Bihar News: पटना के बहुचर्चित गल्र्स हौस्टल कांड के गुनहगारों में रेपिस्ट से ले कर पुलिस अधिकारी, 2 प्राइवेट अस्पताल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डौक्टर तक शामिल पाए गए. लेकिन गिरफ्तारी केवल हौस्टल मालिक की हुई. मृतका नाबालिग थी, मामला पोक्सो का भी बन गया. पढ़ें, पूरी कहानी. कैसे, कब, क्या हुआ और कौनकौन हैं आरोपी?
बिहार के जहानाबाद की रहने वाली गायत्री भी त्रद्गठ्र्ठं श्रेणी की ही थी. करिअर और जीवन को बेहतर बनाने के सपने उस ने भी देखे थे. पटना में रह कर मैडिकल की पढ़ाई के लिए नीट की तैयारी कर रही थी. इंटरमीडियट की परीक्षा भी सिर पर थी. निश्चित तौर पर उस के जेहन में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलौजी के अलावा और कुछ नहीं था.
वह 45 किलोमीटर की दूरी तय कर लोकल ट्रेन से 5 जनवरी, 2026 की शाम को 3 बजे के करीब अपने शंभु हौस्टल पहुंच गई थी, जो चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्नाचक में है. रात को 9 बजे अपनी मम्मी से उस की फोन पर बात भी हुई थी. उस ने ठीकठाक हौस्टल पहुंचने की जानकारी मम्मी को दे दी थी. अगले रोज 6 जनवरी, 2026 की शाम को गायत्री के फेमिली वालों को एक अनजाने फोन नंबर से कौल मिली कि उन की बेटी गायत्री की तबीयत खराब है. उसे डा. सहजानंद हौस्पिटल में भरती करवाया गया है.
फोन करने वाला न तो हौस्टल का कोई स्टाफ था और न ही उस का संचालक या मालिक ही था. इस पर गायत्री के पेरेंट्स को हैरानी हुई. वे घबरा गए. साइबर फ्रौड की आशंका से घिर गए कि किसी ने फोन गलत मकसद से तो नहीं किया है. फिर भी उस के फेमिली वालों ने पटना में रह रहे अपने एक परिचित को फोन कर हौस्पिटल भेज दिया. परिचित कुछ समय में ही हौस्पिटल पहुंच गए, जो हौस्टल के बगल में ही है. उन्होंने वहां गायत्री को एडमिट पाया, लेकिन वह बेहोश थी.
डा. सहजानंद ने गायत्री को सीरियस बता कर इलाज में असमर्थता जताई और उसे सेंट्रल हौस्पिटल, पटना रेफर कर दिया. वहां पर साथ में हौस्टल की एक केयर टेकर नीतू भी थी. वह उसे सेंट्रल हौस्पिटल न ले जा कर प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल ले कर गई. उस के साथ परिचित भी गए. रात के 8 बज चुके थे, तब तक गायत्री के फेमिली वाले भी प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल पहुंच गए. हौस्पिटल में गायत्री को भरती कर लिया गया था. उस की हालत नाजुक बनी हुई थी. उसे क्या हुआ है, फेमिली वालों को कुछ पता नहीं चल पा रहा था.
वे हैरानपरेशान थे कि आखिर उन की बेटी को अचानक क्या हो गया, जो उस की हालत सीरियस हो गई. उसे आईसीयू में रखा गया था और वहां डाक्टरों व नर्स के सिवाय किसी को भी वहां जाने की इजाजत नहीं थी. लिहाजा ठंड की रात में फेमिली वाले हौस्पिटल के वेटिंग एरिया में बैठे थे. उन के पास उसी रात एक महिला पुलिस (एसआई) आई और उन्हें अपना नंबर दे कर बोली, ”कुछ भी शक हो या जरूरत पड़े तो फोन कीजिएगा.’’
उन की जैसेतैसे कर रात बीती. वे पूरी रात हौस्पिटल के डौक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ रूम का चक्कर लगाते रहे कि आखिर उन की बच्ची को हुआ क्या है, जो इतनी सीरियस हो गई. किंतु उन्होंने महसूस किया कि वहां उन की परेशानी समझने वाला कोई नहीं था.
सुबह हुई और 7 जनवरी को भी उन की बेटी दिन भर हौस्पिटल में एडमिट रही. उस रोज भी डौक्टर ने नहीं बताया कि लड़की के साथ क्या कुछ हुआ है. वे सिर्फ यही कहते रहे, ‘बस! इलाज चल रहा है. बच्ची बेहोश है, होश आने पर मिलवाया जाएगा.’
उसी दिन गायत्री के फेमिली वाले शंभु गल्र्स हौस्टल गए. उन्हें पहले तो उस के रहने वाले कमरे में जाने से मना कर दिया गया. काफी मिन्नतों के बाद उन्हें कमरे में जाने दिया गया. वह कमरा साफ था. उस वक्त हौस्टल में कई छात्राएं थीं, लेकिन किसी ने भी उन से बात नहीं की. उन्हीं में से उन्हें किसी ने फोन पर गायत्री के बीमार होने की सूचना दी थी.
क्यों छिपाया सच
उस रोज भी गायत्री आईसीयू में बेहोश पड़ी रही. अगले दिन 8 जनवरी, 2026 को प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल के ही एक डौक्टर ने शाम को बताया कि गायत्री के साथ फिजिकली कुछ हुआ है, चोट के निशान हैं, ब्लीडिंग हुई है. यह सुनते ही उस के फेमिली वाले परेशान हो गए. गायत्री के होश में आने के इंतजार में शाम हो गई. करीब 6 बजे उसे होश आया.

सामने अपनी मम्मी को देख कर वह रोने लगी. उस का रुदन तेज हो गया. रोते हुए उस ने बताया कि उस के साथ गलत हुआ है. उसी वक्त वहां डौक्टर आ गए और उन्होंने फेमिली वालों को बाहर निकाल दिया. उसी वक्त वे दोबारा हौस्टल गए. वहां मौजूद एक केयर टेकर के साथ कमरे में गए. बच्ची के कमरे से कुछ सामान निकाला. साथ में कुछ पैसे, जो करीब 11 हजार थे, निकाल लिए. उस वक्त कमरे का फर्श बिलकुल साफ था, लेकिन वहां का सामान इधरउधर बिखरा पड़ा था. उन्हें केयर टेकर की बातों से भी आभास हुआ कि बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है.
फेमिली वाले काफी परेशान हो गए थे. उन्होंने 9 जनवरी को उस नंबर पर कौल किया, जो 6 जनवरी की रात को महिला एसआई ने दिया था. उन्होंने बेटी की गंभीर हालत और उस के बारे जो कुछ मालूम हुआ, उस बारे में एसआई को बताया. कुछ समय में ही कदमकुआं थाने से पुलिस आई और बयान ले कर चली गई. कदमकुआं थाने ने इस मामले को चित्रगुप्त नगर थाने में भेज दिया. उस के बाद चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल आ गईं. वह भी गायत्री के फेमिली वालों के बयान और उस की तसवीर आदि ले कर चली गई. तब तक गायत्री फिर बेहोश हो गई थी. इस कारण उस का बयान नहीं लिया जा सका.
उसी दिन 9 जनवरी की शाम को एक महिला नीलम अग्रवाल प्रभात मेमोरियल हौस्पिटल पहुंची. उस ने खुद को हौस्टल की मालकिन बताया और फेमिली वालों से बोली कि हौस्टल का नाम बदनाम हो जाएगा, इसलिए केस को वापस ले लीजिए, मैनेज कर लीजिए. इस पर नीलम की फेमिली वालों के साथ बहस हो गई. वे तूतूमैंमैं करते हुए आपस में उलझ गए. उन के बीच काफी बकझक होने और बिगड़ती स्थिति को देख कर मौत से जूझ रही गायत्री के एक रिश्तेदार ने चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी को कौल कर दोबारा बुलाया.

(ऊपर) रोहित मैडिकल स्टोर का मालिक जहां से गायत्री द्वारा नींद की गोलियां खरीदे जाने की बात कही जा रही है और (दाहिने) शंभू हौस्टल का मालिक मनीष रंजन
रोशनी कुमारी तुरंत हौस्पिटल पहुंच गईं. नीलम अग्रवाल एसएचओ रोशनी कुमारी के साथ भी उलझ गई. उसे एसएचओ से झगड़ते देख साथ आई एक महिला कांस्टेबल ने नीलम अग्रवाल को एक थप्पड़ जड़ दिया. नीलम बौखला गई, लेकिन उसे पुलिस अपने साथ ले गई. बाद में फेमिली वालों को मालूम हुआ कि उसे थाने ले जा कर छोड़ दिया गया था.
शंभू गल्र्स हौस्टल की मालकिन नीलम अग्रवाल के बारे में बताया जाता है कि उस के पति शंभू अग्रवाल का निधन हो चुका है. उस के 2 बेटे श्रवण और अंशु हैं. जिस बिल्डिंग में शंभू गल्र्स हौस्टल चल रहा है, उस बिल्डिंग का मालिक मनीष रंजन है. वह हौस्टल में ही सब से ऊपर के फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहता है. 9 जनवरी, 2026 को पूरे दिन और पूरी रात गायत्री बेहोश रही. उस की स्थिर हालत हो देख कर फेमिली वालों की चिंता बढ़ती जा रही थी. उसे वे 10 जनवरी को इस अस्पताल से बाहर ले जाना चाहते थे, लेकिन प्रभात मेमोरियल का डा. सतीश उन्हें जाने नहीं दे रहा था.

मृतका गायत्री को फाइल फोटो और उस की मौत पर प्रदर्शन करते आक्रोशित स्थानीय लोग
तब फेमिली वाले आईसीयू में जबरन घुस गए. बेहोश बच्ची को वहां से डिस्चार्ज करने को ले कर फेमिली वालों की डा. सतीश के साथ जबरदस्त बहस हो गई. उन की कहासुनी के साथसाथ धक्कामुक्की भी हुई.
संदिग्ध रही पुलिस भूमिका
फेमिली वाले किसी तरह से गायत्री को 10 जनवरी, 2026 को ही दिन में 2-3 बजे के आसपास उसे मेदांता अस्पताल ले कर गए. तब तक गायत्री की हालत काफी बिगड़ चुकी थी. मेदांता में एडमिट करने से पहले ही डौक्टरों ने कहा कि इस की हालत काफी नाजुक है. बचने की संभावना सिर्फ एक फीसदी है, वे उसे नहीं बचा सकते हैं. फिर भी काफी मिन्नतों के बाद गायत्री को मेदांता में भरती कर लिया गया. वहां गायत्री का नए सिरे से इलाज शुरू हुआ. डौक्टरों ने उसे बचाने में पूरी ताकत झोंक दी, किंतु 11 जनवरी को दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे गायत्री को मृत घोषित कर दिया.
गायत्री की मौत का मामला पुलिस में जा चुका था, इसलिए मेदांता से पहले 2 अस्पतालों में उस के इलाज, हौस्टल में हालत बिगडऩे और असामयिक मौत की वजह से उस की लाश फेमिली वालों को तुरंत नहीं सौंपी जा सकी. प्रोटोकाल की प्रक्रिया के तहत 12 जनवरी, 2026 को गायत्री के शव को पोस्टमार्टम के लिए पटना मैडिकल कालेज और हौस्पिटल (पीएमसीएच) भेज दिया गया. पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का पार्थिव शव शाम को बाहर निकाला गया. उसे फेमिली वालों का सौंप दिया गया. फेमिली वाले उस के अंतिम संस्कार के लिए गंगा किनारे पटना के गुलाबी घाट ले जाने लगे. इस दरम्यान फेमिली वालों को पीएमसीएच में पोस्टमार्टम टीम के एक डौक्टर से मालूम हुआ कि उन की बेटी के साथ रेप हुआ था. उस ने यहां तक कहा कि वे लाश को न जलाएं.
उस के बाद परिजन अचानक उस की लाश को गुलाबी घाट के गेट से वापस पटना के गांधी मैदान के एक किनारे कारगिल चौक पर ले आए. फेमिली वालों और उन के साथ कुछ लोगों ने कारगिल चौक पर ले जा कर शव को रख दिया. तभी एएसपी कुमार अभिनव ने वहां पहुंच कर बताया कि उन्हें बरगलाया गया है. गायत्री के साथ कोई रेप नहीं हुआ है. फेमिली वालों ने जब पुलिस की बात मानने से इनकार कर दिया तो पुलिस कारगिल चौक से उन्हें जबरन हटाने के लिए उन पर लाठीचार्ज करने लगी और जबरदस्ती एंबुलेंस से उस की लाश को गुलाबी घाट ले गई.
तब परिजन पीछेपीछे गए और गायत्री का अंतिम संस्कार कर दिया. तब तक हौस्टल में एक नीट की छात्रा के मौत की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी. फेमिली वाले दोहरे मानसिक तनाव में आ गए. एक तरफ वे अपनी मेधावी बेटी की असामयिक मौत और उस के साथ गलत किए जाने की पीड़ा के गम से घिरे हुए थे, दूसरी तरफ वे पुलिस की हर हिदायत और बात मानने के दबाव में भी आ गए. क्योंकि उन्हें गायत्री की मौत के संबंध में मुंह बंद रखने की सख्त हिदायत मिली थी.
उन्हें चित्रगुप्त थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए 15 जनवरी, 2026 को बुलाया गया था. वे वहां सुबह 10 बजे ही पहुंच गए. लंबे इंतजार के बाद रात के 8 बजे पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली. जिस में स्पष्ट कहा गया था कि ‘यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.’
कौन था रेपिस्ट
रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान, खरोंच, बल प्रयोग के संकेत और जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाने की आशंका जताई गई थी. इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिस में लिखा था कि छात्रा की मौत स्वाभाविक नहीं थी. उस के शरीर पर कई जगहों पर चोट के निशान मिले हैं. साथ ही उस से रेप किया गया, इस की भी पुष्टि की गई है. पीडि़ता के प्राइवेट पार्ट में अंदरूनी चोटें पाई गई हैं. इसी आधार पर रेप की पुष्टि की गई है. पीडि़ता के शरीर और गरदन पर खरोंच व दबाव के निशान भी मिले हैं.
इस से यह साफ हो गया था कि घटना के समय छात्रा ने हरसंभव विरोध किया था. रिपोर्ट में मौत के कारणों का भी जिक्र किया गया था. बताया गया कि छात्रा की मौत गला दबाने या दम घुटने से होने के संकेत मिले हैं. इस से उस थ्योरी को भी बल मिल गया, जिस में कहा जा रहा था कि छात्रा की हत्या की गई है. दिलदिमाग को सुन्न कर देने वाली इस रिपोर्ट को पढऩे के बावजूद मृतका के फेमिली वाले अपने गम और पीड़ा को समेटे हुए बोझिल मन से जहानाबाद लौट गए, लेकिन वे आक्रोश से भरे हुए थे. जबकि स्थानीय पत्रकारों और विपक्ष के नेताओं के संपर्क में बने रहे.
गायत्री नीट की तैयारी कर रही थी. वह जहानाबाद की रहने वाली थी. पटना के एक कोचिंग सेंटर में वह नीट (राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा) की तैयारी कर रही थी. पटना के चित्रगुप्तनगर में ही वह शंभू गल्र्स हौस्टल में रहने लगी थी. दिसंबर के अंतिम सप्ताह में नए साल की छुट्टी होने पर अपने घर जहानाबाद चली गई थी. जहानाबाद से वह 5 जनवरी को पटना अपने हौस्टल में वापस लौटी थी, लेकिन इस के अगले ही दिन 6 जनवरी को जब वह ब्रेकफास्ट और लंच के लिए कमरे के बाहर नहीं आई, तब हौस्टल के स्टाफ को फिक्र हुई. इस के बाद जब वो कमरे में दाखिल हुए तो गायत्री बेहोश मिली.
बिहार की सोशल मीडिया के हर दूसरे न्यूज चैनल पर नीट छात्रा की मौत की चर्चा होने लगी. उन की खबरों में तरहतरह की बातें सामने आने लगीं. दूसरी तरफ पुलिस का कहना था कि छात्रा ने अत्यधिक मात्रा में नींद की गोलियों का सेवन किया था. उस के शरीर में टाइफाइड जैसे संक्रमण के लक्षण पाए गए थे, जिस से उस की हालत गंभीर हो गई थी. जब मीडिया ने इस पर सवाल उठाए और छात्रा के साथ रेप होने की आशंका जताई, तब पुलिस ने अपने दावे के साथ इसे गलत बताया. इस पर पुलिस का कहना था कि हौस्टल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, हौस्टल स्टाफ के बयान और प्रारंभिक मैडिकल रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि छात्रा के साथ किसी प्रकार का यौनशोषण नहीं हुआ.
जैसे ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट की आशंका जताने वाली बात सामने आई, पुलिस की आत्महत्या वाले तथ्य का सड़कों पर विरोध शुरू हो गया. पुलिस के इस दावे के खिलाफ बड़ी संख्या में छात्रछात्राओं के अलावा विपक्ष ने सीधेसीधे बिहार सरकार के गृहमंत्री को चुनौती दे दी. हौस्टल और प्रभात अस्पताल के सामने विरोध प्रदर्शन होने लगे. मोमबत्तियां जलाए हुए मृतका को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया. इसी के साथ ही मृतका के पापा ने भी मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि उन की बेटी पुलिस, अस्पताल और हौस्टल संचालक की मिलीभगत का शिकार हुई है.
उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को धमकाया गया और मामले को दबाने के लिए लाखों रुपए देने के प्रलोभन भी दिए गए. इसी के साथ मृतका के फादर ने अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से छात्रा के फादर ने चित्रगुप्त नगर थाने में 16 जनवरी, 2026 को एफआईआर (केस नंबर 14/26) दर्ज करवा दी. एफआईआर में हौस्टल में बेटी के साथ दुष्कर्म कर उस की हत्या किए जाने और पटना पुलिस की शुरुआती जांच में लापरवाही के कारण यह संदेह गहराने लगा कि पुलिस और प्रभात मेमोरियल अस्पताल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

एसआईटी के साथ पटना सेंट्रल रेंज के आईजी जितेंद्र राणा ने मामले की जांच शुरू कर दी
बढ़ते जनदबाव के कारण पुलिस ने तेजी से काररवाई शुरू कर दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हौस्टल बिल्डिंग के मालिक मनीष कुमार रंजन, जो उदल प्रसाद के बेटे और पटना के मुन्ना चौक, सहजानंद गली के रहने वाला है, को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. नीट छात्रा कांड में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन 16 जनवरी, 2026 को तब किया गया, जब इस मामले को ले कर कई नेताओं और स्थानीय लोगों द्वारा पटना में होहल्ला किया गया. गृहमंत्री को पत्र लिख कर जांच की गुहार लगाई गई.
उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि गायत्री के साथ गलत हुआ है और उसे अस्पताल ने ही इलाज के दौरान मौत की नींद सुला दिया. इस का जितना दोषी हौस्टल है, उतनी ही दोषी पुलिस और अस्पताल भी है.
फेमिली पर दबाव क्यों
एक राजनेता ने तो सीधेसीधे हौस्टल प्रशासन द्वारा देहव्यापार करवाए जाने तक का आरोप लगा दिया. जबकि एक अन्य नेता ने मृतका के पेरेंट्स से मिल कर पूरे मामले की तहकीकात की और दोषियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने इस बात का भी परदाफाश किया कि पीडि़ता के परिवार पर यौन शोषण और मामले को छिपाने के लिए दबाव बनाया गया था. उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और पीडि़त परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा, ‘परिवार का मानना है कि पहले जांच अधिकारी लापरवाह थे. वे अपनी बेटी के लिए विभागीय काररवाई और न्याय चाहते हैं.’
पीडि़ता के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि हौस्टल मैनेजमेंट ने मामले को दबाने के लिए उन्हें 10 लाख रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने पहले अस्पताल के एक डौक्टर पर भी सबूत मिटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. गायत्री को बाद में जयप्रभा मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई.
इस के बाद बिहार पुलिस के डीजीपी विनय कुमार ने एसआईटी गठित करने का आदेश दिया. यह कदम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के एक दिन बाद उठाया गया, जिस में संकेत मिला था कि यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता, जो पुलिस के पहले के दावे के विपरीत था कि लड़की ने आत्महत्या की थी. पटना मैडिकल कालेज और अस्पताल में किए गए पोस्टमार्टम के अनुसार, शरीर पर कई नाखूनों के निशान, शारीरिक चोटें और संघर्ष के निशान पाए गए थे, जो हाल ही में उस के साथ किए गए जबरदस्ती के इस्तेमाल का संकेत देने वाले थे.
12 जनवरी की इस रिपोर्ट में कहा गया कि ‘यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता’ और आगे की जांच के लिए एआईआईएमएस को विशेषज्ञ राय के लिए भेजा गया है. इस रिपोर्ट के बाद पटना में जबरदस्त सार्वजनिक आक्रोश का माहौल बन गया. इसे देखते हुए पटना सेंट्रल रेंज के इंसपेक्टर जनरल (आईजी) जितेंद्र राणा ने नई बनी एसआईटी के साथ जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी. जांच कुल 5 बिंदुओं पर शुरू की गई. फोरैंसिक और तकनीकी जांच के लिए फोरैंसिक टीम ने छात्रा के कपड़ों, कमरे और हौस्टल से सबूत इकट्ठे किए. कपड़ों पर मिले नमूनों में पुरुष जैविक ट्रेस (जैसे स्पर्म) पाए गए, जिस से यौन हिंसा की संभावना जांच का अहम हिस्सा बनी.

एसएओ रोशनी कुमारी
दूसरी जांच डीएनए की थी. टीम ने संदिग्धों के डीएनए सैंपल लिए. संदिग्धों में मृतका के करीबी रिश्तेदार के अलावा हौस्टल में अकसर आनेजाने वाले लोगों के भी लिए गए. इन के नमूने को परीक्षण के लिए भेजा गया, ताकि उस के मिलान से यह पता चले कि किस का स्पर्म से लड़की के कपड़े पर पाए गए स्पर्म से मेल खाते हैं. इस आधार संदिग्ध दोषी तक पहुंचा जा सकता है. शुरू में कुल 6 लोगों के नमूने लिए गए थे, लेकिन 40 लोगों तक को इस जांच में शामिल किया जा सकता है. हालांकि यह भी विवाद का एक कारण बन गया.
जांच का तीसरा पहलू सर्विलांस के लिए सीसीटीवी और डिजिटल ट्रेल करना है. इस के लिए सीसीटीवी फुटेज, फोन डेटा (सीडीआर) और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जाने लगी, ताकि घटना के समय संदिग्धों की लोकेशन का पता लगाया जा सके. चौथे किस्म के जांच का बिंदु गवाह के बयान और पूछताछ को बनाया गया. लिखे जाने तक 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई और करीब 40 बयान दर्ज किए गए, जिन में परिवार के सदस्य भी शामिल थे. पांचवीं जांच हौस्टल और मैडिकल कालेज से संबंधित थी.
इस के लिए एसआइटी ने शंभू गल्र्स हौस्टल को सील कर दिया. मैडिकल रिकौर्ड, डौक्टरों और हौस्टल स्टाफ के बयान भी जांच में लिए गए. इसी दौरान मृतका द्वारा नींद की दवा खरीदने की भी चर्चा हुई. बाद में जहां से दवा खरीदी गई, उस की जांचपड़ताल की गई. इस के अलावा एसआईटी ने अतिरिक्त काररवाई कर पुलिस के प्रारंभिक रवैए पर भी सवाल उठाए. कुछ संदिग्ध पुलिस अधिकारियों को जांच में अनदेखी और जानबूझ कर मृतका के खिलाफ काम में लिप्त पाया गया. उस के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया.
सब से पहली गाज चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ पर गिरी. उसे सस्पेंड कर दिया गया. उस पर शुरुआती जांच में लापरवाही, समय पर काररवाई नहीं करने और सबूतों को सही तरीके से सुरक्षित नहीं करने का लगाया गया. निलंबित किए जाने वालों में कदमकुआं थाने के अतिरिक्त थानेदार हेमंत झा भी हैं, उन पर भी जांच में गंभीरता नहीं दिखाने और जरूरी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया गया. इन दोनों पुलिस अधिकारियों को लापरवाही और कर्तव्य में चूक के कारण निलंबित किया गया है, ताकि आगे की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हो सके.
इस तरह से एसआईटी की जांच इस मुकदमे को एक साधारण मौत के मामले से बदल कर एक संभावित यौन अपराध व हत्या की दिशा में ले गई. एफएसएल और डीएनए जैसे वैज्ञानिक सबूतों की मदद से यह समझने की कोशिश की गई कि इस पूरे मामले में किस का योगदान है? संदिग्ध कौन था? वास्तविक अपराध कैसे हुआ? Bihar News






