Love Crime: 25 वर्षीय जिकरा परवीन का पति कामधंधा करने दूसरे प्रदेश क्या गया, वह देवर दिलदार कुरैशी के लंगोटिया यार 27 वर्षीय मोहम्मद फैजान को प्यार करने लगी. फैजान ने न सिर्फ जिकरा बल्कि दिलदार की बहन को भी प्यार के जाल में फांस लिया था. फिर एक दिन इन के इश्क का ऐसा खूनी अंजाम हुआ कि…
जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में एक रोज दोपहर में दिलदार ने भाभी व दोस्त को हमबिस्तर होते देख लिया. यह देखने के बावजूद उस ने अपने गुस्से पर काबू रखा और दबे पांव घर से चला गया. चूंकि उस समय घर पर उस की बहन भी मौजूद थी, अत: दिलदार को यह भी शक हुआ कि बहन भी भाभी से मिली हुई है. उस के मन में भी फैजान के प्रति चाहत है. उस का भी नाजायज रिश्ता फैजान से हो सकता है.
सच्चाई जानने के बावजूद दिलदार ने एक बार फिर भाभी जिकरा परवीन व फैजान को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे दोनों नहीं माने और मनमानी करते रहे. बहन को समझाया तो वह अपनी भाभी का ही पक्ष लेने लगी. इतना ही नहीं, उस ने दोनों के नाजायज रिश्तों को भी नकार दिया. अपने आप को भी पाकीजा बताया. दिलदार तब समझ गया कि बहन मन्नू भी फैजान के प्रेमजाल में फंस चुकी है. भाभी जिकरा परवीन ने खानदान की इज्जत को खाक में मिलाया था और दोस्त मोहम्मद फैजान ने दोस्ती का छुरा उस की पीठ में घोंपा था, इसलिए दिलदार ने उन दोनों को सबक सिखाने की ठान ली. बहन के प्रेम संबंधों पर भी उसे शक था, अत: उसे भी सबक सिखाने का निश्चय किया.

16 जनवरी, 2026 की दोपहर दिलदार अपनी योजना के तहत हसवा कस्बे के बाजार पहुंचा. वहां उस ने एक दुकान से तेज धार वाला चापडऩुमा चाकू 500 रुपए में खरीदा और उसे कमर में खोंस कर रख लिया. इस के बाद शराब ठेके पर जा कर उस ने शराब पी, साथ ही शराब का एक क्वार्टर और खानेपीने का सामान सुरक्षित कर लिया.
दोपहर बाद लगभग 3 बजे दिलदार अपने दोस्त मोहम्मद फैजान के घर पहुंचा. उस समय वह घर पर ही था. दिलदार उसे क्रिकेट खेलने के बहाने करबला के पास बगीचे में ले गया. कुछ दूरी पर बगीचे में लड़के क्रिकेट खेल रहे थे. दिलदार ने फैजान से कहा कि पहले शराब पी कर मूड बना लेते हैं, फिर क्रिकेट खेलने चलेंगे. इस के बाद दोनों ने बगीचे में बैठ कर शराब पी.
नशा हावी होने पर दिलदार ने उस से पूछा, ”दोस्त, सचसच बताना कि भाभीजान से तुम्हारा नाजायज रिश्ता है या नहीं? क्या मेरी बहन से भी तुम्हारे ताल्लुकात हैं?’’
”तुम्हारी भाभी और मेरे बीच वही रिश्ता है जो एक बीवीशौहर के बीच होता है. तुम्हारी बहन से भी मेरे प्रेम संबंध हैं. वह भी मुझ पर जान छिड़कती है.’’ फैजान ने नशे में सच्चाई बयां कर दी.

जिकरा परवीन के अवैध संबंध से बेहद खफा था देवर दिलदार
फैजान की बात सुन कर दिलदार के तनबदन में आग लग गई. उस पर खून का भूत सवार हो गया. उस ने कमर में खोंसा चाकू निकाला और फैजान के गले पर वार कर दिया. फैजान जान बचा कर भागा, लेकिन चंद कदम की दूरी पर लडख़ड़ा कर गिर पड़ा. उस के बाद दिलदार ने फैजान के गले पर 2 और वार कर उस का गला रेत दिया.
फैजान कुछ देर तड़पा, फिर उस ने दम तोड़ दिया. हत्या किए जाने की भनक न क्रिकेट खेल रहे लड़कों को लगी और न ही किसी अन्य को. फैजान की हत्या करने के बाद दिलदार हाथ में खून सना चाकू लहराते हुए अपने घर पहुंचा. उस के सिर पर खून का भूत सवार था.
घर में उस समय उस की भाभी जिकरा परवीन व बहन मौजूद थी. अम्मी व छोटी बहन किसी काम से पड़ोस में गई थीं. घर में घुसते ही वह चीखा, ”भाभी… ओ भाभी…’’
2 खून के बाद…
दिलदार के चीखने की आवाज सुन कर जिकरा परवीन कमरे से बाहर आ गई. उसे देख कर दिलदार बोला, ”भाभी, मैं ने तुम्हारे यार फैजान को तो उस की सही जगह में पहुंचा ही दिया है. अब तुम्हारी बारी है.’’
देवर के रूप में साक्षात मौत को सामने देख कर जिकरा परवीन सिर से पांव तक कांप उठी. वह जान बचा कर छत की तरफ भागी, लेकिन दिलदार ने उसे आंगन में ही पकड़ लिया. फिर उस ने उस की पीठ व गरदन पर चाकू से कई प्रहार किए. जिकरा परवीन खून से सराबोर हो कर जमीन पर गिर पड़ी. कुछ पल बाद ही उस ने दम तोड़ दिया. इसी बीच भाभी की चीख सुन कर मन्नू उसे बचाने आई तो दिलदार उस पर भी टूट पड़ा और चाकू से हाथ, सिर व गरदन पर वार कर उसे घायल कर दिया.
मन्नू भी खून से लथपथ हो कर आंगन में धराशाई हो गई. कुछ देर बाद मांबेटी वापस आईं तो घर में खूनी खेल देख कर उन की रूह कांप गई. इस के बाद तो घरमोहल्ले में कोहराम मच गया. इसी बीच फैजान की लाश आम के बाग में पड़ी होने की खबर लगी तो मोहल्ले के लोग वहां पहुंच गए.
फेमिली वालों ने फैजान का शव देखा तो उन की चीखें गूंजने लगीं. उन की चीखों से लोगों का कलेजा कांप उठा. मृतका जिकरा परवीन के पेरेंट्स को मौत की खबर लगी तो वे भी आ गए और बेटी का शव देख कर बिलख पड़े.
इधर डबल मर्डर करने के बाद दिलदार कुरैशी हसवा कस्बा चौकी पहुंचा. उस समय चौकी इंचार्ज वी.के. सिंह वहां मौजूद थे. दिलदार उन के पास पहुंचा और बोला, ”सर, मैं ने उन दोनों को मार डाला है.’’
दिलदार की बात सुन कर वी.के. सिंह चौंक पड़े, ”तूने किसे मार दिया? कहीं नशे में तो बकबक नहीं कर रहा है?’’
”सर, मैं नशे में जरूर हूं. लेकिन जो कह रहा हूं, वह सच है. मैं ने सचमुच अपनी भाभी जिकरा परवीन व उस के आशिक फैजान को मार डाला है. भाभी की लाश हमारे घर में तथा फैजान की लाश आम के बाग में पड़ी है. यकीन न हो तो जा कर देख लो. भाभी को बचाने आई अपनी बहन पर भी हमला किया. पता नहीं वह जिंदा है या वह भी मर गई?’’
रूह कपा देने वाली दिलदार की बात सुन कर चौकी इंचार्ज वी.के. सिंह ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. इस के बाद डबल मर्डर की सूचना असोथर थाने के एसएचओ राजेंद्र सिंह को दी. सूचना पाते ही राजेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ हसवा कस्बा आ गए और चौधराना मोहल्ला स्थित घटना वाले मकान पर जा पहुंचे. उस समय वहां भीड़ जुटी थी.

जिकरा परवीन के घर के बाहर जमा भीड़
मामले की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने डबल मर्डर की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी और निरीक्षण में जुट गए. घर के अंदर आंगन में एक महिला की लाश पड़ी थी, जबकि दूसरी युवती घायल अवस्था में पड़ी थी. राजेंद्र सिंह ने घायल युवती को इलाज के लिए जिला अस्पताल भिजवाया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे हैलट अस्पताल कानपुर रेफर किया गया.
बाग में मिली लाश
एसएचओ राजेंद्र सिंह अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी अनूप कुमार सिंह, एएसपी महेंद्र पाल सिंह तथा सीओ (थरियांव) वीर सिंह पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया.

बाग में मिली मोहम्मद फैजान की लाश

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. घर के अंदर आंगन में मृतका जिकरा परवीन खून से लथपथ पड़ी थी. उस की पीठ पर 3 घाव तथा गले पर 5 घाव थे. बदन के सारे कपड़े खून से सने थे. फर्श पर भी खून फैला था. मृतका की उम्र 25 वर्ष के आसपास थी. फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल से सबूत जुटाए. मृतका जिकरा परवीन के ससुरालीजन मौके से फरार हो गए थे, लेकिन उस की अम्मी तहरून निशा व अब्बू फकीरे वहां मौजूद थे. वे दोनों बेटी के शव के पास बिलख रहे थे.
पुलिस अधिकारियों ने उन दोनों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि बेटी का शाम 4 बजे फोन आया था. तब उस ने कहा था कि उसे आ कर ले जाओ. लेकिन देर शाम खबर लगी कि बेटी के देवर दिलदार ने उस की हत्या कर दी और बहन को घायल कर दिया है. पता नहीं मेरी बेटी ने ऐसा कौन सा गुनाह किया था, जो उसे मार डाला. गुनहगार को सख्त सजा मिलनी चाहिए.
इस के बाद पुलिस अधिकारी आम के बगीचे में पहुंचे, जहां मोहम्मद फैजान की लाश पड़ी थी. लाश के पास मृतक के फेमिली वाले बिलख रहे थे. पुलिस अधिकारियों ने उन्हें सांत्वना दी, फिर बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र 27 वर्ष के आसपास थी. उस की हत्या बेरहमी से की गई थी. उस के गले में 3 बड़े घाव थे. चाकू से गला रेता गया था. कपड़ेे खून से तरबतर थे. जमीन पर भी खून था.
पुलिस अधिकारियों ने मृतक के अब्बू रुआब व चाचा मोहम्मद शमीम से घटना के बारे में पूछताछ की. इस पर उन्होंने बताया कि फैजान और दिलदार दोस्त थे. उन की दोस्ती नफरत में क्यों बदल गई, उन्हें पता नहीं. लेकिन हत्या के बाद पता चला कि दिलदार को शक था कि उस की भाभी और फैजान के बीच नाजायज रिश्ता था. शायद इसी शक में उस ने डबल मर्डर कर दिया. मृतक व मृतका के फेमिली वालों से पूछताछ के बाद एसपी अनूप कुमार सिंह ने एसएचओ राजेंद्र सिंह को आदेश दिया कि वह दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद आरोपी दिलदार कुरैशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार करें.
एसपी के आदेश पर एसएचओ राजेेंद्र सिंह ने जिकरा परवीन व मोहम्मद फैजान के शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल फतेहपुर भेज दिए. इस के बाद फैजान के अब्बू रुआब उर्फ राजू की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103(1) के तहत दिलदार कुरैशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की जांच, आरोपी के बयानों एवं मृतकों के परिजनों से की गई पूछताछ के आधार पर इश्क के खूनी खेल की जो सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई, इस प्रकार है.
दोनों भाई थे अपराधी
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर शहर का एक मुसलिम बाहुल्य मोहल्ला है— पीरनपुर. इसी मोहल्ले में फकीरे अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी तहरून निशा के अलावा 3 बेटियां थीं, जिस में जिकरा परवीन सब से छोटी थी. दोनों बड़ी बेटियों का निकाह हो चुका था. फकीरे छोटामोटा कामधंधा कर अपने परिवार का भरणपोषण करता था.

मृतका जिकरा परवीन की अम्मी तहरून
फकीरे की बेटी जिकरा परवीन अपनी बहनों में सब से खूबसूरत और होशियार थी. उस ने मोहल्ले के मदरसे से हाईस्कूल तक तालीम हासिल की थी. जिकरा परवीन 18 साल की हो गई थी. पेरेंट्स की अब एक ही ख्वाहिश थी कि जल्दी से कोई अच्छा लड़का देख कर उस का निकाह कर दिया जाए. इस के लिए फकीरे ने खोजबीन शुरू की तथा नातेरिश्तेदारों से भी कहा. काफी प्रयास के बाद एक रिश्तेदार ने मोहम्मद आमिर उर्फ बल्लू का नाम सुझाया.
आमिर उर्फ बल्लू के वालिद वाजिद कुरैशी, फतेहपुर जनपद के थरियांव थाने के हसवा कस्बे के चौधराना मोहल्ले में रहते थे. उन के परिवार में बीवी शकीला के अलावा 6 बेटे व 3 बेटियां थीं. उन का एक बेटा विदेश में था. वाजिद के 2 बेटे आमिर उर्फ बल्लू व दिलदार उस के साथ रहते थे. दोनों पशुओं की खरीदफरोख्त का व्यापार करते थे. आमिर व दिलदार दोनों अविवाहित थे.

अस्पताल में उपचाराधीन दिलदार की छोटी बहन मन्नू और मृतक फैजान के रोतेबिखलते फैमिली वाले
फकीरे ने जब आमिर उर्फ बल्लू को देखा तो उस ने उसे अपनी बेटी जिकरा परवीन के लिए पसंद कर लिया. इस के बाद 13 जून, 2019 को फकीरे ने जिकरा परवीन का निकाह आमिर उर्फ बल्लू के साथ कर दिया. जिकरा परवीन बेहद खूबसूरत थी. ससुराल में उस का चांद सा मुखड़ा जिस ने भी देखा, उसी ने उस के रूपयौवन की तारीफ की. आमिर उर्फ बल्लू भी खूबसूरत बीवी पा कर खुश था. उस ने कभी सोचा नहीं था कि उसे इतनी खूबसूरत बीवी मिलेगी.
निकाह के बाद जिकरा परवीन और आमिर ने बड़े प्यार से जिंदगी की शुरुआत की. दोनों एकदूसरे को बेहद चाहते थे. इसी चाहत में 3 साल कब बीत गए, पता ही न चला. इन 3 सालों में जिकरा परवीन 3 बेटियों की मां बन गई.

भाभी जिकरा परवीन और उस के प्रेमी मौहम्मद फैजान की हत्या का आरोपी दिलदार कुरैशी
मोहम्मद आमिर उर्फ बल्लू अपने भाई दिलदार के साथ पशुओं के खरीदनेबेचने का व्यापार करता था. दोनों भाई अपराधी प्रवृत्ति के थे. उन का अकसर किसी न किसी से झगड़ा होता रहता था. थाना थरियांव में दोनों के खिलाफ मारपीट, हत्या का प्रयास, आम्र्स ऐक्ट व गोवध निवारण अधिनियम के तहत कई मुकदमे दर्ज थे. थरियांव थाने में दोनों भाइयों की हिस्ट्रीशीट खुली थी. पुलिस ने जब दोनों भाइयों पर शिकंजा कसा तो वह उत्तर प्रदेश के बजाय मध्य प्रदेश जा कर पशु तसकरी करने लगे. आमिर उर्फ बल्लू अब 2-4 माह में एक बार घर आता और कुछ दिन रह कर वापस चला जाता.
इसी तरह दिलदार भी घर आता और फिर कुछ माह रह कर भाई आमिर के पास चला जाता. दोनों भाइयों को सदैव पुलिस का डर बना रहता था. दिलदार कुरैशी का एक दोस्त था मोहम्मद फैजान. वह भी हसवा कस्बा के चौधराना मोहल्ले में रहता था. उन के घरों के बीच मात्र 200 मीटर का फासला था. फैजान के अब्बू रुआब उर्फ राजू टेलर थे.
रुआब के परिवार में पत्नी रोशन बानो के अलावा 2 बेटे मोहम्मद फैजान, मोहम्मद अरमान तथा 2 बेटियां थीं. रुआब खुद तो रायबरेली में रहते थे और वहीं टेलङ्क्षरग का काम करते थे, जबकि उन का परिवार हसवा कस्बे में ही रहता था. दिलदार और फैजान एक ही गली में खेलकूद कर बड़े हुए थे. दोनों बचपन के दोस्त थे. हाईस्कूल तक उन्होंने साथ ही पढ़ाई की थी. लेकिन दिलदार जब हाईस्कूल में फेल हो गया तो उस ने पढ़ाई बंद कर दी. इस के बाद वह अपराधिक गतिविधियों में लग गया.
लेकिन फैजान होनहार युवक था. उस ने इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास कर ठाकुर युगराज सिंह महाविद्यालय में बीएससी में प्रवेश ले लिया था. वह पढ़ाई पूरी कर विदेश (सऊदी अरब) जाना चाहता था. दिलदार और फैजान के बीच गहरी दोस्ती थी. दोनों साथ खातेपीते व उठतेबैठते थे. उन को क्रिकेट खेलने का भी शौक था. दिलदार शराब का लती था. उस ने फैजान को भी इस की लत लगा दी थी. दिलदार तो इतना लती हो गया था कि जब उसे शराब नहीं मिलती तो वह नशे का इंजेक्शन लगा लेता था.
दोस्ती के नाते फैजान का दिलदार के घर आनाजाना लगा रहता था. घर आतेजाते ही एक रोज फैजान की नजर दिलदार की खूबसूरत भाभी जिकरा परवीन पर पड़ी. वह उसे चाहत भरी नजरों से देखता रहा और उस से रसभरी बातें करता रहा. जिकरा परवीन अब उस के दिल में रचबस गई थी और वह उस से प्यार करने लगा था.
खूबसूरती पर फिदा
जिकरा परवीन की खूबसूरती ने फैजान के दिल में हलचल मचा दी थी. अत: वह खिंचा हुआ उस के घर आ जाता था. जिकरा परवीन भी हंसतीबोलती थी. चूंकि दोनों ने आपस में देवरभाभी का रिश्ता बना रखा था, इसलिए उन में हंसीमजाक भी हो जाता था. एक रोज ऐसे ही हंसीमजाक के दौर में फैजान बोला, ”भाभी, तुम बहुत खूबसूरत हो. जी चाहता है कि…’’
फैजान के इतना कहने पर जिकरा परवीन ने मादक आंखों से उसे देखा और मुसकरा कर बोली, ”तुम्हारा क्या जी चाहता है फैजान?’’
”यही कि तुम्हारा चांद जैसा चेहरा हमेशा मेरी आंखों के सामने रहे.’’ फैजान ने दिल की बात जुबां पर ला दी.
”अच्छा,’’ जिकरा परवीन हंसने लगी, ”मैं तुम्हें इतनी हसीन लगती हूं.’’
”हां भाभी,’’ फैजान जिकरा परवीन का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोला.
जिकरा परवीन का शौहर आमिर मध्य प्रदेश में पड़ा रहता था, अत: वह पुरुष सुख से वंचित थी. ऐसे में जवान फैजान का घर आना उस को अच्छा लगता था. उस की रसीली बातें उस के दिल में गुदगुदी पैदा करती थीं. अब उस की उमंगें भी छलांग मारने लगी थीं. वह भी फैजान की ओर आकर्षित होने लगी थी.

मौहम्मद फैजान और दिलदार के बीज जबरदस्त याराना था, लेकिन भाभी के साथ अवैध संबंधो ने जानी दुश्मन बना दिया
धीरेधीरे जिकरा परवीन और फैजान के दिल नजदीक आते गए. उन के बीच की दूरियां सिमटती गईं. एक रोज फैजान ने मुसकरा कर जिकरा परवीन की आंखों में देखा तो उन में उसे अजीब सी प्यास मचलती नजर आई. उस से रहा नहीं गया तो उस ने उसे बांहों में भर लिया. फिर तो तूफान तभी थमा, जब दोनों की हसरतें पूरी हुईं.
इस के बाद अकसर दोनों का मिलन होने लगा. दिलदार की बहन को भी फैजान का घर आना और बतियाना अच्छा लगता था. अत: वह भाभी की वफादार बन गई. वह भी फैजान को पसंद करती थी. वह फैजान के घर आनेजाने की जानकारी परिवार के किसी अन्य सदस्य को नहीं देती थी. जुलाई 2025 में दिलदार मध्य प्रदेश से आ कर घर में रहने लगा. आते ही दोनों के बीच दोस्ती फिर से कायम हो गई. दोनों की महफिल भी सजने लगी. कभीकभी फैजान और दिलदार की महफिल दिलदार के घर पर ही जम जाती. 2 महीने तक सब कुछ सामान्य रहा.
एक दिन दिलदार कुरैशी शाम को घर में दाखिल हुआ तो उस की नजर कमरे में बैठे मोहम्मद फैजान पर पड़ी. वह उस की भाभी जिकरा परवीन से हंसीठिठोली कर रहा था. जिकरा परवीन भी उस की बातों में सराबोर थी.
यह देख कर दिलदार का गुस्सा सातवें आसमान जा पहुंचा. वह दांत पीसते हुए बोला, ”भाभीजान, अपने यार से ही बतियाती रहोगी या फिर अपने देवर को भी चायपानी को पूछोगी.’’
दिलदार का कटाक्ष जिकरा परवीन के मन में कांटे की तरह चुभ गया. अत: वह गुस्से से बोली, ”कैसी बातें करते हो दिलदार? थोड़ा सोचसमझ कर बोला करो. मोहम्मद फैजान मेरा यार नहीं, गलीटोले के नाते देवर लगता है. वैसे भी फैजान तुम्हारा ही दोस्त है. तुम्हीं उस के साथ उठतेबैठते हो. गपशप लड़ाते हो और महफिल भी जमाते हो. दोष तुम्हारा और लांछन मुझ पर लगाते हो. उस का यहां आना तुम्हें इतना ही बुरा लगता है तो बेइज्जत कर के भगा दो, ताकि दोबारा इधर न आए.’’
”भाभीजान, तुम्हारी लोमड़ी वाली चाल को मैं अच्छी तरह समझता हूं. तुम चाहती हो कि मैं उस का बुरा बन जाऊं और तुम उस की भली बनी रहो. मैं भी उड़ती चिडिय़ा के पर गिन लेता हूं. तुम्हारे दिल में फैजान के लिए जो मोहब्बत है, उसे मैं अच्छी तरह जानता हूं. तुम्हारी ही वजह से यह बेशर्मों की तरह चला आता है. मुझ से मिलने का तो बहाना होता है.’’
दिलदार और जिकरा परवीन की बहस की भनक फैजान के कानों में पड़ी तो वह कमरे से निकल कर आंगन में आ गया और बोला, ”दिलदार भाई, लगता है तुम किसी से लड़ कर आए हो. इसलिए तुम्हारा मूड ठीक नहीं है और सारा गुस्सा भाभीजान पर उतार रहे हो. लेकिन दोस्त, तुम चिंता मत करो. तुम्हारा मूड ठीक करने के लिए मैं साथ में लालपरी लाया हूं. हलक में उतरते ही मूड ठीक हो जाएगा.’’
दिलदार कुरैशी शराब का लती था. फैजान ने शराब लाने की बात कही तो उस का सारा गुस्सा जाता रहा.
वह खुशी का इजहार करते हुए बोला, ”फैजान भाई, मैं भाभी से बहस नहीं कर रहा था, खानेपीने का सामान लाने की बात हो रही थी.’’ उस के बाद उस ने हांक लगाई, ”भाभीजान, कमरे में पानी, गिलास, नमकीन का इंतजाम कर दो. हम दोनों महफिल सजाएंगे.’’
देवर की हांक सुन कर जिकरा परवीन मन ही मन बुदबुदाई, ”कैसा देवर है. कुछ देर पहले चरित्र पर लांछन लगा रहा था, अपने दोस्त को भलाबुरा कह रहा था और अब देखो, शराब पार्टी की बात सुन कर कैसा गिरगिट की तरह रंग बदलने लगा है.’’
जिकरा परवीन ने कमरे में पानी, गिलास, नमकीन का इंतजाम किया. उस के बाद दिलदार और फैजान शराब पीने लगे. शराब पीते वक्त फैजान की निगाहें जिकरा परवीन पर ही टिकी रहीं. जिकरा परवीन भी मंदमंद मुसकरा कर फैजान का नशा बढ़ाती रही. दिलदार को मोहम्मद फैजान का घर आनाजाना नागवार लगता था, लेकिन गहरी दोस्ती के चलते वह फैजान से कुछ कह नहीं पाता था. हालांकि उस ने कई बार इस बाबत फैजान से टोकाटाकी की थी, लेकिन फैजान उस की बात अनसुनी कर जाता था.
दिलदार ने भाभी जिकरा परवीन को भी समझाया था और खानदान की इज्जत की दुहाई दी थी, लेकिन उस पर भी कोई असर नहीं पड़ रहा था. दिलदार कुरैशी को अब शक होने लगा था कि भाभी और दोस्त फैजान के बीच नाजायज रिश्ता है. दोनों मौका पा कर रंगरलियां मनाते हैं. शक का बीज दिलदार के मन में पड़ा तो उसे पनपते देर न लगी.
लेकिन शक के आधार पर वह कोई भी फैसला नहीं लेना चाहता था. वह दोनों को रंगेहाथ पकडऩा चाहता था, अत: वह चोरीछिपे दोनों पर नजर रखने लगा. उस ने अपना शक किसी को भी जाहिर नहीं होने दिया. अपनी योजना के तहत दिलदार कुरैशी ने 16 जनवरी, 2026 को बारीबारी से दोनों की हत्या कर दी और बहन को भी जख्मी कर दिया. इस के बाद पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया.
17 जनवरी, 2026 को पुलिस ने आरोपी दिलदार कुरैशी को फतेहपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. कथा लिखने तक आरोपी की बहन कानपुर के हैलट अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही थी. Love Crime






