Moradabad Crime News: शिवानी को यह बात पसंद नहीं थी कि उस की मां कुसुम उस के प्यार पर अंकुश लगाए. कुसुम ने बेटी पर जब सख्ती की तो शिवानी ने भी ऐसा कदम उठाया कि वह कोख का कलंक बन बैठी मुरादाबाद महानगर के मोहल्ला बंगला गांव की रहने वाली कुसुम ने बृहस्पतिवार को व्रत रखा था. जिस दिन उस का व्रत होता था उस दिन वह मोहल्ले के मंदिर में जरूर जाती थी. लिहाजा उस दिन भी वह मंदिर गई. मंदिर से लौटतेलौटते रात के 8 बजे गए.
उसी समय मोहल्ले की बिजली गुल हो गई. वह अंधेरे में अपने दरवाजे पर पहुंची. इस से पहले कि वह दरवाजा खुलवा कर घर में जाती, उसी समय किसी ने उस के पीछे से सिर पर किसी चीज से वार किया. वार इतनी जोर से किया गया था कि उस का सिर फट गया और वह चीख कर नीचे गिर गई. यह बात 7 मई, 2015 की है. चीखने की आवाज सुन कर उस की बेटी शिवानी दरवाजा खोल कर बाहर आई. उस ने दरवाजे के बाहर की सीढि़यों पर मां को पड़ी देखा तो घबरा गई.
वह मां को उठाने लगी, तभी उस के हाथ खून से सन गए. इस के बाद तो उस की चीख निकल गई. वह जोरजोर से रोने लगी. रोने की आवाज सुन कर उस की भाभी रीना और आसपड़ोस के लोग आ गए. लहूलुहान हालत में कुसुम को देख कर लोग हैरान रह गए. लोग तुरंत ही उसे नजदीक में ही स्थित डी.एल. अस्पताल ले गए. वहां के डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. कुसुम राजकुमार की पत्नी थी. राजकुमार और उस के दोनों बेटे सचिन व अमन शहर के ही चौमुखापुल पर स्थित गारमेंट की अलगअलग दुकानों में नौकरी करते थे. जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली, वे घर पहुंच गए.
उसी समय किसी ने फोन द्वारा इस वारदात की खबर पुलिस को भी दे दी थी. पुलिस चौकी घटनास्थल से थोड़ी ही दूर पर थी, इसलिए पुलिस चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत तारों वाली गली में उस जगह पर पहुंच गए, जहां कुसुम पर हमला किया गया था. पुलिस वालों को जब पता चला कि घायल महिला कुसुम को लोग डी.एल. अस्पताल ले गए हैं तो पुलिस वाले भी वहीं पहुंच गए. वहां उन्हें जानकारी मिली कि कुसुम मर चुकी है तो उन्होंने इस की सूचना थाना नागफनी को दे दी.
हत्या की बात सुनते ही थानाप्रभारी अस्पताल पहुंच गए. तब तक मोहल्ले के सैकड़ों लोग डी.एल. अस्पताल के सामने जमा हो चुके थे. घटना को ले कर उन के मन में आक्रोश था. खबर मिलते ही एसएसपी लव कुमार, एसपी सिटी डा. रामसुरेश यादव, महेश सिंह राणा भी भारी पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए. अस्पताल में ही मृतका कुसुम की बेटी शिवानी चीखचीख कर आरोप लगा रही थी कि उस की मां की हत्या पड़ोस में रहने वाले अनिल ने की है. पुलिस ने सब से पहले घटनास्थल की जरूरी काररवाई पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
इस के बाद शिवानी से बात की तो उस ने बताया कि अनिल ने ही लोहे की रौड मार कर मां की हत्या की है. हाथ में रौड थामे भागते हुए अनिल को उस ने अपनी आंखों से देखा था. पुलिस ने जब उस से इस की वजह पूछी तो उस ने बताया कि अनिल काफी दिनों से उस की मां के पीछे पड़ा था. मां ने उस के खिलाफ कई बार थाने में लिखित शिकायत भी की थी, लेकिन पुलिस ने उन की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया था. शिवानी ही नहीं, उस के घर के सभी लोग हत्या का आरोप अनिल पर ही लगा रहे थे. मृतका के बेटे सचिन ने अनिल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए एक तहरीर भी दी.
उस की तहरीर के आधार पर अनिल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. एसएसपी ने हत्या के इस केस को खोलने के लिए सीओ महेश सिंह राणा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी. अनिल चूंकि मृतका के पड़ोस की नेता वाली गली में रहता था, इसलिए पुलिस टीम उस के घर पहुंच गई. लेकिन वह घर पर नहीं मिला. घर वालों ने बताया कि वह दिल्ली गया हुआ है. घर पर अनिल के न मिलने पर पुलिस को भी उस पर शक हुआ कि वह वारदात कर के कहीं भाग गया है. पुलिस ने उस के घर वालों से अनिल का दिल्ली का ठिकाना मालूम किया तो उन्होंने अनभिज्ञता जता दी. पुलिस ने उस के घर वालों को हिदायत दी कि वे किसी भी तरह अनिल के पास खबर कर दें कि वह जल्द से जल्द थाने में आ कर मिले.
अनिल का मोबाइल नंबर ले कर सीओ अपने कार्यालय लौट आए. उस के फोन नंबर को उन्होंने सर्विलांस पर लगवाया तो उस की मौजूदा लोकेशन दिल्ली की ही आ रही थी. सीओ महेश राणा ने अनिल से फोन पर बात की और उसे विश्वास में ले कर कहा कि तुम से बहुत जरूरी बात करनी है. इसलिए जल्द से जल्द मुरादाबाद आ जाओ. अगर नहीं आए तो समझ लो कि तुम्हारे घर वाले इस का खमियाजा भुगतेंगे. अनिल समझ नहीं पा रहा था कि सीओ साहब ने उस से इस तरह क्यों बात की? ऐसी क्या बात हो गई, जो वह उसे थाने में बुला रहे हैं. इस के तुरंत बाद अनिल ने अपने घर वालों को फोन किया तो उसे पता चला कि किसी ने तारों वाली गली में कुसुम की हत्या कर दी है. अब उस की बेटी शिवानी कह रही है कि हत्या अनिल ने की है.
अनिल को जब पता चला कि कुसुम की हत्या में उस का नाम आ रहा है तो वह परेशान हो गया. अब वह समझ गया कि यदि वह मुरादाबाद नहीं पहुंचा तो पुलिस उस के घर वालों को जरूर परेशान करेगी. इसलिए वह अगले दिन यानी 8 मई को ही बस से मुरादाबाद के लिए चल पड़ा. अनिल जानता था कि कुसुम की हत्या उस ने नहीं की है, इसलिए उसे कोई डर नहीं है. मुरादाबाद पहुंचने के बाद वह अपने घर जाने के बजाय सीधे थाना नागफनी पहुंच गया. थानाप्रभारी ने सीओ महेश राणा को अनिल के थाने में पहुंचने की जानकारी दी तो वह भी थाने पहुंच गए. उधर मोहल्ले के लोगों ने पोस्टमार्टम के बाद कुसुम की लाश को बंगला गांव चौराहे पर रख कर जाम लगा दिया.
लोगों का कहना था कि जब रिपोर्ट अनिल के खिलाफ लिखी जा चुकी है तो पुलिस उसे गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है. अनिल पुलिस का मुखबिर भी था, इसलिए लोगों को शक था कि पुलिस उसे बचा रही है. शहर के व्यस्त चौराहे पर जाम लगने से उधर से गुजरने वाले वाहनों की गति थम गई. कचहरी तक वाहनों की कतार लग गई. पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया. पुलिस अधिकारी आंदोलनकारियों को समझाने में लग गए, लेकिन लोग उन की बात सुनने को तैयार नहीं थे. मृतका की बेटी शिवानी अनिल के गिरफ्तार न करने पर पुलिस पर बरस रही थी. जब एसएसपी लव कुमार ने लोगों को अनिल को हिरासत में ले लिए जाने की जानकारी दी, तब लोगों ने जाम हटाया.
अनिल पुलिस के कब्जे में था, इसलिए पुलिस को उम्मीद थी कि अब केस खुल जाएगा. पुलिस ने अनिल से कुसुम की हत्या की बावत पूछताछ की तो उस ने बताया कि कुसुम की हत्या में उस का कोई हाथ नहीं है. जिस समय उस की हत्या हुई थी, उस समय वह दिल्ली में था. मगर पुलिस को उस की बातों पर विश्वास नहीं हुआ. लिहाजा उस से सख्ती से पूछताछ की गई. वह बारबार एक ही बात दोहराता रहा. उस ने कहा कि जिस समय कुसुम की हत्या होने की बात कही जा रही है, उस समय वह दिल्ली के शाहदरा इलाके में मैट्रो स्टेशन के पास स्थित दुकान से शराब खरीदने गया था.
लेकिन वह दुकान बंद मिली तो थोड़ी दूर स्थित एक होटल में खाना खाने चला गया. पुष्टि के लिए पुलिस टीम अनिल को दिल्ली ले गई. साथ में वह मृतका के पति राजकुमार और बेटे सचिन को भी साथ ले गई. जिस दुकान से अनिल शराब खरीदने गया था, उस दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की गई. उस फुटेज में अनिल दिख गया. इस के बाद पुलिस उस होटल पर भी गई, जहां अनिल ने खाना खाया था.उस होटल के सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि उस दिन शाम 7:55 से 8:05 बजे के बीच अनिल की मौजूदगी उस होटल में थी. इस से एक बात साफ हो गई कि कुसुम की हत्या के समय अनिल की मौजूदगी मुरादाबाद में नहीं थी यानी कुसुम का हत्यारा कोई और ही था.
पुलिस टीम दिल्ली से मुरादाबाद लौट आई. मुरादाबाद पहुंचने पर अनिल ने पुलिस को एक महत्त्वपूर्ण जानकारी दी. उस ने बताया कि कुसुम की बेटी शिवानी और पड़ोस में ही रहने वाले विक्की के बीच कई सालों से चक्कर चल रहा है. यह जानकारी मिलते ही सीओ महेश राणा का माथा ठनका कि कहीं यह मामला लव ऐंगल का तो नहीं है. अनिल के बेकसूर साबित होने पर उन्होंने उसे घर भेज दिया और उसी दिन शिवानी व पड़ोसी युवक विक्की के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स देख कर पुलिस हैरान रह गई.
उस से पता चला कि उन दोनों की एकदूसरे से अकसर बातें होती रहती थीं और काफी देर तक. घटना से कुछ देर पहले और बाद में भी दोनों की बातें हुई थीं. इस से पुलिस को शिवानी और विक्की पर शक हो गया. पूछताछ के लिए पुलिस दोनों को थाने ले आई. दोनों से कुसुम की हत्या के बारे में पूछा गया तो शिवानी पुलिस पर हावी होते हुए बोली, ‘‘सर, मेरी ही मां की हत्या हुई है और आप मुझ से ही इस तरह पूछ रहे हैं, जैसे मैं ने ही उन्हें मारा है. जिस ने मारा था, उसे तो आप ने छोड़ दिया. आप ही बताइए, भला मैं अपनी मां को क्यों मारूंगी? आप मुझे ज्यादा तंग करेंगे तो एसएसपी साहब से आप की शिकायत कर दूंगी.’’
‘‘देखो, तुम जिस से चाहो शिकायत कर देना, हमें तो केस की जांच करनी है,’’ सीओ महेश सिंह राणा ने कहा. ‘‘अब तुम यह बताओ कि तुम्हारी विक्की से फोन पर इतनी बातें क्यों होती हैं. यह तुम्हारा कोई रिश्तेदार है क्या?’’
‘‘सर, फोन पर क्या रिश्तेदारों से ही बातें हो सकती हैं. हम किसी से भी बात कर सकते हैं. विक्की हमारे मोहल्ले में रहता है. अगर इस से बात कर लेती हूं तो कोई आपत्ति या गुनाह है क्या.’’ शिवानी बोली.
‘‘हमें भला क्यों आपत्ति होगी, लेकिन यह तो बताना ही होगा कि तुम्हारी मां की हत्या से पहले और बाद में उस से क्या बातें हुईं थीं?’’ सीओ ने पूछा तो शिवानी के चेहरे का रंग उड़ गया. वह खुद को संभालते हुए बोली, ‘‘नहीं, मेरी इस से कोई बात नहीं हुई. किसी ने गलत बताया होगा.’’
‘‘गलत नहीं बताया. यह देखो, तुम ने कबकब इस से बात की है, इस में पूरी डिटेल्स है.’’ सीओ ने काल डिटेल्स उस के सामने रखते हुए कहा.
शिवानी अब झूठ नहीं बोल सकती थी, क्योंकि उन्होंने सच्चाई उस के सामने रख दी थी. उस की चुप्पी से सीओ राणा समझ गए कि उन की जांच सही दिशा में जा रही है. इस के बाद उन्होंने उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो शिवानी ने कबूल कर लिया कि मां की हत्या उस ने ही कराई थी. उस ने इस हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—
शिवानी मुरादाबाद के मोहल्ला बंगला गांव के रहने वाले राजकुमार की बेटी थी. शिवानी के अलावा राजकुमार के 2 बेटे थे, सचिन और अमन. राजकुमार शहर में ही चौमुखापुल बाजार में एक कपड़े की दुकान पर नौकरी करता था. उस के दोनों बेटे जब इंटरमीडिएट से ज्यादा नहीं पढ़ सके तो उस ने उन्हें भी उसी मार्केट में गारमेंट्स की अलगअलग दुकानों पर नौकरी पर लगवा दिया. तीनों जनों के कमाने से घर में अच्छी रकम आने लगी तो राजकुमार वे पैसे शराब पीने में उड़ाने शुरू कर दिए. बंगला गांव की ही नेता वाली गली में अनिल रहता था. उस की और राजकुमार की अच्छी दोस्ती थी. दोस्ती के नाते दोनों शाम को अकसर साथ बैठ कर शराब पीते थे.
शराब की महफिल राजकुमार के घर पर ही जमती थी. बताया जाता है कि उसी दौरान अनिल और राजकुमार की बीवी कुसुम के बीच नाजायज ताल्लुकात हो गए. उन के ये संबंध कई सालों तक जारी रहे. उसी दौरान शिवानी को घर पर ट्यूशन पढ़ाने के लिए नरेंद्र उर्फ विक्की नाम का युवक आता था. वह वकालत की पढ़ाई कर चुका था और नौकरी की तैयारी कर रहा था. ट्यूशन पढ़ातेपढ़ाते विक्की शिवानी को प्यार करने लगा. एक दिन उस ने अपने दिल की बात शिवानी को बताई तो वह उस के प्रस्ताव को नहीं ठुकरा सकी. इस तरह दोनों प्यार की पींगें बढ़ाने लगे.
उधर मां अनिल के साथ गुलछर्रे उड़ा रही थी तो इधर शिवानी विक्की के प्यार की नदी में तैरना सीख रही थी. लेकिन इस से पहले कि वह अच्छी तैराक बन पाती, कुसुम को उस की सच्चाई किसी तरह पता चल गई. फिर क्या था, कुसुम ने उस का ट्यूशन बंद करा दिया और उस के लिए लड़का देखने लगी, ताकि जल्दी से उस के हाथ पीले कर के चिंतामुक्त हो सके. शिवानी ने शादी के लिए मना भी किया, लेकिन कुसुम और उस के पति ने एक न सुनी. उन्हें शहर के ही लाइन पार इलाके में एक लड़का मिल गया. फिर नवंबर, 2014 में उस के साथ उस की शादी कर दी गई.
शिवानी बेमन से ससुराल चली जरूर गई, लेकिन उस का ससुराल में मन नहीं लगता था. किसी न किसी बहाने से वह मायके आ जाती. शादी करने के बाद कुसुम को लग रहा था कि शिवानी विक्की को भूल गई होगी, लेकिन यह उस की भूल थी. शिवानी के दिल में विक्की पूरी तरह से बसा था. मायके आने के बाद वह चोरीछिपे उस से मिल लेती थी. उधर अनिल और कुसुम के बीच मतभेद हो गए. दरअसल अनिल ने शिवानी की शादी में कुसुम को कुछ रुपए दिए थे. अब उसे पैसों की जरूरत थी तो उस ने कुसुम से अपने पैसे मांगे, लेकिन वह पैसे देने में आनाकानी कर रही थी. इसी बात को ले कर उन दोनों की आपस में कई बार कहासुनी भी हुई थी, जिस की शिकायत कुसुम ने पुलिस से भी की थी.
उधर शिवानी की विक्की के साथ फिर से नजदीकियां बढ़ती जा रही थीं. वह पति के बजाय विक्की के साथ ही अपना जीवन बिताना चाहती थी. कुसुम को जब पता चला कि शिवानी का विक्की के साथ चक्कर अब भी चल रहा है तो उस ने शिवानी को समझाया, पर वह विक्की को छोड़ने को कतई तैयार नहीं थी. तब उस ने बेटी से कह दिया कि वह अपनी ससुराल में ही रहे. बारबार यहां न आया करे. शिवानी को मां की यह बात बहुत बुरी लगी. वह महसूस करने लगी कि मां ही उस के प्यार में रोड़ा बनी हुई है. इस के बाद उस ने विक्की के साथ मिल कर मां को ही ठिकाने लगाने की योजना बना डाली.
योजना के अनुसार, 5 मई, 2015 को नरेंद्र उर्फ विक्की ने बाजार से लोहे की एक रौड खरीद ली. शिवानी को मालूम था कि उस की मां शाम के समय बाजार से सामान खरीदने जरूर निकलती है. विक्की का घर उस के घर के पास ही था. इसलिए योजना आसानी से सफल होने की उम्मीद थी. 7 मई, 2015 को कुसुम का व्रत था. वह शाम को मोहल्ले में ही स्थित मंदिर गई. उसी दौरान इलाके की बिजली गुल हो गई. 8 बजे के करीब शिवानी को पता था कि मां मंदिर गई हुई है और बिजली भी गुल है, इसलिए उस ने मौके का फायदा उठाने के लिए प्रेमी विक्की को फोन कर दिया. विक्की लोहे की रौड ले कर शिवानी के घर के पास ही एक जगह छिप कर कुसुम के मंदिर से लौटने का इंतजार करने लगा.
गली में उस समय सन्नाटा था. उसे कुसुम आती दिखाई दी तो वह सतर्क हो गया और जैसे ही वह अपने दरवाजे की सीढि़यां चढ़ने को हुई, विक्की ने रौड से एक जोरदार वार उस के सिर पर कर दिया, जिस से कुसुम वहीं गिर गई. विक्की तुरंत वहां से भाग गया. मां के चीखने की आवाज सुन कर शिवानी समझ गई कि विक्की ने काम कर दिया है. वह तुरंत घर से बाहर आई और रोने का नाटक करने लगी. रोते समय वह बारबार अनिल का नाम ले रही थी कि उसी ने मां को मारा है. शिवानी ने इस केस में अनिल को फंसाने की साजिश इसलिए रची थी कि उस की मां और अनिल का कई बार झगड़ा भी हुआ था. इस वजह से पुलिस समझ जाएगी अनिल ने ही यह हत्या की होगी.
शिवानी ने प्रेमी को बचाने की योजना तो फूलप्रूफ बनाई थी, लेकिन पुलिस की जांच के आगे उस की सारी चालाकी धरी की धरी रह गई. उस से पूछताछ करने के बाद उस के प्रेमी नरेंद्र उर्फ विक्की ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को कुसुम की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया. शिवानी ने अपने स्वार्थ के लिए अपनी मां की हत्या तो करा दी, लेकिन अब उसे इस का अफसोस हो रहा है. Moradabad Crime News
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित.






