Murder Case: पूर्व राज्यमंत्री हीरालाल कश्यप ने डाक्टरी पढ़ रहे सांसद नरेंद्र कश्यप के बेटे सागर से अपनी होनहार बेटी हिमांशी का विवाह कर के राजनीतिक दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल दिया था. लेकिन हिमांशी की गोली लगने से मौत हो गई तो ससुराल वाले जहां आत्महत्या की बात कर रहे हैं, वहीं मायके वाले दहेज हत्या का आरोप लगा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के जनपद गाजियाबाद में 6 अप्रैल, 2016 की दोपहर खबर फैली कि एक बड़े राजनीतिक घराने की बहू की मौत हो गई है. चर्चा यह थी कि वह जिंदगी की जंग खुद हार गई या उसे साजिशन मौत के घाट उतार दिया गया. इस की वजह भी थी. उस की मौत जिस स्थिति में हुई थी, उसे देख कर लोग अपनीअपनी सोच और समझ के हिसाब से तरहतरह के कयास लगा रहे थे. एक रसूखदार परिवार की बहू को किन कारणों ने मौत के नजदीक पहुंचा दिया, सही कारण कोई नहीं जानता था. मृतका का नाम हिमांशी कश्यप था. वह कानून की पढ़ाई कर रही थी, जबकि उस का पति डाक्टर की एमडी डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहा था.

चर्चा की मुख्य वजह यह थी 25 वर्षीया हिमांशी के ससुर नरेंद्र कश्यप सांसद होने के साथ बहुजन समाज पार्टी में मजबूत पकड़ वाले नेता थे. हिमांशी को अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था. मामला चूंकि गंभीर था, इसलिए पुलिस मामले की जांच में जुट गई थी. वाकया काफी चौंकाने वाला था. सांसद नरेंद्र कश्यप का परिवार गाजियाबाद के थाना कविनगर के संजयनगर के बी ब्लौक में रहता था. उन के परिवार में पत्नी देवेंद्री के अलावा 2 बेटे व बेटियां थीं. हिमांशी उन के बड़े बेटे सागर की पत्नी थी. उस का एक साल का बेटा भी था मौलिक.

नरेंद्र कश्यप राजनीतिक रसूख वाले आदमी थे. पार्टी कार्यकर्ताओं में उन की अच्छी पकड़ थी. निचले स्तर से राजनीति शुरू कर के सांसद बनने तक का मुकाम उन्होंने कड़ी मेहनत से हासिल किया था. मृदुभाषी नरेंद्र कश्यप अपने राजनीतिक कैरियर और परिवार को बड़े मुकाम पर देखना चाहते थे. इस के लिए उन्होंने हर तरह के प्रयास भी किए थे. उन के बच्चे भी पढ़ने में होशियार थे. बेटियों का वह विवाह कर चुके थे. उन का छोटा बेटा वकालत कर रहा था. बड़े बेटे सागर को चिकित्सा क्षेत्र में रुचि थी. वह नजदीकी जनपद मेरठ के एक नामी मैडिकल कालेज से एमडी की पढ़ाई कर रहा था. पढ़ाई के लिए वह घर से ही आताजाता था. 2 साल पहले ही उस का विवाह हिमांशी से हुआ था.

हिमांशी का ताल्लुक भी बड़े घराने से था. वह उत्तर प्रदेश के जिला बदायूं के पूर्व बसपा सरकार के राज्यमंत्री हीरालाल कश्यप की एकलौती बेटी थी. उन के परिवार में पत्नी सीमा के अलावा बड़ी बेटी हिमांशी और उस से छोटे 3 बेटे थे आयुष, परख व रितिक.  हीरालाल कश्यप 2 बार आवास विकास परिषद के अध्यक्ष रह चुके थे. राजनीति में वह बड़ा नाम थे. एक ही पार्टी में होने की वजह से नरेंद्र कश्यप और हीरालाल कश्यप एकदूसरे को पहले से ही जानते थे. समय के साथ उन के परिवारों के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो दोनों परिवारों में रिश्ते को ले कर बात चली. सागर और हिमांशी ने एकदूसरे को पसंद कर लिया तो राजनीतिक नजदीकियां रिश्तेदारी में बदल गईं.

27 नवंबर, 2013 को हीरालाल कश्यप ने बेटी का विवाह बड़ी धूमधाम से किया था. विवाह का आयोजन इतना बड़ा था कि उस में करीब 10 हजार लोगों को न्यौता दिया गया था. शहर के सारे होटलों को बुक कराया गया था. कई बड़े व रसूखदार नेता विवाह समारोह में आए थे. हिमांशी की विदाई भी हेलीकौप्टर से हुई थी. हीरालाल ने बेटी की खुशी के लिए वह सब किया, जो वह कर सकते थे.

भविष्य के सुनहरे ख्वाबों का घरौंदा बनाने वाली हिमांशी जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही होनहार, नई सोच, संस्कारी और परिवार को साथ ले कर चलने वाली थी. खुशमिजाज जिंदगी उसे पसंद थी. बड़ी होने की वजह से परिवार की भी लाडली थी. वह पढ़लिख कर ऊंचा मुकाम हसिल करना चाहती थी. उस ने हाईस्कूल से ले कर एमए व बीएड तक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की थी.

विवाह के बाद हिमांशी ने आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की तो ससुराल वालों ने अनुमति दे दी. उस ने एलएलबी की पढ़ाई शुरू कर दी. जिंदगी खुशहाली के आंगन में तराना गुनगुना रही थी. प्यार, समर्पण और विश्वास के रिश्ते यूं भी खुशियां ही दिया करते हैं. एक साल बाद उस ने एक बेटे को जन्म दिया तो खुशियों में और भी इजाफा हो गया. कश्यप परिवार के पास नाम, शोहरत, दौलत सब कुछ था, जिसे पाने का लोग ख्वाब देखते रहते हैं. चकाचौंध भरी जिंदगी के पीछे भी कोई खालीपन या अवसाद हो सकता है, इस की कल्पना भी बेमानी थी. लेकिन कई बार जो दिखता है, वैसा होता नहीं है. हिमांशी की खुशियां भी कुछ वैसी ही थीं.

6 अप्रैल की दोपहर हिमांशी की ससुराल वाले उसे शहर के एक प्राइवेट अस्पताल ले कर पहुंचे. वह खून से लथपथ थी. उस की दाईं कनपटी पर गोली का निशान था. डाक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया था. उन्हें बताया गया था कि उस ने खुद को गोली मार ली थी. मामला आत्महत्या का बताया गया था, इसलिए अस्पताल की ओर से इस बात की सूचना पुलिस को दे दी गई थी.

मामला सनसनीखेज और रसूखदार परिवार का था, इसलिए एसपी (सिटी) सलमान ताज, सीओ मनीष मिश्रा और स्थानीय थाना कविनगर के थानाप्रभारी अशोक सिसौदिया अस्पताल पहुंच गए थे. खून रोकने के लिए हिमांशी के सिर पर पट्टी बंधी थी. उस की नाक से भी खून आ रहा था और आंखों के ऊपर का भाग सूज कर नीला पड़ गया था.

पुलिस अधिकारी नरेंद्र कश्यप के आवास पर भी पहुंचे. सूचना पा कर एसएसपी धर्मेंद्र सिंह भी आ गए थे. घटना कोठी की पहली मंजिल पर घटी थी. ऊपर बने बैडरूम के नजदीक के बाथरूम का दरवाजा खुला था. उस की फर्श पर खून के निशान मौजूद थे. पुलिस ने सांसद नरेंद्र कश्यप व घर के अन्य लोगों से पूछताछ की. उन्होंने जो बताया, उस के मुताबिक 6 अप्रैल की सुबह सागर पढ़ाई के लिए मेरठ चला गया था तो सिद्धार्थ कचहरी.

तकरीबन 11 बजे हिमांशी अपने बैडरूम में अकेली थी, जबकि बाकी लोग नीचे थे. नरेंद्र हिमांशी के बेटे मौलिक को खिला रहे थे. वह रोने लगा तो नरेंद्र ने अपने भतीजे मोनू से कहा, ‘‘बेटा, ऊपर जा कर हिमांशी को बुला लाओ, वह आ कर मौलिक को संभाल लेगी.’’

‘‘जी, अभी बुलाता हूं.’’ कह कर मोनू सीढि़यां चढ़ कर ऊपर पहुंचा. वहां सन्नाटा पसरा था. मोनू ने हिमांशी को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उस ने बाथरूम का दरवाजा चैक किया तो वह अंदर से बंद था. उस ने दरवाजा खटखटाने के साथ कई आवाजें दीं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. उसे हैरानी और आशंका दोनों हुईं. उस की कुछ समझ में नहीं आया तो उस ने नीचे आ कहर कहा, ‘‘मैं ने भाभी को कई आवाजें दीं, लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे रही हैं. वह बाथरूम में हैं.’’

मोनू की बात से सभी सोच में पड़ गए. मन में अनहोनी की आशंका लिए सभी ऊपर पहुंचे. आवाजें देने पर भी दरवाजा नहीं खुला तो दरवाजा तोड़ दिया गया. बाथरूम की फर्श पर हिमांशी घायल पड़ी थी. उस के पास ही पति सागर का लाइसैंसी रिवौल्वर पड़ा था. उन लोगों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. शायद वह पहले ही मर चुकी थी. इस के बाद पुलिस को सूचना दी गई. सूचना पा कर हिमांशी के पति सागर और देवर सिद्धार्थ भी घर आ गए थे. पुलिस ने उन दोनों से भी पूछताछ की.

सागर से पुलिस को पता चला कि 10 बज कर 53 मिनट पर हिमांशी ने उसे फोन किया था. उस ने उसे ‘आई लव यू’ कहा था. हालांकि जिस तरह से उस ने बात की थी, उस का अंदाज कुछ अलग था, लेकिन वह उसे समझ नहीं सका. उस की करीब 53 सेकेंड बात हुई थी. मामला आत्महत्या का बताया जा रहा था, लेकिन हिमांशी ने आत्महत्या क्यों की, इस का जवाब किसी के पास नहीं था. दूसरे जिस रिवौल्वर से हिमांशी ने खुद को गोली मारी थी, वह भी बैडरूम में अलमारी के ऊपर रखा पाया गया था. नरेंद्र कश्यप का कहना था कि उसे घर वालों ने बाथरूम से उठा कर वहां रखा था.

सवाल यह भी था कि मामला अगर आत्महत्या का था तो घटनास्थल से छेड़छाड़ क्यों की गई थी? एक तरह से साक्ष्यों को छिपाने की कोशिश की गई थी. दूसरे बाथरूम का दरवाजा भी सहीसलामत था. उस की सिटकनी टूटी होनी चाहिए थी, लेकिन वह बिलकुल ठीक थी. सब से बड़ा सवाल यह था कि किसी ने गोली चलने की आवाज नहीं सुनी थी. फिंगरप्रिंट, फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम को भी मौके पर बुला लिया गया था. टीम ने खून सने कपड़े, खून के नमूने, जरूरी साक्ष्य और फोटोग्राफ वगैरह ले लिए गए थे. पुलिस ने वह रिवौल्वर भी अपने कब्जे में ले लिया था, जिस से गोली चलाने की बात कही जा रही थी.

पुलिस अधिकारियों ने घटना को डेमो कर के देखा. डेमो के दौरान बाथरूम की सिटकनी टूट गई, जबकि वह पहले नहीं टूटी थी. यहां एक सवाल यह भी था कि घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी गई थी. पहली नजर में मामला संदिग्ध लग रहा था. खबर जंगल की आग की तरह फैल चुकी थी. हिमांशी के मायके वाले भी गाजियाबाद आ गए थे. बेटी की लाश देखने के बाद उन का रोरो कर बुरा हाल हो गया. पुलिस ने सांत्वना दे कर उन्हें चुप कराया, फिर पूछताछ की. उन लोगों ने हिमांशी की आत्महत्या करने वाली बात को सिरे से नकार दिया. उन्होंने पुलिस को जो बताया, वह चौंकाने वाला था.

मायके वालों के अनुसार, हिमांशी को काफी दानदहेज दिया गया था. इस के बावजूद विवाह के बाद से ही उसे ससुराल में दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा था. हर त्यौहार पर सोनेचांदी के जेवरों व कपड़ों के साथ अन्य वस्तुओं की मांग की जाती थी.

बेटी की खुशियों के लिए वे लोग हिमांशी की ससुराल वालों की मांगें पूरी करते रहे. हीरालाल कश्यप के अनुसार, शादी के 4 दिनों बाद ही नरेंद्र के परिवार का दहेजलोभी चेहरा सामने आ गया था. बेटी की खुशियों के लिए खामोश रहना उन की मजबूरी बन गया था. इस से उन के हौसले और भी बढ़ गए.  हिमांशी को बागबानी और पेंटिंग का शौक था. वह सकारात्मक सोच वाली लड़की थी. इसलिए संस्कारों के साथ अच्छी बहू होने का दायित्व निभा रही थी. लेकिन ससुराल वालों के लालचभरे व्यवहार के कारण वह अंदर ही अंदर बुरी तरह टूट गई थी.

हिमांशी अपनी सास की नापसंद बन गई थी. छोटीछोटी बातों पर दोनों के बीच झगड़ा होता रहता था, जिस से स्थितियां लगातार बिगड़ती गईं. दहेज के लिए उस के साथ कई बार मारपीट भी की गई. पिछले कुछ महीनों से हिमांशी की ससुराल वाले फौर्च्युनर कार मांग कर रहे थे, जिसे ले कर आए दिन विवाद होता रहता था. 25 मार्च को हिमांशी मायके गई थी, तब भी उस ने बताया था कि अगर कार नहीं दी गई तो उस पर अत्याचार बढ़ते जाएंगे.

उस ने बताया था कि उस के साथ कुछ दिनों पहले मारपीट की गई थी, जिस से उस के कान का परदा सूज गया था. सागर उसे यह कह कर प्रताडि़त करता था कि वह पिता से जल्दी कार ले आए, क्योंकि उसे अपने पापा की गाड़ी से जाना पड़ता है. ऐसी स्थिति में हिमांशी ने ससुराल जाने से मना कर दिया था, लेकिन घर वालों ने समझाबुझा कर किसी तरह उसे ससुराल भेजा था.

वह बेटी पर होने वाले अत्याचारों की शिकायत पुलिस में करना चाहते थे, लेकिन बदनामी के डर से कर नहीं सके. बेटी को उत्पीड़न से बचाने के लिए हीरालाल कार देने के लिए भी राजी हो गए थे. उन्होंने वादा कर लिया था कि प्लौट बेच कर वह कार दे देंगे. जब मांग जल्दी पूरी नहीं हुई और कलह बढ़ती गई तो दहेज के दानव ने उन की बेटी को लील लिया. उन्हें बेटी की मौत की खबर तक नहीं दी गई. टीवी पर खबर देखने के बाद जब रिश्तेदारों के फोन आने लगे तो उन्हें पता चला. उन्होंने नरेंद्र कश्यप को फोन किया तो उन्होंने बताया कि हिमांशी ने बाथरूम में खुद को गोली मार ली है, इसलिए आप लोग आ जाएं. जिस के बाद वे लोग आए.

तमाम आरोपों के साथ हीरालाल के भाई हरिओम कश्यप ने लिखित तहरीर दी तो पुलिस ने नरेंद्र कश्यप, उन की पत्नी देवेंद्री, बेटों सागर, सिद्धार्थ और बेटियों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न व हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. इस मामले की जांच सीओ मनीष मिश्रा को सौंप दी गई. इसी बीच नरेंद्र कश्यप और उन की पत्नी की तबीयत बिगड़ गई. सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत पर दोनों अस्पताल में भरती हो गए. लेकिन पूछताछ में दोनों अपने बयानों पर कायम रहे. मामला संदिग्ध था, घटनास्थल ने उसे और संदिग्ध बना दिया था. पुलिस ने आसपड़ोस वालों से पूछताछ की तो उन का कहना था कि गोली की बात उन से छिपाई गई थी. उन्हें बताया गया था कि हिमांशी जल गई है, इसलिए उसे अस्पताल ले जा रहे हैं.

दूसरी ओर सीएमओ डा. अजय अग्रवाल के निर्देश पर 3 डाक्टरों की टीम ने हिमांशी की लाश का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के बीच किया. गोली उस के सिर में फंसी पाई गई थी. पोस्टमार्टम के बाद हिमांशी की लाश उस के मायके वालों को सौंप दी गई तो वे उसे ले कर बदायूं चले गए. पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि अगर सब कुछ ठीक था तो फिर ऐसी कौन सी वजह थी, जिस ने हिमांशी को मौत के नजदीक पहुंचा दिया. पुलिस जांच में जुट गई. घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और हिमांशी के घर वालों से उस की मौत की बात छिपाने जैसी बातों ने घटना को संदिग्ध बना दिया था.

पुलिस ने सागर को हिरासत में ले कर पूछताछ की. घर वालों के बयान मेल नहीं खा रहे थे. मुकदमा दर्ज हो चुका था. कभी भी गिरफ्तारी हो सकती थी, किसी सांसद को गिरफ्तार करना पुलिस के लिए आसान नहीं होता. जिलाधिकारी विमल कुमार शर्मा और एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने सांसद की गिरफ्तारी के लिए संयुक्त रिपोर्ट तैयार कर के राज्यसभा के सभापति को भेज दी.

अगले दिन पुलिस ने सांसद नरेंद्र कश्यप, उन की पत्नी और बेटे सागर को दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. सांसद की गिरफ्तारी से उन के समर्थकों में रोष फैल गया. उन्होंने इसे ले कर हंगामा किया. पुलिस ने जैसेतैसे स्थिति को काबू करके तीनों आरोपियों का मैडिकल चैकअप कराने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट कमरुजमां की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

दूसरी ओर बदायूं में हिमांशी की मौत से हर कोई स्तब्ध था. किसी को नहीं पता था कि जिस होनहार बेटी को दुलहन के रूप में धूमधाम से विदा किया गया, वह एक दिन इस तरह चली जाएगी. गमगीन माहौल के बीच उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया. उसे इंसाफ दिलाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए. उन्होंने प्रदर्शन और नारेबाजी के साथ हिमांशी के हत्यारोपियों को फांसी दिए जाने की मांग की. गमजदा लोगों ने कैंडल मार्च भी निकाला. सोशल साइट्स पर भी हिमांशी को इंसाफ दिलाने की मुहिम शुरू हो गई.

इस बीच हिमांशी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई थी. उस की मौत की वजह गनशौट बताई गई. उस की मौत रिवौल्वर की नजदीक से चली गोली की वजह से हुई थी. कनपटी के दाहिनी तरफ जो घाव था, उस के पास बारूद के कणों के साथ लालकाले धब्बे पाए गए. आंखों के पास भी वाले धब्बे थे. उस की हथेलियों पर भी चोट के निशान थे.

पुलिस ने बरामद रिवौल्वर को बैलेस्टिक जांच के लिए और हिमांशी के सिर से मिली गोली, कपड़ों व मौके से लिए गए खून के सैंपल को जांच के लिए फोरैंसिक लैब भेज दिया, ताकि पता लगाया जा सके कि गोली किस रिवौल्वर से, कितनी दूरी और किस दिशा से चली. उस के विसरा को भी जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया था.

हिमांशी की मौत की मिस्ट्री हत्या और आत्महत्या के बीच उलझी हुई थी. कारण चाहे जो भी रहा हो, लेकिन एक होनहार विवाहिता ने अपने मातापिता को तो गम दिया ही, नरेंद्र कश्यप और उन का परिवार भी मुसीबत में फंस गया. कथा लिखे जाने तक पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही थी. फोरैंसिक लैब की रिपोर्ट का भी इंतजार था. किसी ने नहीं सोचा था कि 2 बड़े परिवारों के रिश्तों की डोर इस तरह टूट जाएगी. पुलिस नामजद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है. अभी सांसद नरेंद्र कश्यप के खिलाफ उन की पार्टी ने कोई कदम नहीं उठाया है. पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रामअचल का कहना था कि पार्टी न्यायालय के फैसले के बाद ही कोई काररवाई करेगी. आरोप तो किसी पर भी लगाया जा सकता है.

असमय एकलौती होनहार बेटी हिमांशी की मौत से उस के मातापिता बुरी तरह दुखी हैं. पिता हीरालाल कश्यप का कहना है कि उन की बेटी बहादुर और समझदार थी. वह सकारात्मक सोच रखने वाली लड़की थी. वह आत्महतया जैसा कदम कतई नहीं उठा सकती. उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि दहेज के लिए उन की बेटी को मार दिया जाएगा. अगर पता होता तो वह बेटी को साथ ले आते. वह तो बंदोबस्त कर के लालची ससुराल वालों को कार देने को भी तैयार थे. वह आरोपियों को फांसी तक पहुंचाने के लिए लड़ाई लड़ेंगे.

दूसरी ओर दहेज हत्या के आरोपों में फंसे सांसद नरेंद्र कश्यप का जेल जाने से पूर्व पुलिस हिरासत के दौरान कहना था कि हिमांशी उन की नेक व शरीफ बहू थी. उन्होंने उसे हमेशा बेटी की तरह रखा. उन्हें उस से कोई शिकायत नहीं थी. उस के पिता ने दुखी हो कर उन पर दहेज के आरोप लगाए हैं, जबकि उन्होंने कभी दहेज की मांग नहीं की. उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है. वह हर जांच को तैयार हैं, जिस से सारी सच्चाई सामने आ जाएगी. Murder Case

—कथा पुलिस सूत्रों व परिजनों से बातचीत पर आधारित

 

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