Hindi Stories: कुछ महिलाओं में फ्री गिफ्ट का बहुत लालच होता है, वह इस के पीछे की साइकोलौजी को नहीं समझ पातीं. उस से भी बड़ा खतरा उन तमाम अनजान सेल्समैन की शक्ल में होता है, जिन्हें भरी दोपहरी में ये लोभी महिलाएं अपने सूने घर में बुला कर बैठा लेती हैं. इस छोटी सी गलती की वजह से उन्हें कभीकभी इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ जाती है कि...
''उफ! 11 बजने को आ गए हैं और अभी कोई काम नहीं निपटा है. झाड़ूपोछा करने को है, कपड़े भी रखे हैं धोने को, नहाना भी है. हरीश तो सुबह नाश्ता कर के ड्यूटी चले जाते हैं. मैं घर और बच्चों में उलझी रहती हूं. कब दोपहर होती है, कब शाम, कुछ पता ही नहीं चलता.’’ रेणु सोफे को झाड़ते हुए खुद ही बड़बड़ाए जा रही थी, ''मैं ही पागल हूं जो इतना खटती हूं. हरीश तो कई बार कह चुके हैं कि कोई कामवाली बाई रख लो, लेकिन मैं ही हूं कि कामवाली बाई के लिए पर्स से 3 हजार रुपए निकालने में कंजूसी करती हूं.’’

माथे पर आए पसीने को साड़ी के आंचल से पोंछते हुए रेणु ने लंबी सांस ली, फिर मुंह बिचका कर बड़बड़ाई, ''बात 3 हजार की नहीं है. सरला आंटी बता रही थी कि कई कामवाली बाई नीयत की खोटी होती हैं, वह मालकिन की गैरमौजूदगी में साहब लोगों पर डोरे डालती हैं, उन के बिस्तर तक पहुंचने की कोशिश करती हैं. यदि साहब मुट्ठी में आ गया तो धीरेधीरे उन की जेब हलकी करने लगती हैं.
''ना बाबा ना. मैं अपने जीते जी इस घर में सौतन नहीं पाल सकती. मेरे हाथपांव सलामत हैं, मैं अकेले ही घर के सारे काम संभाल लूंगी. माना कि हरीश सीधेसादे हैं, लेकिन स्त्री के लटकेझटकों में कब उन की लार टपक जाए, क्या कहा जा सकता है. हैं तो वह मर्द ही, पराई स्त्री पर पुरुष का मन खराब होते देर नहीं लगती है.’’






