Hindi Crime Story: जवेरिया, मैं समझ गया कि तुम मेरे साथ दोहरा खेल खेल रही हो. लेकिन मैं ने तुम्हें अहसास नहीं होने दिया कि मुझे सब पता है. कुछ भी हो, तुम मेरी मोहब्बत हो ना, चाहे तुम इस बात को समझो या न समझो.
दरवाजा खोलते ही वह मुझे देख कर पीछे हट गई. मेरे होंठों पर एक व्यंग्य भरी मुसकान थी. शायद मेरी इस मुसकराहट ने उस के होश गुम कर दिए थे. मैं ने विनम्रता से पूछा, ‘‘क्या बात है, मुझे पहचाना नहीं?’’
‘‘जव्वाद घर पर नहीं हैं.’’ उस ने एकदम से कहा.
‘‘कोई बात नहीं, मैं उस का इंतजार कर लूंगा.’’ मैं ने उसी तरह मुसकराते हुए कहा, ‘‘मेरा खयाल है कि मैं तुम्हारे लिए कोई अजनबी नहीं हूं, बल्कि तुम्हें भले ही याद न हो, लेकिन मुझे याद है कि कभी हम दोनों ने बहुत अच्छे दिन गुजारे हैं.’’
‘‘फैसल प्लीज, मैं बहुत अच्छी और शांति की जिंदगी जी रही हूं. मुझे परेशान मत करो.’’ उस ने कहा.
‘‘यह तो कोई बात नहीं हुई, मैं इतने दिनों के बाद तुम से मिलने आया हूं और तुम इस तरह रुखाई से बात कर रही हो. और कुछ नहीं तो कम से कम कुछ देर अपने घर में बैठा कर एक प्याली चाय ही पिला दो?’’ मैं ने कहा.
वह कुछ सोचती रही. शायद उसे लगा कि मेरी बात माने बगैर कोई रास्ता नहीं है तो वह एक तरफ हटते हुए बोली, ‘‘आओ, अंदर आ जाओ.’’
अंदर आ कर मैं ने इधरउधर देखते हुए कहा, ‘‘बहुत खूब, बहुत खूबसूरत घर है, साजसज्जा भी बड़ी अच्छी कर रखी है.’’






