Love Crime: चंदौसी शहर के जूता कारोबारी राहुल ने रूबी से लव मैरिज करने के बाद उसे हर तरह की सुखसुविधाएं दीं. लेकिन 2 बच्चों की मां बनने के बावजूद रूबी पति की आंखों में धूल झोंक कर 2-2 प्रेमियों के साथ गुलछर्रे उड़ा रही थी. प्यार में अंधी हो चुकी रूबी के इरादे एक दिन इतने खौफनाक हो गए कि….
रूबी की जिंदगी एक त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में फंस गई थी. वह प्रेमी अभिषेक व दूसरे प्रेमी गौरव और पति राहुल के बीच फंसी हुई थी. रूबी के लिए यह त्रिकोण नहीं, बल्कि 3 दिशाओं में बिखरा हुआ मन था. पति राहुल स्थिरता और परिवार में समन्वय बनाए रखने के भ्रम के साथ परिवार को खुशहाल बनाए रखने की कोशिश में लगा हुआ था. इसी तरह उस की शादी के 15 साल बीत चुके थे. दूसरी तरफ अभिषेक, जो उस के पति और समाज में रूबी को बहन बता कर दिन में भैया रात में सैंया की कहावत को चरितार्थ कर रहा था. अपनी धनदौलत के सहारे रूबी की मस्त जवानी का इस्तेमाल कर रहा था. अभिषेक के साथ रूबी 15 साल पहले जैसे यौन आनंद लिए जाने में मस्त थी. अभिषेक बहुत समझदार था.
तीसरा आशिक गौरव ने कुछ महीने पहले इस कहानी में एंट्री की थी. वह जवानी के जुनून में इस तरह अंधा हो गया था, जैसे कि सांप केंचुली आने पर हो जाता है. रूबी से उस का संपर्क हुआ. इसी दौरान अभिषेक से भी मुलाकात हुई. दोनों में दोस्ती हो गई. अभिषेक की तरह गौरव भी रूबी को बहन कहने लगा था और उस के बच्चे भी अभिषेक की तरह गौरव को भी मामा कहते थे. यह मामला उत्तर प्रदेश के जिला संभल की सब से उन्नतशील तहसील चंदौसी का है. संभल के जिला बनने से पहले चंदौसी को ही जिला बनाने की मांग उठती रही थी. जिला होने के सभी मानक भी चंदौसी पूरे करती थी, लेकिन राजनीतिक खेल की वजह से संभल को जिला घोषित कर दिया गया था, लेकिन मुख्यालय काफी दूर बहजोई में बनाया गया.
चंदौसी की घनी आबादी के चुन्नी मोहल्ला में राहुल नाम का जूते का व्यापारी रहता था. वैसे यह इलाका जूतों के निर्माण के लिए काफी प्रसिद्ध है. इसी चुन्नी मोहल्ले में 40 वर्षीय राहुल कुमार अपनी पत्नी रूबी (39 साल) 12 साल की बेटी और 10 साल के बेटे के साथ रह रहा था. राहुल एक मेहनती जूता व्यापारी था, सुबह से शाम तक कारीगरों से जूते बनवाता था. जूतों को राहुल थोक दुकानदारों को सप्लाई करता था. भागतेदौड़ते हुए भी वह जब भी घर लौटता, रूबी और दोनों बच्चों का चेहरा देख कर सारे दिन की थकान भूल जाता था. उस के चेहरे पर हमेशा संतोष की मुसकान रहती. रूबी, उस की पत्नी, घर की सारी जिम्मेदारियां संभालती थी. कभीकभी वह राहुल के बिजनैस में भी मदद कर दिया करती थी.

प्रेमिका के साथ मिलकर उसके पति की जान लेने वाला आरोपी
रूबी की आंखों में एक खालीपन था, एक ऐसी तन्हाई जो शादी के बंधन में भी उसे घेर लेती थी. राहुल का प्यार सच्चा था, लेकिन उस का जीवन बिजनैस की भागदौड़ में इतना व्यस्त था कि रूबी की भावनाओं को छूने का समय ही नहीं मिलता.
रूबी से हुआ प्यार
राहुल मूलरूप से संभल जिले के ही रजपुरा थाना क्षेत्र के गंवा कस्बे के रहने वाले जसवंत का इकलौता बेटा था. जसवंत के 4 बच्चे हुए, जिस में एक बेटा राहुल और 3 बेटियां हैं. राहुल के चाचा, ताऊ और बाकी रिश्तेदार वहीं रहते हैं. गवां कस्बे में रहने वाले राहुल के चाचा नेकराम बताते हैं कि राहुल जब केवल 15 साल का था, तभी उस के मम्मीपापा का बीमारी के चलते कुछ ही अंतराल में निधन हो गया.
घर संभालने के लिए राहुल ने राजमिस्त्री का काम शुरू कर दिया. पहले राजमिस्त्री के साथ मजदूरी करता था. फिर धीरेधीरे काम सीख कर राजमस्त्री बन गया. बाद में इस ने टाइल्स लगाने का भी काम सीखा. राहुल ने मेहनत कर के परिवार को आगे बढ़ाया. बहनों की शादी की. काम के चलते इसे अलगअलग जगहों पर जाना पड़ता था. उसी बीच इस की मुलाकात चुन्नी मोहल्ले की रहने वाली रूबी से हुई.
चंदौसी के चुन्नी मोहल्ले में उस सुबह धूप कुछ ज्यादा ही सुनहरी थी. गली के कोने पर बन रहे नए मकान में राजमिस्त्री राहुल अपने औजार संभालते हुए काम पर लग चुका था. सिर पर गमछा बंधा था. हाथों में सीमेंट की महक आ रही थी. आंखों में अपने भविष्य के छोटेछोटे सपने थे. राहुल रोज की तरह ईमानदारी से काम कर रहा था. एक दिन मकान के आंगन से अचानक चूडिय़ों की हलकी सी खनक सुनाई दी. राहुल ने नजर उठाई. सामने खड़ी थी मकान मालिक की बेटी. सादे सूट में, खुले बालों और शांत आंखों वाली रूबी किसी सुबह की तरह ताजा लग रही थी. वह पानी का गिलास ले कर आई थी और संकोच से बोली, ”मिस्त्री साहब, पानी पी लीजिए.’’
राहुल ने पहली बार उसे देखा. जवान रूबी की सुंदरता ऐसी थी, जैसे किसी हलकी सुबह की पहली किरण जो धीरेधीरे पूरे आकाश को रंग दे देती हो. उस का चमकदार लाल कुरता, भरे गांव की पृष्ठभूमि में खिला कोई ताजा फूल सा सुंदर लग रहा था. गले के पास की खूबसूरत कढ़ाई उस के व्यक्तित्त्व की कोमलता को और उभार दे रही थी.
उस के कंधों तक बिखरे हलके घुंघराले बाल हवा के हर झोंके के साथ नाच उठते, जैसे बचपन की शरारतें अब भी उस के साथ खेल रही हों. उस की चाल में न तो शहर की बनावट थी, न ही किसी संकोच की दीवार. बस, आत्मविश्वास और सहजता की हलकी सी मुसकान थी, जो अनजाने में देखने वालों के मन में जगह बना लेती.
देखने में वह किसी फिल्मी दृश्य की हीरोइन लग रही थी. जवान रूबी के सपने उस की आंखों से झलक रहे थे, जैसे हर कदम के साथ वह भविष्य की नई कहानी बुन रही हो. रूबी ने फिर कहा, ”लो मिस्त्री साहब, पानी पी लो.’’
उस पल सब कुछ ठहर सा गया. उस ने मुसकरा कर पानी लिया. बस उसी एक पल में दोनों के दिल में जैसे कोई हलकी सी 2 दिलों को जोडऩे वाली प्रेम रेखा खिंच गई. दिन बीतते गए. राहुल ईंटों की दीवारें खड़ी करता और रूबी कभीकभी उसे काम करते देखती. कभी चाय ले कर आ जाती, कभी घर के किसी काम का बहाना बन जाता. बातों का सिलसिला छोटा होता, पर आंखों में कहानियां लंबी होने लगीं.
धीरेधीरे रोज की मुलाकात छोटी बातों में बदलने लगी. पानी देना, चाय लाना या बस मुसकराना. राहुल को महसूस हुआ कि उस के भीतर का दिल रूबी पर आ गया है. राहुल को अपनी हैसियत का पूरा एहसास था. वह एक राजमिस्त्री था, रोज की मजदूरी पर जीने वाला. वहीं रूबी एक अच्छे घर की पढ़ीलिखी लड़की थी. फिर भी दिल ने बारबार दिमाग को चुप करा दिया. रूबी को राहुल की सादगी, उस का सम्मानपूर्ण व्यवहार और मेहनत भरी ईमानदारी अच्छी लगने लगी. उसे लगा कि यह आदमी दीवारें ही नहीं, भरोसा भी मजबूती से खड़ा करता है.
एक शाम जब काम खत्म हो चुका था और आसमान हलका गुलाबी हो चला था, रूबी ने हिम्मत कर के कहा, ”राहुल, आप बहुत अच्छे इंसान हैं.’’
राहुल कुछ पल चुप रहा. फिर बोला, ”रूबी, मैं बहुत साधारण हूं, पर दिल सच्चा है.’’
बस वही सच था, जिस ने दोनों को और करीब ला दिया.
यह प्यार चुपचाप पनपा. बिना शोर, बिना दिखावे के ईंट, सीमेंट और धूल के बीच 2 दिलों ने एकदूसरे के लिए जगह बना ली. मकान बन कर तैयार हो गया, लेकिन राहुल और रूबी के दिलों में जो निर्माण हुआ था, वह कहीं ज्यादा मजबूत था. चुन्नी मोहल्ले की उस गली में आज भी लोग उस मकान को देखते हैं, पर बहुत कम लोग जानते हैं कि उस की नींव में कहीं न कहीं रूबी की प्रेम कहानी भी गड़ी हुई है. दोनों का इश्क परवान चढ़ा. 2025 के हिसाब से देखें तो 15 साल पहले यानी कि 2010 में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया.
इस चुन्नी मोहल्ले में रूबी का जहां मायका है, इसी गली में थोड़ा आगे कुछ घर छोड़ कर रूबी के राहुल ने भी यहां एक प्लौट खरीद कर मकान बना लिया. राहुल के घर और रूबी के मायके के बीच की गली मात्र 4 फीट चौड़ी है. गांव छोड़ कर कुछ सालों बाद ये लोग इस संकरी गली में बने मकान में रहने लगे.
दिल में बसा गौरव
एक दिन बारिश की झमाझम में रूबी बाजार से सब्जियां ले कर लौट रही थी. उस की साड़ी हलकी सी भीग चुकी थी और वह जल्दीजल्दी घर की ओर बढ़ रही थी, तभी मोहल्ले का युवक गौरव उसे देख कर रुक गया. उस ने अपनी छतरी रूबी की ओर बढ़ाई और मुसकराते हुए कहा, ”भाभीजी, भीग जाएंगी. लीजिए, मेरी छतरी ले लीजिए. मैं तो घर के पास ही हूं.’’
रूबी ने हिचकिचाते हुए छतरी ली, लेकिन उस की आंखों में गौरव की उस छोटी सी मदद ने एक अनजानी चिंगारी जला दी. अगले दिन रूबी ने छतरी लौटाने के बहाने गौरव के घर पर जाना तय किया. छतरी ले कर जा ही रही थी कि रास्ते में उसे गौरव मिल गया. वह बोला, ”अरे भाभीजी, आप ने क्यों कष्ट किया. छतरी लेने मैं ही घर आ जाता. इस बहाने से एक कप चाय भी मिल जाती.’’
रूबी ने कहा, ”अब तो यह अपनी छतरी संभालो. चाय के लिए फिर किसी दिन आ जाना, मेरा दरवाजा आप के लिए हमेशा खुला मिलेगा.’’
यह बस 2-3 मिनट की औपचारिक बातचीत थी, मगर रूबी को चलतेचलते लगा जैसे किसी ने लंबे सूखे दिन के बाद जरा सा पानी छिड़क दिया हो. एक दिन गौरव उस के घर पहुंच गया. रूबी घर में बिलकुल अकेली थी, उसी समय अचानक अभिषेक भी वहां आ गया. दोनों उस समय चाय पी रहे थे. रूबी ने गौरव से परिचय कराते हुए कहा कि यह मेरा मुंह बोला भाई अभिषेक है. फिर गौरव की तरफ इशारा करते हुए रूबी ने कहा कि यह गौरव है. ये मोहल्ले में ही रहता है. मुझे बहन मानता है.
दोनों की यह पहली मुलाकात थी. उस के बाद अकसर रूबी के घर या बाहर भी कभीकभी कहींकहीं दोनों मिल जाया करते थे. औपचारिक बातचीत के साथसाथ उन दोनों में दोस्ती भी हो गई. रूबी की कोशिश रहती कि एक बार में उस के घर एक ही व्यक्ति से मुलाकात हो. दोनों एकदूसरे पर भरोसा भी करते थे. दिलचस्प बात यह कि इन दोनों के मन में कहीं न कहीं शक भी पनप रहा था कि भाई है या मेरी तरह आशिक. कुछ ही मुलाकातों में गौरव और रूबी एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे.
राहुल को गौरव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. एक दिन राहुल बाजार से घर पर आया. उस समय रूबी के साथ गौरव बैठा चाय पी रहा था. स्थिति बहुत आपत्तिजनक तो नहीं थी, लेकिन शक पनप जाने के लायक काफी थी.
यह नजारा देख कर राहुल का पारा चौथे आसमान पर पहुंच गया. इस से पहले कि वह कोई सवाल करता, गौरव ही बोल पड़ा, ”दीदी, चाय में तो मजा आ गया.’’
यह सुन कर राहुल सामान्य हो गया. 2-4 बातें गौरव से भी हुईं. फिर गौरव रुबी दीदी राहुल जीजा को नमस्ते कर के चला गया. चाय की इस मुलाकात के बाद अगली मुलाकात में रूबी ने गौरव से कहा कि उस दिन तुम्हारा स्टेप शानदार रहा, जिस से राहुल का गुस्सा शांत हो गया. नहीं तो यह हमारे बीच का प्यार परवान नहीं चढ़ पाता.
धीरेधीरे गौरव उस की दिनचर्या का हिस्सा बनने लगा, वह पूछता, ”भैया की दुकानदारी कैसी चल रही है? सीजन में तो जूते की अच्छी मांग होगी?’’
रूबी को यह अच्छा लगता कि कोई तो है जो उस के पति के बिजनैस के बारे में इतनी तल्लीनता से पूछ रहा है. बस धीरेधीरे दोनों की बातें, दोनों की आदतें और दोनों की बेचैनियां एकदूसरे में घुलने लगीं. राहुल मेहनती था, पर बिजनैस की चिंता, कर्ज की किस्तें और बढ़ता हुआ खर्च उस के स्वभाव को चिड़चिड़ा बना रहे थे. घर पर उस की बातचीत ज्यादातर पैसों, बिलों और थके हुए तानों के बीच उलझ जातीं. रूबी के दिल में कहीं यह बात बैठ गई कि उस की मुसकराहट अब पति के लिए जरूरी नहीं रही.
रूबी और गौरव दोनों को समझ में आ गया कि जो रिश्ता उन के बीच बन चुका है, वह नाम के बंधन से परे, दिल की गहराई में जड़ें जमा चुका है. एक दिन मौका पाते ही 2 जिस्म एक जान हो गए. फिर तो यह सिलसिला चलता ही रहा.
दोनों पकड़े गए रंगेहाथ
जब कभी राहुल बिजनैस के काम से बाजार चला जाता, गौरव घर आ जाता. बच्चे स्कूल में होते. दोनों मौजमस्ती करते. अभिषेक से भी ज्यादा आनंद वह गौरव के साथ महसूस कर रही थी. शाम का वक्त था. राहुल ने अपना ब्रीफकेस उठा कर जल्दबाजी में कहा, ‘मैं बाजार जा रहा हूं, कल शाम तक लौटूंगा’, इतना कह कर वह निकल गया. बच्चे सो चुके थे. घर में अब सिर्फ रूबी थी. उस ने तुरंत फोन कर के गौरव से घर आने को कहा.

मौके का फायदा उठाने के लिए गौरव रूबी के घर पहुंच गया.
”कितनी देर लगाई आज?’’ रूबी ने हलके से ठहाका लगाते हुए कहा.

पति की हत्यारोपी रूबी को पुलिस में ले जाते हुए
”बाजार गया था, वहां ट्रैफिक में फंस गया था,’’ गौरव ने आतेआते अपनी शर्ट का एक बटन खोल दिया और उस के पास पहुंच कर उस की कमर में हाथ डाल दिया.
”अब सजा सुनाओ, कितना इंतजार करवाया?’’ रूबी ने भी उस के गले में बांहें डाल दीं.
”सजा तो बहुत कुछ बाकी है. पहले तो यह सजा पूरी करो.’’ गौरव ने उसे दीवार से सटा दिया.
रूबी की सांसें तेज हो गईं. उस ने गौरव के होंठों को अपने होंठों से ढंक लिया. एक ऐसी भूख के साथ, जो सालों से दबी हुई थी. 15 साल पहले राहुल के साथ भी ऐसे ही पल आते थे, पर वो जल्दी खत्म हो जाते. अब कमरे में सिर्फ सांसों की आवाज थी. दोनों एकदूसरे में खोए हुए थे. ऐसे जैसे दुनिया में सिर्फ यही 2 लोग बचे हों. जल्दबाजी में वे दरवाजा बंद करना भी भूल गए थे. तभी अचानक राहुल आ गया.
राहुल हुआ लापता
दरअसल, राहुल को पूरा शक हो गया था कि उस की पत्नी गौरव के साथ रंगरलियां मनाती है, इसलिए वह जाने का बहाना कर के घर में ही अपने गोदाम में छिप गया था. यही घटना राहुल की हत्या का सबब बन गई. रूबी ने अपने प्रेमी गौरव के साथ मिल कर अपने पति राहुल की हत्या की ऐसी योजना बनाई कि एक महीने तक पता ही नहीं चल सका कि राहुल कहां चला गया. उसे जमीन खा गई या आसमान निगल गया.
शायद कभी पता चलता भी नहीं, लेकिन कहते हैं कि अपराधी कितना भी चालाक हो, कोई न कोई ऐसा क्लू पुलिस के हाथ लग ही जाता है. फिर जमीन की तह से भी पुलिस अपराधी को खोज लेती है. राहुल ने राजमिस्त्री के काम से हट कर जूतों के कारोबार में कदम रखा था. घर से ही यह काम शुरू किया. वह अलगअलग जगहों पर जूते सप्लाई करता था. उस ने देहरादून में भी एक किराए की जगह ले रखी है. वहां भी बिजनैस को बढ़ा रहा था. देहरादून एक पर्यटक स्थल है.
कभीकभी वहां सैलानी बहुत बड़ी संख्या में आ जाते हैं, जिस के कारण होटल में ठहरने को जगह भी नहीं मिल पाती थी. इसलिए राहुल ने किराए पर एक कमरा ले लिया था. बिजनैस के सिलसिले में उस का हमेशा घर से बाहर आनाजाना लगा रहता. अभी कुछ दिन पहले राहुल की बुआ की बेटी की शादी थी. राहुल को शादी की तैयारी के लिए जाना था. इस के अलावा उसे कुछ खरीदारी भी करनी थी. 18 नवंबर, 2025 को उस ने अपनी पत्नी रूबी से कहा, ”मैं किसी काम से बाहर जा रहा हूं, कल तक लौट आऊंगा.’’
18 नवंबर का पूरा दिन बीत गया. 19 नवंबर आया, पर राहुल घर नहीं लौटा. पत्नी और बच्चे इंतजार कर रहे थे. हालांकि वो काम की वजह से कईकई दिनों तक घर नहीं आता था. यह नौरमल बात थी, इसलिए बच्चों को उतनी चिंता नहीं थी. 20 नवंबर आया. बेटा और बेटी भी मम्मी से पापा के बारे में पूछ रहे थे. बेटी के अनुसार पापाजी का मोबाइल फोन कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रहा था. कभी औन रहता तो कभी स्विच्ड औफ हो जाता.
शायद बैटरी खराब हो गई होगी. बच्चों के जिद करने पर रूबी ने जब पति को कौल किया तो उस का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था. कुछकुछ देर बाद और ट्राई किया, लेकिन हर बार मोबाइल स्विच्ड औफ ही मिला. बेटी ने बताया कि पापा अपने फूफा के घर भी जाने वाले थे. हो सकता है कि काम पूरा करने के बाद वहीं चले गए हों. शादी के सामान की खरीदारी करवानी थी.
अब फूफा को कौल किया गया. उन्होंने कहा कि राहुल तो यहां पर आया ही नहीं. बारीबारी से पत्नी कभी बच्चे बाकी रिश्तेदारियों में कौल करते रहे, लेकिन राहुल का कहीं कुछ पता नहीं चला. इसी तरह एक दिन और बीत जाता है. अब रूबी ने फैसला किया कि राहुल जहां भी काम के सिलसिले में जाते थे, वहां जा कर पता करेगी. इस के बाद रूबी बच्चों के खुद पति की खोज में निकल गई. 22 नवंबर, 2025 को यह देहरादून के उस किराए वाले मकान में भी पहुंच गई, जहां राहुल का अकसर आनाजाना होता था.
रूबी ने मकान मालिक से बात की. अभी तक 4 दिन बीत चुके थे. मकान मालिक ने कहा कि राहुल तो यहां पर कई दिनों से नहीं आए. समझ नहीं आ रहा था कि राहुल कहां चला गया. अंत में थकहार कर रूबी ने 24 नवंबर, 2025 को कोतवाली चंदौसी में पति के लापता होने की सूचना दर्ज कराई. पुलिस ने उस की हर एक डिटेल ली. राहुल की गुमशुदगी दर्ज कर ली. इस की जानकारी आसपास के दूसरे थानों में भी भिजवा दी.
ऐसे ही इस का भाई जुगनू है. उस के खिलाफ चंदौसी कोतवाली में कई मामले दर्ज हैं. जो चोरीचकारी, लूटपाट और छिनैती के मामले बताए गए हैं. वह वर्तमान में मुरादाबाद जेल में बंद है. भाई के कारनामों में बहन रूबी का भी दखल रहता था. बताते हैं कि जब पुलिस जुगनू को पकडऩे के लिए जाती तो रूबी पुलिस से उलझ जाती थी. आसपास के लोग भी रूबी से दूरी बना कर रखते, इस डर से कि कब किस पर झूठा केस कर दे. रूबी कोई आम सुंदरी नहीं थी.
रूबी एक हेकड़ और दबंग महिला थी. बताते हैं कि साल 2016 में राहुल का अपने गांव में जमीन को ले कर विवाद हो गया था. उस समय रूबी अपने पति के साथ गांव के ही मकान में रहती थी. तब रूबी ने मोर्चा संभाला और विरोधियों को धूल चटाई थी. रूबी ने गांव के 3 लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए रजपुरा थाने में केस दर्ज करवाया था. इस में एक पिता, बेटा और भतीजे को नामजद कराया गया था. वह झगड़ा तो शांत हुआ. गांव के लोगों ने फैसला करा दिया था. नामजद लोगों को इस के लिए भरी पंचायत में माफी मांगनी पड़ी थी. ऊपर से रूबी ने उन तीनों से केस वापस लेने के लिए भारीभरकम रकम भी वसूल की थी.
घटना से करीब डेढ़ महीने पहले चंदौसी के सैनिक चौराहे के पास एक जमीन खाली कराने के लिए रूबी अपने प्रेमी अभिषेक के लिए मैदानेजंग में उतर आई थी. रूबी की हिम्मत, हौसला और तेवर देख कर विरोधी घबरा गए और उन्हें जमीन छोड़ कर भागना पड़ा था. रूबी के कारण ही प्रेमी अभिषेक को मोटी रकम का फायदा हुआ था.
बदले में रूबी को खुश करने के लिए अभिषेक ने भी अच्छीखासी रकम रूबी को दी थी. ऐसे ही विवाद का एक और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिस में रूबी ने अभिषेक और गौरव के साथ मिल कर हंगामा किया था. उस समय उस का पति राहुल भी साथ था. इस की एक तसवीर भी वायरल हो रही है, जिस में रूबी को अपने दोनों प्रेमी और पति के साथ कहीं पर हंगामा करते हुए देखा जा सकता है.
इसी तरह के कई अन्य विवादों में रूबी चंदौसी, रजपुरा, बनियाठेर थानों में लगभग 6-7 केस दर्ज करवा चुकी है. कुछ महीने पहले अभिषेक, रूबी और गौरव नैनीताल घूमने गए थे. वहां एक होटल में इन्होंने रात्रि विश्राम किया था. दोनों का टारगेट यह था कि इन में से कोई एक भी किसी काम से बाहर चला जाए तो दूसरा रूबी के साथ अपने प्रेम का टारगेट पूरा कर ले. शक तो दोनों को एकदूसरे पर हो ही गया था. यह सब आजमाने के लिए अभिषेक होटल से कोई बहाना कर के बाहर गया.
गौरव समझा 1-2 घंटे में तो घूम कर वापस आएगा, लेकिन अभिषेक कुछ ही मिनट बाद जैसे ही होटल के कमरे में घुसा, उस ने रूबी और गौरव को आपत्तिजनक हालत में देख लिया. उस समय उस ने गौरव से तो कुछ नहीं कहा, ऐसा बन गया जैसे उस ने कुछ देखा ही न हो. उस दिन के बाद से वह धीरेधीरे उन दोनों से किनारा करने लगा.
लाश के मिले टुकड़े
रूबी अब गौरव पर पूरी तरह से फिदा थी. इसलिए अभिषेक रूबी की प्रेम कहानी से बाहर हो गया और उस का संपर्क रूबी और गौरव दोनों से ही टूट गया. धीरेधीरे समय बीत रहा था. लेकिन राहुल का कुछ अतापता नहीं था. सभी लोग काफी चिंतित थे. अब दिन हफ्तों में बदलने लगे. 3 हफ्ते गुजर गए. सब की उम्मीद भी अब दम तोड़ चुकी थी. 27 दिन बाद यानी 15 दिसंबर, 2025 को राहुल के घर से करीब 800 मीटर दूर पतरौआ रोड है. यहीं पर एक ईदगाह स्थित है. इसी के पास रोड के साइड से एक नाला गुजरता है.
यह इलाका काफी सुनसान रहता है. आसपास खेतखलिहान है. कोई सीसीटीवी कैमरा भी दूरदूर तक नहीं है. सुबह के करीब 9 बजे के आसपास कुछ लोग इसी रास्ते से गुजर रहे थे. उन्होंने देखा कि नाले के पास काफी सारे कुत्ते इकट्ठे हैं और आपस में लड़ रहे हैं. एकदूसरे पर भौंक रहे हैं और किसी चीज को ले कर छीनाझपटी भी कर रहे हैं. उन के पास एक बड़ा सा पौलीथिन बैग पड़ा था, जिस में कुछ भारीभरकम चीज रखी हो.
उस में से काफी तेज गंध भी आ रही थी. मामला संदिग्ध लगा तो एक व्यक्ति ने पुलिस कंट्रोल रूम का 112 नंबर डायल कर दिया. पुलिस कंट्रोल रूम से यह सूचना चंदौसी कोतवाली में दे दी गई. सूचना मिलते ही कोतवाल अनुज तोमर पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. यह 15 दिसंबर, 2025 की बात है. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां 2 टूरिस्ट बैग नाले में पड़े थे. एक को कुत्तों ने फाड़ दिया था, जिस में से मानव बौडी के टुकड़े दिखाई दे रहे थे. जब खोला गया तो उस में से किसी आदमी का धड़ वाला भाग निकला. इस का हाथ, पैर, सिर सब कुछ गायब था.
पुलिस को दूसरे बैग के अंदर कुछ और भी सामान और एक पौलीथिन मिली. सामानों में ब्लैक और ग्रीन कलर की एक टीशर्ट थी. इस पर खून के धब्बे भी थे. एक अंडरवियर भी मिला और पौलीथिन में बायां हाथ अच्छे से सील पैक था, जिस वजह से नाले में पड़े रहने के बावजूद भी उस में पानी प्रवेश नहीं कर सका. शायद इस की बदबू बाहर न आ जाए, इस वजह से पैक किया हो. दिखने में लाश के ये अंग कई हफ्ते पुराने लग रहे थे. फोरैंसिक टीम को सूचित कर दिया गया.
फोरैंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य इकट्ठा करने शुरू कर दिए. इतनी देर में आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग भी जुटने लगे. पुलिस ने यहीं आसपास और भी छानबीन की. शायद और भी शरीर का हिस्सा भी मिल जाए. काफी तलाश के बाद भी सिर और शरीर के बाकी अंग कहीं नहीं मिले. घटनास्थल के फोटोग्राफ लिए गए और वीडियो भी बनाई गई. पुलिस द्वारा बरामद शरीर और बरामद कपड़ों को दिखा कर पहचान कराने की कोशिश की गई.
कटर से काटी लाश
फोरैंसिक जांच के दौरान पुलिस को बहुत सारी चीजें पता चलीं. ऐसा लगा जैसे आराम से घटना अंजाम दी गई है. पूरी सफाई के साथ शरीर के टुकड़े किए गए. शरीर को काटने में तेजधार हथियार नहीं, बल्कि किसी मशीन का इस्तेमाल किया गया. 16 और 17 दिसंबर, 2025 तक यानी 2 दिन लगातार पुलिस की टीमें बौडी के विभिन्न अंगों को तलाश करती रहीं. पुलिस की कोशिश थी कि किसी तरह से सिर बरामद हो जाए तो मृतक की पहचान हो सके.
कोतवाल अनुज कुमार तोमर लगातार केस की जांच कर रहे थे. घटनास्थल पर बैग में जो हाथ मिला था, पुलिस द्वारा उस का ध्यान से निरीक्षण किया तो उस पर एक टैटू नजर आया. हाथ के बीच में ‘राहुल’ नाम लिखा हुआ था. अब राहुल कौन हो सकता है? राहुल या तो इस का ही नाम होगा या फिर इस के किसी करीबी का. उधर पुलिस की टीमें थाने में ऐसी पुरानी फाइल्स खंगाल रही थीं, जिन की गुमशुदगी लिखाई गई हो. चंदौसी थाने में ही एक केस फाइल मिला जूता कारोबारी राहुल कुमार का. 18 नवंबर, 2025 से गायब था. उस की गुमशुदगी उस की पत्नी रूबी द्वारा लिखाई गई थी.
पुलिस ने रूबी को बुला कर बरामद कपड़े व लाश के टुकड़े दिखाए. रूबी ने सब कुछ देख कर अपने पति के अवशेष होना स्वीकार नहीं किया. साफ इनकार कर दिया. थकहार कर पुलिस ने 18 दिसंबर, 2025 को लाश के टुकड़ों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस का सब से पहला काम था मृतक की पहचान पता करना. पुलिस के पास तो कोई ऐसी निशानी भी नहीं थी. अब पुलिस को शक हो चला था कि यह लाश राहुल की ही हो सकती है. क्योंकि एक तरफ तो राहुल गुमशुदा था और दूसरी तरफ लाश की बांह पर भी ‘राहुल’ के नाम का टैटू बना हुआ था.
जनपद संभल के थाना चंदौसी क्षेत्र में 24 नवंबर, 2025 को रूबी नाम की एक महिला ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी. गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद रूबी ने कभी पुलिस से कोई कौंटेक्ट नहीं किया, न ही उच्च अधिकारियों से शिकायत की कि पुलिस उस के पति को ढूंढने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है, इसलिए पुलिस का शक अब यकीन में बदलता जा रहा था, लेकिन कोई सबूत हाथ में आने से पहले वह रूबी पर हाथ डालना नहीं चाहती थी.
पुलिस ने लापता राहुल के मोबाइल नंबर की कौल डिटेल्स और लोकेशन निकलवाई. पता चला कि राहुल का मोबाइल फोन घर पर ही 18 नवंबर, 2025 से ही स्विच औफ दिख रहा था. 19 दिसंबर, 2025 को पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ चुकी थी. पुलिस को राहुल की पत्नी रूबी पर शक हो रहा था. 20 दिसंबर, 2025 को पुलिस ने रूबी से फिर पूछताछ की. उस के बात करने का तरीका अजीब था. जैसे कि वह जानबूझ कर दुखी होने का नाटक कर रही हो. जांच के दौरान पुलिस ने रूबी से उस का मोबाइल फोन मांगा, लेकिन वह मोबाइल देने से इंकार कर रही थी.
पुलिस को मना करने की वजह भी नहीं बता रही थी. डांटडपट कर पुलिस ने मोबाइल लिया और इस की जांच की. सारे फोटोज, कौल डिटेल्स, चैटिंग सब कुछ चैक किया गया. इसी में ही रूबी के पति राहुल के साथ अलगअलग समय में लिए गए अनेक फोटो मिले. उसी दौरान पुलिस को 2 फोटो ऐसे मिले, जिन्होंने इस केस की परतें प्याज के छिलकों की तरह खोल कर रख दी. एक फोटो में राहुल वही टीशर्ट पहने दिखा, जो नाले के पास बैग में मिली थी.
जब पुलिस ने बरामद टीशर्ट रूबी को दिखाई थी तो उस ने उसे पहचानने से क्यों इंकार किया? मान लें कि वह कोई दूसरा टीशर्ट हो, किसी और का हो, फिर भी यह बोल सकती थी कि राहुल के पास ऐसा ही टीशर्ट है. पर उस ने बिलकुल ही पहचानने से मना कर दिया था.
पत्नी निकली कातिल
पुलिस ने थोड़ा ध्यान से देखा तो फोटो में राहुल के हाथ पर उस के नाम का टैटू गुदा था. इस से पुलिस को विश्वास कि नाले से बरामद लाश के टुकड़े राहुल के ही थे. इस से साफ हो गया कि रूबी अपने पति राहुल की गुमशुदगी और मौत को ले कर झूठ बोल रही है. अब पुलिस ने रूबी से अपने अंदाज में पूछताछ शुरू कर दी. इस पूछताछ में रूबी सच बोलने के लिए मजबूर हो गई. उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपने पति राहुल की हत्या कराई थी. उस ने इस हत्याकांड की एक हृदयविदारक स्टोरी सुनाई.
18 नवंबर की रात को जब राहुल घर पर नहीं था. रूबी ने गौरव को अपने घर बुला लिया. रूबी को पता नहीं था कि वह कहीं गया नहीं है, घर में ही छिपा है. राहुल को मौके का इंतजार था. प्यार के नाम पर वासना का खेल शुरू होते ही राहुल अंदर आया. दरवाजा खुला था. क्योंकि दोनों इतने खोए हुए थे कि चिटकनी लगाना भी भूल गए थे. राहुल को देखते ही कमरे में सन्नाटा छा गया.

एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई
उस की आंखें पहले रूबी पर टिकीं, जो अब तक चादर से जिस्म ढकने की कोशिश में सीने से लगाए बैठी थी. बाल बिखरे, होंठ कांपते हुए. फिर गौरव पर, जो बिस्तर के किनारे खड़ा था, हाथ में चादर का कोना पकड़े, लेकिन शरीर अभी भी नंगा था. राहुल का चेहरा पहले सफेद पड़ गया, फिर लाल. उस की आंखों में कुछ ऐसा था नफरत, सदमा, धोखा और शायद एक पल के लिए दया भी. वह कुछ बोलना चाहता था, लेकिन गला सूख गया था.
सन्नाटा तोड़ते हुए आवाज आई, ”राहुल…’’ यह कांपती आवाज रूबी की थी, ”तुम… तुम इतनी जल्दी?’’
राहुल ने जवाब नहीं दिया. उस ने बस एक बार फिर दोनों को देखा, जैसे कोई तसवीर देख रहा हो, जो कभी भूलना नहीं चाहता. फिर बिना एक शब्द बोले, वह मुड़ा. उस के कदम भारी थे. दरवाजे तक पहुंच कर वह रुका. पीठ फेर कर बोला, कपड़े पहन ले. वह आक्रोश से बुरी तरह तमतमा रहा था. फिर उस ने रूबी को बुरी तरह पीटा और सरेबाजार उस का जुलूस निकालने की धमकी दी.

कोतवाल अनुज तोमर
बस इसी से पगलाई रूबी ने गौरव को इशारा किया. गौरव ने लोहे की रौड उठा कर राहुल के सिर में मार दिया. वह वहीं गिर गया. उस के सिर से खून का फव्वारा फूट पड़ा. रूबी भी पति पर हमला करने की पोजीशन ले चुकी थी. उस ने हथौड़ा ले कर उस के सिर पर मारमार कर सिर कुचल दिया. इस तरह दोनों ने मिल कर राहुल का कत्ल कर दिया और अगले दिन बाजार से इलैक्ट्रिक कटर मशीन ला कर घर में ही अपने पति की लाश के टुकड़ेटुकड़े कर डाले.
पुलिस ने रूबी और गौरव की निशानदेही पर कत्ल और सबूत मिटाने में इस्तेमाल किए गए कटर मशीन, हथौड़ा, मोबाइल फोन और लोहे की रौड जैसी चीजों को भी अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस ने धड़ का हिस्सा और एक बांह तो बरामद कर ली थी, लेकिन राहुल का सिर और उस के बाकी के हाथपांव बरामद नहीं हुए. रूबी और गौरव ने उस की लाश के अन्य हिस्सों को एक कार में ले कर बहजोई बबराला होते हुए राजघाट पहुंचे. वहां से गुजर रही गंगा नदी में राहुल के शरीर के बाकी टुकड़ों को फेंक दिया, जो अब बह कर दूर जा चुके हैं. शायद नष्ट भी हो चुके हों.
इस पूरे हत्याकांड की भनक उन्होंने बच्चों तक को नहीं लगने दी. राहुल की बेटी पापा के मर्डर में मम्मी और गौरव के अलावा अभिषेक को भी आरोपी मान रही है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि अभिषेक के रूबी से संबंध विच्छेद हो चुके थे. वह इस कहानी से अलग था. इस का इस घटना में कोई रोल नहीं है. चंदौसी शहर के लिए इतनी निर्मम हत्या का यह पहला मामला बताया जा रहा है.
गौरव ने जिस दुकान से बैग खरीदे थे, उस दुकानदार का नाम विनोद अरोड़ा है. उसे भी यह जान कर बहुत दुख हुआ कि उस के बैग का इस्तेमाल एक निर्मम हत्या के बाद लाश के टुकड़े कर के फेंकने के लिए किया गया. गौरव को कटर देने वाला व्यक्ति जितेंद्र उर्फ जीतू तो उस समय बिलखबिलख कर रोने लगा, जब पत्रकारों ने उस से कहा कि तुम ने कटर गौरव को क्यों दिया था. उसे इस बात का बहुत दुख हुआ कि लोहे का सरिया काटने वाला कटर मानव शरीर को काटने में इस्तेमाल किया गया.
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने 22 दिसंबर, 2025 को एक प्रैस कौन्फ्रैंस में घटनाक्रम का खुलासा किया. पुलिस ने दोनों आरोपियों गौरव व रूबी को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Love Crime






