Punjab Crime: पंजाब के लुधियाना में औरतों का एक ऐसा गिरोह पकड़ा गया है, जो नवजात बच्चों की तो खरीदफरोख्त करता ही था, गर्भ में पलने वाले बच्चे का भी सौदा कर लेता था.
फोन पर दूसरी ओर से बारबार यही आवाज आ रही थी कि जिस नंबर पर आप बात करना चाहते हैं, वह या तो कवरेज एरिया से बाहर है या बंद है. लेकिन शामलाल ने हिम्मत नहीं हारी और थोड़ीथोड़ी देर पर वह उस नंबर को मिलाते रहे. आखिर उन की मेहनत रंग लाई और दूसरी ओर घंटी बज उठी. उस समय शाम के साढ़े 4 बज रहे थे और तारीख थी 15 फरवरी, 2016. दूसरी ओर से फोन रिसीव किया गया तो शामलाल के कानों में किसी आदमी की भारी आवाज गूंजी, ‘‘हां जी बताइए, किस से बात करनी है, कहीं किसी गलत नंबर पर तो फोन नहीं मिला दिया? मैं तो आप को जानता नहीं.’’
‘‘नहीं जी, मैं ने एकदम सही नंबर मिलाया है. काफी देर से कोशिश कर रहा हूं, तब कहीं जा कर आप का फोन लगा है.’’ शामलाल ने कहा.
‘‘वह तो ठीक है, लेकिन आप बोल कौन रहे हैं? आप को किस से बात करनी है?’’ दूसरी ओर से अक्खड़ अंदाज में पूछा गया.
‘‘दरअसल, हमारी पहली बार बात हो रही है, इस से पहले हमारी कभी बात नहीं हुई. आप मिस्टर तेजवीर सिंह बोल रहे हैं न?’’
‘‘देखिए, पहले आप अपने बारे में बताइए. उस के बाद किस काम के लिए फोन किया है, यह बताइए. और हां, मेरा यह नंबर आप को कहां से मिला?’’ दूसरी ओर से उसी अक्खड़ अंदाज में पूछा गया.
‘‘आप का नंबर आप के एक खास दोस्त काला ने मुझे दिया है.’’
‘‘कहां रहता है यह काला?’’
‘‘यहीं लुधियाना में, उस का पता बताऊं?’’
‘‘तब तो आप भी लुधियाना से ही बोल रहे होंगे?’’ इस बार दूसरी ओर से थोड़ा नरमी से पूछा गया.
‘‘जी हां, मैं लुधियाना से ही बोल रहा हूं. वर्धमान चौक के पास मेरी कोठी है और घंटाघर के सामने वाली बिल्डिंग में मेरा औफिस है. यहां मुझे सब ठेकेदार शामलाल के नाम से जानते हैं. काला आप की बड़ी तारीफें कर रहा था. कह रहा था कि आप मेरा काम चुटकी बजा कर करवा देंगे.’’
‘‘बताइए, आप की परेशानी क्या है?’’
‘‘ऐसा है कि मेरी शादी हुए 5 साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक मैं बच्चे का मुंह देखने को तरस रहा हूं. मां न बन पाने की वजह से मेरी पत्नी भी डिप्रैशन का शिकार हो गई है. न कहीं आतीजाती है और न किसी से ज्यादा मिलतीजुलती है, गुमसुम सी अपने कमरे में पड़ी रहती है.’’
‘‘डाक्टर को नहीं दिखाया, आखिर बच्चा क्यों नहीं हो रहा?’’
‘‘बड़ेबड़े डाक्टरों को दिखा दिया है, लेकिन कहीं से कोई फायदा नहीं हुआ. अब यही सोच रहे हैं कि किसी और का बच्चा ले कर पाल लें.’’
‘‘तो किसी अनाथ आश्रम से बच्चा गोद ले लीजिए. इस में परेशानी क्या है?’’
‘‘आप की बात सही है, लेकिन मेरी पत्नी इस के लिए राजी नहीं है. क्योंकि ऐसा करने से उस पर बांझ की मोहर लग जाएगी. हमें तुरंत का जन्मा बच्चा चाहिए, जिस के बारे में मेरी पत्नी कह सके कि उसे उस ने पैदा किया है. इस बारे में मेरी काला से बात हुई तो उस ने कहा कि पैसा ले कर आप मेरा काम आसानी से कर देंगे.’’
‘‘आसानी से कैसे कर देंगे भाई? यह बहुत ही मुश्किल काम है. कई लोगों से संपर्क करना पड़ेगा. वैसे भी यह काम मैं सीधे नहीं कर सकता. जो भी करेंगी, डाक्टर साहब करेंगी. मैं उन से एक बार बात कर लेता हूं, उस के बाद आप को बताता हूं. और हां, काला ने आप को यह भी बताया ही होगा कि इस तरह के काम में काफी पैसा लगता है.’’
‘‘बताया है न. मैं ने उस से भी कहा था और आप से भी कह रहा हूं कि आप पैसों की जरा भी चिंता न करें. बस मेरा काम होना चाहिए. आप जितना भी पैसा मांगेंगे, मैं उस से ज्यादा दूंगा. पैसों की मेरे पास कोई कमी नहीं है. बस हां, बच्चा इस तरह का होना चाहिए कि देखने में अच्छे घर का लगे. खूबसूरत भी होना चाहिए.’’
‘‘वह तो ठीक है, लेकिन हम तो पेमेंट के हिसाब से बच्चा देते हैं. आप जैसा पेमेंट करेंगे, आप को वैसा ही बच्चा मिलेगा. मैं डाक्टर मैडम से बात करता हूं.’’ कह कर उस आदमी ने फोन काट दिया.
फरवरी, 2016 के दूसरे सप्ताह में लुधियाना के डीसीपी डा. नरेंद्र भार्गव को अपने किसी माध्यम से सूचना मिली थी कि शहर में कुछ महिलाओं का एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो किसी गरीब महिला के गर्भवती होने पर उस के पेट में पल रहे बच्चे (भ्रूण) को अच्छेखासे दामों में बेच कर आपराधिक धंधा कर के अच्छीखासी कमाई कर रहा है. दरअसल, महिलाओं का यह गिरोह बिना औलाद वाली महिलाओं को नवजात बच्चा बेच कर उन से अच्छीखासी रकम वसूल करता था.
यही नहीं, इस गिरोह के सदस्य उन गरीब औरतों के बारे में पता लगाती रहती थीं, जिन के कई बच्चे पहले से ही होते थे, इस के बावजूद वे गर्भवती हो जाती थीं. ऐसी महिलाओं को गर्भ ठहरने की खुशी कम, समस्या ज्यादा प्रतीत होती थी. ऐसी ही महिलाओं को पैसों का लालच दे कर वे औरतें उस का बच्चा पैदा होते ही ले कर बेऔलाद अमीर महिलाओं को अच्छेखासे दामों में बेच देती थीं. नरेंद्र भार्गव ने इस गिरोह के बारे में पता लगाने के लिए एडिशनल डीसीपी (मुख्यालय) ध्रुव दहिया के नेतृत्व में एक टीम गठित की, जिस में सीआईए-2 के इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह, उन के रीडर सुखपाल सिंह, एएसआई सतनाम सिंह, हवलदार कुलवंत सिंह, राजेश कुमार, सिपाही दलजीत सिंह, होमगार्ड के जवान जितेंद्र कुमार एवं महिला सिपाही सुरेंद्र कौर को शामिल किया गया.
टीम नवजात बच्चों का सौदा करने वाले गिरोह के बारे में पता लगाने के लिए भागदौड़ करने लगी. इसी के साथ इस टीम ने अपने मुखबिरों को भी सहेज दिया था. पुलिस टीम ने बहुत जल्दी इस गिरोह के बारे में पता कर लिया. उस में एक पुरुष भी शामिल था, जिस का नाम तेजवीर सिंह था. वही फोन पर ग्राहकों से बात कर के सौदा करता था. उस का मोबाइल नंबर भी पुलिस के हाथ लग गया था. इस के बाद एक आदमी को नकली ग्राहक बना कर नवजात बच्चा खरीदने के लिए तेजवीर सिंह को फोन किया गया. नकली ग्राहक ने अपना नाम रखा था- ठेकेदार शामलाल.
15 फरवरी, 2016 की शाम 4 बजे नकली ग्राहक ठेकेदार शामलाल की तेजवीर से बात हुई थी. 6 बजे तक कोई जवाब नहीं मिला तो शामलाल ने उसे दोबारा फोन किया. दूसरी ओर से तेजबीर ने छूटते ही कहा, ‘‘ऐसा है ठेकेदार साहब, मैं ने डाक्टर मैडम से बात कर ली है, उन्होंने आप के काम के लिए आगे की काररवाई शुरू कर दी है. मेरे सामने ही उन्होंने कई लोगों को फोन किए हैं.’’
‘‘आप को क्या लग रहा है, मेरा काम हो जाएगा न?’’ शामलाल ने उतावलेपन से पूछा.
‘‘बिलकुल हो जाएगा जी. बस आप हमें थोड़ा समय दीजिए. मेरे पास कुछ बच्चे हैं, लेकिन उन में आप जैसा बच्चा चाहते हैं, वैसा नहीं है. आप के लिए हम एकदम गोराचिट्टा और सेहतमंद बच्चा देख रहे हैं, जो पहली ही नजर में अमीर घर का लगे. क्योंकि उसे बनाना भी तो अमीर घर की औलाद है.’’
‘‘यह बात आप ने एकदम सही कही. सुन कर मन इतना खुश हुआ कि अगर आप सामने होते तो डील की रकम से अलग लाख रुपए अभी निकाल कर इनाम के रूप में आप के हाथ में रख देता.’’
‘‘कोई बात नहीं ठेकेदार साहब, हम आप से इनाम जरूर लेंगे. लेकिन पहले आप के आदेश के अनुसार काम कर दूं. आप को ऐसा खूबसूरत बच्चा ला कर देंगे कि आप और आप की मेमसाहब देखते रह जाएंगे.’’
‘‘अच्छा, अब यह बताओ कि बच्चा हमें कब मिल रहा है? मैं ने इस बारे में अपनी पत्नी को भी बता दिया है. इसलिए वह बारबार फोन कर के एक ही बात पूछ रही है कि बच्चा कब ला कर उस की गोद में डाल रहा हूं.’’
‘‘आप को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा ठेकेदार साहब. जैसे ही बच्चा हमारे पास पहुंचेगा, हम तुरंत आप को फोन कर के बता देंगे और उसी समय आप के पास तक बच्चे को पहुंचाने चल देंगे. बस आप कैश तैयार रखिएगा. डील फाइनल होते ही मैं आप को पैसे के बारे में बता दूंगा.’’
‘‘मैं ने कहा न कि आप को पैसों की चिंता करने की जरूरत नहीं है. उम्मीद से कहीं ज्यादा पैसे मिलेंगे आप लोगों को.’’
फिलहाल बात यहीं खत्म हो गई.
इस के बाद उसी दिन रात 9 बजे तेजवीर सिंह का फोन आया. उस ने जल्दीजल्दी कहा, ‘‘निहायत खूबसूरत बच्चे की व्यवस्था हो गई है. हम उसे मारुति कार नंबर पीबी 10 एम 0685 से ले कर एक घंटे बाद यानी ठीक 10 बजे वर्धमान चौक पर पहुंच रहे हैं. इस के लिए आप को 5 लाख रुपए देने हैं, जो आप को कैश में लाना है. बच्चा अभी एक हफ्ते का भी नहीं हुआ है, उसे संभालने के लिए आप अपनी पत्नी को भी साथ ले आइएगा.’’
‘‘ठीक है, मैं रुपए ले कर 10 बजे से पहले ही वर्धमान चौक के बाईं ओर वाले फुटपाथ पर अपनी पत्नी के साथ खड़ा रहूंगा.’’ नकली ग्राहक बने ठेकेदार शामलाल ने कहा. इस के बाद फोन कट गया.
तेजवीर सिंह से फोन पर यह बातचीत सीआईए के औफिस से ही हो रही थी. इस बात की जानकारी डीसीपी नरेंद्र भार्गव को दी गई तो उन्होंने कहा, ‘‘किसी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर के वर्धमान चौक के पास पूरी फोर्स के साथ तैनात हो जाओ. नकली ग्राहक को ब्रीफकेस दे कर फुटपाथ पर खड़ा कर दो. उन लोगों के आने पर वह उन से बातचीत करे. गिरोह के बारे में पता चलते ही वह अपने फोन से तुम्हारे फोन पर मिस्डकाल करे. उस के बाद तुम अपनी टीम के साथ उन्हें घेर कर गिरफ्तार कर लो. और हां, नकली ग्राहक इस बात का भी ध्यान रखे कि उस समय बच्चा उन के पास मौजूद होना चाहिए.’’
‘‘जी हां, ऐसा ही होगा.’’ जितेंद्र सिंह ने कहा.
इस के बाद उन्होंने मुखबिरी को आधार बना कर एएसआई सतनाम सिंह से तहरीर ले कर भादंवि की धारा 370 एवं ह्यूमन ट्रैफिकिंग एक्ट की धारा 2 के तहत थाना डिवीजन नंबर 7 में अपराध क्रमांक 30 पर रिपोर्ट दर्ज करवा दी. इस के बाद अपनी पुलिस टीम के साथ नकली ग्राहक बने कथित ठेकेदार शामलाल को साथ ले कर वर्धमान चौक पहुंच गए. अब उन्हें इंतजार था तेजवीर सिंह के अगले फोन का. नकली ग्राहक ठेकेदार शामलाल को एक खाली ब्रीफकेस दे कर चौक के बाईं ओर फुटपाथ पर खड़ा कर दिया गया था. बाकी पुलिस टीम वहीं एक जगह छिप कर खड़ी हो गई थी. अपनी सरकारी गाड़ी बोलेरो पीबी 10 बीयू 8036 को भी उन्होंने छिपा दिया था.
ठीक 10 बजे तेजवीर सिंह ने शामलाल को फोन किया, ‘‘हां जी ठेकेदार साहब, हम वर्धमान चौक से थोड़ा पीछे हैं. बस 2 मिनट में पहुंच जाएंगे. आप पैसा ले कर पहुंच गए हैं न?’’
‘‘जी हां, मैं बताई गई जगह पर पैसों से भरा ब्रीफकेस लिए आप का ही इंतजार कर रहा हूं.’’ शामलाल ने कहा.
‘‘ठीक है ठेकेदार साहब, बस 2 मिनट में हम भी पहुंच रहे हैं आप तक.’’ कह कर तेजवीर ने फोन काट दिया. शामलाल ने तुरंत इस बारे में जितेंद्र सिंह को उन के मोबाइल पर बता दिया, जिस से उन्होंने अपनी पुलिस टीम को सतर्क कर दिया. मुश्किल से 5 मिनट गुजरे होंगे कि सफेद रंग की मारुति कार नंबर पीबी 10 एम 0685 फुटपाथ के पास वहीं आ कर रुकी, जहां ब्रीफकेस लिए शामलाल खड़े थे. कार के रुकते ही शामलाल तेज कदमों से उस के पास पहुंच कर कार के अंदर देखा तो उस की ड्राइविंग सीट पर एक सरदार बैठा था और बगल वाली सीट पर एक औरत बैठी थी.
शामलाल को देखते ही सरदार ने खिड़की से सिर बाहर निकाल कर कहा, ‘‘आप ठेकेदार शामलाल हो न?’’
‘‘और आप तेजवीर सिंह?’’
‘‘जी, मैं ही तेजवीर हूं, मुझ से ही आप की फोन पर बात हुई थी. मैं ने आप की आवाज पहचान ली है. अच्छा, यह ब्रीफकेस मुझे दे दो, पूरे 5 लाख हैं न?’’
‘‘उस से ज्यादा हैं, लेकिन पहले बच्चा तो दो. उस के बाद ही पैसे मिलेंगे.’’
‘‘हां…हां, क्यों नहीं. पिछली सीट पर देखो, कितना प्यारा बच्चा है.’’ कह कर तेजवीर ने कार के अंदर की लाइट जला दी.
शामलाल ने कार की उस रोशनी में पिछली सीट पर देखा तो वहां 2 औरतें बैठी थीं, जिन में से एक ने अपनी गोद में पड़े कपड़े को हटाया तो उस की गोद में बहुत ही खूबसूरत बच्चा लेटा दिखाई दिया. शामलाल ने खुशी का इजहार करते हुए कहा, ‘‘बच्चा तो ठीक वैसा ही है, जैसा मैं चाहता था.’’
‘‘तो जल्दी से बच्चा उठाइए और पैसे मेरे हवाले कीजिए.’’ तेजवीर ने इधरउधर देखते हुए कहा.
‘‘भई ये पैसे तो मैं आप के लिए ही लाया हूं. बस मेरी मिसेज जरा आ जाएं.’’
‘‘वह कहां हैं? उन्हीं को तो संभालना है यह छोटा सा बच्चा.’’
‘‘वह अपनी बहन को लेने गई हैं. बस आती ही होंगी. आप कहें तो मैं फोन कर के पूछ लूं.’’
‘‘बिलकुल पूछ लो.’’ तेजवीर ने जल्दी से कहा.
शामलाल ने तुरंत इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह का नंबर मिला दिया. लेकिन उन्होंने बात करने के बजाय मिस्डकाल कर के छोड़ दिया. इस के बाद तेजवीर से कहा, ‘‘फोन रिसीव करने के बजाय काट दिया. इस का मतलब वह पास में ही हैं.’’
‘‘चलो, कोई बात नहीं. थोड़ा इंतजार कर लेते हैं.’’ कह कर तेजवीर ने कार का इंजन बंद कर दिया.
तभी पुलिस टीम ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया. तेजवीर को समझते देर नहीं लगी कि ठेकेदार शामलाल ने ग्राहक बन कर होशियारी से उसे फंसाया है. जितेंद्र सिंह ने बच्चे को एक महिला सिपाही के हवाले कर दिया और वहीं पूछताछ शुरू कर दी. सइस पूछताछ में तेजवीर ने जो बताया, उस के अनुसार, वह पंजाब के जिला मोगा के कस्बा धर्मकोट का रहने वाला था. उस की बगल वाली सीट पर उस की पत्नी रछपाल कौर बैठी थी. वह आरएमपी डाक्टर थी. कार की पिछली सीट पर जो 2 महिलाएं बैठी थीं, उन के नाम बलजिंदर कौर और गुरमीत कौर थे.
बलजिंदर कौर लुधियाना के शिमलापुरी के रहने वाले जागीर सिंह की पत्नी थी, जबकि गुरमीत कौर फरीदकोट के जैतो मंडी के रहने वाले हरभजन सिंह की पत्नी थी. उन्होंने वहीं स्वीकार कर लिया था कि वे सभी नवजात बच्चों की खरीदफरोख्त के अलावा गर्भ में पलने वाले बच्चों का भी सौदा करते थे. सीआईए केंद्र ला कर रात में पूछताछ करने के बजाय इन सभी के हवालात में बंद कर दिया गया था. अगले दिन चारों को लुधियाना के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अजयपाल सिंह की अदालत में पेश कर के विस्तार से पूछताछ के लिए 2 दिनों के कस्टडी रिमांड पर लिया गया. बच्चे को अदालत के आदेश पर एक धार्मिक संस्थान के बाल संरक्षण केंद्र के हवाले कर दिया गया.
रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ में गिरफ्तार चारों अभियुक्तों ने जो बताया, उस से जो कहानी निकल कर सामने आई, वह हैरान करने वाली थी. ये लोग नवजात बच्चों की खरीदफरोख्त तो करते ही थे, ये गर्भ में पल रहे बच्चों तक का सौदा कर लेते थे. तेजवीर सिंह ड्राइवर था. वह टैक्सी के रूप में दूसरों की गाडि़यां चलाता था. अपनी कार खरीद कर उसे टैक्सी के रूप में चलाना उस का सपना था, जो अरसा बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो रहा था. उस की पत्नी रछपाल कौर आरएमपी (रजिस्टर्ड मैडिकल प्रैक्टीशनर) डाक्टर थी. घर के एक कमरे में उस ने अपना क्लिनिक खोल रखा था, लेकिन उस के यहां मरीज नाममात्र के ही आते थे. लिहाजा उन का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता था.
करीब 2 साल पहले की बात है. बगल के गांव की एक औरत रछपाल की क्लिनिक पर आई. वह गर्भवती थी. वह इस अजन्मे बच्चे से छुटकारा चाहती थी. यानी वह अपना गर्भपात कराना चाहती थी. इस काम के लिए रछपाल कौर को अच्छाखासा पैसा मिल सकता था, लेकिन यह सब करने का उसे अनुभव नहीं था. फिर यह गैरकानूनी भी था. इसलिए वह ऐसा करने से घबरा रही थी. लेकिन उस की क्लिनिक पर मुश्किल से यह मरीज आया था, इसलिए वह उसे खाली हाथ लौटाना भी नहीं चाहती थी.
उस के दिमाग में एक तरकीब आई. उस ने उस औरत को सुझाव दिया कि वह गर्भ गिराने के बजाय अपने इस बच्चे को जन्म दे कर उसे दे दे. वह उसे सर्टिफिकेट दे देगी कि उसे मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ था. उस ने सोचा कि इस के बाद वह बच्चा किसी बेऔलाद दंपत्ति को दे देगी. इस से वह जीव हत्या से भी बच जाएगी और किसी उदास परिवार को खुशियां मिल जाएंगी. उस औरत को रछपाल की बात जंच गई. रछपाल ने उस से जो कहा था, वह उस के लिए तैयार हो गई.
रछपाल ने औरत से बच्चे को जन्म देने के लिए कह तो दिया, लेकिन यह तय नहीं कर पाई थी कि वह उस बच्चे का करेगी क्या? इस के कुछ महीने बाद एक दिन रछपाल लुधियाना जा रही थी तो बस में उस की मुलाकात बलजिंदर कौर और गुरमीत कौर से हो गई. तीनों एक ही सीट पर अगलबगल बैठी थीं. बातचीत शुरू हुई तो रछपाल ने उन्हें अपने बारे में बता कर उस महिला का किस्सा कह सुनाया. इस पर बलजिंदर और गुरमीत ने कहा, ‘‘वह बच्चा हमें दे देना, उस के लिए हम आप को एक लाख रुपए देंगे.’’
रछपाल की तो जैसे लौटरी लग गई. समय पर उस ने उस महिला की डिलिवरी करा कर उस से 2 हजार रुपए ले कर सर्टीफिकेट बना दिया कि उसे मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ था. इस के बाद रछपाल ने बच्चा बलजिंदर और गुरमीत को दे कर एक लाख रुपए ले लिए. दरअसल, बलजिंदर कौर और गुरमीत कौर का यही धंधा था. वे नवजात बच्चा खरीद कर उसे दोगुनीतिगुनी कीमत पर निस्संतान लोगों को बेच देती थीं. यही नहीं, वे गर्भवती गरीब औरतों को एडवांस दे कर उन के पेट में पल रहे बच्चों का भी सौदा कर लेती थीं.
उन के गिरोह में कई आशा वर्करों के अलावा 2 महिलाएं और शामिल थीं. उन में एक थी परमजीत कौर. वह लुधियाना के जमालपुर के रहने वाले देवेंद्र सिंह की पत्नी थी. दूसरी थी मधु वर्मा. वह लुधियाना के बसंतनगर के रहने वाले मंजीत सिंह की विधवा थी. इस के बाद बलजिंदर और गुरमीत ने रछपाल कौर को असलियत बता कर उसे भी अपने गिरोह में शामिल कर लिया. इस के बाद रछपाल ने अपने पति तेजवीर सिंह को एक पुरानी मारुति कार दिला कर उसे भी इसी धंधे से लगा दिया.
पुलिस पूछताछ में इन लोगों ने 7 नवजात बच्चों को बेचने और गर्भ में पल रहे कई बच्चों का सौदा करने की बात स्वीकार की थी. इसी पूछताछ में यह भी पता चला था कि गुरमीत कौर और बलजिंदर कौर एक बार इसी तरह के मामले में फरीदकोट पुलिस द्वारा पकड़ी गई थीं. दोनों जमानत पर छूटी थीं. फरीदकोट की अदालत में अभी भी उन पर मुकदमा चल रहा है. एक बार फिर तेजवीर सिंह, रछपाल, बलजिंदर कौर और गुरमीत कौर को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
उसी दिन समरासा चौक से परमजीत कौर और मधु वर्मा को भी हिरासत में ले लिया गया. उन्हें भी 2 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले कर पूछताछ की गई. पूछताछ कर उन्हें भी अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने पंजाब में अपना अच्छाखासा नैटवर्क बना रखा था. पुलिस इन से जुड़े तमाम लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी. इन लोगों ने जो बच्चा नकली ग्राहक शामलाल को बेचना चाहा था, उसे जिला फाजिल्का के गांव आरनीया के एक परिवार से ढाई लाख रुपए में खरीदा था.
लुधियाना पुलिस के वहां पहुंचने तक वह परिवार भूमिगत हो गया था. लुधियाना पुलिस इस मामले के पीछे हाथ धो कर पड़ी है. वह इस गिरोह से जुड़े हर आदमी को जल्दी से जल्दी गिरफ्तार करना चाहती है.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, ठेकेदार शामलाल बदला हुआ नाम है Punjab Crime






