Hindi Stories: कुछ महिलाओं में फ्री गिफ्ट का बहुत लालच होता है, वह इस के पीछे की साइकोलौजी को नहीं समझ पातीं. उस से भी बड़ा खतरा उन तमाम अनजान सेल्समैन की शक्ल में होता है, जिन्हें भरी दोपहरी में ये लोभी महिलाएं अपने सूने घर में बुला कर बैठा लेती हैं. इस छोटी सी गलती की वजह से उन्हें कभीकभी इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ जाती है कि…

”उफ! 11 बजने को आ गए हैं और अभी कोई काम नहीं निपटा है. झाड़ूपोछा करने को है, कपड़े भी रखे हैं धोने को, नहाना भी है. हरीश तो सुबह नाश्ता कर के ड्यूटी चले जाते हैं. मैं घर और बच्चों में उलझी रहती हूं. कब दोपहर होती है, कब शाम, कुछ पता ही नहीं चलता.’’ रेणु सोफे को झाड़ते हुए खुद ही बड़बड़ाए जा रही थी, ”मैं ही पागल हूं जो इतना खटती हूं. हरीश तो कई बार कह चुके हैं कि कोई कामवाली बाई रख लो, लेकिन मैं ही हूं कि कामवाली बाई के लिए पर्स से 3 हजार रुपए निकालने में कंजूसी करती हूं.’’

 

माथे पर आए पसीने को साड़ी के आंचल से पोंछते हुए रेणु ने लंबी सांस ली, फिर मुंह बिचका कर बड़बड़ाई, ”बात 3 हजार की नहीं है. सरला आंटी बता रही थी कि कई कामवाली बाई नीयत की खोटी होती हैं, वह मालकिन की गैरमौजूदगी में साहब लोगों पर डोरे डालती हैं, उन के बिस्तर तक पहुंचने की कोशिश करती हैं. यदि साहब मुट्ठी में आ गया तो धीरेधीरे उन की जेब हलकी करने लगती हैं.

”ना बाबा ना. मैं अपने जीते जी इस घर में सौतन नहीं पाल सकती. मेरे हाथपांव सलामत हैं, मैं अकेले ही घर के सारे काम संभाल लूंगी. माना कि हरीश सीधेसादे हैं, लेकिन स्त्री के लटकेझटकों में कब उन की लार टपक जाए, क्या कहा जा सकता है. हैं तो वह मर्द ही, पराई स्त्री पर पुरुष का मन खराब होते देर नहीं लगती है.’’

रेणु गरदन झटक कर विचारों से बाहर निकली और झाड़ू से फर्श को साफ करने लगी. झाड़ू करने के बाद उस ने पोछा लगाया, फिर पोछे को नलके पर धोने के लिए बाथरूम में घुस गई.

उसी वक्त दरवाजे पर लगी घंटी बजने लगी. रेणु ने चौंककर घड़ी की तरफ देखा. अभी साढ़े 11 बज रहे थे.

”बच्चे तो एक बजे आते हैं, हरीश भी इस वक्त अपने औफिस में होंगे, फिर कौन आ गया?’’ वह बड़बड़ाते हुए दरवाजे की तरफ बढ़ी. घंटी फिर घनघनाई. रेणु दरवाजे तक पहुंच गई थी. उस ने ऊंची आवाज में पूछा, ”कौन है दरवाजे पर?’’

”मैडम, मैं हूं जी सेल्समैन.’’ बाहर से पुरुष स्वर उभरा.

”मुझे कुछ नहीं खरीदना है भाई, तुम जाओ.’’ रेणु झल्ला कर बोली.

”मैडम, मैं डबास कंपनी से आया हूं, मेरे पास एक से बढ़ कर एक वैरायटी है.’’

”मैं ने कहा न, मुझे कुछ नहीं खरीदना है, मेरे पास समय नहीं है.’’ रेणु खीझ कर बोली.

”मैडम, हमारी कंपनी एक के साथ एक फ्री गिफ्ट दे रही है. एकदम नए डिजाइन और कलर के अंडरगारमेंट्स हैं मेरे पास.’’ बाहर खड़े सेल्समैन ने बहुत कोमल स्वर में कहा, ”आप हमारी वैरायटी देख कर खुश हो जाएंगी. दरवाजा खोल कर देख लीजिए.’’

”एक के साथ एक फ्री गिफ्ट…’’ रेणु ने धीरे से दोहराया, ”यह तो डबल फायदा वाली बात है. देख लेती हूं. देखने में क्या हर्ज है.’’

”ठहरो भैया, मैं दरवाजा खोल रही हूं.’’ रेणु ने कहा और हाथ में थाम रखे पोंछे को निचोड़ कर रेलिंग पर सूखने के लिए डाल कर उस ने साबुन से हाथ धोए, फिर साड़ी के पल्लू से हाथ पोंछते हुए दरवाजा खोल दिया.

दरवाजे पर 25-26 साल का स्मार्ट युवक खड़ा था. उस ने सफेद रंग की शर्ट और ब्लैक रंग की ब्रांडेड जींस तथा रेड कलर की टाई पहनी हुई थी. कंधे पर सफारी बैग लटक रहा था. उस युवक की पर्सनैलिटी बेहद आकर्षक थी. वह दुबलापतला और लंबे कद का था.

चेहरे पर मंदमंद मुसकान के साथ उस ने दोनों हाथ जोड़ कर विशुद्ध भारतीय रीति से रेणु को नमस्ते की और बोला, ”अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद मैडम.’’

”क्याक्या है तुम्हारे पास, दिखाओ.’’ रेणु के स्वर में उतावलापन था.

”यहां दरवाजे पर ही?’’ वह युवक हैरानी से बोला, ”अंदर बैठ कर देखिए न तसल्ली से. मुझे पानी की प्यास भी लगी है. क्या पानी नहीं पिलाएंगी?’’

”हांहां, पानी तो पूछना मेरा फर्ज है.’’ रेणु झेंपते हुए बोली, ”आ जाओ अंदर.’’

रेणु ने पूरा दरवाजा खोल दिया. युवक को अपने पीछे ले कर रेणु ड्राइंगरूम में आ गई.

”बैठो. मैं तुम्हारे लिए पानी ले कर आती हूं.’’ रेणु ने सोफे की तरफ इशारा कर के कहा और पानी लाने किचन की तरफ चली गई.

युवक सोफे पर बैठ गया. उस ने बैग नीचे रख दिया था. वह अब ड्राइंगरूम को बड़ी गहरी नजरों से देख रहा था. कुछ ही देर में रेणु पानी का गिलास ले कर वापस आ गई. उस ने गिलास युवक की तरफ बढ़ा दिया. युवक ने पानी पी कर गिलास सामने पड़ी टेबल पर रख दिया, फिर अपना बैग खोलने लगा. युवक ने बैग खोल कर एक पैकेट निकाला.

”मैडम, यह हमारी कंपनी का बहुत बढिय़ा डिटर्जेंट पाउडर है. यह आप के गंदे दाग वाले कपड़ों को साफ कर के चमका देगा.’’

”क्या भैया, तुम तो अंडरगारमेंट की बात कर रहे थे, अब आप डिटर्जेंट पाउडर दिखाने लगे.’’ रेणु कुढ़ कर बोली.

”आप एक बार इस वाशिंग पाउडर को इस्तेमाल तो कर के देखिए मैडम, आप ब्रांडेड कंपनी का वाशिंग पाउडर इस्तेमाल करना भूल जाएंगी.’’

”नहीं बाबा, मैं इन वाशिंग पाउडर के चंगुल में नहीं फंसना चाहती. पहले मुझे कुछ सेल्समैन वाशिंग पाउडर के बहाने मिट्टी बेच गए हैं. तुम यह सब रखो.’’

”मैडम, आप से कह रहा हूं न, आप को जो उल्लू बना गए, वह चलतेफिरते लोग होंगे, मैं डबास कंपनी का सेल्समैन हूं.’’ युवक पूरे ढीठपने से बोला, ”आप एक बार हमारी कंपनी का डिटर्जेंट इस्तेमाल तो कर के देखिए. इस एक किलो के पैक के साथ आधा किलो का पैकेट मैं फ्री दूंगा.’’

”आधा किलो फ्री…’’ रेणु खुश होते हुए बोली, ”लाओ, मैं थोड़ा सा इस्तेमाल कर के देखती हूं.’’

सेल्समैन ने एक छोटा पाउच निकाल कर रेणु को दिया, ”मैडम, थोड़ा सा गुनगुना पानी लाइए और कोई गंदा कपड़ा भी.’’ युवक ने कहा, ”मैं आप को धो कर दिखाता हूं.’’

रेणु किचन में जा कर पानी गरम कर लाई. उस ने हरीश की गंदी पड़ी कमीज ला कर युवक को दे दी. युवक ने डिटर्जेंट का पाउच गुनगुने पानी में डाल कर मिलाया और उस में कमीज डाल कर कुछ देर पड़ी रहने दी. फिर उस ने साफ पानी मंगवा कर कमीज को साफ पानी में डाल कर रेणु से कहा, ”आप कमीज निकाल कर चैक करें और बताएं इस पाउडर का रिजल्ट.’’

रेणु ने कमीज निकाली तो वह हैरान रह गई. कमीज दूध जैसी सफेद हो गई थी. वह खुशी से बोली, ”यह डिटर्जेंट तो बहुत बढिय़ा है भैया.. मुझे पैकेट दे दो साथ में आधा किलो फ्री भी.’’

युवक ने डिटर्जेंट का एक किलो वाला पैकेट और आधा किलो का पैकेट रेणु को देते हुए कहा, ”यह डेढ़ सौ रुपए का है मैडम, लेकिन आप से पहली बोनी कर रहा हूं, आप मुझे केवल 100 रुपए ही दें.’’

रेणु ने 100 रुपए युवक को दे दिया. युवक ने रुपए जेब के हवाले किए और मुसकरा कर बोला, ”अब आप को मैं डबास कंपनी का खास आइटम दिखा दूं.’’

युवक ने बैग में से अंडरगारमेंट आइटम निकाली.

”देखिए मैडम, हमारी डबास कंपनी पहले डिटर्जेंट पाउडर बनाने का काम कर रही थी. अब कंपनी ने बेहतरीन अंडरगारमेंट का काम शुरू किया है. कंपनी की रेंज दाम के लिहाज से बेहद सस्ती है, लेकिन क्वालिटी के लिहाज से काफी बढिय़ा है. रंग भी हर तरह के हैं. आजकल कालेज जाने वाली लड़कियां और वर्किंग गल्र्स के बीच हमारी रेंज काफी पापुलर हो रही है.’’

युवक ने अंडरगारमेंट्स टेबल पर फैला दिए और बोला, ”मैडम, आप के सामने हर रंग के बेहतरीन पीस हैं. आप अपने चौइस की आइटम पसंद कर लीजिए. और हां मैडम, छोटा मुंह बड़ी बात होगी, मैं आप को बता देता हूं हमारी कंपनी ने इन अंडरगारमेंट की क्वालिटी उत्तम बनाने में इंपोर्टेड इलास्टिक का प्रयोग किया है.

”अधिकांश गारमेंट इलास्टिक ढीली हो जाने पर डस्टबिन में डाल देनी पड़ती है, लेकिन हमारी प्रोडक्ट्स में आप को यह शिकायत नहीं मिलेगी और एक बात, हमारी कंपनी का कपड़ा यदि एक साल में खराब हो जाता है या रंग फीका पड़ जाता है तो कंपनी आप को दूसरा नया पीस देगी.’’

”वाह! यह तो बहुत अच्छी बात है.’’ रेणु खुश होते हुए बोली और टेबल पर पड़ी कलरफुल ब्रा में से अपने लिए ब्रा छांटने लगी.

”मैडम, आप यह लीजिए.’’ सेल्समैन ने एक ब्रेजरी उठा कर रेणु की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ”यह ब्राउन कलर की ब्रा आप के गोरे बदन पर बहुत ज्यादा सुंदर लगेगी. मेरी पसंद है आप को भी यह अवश्य पसंद आएगी. इस के अलावा यह रेड कलर की ब्रा भी आप पर बहुत खिलेगी.’’

रेणु ने सेल्समैन के हाथ से ब्राउन कलर वाली बा को ले लिया और देखने लगी. कुछ देर तक ब्रा को उलटपलट कर देखने के बाद रेणु बोली, ”इस की डिजाइन तो बहुत अच्छी है लेकिन…’’

”लेकिन क्या मैडम?’’ रेणु को वाक्य अधूरा छोड़ते देख सेल्समैन ने तुरंत पूछा, ”मन में कोई संशय मत रखिए जो कहना हो, स्पष्ट कह डालिए.’’

”भैया, यह अच्छी तो लग रही है, लेकिन मुझे इस का साइज थोड़ा सा छोटा लग रहा है. यह थर्टी टू है, जो मेरे बदन पर टाइट रहेगा.’’

”गुस्ताखी की माफी चाहूंगा मैडम… आप का साइज क्या है, यदि मुझे मालूम हो जाए तो मैं वही साइज आप को निकाल कर दे दंू.’’

”मेरा साइज थर्टी फोर है,’’ रेणु कुछ लजाते हुए बोली, ”मुझे यह साइज बहुत फिट बैठता है.’’

”डोंट वरी मैडम, हमारे सारे प्रोडक्ट्स में एक्सपोर्ट क्वालिटी का नायलोन यूज हुआ है, यह फ्री और एक्सपेंडेबल है. आप के बदन पर यह थर्टी टू साइज भी फिट आएगा. आप इन दोनों कलर को रख लीजिए और यह रही आप की फ्री गिफ्ट, 2 एक्सपोर्ट क्वालिटी की पैंटीज.’’ सेल्समैन ने 2 ऐसे ही रंग की पैंटीज निकाल कर रेणु की तरफ बढ़ाई.

”फ्री गिफ्ट तो ठीक है भैया, लेकिन अपने साइज से छोटी चीज का क्या फायदा.’’ रेणु के स्वर मे झिझक थी.

”परेशान मत होइए, आप अंदर जा कर इन्हें पहन कर देख लीजिए. आप की पूरी तसल्ली होना जरूरी है. लीजिए, आप इन्हें अंदर जा कर ट्राई कर आइए.’’

रेणु को सेल्समैन की बात जंच गई. उस ने सेल्समैन के हाथ से थर्टी टू वाली ब्राउन कलर की ब्रेजरी ले ली और ड्राइंगरूम से वह अंदर अपने बैडरूम की तरफ बढ़ गई. बैडरूम में आदमकद आईना लगा हुआ था. रेणु उस के सामने खड़ी हो गई. उस ने कल क्रीम कलर की साड़ी और ब्लाउज पहना था, अभी भी उस के जिस्म पर यही कपड़े थे. वह घर का काम निपटा कर नहाती थी, फिर कल के कपड़े बदलती थी. आज घर का काम सेल्समैन के आ जाने से अधूरा रह गया था और नहाना भी नहीं हुआ था.

रेणु ने अपने सीने से साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के हुक खोलने लगी. हुक खोलने के बाद उस ने ब्लाउज को बांहों से निकाल कर टेबल पर रख दिया. उस ने क्रीम कलर की साड़ी से मैच करती ब्रा पहनी हुई थी. पीछे हाथ ले जा कर रेणु ने हुक को हटा कर ब्रा भी बाहों से निकाल दी. रेणु ने शादी के बाद से कभी अपने शरीर के प्रति लापरवाही नहीं बरती थी. वह अपने हर अंग को फिट रखने के लिए सुबह आधा घंटा व्यायाम करती थी और अंगों की मालिश भी करती थी, जिस की वजह से उस के अंग सुडौल और आकर्षक बने हुए थे.

रेणु ने नई ब्राउन कलर वाली ब्रा को बांहों में डाल कर अपने उभारों पर व्यवस्थित किया और आईने में निहारने लगी. यह ब्रा उस के उभारों पर बहुत आकर्षक लग रही थी. नए लुक की इस ब्रा ने उस के उभारों की सुंदरता को और ज्यादा निखार दिया था. वह युवक ठीक कह रहा है, यह ब्रा मेरे बदन पर बहुत सुंदर लगेगी. इन का रातदिन का काम है. इतना अनुभव तो इन्हें हो ही जाता है कि किस रंग पर कौन सी ब्रा अच्छी लगेगी. यह ब्रा मुझ पर काफी जंच रही है. जब रात में हरीश इसे देखेंगे तो उन के बदन में आवेश की लहरें दौड़ जाएंगी और…

रेणु अपने उन्माद भरे खयालों पर खुद ही लजा गई. उस ने सिर झटक कर अपने दिमाग को जैसे इन उन्मादी खयालों से बाहर निकाला फिर ब्रा के हुक पीठ के पीछे हाथ ले जा कर लगाने का प्रयास करने लगी, किंतु ब्रा का साइज छोटा होने के कारण वह हुक बंद नहीं कर पाई. वह बारबार हुक लगाने की कोशिश करने लगी, लेकिन कामयाब नहीं हुई. उस के माथे पर हलका पसीना छलक आया. और सांस भी उखडऩे लगी.

”बहुत टाइट है यह.’’ रेणु बड़बड़ाई, ”जिस की वजह से परेशान होना पड़े, उसे खरीदने का क्या लाभ, इसे बदल कर दूसरी ब्रा ले लेती हूं.’’

”यह ब्रा आप को बहुत सूट कर रही है मैडम.’’ रेणु को अपने पीछे सेल्समैन की आवाज सुनाई दी तो वह हड़बड़ा गई. दोनों हाथों को सीने पर ले जा कर वह जल्दी से पलटी. पीछे सेल्समैन खड़ा मंदमंद मुसकरा रहा था.

शरम और गुस्से से रेणु के मुंह से चीख निकल गई, ”तुम यहां क्यों आ गए… बाहर जाओ यहां से.’’

”नाराज मत होइए मैडम, मैं तो आप की मदद के लिए यहां आया हूं.’’ सेल्समैन धूर्तता से मुसकराया और रेणु की तरफ बढऩे लगा.

”नहीं, रुक जाओ तुम.’’ रेणु गला फाड़ कर चीखी, ”तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई मेरे बैडरूम में आने की… बाहर जाओ.’’

सेल्समैन बेशरमी से आगे बढ़ता हुआ बोला, ”यह ब्रा आप के जिस्म पर थोड़ा टाइट है, लेकिन 1-2 बार हुक लगाने से इस की इलास्टिक नरम पड़ कर खुल जाएगी. लाइए, मैं हुक लगा देता हूं.’’ सेल्समैन ने हाथ बढाए.

”यू स्टुपिड.’’ रेणु गुस्से से दहाड़ी, ”तुम तुरंत मेरे कमरे से निकलो, वरना मैं चीखचीख कर पड़ोसियों को बुला लूंगी.’’

”मैं ने बाहर का दरवाजा बंद कर दिया है. भरी दोपहरी है, सब अपने घर में होंगे, कोई नहीं आएगा, इसलिए अपना गला मत खराब करो चीख कर. मैं आप की परेशानी दूर करने आया हूं. आप हैं कि खामखां नाराज हो रही हैं.’’ सेल्समैन ने इस बार बहुत गंभीरता से कहा.

”मुझे कोई परेशानी नहीं है.’’ रेणु बिफर पड़ी क्रोध से, ”तुम यहां से बाहर जाओ.’’

”मैडम, आप मेरी कस्टमर हैं, मैं अपना सामान बेच रहा हूं इसलिए मेरा फर्ज है कि आप की संतुष्टि कर के ही पैसा लूं. आप घूम जाइए, मैं अभी हुक लगा दूंगा.’’

”मैं खुद लगा लूंगी,’’ रेणु गुस्से से बोली.

”बहुत जिद्ïदी हैं आप.’’ सेल्समैन कंधे झटक कर गुर्राया, ”सीधी तरह पलट जाइए.’’

और फिर रेणु के कुछ कहने से पहले ही सेल्समैन ने रेणु को दोनों कंधों से पकड़ कर घुमा दिया. फिर ब्रा की तनिया पकड़ कर वह हुक लगाने लगा. बहुत जल्दी में यह हुआ था.

रेणु कुछ समझ ही नहीं पाई. वह तुरंत संभली और सेल्समैन के हाथों को झटकते हुए चीखी, ”तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई मेरे जिस्म तक हाथ पहुंचाने की.’’

”मैं तुम्हारी मदद…’’

”शटअपऽऽ,’’ रेणु गुस्से से दहाड़ी, ”तुम यहां से बाहर जाओ.’’

”आप तो मेरी बेइज्जती कर रही हैं मैडम. आप को इस समय मेरे संयम की दाद देनी चाहिए. देखिए, आप का मखमली गुलाबी ऊपरी तन मेरे सामने निर्वस्त्र है, लेकिन मैं कोई गलत हरकत नहीं कर रहा हूं.’’

”तुम कर भी नहीं सकते,’’ रेणु नथुने फुला कर चीखी.

”करने को तो मैं बहुत कुछ कर सकता हूं मैडम.’’ सेल्समैन ने बेशरमी से अपने होंठों पर जुबान घुमाई और रेणु को छेडऩे लगा.

”ओह यू…’’ रेणु गुस्से से बिफर गई, ”तुम बदतमीज हो…’’

सेल्समैन को रेणु के गुस्से की परवाह नहीं थी जैसे, वह अपनी मस्ती में बोलता चला गया, ”सच कहता हूं मैडम, मैं ने इतना कसा हुआ बदन किसी स्त्री का नहीं देखा है. मैं 100 से अधिक महिलाओं को अपने हाथों से ब्रा पहना चुका हूं.’’

रेणु का क्रोध बढ़ता जा रहा था. वह दांत भींच रही थी, लेकिन कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं थी. उस का ऊपरी तन उघड़ा हुआ था. दोनों हाथों से थाम कर वह अपनी इज्जत को ढके खड़ी थी.

सेल्समैन को वह जलती आंखों से देख कर एक बार फिर चीखी, ”तुम सीधी तरह यहां से जाते हो या मैं चीख कर पड़ोसियों को बुलाऊं?’’

”बहुत घमंडी और बदमिजाज औरत हो तुम.’’ सेल्समैन मुंह बिगाड़ कर बोला, ”ऐसे नायाब मौके पर अपना और मेरा मूड खराब कर रही हो. लो, मैं पहले तुम्हारा मुंह बंद करता हूं, तुम बहुत टें टें कर रही हो.’’ सेल्समैन ने जेब से रेशम की डोरी और चौड़ी वाली टेप निकाली.

”तुम्हें इस खूबसूरत मौके का फायदा उठाने में एतराज हो रहा है मैडम, तुम्हारी यह गुलाबी देह मुझे बेकरार और पागल कर रही है. मैं अब इस का लुत्फ जरूर उठाऊंगा.’’

सेल्समैन ने रेणु को दबोच लिया और उस के हाथ पीठ के पीछे बांध कर उस ने उस के मुंह पर टेप चिपका दिया. रेणु उस की फौलादी पकड़ में जरा भी विरोध नहीं कर पाई. रेणु को उस ने किसी रबड़ की गुडिय़ा की तरह उठा कर पलंग पर पटक दिया. बेबसी और लाचारी में रेणु की आंखों से आंसू बह निकले. सेल्समैन उसे अपने अंक में समेट कर तब तक उस से अपनी मनमानी करता रहा, जब तक उसे पूर्णरूप से संतुष्टि नहीं मिल गई.

वह अपने कपड़े ठीक करते हुए उठा और उस ने आंखें बंद कर के खामोश पड़ी रेणु के गाल पर हलकी सी चपत लगाते हुए कहा, ”तुम बहुत दिलचस्प चीज हो मैडम, जी चाहता है जिंदगी भर यहीं रह कर तुम्हें बांहों में बांध कर प्यार करता रहूं, लेकिन मुझे दूसरा घर भी देखना है. मैडम तनुजा को 2 बजे फुरसत मिलती है, मुझे उन की भी तसल्ली करनी है. अपनी कंपनी की प्रोडक्ट ब्रा पैंटी उन्हें भी पहनानी है.’’ सेल्समैन कहते हुए बेशरमी से हंस पड़ा.

कपड़े ठीक कर के वह रेणु के करीब आया. उस ने झुक कर रेणु का गाल चूमा और मुसकरा कर बोला, ”मैं तुम्हें तुम्हारा एक के साथ एक फ्री वाला गिफ्ट दे कर जा रहा हूं. हां, तुम्हें इसी हाल में छोड़ कर जाने का मुझे अफसोस है, लेकिन अपने बचाव के लिए ऐसा करना जरूरी है. तुम्हारे बच्चे आ कर तुम्हें आजाद कर देंगे. बाय.’’

सेल्समैन हाथ हिलाता हुआ कमरे से बाहर निकल गया. रेणु ने थोड़ी देर बाद ही बाहर का दरवाजा बंद होने की आवाज सुनी तो वह उठ कर बैठ गई. फिर अपने पीठ पीछे बंधे हाथों के बंधन खोलने का प्रयास करने लगी. थोड़ी कोशिश में ही वह हाथों को बंधनमुक्त करने में सफल हो गई. उस ने अपने मुंह से टेप हटाया, फिर अपनी दुर्दशा पर फूटफूट कर रोने लगी. थोड़ी सी असावधानी और फ्री गिफ्ट के लालच में वह अपनी इज्जत एक अनजान सेल्समैन को लुटा बैठी थी. Hindi Stories

 

 

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