले के मोहल्ला खालापार में अपने मामा मेहराजुद्दीन के यहां शिफ्ट कर दिया था.
बिलाल काम के सिलसिले में मेरठ आता रहता था. उस दिन भी जब वह मेरठ आया था तो उस की हत्या कर दी गई. हत्या के इस मामले मे हनीफ, उस के बेटे आजाद, रिश्तेदार नजाकत उर्फ पप्पू, जोकि पूर्वपार्षद भी रह चुका था व अन्य के खिलाफ बिलाल की परिचित महिला शाहिस्ता पत्नी आस मोहम्मद की ओर से रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी.
पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को जेल भेज दिया था. मामला अदालत में सुनवाई होते हुए एक साल बाद सजा के मुकाम तक पहुंच चुका था. इस मामले में 5 आरोपियों को तो जमानत मिल गई थी, जबकि हत्यारोपी नजाकत जेल में बंद था. उस के खिलाफ मृतक बिलाल के करीबी सलमान उर्फ जावेद ने गवाही दी थी. उस के अभी और भी बयान होने थे. उस की गवाही नजाकत को सजा के मुकाम तक पहुंचा सकती थी.
इसी बात ने नजाकत को परेशान कर रखा था. गवाह के टूटने पर ही वह बच सकता था. इस मुद्दे पर उस के लोगों ने सलमान को कई बार समझाने का प्रयास भी किया कि वह गवाही से पलट जाए, लेकिन उस ने इनकार कर दिया था. मुकदमे की वादी शाहिस्ता को भी मोटी रकम का लालच दिया गया था. इस बात से परेशान नजाकत ने अपने एक साथी हाजी मरगूब अली से बात की. नजाकत चंदर को भी जानता था. चंदर एक मामले में जेल में बंद था, तभी उस की दोस्ती उस से हो गई थी. मरगूब चूंकि अक्सर नजाकत से मिलने जेल जाया करता था. उसी दौरान मरगूब से भी चंदर की जानपहचान हो गई थी.
नजाकत और मरगूब की जानपहचान अधिवक्ता पासा खान और एक दैनिक अखबार में कथित तौर पर इन्फौरमर के रूप में संपर्क रखने वाले कथित पत्रकार हसन जैदी से भी थी. एक बार नजाकत कचहरी में पेशी पर आया तो उस की मुलाकात सभी से हुई. उस ने सभी को पहले से सूचना दे कर बुला रखा था.
इस मुलाकात में नजाकत ने कहा, ‘‘किसी भी तरह सलमान से पीछा छुड़ाओ. अगर उस ने गवाही दे दी तो मुझे सजा हो जाएगी. उसे बहुत समझा दिया, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं है.’’
‘‘तुम्हीं बताओ क्या किया जाए?’’ मरगूब ने कहा.
‘‘कुछ तो करना पड़ेगा.’’ नजाकत ने कहा, ‘‘उसे किसी मामले में फंसवा दो, अपने आप टूट जाएगा.’’
नजाकत का यह आइडिया सभी को काम का लगा. इस के बाद नजाकत ने कहा, ‘‘इस काम में जितना भी पैसा खर्च होगा, मैं कर दूंगा.’’
इस के बाद सभी ने सलाहमशविरा कर के गवाह सलमान और उस की मदद करने वाले उस के 2 साथियों आबिद और भूरा को फंसाने की योजना बना डाली. उन की योजना में एक औरत की जरूरत थी. उस के लिए मरगूब ने कहा कि वह एक युवती पूजा को जानता है, जो पैसे के लिए कुछ भी कर सकती है. इसलिए अच्छा यही होगा कि पूजा के माध्यम से सलमान को दुष्कर्म में फंसाया जाए, इस में आसानी से उस की जमानत भी नहीं होगी.
पूजा मूलरूप से बिहार के छपरा की रहने वाली थी. सालों पहले उस का परिवार सहारनपुर के इस्लामिक संस्था दारुल उलूम के लिए चर्चित कस्बा देवबंद में आ कर बस गया था. कई सालों पहले घर वालों ने उस का विवाह जिला मुजफ्फरनगर के रहने वाले प्रह्लाद से कर दिया था. वह उस के 2 बच्चों की मां बनी. इस के बाद किसी वजह से पति से अलगाव हो गया तो वह मायके आ कर रहने लगी. पूजा आजाद खयाल युवती थी. उसे ऊंची उड़ान पसंद थी. ऐसी ही ख्वाहिशों में उस ने कुछ दुकानों और फाइनैंस कंपनियों में नौकरी की. 2 साल पहले उस का संपर्क मरगूब से हुआ तो जल्दी ही दोनों के बीच इतने गहरे संबंध बन गए कि मरगूब ने उसे मोहल्ला हुमायूंनगर में किराए का कमरा दिला कर अपने संरक्षण में रख लिया. उस के सारे खर्चे भी वही उठाने लगा.
पूजा इस जिंदगी से खुश तो थी, लेकिन हमेशा आगे बढ़ने और खूब पैसा कमाने के बारे में सोचती रहती थी. उस के लालची स्वभाव से मरगूब वाकिफ था. सलमान को फंसाने के मुद्दे पर अक्सर सभी की मुलाकातें नजाकत से होने लगीं. सभी चाहते थे कि योजना इतनी फूलपू्रफ हो कि बाद में कोई परेशानी न हो. नजाकत ने 2 लाख रुपए भी बतौर एडवांस मरगूब को दिला दिए. मरगूब ने अपनी इस योजना में अब्दुल अली को भी शामिल कर लिया था. अब्दुल से उस के दोस्ताना संबंध थे. इस तरह सलमान और उस के साथियों को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फंसाने की योजना बन गई.
उस के साथियों ने मरगूब को राय दी कि वह पूजा से बात करे. मरगूब ने पूजा से कुछ लोगों पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने की बात की तो वह राजी हो गई. इस के बाद मरगूब ने न सिर्फ उसे 50 हजार रुपए दिए, बल्कि यह भी कहा कि उसे बिना कुछ किए हर महीने 10 हजार रुपए मिलते रहेंगे. उस ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 50 हजार रुपए और देने का वादा किया. पूजा को आंखों के सामने नोट लहराते नजर आए तो वह ऐसा करने के लिए पलक झपकते राजी हो गई. इस के बाद मरगूब, अब्दुल, चंदर, हसन जैदी और पाशा खान ने मिलबैठ कर अपनेअपने किरदार तय किए. हसन जैदी और पाशा खान सलाहकार की भूमिका में थे.
सभी के बीच यह भी तय हुआ कि वे अपनीअपनी भूमिका पर कायम रहते हुए अपना किरदार पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे. पूजा को बयान से कतई नहीं पलटना था. इस के लिए उसे अजय देवगन की चर्चित फिल्म ‘दृश्यम’ दिखा कर रिहर्सल कराया गया. फिल्म की कहानी में जिस तरह अजय देवगन और उस का परिवार पुलिस जांच के दौरान बिना डरे अपने बयानों पर अड़ा रहता है, उसी तरह पूजा को भी अपने बयान पर अड़े रहना था. पूरी योजना बना कर मरगूब ने फर्जी पते पर 2 सिमकार्ड खरीद कर पूजा और चंदर को दे दिए. एक सिम का इस्तेमाल पूजा अकेली करती थी, जबकि दूसरा सिम चंदर और मरगूब, दोनों इस्तेमाल कर रहे थे.
इस के बाद अगस्त के दूसरे सप्ताह में बिलाल हत्याकांड के गवाह सलमान उर्फ जावेद का मोबाइल नंबर पूजा को दे दिया गया. एक दिन पूजा ने सलमान को मिसकाल की. उस ने पलट कर फोन किया तो पूजा ने उस से बातों का सिलसिला बढ़ा दिया. 21 अगस्त से 25 अगस्त तक बातों का यह सिलसिला उन के बीच 42 बार चला. सलमान नहीं जानता था कि उसे साजिश का शिकार बनाया जा रहा है. तय हो गया कि 25 अगस्त की रात पूजा को अस्पताल में भरती करा दिया जाएगा और वह सलमान तथा उस के साथियों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा देगी. दिन में वह चंदर और मरगूब के साथ शहर के एक डोमीनोज सेंटर पर भी गई, जहां बैठ कर पिज्जा खाया.
योजना के अनुसार, रात में वह मरगूब के साथ मोटरसाइकिल से घंटाघर पहुंची. वहां से मरगूब ने उसे अपने साथी अब्दुल के साथ अस्पताल भेज दिया. वह आराम से चल कर अस्पताल पहुंची. अस्पताल के अंदर पहुंचते ही उस ने बेहोशी का नाटक कर दिया. अब्दुल ने रजिस्टर में गलत नामपता दर्ज कराया और खुद वहां से चला गया. पाशा खान और हसन जैदी को जिला अस्पताल आनाजाना था. उन्हें डाक्टर से मिल कर पूजा को बेहोशी की हालत में बताने के अलावा मैडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म साबित कराना था. दोनों सुबह अस्पताल पहुंचे.
उन्होंने डाक्टर से बात कर के उन्हें पूजा को बेहोश दिखाने के लिए तैयार कर लिया. इस बीच पूजा के गले पर चोट का निशान भी बना दिया गया. योजना के अनुसार, हसन जैदी के जरिए हिंदू लड़की से मुसलिम युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म की सनसनीखेज सूचना राजनैतिकदलों से जुडे़ लोगों तक पहुंचाई गई. इस से शहर में सनसनी फैल गई. मौके पर पहुंची पुलिस को पूजा ने पहले से रटाई गई दुष्कर्म की फरजी कहानी सुना दी. न चंदर उस का भाई था और न ही वह दिल्ली के पते पर रहती थी. सभी को पूरी उम्मीद थी कि पुलिस दुष्कर्म जैसे मामले में बिना जांच के ही सलमान को पकड़ कर अंदर कर देगी.
राजनैतिक लोगों को इसलिए सूचना दी गई कि वे एकत्र हो कर हंगामा करेंगे तो पुलिस दबाव में आ जाएगी. आरोपी मुसलिम समुदाय के होने से शहर में सनसनी और अफवाहें फैलेंगी, जिस से आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा. योजना फूलपू्रफ थी. किसी अभिनय में कोई कमी नहीं थीं, लेकिन पुलिस जांच में परतें खुल गईं. एसएसपी डी.सी. दुबे, एसपी (सिटी) ओमप्रकाश सिंह ने भी आरोपियों से पूछताछ की. पुलिस पूजा, उस के फरजी भाई चंदर, मरगूब अली और उस के साथी अब्दुल को गिरफ्तार कर चुकी थी.
पुलिस ने इस मामले में जेल में बंद मुख्य षडयंत्रकारी नजाकत, अधिवक्ता पाशा खान और हसन जैदी को भी आरोपी बनाया है. पुलिस ने पूजा के मजिस्ट्रेटी बयान कराए तो उस ने वहां भी पूरी सच्चाई बयां कर दी. पुलिस ने डोमीनोज सेंटर की वीडियो फुटेज भी बतौर सबूत हासिल कर ली है. वह उस समय वहां थी, जिस समय उस ने खुद को सलमान के साथ घंटाघर पर होने के बारे में बताया था. विधिवत गिरफ्तारी कर पुलिस ने सभी को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
इस के बाद पुलिस शेष आरोपियों की तलाश में जुट गई. पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते आरोपी हसन जैदी ने 8 सितंबर को अदालत में समर्पण कर दिया, जिस के बाद उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हो सकी थी और पुलिस पाशा खान की सरगरमी से तलाश कर रही थी. पुलिस अब डाक्टर की भूमिका की जांच कर रही है. अगर वह दोषी पाए गए तो उन के खिलाफ भी काररवाई हो सकती है. Social Stories Hindi
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.






