UP Crime: रिंकू की हत्या के आरोप में पुलिस ने उस के घर वालों के दबाव में बवाल से बचने के लिए उस की दोस्त राशि और उस के घर वालों को जेल भेज कर जो गलती की, उस से उस की शादी तो टूटी ही, शायद इस की कीमत उसे आगे भी चुकानी पड़ेगी. जबकि रिंकू के mहत्यारे कोई और थे.

पुलिस गिरफ्त में बैठी राशि के चेहरे पर उदासी थी तो आंखों में आंसुओं का सैलाब. चंद घंटों में ही वह ऐसे बुरे हालात में उलझ गई थी, जिस की उस ने कभी कल्पना भी नहीं की थी. एक महीने बाद ही उस की शादी होने वाली थी. जिस भंवर में वह फंसी थी, उस की वजह से उसे डर लग रहा था कि कहीं उस की शादी न टूट जाए. बदनामी की वजह से राशि को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था. उस ने पुलिस को जो बयान दिया था, उस में विरोधाभास होने की वजह से पुलिस को उसी पर शक हो गया था. इस चक्रव्यूह से वह बाहर कैसे निकले, इस का कोई रास्ता उसे नजर नहीं आ रहा था. पुलिस अधिकारी उस से कई दौर की पूछताछ कर चुके थे.

थानाप्रभारी ने एक बार उस से फिर कहा, ‘‘देखो राशि, अगर तुम हमें सब कुछ सचसच बता दोगी तो शायद हम तुम्हारी कोई मदद कर सकें, वरना हमारे हाथ भी बंधे हैं.’’

‘‘सर, मैं बिलकुल सच बोल रही हूं. आखिर आप मेरा विश्वास क्यों नहीं करते. प्लीज मुझे छोड़ दीजिए.’’ वह हाथ जोड़ कर बोली.

‘‘मामला कत्ल का है. वैसे भी अब तक तुम 2 बार अपना बयान बदल चुकी हो.’’ थानाप्रभारी ने कहा.

‘‘सर, मैं सच कह रही हूं कि मैं ने रिंकू की हत्या नहीं की. मैं भला उसे क्यों मारूंगी. वह तो मेरा दोस्त था.’’ कह कर राशि फिर रोने लगी. राशि अपनी बात पर अडिग थी और खुद को बेगुनाह कह रही थी. पुलिस के पास उस के खिलाफ कोई सबूत या गवाह भले ही नहीं था, पर परिस्थितियां उस के खिलाफ थीं.

दरअसल, 12 दिसंबर, 2015 की शाम को उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ के थाना मैडिकल पुलिस को सूचना मिली थी कि लोहिया नगर की निर्माणाधीन रिंग रोड पर बदमाशों ने एक युवक को पीटपीट कर घायल कर दिया है. सूचना पा कर तत्कालीन थानाप्रभारी बचन सिंह सिरोही पुलिस बल के साथ सूचना में बताई जगह पर पहुंच गए थे. वहां सचमुच 25-26 साल का एक युवक पड़ा था. उस के सिर से खून बह रहा था. वहीं पर एक मोटरसाइकिल खड़ी थी. पुलिस को जिस युवती ने सूचना दी थी, वह भी अपने घर वालों के साथ वहां मौजूद थी. पुलिस ने तुरंत युवक को इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया, लेकिन वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. थानाप्रभारी की सूचना पर सीओ बी.एस. बीर कुमार भी वहां पहुंच गए थे.

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि मरने वाले युवक का नाम रिंकू कुमार था और वह मेरठ के ही कस्बा सरधना के गांव इकड़ी निवासी जयपाल का एकलौता बेटा था. जयपाल स्टेट बैंक में क्लर्क थे, जबकि रिंकू इंडियन ओवरसीज बैंक में नौकरी करता था. नौकरी के साथ वह आईएएस की तैयारी भी कर रहा था. रिंकू की तैनाती चूंकि शहर के गंगानगर क्षेत्र में थी, इसलिए वह शहर के शेरगढ़ी इलाके में अपनी रिश्तेदारी में रहता था. घटनास्थल पर जो युवती मौजूद थी, उस का नाम राशि त्यागी था. वह एक इंस्टीट्यूट में असिस्टैंट मैनेजर थी. वह भी रिंकू के ही गांव की रहने वाली थी और मेरठ के शास्त्रीनगर में अपने नाना के घर रहती थी.

दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे, इसलिए उन के बीच गहरी दोस्ती थी. दोनों के घर वाले भी इस बात को जानते थे. पुलिस ने रिंकू की मौत की जानकारी उस के घर वालों को भी दे दी थी. राशि ने पुलिस को जो बयान दिया था, उस के मुताबिक शाम करीब 6 बजे वह और रिंकू तेजगढ़ी चौराहे के पास खड़े बातचीत कर रहे थे, तभी मोटरसाइकिल सवार 3 युवक उस का पर्स छीन कर भागे. उस ने और रिंकू ने मोटरसाइकिल से लुटेरों का पीछा किया. पीछा करते हुए वे लोहियानगर सड़क पर पहुंचे तो वह इलाका एकदम सुनसान था.

बदमाशों ने वहां अपनी मोटरसाइकिल रोक दी तो रिंकू ने उन से पर्स वापस मांगा. बदमाश उस के साथ मारपीट करने लगे. उस ने रिंकू को बचाने की कोशिश की तो बदमाशों ने उसे भी पीटा.  रिंकू ने एक बदमाश को पकड़ रखा था. अपने साथी को छुड़ाने के लिए दूसरे बदमाश ने उस पर लोहे की रौड से हमला कर दिया, जिस से रिंकू की मौत हो गई. इस के बाद बदमाश उस का पर्स छोड़ कर भाग गए. उस ने इस बात की जानकारी पहले अपने घर वालों को, उस के बाद पुलिस को दी. एसएसपी डी.सी. दुबे ने इस मामले में तुरंत काररवाई करने के निर्देश दिए थे. इस बीच रिंकू के घर वाले भी आ गए थे. उन्होंने राशि और उस के घर वालों पर ही रिंकू की हत्या का आरोप लगा दिया था.

आरोपों और हालात के चलते राशि शक के दायरे में आ गई. इस की वजह भी थी, एक तो सोचने वाली बात यह थी कि पर्स लूटने पर उस ने शोर क्यों नहीं मचाया, दूसरे उस ने पुलिस से पहले अपने घर वालों को क्यों सूचना दी. वह चाहती तो उसी समय पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर पर फोन कर सकती थी. पुलिस जब मौके पर पहुंची थी, उस के घर वाले वहां मौजूद थे. राशि चाहती तो पर्स लुटने के बाद बदमाशों का पीछा करते हुए शोर मचा सकती थी, लेकिन उस ने ऐसा नहीं किया था.

पुलिस ने तेजगढ़ी चौराहे पर भी जा कर पूछताछ की थी. लेकिन वहां कोई भी शख्स ऐसा नहीं मिला था, जिस ने पर्स लूट की वारदात को देखा हो. राशि का शोर न मचाना संदेह पैदा कर रहा था. यह भी बड़ा सवाल था कि बदमाशों ने रिंकू की हत्या कर दी थी, जबकि राशि के साथ सिर्फ मारपीट की थी. इस के बावजूद राशि के घुटने पर मामूली खरोंच के अवाला कोई बड़ी चोट नहीं आई थी. दूसरी तरफ रिंकू के घर वालों ने आरोप लगाया था कि राशि ने धोखे से रिंकू को अपने पास बुला कर घर वालों के साथ षड्यंत्र रच कर रिंकू की हत्या की है. उन की तहरीर पर पुलिस ने राशि, उस के पिता ब्रजमोहन त्यागी, मामा कुलवीर त्यागी, भाई विक्रांत त्यागी और अन्य लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302/34/147/148/149 व अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था.

पुलिस ने उसी समय राशि, उस के पिता व मामा को हिरासत में ले लिया था. रिंकू के घर वालों को किसी तरह पता चल गया था कि पुलिस हिरासत में आरोपियों से मामूली पूछताछ कर के छोड़ दिया जाएगा, इसलिए उन्होंने राशि व उस के घर वालों को जेल भेजे जाने की मांग को ले कर थाने में हंगामा शुरू कर दिया. उन का गुस्सा इतना बढ़ा कि उन्होंने थाने में तोड़फोड़ कर दी. हंगामे की सूचना पर तत्कालीन डीआईजी आशुतोष कुमार, रैपिड ऐक्शन फोर्स की टुकड़ी व आसपास के थाना की पुलिस ने पहुंच कर बमुश्किल हालात पर काबू पाया.

पुलिस ने तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ भी कांस्टेबल प्रकाशवीर की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया था. पुलिस ने एक बार फिर राशि से पूछताछ की तो उस ने अपना बयान बदल दिया. इस बार उस ने बताया कि वह और रिंकू मिलते थे. दोनों ने शाम को इधर घूमने का प्रोग्राम बनाया. तय समय पर वह तेजगढ़ी चौराहे पर पहुंची तो रिंकू उसे मोटरसाइकिल पर बैठा कर अपने साथ लोहियानगर ले गया. उस वक्त वहां सुनसान था. वहां खड़े हो कर वे बातचीत कर रहे थे कि तभी कुछ लड़के वहां आ गए. लड़कों ने उस के साथ छेड़छाड़ की तो रिंकू ने विरोध किया. इसी बीच लड़कों ने रिंकू के सिर पर किसी चीज से प्रहार कर दिया. उस के लहूलुहान होते ही लड़के भाग गए. रिंकू अचेत हो चुका था.

वह रिंकू को बचाना चाहती थी. 4 फरवरी, 2016 को उस की शादी होने वाली थी. इसलिए वह बुरी तरह डर गई. उस की समझ में नहीं आया तो वह घर पहुंची और अपने मामा कुलवीर त्यागी को इस बारे में बताया. घर पर उस ने अपने कपड़े बदले और दोबारा उसी जगह आ गई, जहां रिंकू पड़ा था. इस के बाद पुलिस को सूचना दी. वह चाहती थी कि उस की बदनामी न हो, इसलिए उस ने पर्स लूट की झूठी कहानी गढ़ दी. पुलिस के लिए यह मामला चुनौती बन चुका था. राशि कितना सच बोल रही थी, यह वही जानती थी, लेकिन परिस्थिजन्य साक्ष्य उस के खिलाफ थे. वारदात उस के अलावा किसी दूसरे ने नहीं देखी थी.

यही वजह थी कि पुलिस उस से बारबार पूछताछ कर रही थी. उस का रोरो कर बुरा हाल था और वह हत्या से इंकार कर रही थी. राशि के पिता और मामा भी खुद को बेगुनाह बता रहे थे. पर पुलिस को मामला औनर किलिंग का लग रहा था. इसलिए पुलिस ने राशि, ब्रजमोहन और कुलदीप को गिरफ्तार कर के अगले दिन अदालत में पेश किया, जहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

राशि के कुछ रिश्तेदारों ने एसएसपी से मिल कर कहा कि रिंकू के हत्यारे कोई और ही हैं, इसलिए इस केस की जांच फिर से कराई जाए, ताकि असली हत्यारे गिरफ्तार हो सकें और कोई बेगुनाह न फंसे. इसलिए एसएसपी ने एसपी (सिटी) ओमप्रकाश सिंह के निर्देशन में एक टीम का गठन किया, जिस में एसओजी टीम के प्रभारी एसआई संजीव यादव व अन्य को शामिल किया गया. उधर कई दिनों बाद पुलिस ने फरार आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो रिंकू के घर वाले उन्हें भी गिरफ्तार करने का दबाव बनाने लगे. इस तरह पुलिस के ऊपर दोनों ओर से दबाव पड़ रहा था.

रिंकू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी थी. रिपोर्ट में उस के सिर के पिछले हिस्से और कनपटी के बाईं ओर चोट के निशान पाए गए थे. वही उस की मौत की वजह भी बने थे. पुलिस ने राशि के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. इस के अलावा घटना के समय उस क्षेत्र के मोबाइल टावरों के संपर्क में जोजो मोबाइल संचालित थे, उन का ब्यौरा एकत्र किया गया. सैकड़ों नंबरों का रिकौर्ड पुलिस को मिला. एक महीने तक पुलिस उसी में संदिग्ध नंबरों को खंगालती रही. इसी बीच थानाप्रभारी का ट्रांसफर हो गया. रविंद्र वशिष्ठ को मैडिकल थाने का प्रभारी बनाया गया. उन्होंने जांच में तेजी दिखाते हुए मुखबिरों को सक्रिय कर दिया. उधर एसओजी टीम ने संदिग्ध फोन नंबरों की सूची बना कर उन पर काम शुरू किया.

उन में से कुछ नंबर घटना के बाद कई दिनों तक बंद रहे थे. वे नंबर बंद क्यों रहे, इस पर पुलिस को शक हुआ. जांच में पता चला कि वे नंबर रिंग रोड से सटे गांव सरायकाजी के लड़कों के थे. पुलिस ने मुखबिरों की मदद से उन लड़कों के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वे आवारा प्रवृत्ति के लड़के थे और शाम को अकसर निर्माणाधीन रिंग रोड पर जा कर नशा करते थे. एसपी सिटी ओमप्रकाश सिंह, जो लगातार पुलिस टीम की जांच की मौनीटरिंग कर रहे थे, उन्हें भी लगा कि जांच सही दिशा में जा रही है. जो लड़के वहां नशा करने जाते थे, पुलिस ने उन की सूची बना ली. इस के बाद पूछताछ के लिए उन्हें 4 फरवरी, 2016 को थाने ले आई. थाने में जब उन से पूछताछ की गई तो उन्होंने आसानी से स्वीकार कर लिया कि रिंकू की हत्या उन्होंने ही की थी.

इस के बाद पुलिस ने एकएक कर के 11 लड़कों को गिरफ्तार कर लिया. इन लड़कों में थे नितिन पोल, अरुण उर्फ साइड गंजा, अक्षय सैनी, राहुल कुमार, नीटू, राजन, संजय उर्फ रिंकू, अंकित उर्फ लाला, विजय, सुरेंद्र उर्फ रफी और राजू. इन सब से पूछताछ के बाद रिंकू की हत्या की वजह तो सामने आई ही, साथ ही राशि के दामन पर जो कत्ल का दाग लगा था, वह भी धुल गया. राशि और रिंकू के परिवार इकड़ी गांव में आसपास रहते थे. दोनों के बीच बचपन की दोस्ती थी. बाद में दोनों ने मेरठ आ कर उच्च शिक्षा हासिल की तो यहां भी दोस्त बने रहे. यह दोस्ती दोनों की नौकरी करने तक जारी रही. उन की दोस्ती से उन के घर वाले भी वाकिफ थे.

दिसंबर, 2015 में राशि का रिश्ता उस के घर वालों ने सहारनपुर जिले के एक लड़के से तय कर दिया और विवाह की तारीख भी 4 फरवरी, 2016 रख दी. दोनों के बीच अकसर मुलाकातें होती रहती थीं. 12 दिसंबर को भी दोनों मिले और बातचीत करने के लिए निर्माणाधीन रिंग रोड पर पहुंच गए. सुनसान जगह पर दोनों ने बैठ कर बातें कीं और जैसे ही वहां से चलने लगे, वे आवारा लड़के उन के पास आ गए. दरअसल, ये लड़के भांग का नशा करते थे और शाम ढले अकसर उस सुनसान रोड पर टहलने निकल जाते थे. इस की वजह यह थी कि एकांत की वजह से प्रेमी युगल वहां आ जाते थे, जिन से वे छेड़छाड़ करते थे. अगर कोई विरोध करता था तो वे उस के साथ मारपीट भी करते थे. प्रेमी युगल बदनामी की वजह से इस की शिकायत पुलिस से करने के बजाय चुपचाप चला जाता था. इस से उन नशेडि़यों के हौसले बढ़े थे.

12 दिसंबर, 2015 को भी वे नशेड़ी लड़के निर्माणाधीन रिंग रोड की तरफ गए. वहां रिंकू और राशि बातें कर रहे थे. उस दिन उन नशेडि़यों ने तय कर लिया कि वे आज लड़की के साथ दुष्कर्म करेंगे. यही सोच कर वे उन की ओर बढ़े तो रिंकू व राशि को थोड़ा शक हुआ. रिंकू ने तुरंत मोटरसाइकिल स्टार्ट की और राशि को बिठा कर चल पड़ा. तभी नितिन पोल ने एक पत्थर उठा कर मारा. पत्थर रिंकू को लगा तो वह मोटरसाइकिल सहित गिर पड़ा. उन के गिरते ही लड़के उन के पास पहुंच गए और राशि से छेड़छाड़ करने लगे.

वे रशि को सड़क से नीचे खेत में खींच ले गए. राशि चिल्लाई तो उन्होंने उसे पीट कर चुप करा दिया. गिरने से उस के घुटने में खरोंच आ गई थी. रिंकू जल्दी से उठा और खेत में पहुंच गया. वह उन के चंगुल से राशि को छुड़ाने लगा. दूरदूर तक उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था. रिंकू उन लड़कों से भिड़ गया तो अरुण उर्फ साइड गंजा ने सरिया से उस के सिर पर वार कर दिया. रिंकू खून से लथपथ हो कर गिर गया. तभी किसी कार की लाइट दिखाई दी तो लड़के वहां से भाग खड़े हुए.

राशि बुरी तरह डर गई थी. उस की समझ में कुछ नहीं आया. कुछ दिनों बाद उस की शादी होने वाली थी. इज्जत पर खतरा था, इसलिए वह रिंकू को वहीं छोड़ कर अपने मामा के पास पहुंची और उन्हें पूरी बात बताई. वह उस के साथ घटनास्थल पर आए और इस के बाद राशि ने पुलिस को सूचना दे दी. यह उस की बदकिस्मती थी कि हालात पूरी तरह से राशि के खिलाफ चले गए. तफ्तीश को समय न दिया जाए तो कई बार पुलिस न चाहते हुए भी जन दबाव में इस तरह की गलती कर बैठती है. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ. पुलिस ने किसी भी तरह के बवाल से बचने के लिए आननफानन में राशि और उस के घर वालों को जेल भेज दिया था.

वारदात के अगले दिन जब उन आवारा लड़कों को पता चला था कि जिस लड़के पर उन्होंने हमला किया था, उस की मौत हो गई है तो वे डर गए. कई ने डर की वजह से अपने मोबाइल फोन कई दिनों तक बंद रखे. इस मामले में पुलिस क्या कर रही है, जानने के लिए वे रोजाना अखबार पढ़ते थे. जब पुलिस ने इस मामले में राशि और उस के घर वालों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया तो वे नशेड़ी बहुत खुश हुए. बाद में उन्होंने अपने मोबाइल फोन चालू कर लिए और मजे से रहने लगे कि पुलिस उन तक नहीं पहुंच पाई. लेकिन अचानक वे पकड़े गए.

पुलिस ने सभी आरोपियों को मीडिया के सामने पेश कर के पूरी कहानी का खुलासा किया और अगले दिन यानी 5 फरवरी, 2018 को सभी को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हो सकी थी. पुलिस राशि और उस के घर वालों को जेल से रिहा कराने की दरख्वास्त अदालत में पेश कर चुकी थी.

जिस लड़के के साथ राशि की शादी तय हुई थी, उस ने शादी तोड़ दी है. पुलिस द्वारा रिंकू के हत्यारों के गिरफ्तार होने के बाद राशि के दामन पर रिंकू के कत्ल का लगा दाग भले ही धुल गया, लेकिन हालात में उलझ कर उसे जो कीमत चुकानी पड़ी, उस की भरपाई शायद ही हो पाएगी. आवारागर्दी में उलझे उन लड़कों ने होनहार युवक रिंकू की तो जान ली ही, साथ ही अपना भी भविष्य बरबाद कर लिया. UP Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

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