Maharashtra News: सोलापुर में म्यूनिसिपल कारपोरेशन चुनाव लड़ रहे ट्रांसजेंडर अय्यूब सैय्यद की हत्या पर इलाके में सनसनी फैल गई. हत्या की वजह चौंकाने वाली थी. उसे नहीं पता था कि जिस गोल्ड के पहनने से उस की खास पहचान बनी थी, वही किसी की आंखों को चुभ रहा था. फिर क्या हुआ? पढ़ें इस मर्डर स्टोरी में…
महाराष्ट्र के सोलापुर में म्यूनिसिपल कारपोरेशन चुनाव की तैयारियां जोरों पर थीं. कुछ दिनों में ही मतदान होना था. अलगअलग वार्डों के लिए उम्मीदवारों ने नामांकन करवा लिया था. उम्मीदवार अपनेअपने चुनाव चिह्नï के साथ प्रचार में जुट गए थे. यह चुनाव भले ही लोकल बौडी का था, लेकिन चुनाव जीतने के लिए एकएक वोट की कीमत थी. इस कारण उम्मीदवार हर वोटर को चुनचुन कर अपने चुनाव चिह्नï पर वोट देने के लिए मनाने में जुटे हुए थे.

उम्मीदवारों में स्त्रीपुरुष के अलावा मुसलिम समाज का एक ट्रांसजेंडर अय्यूब सैय्यद भी वार्ड नंबर 16 से मैदान में था. वह सभी उम्मीदवारों में अलग दिखने वाला और अधिक चर्चित था. अखबारों से ले कर न्यूज चैनलों तक में उस की लगातार चर्चा बनी हुई थी. सोशल मीडिया पर भी वह काफी वायरल हो चुका था. उस की चर्चा जितनी एक ट्रांसजेंडर के चुनाव लडऩे को ले कर थी, उस से कहीं अधिक वह अपने पहनावे के साथ गोल्ड ज्वैलरी को ले कर भी चर्चित था. उस के कुरते या शर्ट पर गले में गोल्ड की मोटी चेन झलकती और चमकती रहती थी.
सोने से लदे कपड़ों में बौलीवुड के मशहूर संगीतकार स्वर्गीय बप्पी लहरी को कौन नहीं जानता? उन के बारे में सोलापुर के लोगों को पता था कि वह जहां भी जाते थे, कई किलोग्राम सोने के जेवर पहने होते थे. गले से ले कर दोनों हाथों की कलाइयां मोटीमोटी सोने की जंजीरों और कड़े से भरी रहती थीं. किंतु उन की बात कुछ और थी. उन की यही खास पहचान बन गई थी और वह सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम अकेले नहीं घूमतेफिरते थे, बल्कि वह हमेशा कुछ लोगों के साथ होते थे.

उन के इस पहनावे का असर अच्छीखासी आमदनी वालों पर भी हुआ था. उन्हें भी लगता था कि सोना पहन कर लोगों के सामने होने से वे भी बप्पी लहरी की तरह चर्चित हो जाएंगे. शायद कुछ इसी तरह की बात अय्यूब सैय्यद के दिमाग में भी थी. यही कारण था कि वह काफी मात्रा में सोने की ज्वैलरी पहनता था और लोगों से बेखौफ मिलताजुलता था. जब वह सार्वजनिक स्थानों पर होता, तब लोगों की निगाहें बरबस उस की तरफ उठ जाती थीं. उस की रौबदार चालढाल और पहनावे को देख कर पहली नजर में हर कोई अचंभित रह जाता था. लोग भूल जाते थे कि वह एक ट्रांसजेंडर है.
उस दिन तारीख 27 दिसंबर, 2025 थी. सोलापुर के सदर बाजार पुलिस थाने के इंसपेक्टर भालचंद्र ढवले अपने पूरे साल की पुलिस डायरी पर नजर गड़ाए हुए थे. तभी एक पुलिसकर्मी ने उन्हें सूचना दी कि पंडारी मसजिद इलाके में किसी ट्रांसजेंडर की हत्या हो गई है. सोलापुर के साथसाथ पूरे महाराष्ट्र में नगरपालिका के चुनाव के प्रचार का जोर था. उसी बीच हत्या जैसी वारदात से पुलिस के सामने एक नई मुसीबत आ गई थी. हत्या भी अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुसलिम समाज के एक व्यक्ति की हुई थी.

ट्रांसजेंडर की हत्या और उस के जेवरात की लूट के आरोपी आफताब इसाक शेख, यशराज उत्तम कांबले और वैभव गुरुनाथ पनगुले
समय गंवाए बगैर भालचंद्र ढवले ने एपीआई सागर काटे एवं अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मौकाएवारदात पंडारी मसजिद के पास जा पहुंचे. वहां लोगों का जमावड़ा लगा था. पुलिसकर्मियों ने तमाशबीनों को वहां से हटाया. पुलिस को भीड़ से ही मरने वाले का नाम मालूम हुआ. वह अय्यूब सैय्यद था. पुलिस को देख कर भीड़ चिल्लाने लगी थी, ‘अय्यूब के कातिल को जल्दी पकडि़ए…वरना अनर्थ हो जाएगा!’
अय्यूब का कत्ल उसी के घर में पहली मंजिल के ऊपर हुआ था. पुलिस वहां गई. लाश की शिनाख्त में जुट गई. उस की पहचान अय्यूब हसन सैय्यद (50 साल) के रूप में हुई. उस के घर का पता मकान नंबर 226, पंढारी मसजिद के पीछे, मुरगी नाला, सदर बाजार, दक्षिण सोलापुर नोट किया गया. पुलिस ने पहली नजर में पाया कि मृतक को गला दबा के मारा गया है. जांच के सिलसिले में मृतक के जख्मी कानों में फटे छेद नजर आए. इस बारे में मालूम हुआ कि वह सोने की बालियां पहनता था, जो खींच कर निकाली गई थी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि इस कारण ही मृतक के कान जख्मी हो गए थे. साथ ही मृतक की अंगुलियों की सोने की अंगूठियां भी गायब थीं.
अय्यूब सैय्यद की लाश उस के घर से ही बरामद होने की खबर फैलते ही इलाके में दहशत का माहौल बन गया. जांच में यह भी पाया गया कि अय्यूब सैय्यद सोशल मीडिया के जरिए सोलापुर म्यूनिसिपल कारपोरेशन चुनाव के लिए कैंपेन चला रहा था. चुनाव प्रचार के कई वीडियो और फोटो उन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड किए जा चुके थे.
उस के हजारों में फालोअर्स थे और पोस्ट्स को लाखों व्यूज मिल चुके थे, जिस से सोशल मीडिया पर उस की लोकप्रियता साफ दिखाई देती थी. ट्रांसजेंडर समुदाय से किसी व्यक्ति के चुनावी मैदान में उतरने की वजह से भी सैय्यद की खूब चर्चा हो रही थी. भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई अय्यूब की हत्या की खबर लोगों के गले नहीं उतर रही थी. जांच का सिलसिला तेजी से आगे बढ़ा. पुलिस कुछ अहम सुराग की तलाश में जुट गई.
अय्यूब के घर के आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई. लश्कर इलाके में 3 अज्ञात लोग 26 दिसंबर, 2025 की रात करीब साढ़े 11 बजे सैय्यद के घर में घुसते दिखाई दिए. वही तीनों संदिग्ध रात करीब 2 बजे घर से बाहर निकलते देखे गए. पुलिस ने इन तीनों संदिग्धों को शक के आधार पर पकडऩे की योजना बनाई. साथ ही जांच में राजनीतिक रंजिश या किसी के साथ निजी दुश्मनी को भी आधार माना गया. पुलिस को मृतक के पड़ोसियों से दिनचर्या की जानकारी मिल चुकी थी.
हालांकि वह सुबह 8 बजे के बाद ही सो कर उठता था, परंतु 27 दिसंबर को दोपहर के 2 बज रहे थे और वह लोगों से मिलने के लिए अपने घर के नीचे नहीं आया था. अय्यूब से मिलने वाले कुछ लोग वापस लौट चुके थे और कुछ अय्यूब के आने का इंतजार भी कर रहे थे. संयोग से उस रोज कामवाली बाई भी देर से आई. वह जल्दीजल्दी अय्यूब के घर की पहली मंजिल पर गई. उस ने कमरे का दरवाजा खुला पाया, जो हमेशा भीतर से बंद रहता था. बाहर से किसी के खटकाने या आवाज देने पर ही खुलता था.
उस ने आवाज लगाई और कुछ पल जवाब का इंतजार किया. लेकिन कमरे से कोई जवाब नहीं मिला तो उसे आश्चर्य हुआ. उस ने भिड़े दरवाजे को धक्का दे कर खोला. सामने का दृश्य देख कर ही उसे गहरा धक्का लगा. उस के पैरों तले की जमीन खिसक गई. अय्यूब अपने बिस्तर पर बेजान सोया था. बारबार आवाज देने के बावजूद कोई जवाब नहीं दे रहा था. वह घबरा गई…चिल्लाती हुई बाहर आई. स्थानीय लोगों को इकट्ठा किया. उस के बाद तुरंत पुलिस को भी सूचित कर दिया गया. पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल था कि आखिर अय्यूब की हत्या किस ने की? हत्या का क्या मकसद रहा होगा? हालांकि लाश की हालत देख कर हत्या का कारण उस के द्वारा पहने जाने वाले सोने के भारीभरकम जेवरात थे. हत्यारे जेवरातों के अलावा नकद रकम और मोबाइल ले कर फरार हो चुके थे.
इस वारदात की सूचना पा कर सोलापुर शहर के पुलिस आयुक्त एस. राजकुमार ने भी घटनास्थल पर जा कर मुआयना किया. उन के मार्गदर्शन में जांच टीम बनाई गई. अय्यूब के घर से ले कर आसपास के इलाके में लगे लगभग 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच के बाद तीनों संदिग्धों का पता चल पाया था. हत्यारे अय्यूब के कत्ल के बाद उस की दुपहिया भी ले कर भाग गए थे. इस की फुटेज भी सीसीटीवी में मिली थी.

हत्यारोपियों आफताब इसाक सशेख, यशराज उत्तम कांबले और वैभव गुरुनाथ पनगुले को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि अय्यूब की हत्या गला दबा कर की गई थी. उस की मौत का कारण सांस बंद होना पाया गया. इस मामले की सोलापुर के सदर बाजार पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 101(1) के तहत अपराध दर्ज करवा दिया गया था. इस केस को खोलने के लिए आला अफसरों के निर्देशन में पुलिस की 5 टीमों का गठन किया गया. उन की पहली जिम्मेदारी सीसीटीवी फुटेज में दिखने वाले तीनों व्यक्तियों को हिरासत में लेना था. फुटेज में तीनों लातूर की ओर जाते नजर आए थे. यानी कि वे लातूर में छिपे हो सकते थे. जांच टीम तुरंत लातूर गई और वहां की स्थानीय पुलिस की मदद ली.
संदिग्धों की तलाशी में पूरा एक दिन बीत गया. उन का कोई सुराग नहीं मिल पाया था. जांच टीम परेशान हो गई थी. वे दूसरे शहर जाने की योजना बनाने लगे थे, इसी बीच स्थानीय पुलिस से उन के लातूर में ही छिपे होने की जानकारी मिल गई. इस सूचना के आधार पर करीब 6 घंटे की भागदौड़ और मेहनत के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. तीनों संदिग्धों को वहां से सोलापुर लाया गया. सदर बाजार थाने में उन से पूछताछ की गई. पहले तो वे अनजान बनते रहे और खुद को लातूर का निवासी बता कर बचने की कोशिश की, किंतु जब उन्हें सीसीटीवी फुटेज के अनुसार 26 दिसंबर की रात की घटना के बारे में बताया, तब वे सच बताने को राजी हो गए.
तीनों में एक यशराज उत्तम कांबले (21 साल), बौद्ध विहार के पास इंदिरानगर, लातूर का रहने वाला था. दूसरा आफताब इसाक शेख (24 साल) कुंभारवाडी, तहसील रेनापुर का था. तीसरा वैभव गुरुनाथ पनगुले (21 साल) भी कुंभारवाडी का ही रहने वाला था. उन में यशराज कांबले और वैभव पनगुले अब भी पढ़ाई कर रहे थे. जबकि आफताब इसाक शेख मजदूरी करता था. उन्होंने स्वीकार कर लिया कि वे अय्यूब सैय्यद के गले, कान और हाथों की अंगुलियों में पहनी हुई सोने की ज्वैलरी हासिल करना चाहते थे, जिसे वह कभी भी नहीं उतारता था. इस के लिए ही उन्होंने आधी रात को उस के घर पर धावा बोला था. उन को यह भ्रम था कि अय्यूब सोते समय अपनी ज्वैलरी उतार कर कमरे में ही कहीं रखता होगा, किंतु वह तो सारी ज्वैलरी पहने हुए ही सोता था, जो करीब 40 तोले थी.

पुलिस कमिश्नर एम. राजकुमा सीनियर इंसपेक्टर अरविंद माने और एपीआई शंकर पायगुडे

स्पैशल डीसीपी (क्राइम) डा. अश्विनी पाटिल
उस की ज्वैलरी लूटने की प्लानिंग आफताब इसाक शेख ने ही बनाई थी. जब वह कुछ दिन पहले लातूर से सोलापुर आया था. वहीं उस की अय्यूब सैय्यद से मुलाकात हुई थी. उस के गले में सोने की मोटी चेन देख कर उसे हासिल करने के लालच से भर गया था. उस के बाद वह अय्यूब से मिलने के लिए अकसर लातूर से सोलापुर आने लगा. वह अय्यूब के कमरे में भी आनेजाने लगा. घर में उस की नजर नकदी पर भी गई. वह और भी लालच में आ गया. उस के मन में चोरी की भावना जाग गई. किंतु उसे पता था कि चोरी उस के अकेले के वश की बात नहीं थी. इसलिए उस ने यशराज कांबले और वैभव पनगुले को अपनी योजना बताई और इन दोनों को भी हिस्सेदार बना लिया.
इस लालच से यशराज और वैभव आफताब का साथ देने के लिए खुशीखुशी राजी हो गए. योजना के मुताबिक तीनों 26 दिसंबर, 2025 को दिन में ही लातूर से सोलापुर पहुंच गए. आफताब अपने दोनों साथियों को एक जगह ठहरा कर पहले खुद अय्यूब सैय्यद के घर गया. रात का वक्त था. अय्यूब घर में अकेला था. उस का घर क्या था, छोटा सा एक कमरे का 2 मंजिल का मकान था. आफताब अय्यूब से घुलमिल चुका था, इसलिए रात को उस के आने पर अय्यूब को कोई आपत्ति नहीं हुई.
पहली मंजिल के कमरे में वे दोनों बैठ कर गप्पें करने लगे. चुनाव प्रचार की बातें करने लगे. पहले से थका होने के कारण अय्यूब सैय्यद को झपकी आ गई और वह सो गया. तब तक रात के करीब 11 बज चुके थे. उसे गहरी नींद में सोता देख कर आफताब शेख ने यशराज और वैभव को वहां बुला लिया. उन के आने के बाद तीनों ने अय्यूब के गले से जेवर उतारने की तैयारी की, किंतु उन्हें आशंका हुई कि कहीं उस की नींद न खुल जाए. इस आशंका से वे डर गए कि यदि ऐसा हुआ, तब वे पकड़े जाएंगे.

अय्यूब सैय्यद की हत्या के खिलाफ आक्रोश प्रकट करता किन्नर समाज
उन्होंने पहले अय्यूब को बेहोश करने के लिए उस की गरदन पर मुक्के का हमला कर दिया. मुक्का पड़ते ही अय्यूब उठ कर बैठ गया और चिल्लाने लगा. वह 2-3 बार ही चिल्ला पाया था कि एक ने पास रखे तकिए से उस के मुंह को दबा दिया. बाकी दोनों पूरी ताकत से उस का मुंह और गला दबा दबाए रहे. कुछ मिनट में ही अय्यूब की आवाज बंद हो गई. पैरों और देह की हरकत शांत हो गई.
उस के बाद तीनों उस के जेवर और दूसरे कई सामान ले कर वहां से फरार हो गए. वहां से भागने के लिए उन्होंने अय्यूब की बाइक का इस्तेमाल किया. रास्ते में बाइक की नंबर प्लेट निकाल कर फेंक दी. जब वे अय्यूब का कत्ल करने का प्रयास कर रहे थे, तब उस के गले से खून रिस गया था. उस खून को रोकने के लिए हमलावरों ने अपनी बनियान का इस्तेमाल किया था. पुलिस ने उन के खून लगे बनियान जब्त कर जांच के लिए भेज दिया. उन्होंने बताया कि चोरी किए गए मोबाइल को लातूर जाते हुए रास्ते में जला दिया था. तीनों के पास से बरामद जेवरात में सोने की 3 अंगूठियां और कान की बाली ही मिलीं.
पूछताछ पूरी होने के बाद तीनों आरोपियों यशराज उत्तम कांबले, आफताब इसाक शेख और वैभव गुरुनाथ पनगुले को हिरासत में ले कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. चोरी और हत्या की इस वारदात को काफी कम समय में सुलझाने के लिए सोलापुर पुलिस आयुक्त एम. राजकुमार ने टीम में शामिल सभी पुलिसकर्मियों की सराहना की.
डीसीपी विजय कबाड़े, स्पैशल डीसीपी (क्राइम) डा. अश्विनी पाटिल, एसीपी राजन पवार, इंसपेक्टर अरविंद माने, असिस्टेंट पुलिस इंसपेक्टर शंकर पायगुडे, विजय पाटिल, शैलेश खेडकर, दत्तात्रय काले, एसआई मुकेश गायकवाड़, अंकुश भोसले, बापू आदि ने तत्परता के साथ तहकीकात पूरी की थी. Maharashtra News






