Uttar Pradesh Crime: अनिमेष की पत्नी की मौत बेटे के पैदा होते समय हुई थी, इसलिए वह बेटे को अपशकुनी मानता था. यही वजह थी कि उस ने बेटे को तो गला दबा कर मार दिया, उस के साथ ढाई साल की बेटी को भी खत्म कर दिया.

3 मार्च, 2016 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के थाना नाका में रोज की ही तरह काम हो रहा था कि दोपहर के 2 बज कर 40 मिनट पर खड़ी लाइन की चेकदार शर्ट पहने सामान्य घर का दिखने वाला 32 साल का एक युवक इंसपेक्टर अनिल कुमार सिंह के कमरे में जा कर उन के सामने हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया. उस के बाल छोटेछोटे थे, चेहरा गोल और उस पर बेतरतीब दाढ़ी उगी हुई थी. वहां बैठे लोगों को लगा कि यह कोई शिकायत करने आया होगा. लेकिन जब उस से थाने आने का सबब पूछा गया तो उस ने जो जवाब दिया, उसे सुन कर सब सन्न रह गए.

युवक ने चेहरे पर बिना किसी तरह का भाव लाए सीधा और सपाट सा जवाब दिया था, ‘‘साहब, मैं ने अपने 2 बच्चों, 10 महीने के बेटे और ढाई साल की बेटी की गला दबा कर हत्या कर दी है.’’

युवक की बात सुन कर वहां बैठे लोगों में कोई भी सवाल करने की हालत में नहीं रह गया था. इस की वजह यह थी कि यह विश्वास करने लायक बात नहीं थी. इसीलिए तो युवक के पीछे खड़े सिपाही ने उसे डांट कर कहा था, ‘‘क्या बक रहा है, पागल हो गया है क्या?’’

लेकिन इंसपेक्टर अनिल कुमार को लगा कि युवक जो भी कह रहा है, सही कह रहा है. अब तक वह पूरी बात समझ चुके थे. युवक कोई गलत कदम न उठा ले, वह अपनी कुरसी से उठे और युवक के पास पहुंच गए. उस के कंधे पर हाथ रख कर उन्होंने कहा, ‘‘तुम आराम से पूरी बात बताओ, हम से जो हो सकेगा, तुम्हारी मदद करेंगे.’’

‘‘साहब, मेरा नाम अनिमेष वाजपेयी है. मैं स्वास्थ्य विभाग में काम करता हूं और यहीं पास में तिलकनगर कालोनी में किराए के मकान में रहता हूं. करीब 10 महीने पहले मेरी पत्नी सुषमा की मौत उस समय हो गई थी, जब वह अपने दूसरे बच्चे को जन्म दे रही थी. इस समय मेरी बेटी दिवांशी ढाई साल की थी और बेटा 10 महीने का था. मुझे लगता था कि मेरी पत्नी की मौत की वजह मेरा बेटा था. अगर वह न पैदा होता तो मेरी पत्नी की मौत न होती. इसीलिए मैं ने दोनों बच्चों को मार दिया.’’

अनिमेष की पूरी बात सुन कर अनिल कुमार सिंह ने उसे हिरासत में ले लिया. 2 बच्चों की हत्या की बात थी, इसलिए उन्होंने इस बात की जानकारी एसपी (पश्चिमी) सर्वेश मिश्रा और सीओ (बाजारखाला) अभयनाथ त्रिपाठी को दे दी. अनिमेष जिस मोहल्ले में रहता था, वह कोतवाली बाजारखाला के अंतर्गत आता था, इसलिए इस घटना की सूचना थाना बाजारखाला पुलिस को दे दी गई. पुलिस अनिमेष को साथ ले कर उस के घर पहुंची तो देखा दोनों बच्चों की लाशें पहली मंजिल के एक ही कमरे में बैड पर पड़ी थीं.

बच्चों की लाशें देख कर किसी का भी कलेजा फट सकता था. वहां खड़े सभी लोगों का लगभग यही हाल था. मोहल्ले वाले भी दिल दहलाने वाले इस दृश्य को देखने के लिए जुट गए थे. अनिमेष मूलरूप से लखनऊ के ही थाना इटौंजा के गांव कुम्हरावां का रहने वाला था. उस की ससुराल इटौंजा के ही पांडेय टोला में थी. 5 साल पहले उस की शादी सुषमा से हुई थी. अनिमेष लखनऊ के सिल्वर जुबली अस्पताल में औपरेशन थिएटर सहायक के रूप में काम करता था. वह पत्नीबच्चों, पिता अनूप कुमार वाजपेयी, भाई अभिषेक और भाभी श्वेता के साथ रहता था. तिलकनगर के जिस मकान में यह परिवार किराए पर रहता था, वह रिटायर अफसर सरोज तिवारी का था.

ग्राउंड फ्लोर पर सत्यनारायण चौरसिया रहते थे, जबकि पहली मंजिल पर अनिमेष अपने घर वालों के साथ रहता था. मकान मालिक सरोज तिवारी मुंबई में रहते थे. अनिमेष का बड़ा भाई अभिषेक इलाहाबाद में रह कर पीएचडी की तैयारी कर रहा था. समयसमय पर वह घर आता रहता था. अभिषेक और श्वेता को अभी कोई बच्चा नहीं था. वे अनिमेष के ही बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानते थे. सुषमा की मौत के बाद अनिमेष के बच्चों की देखभाल उस की भाभी श्वेता ही कर रही थीं. दुधमुंहे बेटे को पालपोस कर 10 महीने का करने में श्वेता की अहम भूमिका थी, क्योंकि अनिमेष शुरू से ही बेटे को पत्नी की मौत का कारण मानता था, इसलिए वह उसे फूटी आंखों नहीं देखना चाहता था.

वह घर में रहता और बच्चे रोने लगते तो पत्नी की मौत का जिम्मेदार मानते हुए वह उन की पिटाई करने लगता था. पत्नी की मौत के बाद बच्चों का खयाल रखने या देखभाल करने के बजाय वह उन की पिटाई करता था. अगर घर का कोई आदमी बच्चों की पिटाई करने से उसे रोकता तो वह उस से झगड़ा करता. इस मामले में वह पिता की भी नहीं सुनता था.

गुरुवार की सुबह बच्चे रोने लगे तो अनिमेष बेरहमी से उन की पिटाई करने लगा. श्वेता ने उसे मना किया तो उस ने गुस्से में कहा, ‘‘तुम्हें क्या पता, इन बच्चों की वजह से मैं कितने तनाव में रहता हूं. इन्होंने अपनी मां को तो मार ही डाला, इसी तरह रोरो कर मुझे भी मार डालेंगे. ये मेरे बच्चे हैं, इसलिए तुम लोगों को इन की चिंता करने की जरूरत नहीं है. इन्हें कैसे रखना है, इन का क्या करना है, यह मेरी जिम्मेदारी है, मैं इन से निपट लूंगा.’’

‘‘मुझे भी पता है कि ये बच्चे तुम्हारे हैं, लेकिन जब तुम इन मासूमों को इस तरह बेरहमी से पीटते हो तो मुझे बड़ी तकलीफ होती है. तुम्हारे बच्चे हैं, तुम इन के साथ कुछ भी कर सकते हो, पर मैं इन्हें इस तरह पिटते नहीं देख सकती.’’ कह कर श्वेता चली गई.

इस के बाद बच्चों को ले कर अनिमेष और श्वेता का आपस में काफी झगड़ा हुआ. श्वेता से जब सहन नहीं हुआ तो वह मायके चली गई. बेटी और बेटा रोधो कर सो गए. अनिमेष उन्हीं के पास बैठा सोचता रहा. उसे लगता था कि इन्हीं बच्चों की वजह से पत्नी मर गई, घर वाले भी अकसर उसे उलटासीधा कहते रहते हैं. इन की वजह से न दिन में चैन मिलता है, न रात में. उस का सुखचैन इन्होंने छीन लिया है. जब तक ये रहेंगे, वह कभी सुखचैन से नहीं रह पाएगा. अगर इन्हें खत्म कर दिया जाए तो सारा झंझट ही खत्म हो जाएगा.

अनिमेष ने वहीं रखा तकिया उठाया और सोते हुए बच्चों के मुंह पर रख कर दबा दिया. मुंह पर तकिया रखा होने की वजह से बच्चे चीख भी नहीं पाए और मर गए. इस तरह 2-2 हत्याएं हो गईं और किसी को पता नहीं चला. इस के बाद उसे लगा, उस ने जो किया है, वह ठीक नहीं है. वह उठा और सीधा थाने चला गया. पुलिस अनिमेष को ले कर घर आई तो मोहल्ले वालों को दोनों बच्चों की हत्या का पता चला. बैड पर दोनों बच्चों की लाशें पड़ी थीं. जिस तकिया से मुंह दबा कर बच्चों की हत्या की गई थी, वह भी वहीं पड़ा था. पुलिस ने अपनी काररवाई कर के दोनों बच्चों की लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और अनिमेष को ला कर थाने में बंद कर दिया.

पोस्टमार्टम के बाद बच्चों की लाशों को लेने के लिए ननिहाल और ददिहाल पक्ष में तनाव हो गया. अंतत लाशों को बच्चों के मामा भानु मिश्रा, अनुराग और शिवम ने अपने कब्जे में ले लिया. वे उन्हें अपने गांव ले गए, जहां उन का अंतिम संस्कार कर दिया गया. पूछताछ के बाद पुलिस ने अनिमेष को बच्चों की हत्या के आरोप में जेल भेज दिया था. पुलिस का मानना है कि पत्नी की मौत के बाद अनिमेष डिप्रैशन में था. इसी वजह से उस ने बच्चों की हत्या कर दी थी. जबकि अनिमेष की ससुराल वालों का कहना है कि अनिमेष दूसरी करना चाहता था. दोनों बच्चे उसे इस में बाधा लग रहे थे, इसलिए उन की हत्या कर के उस ने इस बाधा को दूर कर दिया है.

जबकि अनिमेष का कहना था कि उस के ये बच्चे अपशकुनी थे, इसलिए उस ने उन्हें मार दिया. लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि अगर बेटा अपशकुनी था तो बेटी को मारने की क्या जरूरत थी. जांच में अनिमेष के खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि उसे पागल मान लिया जाए. इस से साफ लगता है कि पत्नी की मौत के बाद अनिमेष अपने बच्चों की परवरिश नहीं करना चाहता था, इसलिए उस ने उन की हत्या कर दी.

शायद वे उसे ऐशोआराम में बाधक लग रहे थे. इसलिए अनिमेष ने उन्हें मार दिया. अब अदालत उसे क्या सजा देगी, यह तो बाद की बात है, लेकिन उस ने अपने जीवन में कांटे तो बो ही लिए हैं. इस की सजा अब उसे इस जीवन में भुगतनी ही होगी. Uttar Pradesh Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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