Firozabad Crime News: मंजू के प्यार में गौतम इस कदर पागल था कि उस के घर वालों के लगातार मना करने पर भी वह पीछे नहीं हटा. अंतत: मंजू के घर वालों ने अपनी इज्जत की खातिर उसे ठिकाने लगा दिया.
उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के कस्बा एका के रहने वाले राम सिंह के बड़े बेटे गौतम का मन गांव में नहीं लगा तो कुछ करने की सोच कर वह दिल्ली चला गया, जबकि मां नहीं चाहती थी कि वह दिल्ली जाए. क्योंकि उस के पिता की मौत हो चुकी थी और पिता के बाद वही घर में सब से बड़ा था. गौतम ने कुछ दिन तो मन लगा कर नौकरी की, लेकिन अचानक उसे लगने लगा कि वह दिल्ली की तेज रफ्तार जिंदगी से तालमेल नहीं बैठा पा रहा है. मां कहती ही थी कि घर में बहुत काम है, वह बेकार वहां पड़ा है. आखिर एक दिन वह नौकरी छोड़ कर गांव आ गया. बेटे के आने पर शीला ने कहा, ‘‘अब तुझे दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है, जो कुछ भी करना है, गांव में रह कर कर.’’
गौतम घर में ही रह कर कुछ करना चाहता था. इस बारे में उस ने अपने बहनोई से बात की तो उस ने कहा, ‘‘आम के बागों को ठेके पर ले लो. 3-4 महीने में इतनी आमदनी हो जाएगी कि पूरे साल आराम से खर्च चलता रहेगा.’’
गौतम ने बाग मालिकों से बात करनी शुरू की. इसी चक्कर में उस की मुलाकात थाना सहावर के गांव नगलां विभाई के रहने वाले नरेश के बेटे आदेश से हुई. वह पहले से ही आम के बागों को ठेके पर लेता रहता था. दोनों हमउम्र थे, इसलिए पहली मुलाकात में ही उन की दोस्ती हो गई. आदेश को आम के बागों को ठेके पर लेने का अनुभव था, इसलिए गौतम ने उसी के साथ आम के बागों को ठेके पर ले लिया. दोनों का एक साथ काम हो गया तो वे एकदूसरे के घर भी आनेजाने लगे.
आदेश की एक बहन थी मंजू, जो बारहवीं में पढ़ती थी. गौतम जब भी आदेश के घर जाता, उस की मुलाकात मंजू से भी होती थी. कभीकभार बातचीत भी हो जाती थी. बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा तो उन के मनों में प्यार पनपने लगा. लेकिन दिल की बात कहने की न गौतम की हिम्मत हो रही थी, न मंजू की. उसी दौरान गौतम थाना सहावर के गांव खेड़ा कल्याणपुर के रहने वाले अपने मामा भूमिराज के यहां गया. उस की मामा की बेटी पूनम से बातचीत हुई तो पता चला कि पूनम और मंजू एक साथ पढ़ती थीं. उन की आपस में दोस्ती भी थी.
गौतम ने सोचा कि क्यों न वह पूनम के जरिए मंजू से मिले. लेकिन यह कहना भी आसान नहीं था. वह ममेरी बहन से दिल की बात कैसे कहता. गौतम घर जाने के लिए तैयार हुआ तो पूनम ने कहा, ‘‘भैया, गांव में भागवत है. मंजू भी अपने परिवार के साथ आ रही है. तुम भी रुक जाओ, कल चले जाना.’’
मंजू के आने की बात सुन कर गौतम खुश हो गया. सोचा, भागवत के बहाने उस की मंजू से भी मुलाकात हो जाएगी. वह रुक गया. मंजू अपने परिवार के साथ आई तो गौतम को देख कर हैरान रह गई. जब पूनम ने बताया कि गौतम उस की बूआ का बेटा है तो उसे भी खुशी हुई. मंजू तक अपनी बात पहुंचाने के लिए गौतम ने पूनम का सहारा लिया. उस ने पूनम को बता दिया कि वह मंजू से प्यार करता है और वह उस से अपने दिल की बात कहना चाहता है. पूनम ने यह बात मंजू तक पहुंचा दी. मौका देख कर मंजू भागवतस्थल से उठ कर उस जगह पहुंच गई, जहां गौतम उस का इंतजार कर रहा था.
एकांत में गौतम ने अपने दिल की बात मंजू से कही तो उस ने गंभीर हो कर कहा, ‘‘गौतम, तुम जानते हो कि मैं बघेल हूं और तुम लोधी. इस वजह से यह रिश्ता कभी नहीं हो सकता. अगर हम ने कोशिश की तो पूरा समाज हमारे खिलाफ हो जाएगा.’’
गौतम ने मंजू का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘मंजू, मैं तुम्हारे प्यार में पागल हूं. तुम्हारे लिए मैं किसी से भी टकराने को तैयार हूं.’’
गौतम का हौसला देख कर मंजू की हिम्मत बढ़ गई. उस ने मुसकराते हुए प्यार के इस रिश्ते पर अपनी मोहर लगा दी. उसी बीच आम पकने लगे, आदेश और गौतम ने आम बेच दिए, यानी उन का साझेदारी का धंधा खत्म हो गया. इस के बाद भी गौतम का आदेश के घर आनाजाना बना रहा. वह मंजू से फोन पर भी बातें किया करता था. काम न होने के बावजूद गौतम के आनेजाने से मंजू की मां को शक होने लगा. एक दिन गौतम ने मंजू के दरवाजे पर दस्तक दी तो उस की मां ने दरवाजा खोला. सामने गौतम को देख कर उस ने कहा, ‘‘गौतम, तुम्हारा हमारे यहां बेमतलब आनाजाना ठीक नहीं है. हमारे घर सयानी बेटी है, लोग तरहतरह की बातें करते हैं.’’
गौतम समझ गया कि इन लोगों को शक हो गया है. इसलिए वह वापस चला गया. मंजू को मां का यह व्यवहार पसंद नहीं आया. इसलिए उस ने कहा, ‘‘मम्मी, गौतम के साथ तुम्हें इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए था.’’
‘‘क्यों, तुझे क्यों बुरा लगा? जब देखो, तब मुंह उठाए चला आता है. यह लड़का मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है.’’ मां ने कहा तो मंजू कुछ नहीं बोली. वह अपने कमरे में जा कर सोचने लगी कि अब क्या होगा.
रात में मंजू ने गौतम को फोन किया कि मां ने उस के साथ जो किया, वह उसे अच्छा नहीं लगा. अब वह काफी परेशान है. गौतम ने उसे समझाया कि वह मिलने का कोई न कोई रास्ता निकाल लेगा, इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है. वे देर रात को फोन पर प्यार भरी बातें करते रहते थे. लेकिन एक दिन आदेश ने रात में मंजू को मोबाइल पर बातें करते सुन लिया तो उस का माथा ठनका. आदेश ने उस के हाथ से मोबाइल छीन कर देखा तो वह जिस नंबर पर बात कर रही थी, वह गौतम का नंबर था. पहले तो उसे केवल शक था, पर अब विश्वास हो गया कि दोस्त ने उस के साथ दगा किया है.
गौतम के प्रति उस के मन में नफरत पैदा होने लगी. सुबह को उस ने यह बात अपनी मां को बताई तो घर वालों की नजरें चौकस हो गईं. सभी मंजू पर निगाह रखने लगे. लेकिन शायद उन्हें यह बात पता नहीं थी कि प्यार पर जितना पहरा बिठाया जाता है, वह उतना ही ज्यादा बढ़ता जाता है. मंजू के घर का रास्ता बंद होने पर गौतम ने पूनम से संदेश भिजवा कर मंजू को गांव के बाहर प्राइमरी स्कूल के पीछे मिलने को कहा. मां की नजरें बचा कर किसी तरह मंजू प्रेमी से मिलने प्राइमरी स्कूल के पीछे पहुंच गई. मंजू के पिता नरेश दोपहर में घर आया तो बेटी को घर में न पा कर पत्नी से उस के बारे में पूछा था. पत्नी ने कह दिया कि वह पड़ोस में गई होगी. नरेश ने उसे बुलाने भेजा तो वह पड़ोस में भी नहीं मिली.
नरेश परेशान हो उठा. वह बेटी के बारे में सोच रहा था, तभी आदेश आ गया. उसे जब पता चला कि बहन घर पर नहीं है तो वह उसे ढूंढ़ने निकल गया. ढूंढतेढूंढते वह प्राइमरी स्कूल के पीछे पहुंचा. वहां उस ने को गौतम से बातें करते देखा. उस का खून खौल उठा. उस ने लपक कर गौतम का गिरेबान पकड़ लिया. गौतम ने कहा, ‘‘आदेश, मैं मंजू से प्यार करता हूं और इस से शादी करना चाहता हूं.’’
‘‘दोस्त है इसलिए आखिरी चेतावनी दे कर छोड़ रहा हूं. आइंदा फिर कभी इस से मिला तो जमीन में गाड़ दूंगा. तुझे पता है कि हमारी जाति अलग है, इसलिए तू यह ख्वाब देखना छोड़ दे.’’ आदेश ने कहा.
इस के बाद वह मंजू को घसीटता हुआ घर ले आया और मां से बोला, ‘‘संभालो इसे, वरना यह जान से जाएगी.’’
भाई के इस व्यवहार से मंजू का मन बागी हो उठा. उस ने तय कर लिया कि वह गौतम के साथ ही ब्याह करेगी. उस की वजह से घर में तनाव रहने लगा. आदेश को लगा कि कहीं मंजू परिवार की बदनामी का कारण न बन जाए, इसलिए वह उस की शादी करने की सोचने लगा. मंजू को जब पता चला कि उस के लिए रिश्ता तलाशा जा रहा है तो वह बागी हो गई. उस ने मां से कहा कि गौतम एक अच्छा लड़का है, वह उसी से शादी करेगी. उस के साथ वह सुखी रहेगी. उस के अलावा वह किसी और से शादी नहीं करेगी.
मां ने भी साफसाफ कह दिया कि घर वाले जहां चाहेंगे, वहीं उस की शादी होगी, इसलिए वह गौतम के बारे में सोचना छोड़ दे. अब मंजू की जिंदगी एकदम नीरस हो गई. मंजू की शादी के बारे में गौतम को पता चला तो वह भी परेशान हो गया. उस ने आदेश को फोन कर के कहा कि वह दोस्ती को रिश्ते में बदलना चाहता है. आदेश ने उसे डांटते हुए कहा कि ऐसा हरगिज नहीं हो सकता. इस बारे में वह उन के यहां आइंदा फोन न करे, वरना अच्छा नहीं होगा.
गौतम ने तय कर लिया था कि कुछ भी हो, वह मंजू को किसी भी कीमत पर नहीं भूल सकता. वह उसे भगा कर कहीं दूर ले जाएगा और अपनी दुनिया बसा लेगा. इधर मंजू ने भी अपने घर वालों से साफ कह दिया था कि घर वालों ने जहां उस की शादी तय की है, वह वहां बता देगी कि वह किसी और से प्यार करती थी. बहन के तेवर देख कर आदेश स्तब्ध रह गया. उसे लगा कि इस से पहले उस की बहन परिवार की इज्जत को धूमिल करे, उस से पहले गौतम का खून कर के जेल चला जाना ज्यादा ठीक है. गौतम पर आदेश का गुस्सा फूटने लगा. आखिर उस ने गौतम को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली.
इस के लिए उस ने मंजू को विश्वास में ले कर कहा, ‘‘हम तेरी शादी अपनी बिरादरी में करना चाहते थे, पर तू इस के लिए तैयार नहीं है. तू गौतम से शादी करना चाहती है न, हम तेरी खुशी के लिए तैयार हैं. लेकिन हम उस से एक बार बात करना चाहते हैं. ऐसा कर, तू फोन कर के उसे यहां बुला ले.’’
भाई की बात पर मंजू बहुत हैरान हुई. क्योंकि वह भाई के इरादे को समझ नहीं पाई. उस ने गौतम को फोन कर के भाई की बात कह कर अपने घर आने को कह दिया. गौतम को पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ, लेकिन जवानी के जोश में उस ने कुछ सोचने की जरूरत नहीं समझी. गौतम के घर वालों को कुछ भी पता नहीं था. बस उस के दोस्त रिंकू को उस की मोहब्बत के बारे में जानकारी थी. जब उस ने रिंकू को सारी बात बताई तो उस ने कहा कि दाल में कुछ काला मालूम पड़ता है. जल्दबाजी के बजाय सोचसमझ कर कदम उठाने की जरूरत है.
गौतम ने उस की बात को गंभीरता से नहीं लिया. वह हंस कर बोला, ‘‘हो सकता है, मंजू की जिद की वजह से वे मान गए हों. आदेश डर गया होगा, जबकि हमें डरने की क्या जरूरत है.’’
गौतम रिंकू की हीरो होंडा बाइक ले कर घर से निकलने लगा तो शीला ने टोका, ‘‘बेटा, कहां जा रहा है?’’
‘‘मम्मी, तुम्हारे लिए बहू लेने जा रहा हूं.’’ उस ने हंसते हुए कहा.
आने वाली मुसीबत से बेखबर शीला ने कहा, ‘‘बहू तो हम जा कर लाएंगे तेरे लिए.’’
गौतम मां की बात सुने बगैर चला गया. यह बात 6 अक्तूबर, 2015 की है.
अगले 2 दिनों तक जब गौतम घर नहीं लौटा तो शीला ने रिंकू को बुला कर पूछा कि क्या उसे गौतम के बारे में कुछ पता है, वह कहां गया है?
रिंकू ने बताया कि जिस दिन से गौतम गया है, उस का फोन स्विच्ड औफ आ रहा है. वह उस की बाइक ले कर गया है. इस के बाद उस ने गौतम की मां शीला और चाचा पदम सिंह को उस के प्यार के बारे में बता दिया. इस के बाद उन्हें लगा कि गौतम की जान को खतरा है. शीला ने तुरंत अपनी बेटी भगवान देवी और दामाद सिंकी को फोन कर के सारी बात बता कर बुला लिया. इस के बाद अपने घर वालों को ले कर वह थाना सहावर पहुंची और थानाप्रभारी रफत मजीद को बेटे गौतम के लापता होने की बात बताई.
रफत मजीद ने गौतम की गुमशुदगी दर्ज कर आदेश को थाने बुला कर पूछताछ की. उस ने गौतम के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार कर दिया. अगले दिन 12 अक्तूबर को थानाप्रभारी को सूचना मिली कि कटरी में किसी युवक की लाश पड़ी है. खबर मिलते ही वह मय फोर्स के घटनास्थल पर पहुंच गए. उन के साथ पदम सिंह भी था. लाश 23-24 साल के युवक की थी. वह 5-6 दिन पुरानी लग रही थी. जगहजगह से मांस को जंगली जानवरों ने खा लिया था, इसलिए वह क्षतविक्षत हो चुकी थी. कपड़ों से पदम सिंह ने उस की पहचान गौतम के रूप में कर दी.
लाश की शिनाख्त होने पर पुलिस ने जरूरी काररवाई कर के पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और शक के आधार पर आदेश, मनवीर, जगदीश और सतीश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया. पुलिस ने उसी दिन आदेश के घर दबिश दी और उसे पकड़ कर थाने ले आई. पुलिस को अब तक गौतम और मंजू से प्यार की जानकारी मिल चुकी थी. इसलिए मंजू को भी पूछताछ के लिए थाने लाया गया. मंजू को जब पता चला कि उस के प्रेमी गौतम की हत्या कर दी गई है तो वह हैरान रह गई. वह थाने में ही रोने लगी.
आदेश कुछ भी बताने को तैयार नहीं था. पुलिस ने उस पर सख्ती की तो उस ने कहा, ‘‘सर, गौतम को तो मरना ही था. उस ने खुद अपनी मौत को न्यौता दिया था. हम ने उसे इज्जत की दुहाई दे कर समझाया था, लेकिन वह हमें ही धमकी दे रहा था कि वह मेरे गांव में घुस कर मंजू को ले जाएगा. वह हमारी इज्जत पर पलीता लगाने पर तुला था, इसलिए मजबूरन हमें गौतम को ठिकाने लगाना पड़ा.’’
आदेश ने बताया कि उस ने मंजू द्वारा फोन करा कर गौतम को समझाने के लिए बुलाया था. उस समय उस के साथ मनवीर, जगदीश और सतीश मौजूद थे. सभी ने पहले तो गौतम को समझाने की कोशिश की, पर गौतम मंजू से शादी की जिद पर अड़ा रहा. जब वह नहीं माना तो फिर कटरी में ले जा कर उस को मार डाला गया. उस की हीरोहोंडा मोटरसाइकिल नंबर यूपी 83 एई 9868 गोरहा नहर में फेंक दी गई. आदेश से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर नहर से मोटरसाइकिल बरामद कर ली गई. पूछताछ के बाद सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.
औनर किलिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रवैया बहुत सख्त है, फिर भी आए दिन युवाओं की हत्याएं होती रहती हैं. अपने प्यार को खो कर मंजू अब क्या करेगी, पता नहीं. लेकिन घर वालों के लिए उस के मन में बहुत गुस्सा है. आदेश जेल चला गया है. मंजू को इस बात का दुख है कि गौतम की हत्या उसी की वजह से हुई है. मंजू जानती है कि जीवन काटने के लिए उसे शादी तो करनी ही होगी, पर क्या दिल से प्रेमी की यादों को वह निकाल पाएगी? Firozabad Crime News
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






