Bihar News: धर्मग्रंथों की कहानियां, श्लोक और ज्ञान की मीठीमधुर बातें करने वाले कथावाचक श्रवण दास को नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में जेल जाना पड़ा. एक पल में उस की महाज्ञानी, संत और धार्मिक छवि ध्वस्त हो गई. ललाट पर गाढ़े चंदन का लेप लगाने वाले इस पाखंडी की करतूतें इतनी वायरल हो रही हैं कि…

बिहार में मिथलांचल के शहर दरभंगा का श्रवण दास जब माता जानकी सीता की मार्मिक पीड़ा का वर्णन करने लगता, तब सामने बैठी सैकड़ों महिला श्रोताओं की आंखें नम हो जाती थीं. अधिकतर के मन में सीता के त्याग, तपस्या, ताकत और तप को ले कर तरहतरह के सवाल उठते थे. कुछ औरतें प्रश्न पूछ कर अपने मन को तसल्ली दे लेती थीं, जबकि कुछ के मन में सीता को ले कर बने सवाल उमड़तेघुमड़ते रहते थे.

उन्हीं श्रोताओं में रोशनी भी थी, जो अपनी मम्मी के साथ कथा सुनने के लिए अकसर जाती थी. वह कथावाचक श्रवण दास की छवि से काफी प्रभावित थी. उन के बोलने की शैली, लच्छेदार बातें, मधुर आवाज के साथ चेहरे के हावभाव और वेशभूषा को टकटकी लगाए देखती रहती थी. उस के मन में भी कई प्रश्न थे. उस बारे में जब मम्मी से पूछती, तब मम्मी का जवाब होता गुरुजी से ही मालूम करना होगा.

जून की गरमी का महीना चल रहा था. तारीख 3 जून, 2023. श्रवण दास महाराज का कथावाचन का कार्यक्रम समाप्त हो चुका था. सभी श्रोता प्रसाद ले कर अपनेअपने घर की ओर लौट रहे थे. रोशनी अपनी मम्मी के साथ एक किनारे खड़ी थी. उन दोनों को श्रवण दास से अलग से मिलना था. दरअसल, उस रोज कथावाचन के दौरान रोशनी ने ऐसा प्रश्न पूछ लिया था कि जिस का जवाब देने में श्रवण दास असहज महसूस करने लगा था. उस वक्त किसी तरह से तो उस ने रामायण और धार्मिक बातों के आधार पर प्रश्न का घुमाफिर कर जवाब दे दिया था, लेकिन रोशनी उस के उत्तर से संतुष्ट नहीं हुई थी और निराशा का भाव लिए हुए अपनी जगह पर बैठ गई थी.

यह बात श्रवण दास ने भी महसूस की थी. हालांकि श्रवण दास ने यह भी कहा कि इस प्रश्न का जवाब विस्तार से समझाने में अधिक समय लग सकता है, जिस से कथावाचन कार्यक्रम में रुकावट आ जाएगी. इसी के साथ श्रवण दास ने अपनी कथा की कड़ी को आगे बढ़ा दिया था. थोड़ी देर में ही रोशनी और उस की मम्मी के पास पीले वस्त्र धारण किए हुए एक व्यक्ति आया. उस ने उन से धीमी आवाज में कहा, ”तुम्हें कथावाचन के बाद गुरुजी ने मिलने के लिए कहा है.’’

यह सुन कर रोशनी के चेहरे पर चमक आ गई थी, लेकिन उस की मम्मी चिंतित हो गई थी. आशंका हुई कि उसे गुरुजी की डांट सुननी पड़ेगी. कारण, कथा के समय बीच में कोई कुछ भी पूछने की हिम्मत नहीं करता है. उस ने सोच लिया था कि गुरुजी के पैरों पर गिर कर रोशनी की इस गलती की माफी मांग लेगी. यही कारण था कि मांबेटी एक किनारे खड़ी हो कर सभी श्रोताओं के जाने का इंतजार कर रही थीं. जल्द ही उन्हें उसी व्यक्ति ने आवाज दी और आने का इशारा किया, जिस ने उन्हें इंतजार करने को कहा था.

ऐसे फंसी नाबालिग

सहमते हुए मांबेटी उन के पास गईं. कुछ पल में दोनों श्रवण दास के सामने थे. युवा चेहरा, छरहरे बदन पर पीले रंग के वस्त्र, ललाट पर लगा हल्दी और चंदन का लेप साथ में लाल रंग का टीका! गजब का आकर्षण था. रोशनी अपने सामने श्रवण दास को देख कर हतप्रभ थी. जिस कथावाचक को वह दूर से मंच पर देखती थी, वह उस के सामने बैठा था. वह मंत्रमुग्ध हो गई थी, जबकि उस की मम्मी ‘गुरुजी माफ कऽ दिअ, बच्ची छै, आब किछु नहि पुछत (माफ कर दीजिए, बच्ची है, अब कुछ नहीं पूछेगी).’ मैथली भाषा में बोलती हुई झट से श्रवण दास के पैरों पर गिर पड़ी.

”अरेअरे! ऐसा मत करो माई! आप मुझ से बड़ी हो! बच्ची है…अभी प्रश्न नहीं पूछेगी तो कब पूछेगी. ज्ञान के लिए प्रश्न पूछना जरूरी है. मुझे खुशी हुई कि किसी ने तो कुछ पूछा. उस में हिम्मत है, तभी तो मन में आए प्रश्न पूछती है. मन में दबा कर नहीं रखती है.’’

”जी गुरुजी.’’

”माई! आप तो यहां रोजाना आती हैं. लगता है यहीं आसपास में रहती हैं. आप से एक मदद चाहिए.’’ श्रवण दास विनम्रता से बोला.

”जी गुरुजी, बताइए न! हम से जो होगा, जरूर करूंगी.’’

”हमें रहने के लिए भाड़े का कमरा चाहिए. यहां रहने में परेशानी होती है. कोई आप की नजर में हो तो दिलवा दो. जो भाड़ा होगा मिल जाएगा, लेकिन सेपरेट होना चाहिए.’’

”पता करूंगी गुरुजी,’’ रोशनी की मां बोली और वहां से जाने लगी. गुरुजी ने उसे प्रसाद दिया और जल्दी पता करने के लिए बोला.

मांबेटी प्रसन्न मन से घर लौट आईं. घर पहुंचते ही रोशनी मम्मी से बोली, ”मम्मी, गुरुजी को अपने मकान के पीछे वाला कमरा दे दो. वहां जाने का रास्ता भी अलग से है…उधर लैट्रीन बाथरूम भी बना है.’’

”अरे हां बेटी, यह तो हमारे ध्यान में नहीं आया.’’

”गुरुजी को फोन कर दो, आज ही आ कर कमरा देख लेंगे.’’ रोशनी सुझाव देती हुई बोली. उसी वक्त रोशनी की मम्मी ने मंदिर में लिखे नंबर पर फोन किया. वह नंबर गुरुजी के शिष्य का था. उसे उन्होंने भाड़े के कमरे के बारे में बताया और कमरा देखने के लिए गुरुजी को आने के लिए कह दिया. शिष्य ने तुरंत उन की बात श्रवण दास से करवा दी. वह अगले रोज दिन में कमरा देखने के लिए रोशनी के घर पहुंच गया. कमरा उसे पसंद आया और उस की अच्छी तरह से साफसफाई करवा कर 2 दिनों बाद वहां आ कर रहने लगा.

इस तरह श्रवण दास महाराज की सनातनी संत की जिंदगी रोशनी के घर के पिछवाड़े बने कमरे में गुजरने लगी. रोशनी और उस की मम्मी इस बात से आनंदित हो गए थे कि उन के घर में ही गुरुजी का वास हो गया है. वह जब चाहे दर्शन प्राप्त कर सकती है. जल्द ही श्रवण दास भी रोशनी और पूरे परिवार के लोगों के साथ घुलमिल गया. घर पर उस की वेषभूषा सामान्य व्यक्ति की तरह ही होती थी. उस के व्यक्तित्व में गजब का आकर्षण था. सब कुछ सामान्य चल रहा था. रोशनी का खानेपीने की चीजों को ले कर श्रवण दास के कमरे पर अकसर आनाजाना होने लगा था.

दोनों के बीच बातचीत होने लगी थी. वे धर्म आस्था की बातों के साथसाथ देशदुनिया, पढ़ाईलिखाई, मोबाइल, रील्स और समाज में चल रही घटनाओं की भी बातें करने लगे थे. रोशनी श्रवण दास की बोलने की शैली और हर बात को समझाने के तरीके की कायल बन चुकी थी. रोशनी को जब कभी लगता कि उस के मन में चल रहे किसी प्रश्न का जवाब नहीं मिल रहा है तो तुरंत श्रवण दास से उस का उत्तर जानने के लिए पहुंच जाती थी. उस के प्रश्नों को सुन कर श्रवण दास भी अचंभित हो जाता था.

वह अकसर माता सीता और उन के स्वयंवर, वीरता और श्रीराम द्वारा त्याग से जुड़े ऐसेऐसे सवाल पूछती थी, जिन का श्रवण दास को जवाब देते नहीं बनता था. रोशनी कई बार इतनी गूढ़ बातें कर देती थी कि उस का हल श्रवण दास को ‘जनक संवाद’ पुस्तक में भी नहीं मिलता था.

प्रैग्नेंसी से बढ़ी चिंता

इसी बीच कब रोशनी और श्रवण दास एकदूसरे के दिल के करीब आ गए, उन्हें पता भी नहीं चला. दोनों काफी समय तक अकेले में बातें करने लगे. रोशनी को लगता कि वह श्रवण दास से ज्ञान की बातें सीख रही है, जबकि उस के सामने होने पर श्रवण दास के दिल की धड़कनें एक आम नवयुवक की तरह धड़कने लगती थीं. दोनों की जानपहचान भले ही धार्मिकता और सनातनी आस्था के माध्यम से हुई हो, लेकिन उन की भावनाएं ‘आग’ और ‘सूखे खेर’ की तरह ही थी, जिन का संसर्ग होना स्वाभाविक था. …और हुआ भी ऐसा ही, वे खुद को रोक नहीं पाए.

इस की जानकारी रोशनी को तब हुई, जब उसे महसूस हुआ कि वह गर्भस्थ हो चुकी है. उस ने इस बारे में श्रवण दास को बताया. श्रवण दास ने उसे चुप रहने को कहा. कुछ गोलियों का पत्ता उसे पकड़ाते हुए कहा कि इसे नियमित लेती रहना, सब कुछ ठीक हो जाएगा. रोशनी समझ गई कि गोलियां गर्भावस्था रोकने की हैं और घरपरिवार की इज्जत का खयाल रखते हुए उस का नियमित सेवन करने लगी. किंतु इस बात से भी डर गई कि घर में किसी को पता चलेगा, तब इस का वह क्या जवाब देगी. उस ने श्रवण दास से अपनी चिंता जताई.

श्रवण दास ने उसे अपने विश्वास में ले लिया कि वह जल्द ही उस के साथ शादी कर लेगा, लेकिन इस के लिए उस की उम्र नहीं है. कानून के अनुसार वह नाबालिग है. उस के बालिग होते ही वह उस के साथ कोर्ट मैरिज करेगा. इस आश्वासन पर वह चुप लगा गई. किंतु चिंता में घुलने लगी. कई महीने गुजर गए. उदास रहने लगी. सेहत में गिरावट आ गई. उस की मम्मी ने एक दिन उस के कमजोर दिखने का कारण पूछ लिया. मम्मी की ममता और स्नेह के आगे रोशनी खुद को रोक नहीं पाई. मम्मी की गोद में सिर छिपा कर सिसकने लगी. मम्मी ने प्यार से पुचकारा, तब उस ने आपबीती सुना दी.

यह सुनते ही मम्मी स्तब्ध रह गई. उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि जिसे वह गुरु मानती थी, वह उस की बेटी की इज्जत के साथ खिलवाड़ करेगा. वह परेशान हो गई. वह क्या करे और क्या नहीं? कुछ समझ में नहीं आ रहा था. एक तरफ उस की बेटी और परिवारसमाज की इज्जत का सवाल था, दूसरी तरफ गुरु की लोकप्रियता थी. इसी उधेड़बुन में कई महीने गुजर गए. किंतु पानी जब उस के सिर से निकलने लगा, तब उस ने श्रवण दास के गुरु मौनी बाबा से इस बारे में बात की. मौनी बाबा ने इस का समाधान निकालने के बजाए उसे ही धमका दिया और चुप रहने को कहा.

रोशनी और श्रवण दास का आपसी मामला फरवरी, 2024 से शुरू हुआ, उस के बाद करीब डेढ़ साल बीत गए. रोशनी को काफी रक्तस्राव होने से तबीयत अचानक बिगड़ गई. वह मरणासन्न हालत में पहुंच गई थी. किसी तरह से उस की जान बच पाई.

जब मामला हद से बाहर हो गया, तब रोशनी की मम्मी लहेरियासराय के महिला थाने में गई. वहां गुरु श्रवण दास के खिलाफ लिखित शिकायत की. दरभंगा के प्रसिद्ध कथावाचक श्रवण दास और उस के गुरु रामउदित दास उर्फ मौनी बाबा के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ मामले का विस्तार से विवरण दिया.  उस की शिकायत के आधार पर महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई. दोनों के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 4/6/64(1) सहित बीएनएस की धारा 351(2), 352, 89 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

बाबा हुआ अरेस्ट

इस की जानकारी डीएसपी (सदर) राजीव कुमार को दी गई. इस के साथ ही कथावाचक की गिरफ्तारी के लिए दरभंगा के एसएसपी जगुनाथ रेड्ïडी ने एक एसआईटी टीम का गठन किया, जिस की कमान दरभंगा (सदर) के डीएसपी राजीव कुमार को सौंप दी गई. जांच की जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने तुरंत एफएसएल टीम से भी जांच शुरू करवा दी. पीडि़ता का मैडिकल करवाया गया. उस के बाद महिला थाने की एसएचओ मनीषा कुमारी और लहेरियासराय थाने की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर हाउसिंग बोर्ड कालोनी से 17 जनवरी, 2026 को कथावाचक श्रवण दास को गिरफ्तार कर लिया.

पचाढ़ी मठ के महंत और राम जानकी मंदिर, बलभद्रपुर के महंत रामउदित दास के शिष्य एवं कथावाचक श्रवण दास पर एक नाबालिग लड़की से शादी का झांसा दे कर लंबे समय तक शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था. उन्हीं दिनों लड़की ने मामले से जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी कर दिए थे, जिन में कथावाचक के साथ बंद कमरे में शादी से जुड़े दृश्य भी सामने आए थे.

रोशनी की मम्मी द्वारा महिला थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि कथावाचक श्रवण दास ने मेरी नाबालिग बेटी रोशनी को बहलाफुसला कर शादी का झांसा दिया और करीब एक साल तक उस के साथ दुष्कर्म करता रहा. इस दौरान बेटी गर्भवती हो गई, जिस के बाद आरोपी ने 2 बार दवा खिला कर गर्भपात कराया.  इस से बेटी को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उस की हालत गंभीर हो गई. बाद में उसे अस्पताल में भरती कराया, जहां इलाज के बाद उस की जान बच सकी.

तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया कि श्रवण दास ने हमारे घर में ही किराए पर कमरा ले रखा था. घर में किसी के नहीं होने पर वह नाबालिग के साथ दुष्कर्म करता था. इस बारे में हम ने जब महंत मौनी बाबा से शिकायत की, तब तब उन्होंने बेटी के बालिग होने पर शादी कराने का आश्वासन दिया. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में श्रवण दास और नाबालिग रोशनी की बंद कमरे में शादी दिखाई देती है. इस बारे में आरोप लगा कि 29 नवंबर, 2024 को महंत मौनी बाबा ने श्रवण दास की शादी गुपचुप तरीके से करवा दी और पीडि़ता के परिजनों पर मामला दर्ज नहीं कराने का दबाव बनाया.

यह भी आरोप लगाया गया कि कथावाचक ने अश्लील फोटो और वीडियो बना कर पीडि़ता को जान से मारने की धमकी दी. साथ ही 8 से 10 लोगों के साथ घर पर आ कर केस न करने का दबाव बनाया गया. श्रवण दास महाराज के नाम से मशहूर हो चुके चर्चित कथावाचक का असली नाम श्रवण ठाकुर है. वह दरभंगा के बिरौल थाना क्षेत्र के पर्री गांव का निवासी है, लेकिन उस ने लहेरियासराय थाना क्षेत्र अंतर्गत पचाढ़ी छावनी के रामजानकी मंदिर में अपना ठौरठिकाना बना रखा था. साथ में उस के गुरु मौनी बाबा भी रहते थे.

बताया जाता है कि श्रवण दास 8 साल की उम्र में घर छोड़ कर मौनी बाबा के पास आ गया था. हालांकि इस के बाद उस ने पढ़ाईलिखाई की और उस ने पीएचडी तक की पढ़ाई की है. पिछले 10 साल से वह कथावाचन कर रहा है. उस की पहचान बड़े संत कथावाचक के रूप में हो गई थी. वह कथाओं, दानदक्षिणा व चमत्कारों के दावों से लोगों को आकर्षित कर लेता था. स्थानीय लोगों और कुछ शिष्यों को उस के आचरण, धन के लेनदेन और कथित चमत्कारों पर पहले से शक हो गया था. जब उस की गतिविधियों पर लोगों ने गहरी नजर डाली, तब उस की कई बातें काल्पनिक और भ्रामक पाई गईं.

वह कहने को तो संन्यास जीवन गुजारने वाला संत था, लेकिन वास्तविक जीवन में इस के उलटा था. एकदम से सामान्य जीवन गुजारने वाले व्यक्ति से भी भिन्न था. दान में मिले पैसों का गलत इस्तेमाल करता था. सभी पैसे अपने निजी जीवन को बेहतर बनाने के लिए खर्च करता था. लोकप्रिय कथावाचक श्रवण दास की गिरफ्तारी से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई. उस से लिए गए बयानों में कई असमानताएं पाई गईं. नाबालिग से यौन उत्पीडऩ के आरोप में उसे न्यायिक हिरासत में ले कर दरभंगा जेल में बंद कर दिया गया. उस ने पीडि़ता के साथ अपने संबंधों को तो स्वीकार कर लिया, लेकिन जमानत याचिका भी दाखिल की.

इस पर विशेष न्यायाधीश प्रतिमा परिहार ने बचाव पक्ष और पीडि़ता के अधिवक्ता से कुछ कानूनी सवालों के जवाब मांगे. अब इस मामले में अगली सुनवाई 4 फरवरी को तय की गई है. जबकि कथा लिखे जाने तक सहआरोपी मौनी बाबा फरार था, उस की तलाश जारी थी. श्रवण दास द्वारा आस्था की आड़ में नाबालिग के शोषण का एक चौंकाने वाला मामला बन गया है. उस के खिलाफ काररवाई लंबी निगरानी और पुख्ता सबूतों के आधार पर की गई है. आरोपी के खिलाफ दिसंबर, 2025 में महिला थाने में दर्ज की गई रिपोर्ट के बाद से वह पुलिस की पकड़ से दूर था. उसे पकडऩे के लिए एसआईटी की मदद ली गई.

पीडि़ता की शिकायत के अनुसार, आरोपी ने न केवल उस का शारीरिक शोषण किया, बल्कि गर्भवती होने पर उसे गर्भपात की दवाएं लेने के लिए भी मजबूर किया, जिस से उस की स्थिति नाजुक हो गई. इस मामले में पोक्सो ऐक्ट के तहत शिकंजा कसा जा चुका है. Bihar News

कथा में रोशनी परिवर्तित नाम है

 

 

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