Social Media Crime: सोशल मीडिया की साइट फेसबुक द्वारा हुई दोस्ती में सच्चाई कम झूठ ज्यादा होता है. फिर भी यह लोगों को इतना आकर्षित करती है कि वे अपनी दोस्ती को रिश्ते में बदलने को तैयार हो जाते हैं. ऐसे में जब सच्चाई सामने आती है तो निश्चित है अपराध होगा ही.

बंगलुरु के काडुगोडी पौश एरिया स्थित महावीर किंग्ज अपार्टमेंट के गेट पर जिस समय सुखवीर पहुंचा, दोपहर के सवा 12 बज रहे थे. सिक्योरिटी वालों ने जब उस से पूछा कि वह किस से मिलने आया है तो उस ने कहा, ‘‘मैं अपार्टमैंट में चौथी मंजिल पर रहने वाली कुसुम सिंगला से मिलने आया हूं. मैं उन का नजदीकी रिश्तेदार हूं और हरियाणा से आया हूं.’’

सिक्योरिटी गार्डों ने यह सूचना इंटरकौम द्वारा चौथी मंजिल पर स्थित फ्लैट में रहने वाली कुसुम सिंगला को दी तो उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें बिठाओ, मैं खुद उन्हें लेने नीचे आ रही हूं.’’

कुछ देर बाद आकर्षक व्यक्तित्व वाली कुसुम अपौर्टमैंट के गेट पर बने सिक्योरिटी कक्ष में पहुंची तो उस के हावभाव से ही लगा कि उस से मिलने आने वाले इस आदमी से वह पहली बार मिल रही हैं, क्योंकि उस ने उसे पहचानने की कोशिश करते हुए पूछा था, ‘‘मिस्टर सुखवीर सिंह?’’

आगंतुक, जिसे कुसुम ने सुखवीर कहा था, उठ कर अपना हाथ उस की ओर बढ़ाते हुए कहा था, ‘‘जी आप मिस कुसुम सिंगला?’’

कुसुम सिंगला ने उस का हाथ अपने हाथ में ले कर जिस तरह गर्मजोशी से दबाया था, उसे देख कर सिक्योरिटी वालों को लगा था कि आगंतुक मैडम का कोई खास ही है. इस के बाद उन्होंने सुखवीर से उस के बारे में पूछ कर सिक्योरिटी कक्ष में रखे विजिटर रजिस्टर में लिखा और अपने चौथी मंजिल स्थित फ्लैट में जाने के लिए उस के साथ लिफ्ट की ओर बढ़ गई. दरअसल, पंजाब की रहने वाली कुसुम सिंगला को फेसबुक द्वारा दोस्त बनाने का शौक था. इस की वजह यह थी कि वह अकेली थीं. इन्हीं दोस्तों से चैटिंग कर के वह अपना खाली समय बिताती थीं. यही वजह थी कि जिस किसी ने भी उन्हें फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी, उन्होंने बेझिझक स्वीकार कर ली.

शायद यही कारण था कि जब 31 दिसंबर, 2015 की रात उन्होंने अपना फेसबुक चैक किया तो उस में हरियाणा के सुखवीर सिंह की ओर से भेजी फ्रैंड रिक्वैस्ट देखी तो स्वीकार कर ली थी. उस ने सिर्फ फ्रैंड रिक्वैस्ट ही नहीं भेजी थी, नए साल का शुभकामना संदेश भी भेजा था. अपने स्टेटस में 30 वर्षीय सुखवीर ने खुद को याहू इंडिया कंपनी का अधिकारी और अविवाहित लिखा था. कुसुम ने सुखवीर की फ्रैंड रिक्वैस्ट तो स्वीकार कर ही ली थी, शुभकामना संदेश के लिए धन्यवाद देते हुए अपनी ओर से भी उसे नववर्ष की मुबारकबाद दी थी.

इस के बाद दोनों की फेसबुक पर चैटिंग होने लगी. 9 जनवरी, 2016 को दोनों अपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दिए तो फेसबुक पर चैटिंग बंद कर के मोबाइल पर इन की घंटों बातें होने लगीं. इस का नतीजा यह निकला कि दोनों एकदूसरे से प्यार ही नहीं करने लगे, बल्कि आपस में शादी करने के बारे में सोचने लगे. बातचीत में सुखवीर ने खुद को अमीर घर का होने के साथसाथ यह भी बताया था कि वह याहू इंडिया कंपनी में अधिकारी है. दूसरी ओर से कुसुम भी अपने बारे में तमाम बातें करते हुए सुखवीर को अक्सर यह अहसास दिलाती रहती थी कि वह उस का पहला प्यार है. इतनी उम्र होने के बावजूद उसे किसी का प्यार नसीब नहीं हुआ.

दोनों के ही फोटो फेसबुक पर थे. सुखवीर के मुकाबले कुसुम कहीं ज्यादा खूबसूरत और प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालकिन थी. उस की नौकरी भी अच्छी थी, जहां से उसे बढि़या तनख्वाह मिल रही थी. सुखवीर ने उस से मिलने की इच्छा जाहिर की तो कुसुम ने उसे अपने घर का पता दे कर बंगलुरु आने का निमंत्रण दे दिया. इस तरह 19 जनवरी, 2016 को सुखवीर हवाई जहाज से बंगलुरु पहुंच गया और हवाई अड्डे से सीधे दोपहर को कुसुम सिंगला के फ्लैट पर जा पहुंचा. कुसुम उसे सम्मान और अपनत्व के साथ अकेली होने के बावजूद हर तरह से विश्वास कर के उसे अपने साथ फ्लैट में ले गई थी.

कुसुम उस फ्लैट में अकेली नहीं, निधि शर्मा के साथ रहती थी. वह डैल कंपनी में नौकरी करती थी और शाम 8 बजे तक अपनी नौकरी से वापस आती थी. 19 जनवरी की शाम वह अपनी नौकरी से ठीक 8 बजे फ्लैट पर पहुंची. कुसुम रोजाना उस से पहले आ जाती थी. लेकिन उस दिन अपने किसी रिश्तेदार के आने की वजह से उस ने छुट्टी ले रखी थी. निधि को उस ने यह बात सुबह ही बता दी थी. इसलिए निधि रात 8 बजे फ्लैट पर पहुंची तो कुसुम फ्लैट पर ही होगी, यह सोच कर उस ने फ्लैट की डोरबैल बजाई. एक बार बजाने पर जब उसे लगा कि अंदर किसी तरह की हलचल नहीं हुई है तो उस ने दोबारा बजाई. इस बार भी अंदर से कोई आवाज नहीं आई तो तीसरी बार, चौथी, फिर कई बार बजाई.

दरवाजे पर लैचलौक होने की वजह से उसे भीतरबाहर दोनों ओर से खोला और बंद किया जा सकता था. दरवाजे की एक चाबी कुसुम के पास होती थी और एक निधि के पास.  लगातार कई बार बैल बजाने पर भी जब अंदर कोई रिस्पौंस नहीं मिला तो निधि को लगा शायद कुसुम अपने रिश्तेदार के साथ कहीं घूमने चली गई है. उस ने पर्स से चाबी निकाली और दरवाजा खोल कर भीतर आ गई. अंदर अंधेरा था, स्विचबोर्ड का अनुमान उसे था ही, इसलिए हाथ बढ़ा कर लाइट औन कर दी. लाइट जलते ही निधि ने जो देखा, उस की आंखें खुली की खुली रह गईं. उस का शरीर कांपने लगा, आवाज मुंह में जैसे घुट कर रह गई. हाथ में पकड़ा मोबाइल छूट कर फर्श पर गिर गया.

थोड़ी देर बाद जब उस की चेतना लौटी तो हिम्मत कर के उस ने फ्लैट का दरवाजा खोला और बाहर आ कर ‘खून…खून…’ चिल्लाने लगी. उस की चीख सुन कर पल भर में तमाम पड़ोसी इकट्ठा हो गए. सिक्योरिटी वाले भी भाग कर ऊपर आ गए. घबराई निधि निढाल हो कर दीवार के सहारे जमीन पर बैठ गई थी. उस से कोई कुछ पूछता था तो जवाब देने के बजाय वह फ्लैट के अंदर की ओर अंगुली से इशारा कर दे रही थी.

फ्लैट का औटोमैटिक दरवाजा फिर से बंद हो गया था, लेकिन चाबी की होल में ही लटक रही थी. आने वालों ने दरवाजा खोल कर अंदर जा कर देखा तो आगे वाले कमरे में कुसुम सिंगला की लाश पड़ी थी. उस की आंखें खुली थीं, गरदन पर लैपटौप के चार्जर का तार लिपटा था. बाईं आंख की भौंहों के पास गहरा जख्म था, जिस से बहा खून फर्श तक आ गया था. पहली ही नजर में लग रहा था कि वह मर चुकी है. लाश के आसपास तमाम कागज बिखरे पड़े थे.

इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई. थाना काडुगोडी पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और घटनास्थल की जांच कर के जरूरी काररवाई निपटाई, उस के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दिया. निधि शर्मा से तहरीर ले कर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया और फिर अपार्टमैंट में रहने वालों तथा सिक्योरिटी वालों से पूछताछ शुरू हुई. इस पूछताछ में सिक्योरिटी गार्ड ने बताया था कि कुसुम सिंगला का एक रिश्तेदार सुखवीर सिंह आया था. लेकिन वह 3 बजे के करीब लिफ्ट से नीचे उतरा और अपार्टमैंट के मुख्य गेट से जाने के बजाय छोटे गेट से बाहर निकल गया था. उस ने कुसुम मैडम का लैपटौप वाला बैग अपने कंधे से लटका रखा था.

पुलिस ने जब सिक्योरिटी गार्ड से कहा कि तुम ने उसे रोका क्यों नहीं तो उस ने कहा, ‘‘हम रोकते कैसे, हमें उस पर किसी तरह का शक ही नहीं हुआ. चूंकि कुसुम मैडम जिस तरह से हाथ मिला कर उसे अपने साथ ले गईं थीं और विजिटर रजिस्टर में उस के बजाय खुद अपने हाथों से इंट्री भरी थी, उसे देख कर यही लगा था कि वह उन का कोई बहुत खास है. इसी वजह से वह बाहर जाने लगा तो हम ने रोका नहीं था. लेकिन अब लगता है कि हम से बहुत बड़ी गलती हुई है. अगर उसे रोक कर कुसुम मैडम को फोन कर लिया होता तो वह उसी समय पकड़ा जाता.’’

पुलिस वालों के कहने पर सिक्योरिटी गार्ड ने विजिटर रजिस्टर का वह पेज दिखाया, जहां कुसुम की हैंडराइटिंग में उस के कथित रिश्तेदार का विवरण लिखा था. वह विवरण कुछ इस तरह था : सुखबीर सिंह, निवासी हथीन, पलवल, हरियाणा. इसी के साथ उस का मोबाइल नंबर लिखा था. पुलिस ने उस नंबर पर फोन किया तो वह बंद था. विजिटर रजिस्टर ले कर पुलिस थाने लौट आई. मामला गंभीर था. संदिग्ध अपराधी के हुलिए की जानकारी देते हुए सभी थाना पुलिस को सूचना दे दी गई थी.

बंगलुरु पुलिस के उच्चाधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसीपी (ईस्ट) पी. हरिशेखरन के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन कर इस केस को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपते हुए अभियुक्त की तलाश में लगा दिया. हरिशेखरन ने अपनी जांच तेजी से शुरू कर दी. अब तक कुसुम के साथ रहने वाली निधि भी काफी हद तक संभल गई थी. पुलिस की मौजूदगी में उस ने कुसुम का सामान चैक कर के बताया कि लैपटौप के अलावा उस के मोबाइल फोन, कै्रडिट और डेबिट कार्ड, बैंक के खाते की चैकबुक के साथ एक ट्राउजर गायब है. इस के अलावा अन्य सामान भी गायब हो सकता है, क्योंकि उस की अलमारी में पड़े तमाम कागजात और दस्तावेज वगैरह बिखरे पड़े थे.

हरिशेखरन ने निधि शर्मा से पूरी जानकारी ले कर कुसुम का मोबाइल नंबर भी ले लिया था. उन्होंने कुसुम के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाने के साथ उस की उस समय की लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया. काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर उन्होंने कई बार फोन किए थे. यही नहीं, उस नंबर से भी कुसुम के नंबर पर कई बार फोन आए थे. वह वही नंबर था, जो पुलिस को अपौर्टमैंट के विजिटर रजिस्टर से मिला था. इस का मतलब वह संदिग्ध सुखवीर सिंह का नंबर था.

सुखवीर और कुसुम के फोन की मौजूदा लोकेशन बंगलुरु से बाहर की साथसाथ होने की आ रही थी. बंगलुरु पुलिस हरियाणा पुलिस को सुखवीर सिंह का पता दे कर उस के बारे में पता लगाने में सहयोग करने का अनुरोध कर चुकी थी. लेकिन हरियाणा पुलिस ने कहा था कि दिया गया पता अधूरा है, फिर भी उस के बारे में पता करने की कोशिश की जा रही है.

हरिशेखरन की टीम ने अब तक कुसुम के बारे में जो जानकारी जुटाई थी, उस के अनुसार वह मूलरूप से पंजाब की रहने वाली थी. पेशे से वह सौफ्टवेयर इंजीनियर थी और इस से पहले आईबीएम कंपनी की नोएडा शाखा में काम करती थी. यहीं काम करते हुए उस की शादी हुई थी, लेकिन जल्दी ही उस का तलाक हो गया था. करीब 6 महीने पहले उस का तबादला बंगलुरु के लिए हो गया था. कुसुम काफी खूबसूरत ही नहीं, समझदार और व्यवहारकुशल भी थी. बढि़या नौकरी कर रही थी. इस तरह की सर्वगुणसंपन्न लड़की का तलाक क्यों हुआ, यह किसी भी समझ में नहीं आ रहा था.

कुसुम दूसरी शादी के लिए काफी गंभीर थी, लेकिन सचेत भी बहुत थी. एक बार धोखा खाने के बाद इस बारे में वह अगला कदम बहुत फूंकफूंक कर रख रही थी. उस ने तय कर लिया था कि दूसरी शादी करने से पहले वह लड़के के बारे में अच्छी तरह जांचपरख कर ही शादी का निर्णय करेगी. पूछताछ में निधि शर्मा ने पुलिस को बताया था कि कुसुम अपनी शादी के बारे में तो उस से बातें करती थी, लेकिन इस संबंध में उस की किसी से बात चल रही है, यह कभी नहीं बताया था.

उस दिन उस ने निधि को सिर्फ यही बताया था कि उस का कोई रिश्तेदार उस से मिलने आ रहा है. वह रिश्तेदार कौन है, कहां से और क्यों आ रहा है? यह सब उस ने कुछ नहीं बताया था. जो भी था, अब कुसुम का वही कथित रिश्तेदार उस के कत्ल के संदेह के दायरे में आ रहा था. अपार्टमैंट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी पुलिस ने देखी थी. उन में कुसुम के साथ एक लड़का उस के फ्लैट की ओर जाता दिखाई दिया था. सिक्योरिटी वालों ने उसे पहचान कर कन्फर्म कर दिया था कि वही वह सुखवीर सिंह है, जिस के बारे में विजिटर रजिस्टर में एंट्री कर के कुसुम अपने साथ ले गई थी.

सुखवीर सिंह तक पहुंचने का अब पुलिस के पास एक ही रास्ता रह गया था कि उस के मोबाइल की औनरशिप के बारे में पता किया जाए. पुलिस ने ऐसा ही किया. इसे बंगलुरु पुलिस का सौभाग्य ही कहा जाएगा कि वह फोन नंबर सुखवीर सिंह पुत्र राजपाल सिंह के नाम ही था, जिस में उस का पूरा पता लिखा॒था॒: गांव रीबड़, थाना हथीन, पलवल, हरियाणा. बंगलुरु पुलिस ने तुरंत उक्त पता हरियाणा पुलिस को दे कर सुखवीर सिंह को गिरफ्तार करने का आग्रह किया.

थाना हथीन पुलिस ने बंगलुरु पुलिस द्वारा दिए पते पर छापा मारा तो सुखवीर सिंह वहीं का रहने वाला था. लेकिन वह घर पर नहीं था. जब घर वालों से उस के बारे में पूछा गया तो पता चला कि वह उस समय गुड़गांव में था. गुड़गांव में वह कहां है, घर वालों से पता चल गया था. इस के बाद गुड़गांव पुलिस की मदद से उसे थोड़ी ही देर में पकड़ लिया गया था. सुखवीर सिंह के पकड़े जाने की सूचना पा कर बंगलुरु पुलिस गुड़गांव पहुंची और विधिवत उसे हिरासत में ले कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 5 दिनों के ट्रांजिट रिमांड पर ले कर बंगलुरु आ गई.

बंगलुरु पुलिस ने सुखवीर सिंह को पूछताछ सैल में ले जा कर व्यापक पूछताछ की तो उस ने पुलिस को जो कुछ बताया, उस से कुसुम सिंगला की हत्या की जो वजह सामने आई, वह इस तरह थी : सुखवीर सिंह गांव में पैदा हुआ था, इसलिए ग्रामीण परिवेश में ही पलाबढ़ा. लेकिन वह शुरू से ही पढ़ाई में होशियार था, इसलिए पढ़लिख कर इंजीनियर बन गया. इस के बाद उसे याहू इंडिया कंपनी की नोएडा शाखा में नौकरी मिल गई. कुछ दिनों बाद बंगलुरु की किसी फर्म में उसे यहां से ज्यादा वेतन की नौकरी मिल गई. यह सन 2011 की बात है.

वहां उस ने कुछ महीने ही नौकरी की थी कि याहू इंडिया कंपनी ने उसे और ज्यादा पैसे दे कर अपने यहां बुला लिया. इस के बाद उसे एक्सेंचर कंपनी में नौकरी मिल गई तो उस ने याहू कंपनी छोड़ कर वहां की नौकरी जौइन कर ली. लेकिन सन 2013 में उस की यह नौकरी छूट गई तो उसे अभी तक कहीं नौकरी नहीं मिली थी. नौकरी छूटने के बाद उस के पास 2 ही काम रह गए थे, एक नौकरी की तलाश करना, दूसरा सोशल मीडिया से जुड़ कर टाइम पास करना. लाखों युवाओं की तरह वह भी फेसबुक द्वारा अनेक लोगों से चैटिंग किया करता था. फेसबुक में वह अपने बारे में खूब बढ़चढ़ कर बताता था.

इसी तरह कुसुम सिंगला से जब उस की फेसबुक द्वारा फ्रैंडशिप हुई तो उस ने उन्हें भी अपने बारे में खूब बढ़चढ़ कर बताया. बाद में जब दोनों ने अपनेअपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिए तो उन की फोन पर लंबीलंबी बातें होने लगीं. एक तो उस के पास बात करने का प्रभावशाली अंदाज था, दूसरे उस ने अपने झूठ के सहारे बहुत जल्दी कुसुम को शीशे में उतार लिया था.

दरअसल, कुसुम की नौकरी और वेतन के बारे में जब सुखवीर को पता चला तो उसे लगा कि अगर कुसुम से उस की शादी हो जाती है तो उस के सारे कष्ट तुरंत कट जाएंगे. कुछ दिनों बाद वह उसे अपने बेरोजगार होने की बात बता देगा. शादी होने के बाद कुसुम कुछ कर तो सकेगी नहीं, फिर खुद ही नौकरी दिलवाने में उस की मदद करेगी. अपनी इस गलत सोच के साथ तिकड़म भिड़ा कर फोन पर बात करते हुए वह कुसुम के इतने नजदीक आ गया कि उस के एक बार कहने पर कुसुम ने उसे मिलने के लिए बंगलुरु बुला लिया.

अपनी धाक जमाने के लिए सुखवीर हवाई जहाज से वहां गया. जिस समय वह सिक्योरिटी कक्ष में बैठा कुसुम का इंतजार कर रहा था, वहां बैठे लोगों की बातचीत से उसे पता चला कि कुसुम कुंवारी नहीं, बल्कि तलाकशुदा है. इस बात से उसे एकबारगी धक्का लगा, क्योंकि कुसुम ने उस से कहा था कि वह उस का पहला प्यार है. लेकिन उस ने भी तो कुसुम से तमाम झूठ बोले थे, इसलिए खुद को सहज बनाए रखा.

कुसुम आ कर उसे अपने फ्लैट में ले गई और उस की खूब आवभगत की. दोनों बैठ कर इधरउधर की बातें करने लगे तो सुखवीर ने कुसुम से तलाकशुदा होने और उस से इस बात को छिपाने की शिकायत की. इस के जवाब में कुसुम ने कहा कि वह विवाह नहीं, एक धोखा था. उसे उस के उस कथित पति से कभी प्यार नहीं मिला, इसलिए उस ने उसे प्यार या शादी माना ही नहीं. सुखबीर ने उसे उस की इस गलती पर इस तरह माफ करने वाली बात कही, जैसे ऐसा कर के वह उस पर बहुत बड़ा एहसान कर रहा हो.

कुसुम को शायद उस का माफ करने वाला यह अंदाज पसंद नहीं आया, इसलिए उस ने थोड़ा गंभीर लहजे में कहा, ‘‘मेरी जिंदगी में सिर्फ यही एक झूठ था, जिसे माफ कर के तुम ने मुझे अपराधबोध से बचा लिया. अगर तुम्हारी जिंदगी में भी कोई झूठ हो तो अभी बता दो. मैं भी तुम्हें इसी तरह माफ कर के अपना मन साफ कर लूंगी.’’

उस समय वहां ऐसा माहौल बन गया था कि सुखबीर को लगा कि उसे भी अपने बारे में सचसच बता देना चाहिए. उस ने निश्चिंत हो कर अपने बेरोजगार होने की बात कुसुम को बता कर अनुरोध किया कि हो सके तो वह उस की नौकरी लगवाने में मदद करे. सुखवीर का झूठ बेवकूफ बनाने वाला था, इसलिए उस के झूठ को सुन कर कुसुम को इतना गुस्सा आया कि उस ने उसे डांटते हुए तुरंत वहां से चले जाने को कहा.

‘‘ठीक है, मैं अभी चला जाता हूं, लेकिन तुम मुझे मेरे आनेजाने का खर्च 50 हजार रुपए दे दो.’’ सुखबीर ने कहा.

कुसुम ने उसे एक भी पैसा देने से साफ मना कर दिया. उस का कहना था कि उसे देने के लिए उस के पास एक भी पैसा नहीं है. मना करने की एक वजह यह भी थी कि इस के पहले वह इसी तरह धोखे में 5 लाख रुपए गंवा चुकी थी. इसलिए अब वह किसी के धोखे में नहीं आना चाहती थी.

‘‘ठीक है, तुम 50 हजार नहीं देना चाहती तो मुझे वापस जाने के लिए 5 हजार रुपए ही दे दो. इस के बाद मैं तुम से कभी किसी तरह का संपर्क नहीं रखूंगा.’’ सुखबीर ने अनुनय करते हुए कहा.

कुसुम ने 5 हजार रुपए देने से भी मना कर दिया. इस पर सुखवीर को गुस्सा आ गया और वहां पड़ा पैन उठा कर उस के चेहरे पर वार कर दिया. कुसुम जख्मी हो गई. कुसुम अपने बचाव के लिए शोर मचा पाती, सुखबीर ने फुर्ती से लैपटौप के चार्जर का तार उस के गले में लपेट कर कस दिया. पल भर में कुसुम की सांसों ने उस का साथ छोड़ दिया. सुखवीर निश्चिंत हो गया कि कुसुम मर गई है तो उस का लैपटौप बैग मे डाल कर उस के कमरे की तलाशी लेने लगा. तलाशी में उसे कुसुम का क्रैडिट कार्ड, डैबिट कार्ड और बैंक की चैकबुक मिली तो उसे भी बैग में डाल लिया. उस का सैलफोन भी उस ने जेब में डाल लिया.

सुखवीर ने जब पैन से कुसुम पर वार किया था तो उस के चेहरे से निकला खून उस की पैंट पर लग गया था. पकड़े जाने के डर से उस ने अपना पैंट उतार कर बैग में डाल लिया और कुसुम का ट्राउजर निकाल कर पहन लिया. वहां से वह इस तरह इत्मीनान से निकला, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था. थोड़ी दूर जा कर उस ने कुसुम के फोन से संबंधित बैंक के कस्टमर केयर पर रिक्वैस्ट भेजी कि वह पिन भूल गया है, इसलिए उसे नया पिन दिया जाए. इस से सुखबीर को नया पिन मिल गया.

नया पिन मिलने के बाद सुखबीर ने एटीएम से 10 हजार रुपए निकाले. दिल्ली पहुंच कर उस ने 30 हजार रुपए और निकाले. इस के बाद वह गुड़गांव के एक होटल में कमरा ले कर आराम करने की गरज से ठहर गया. लेकिन वह आराम कर पाता, उस के पहले ही पुलिस द्वारा पकड़ लिया गया. दरअसल, उस ने होटल में पहुंचते ही इस की सूचना होटल के फोन से अपने घर वालों को दे दी थी. इस तरह कुसुम की हत्या कर के भागने के 24 घंटे के अंदर ही सुखवीर पकड़ लिया गया.

पुलिस ने उस के पास से कुसुम के दोनों मोबाइल फोन, उस की बैंक की चैकबुक, क्रैडिट और डैबिट कार्ड, लैपटौप बरामद करने के साथ उस की निशानदेही पर बंगलुरु में फेंकी गई उस की वह पैंट भी बरामद कर ली थी, जिस पर कुसुम का खून लगा था. रिमांड अवधि समाप्त होने पर सुखबीर को एक बार फिर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक वह जेल में ही था. Social Media Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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