Dehradun Crime: देहरादून में दिनदहाड़े गैस एजेंसी के मालिक अर्जुन शर्मा की हत्या से पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी. उस की हत्या का कारण उस की मम्मी वीना शर्मा ही थी. वीना शर्मा को बेटे से ही अपनी जान का खतरा था, उस ने अदालत से सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी. क्या हुआ जो बेटे को अपनी मम्मी की वजह से जान गंवानी पड़ी? पढ़ें, प्रौपर्टी और गैस एजेंसी विवाद में लिपटी हत्या की यह हाईप्रोफाइल कहानी…

इसी साल फरवरी का महीना था. सर्द हवाएं चल रही थीं. धूप निकली हुई थी. 11 फरवरी को सुबह के करीब साढ़े 10 बजने वाले थे. बाजार में लोगों का आनाजाना बढ़ चुका था. अचानक देहरादून की तिब्बती मार्केट में ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी. भगदड़ मच गई. कुछ मिनटों में ही एक व्यक्ति के गोली लगने की खबर फैल गई.

कुछ लोगों ने एक गोरे नवयुवक को गोलियां लगने से घायल बीच सड़क पर ही तड़पते देखा. उन की आंखों के सामने ही उसे गोलियां मारने वाले 2 युवक स्कूटी पर आए थे. वे तुरंत फरार हो गए. किसी को उन्हें पकडऩे की हिम्मत नहीं हुई. एक व्यक्ति ने इस फायरिंग की सूचना पुलिस को दे दी. देहरादून की कोतवाली थाने की पुलिस सूचना मिलने पर कुछ मिनटों में ही मौके पर पहुंच गई. घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, किंतु इमरजेंसी के डौक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया.

अब बारी थी उस की पहचान की. उस में जरा भी समय नहीं लगा. कारण घटनास्थल पर ही मौजूद लोगों में कुछ उसे और उस के फेमिली वालों को जानतेपहचानते थे. मृतक के फेमिली वालों को भी इस घटना की सूचना मिल गई थी. इस तरह मृतक की पहचान कर्नल रमेश चंद शर्मा के बेटे अर्जुन शर्मा के रूप में हुई, जो इंदिरा नगर कोतवाली बसंत विहार का निवासी था. वह देहरादून की जीएमएस रोड स्थित अमरदीप गैस एजेंसी का मालिक था.

उस की दिनदहाड़े राजधानी में हुई हत्या से पुलिस भी भौचक रह गई थी. हत्यारों का पता लगाने और उन्हें पकडऩे की पुलिस प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती आ गई थी. जांच की शुरुआत एसएचओ संतोष कुंवर की देखरेख में फोरैंसिक टीम से हुई. मौके पर आला पुलिस अधिकारी भी पहुंच कर वारदात का मुआयना करने लगे.

इन में एसएसपी अजय सिंह, सीओ अनुज आर्य, कोतवाल संतोष कुंवर, एसओजी इंसपेक्टर मुकेश त्यागी, एसआई दीपक धारीवाल के अलावा सिपाहियों में आशीष शर्मा, संदीप, ललित आदि ने परेड ग्राउंड स्थित तिब्बती मार्केट का हर तरह से मुआयना किया. उन्होंने घटना के बारे में जानकारी लेने के दरम्यान आसपास के लोगों से पूछताछ की.

वहां मौजूद लोगों ने बताया कि अर्जुन शर्मा वहां हर रोज सुबह टेनिस खेलने आता था और फिर जिम जाता था. घटना वाले दिन जब वह जिम से निकला था तब उस ने पहले एक फल के ठेले वाले से एक अनानास खरीदा था.  इस के बाद जब वह अपनी कार की ओर जाने लगा. तभी स्कूटी सवार 2 युवक वहां आए और उन्होंने अर्जुन शर्मा पर फायरिंग कर दी थी. इस के बाद दोनों तुरंत स्कूटी से ही फरार हो गए थे.

फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की कई कोणों से तसवीरें लीं और वहां से हत्यारों के फिंगर प्रिंट के नमूने इकट्ठा कर लिए. इस काररवाई के दरम्यान एसपी (सिटी) प्रमोद कुमार और एसएसपी अजय सिंह भी मौजूद थे. उन्होंने जांच टीम को आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों द्वारा हत्यारों की पहचान करने और सीओ अनुज आर्य को मृतक के फेमिली वालों के बारे में तमाम जानकारी जुटाने के निर्देश दिए.

जांच अधिकारी मृतक की पत्नी अभिलाषा से मिले. उस से पूछताछ की. उस ने रोते हुए बताया कि उस के पति अर्जुन शर्मा की हत्या पारिवारिक विवाद के कारण कर दी गई. गैस एजेंसी को ले कर पति का उन की मम्मी बीना शर्मा के साथ ही विवाद चल रहा था, जो अदालत तक जा पहुंचा था. इस बारे में अभिलाषा ने बताया कि उस की सास बीना शर्मा ने अपने बेटे अर्जुन से जान का खतरा बता कर अदालत से सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी.

इस के बाद अदालत ने उन्हें एक महिला सुरक्षाकर्मी उपलब्ध करवा दी थी. कारोबारी विवाद के बारे में अभिलाषा ने विस्तार से बताया. उस ने पुलिस को बताया कि इस विवाद में सास बीना शर्मा के साथ कारोबारी विनोद उनियाल और डा. अजय खन्ना भी शामिल हैं. इन के बीच लेनदेन को ले कर एक मुकदमा न्यायालय में चल रहा है.

सास पर लगाया आरोप

इसी के साथ अभिलाषा ने आरोप लगाया कि पति की हत्या करवाने में इन लोगों का ही हाथ है. अभिलाषा शर्मा से डीआईजी राजीव स्वरूप ने भी पूछताछ की. अभिलाषा की तहरीर पर कोतवाली में अर्जुन की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एफआईआर संबंधित धाराएं लगा कर अगले चरण की जांच आगे बढ़ा दी गई.

अर्जुन शर्मा के हत्यारों को पकडऩे के लिए एसएसपी द्वारा पुलिस की 5 टीमें गठित की गईं. उन्हें जिले के कई स्थानों पर तैनात कर दिया गया. टीम की सक्रियता का असर हुआ कि 12 फरवरी, 2026 की सुबह पुलिस को अर्जुन शर्मा की हत्या करने वाले शूटर के कोतवाली डोईवाला के क्षेत्र लाल टप्पड़ में छिपे होने की जानकारी मिली. इस सूचना पर पुलिस की 2 टीमें वहां पहुंच गईं. वहां से उसे अगली सुबह करीब साढ़े 3 बजे दबोच लिया गया.

घटनास्थल की जांच करती फोरेंसिक टीम

शूटर के पास से हथियार भी बरामद कर लिया गया. उस ने अपना नाम पंकज राणा बताया. वह इंदिरा कालोनी चक्खूवाला, देहरादून का निवासी था. जल्द ही दूसरा शूटर भी रायपुर के लाड़पुर के जंगल में मुठभेड़ के दौरान पकड़ लिया गया. दोनों के पैर में गोली लग गई थी. उस ने अपना नाम राजीव बताया  दोनों शूटर पंकज और राजीव सगे भाई निकले. पता चला कि पंकज कई सालों से विनोद उनियाल का ड्राइवर है. दोनों घायल शूटरों को प्राथमिक उपचार करवाया गया. उस के बाद मजिस्ट्रैट के सामने उन के बयान दर्ज करवाए गए.

हत्याकांड से संबंधित आगे की पूछताछ के लिए उन्हें रिमांड पर ले लिया गया. दोनों ने पूछताछ में जो कुछ बताया उस के अनुसार हत्याकांड की कहानी इस प्रकार सामने आई—

इस की जड़ में अर्जुन शर्मा के परिवार की देहरादून में ही जीएमएस रोड पर स्थित करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन है. अर्जुन की मम्मी बीना शर्मा ने इस का सौदा डा. अजय खन्ना से कर दिया था. वह कुछ रकम एडवांस भी ले चुकी थी. जबकि अर्जुन यह प्रौपर्टी अजय खन्ना को नहीं बेचना चाहता था. इसे ले कर उस ने मम्मी का विरोध भी किया था. बाद में यह मामला अदालत में चला गया. इस कारण अर्जुन शर्मा अपनी मम्मी बीना, प्रौपर्टी डीलर विनोद उनियाल व  अजय खन्ना की राह का रोड़ा बन गया था.

बीना हर कीमत पर जमीन बेचने पर उतारू थी. उस ने एक दिन खतरनाक इरादा विनोद उनियाल को बताया. यह सुन कर पहले तो वह सन्न रह गया कि कोई मां अपने बेटे के खिलाफ कैसे इतना खतरनाक निर्णय ले सकती है. बीना ने अर्जुन को इस विवाद से हटाने की जिम्मेदारी विनोद को सौंप थी और उस ने अर्जुन पर जानलेवा हमला करवा कर डराने को कहा था. इस पर विनोद बोला था, ”इस में उस की जान भी जा सकती है.’’

जवाब में बीना बोली, ”वह सब मैं नहीं जानती.’’

रेकी कर मारी गोली

विनोद ने बीना के निर्देश से 2 कदम आगे बढ़ कर योजना बना डाली. उस ने अपने ड्राइवर पंकज और उस के भाई राजीव उर्फ राजू को 12 लाख रुपए की सुपारी दे दी. दोनों को 3 लाख रुपए एडवांस भी दे दिए. पंकज व राजीव को बीना शर्मा और अर्जुन शर्मा के बीच चल रहे विवाद के बारे में भलीभांति जानकारी थी. पंकज और राजीव ने अर्जुन शर्मा की दिनचर्या की रेकी कर ली थी. वह सुबह 9 बजे टेनिस खेलने के लिए तिब्बती मार्केट स्थित जिम में जाता था. इसलिए 11 फरवरी, 2026 की सुबह दोनों 10 बजे ही अर्जुन शर्मा की कार के आसपास जा कर टहलने लगे थे.

मम्मी बीना शर्मा के साथ अर्जुन शर्मा (फाइल फोटो)

जैसे ही अर्जुन वहां आया और अपनी कार की ओर जाता दिखाई दिया, वैसे ही दोनों शूटरों ने तुरंत तमंचे निकाल लिए और उस पर फायरिंग कर दी. गोली लगने से अर्जुन जमीन पर गिर गया. दोनों शूटर स्कूटी से फरार हो गए. इस के बाद दोनों ने कपड़े बदले और विनोद उनियाल के एक ठिकाने पर जा कर छिप गए. वे पुलिस की गतिविधि पर नजर रखे हुए थे, लेकिन पुलिस जांच की तीक्ष्ण निगाहों से नहीं बच पाए. शूटरों से पूछताछ के बाद बीना शर्मा समेत प्रौपर्टी डीलर विनोद उनियाल और डा. अजय खन्ना का नाम आने पर उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया. उन लोगों से भी से 2 घंटे तक अलगअलग पूछताछ की.

उन के बयानों से बीना शर्मा, विनोद उनियाल डा. अजय खन्ना के बीच सांठगांठ का पूरा पता चल गया. उन्होंने  अर्जुन हत्याकांड में अपनी संलिप्तता कुबूल कर ली. विनोद और डा. खन्ना ने अर्जुन और उस की मम्मी के बीच मनमुटाव और विवाद का फायदा उठाया. कई साल पहले अर्जुन ने विनोद उनियाल के साथ एक औनलाइन बिजनैस भी शुरू किया था. अर्जुन का आरोप था कि उस की मम्मी बीना अकसर विनोद उनियाल को पैसे देती रहती थी.

विनोद ने कुछ साल पहले बीना की करोड़ों रुपए की पुश्तैनी जमीन की रजिस्ट्री डा. अजय खन्ना के नाम करवा दी थी. इसी बात को ले कर अर्जुन की अपनी मम्मी बीना, विनोद उनियाल और डा. अजय खन्ना से तनातनी शुरू हो गई थी, जिस का अंत अर्जुन की हत्या पर हुआ. अर्जुन इस बात से भी अपनी मम्मी से खफा था कि वह अपनी कमाई के अधिकांश हिस्सों से विनोद उनियाल के बैंक खातों को भर रही थी.

आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले का खुलासा करते पुलिस अधिकारी

अर्जुन शर्मा के फादर रमेश चंद शर्मा सेना में कर्नल थे, जो करीब 38 वर्ष पूर्व सेवा के दौरान शहीद हो गए थे. उन की शहादत पर उन की पत्नी बीना शर्मा को आजीविका चलाने के लिए गैस एजेंसी आवंटित हुई थी. परिवार में अर्जुन की पत्नी अभिलाषा के अलावा उन का साढ़े 4 साल का बेटा व ढाई साल की बेटी बची है. अर्जुन शर्मा और उस की मम्मी के बीच शहीद कर्नल की विरासत पर कब्जे की जंग वर्ष 2024 में तब शुरू हो गई थी, जब बीना शर्मा ने अपने बेटे अर्जुन से अपनी जान को खतरा बताते हुए हाईकोर्ट नैनीताल से सुरक्षा मांगी थी.

इस के अलावा बीना शर्मा ने 2024 में अपने ही बेटे अर्जुन पर मारपीट करने का एक मुकदमा भी दर्ज करवा दिया था. मांबेटे में जंग और ज्यादा तब भड़क गई थी, जब बीना शर्मा ने अपनी पुश्तैनी प्रौपर्टी विनोद उनियाल के माध्यम से डा. अजय खन्ना के नाम कर दी थी. हालांकि अर्जुन ने 14 करोड़ रुपए की डील वाली इस प्रौपर्टी पर सिविल कोर्ट से स्टे ले लिया था. इस तरह अर्जुन शर्मा की कानूनी लड़ाई सीधेसीधे अपनी मम्मी के अलावा विनोद और डा. अजय से थी. डा. अजय खन्ना इंडियन मैडिकल असोसिएशन का अध्यक्ष भी है. वह एसके मेमोरियल के नाम से एक अस्पताल भी चलाता है.

इंसपेक्टर (एसओजी) मुकेश त्यागी

डा. अजय करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद संपत्ति का उपयोग नहीं कर पा रहा था. इस से वह खार खाए हुए था. वह देहरादून में स्थित अपने अस्पताल का और विस्तार करना चाहता था. अर्जुन शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण पेट में गोली लगने से ज्यादा खून निकलना बताया गया था. कथा लिखे जाने तक पांचों आरोपी जेल में बंद थे. Dehradun Crime

 

 

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