Hindi Crime Stories: कृष्णा ने अपने जीवन में भले ही कुछ भी झेला हो, लेकिन साइको बन कर उस ने नववाहिताओं के साथ जो कुछ किया, वह ठीक नहीं था. अगर पुलिस ने इतनी मशक्कत न की होती तो शायद 2-4 नवविवाहिताएं और …

कीमती सुंदर आभूषणों का आकर्षण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है पर क्या कोई आभूषणों का इतना दीवाना हो सकता है कि उन की चाह में कई हत्याएं कर डाले. मंदिर प्रांगण में नवविवाहिता की लाश मिलने से पटियाला और उस के आसपास के जिलों में दहशत का माहौल बन गया था. गोविंदगढ़ के लक्ष्मीनारायण मंदिर में सुबह की आरती के बाद करीब 10 बजे मंदिर के पुजारी राधेश्याम वहां की सफाई कर रहे थे. सफाई करते हुए वह मंदिर के बगीचे के पास पहुंचे तो बगीचे में एक पेड़ के सहारे एक नवविवाहिता को बैठी देख कर चौंके.

दूर से देखने से लग रहा था, जैसे वह काफी थकी होने की वजह से आराम करने के लिए पेड़ का सहारा ले कर बैठ गई हो. लेकिन ऐसा नहीं था. राधेश्याम जब उस के नजदीक पहुंचे तो पता चला वह युवती मृत थी. इस का मतलब लाश को इस तरह पेड़ के सहारे टिकाया गया था कि दूर से वह पेड़ के सहारे बैठी लगे. मृत युवती की उम्र 26-27 साल थी. उस की दोनों टांगें आगे की ओर फैली थीं और दोनों हाथ दाएंबाएं नीचे की ओर लटक रहे थे. युवती की गरदन दाएं कंधे पर लुढ़की हुई थी और पीठ पेड़ के सहारे टिकी थी.

पुजारी राधेश्याम ने अपना हाथ युवती की नाक के पास ले जा कर देखा. युवती की सांसें थम चुकी थीं. उन्होंने तुरंत इस घटना की सूचना स्थानीय थाना सिटी पुलिस को दे दी. कुछ ही देर में थाना सिटी के थानाप्रभारी इंसपेक्टर अनिल कोहली सहयोगियों के साथ मंदिर पहुंच गए.

अब तक वहां काफी लोग इकट्ठा हो गए थे. अनिल कोहली ने भीड़ को हटा कर लाश का निरीक्षण किया. मृतका काफी खूबसूरत थी. देखने से ही वह किसी अच्छे घर की लग रही थी.उस ने दुलहन के कपड़े पहन रखे थे. हाथों पर लगी मेहंदी एवं चूड़ा देख कर यही लगता था कि उस की शादी हाल ही में हुई है. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि मृतका के शरीर पर एक भी गहना नहीं था. हां, गहने पहनने के निशान जरूर दिखाई दे रहे थे. यह चौंकाने वाली बात थी. लाश का निरीक्षण करतेकरते ही अनिल कोहली ने मंदिर के पुजारी से पूछा, ‘‘आप इसे जानते हैं?’’

‘‘जी, मैं इस के बारे में केवल इतना ही जानता हूं कि यह रोजाना शाम की आरती में शामिल होने मंदिर आती थी. कल शाम की आरती में भी आई थी. लेकिन कल यह दुलहन की तरह सजधज कर आई थी. और काफी सारे गहने भी पहने हुए थी. इसे देख कर मुझे हैरानी भी हुई. मैं ने पूछना भी चाहा था, पर जब तक मैं खाली हुआ तब तक यह चली गई थी. बाकी यह कौन है, कहां की रहने वाली है, यह मैं कुछ नहीं जानता. बस इतना कह सकता हूं कि यह पिछले लगभग 4 महीनों से बिना नागा मंदिर में आ रही थी.’’

पुजारी की बातों से अनिल कोहली को भी हैरानी हुई कि जब वह युवती इतने सारे गहने पहन कर आई थी तो गहने कहां गए? कहीं गहनों के लिए ही तो उस की हत्या कहीं की गई? उन्होंने क्राइम टीम बुलवा कर लाश के फोटो कराए. इस के बाद जो भी संभव थे, सबूत जुटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दिया गया.

मृतका के फोटो हर छोटेबड़े अखबार में छपवा कर पुलिस ने लोगों से उस की शिनाख्त की अपील की. यही नहीं, मृतका के पैंफ्लेट छपवा कर शहर के प्रमुख स्थानों और बाजारों में चिपकवा दिए गए. इस का नतीजा यह निकला कि 3 दिनों बाद दोपहर को अधेड़ आयु का एक पुरुष एक युवक को साथ ले कर थाने आया. पुरुष ने बताया कि मृतका उस की बेटी है. उस का नाम वंदना बंसल था. करीब 6 महीने पहले उस की शादी हंस बंसल से हुई थी. शादी के बाद से ही वंदना परेशान रहने लगी थी, क्योंकि उस का पति शराब पी कर उस के साथ मारपीट करता था. यही नहीं, उस के किसी अन्य युवती से भी संबंध थे.

वंदना ने उसे उस युवती के साथ पकड़ लिया था. उस दिन से हंस ने घर आना छोड़ दिया था. वह दिनरात उसी युवती के पास पड़ा रहता था. वंदना घर में अकेली रहती थी. वंदना की मां ने यह भी बताया कि उस दिन शाम को वह घर से पूरे गहने पहन कर बाहर निकली थी. घर से निकलते समय उस ने कहा था कि वह मंदिर की आरती में जाएगी. वहां से वह हंस के पास जाएगी और उसे समझाएगी. वंदना उस दिन लाखों रुपए के गहने पहने थी. वंदना की मां की बातें सुन कर अनिल कोहली को लगा कहीं हंस ने ही तो पीछा छुड़ाने के लिए वंदना को ठिकाने नहीं लगा दिया. संभव है कि हत्या कर के उस ने वंदना के गहने उतार लिए हों और लाश को मंदिर प्रांगण में छोड़ दिया हो.

अनिल कोहली ने हंस के बारे में पता किया. पटियाला रोड पर उस की फोम के गद्दे बनाने की फैक्ट्री थी. लेकिन जब से वह रूबी नाम की औरत के चक्कर में पड़ा था, तब से फैक्ट्री जाने के बजाय ज्यादातर रूबी के यहां ही पड़ा रहता था. अनिल कोहली ने वंदना की मां शारदा से रूबी का पता लिया और उस के घर पहुंच गए. हंस उन्हें वहीं मिल गया. पुलिस को देख कर हंस ने दीवार फांद कर भागने की कोशिश की, लेकिन भागने से पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया. थाने लाक र उस से पूछताछ की गई तो उस ने वंदना की हत्या करने से इनकार कर दिया.

अनिल कोहली ने उस से हर तरह से पूछताछ कर ली, लेकिन वहएक ही रट लगाए रहा कि उस ने वंदना की हत्या नहीं की. इस बीच अनिल कोहली ने अपने मुखबिरों से भी हंस के बारे में पता कर लिया था. उन्होंने बताया था कि हंस लगभग एक महीने से अपने घर यानी वंदना के पास नहीं गया था. हंस के खिलाफ कोई ठोस सबूत न मिलने से अनिल कोहली को उसे छोड़ना पड़ा. धीरेधीरे लोग वंदना की हत्या के मामले को भूलने लगे. अनिल कोहली भी लगभग इस मामले को भूल गए थे. इस बीच उन का उस थाने से ही नहीं, 2 अन्य थानों से भी तबादला हो चुका था. लेकिन लगभग 6 महीने बाद अखबार में एक खबर पढ़ कर उन्हें वंदना की हत्या वाला मामला याद आ गया.

खबर के अनुसार हनुमान मंदिर परिसर के पास सुनसान जगह पर एक नवविवाहिता मृत पाई गई थी. अनिल कोहली ने पूरा समाचार पढ़ा तो उन्हें लगा कि इस युवती की मौत भी ठीक उसी तरह से हुई थी, जैसे वंदना की हुई थी. उन्होंने तुरंत थानाप्रभारी से संपर्क किया. वहां के थानाप्रभारी थे इंसपेक्टर सुमित सूद. सुमित सूद के अनुसार, मृतका का नाम रजनी था और वह अपने घर में अकेली ही रहती थी. उस का पति विदेश में नौकरी करता था. बूढ़े सासससुर गांव में रहते थे. मंदिर के पुजारी से पूछताछ करने पर केवल यही पता चला कि रजनी पिछले 6 महीने से बिना नागा शाम की आरती में आती थी.

लाश मिलने वाले दिन से एक दिन पहले वाली शाम को भी वह आरती में आई थी. उस दिन उस ने बहुत सारे गहने पहन रखे थे. पुजारी ने उसे टोका भी था कि जमाना बहुत खराब है, उसे इतने गहने पहन कर घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. वंदना और रजनी की मौत में समानता यह थी कि पोस्टमार्टम के अनुसार दोनों की मौत दम घुटने से हुई थी. इस से अंदाजा लगाया गया कि दोनों हत्याओं के पीछे किसी एक ही आदमी का हाथ है और मकसद शायद कीमती गहने लूटना था.

लेकिन लाख प्रयास के बाद भी हत्यारे का कोई सुराग नहीं मिला. दोनों ही थानाप्रभारियों ने अपनेअपने क्षेत्र के मुखबिरों को लगा रहा था. इन दोनों मामलों की जांच चल ही रही थी कि एक और नई खबर आ गई. खन्ना रोड पर नीलो नहर के किनारे बने साईं मंदिर के पास एक नवविवाहिता की लाश ठीक उसी तरह पाई गई, जिस तरह वंदना और रजनी की लाशें मिली थीं.

पुलिस जीजान से हत्यारे तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी पर कोई नतीजा नहीं निकल रहा था. सच्चाई यह थी कि पुलिस अपराधी से कई कदम पीछे थी. पुलिस इस मामले को तंत्रमंत्र से भी जोड़ कर देख रही थी. इसलिए क्षेत्र के सभी तांत्रिकों से पूछताछ करने के अलावा पुलिस ने उन के पीछे अपने मुखबिर भी लगा रहे थे. कोई नतीजा न निकलते देख पुलिस को लगने लगा कि इन हत्याओं का मकसद कुछ और ही है.

8 महीने में बिलकुल इसी तरह की विभिन्न थानों में 5 हत्याएं हो चुकी थीं. इन हत्याओं से दहशत का माहौल बन गया था. सभी थानों की पुलिस पर अधिकारियों का काफी दबाव था. समाजसेवी संस्थाएं और जनता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करने शुरू कर दिए थे. मीडिया वाले फजीहत किए हुए थे. अन्य थानाप्रभारी श्री अनिल कोहली और सुमित सूद काफी परेशान थे. क्योंकि अब तक उन के हाथों कोई कड़ी नहीं लगी थी. सभी पुलिस अधिकारी मिल कर हत्यारे तक पहुंचने की कोशिश में लगे थे.

एक दिन अनिल कोहली और सुमित सूद मिले तो सुमित सूद ने कहा, ‘‘कोहली साहब, मुझे लगता है इन सभी हत्याओं के पीछे किसी एक आदमी का हाथ नहीं है. शिकार ढूंढ़ना, उसे घटनास्थल तक ले जाना और हत्या करना एक आदमी के वश की बात नहीं हो सकती. मेरे खयाल से यह 3-4 लोगों का गिरोह है.’’

‘‘भई, इस मामले में मैं अभी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं. मुझे हैरानी इस बात की है कि आरती के समय वहां कितने लोग मौजूद होते हैं, उन के बीच से कोई किसी औरत को इस तरह कैसे अपने साथ ले जाता है.’’ अनिल कोहली ने कहा, ‘‘मजे की बात यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सभी हत्याओं में मौत की वजह दम घुटना बताया गया था, जबकि किसी भी लाश के गले पर दबाने का कोई निशान नहीं मिला है.’’

‘‘हां, यह चौंकाने वाली बात है.’’ सुमित सूद ने कहा, ‘‘लगता है, इन हत्याओं को अभी तक हम ठीक से समझ ही नहीं पाए हैं.’’

सभी पुलिस अफसरों ने तमाम बातों पर विचारविमर्श कर के अपनेअपने थाने के होशियार पुलिसकर्मियों को बुला कर निर्देश दिए कि वे शहर के सभी मंदिरों में जा कर वहां के पुजारियों से मिलें और उन से कहें कि किसी नवविवाहिता को गहने पहन कर आई देखें तो तुरंत पुलिस को सूचना दें. यही नहीं मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी कहें कि अगर उन्हें किसी पर शक होता है तो उस पर नजर तो रखे ही, पुजारी या पुलिस को भी बताएं.

यह बात मंदिर के पुजारियों से कही जाती, उस के पहले ही के पंचमुखी हनुमान मंदिर के पीछे सुनसान जगह पर एक और नवविवाहिता की लाश बिलकुल वैसी ही हालत में मिली. इस मामले में अंतर सिर्फ इतना था कि यह लाश सुनसान जगह  पर मिली थी, इस के अलावा लाश के आगे एक छोटा सा हवनकुंड भी बना था और वहां पूजासामग्री और फूल आदि भी पड़े थे. उन्हीं सब के बीच एक छोटी सी प्याली में एक चम्मच कोई रसायन भी रखा था.

वहां मिली चीजों को सावधानी के साथ कब्जे में ले कर पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. हैरानी वाली बात यह थी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बार भी मौत की वजह दम घुटना ही बताया गया. घटनास्थल से बरामद सभी चीजों को फोरैंसिक लैब भेजा गया तो वहां से आई जांच रिपोर्ट में प्याली में मौजूद रसायन में पोटैशियम साइनाइड मिला पाया गया था. इस का मतलब था पूजा के बाद प्रसाद के बहाने या किसी और तरह से मृतका को साइनाइड दिया गया था. साइनाइड एक ऐसा जहर है, जिसे जीभ पर रखते ही आदमी दम घुटने से मर जाता है. कहा जाता है, उसे खाने वाला उस का स्वाद तक नहीं बता पाता.

इस मामले के बाद दोनों पुलिस अफसरों को जांच का एक सूत्र मिल गया. उन्हें इस बात की भी जानकारी हो गई. इस के पहले हुई हत्याओं में भी साइनाइड का इस्तेमाल किया गया था. इस से पुलिस ने यह भी अंदाजा लगाया कि इन हत्याओं के पीछे उसी आदमी का हाथ है, जो आसानी से सायनाइड प्राप्त कर सकता है. आखिर ऐसा आदमी कौन हो सकता है?

पुलिस ने सायनाइड के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि सायनाइड का उपयोग लोहे के कारखानों में डाई टैंपर करने या निकल आदि में किया जाता है. मंडी गोविंदगढ़ एक ऐसा शहर था, जहां लोहे के तमाम कारखाने थे. वहां कैमिकल बेचने वाले की भी कमी नहीं थी. उन सभी के यहां जाजा कर पूछताछ करना आसान नहीं था, पर पुलिस को हत्यारे तक पहुंचना था, इसलिए उस ने यह भी किया.

पुलिस चूंकि जल्द से जल्द हत्यारे तक पहुंचना चाहती थी, इसलिए पूरे जोश के साथ इस काम में जुट गई. पुलिस की अब तक की सारी जांच बेकार गई थी. शहर के सभी बड़े मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के साथसाथ पुलिस ने उन की फुटेज खंगालने के लिए एक स्पैशल टीम बना दी, जो लगातार अपना काम कर रही थी.

सब इंसपेक्टर अजीत सिंह ने एक दिन अपनी ड्यूटी के दौरान देखा कि पिछले 3-4 दिनों से एक अधेड़ उम्र की साध्वी किले वाले शिवमंदिर में आ कर बैठती है. वह आनेजाने वाले दर्शनार्थियों को इस तरह देखती थी, जैसे उन में से किसी को तलाश रही हो, दर्शनार्थी भले ही उसे प्रणाम करें, लेकिन वह किसी से बात नहीं करती थी. हां, आरती में वह जरूर शामिल होती थी. उस वक्त उस की नजरें नवविवाहिताओं पर ही टिकी रहती थीं. आरती खत्म होने पर वह उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करती थी.

अजीत सिंह को उस साध्वी पर शक हुआ, क्योंकि उस का व्यवहार रहस्यमयी था. उन्होंने यह बात अमित कोहली और सुमित सूद को बताई. वीडियो फुटेज देख कर दोनों पुलिस अफसरों के निर्देश पर साध्वी पर नजर रखी जाने लगी. लेकिन अचानक वह साध्वी गायब हो गई. शायद उसे अपने ऊपर नजर रखे जाने का पता चल गया था. लेकिन अब पुलिस के पास इतना कुछ था कि वह साध्वी तक पहुंच सकती थी. फुटेज में एक युवती साध्वी के चरणस्पर्श कर के उस के पास बैठ कर बातें करती भी दिखाई दी थी.

अमित कोहली और सुमित सूद ने 2 पुलिस टीमें बना कर 2 अलगअलग कामों पर लगा दीं. एक टीम को साध्वी का फोटो कैमिकल बेचने वालों को दिखा कर पता करना था कि वह औरत उन के यहां सायनाइड खरीदने तो नहीं आती. दूसरी टीम को उस युवती के बारे में पता करना था, जो फुटेज में साध्वी के पैर छू कर बातें करती दिखाई दे रही थी.

दूसरी वाली पुलिस टीम ने उस युवती का पता लगा लिया. उस का नाम ममता जिंदल था. वह जिंदल शूज कंपनी के मालिक तरुण जिंदल की पत्नी थी. ममता को पूरे मामले के बारे में बता कर साध्वी से मिलने की वजह पूछी गई तो उस ने बताया कि उस की शादी 5 साल पहले हुई थी, लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ है. डाक्टरों के अनुसार, पतिपत्नी संतान पैदा करने में सक्षम थे. संतान के लिए दोनों ने कोशिश भी बहुत की, पर कुछ नहीं हुआ.

संतान के लिए ही वह रोज मंदिर जाती थी. एक दिन जब वह मंदिर जा रही थी तो उस साध्वी ने रोक कर कहा, ‘‘संतान के लिए परेशान हो न? संतान की वजह से ही तुम्हारा पति तुम्हें छोड़ने की तैयारी कर रहा है. लेकिन वह नासमझ यह नहीं जानता कि तुम एक नहीं, 7 बच्चों को जन्म दोगी, जो पूरी दुनिया में तुम्हारा नाम रोशन करेंगे.’’

‘‘मांजी, क्या ऐसा संभव है?’’ ममता ने हैरानी से पूछा तो साध्वी ने कहा, ‘सब कुछ संभव है मेरी बच्ची.’

इस के बाद आंखें बंद कर के वह कुछ देर सोचती रही, उस के बाद बोली, ‘‘लेकिन बेटी, इस राह में एक अड़चन है. तुम्हें महापतिव्रत अनुष्ठान करना होगा, जिस के लिए तुम्हें रात 10 और 11 बजे के बीच नवविवाहिता की तरह सजधज कर मेरे साथ पूजा करनी होगी. अगर तुम ने यह पूजा नहीं की तो संतान से तो वंचित रहोगी ही, कुछ दिनों में तुम्हारे पति की भी मौत हो जाएगी. पति की मौत के बाद ससुराल वाले तुम्हें घर से निकाल देंगे.’’

ममता के बताए अनुसार, साध्वी की बातों में न जाने कैसा आकर्षण था कि मात्र 3-4 मुलाकातों में ही वह अमावस्या की रात को होने वाली पूजा की तैयारी में जुट गई. वह साध्वी कौन है, कहां रहती है, उस का नाम क्या है? ममता को कोई जानकारी नहीं थी. उस का कहना था कि शाम की आरती में जब वह मंदिर जाती थी तो साध्वी मंदिर के सामने वाले पीपल के पेड़ के नीचे चबूतरे पर ध्यान लगाए बैठी रहती थी.

ममता से मिली जानकारी के आधार पर दोनों पुलिस अफसरों को यह तो पता चल ही गया कि सारी घटनाएं अंधविश्वास की वजह से हुई थीं. लेकिन साध्वी अभी उन की पहुंच से काफी दूर थी. फिर भी पुलिस हाथ धो कर साध्वी के पीछे पड़ गई. इस बीच पहली टीम को पता चला कि दिलापुर गांव की कृष्णा कैमिकल बेचने वाले शंभू के यहां से 2 महीने पहले सायनाइड ले गई थी. कृष्णा के बारे में पता लगाने के लिए पुलिस ने मुखबिरों को लगाया तो पता चला कि कृष्णा का घर शहर से जुड़े गांव जगतारा के पूर्वी छोर पर एकांत में बना था.

जब गांव वालों से उस के बारे में पता किया गया तो लोगों ने बताया कि लगभग 40-42 साल पहले कृष्णा का विवाह रामजीलाल सुनार से हुआ था. वह सर्राफों के लिए गहने बनाने का काम करता था. न जाने क्यों अचानक उस ने आत्महत्या कर ली. यह उस की शादी के 6-7 महीने बाद की बात है. उस समय कृष्णा की उम्र 19-20 साल थी. पति की मौत के बाद वह पागल हो गई थी.

चूंकि गांव में उस का कोई और नहीं था, इसलिए गांव वालों ने उस का इलाज करवाया. वह ठीक हो गई तो उस का घर बेच कर गांव वालों ने गांव के छोर पर उस के लिए एक कोठरी बनवा दी, क्योंकि इलाज के बाद भी वह पड़ोसियों और राहगीरों से झगड़ा करती थी. अब कृष्णा की उम्र लगभग 60 साल थी और वह पूजापाठ और तीर्थयात्रा कर के अपना समय गुजार रही थी. उस समय वह तीर्थयात्रा पर गई थी. पुलिस ने कृष्णा के घर के पास सादे कपड़े में 2 सिपाही लगा दिए. अमित कोहली ने सरपंच की मौजूदगी में कृष्णा की कोठरी का ताला तोड़ कर तलाशी की तो वहां रखे एक बक्से से सोनेचांदी तथा हीरों के तमाम गहने बरामद हुए. बाद में जिन की शिनाख्त भी हो गई.

अचानक एक रात कृष्णा अपने घर पहुंची तो पुलिस उसे पकड़ कर थाने ले आई. थाने में की गई पूछताछ में उस ने बिना किसी विरोध के अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस का कहना था कि उस ने उन सभी औरतों को मुक्ति के लिए परलोक भेजा था और आगे भी वह ऐसा ही करती रहेगी. उस की इन बातों से पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारियों को लगा कि उस की दिमागी हालत ठीक नहीं है. क्योंकि बात करतेकरते वह जुनूनी हो जाती थी. उसे मनोचिकित्सक को दिखाया गया तो डाक्टर ने बताया कि वह दिमाग की एक खतरनाक बीमारी से ग्रस्त है. इस का यह रोग इतना पुराना है कि ठीक नहीं हो सकता. लेकिन लगातार इलाज चलता रहा तो इसे फौरी तौर पर राहत जरूर मिलेगी.

कृष्णा के गांव के बुजुर्गों से पूछताछ में उस के साध्वी बन कर नवविवाहिताओं की हत्या करने की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी-

कृष्णा बहुत ही गरीब परिवार की थी. बचपन से ले कर जवानी तक का सफर उस ने बड़े अभावों में गुजरा था. उस के मांबाप उसे छोड़ कर कहीं और चले गए थे. गांव वालों ने मिल कर उसे पालपोस कर उसे बड़ा किया और रामजीलाल से उस की शादी कर दी. रामजीलाल गहने बनाने का अच्छा कारीगर था. वह भी अकेला था, क्योंकि उस के मांबाप बचपन में ही मर गए थे. दूर के रिश्तेदार ने उसे पालपोस कर गहने बनाना सिखा दिया था.

बचपन से अभावों में जीने वाली कृष्णा का मन करता था कि वह अच्छेअच्छे कपड़े पहने, जिन के साथ गहने भी हों, पर पति के घर में उसे यह सब नहीं मिला. रामजीलाल भले ही गहने बनाने का अच्छा कारीगर था, लेकिन वह पत्नी के लिए एक भी गहना नहीं बना सका था. शादी के 4 महीने बाद हरियाणा के जिला जींद के कस्बा सफीदो में एक रईस जमींदार ने बेटी की शादी थी. जमींदार ने बेटी के लिए गहने बनाने के लिए रामजीलाल को बुलाया. काम काफी लंबा था, इसलिए रामजीलाल पत्नी सहित जमींदार के घर पहुंच गया. उन्हीं के यहां रहते हुए रामजीलाल बड़ी सफाई से एकएक गहना बना रहा था. लगभग सभी आभूषण तैयार हो गए थे.

एक रात कृष्णा को न जाने क्या सूझा कि उस ने रामजीलाल द्वारा बनाए सभी गहनों को पहन कर खुद को नईनवेली दुलहन की तरह सजाया और घर से निकल कर सड़क पर किसी महारानी की तरह टहलने लगी. रामजीलाल उस दिन गहनों की सफाई के लिए सामान लेने शहर गया था. संयोग से उसी समय जमींदार उधर से निकला तो कृष्णा को गहनों से लदीफंदी देख कर उसे लगा कि उस ने बेटी के लिए जो गहने बनवाए हैं, कृष्णा उन्हें चोरी कर के भाग रही है. ऐसा सोचने की एक वजह यह भी थी कि देर रात हो जाने के बाद भी तब तक रामजीलाल शहर से नहीं लौटा था. जबकि उसे शाम तक ही लौट आना था.

जमींदार कृष्णा को पकड़ कर हवेली ले गया और उस से सारे गहने उतरवा कर उसे बांध दिया गया. कृष्णा रोरो कर सफाई देती रही, पर उस की किसी ने नहीं सुनी. रामजीलाल के लौटने पर बिना कुछ पूछे इसी तरह उसे भी चोर ठहरा दिया गया. उसी रात जमींदार ने मजदूरी के नाम पर रामजी लाल को कुछ रुपए दिए और धक्के मार कर पतिपत्नी को गांव से भगा दिया. रामजीलाल ने कभी सपने में नहीं सोचा था कि उस की इस तरह बेइज्जती होगी.

रामजीलाल भले ही गरीब था, लेकिन बहुत ही ईमानदार और खुदगर्ज था. उसे कृष्णा की यह नादानी और अपनी बेइज्जती बरदाश्त नहीं हुई और घर आ कर उस ने आत्महत्या कर ली. पति के इस तरह मौत को गले लगाने से कृष्णा पागल हो गई. क्योंकि उसे लगता था कि यह सब उसी की वजह से हुआ था. गांव वालों ने उस का इलाज तो करवाया, पर वह पूरी तरह से ठीक नहीं हुई थी. इलाज के बाद कृष्णा अजीब सी जुनूनी हो गई थी. उस पर कीमती गहने पहनने का जुनून सा सवार हो गया था. उसी के लिए उस ने यह रास्ता चुना था. सायनाइड के बारे में उसे पता था. क्योंकि सोनाचांदी साफ (शुद्ध) करते समय उस का पति इस का इस्तेमाल करता था, उसी ने बताया था कि यह बहुत ही खतरनाक जहर है.

इलाज के बाद कृष्णा तीर्थयात्रा पर निकली तो उस ने देखा कि साधुओं के पास तमाम दुखियारे आते हैं और बड़ी श्रद्धाभाव से उन के द्वारा बताए उपाय करते हैं. यही देख कर उस ने अपनी एक योजना बनाई और घर लौट आई. गांव में कृष्णा साधारण औरतों की तरह रहती थी, लेकिन शहर जा कर वह किसी धर्मशाला या ऐसे मंदिर में अपना डेरा डालती थी, जहां यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होती थी. इस के बाद वह साध्वी वेश में किसी बड़े मंदिर के पास किसी पीपल या बरगद के पेड़ या एकांत में ध्यान लगा कर बैठ जाती थी. आरती के समय वह नवविवाहिताओं के चेहरे पर आने वाले भावों से अंदाजा लगा कर अपना शिकार चुनती थी.

इस के बाद वह उस के घर का पता लगा कर नौकरनौकरानी या पड़ोसियों से उस के बारे में पता लगाती और उसे फंसाने का जाल बिछाती. उन की कमजोरी जान कर उसे दूर करने के उपाय के नाम पर पूजा के बहाने मंदिर या मंदिर के पास कहीं सुनसान जगह पर बुलाती और सायनाइड मिला चरणामृत पिला कर उन की हत्या कर देती. फिर वह उस के सारे गहने उतार कर अपने गांव चली जाती. गांव में वह हफ्ता 10 दिन उन गहनों को पहन कर अपनी कुंठा शांत करती. इस के बाद उन्हें घर के आंगन में बने कच्चे मिट्टी के चूल्हे के नीचे दबा कर पुन: नए शिकार की तलाश में निकल पड़ती.

पुलिस ने उस की निशानदेही पर वे गहने बरामद कर के उसे अदालत में पेश किया, तो जज के सामने भी उस ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए कहा कि भविष्य में भी वह इसी तरह औरतों को मुक्ति दिलाती रहेगी. कृष्णा की मनोदशा देख कर जज ने उसे मनोरोगी घोषित करते हुए इलाज के लिए मैंटल अस्पताल भेजने का आदेश दिया. कुछ लोगों का कहना है कि सजा से बचने के लिए कृष्णा ढोंग रच रही थी, पर मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि वह गंभीर मानसिक रोग से ग्रस्त है. Hindi Crime Stories

—सत्य घटना पर आधारित

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