UP Crime News: तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत नाजमुदिनोवा करीब 15 साल पहले इंडिया घूमने आई थी, लेकिन दलालों के चंगुल में फंस कर वह जिस्मफरोशी का धंधा करने लगी. उस की हत्या की गुत्थी सुलझाते समय पुलिस को ऐसी चौंकाने वाली जानकारी मिली कि…

21 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की मवाना कोतवाली पुलिस को एक किसान ने फोन कर के जो सूचना दी, उस से पुलिस वाले हैरान हो गए. मवाना खुर्द के भगवती फार्महाउस के पास सरसों के खेत में एक महिला का शव पड़ा हुआ मिला था. यह फार्महाउस पौड़ी हाइवे पर पड़ता है. मवाना खुर्द चौकी के प्रभारी एसआई राजेश कुमार यादव को थाने से इस कौल की सूचना पर मौके पर तत्काल पहुंचने का आदेश मिला तो वह चौकी के स्टाफ को ले कर तत्काल वहां पहुंच गए, जहां महिला का शव पड़ा था.

महिला का चेहरा बुरी तरह झुलसा हुआ था. ऐसा लगता था किसी ने उस के चेहरे पर कोई ज्वलनशील पदार्थ डाला था. इतना ही नहीं, शरीर के 1-2 जगह और भी ज्वलनशील पदार्थ डाला गया था. यह तो समझ में आता था कि उस के चेहरे पर तेजाब शायद इसलिए डाला गया था ताकि मृतका की पहचान खत्म हो जाए, लेकिन शरीर के दूसरे हिस्सों को क्यों जलाया गया था. यह जानने के लिए जब एसआई राजेश ने शरीर के उन हिस्सों का निरीक्षण किया तो पता चला कि उन सभी जगहों पर बड़ेबड़े टैटू बने हुए थे. लेकिन ज्वलनशील पदार्थ डाले जाने के बाद भी वे हिस्से पूरी तरह झुलस नहीं पाए थे.

एआई राजेश यादव जांचपड़ताल के काम में लगे ही थे कि तभी मवाना थाने की एसएचओ पूनम जादौन और सीओ पंकज लवानिया भी वहां पहुंच गए. एसएचओ और सीओ ने लाश के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. सवाल था कि मरने वाली कौन थी? यह पता लगाने के लिए जब कुछ महिलाकर्मियों की मदद से मृतका के शरीर पर पहने कपड़ों की तलाशी ली गई तो उस की जेब से एक ऐसी चीज मिली, जिस से मृतका की पहचान की गुत्थी भी सुलझ गई.

कपड़ों से एक आधार कार्ड मिला, जिस पर नाम अर्चिता अरोड़ा और पता दिल्ली का दर्ज था. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि आधार कार्ड पर फोटो एक विदेशी युवती का लगा था. जबकि नाम एकदम देशी था. इसीलिए सीओ पंकज लवानिया को सहज विश्वास नहीं हुआ कि मृतका और उस की पहचान के बीच जो रिश्ता है वो एकदम सही है. इस दौरान एसपी (देहात) अभिजीत कुमार भी क्राइम व फोरैंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. घटनास्थल की जांच व निरीक्षण का काम पूरा होने के बाद मवाना पुलिस ने कथित अर्चिता अरोड़ा के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

चूंकि मृतका अर्चिता अरोड़ा के शव का निरीक्षण सब से पहले एसआई राजेश यादव ने किया था, इसलिए सीओ पंकज लवानिया के निर्देश पर एक लिखित तहरीर थाने में दी और इसी के आधार पर मवाना थाने में बीएनएस की धारा 103(1), 238 के अंतर्गत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एसपी (देहात) अभिजीत कुमार के निर्देश पर जांच का काम खुद एसएचओ पूनम जादौन ने अपने हाथ में ले लिया. एसपी (देहात) ने 2 पुलिस टीमों को गठन कर दिया. एक टीम को घटनास्थल की जांच और आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगालने का काम सौंपा गया.

दूसरी टीम को मृतका के बारे में पुख्ता जानकारी एकत्र करने का काम सौंपा गया. सभी पुलिस टीमों की मौनिटरिंग और सर्विलांस का काम सीओ पंकज लवानिया को सौंपा गया.

पुलिस की एक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांच शुरू कर दी. साथ ही उस जगह के आसपास की जगहों के सीसीटीवी फुटेज तलाशने का काम भी शुरू कर दिया, जहां अर्चिता अरोड़ा के शव को फेंका गया था. काम थोड़ा मशक्कत वाला और पेचीदा जरूर था, लेकिन जब पुलिस की टीम ने अपना काम शुरू किया तो अगले 24 घंटे में करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तलाश लिए, जिन से पुलिस को उन कातिलों तक पहुंचने का सुराग मिल गया, जिन्होंने अर्चिता का शव वहां ला कर फेंका था.

हाइवे पर बने भगवती फार्महाउस के सीसीटीवी कैमरे में पुलिस टीम को एक क्रेटा कार दिखी, जिस में कुछ लोग दिखे. सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे लोगों की संख्या करीब 3 से 4 थी, जो कंबल में लिपटे एक मानव शरीर को ले कर उस स्थान की तरफ गए, जहां अर्चिता का शव मिला था. पुलिस ने तकनीकी सहायता से आखिरकार ये पता लगा लिया कि उस क्रेटा कार का नंबर क्या है और वह किस के नाम पर रजिस्टर्ड है.

मुहब्बत उर्फ अर्चिता अरोड़ाः सालों पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत घूमने आई थी, लेकिन यहां आ कर दलालों के जाल में फंस गई.

यह क्रेटा कार मेरठ के सिविल लाइन इलाके में प्रभात नगर कालोनी के रहने वाले संदीप उर्फ सिट्टू उर्फ राहुल के नाम पर रजिस्टर्ड थी. पुलिस की एक टीम ने उसी दिन संदीप को हिरासत में ले लिया और उस से कड़ी पूछताछ शुरू कर दी. पुलिस तो पुलिस होती है, वह जब अपने तरीके से पूछताछ करती है तो इंसान क्या पत्थर भी बोलने लगते हैं. संदीप उर्फ राहुल ज्यादा देर तक चुप नहीं रह सका. संदीप ने पुलिस को बताया कि वह परतापुर के दिल्ली रोड स्थित अविका होटल में काम करता है. इस के बाद संदीप ने टेप रिकौर्ड की तरह बोलते हुए पुलिस को सब कुछ बता दिया कि उस ने क्यों और कैसे तथा किस के साथ मिल कर अर्चिता की हत्या की है.

संदीप से पूछताछ के बाद पुलिस ने अविका होटल के मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी निवासी न्यू देवपुरी थाना रेलवे रोड, मेरठ के अलावा वहां काम करने वाले एक अन्य  कर्मचारी गुरमुख उर्फ अरविंद उर्फ मोनू निवासी जौहड़ी बिनौली बागपत तथा विवेक उर्फ काका निवासी खजूरी वाली गली मलियाना, टीपीनगर मेरठ को ताबड़तोड़ छापेमारी कर हिरासत में ले लिया. संदीप समेत उन चारों से कड़ी पूछताछ हुई तो उन्होंने अर्चिता की हत्या का पूरा राज खोल कर रख दिया.

संदीप और उस के साथियों ने यह भी बताया कि पुलिस ने जिस महिला का शव बरामद किया है, उस का नाम अर्चिता अरोड़ा है, जो बैंक रोड अंबाला कैंट की रहने वाली है. हाल में वह दिल्ली के लोधी रोड स्थित कोटला मुबारकपुर में रहती थी. संदीप ने बताया कि अर्चिता जिस्मफरोशी के धंधे से जुड़ी थी. वह अकसर मेरठ में आती थी, जहां वह अपने चाहने वालों का दिल बहला कर उन की जेब खाली कराती थी. इस काम के लिए अर्चिता अविका होटल में रूम बुक करती थी.

20 फरवरी, 2026 को भी उस ने रूम बुक किया था. रात के समय अर्चिता से होटल मालिक चंचल कुमार उर्फ बंटी का रूम के किराए को ले कर विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ गया कि अर्चिता ने चंचल पर दुष्कर्म का आरोप लगाने की धमकी दे डाली. उस के बाद चंचल को इतना गुस्सा आया कि उस ने होटल के अपने 3 कर्मचारियों के साथ मिल कर अर्चिता के साथ मारपीट शुरू कर दी. उस ने अर्चिता की इतनी पिटाई कर दी कि कि वह बेहोश हो गई.

चंचल कुमार उर्फ बंटी के सिर पर गुस्सा इस कदर सवार था कि उस वक्त उसे इस बात का होश ही नहीं था कि वह क्या कर रहा है. उस ने बेहोश अर्चिता के शरीर पर कंबल डाल दिया और उस के बाद गुस्से में ही उस की गरदन दबाते हुए चीखने लगा, ”साली वेश्या, तू मुझे झूठे केस में फंसाएगी. मुझे जेल भिजवाएगी. मेरे जरिए तूने लाखों रुपया कमाया और आज तू मुझे जेल भिजवाने की धमकी दे रही है. देखता हूं कि आज तुझे कौन बचाता है.’’

बाएं – मृतका के कपड़ों से बरामद अर्चिता अरोड़ा नाम का आधार कार्ड तथा नीचे उस का तुर्कमेनिस्तान का पासपोर्ट

चंचल कुमार को पता ही नहीं चला कि गुस्से की आग में उस ने कब कंबल के अंदर लिपटी अर्चिता की गला दबा कर हत्या कर दी है. अर्चिता के शरीर में जब काफी देर तक कोई हरकत नहीं हुई तो चंचल कुमार का गुस्सा भी थोड़ी ही देर में शांत हो गया. कुछ देर बाद जब चंचल का गुस्सा शांत हुआ तो उस ने सोचा एक बार अर्चिता से बात कर ली जाए. उस ने जब अर्चिता को हिला कर उस से बात करने की कोशिश की तो पता चला कि वह निर्जीव पड़ी है.

उस ने होटल के तीनों कर्मचारियों संदीप, गुरुमुख और विवेक को बुला कर अर्चिता को होश में लाने के लिए कहा. तीनों ने जब उस की नब्ज टटोली तो पता चला उस की नब्ज बंद हो चुकी थी. कई तरह से जांचपड़ताल करने के बाद वे समझ गए कि अर्चिता की मौत हो चुकी है. जैसे ही चंचल उर्फ बंटी को यह पता चला कि अर्चिता मर चुकी है तो उन सभी के होश उड़ गए. काफी देर तक वे समझ ही नहीं पाए कि अब वे क्या करें.

लेकिन करीब एक घंटा बीत जाने के बाद उन्हें समझ में आया कि अगर उन्हें इस मामले में बचना है और पुलिस की पकड़ से दूर रहना है तो उन्हें अर्चिता के शव को अपने होटल से कहीं दूर ले जा कर ठिकाने लगाना होगा. बहुत सोचनेविचारने और सलाहमशविरा करने के बाद उन्होंने तय किया कि वे रात में ही गाड़ी में डाल कर अर्चिता के शव को कहीं और फेंक आऐंगे. उन्होंने सब से पहले तेजाब डाल कर अर्चिता के चेहरे को जला दिया ताकि उस की पहचान न हो सके. इतना ही नहीं, उस के शरीर के जिन हिस्सों में टैटू बने थे, वहां भी तेजाब डाल दिया गया.

चंडीगढ़ की एलिना से संपर्क करने पर उस ने मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना से वीडियो कौल पर पुलिस की बात कराई.

चंचल जानता था कि अर्चिता मेरठ की रहने वाली नहीं है, वह केवल अमीरजादों के जिस्म की भूख मिटा कर पैसा कमाने के लिए मेरठ आती थी. उसे शहर में ज्यादा लोग नहीं जानते हैं. अगर वे उस के चेहरे की पहचान मिटा कर उस के शव को अपने होटल से कहीं दूर डाल देंगे तो फिर उन के पकड़े जाने की संभावना नहीं है.

तेजाब से पहचान मिटा कर चंचल ने अपने तीनों साथियों के साथ मिल कर अर्चिता के शव को कंबल में लपेट कर संदीप उर्फ सिट्टू की क्रेटा कार में डाला. चंचल कुमार और उस के साथी अर्चिता की लाश को क्रेटा कार में डाल कर कारीब 45 किलोमीटर तक इधर से उधर भटकते रहे. इसी तरह वे मेरठ से होते हुए मवाना रोड निकल गए. कहीं चैकिंग नहीं हुई. वे मवाना खुर्द पुलिस चौकी के पास पौड़ी हाइवे पर स्थित भगवती फार्महाउस तक जा पहुंचे. फार्महाउस के पास पहुंच कर उन्हें लगा कि यहां लाश को ठिकाने लगाना उचित रहेगा.

वहां गाड़ी खड़ी कर के उस के बाद सभी चारों आरोपियों ने फार्महाउस की बाउंड्री के भीतर सरसों के खेत में कंबल समेत अर्चिता का शव डाल दिया. इस के बाद चारों आरोपी मौके से वापस अपने घरों को लौट आए. लेकिन घर लौटने के बाद भी चारों आरोपी मवाना पुलिस की गतिविधियों पर नजर बनाए रहे. पूछताछ का काम पूरा होने पर पुलिस ने सभी आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग की गई क्रेटा कार, होटल का कंबल और तेजाब की खाली बोतल भी बरामद कर सीज कर दी गई.

पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्यों को जुटाने के बाद चारों आरोपियों चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक को सक्षम न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथित अर्चिता अरोड़ा की शिनाख्त से ले कर हत्या के कारण व उस के कातिलों को गिरफ्तार करने की गुत्थी मवाना पुलिस ने सुलझा ली थी. लेकिन मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे के साथ एसपी (देहात) अभिजीत कुमार और सीओ पंकज लवानिया ने जब जांच अधिकारी पूनम जादौन के साथ हत्याकांड के एकएक बिंदु पर गहनता से चर्चा शुरू की तो सभी उच्चाधिकारियों को लगा कि कुछ ऐसा जरूर है, जो जांच में छूट रहा है.

पुलिस हिरासत में आरोपी चंचल कुमार, संदीप, गुरुमुख और विवेक

विचारविमर्श के बाद तय हुआ कि अर्चिता के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र करनी होगी, क्योंकि पुलिस ने अर्चिता का जो आधार कार्ड बरामद किया था, उस में भले ही उस का नाम अर्चिता अरोड़ा था, लेकिन उस में जो फोटो थी वह एक विदेशी महिला की लग रही थी, इसलिए उस के भारतीय होने पर संदेह था. पुलिस की टीमों को अब अर्चिता की सही पहचान स्थापित करने के काम पर लगाया गया. महिला की सही पहचान और उस के परिवार वालों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए टीमें गठित कर दी गईं.

पुलिस को मृतका का जो आधार कार्ड बरामद हुआ था, उस में उस का नाम अर्चिता अरोड़ा पुत्री सरबजीत अरोड़ा निवासी 1811, दूसरा फ्लोर, साउथ एक्सटेंशन, कोटला मुबारकपुर, लोधी रोड मध्य दिल्ली का पता दर्ज था. इस में जन्मतिथि 27 अप्रैल, 1984 दर्ज मिली. पुलिस की टीम जब वहां पहुंची तो जानकारी मिली कि वह इस पते पर नहीं रहती. थकहार कर पुलिस खाली हाथ लौट आई. जब अर्चिता के आधार वाले पते से कोई सुराग नहीं मिला तो जांच अधिकारी पूनम जादौन ने उस के मोबाइन नंबर का सहारा लिया.

दरअसल, अर्चिता के आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस ने अर्चिता का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया था. पुलिस ने अर्चिता के मोबाइल की 3 महीने की कौल डिटेल्स निकाली. उस में अर्चिता के मोबाइल काल डिटेल में आखिरी नंबर किसी एलिना का था, जिस का नाम उस की कौंटेक्ट लिस्ट में दर्ज था. एलिना से फोन पर बातचीत कर पुलिस ने उसे भगवती फार्महाउस में मिले एक महिला के शव और उस के पास से बरामद अर्चिता अरोड़ा के आधार कार्ड की बाबत जानकारी दी.

कौल डिटेल्स से यह भी पता चला कि अर्चिता की हत्या में पकड़े गए आरोपी चंचल कुमार से एक साल से संबंध थे. वह अकसर मेरठ आतीजाती रहती थी. हर बार उस के नाम पर एक रात या दिन के लिए अविका होटल का रूम बुक होता था. कौल डिटेल्स में चूंकि अर्चिता की आखिरी बार 20 फरवरी, 2026 को एलिना से बात हुई थी. पुलिस ने एलिना से अनुरोध किया कि वह अर्चिता के शव की पहचान करें.

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रैस कौन्फ्रेंस करते पुलिस अधिकारी

एलिना चूंकि चंडीगढ़ में रहती थी, इसलिए 25 फरवरी को मवाना थाने के एक एसआई सुमित कुमार ने एलिना से संपर्क किया. उन्होंने अर्चिता के शव के हर ऐंगल की फोटोग्राफ एलिना को दिखाई तो एलिना ने खुलासा हुआ कि मृतका अर्चिता अरोड़ा नहीं, बल्कि तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत है. एलिना के इस खुलासे के बाद अचानक पूरे केस की थ्योरी ही बदल गई. एलिना ने बताया कि मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना तुर्कमेनिस्तान में रहती है. एलिना ने एसआई सुमित कुमार से ली गई फोटो मुहब्बत की मम्मी नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना को भेजी.

मम्मी ने भी ईयरिंग, ब्लैकटौप और शरीर पर बने टैटू के आधार पर उस की पहचान अपनी बेटी मुहब्बत के रूप में की. उन्होंने एसआई सुमित कुमार से वीडियो कौल पर बातचीत में बताया कि मुहब्बत करीब 15 साल पहले तुर्कमेनिस्तान से भारत आई थी और कथित रूप से दलालों के चंगुल में फंस गई थी. दलालों ने उस का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया और उन्होंने उसे नौकरी की जगह उसे जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया.

एसएसपी अविनाश पांडेय

मुहब्बत ने अपनी पहचान के लिए दलालों के जरिए अर्चिता अरोड़ा के नाम पर आधार कार्ड बनवा लिया, लेकिन उस पर फोटो मुहब्बत का ही लगा था. मां नाजमुदिनोवा गुलनारा सुनातोवना ने यह भी खुलासा किया कि मुहब्बत भारत में जिस्मफरोशी का काम कर रही थी. पासपोर्ट पर भी उस का नाम मुहब्बत नाजमुदिनोवा था, जोकि तुर्कमेनिस्तान की नागरिक थी. मुहब्बत लगभग 15 साल से भारत में रह रही थी. एसआई सुमित कुमार से बातचीत के बाद मुहब्बत की मम्मी ने भारत में रहने वाली अपनी दोस्त उज्बेकिस्तान की रहने वाली कलिचेवा अजीजा फैजुलेवना से बातचीत की. वह भी चंडीगढ़ में रहती थी.

सीओ पंकज उस ने जब भार लवानिया

अजीजा ने वीडियो कौल पर मुहब्बत की मम्मी से बातचीत की. अजीजा एलिना को साथ ले कर 25 फरवरी को मवाना थाने पहुंची. उस ने जांच अधिकारी पूनम जादौन, सीओ पंकज लवानिया और उस के बाद एसपी (देहात) अभिजीत कुमार से मुलाकात और बातचीत की.  दूसरी तरफ मुहब्बत की मम्मी गुलनारा ने तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को एक पत्र भेज कर बताया कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि खुद भारत आ सकूं. उस ने अजीजा के जरिए तुर्कमेनिस्तान एंबेसी को यह लेटर भेजा, ताकि उस की गैरमौजूदगी में अजीजा ही पुलिस से संपर्क कर सके.

एसएचओ पुनम जादौन

गुलनारा ने दावा किया कि मृतका भारतीय नहीं, बल्कि उस की बेटी मुहब्बत है. एलिना और अजीजा के पुलिस से संपर्क करने तथा तुर्कमेनिस्तान एंबेसी के हस्तक्षेप के बाद मवाना पुलिस पूरी तरह ऐक्टिव हो गई. सीओ पंकज लवानिया को विश्वास हो गया कि अब कथित अर्चिता अरोड़ा की सही पहचान हो जाएगी. इस दौरान एंबेसी की मदद से पुलिस को मुहब्बत के पासपोर्ट की कौपी भी मिल गई. इसलिए पुलिस ने विदेश मंत्रालय को पासपोर्ट और केस की डिटेल भेज दी है और अर्चिता उर्फ मुहब्बत का डीएनए टेस्ट कराने के लिए उस की मम्मी को एक अनुरोध पत्र भी भेज दिया.

पूछताछ में पता चला कि मृतका अर्चिता अरोड़ा का जन्मस्थान भले ही तुर्कमेनिस्तान था, लेकिन उस के पापा सरबजीत अरोड़ा भारत के ही निवासी हैं. जबकि मम्मी तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली थी. इसीलिए उस ने जब भारत आने पर अपना आधार कार्ड बनवाया तो उस में अपनी पहचान अर्चिता अरोड़ा के रूप में दी. पुलिस ने अर्चिता उर्फ मुहब्बत की हत्या और उस की पहचान की गुत्थी एक तरह से सुलझा ली थी.

लेकिन इस मामले की तह में एक बड़े ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट के जुड़े होने की बू आ रही थी. क्योंकि अर्चिता उर्फ मुहब्बत ही नहीं, देश में ऐसी बहुत सारी विदेशी महिलाएं हैं, जिन के पास भारत में फरजी पहचान पत्र हैं. फरजी आधार कार्ड तो हैं, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं है. UP Crime News

 

 

 

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