Gangster: कटनी का रहने वाला किशोर तिवारी उर्फ किस्सू इतना खतरनाक गैंगस्टर बन गया कि वह अपने दुश्मनों को ऐसी मौत देता था कि लोग उस के सामने आने से भी कतराते थे. 80 के दशक में उस ने प्रदेश में दहशत फैला रखी थी. सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि बड़ेबड़े बदमाश भी उस से खौफ खाते थे. कई गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस भी उस के खिलाफ सीधे काररवाई करने से हिचकने लगी थी. पढि़ए, एक साधारण कंपाउंडर के खूंखार अपराधी बनने की पूरी कहानी…

20 मई, 2024 को जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ की अध्यक्षता वाली एकल पीठ कटनी से संबंधित एक आपराधिक अवमानना की सुनवाई कर रही थी. उस दिन जबलपुर जिले के तत्कालीन एसपी आदित्य प्रताप सिंह भी कोर्ट में मौजूद थे. चीफ जस्टिस ने तल्ख टिप्पणी करते हुए एसपी को निर्देश देते हुए कहा, ”आखिर पुलिस हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी हुई है? एक मोस्टवांटेड गैंगस्टर किशोर तिवारी उर्फ किस्सू पुलिस को चकमा दे कर घूम रहा है.’’

”सर, पुलिस टीम मुस्तैदी के साथ अपना काम कर रही है, गैंगस्टर लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है.’’ एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने भरोसा दिलाते हुए कहा.

”केवल मुस्तैदी से कुछ नहीं होगा, कोर्ट को मुलजिम चाहिए. कोर्ट पुलिस को 48 घंटे का वक्त देती है. 22 तारीख को पुलिस किस्सू तिवारी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करे.’’

इतना कहते ही एकल पीठ ने कोर्ट की काररवाई अगले दिन के लिए मुल्तवी कर दी.

कटनी के अपर सत्र न्यायालय और जबलपुर में राजू सोनी हत्याकांड के मामले में आरोपी किशोर तिवारी उर्फ किस्सू के खिलाफ कोर्ट स्थाई वारंट जारी करती रही, लेकिन पुलिस उसे तलाश नहीं पाई थी. जबलपुर जिला न्यायालय ने भी मार्च, 2022 में उस के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था. जब दोनों ही प्रकरण में उस की गिरफ्तारी नहीं हुई तो पीडि़त परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई. जबलपुर हाईकोर्ट ने एसपी (जबलपुर) आदित्य प्रताप सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की सुनवाई करते हुए किस्सू को 48 घंटे में गिरफ्तार करने का आदेश दिया.

22 मई को सुनवाई की तारीख निर्धारित की. इस के बाद कटनी और जबलपुर जिले की 5 अलगअलग टीमें गठित की गईं. किस्सू की छोटी बहन भारती तिवारी नाहर तिनसुकिया जिला डिब्रूगढ़, असम में रहती है. फरारी में वह वहां भी छिपता रहा है. इसी आस में एक टीम असम भी गई थी, लेकिन वह वहां नहीं मिला.

जबलपुर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद कटनी पुलिस ने मोस्टवांटेड किस्सू उर्फ किशोर तिवारी को गिरफ्तार करने की रणनीति तैयार की. किस्सू तिवारी पर कुल 22 मामले दर्ज थे, उस के खिलाफ आखिरी अपराध 2015 में आम्र्स ऐक्ट के तहत दर्ज किया गया था. किस्सू ने अपहरण, हत्या सहित कई गंभीर अपराधों को अंजाम दिया था. 22 अपराधों में से 20 कटनी में, एक जबलपुर और एक इंदौर में घटित हुआ था.

इस के बाद से वह फरार चल रहा था. कटनी पुलिस ने किस्सू को गिरफ्तार करने के लिए लगातार देश भर के अलगअलग हिस्सों में दबिश दी थी. इस के साथ ही आरोपी किस्सू तिवारी पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाते हुए जबलपुर के तत्कालीन आईजी ने 55 हजार कर दिया था. एसपी ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 18 सदस्यीय टीम गठित की थी, जिस में 2 डीएसपी, 2 एसएचओ, 7 एसआई, एक एएसआई, 2 हैडकांस्टेबल तो 2 कांस्टेबल शामिल किए थे.

जबलपुर जिले के तत्कालीन एसपी आदित्य प्रताप सिंह, कटनी एसपी अभिजीत कुमार रंजन ने 18 पुलिसकर्मियों की 5 टीमें बनाईं. ये टीमें अलगअलग क्षेत्रों में छापेमारी कर रही थीं. एक टीम हिमाचल के कांगड़ा, दूसरी टीम असम के नाहर कटिया, तीसरी टीम इंदौर के तुकोगंज और चौथी टीम दिल्ली के लिए रवाना की गई थी. इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी अयोध्या में राम मंदिर के पास देखा गया था, जिसे पकडऩे के लिए एक टीम भेजी गई.

कटनी के हीरानगर का किशोर तिवारी उर्फ किस्सू की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न धाराओं में स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया, आरोपी की तलाश पतासाजी के हरसंभव सार्थक प्रयास किए गए, परंतु आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था. कटनी के गोवर्धन तिवारी के घर सन 1962 में जन्म लेने वाला किशोर तिवारी उर्फ किस्सू केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ा है. वह शुरुआत में एक डौक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करता था. देखने में साधारण, लेकिन स्वभाव से वह बेहद गुस्सैल था. छोटीछोटी बातों पर झगड़ा करना उस की आदत में शुमार था. 1978 में जब वह 16 साल का था, तब उस ने भीम सिंधी नाम के शख्स पर चाकू से हमला किया था.

किशोर तिवारी उर्फ किस्सू की युवावस्था की तसवीर

कटनी कोतवाली में उस के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और उसे किशोर सुधार गृह भेज दिया गया. 1979 में जमानत पर छूटने के बाद वह सुधरने के बजाय और बिगड़ गया. उस ने कंपाउंडर का काम छोड़ क र ठेकेदारी और दूसरे काम शुरू किए. एक साल के भीतर ही उस के खिलाफ मारपीट और धमड्डकी के 7 मामले दर्ज हो गए.

चूना भट्ठी में किया भस्म

1980-81 में 2 और मामले किस्सू के खिलाफ दर्ज हुए और यहीं से उस ने अपराध की दुनिया में अपनी पैठ बना ली. हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी वह जल्द जमानत पर छूट जाता था. धीरेधीरे इलाके में उस का खौफ फैलने लगा. 1992 में कटनी के माधवनगर क्षेत्र का बदमाश लाली सुअरमार बम फटने से घायल हो गया. लाली का किस्सू से छत्तीस का आंकड़ा था. लिहाजा उस ने कटनी के वकील बृजेश चंद्र निगम के साथ मिल कर झूठी कहानी गढ़ी और किस्सू पर बम फेंककर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करा दिया.

इस केस में किस्सू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, लेकिन वह एक पुलिसकर्मी की मदद से फरार हो गया. जेल से बाहर आने के बाद उस ने बदमाश लाली को गोली मार दी, हालांकि लाली की जान बच गई. बाद में उस ने लाली के वकील बी.सी. निगम को उन के घर के सामने ही गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया. 1985 में जबलपुर का सर्राफा व्यापारी राजेश उर्फ राजू सोनी एक दिन अचानक घर से गायब हो गया था. काफी खोजबीन के बाद भी उस का कोई पता नहीं चला तो उस की गुमशुदगी पुलिस में दर्ज कराई गई. जांच के दौरान कटनी पुलिस को चूना भट्ठी से कुछ हड्डियां और एक सोने की अंगूठी मिली थी. इस अंगूठी की पहचान फेमिली वालों ने करते हुए बताया था कि यह अंगूठी राजेश सोनी उर्फ राजू की है.

जांच में पता चला कि राजेश जबलपुर में एक कालेज छात्रा को परेशान करता था. वह उसे आतेजाते हमेशा छेड़ता था और उस का पीछा करता था. यह छात्रा इलाके के कुख्यात बदमाश किस्सू की फुफेरी बहन थी. जब लड़की के फादर ने यह बात किस्सू को बताई तो उस ने राजेश को जबलपुर से अगवा कर लिया और कटनी के पास झुकेही के जंगल में ले गया, फिर उसे गोली मार दी. इस के बाद मरने से पहले जिंदा हालत में ही उसे चूना भट्ठी में डाल कर भस्म कर दिया.

जबलपुर के राजू सोनी की हत्या के मामले में किस्सू को जेल जाना पड़ा. जब वह जेल में था, उसी दौरान उस के जीजा के चचेरे भाई एवं कांग्रेस नेता रमाकांत पाठक से कटनी के बदमाश राजेंद्र सिंधी का विवाद हो गया. राजेंद्र ने रमाकांत पाठक के घर पर बम फेंक दिया था. किस्सू जब जेल से छूटा तो उसे इस घटना की जानकारी मिली तो उस ने राजेंद्र को ठिकाने लगाने की योजना बनाई.

बात 31 दिसंबर, 1986 की है. रात के करीब 8 बज चुके थे. राजेंद्र असरानी एक कार्यक्रम से घर लौट रहा था. कटनी नगर पालिका कार्यालय के सामने उस की मुलाकात अपने एक पुराने साथी से हो गई. किसी बात पर दोनों में विवाद हो गया, इसी दौरान उन के कुछ और साथी भी वहां पहुंच गए. सभी एकदूसरे को जानते थे, इसलिए आपसी सुलह से विवाद खत्म कर उन्होंने साथ में न्यू ईयर पार्टी मनाने का फैसला किया. वे पास की शराब दुकान से शराब ले कर एक कार में बैठे और शहर से बाहर नैशनल हाइवे-7 पर स्थित मुरली ढाबा पहुंच गए.

ढाबे पर शराब पीने के दौरान जब नशे का खुमार छाया तो फिर आपस में बहस शुरू हो गई. गालीगलौज के बीच गुस्से में राजेंद्र ने अपने एक साथी को घूंसा मार दिया. मारपीट के दौरान ही राजेंद्र के साथियों के संग आए एक युवक को यह बात बरदाश्त नहीं हुई. उस ने ढाबे के पास पड़ी एक लकड़ी (ढाबे की खाट के पटिए) उठाई और पूरी ताकत के साथ राजेंद्र के सिर पर मार दी. वार इतना तेज था कि राजेंद्र का सिर फटने से काफी खून बहने लगा. राजेंद्र ने जान बचाने के लिए वहां से भागने की कोशिश की, मगर उस के साथियों ने उसे पकड़ लिया. राजेंद्र के सिर पर जानलेवा हमला करने वाले उस शख्स का नाम था किशोर उर्फ किस्सू तिवारी.

राजेंद्र पर हमला करने के बाद वे उसे जबरन कार में बैठा कर कटनी के पास झुकेही के जंगल में ले गए. वहां सभी ने मिल कर उस की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि कुछ ही देर में उस की सांसें थम गईं. मौत के बाद राजेंद्र के शव को पास में स्थित जलती हुई चूना भट्ठी में डाल दिया. लोहे और पत्थर तक को पिघला देने वाली उस भट्ठी की दहकती आग में राजेंद्र का शरीर पूरी तरह देखते ही देखते आग में विलीन हो गया.

देर रात तक जब राजेंद्र घर नहीं लौटा तो फेमिली वाले चिंतित हो गए. भाई प्रकाश ने राजेंद्र की तलाश शुरू की तो पता चला कि राजेंद्र को आखिरी बार विवेक और उस के साथियों के साथ एक ढाबे पर देखा गया था. अगले दिन पहली जनवरी 1987 को प्रकाश ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस की जांच में पता चला कि जिस कार में राजेंद्र गया था, उसे झुकेही की तरफ से लौटते देखा गया था.

इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि झुकेही की एक चूना भट्ठी में जला हुआ कंकाल मिला है. जब पुलिस वहां पहुंची तो जली हुई हड्डियों के अवशेष मिले. पास में ही पुलिस को राजेंद्र के जले हुए जूतों और कपड़ों के टुकड़े मिले थे. इन्हें देख कर पुलिस और राजेंद्र की फेमिली वालों को यह समझते देर नहीं लगी कि राजेंद्र के साथ क्या सलूक हुआ है. पुलिस ने चूना भट्ठी से 2 दिन बाद हड्डी, अंगूठी और हाथ का कड़ा निकाला था. तत्कालीन कोतवाली प्रभारी ने आईपीसी की धारा 302, 201 सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था

किस्सू की बड़ी बहन ज्योति तिवारी की शादी कटनी के रहने वाले सतीश दुबे के साथ हुई थी. सतीश के बड़े भाई प्रदीप बिल्डर थे. उन्होंने कटनी में दुबे कालोनी बनाई थी. किस्सू अपनी बहन को बेहद प्यार करता था और अकसर बहन के घर रह कर ही फरारी काटता था. यह बात ज्योति के पति और भाई को खलती थी और इसी वजह से ज्योति को ससुराल में टौर्चर किया जाता था.

जीजा व भाई की हत्या

1993 में ज्योति तिवारी की घर पर ही संदिग्ध हालत में जल कर मौत हो गई. किस्सू को बाद में पता चला कि पति और जेठ की प्रताडऩा की वजह से ही ज्योति ने आत्मदाह किया था. बहन की मौत का बदला लेने के लिए किस्सू ने 1993 में जीजा के बड़े भाई प्रदीप की गोली मार कर हत्या कर दी और फरार हो गया. इस के एक साल बाद उस ने अपने सगे जीजा सतीश दुबे की भी हत्या कर दी. बाद में बहन के ससुराल के बाकी सदस्यों की मौत हो गई. जिसे ले कर चर्चा यही थी कि इस हादसे के पीछे किस्सू का ही हाथ था. 1993 से ही किस्सू पुलिस को चकमा दे कर फरार चल रहा था.

किस्सू की जिंदगी की किताब के पन्ने पलटने पर खूंखार गैंगस्टर के अलावा उस के प्यार का एक किस्सा भी जुड़ा हुआ है. जब वह एक के बाद एक हत्याओं की वजह से फरार चल रहा था, तभी उसे जबलपुर की एक नर्स से प्यार हो गया और उस ने उस से शादी कर ली. कुछ समय बाद उस की पत्नी की मौत हो गई तो उस ने अपनी साली से शादी कर ली. चूंकि उस की साली जयपुर में रहती थी, इसलिए किस्सू भी वहीं जा कर रहने लगा. राजस्थान में उस ने पत्थर की खदान में टैक्सी चला कर कई साल फरारी काटी. कुछ साल बाद जब मामले ठंडे पड़े तो वह वापस कटनी लौट आया और प्रौपर्टी के कारोबार में उतर गया. इस धंधे में उस ने करीब 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति बना ली. किस्सू 2015 में जब गिरफ्तार हुआ था तो फैसला सुनाए जाने से ठीक पहले पुलिस को चकमा दे कर फरार हो गया था. जबलपुर हाईकोर्ट ने 2024 में इस मामले में पुलिस को फटकार लगाते हुए 24 घंटे में उस की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे.

1994 में अपने जीजा की हत्या के बाद उस ने राजस्थान में ही पूरी फरारी काटी. वह वहां एक मार्बल की खदान में रह कर औटो चलाने लगा था और 21 साल तक फरार रहा. 2015 में कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस सक्रिय हुई. इस के बाद उस की तलाश शुरू हुई. किस्सू की गिरफ्तारी में कटनी का राजनीतिक रसूख रखने वाला एक शख्स रोड़ा बनता था.

उस वक्त तत्कालीन एसपी गौरव राजपूत से इस शख्स का एक अघोषित समझौता हुआ. शर्त रखी गई कि किस्सू को हाजिर करवा देंगे, लेकिन गिरफ्तारी कोतवाली के बजाय किसी दूसरे थाने में होनी चाहिए. इस की वजह यह थी कि उस समय के कोतवाली टीआई किस्सू की गिरफ्तारी के बाद शहर में उस का जुलूस निकालना चाहते थे.

21 साल बाद गिरफ्तार

पहली सितंबर 2015 को कटनी के तत्कालीन एसपी गौरव राजपूत को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी किस्सू तिवारी राजस्थान के जयपुर में फरारी काट रहा है. एसपी ने एनकेजे की एसएचओ गायत्री सोनी के नेतृत्व में एक टीम बनाई, जिस में हैडकांस्टेबल अंजनी मिश्रा, कांस्टेबल मुकेश पांडेय, गणेश्वर सिंह, बादशाह बहादुर को शामिल किया. पुलिस टीम ने 2 सितंबर को आरोपी किस्सू तिवारी को पकडऩे के लिए जयपुर के मानसरोवर कालोनी के पास स्थित एक मकान में दबिश दी.

एसपी (कटनी) अभिजीत रंजन और एसएचओ गायत्री सोनी

पिछले 21 वर्षों से फरार चल रहे किस्सू उर्फ किशोरी तिवारी ने जब जयपुर स्थित मकान में पुलिस टीम को देखा तो तत्काल पूछा, ”आप एमपी पुलिस के लोग हैं क्या?’’

एसएचओ गायत्री सोनी ने कहा, ”हां, आप के खिलाफ काफी वारंट है आप को चलना पड़ेगा.’’

”क्या अभी चलना पड़ेगा या कुछ मोहलत मिलेगी?’’ किस्सू तिवारी बोला.

”अभी, इसी वक्त चलना पड़ेगा.’’ इतना कहते ही गायत्री सोनी ने हथकड़ी उस की तरफ बढ़ा दी. टीम के सदस्यों ने उसे हिरासत में ले लिया.

जयपुर से कटनी के बीच सफर करीब 16 घंटे का था. पुलिस टीम 4 पहिया वाहन से आरोपी किस्सू तिवारी को ला रही थी. आगरा के पास किस्सू तिवारी की तबियत खराब हो गई. पुलिस टीम ने आगरा के अस्पताल में 4 घंटे तक उस का इलाज कराया, इस के बाद दोबारा पुलिस टीम वहां से कटनी के लिए रवाना हुई. कटनी लाने के बाद आरोपी किस्सू तिवारी से एडिशनल एसपी रामेश्वर सिंह यादव, एसपी (सिटी) शशिकांत शुक्ला, एएसपी ओ.पी. परवार, एसएचओ (कोतवाली) एस.पी.एस. बघेल, एसएचओ (कुठला) विपिन सिंह, एसएचओ एनकेजे गायत्री सोनी द्वारा पूछताछ की गई.

पूछताछ में आरोपी ने 5 हत्या की वारदातों को अंजाम देना और भविष्य में 3 अन्य लोगों की संपत्ति विवाद के कारण हत्या करने की योजना बनाना कुबूल किया. उस ने 3 हत्या और करने के लिए रेकी भी की थी. किस्सू तिवारी के पास से एक कट्टा और 4 कारतूस भी जब्त किए गए हैं.

दहलाने वाले क्राइम

किस्सू तिवारी को अपने किए पर कोई अफसोस नहीं है. उस का कहना था, ”जिन्हें सजा मिली वो इसी लायक थे, मेरे 4 बच्चे हैं अब उन्हीं के लिए जीता हूं. अब जिंदगी से कोई अपेक्षा नहीं है, मुझे पता है मेरा जीवन अब जेल में ही बीतेगा.’’

किस्सू कोई छोटामोटा अपराधी नहीं, बल्कि बेरहमी से कत्ल करने वाला गैंगस्टर था. 80 के दशक में जबलपुर और कटनी इलाके में किस्सू का नाम सुन कर ही लोगों के हाथपांव फूल जाते थे. पहले वह एक डौक्टर के सहायक के तौर पर काम करने वाला साधारण कंपाउंडर था, लेकिन इस काम में न उसे इज्जत नजर आ रही थी और न पैसा. बस फिर या था, धीरेधीरे वह अपराध की दुनिया में उतर गया.

कटनी रेलवे डिपो से बहाए जाने वाले खराब डीजल को इकट्ठा कर अवैध तरीके से बेचना उस का सब से बड़ा धंधा था. इस के अलावा वह चूने की खदान के ठेके भी लेने लगा, जो भी उस के इस धंधे में आड़े आता, उसे वह बेरहमी से मारता.

बदमाशों ने एक बार उस के काम में अड़ंगा डालने की कोशिश की तो किस्सू ने दोनों के हाथ कटवा दिए. कटनी के ये 2 बदमाश मोहन यादव और बाबा खटीक थे. दोनों ने इस धंधे में उसे चुनौती देने की कोशिश की तो जनवरी 1992 में किस्सू ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया और उन की कलाइयां काट दीं. इस के बाद किस्सू खुद दोनों को अस्पताल ले गया और अस्पताल में डौक्टर को धमकी देते हुए बोला, ”दोनों जिंदा रहने चाहिए, नहीं तो तुम्हारी खैर नहीं.’’

पुलिस मेहरबान तो अपराधी पहलवान वाली कहावत दुर्दांत हिस्ट्रीशीटर किशोर तिवारी उर्फ किस्सू पर सटीक बैठती है. किस्सू ने हत्या की ऐसी वारदातें कीं, जिन्हें सुन कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. एकएक कर 22 अपराध करता गया और करोड़ों की आसामी बन गया. पुलिस रिकौर्ड में फरार किस्सू पर इनाम बढ़ता रहा और दूसरी ओर वह राजनीतिक संरक्षण में कटनी सहित कई दूसरे इलाकों का सब से बड़ा प्रौपर्टी ब्रोकर बन गया. हिस्ट्रीशीटर किस्सू के किस्से दिल को दहला देते हैं.

पुलिस रिकौर्ड के अनुसार, किस्सू तिवारी हत्या व हत्या के प्रयास के मामलों में 2015 में गिरफ्तार हुआ था. 2018 में जमानत हुई तो जमीन की खरीदफरोख्त का काम करने लगा. राजनीतिक संरक्षण में जमीन पर अवैध कब्जे और जबरन घर खाली कराने के ठेके लेने लगा. वह कटनी का सब से बड़ा प्रौपर्टी ब्रोकर बन गया. कटनी में उस के कई घर, प्लौट, जमीन, फार्महाउस हैं. उस के खिलाफ दायर मुकदमे की पेशी पर कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर उस के खिलाफ स्थायी वारंट जारी हुआ तो पुलिस केवल इनामी राशि ही बढ़ाती रही, वह नेताओं के घर पर जाता, शादी समारोहों में घूमता रहा, इस के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई.

कटनी में किस्सू के अपराध की फाइल मोटी होती गई और वह राजनीतिक संरक्षण में आजाद घूमता रहा. पुलिस ने हाथ डालने की कोशिश नहीं की, जिस का परिणाम यह हुआ कि कई मामलों में गवाह नहीं मिले, तो कुछ में बयान पलट गए. इस से वह कुछ मामलों में कोर्ट से छूट गया. किस्सू का इरादा कटनी शहर में खौफ कायम करना था, इसलिए उस ने हर वारदात को दुर्दांत तरीके से अंजाम दिया. अपनी बहन और बहनोई से विवाद करने वाले रिश्तेदार बाबू खटीक और मोहन यादव के हाथ काट दिए. उस के खिलाफ कटनी में 20 आपराधिक मामले दर्ज हुए. वहीं जबलपुर में अपहरण और हत्या एवं इंदौर के तुकोजीराव थाना क्षेत्र में हत्या की एक वारदात को अंजाम दिया.

साधु के वेश में अरेस्ट

दरअसल, किस्सू की एक पत्नी हरिद्वार में रहती है. उस के वहां होने की सूचना पुलिस को मिली थी. पुलिस हरिद्वार पहुंची तो पता चला कि वह अयोध्या श्रीराम मंदिर के दर्शन करने गया है. कटनी पुलिस ने श्रीराम जन्मभूमि एसएचओ को किस्सू तिवारी की फोटो भेजी और उस की गिरफ्तारी में सहयोग करने की गुहार लगाई. अयोध्या पुलिस ने आरोपी के संबंध में तहकीकात की. पहले उस ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की, इस पर किस्सू की फोटो कटनी पुलिस को भेजी गई. कटनी के एसपी अभिजीत रंजन को इनपुट मिला कि गैंगस्टर किस्सू तिवारी उत्तर प्रदेश के अयोध्या में छिपा हुआ है.

एसपी ने एक पुलिस टीम को अयोध्या रवाना करते हुए सख्त निर्देश दिए, ”किस्सू एक शातिर बदमाश है, उसे पकडऩे के लिए खास सावधानी की जरूरत है. हो सकता है उस ने अपना हुलिया भी बदल लिया हो. इस बार वह पुलिस की गिरफ्त से बचना नहीं चाहिए.’’

22 मई, 2024 की सुबह अयोध्या में राम मंदिर के पास स्थित हनुमानगढ़ी में रोज की तरह साधुओं और श्रद्धालुओं की भीड़ थी. पुलिस टीम भीड़ के एकएक व्यक्ति को शंका की नजर से देख रही थी. उसी भीड़ में भगवा कपड़े पहने एक साधु धीरेधीरे हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ रहा था, पुलिस टीम की पैनी नजर उस पर पड़ी तो वह साधु संदेहास्पद लगा.

उस साधु के चेहरे पर बढ़ी हुई सफेद दाढ़ी, माथे पर तिलक और हाथ में माला को देख कर तो वह अयोध्या में रहने वाले दूसरे साधुओं जैसा ही लग रहा था, मगर पुलिस टीम को देख कर उस के हावभाव बदले से नजर आ रहे थे. श्रद्धालुओं की भीड़ में मौजूद कुछ पुलिसकर्मी उस के सामने आ कर खड़े हो गए और उस के चेहरे को ध्यान से देख कर बोले, ”कौन हो तुम? अपना नामपता पुलिस को बताओ.’’

”मैं तो एक साधु हूं, मेरा नामपता पूछ कर क्या करोगे?’’ साधु ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया.

”ज्यादा नौटंकी मत दिखाओ जो पूछा जा रहा है, उस का जबाब दो.’’ पुलिस टीम ने डपटते हुए कहा.

”साब, मैं तो कई सालों से अयोध्या में रह रहा हूं और रोज की तरह सरयू नदी में स्नान कर हनुमानगढ़ी दर्शन के लिए जा रहा हूं. आप को कोई गलतफहमी हो गई है, जो मेरा नामपता पूछ रहे हो.’’ साधु ने सफाई देते हुए कहा.

पुलिस टीम को अच्छी तरह समझ आ गया था कि लंबी दाढ़ी और गेरुआ कपड़े पहने यही आदमी किस्सू तिवारी है. पुलिस ने अयोध्या पुलिस की मदद से तत्काल किस्सू को हिरासत में ले लिया. पूछताछ में उस ने अपना नाम किशोर तिवारी उर्फ किस्सू बताया. इस के बाद कटनी पुलिस वहां से उसे ट्रांजिट रिमांड पर ले कर कटनी आई.

कुख्यात बदमाश किस्सू तिवारी को पकडऩे में कोतवाली टीआई आशीष कुमार शर्मा, संदीप अयाची, एसआई महेंद्र जायसवाल, गोपाल विश्वकर्मा, किशोर कुमार द्विवेदी, नवीन नामदेव, अंकित मिश्रा, दुर्गेश तिवारी, उदयभान मिश्रा, अरुणपाल सिंह, प्रतीक्षा चंदेल, रामचंद्र शुक्ला, एएसआई मनोज कुड़ापे, विजय शंकर गिरि, रामनरेश मिश्रा, रामनाथ साकेत, प्रह्लाद पैकरा, हैडकांस्टेबल लालजी यादव, मुकेश पांडेय, प्रशांत विश्वकर्मा, उमेश सिंह, कांस्टेबल रविंद्र दुबे, राजेद्र उइके, चंद्रेश, शिवकुमार पटेल, पंजाब सिंह, सुधीर दुबे, मनु त्रिपाठी, सौरभ तिवारी, गौरीशंकर सिंह, रुपाली यादव, शिवशंकर तिवारी, अभय यादव, मंसूर हुसैन, उपेंद्र सिंह, अजय सिंह की सराहनीय भूमिका रही.

राजेंद्र सिंधी के मामले के ट्रायल के दौरान किस्सू तिवारी 1993 के लगभग फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने 2015 में जयपुर से गिरफ्तार किया था. 2015 से 2018 तक वह जेल में रहा और जमानत मिलते ही वह बाहर आ गया. पुलिस ने उस का नाम निगरानीशुदा बदमाशों की लिस्ट में डाल दिया था. उसे रोज ही पुलिस थाने में आमद देना होती थी, लेकिन किस्सू किसी बंधन में रहने का आदी नहीं था.

कोविड के दौरान 2021 में मामले में दोषी पाए जाने पर जब किस्सू को सजा सुनाई जाने वाली थी, तब वह फिर से फरार हो गया. लेकिन हाईकोर्ट की फटकार के बाद कटनी पुलिस ने 22 मई, 2024 को अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि से उसे लंबी दाढ़ी और साधु रूप में गिरफ्तार करते हुए कटनी जिला एवं सत्र न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे कटनी जेल भेजा गया था.

किस्सू के फरार होने के बाद माननीय न्यायाधीश ने फैसले को एक सीलबंद लिफाफे में रख दिया था. किस्सू के अयोध्या से गिरफ्तार होने के बाद 24 जून, 2024 को पेशी की तारीख पर लिफाफा खोला गया, जिस में उसे दोषी पाया गया. किस्सू तिवारी को धारा 302 में आजीवन कारावास और 5 हजार का जुरमाना और धारा 201 में 5 साल की सजा और एक हजार जुरमाने का फैसला सुनाया. उस के बाद से ही 64 साल का किस्सू तिवारी कटनी जेल में सजा काट रहा है. Gangster

 

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