Gorakhpur Crime: रजत अपनी प्रेमिका कंचन को हर तरह से खुश रखना चाहता था. जब उसे पता चला कि कंचन के पापा पर कर्ज होने के कारण घर में सब परेशान रहते हैं तो रजत भी बहुत दुखी हुआ. यह कर्ज उतारने के लिए उस ने 2 मर्डर तक कर दिए. इस से उस ने न सिर्फ प्रेमिका के पापा का कर्ज उतार दिया, बल्कि प्रेमिका को आईफोन भी गिफ्ट दिया. इतना करने के बाद क्या उसे उस की प्रेमिका मिली?
रजत जब अपने इरादों में बारबार फेल होता रहा तो उस ने एक खतरनाक प्लान बनाया. प्लान यह था कि अपने मकसद को पूरा करने के लिए अगर किसी के खून से अपना हाथ भी रंगना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेगा, खून कर देगा, लेकिन प्रेमिका कंचन को और दुखी नहीं देख सकता. दिलोदिमाग में पक्का इरादा बैठा लेने के बाद रजत ने परफैक्ट मर्डर प्लान किया. उस ने प्लान बनाया कि पहले बुआ विमला को छक कर शराब पिलाएगा. जब वह पूरे नशे में आ जाएगी तो उस की कलाई से सोने का ब्रेसलेट निकाल लेगा.

शांति देवी ने रजत पर विश्वास क्या किया कि जान से हाथ धो बैठीं
उस के बाद विमला बुआ के घर में रखे सोने के जेवरात और नकदी पर हाथ फेरेगा. ऐसा करते वक्त अगर बुआ ने विरोध किया तो उस की हत्या कर देगा. इस पूरे खतरनाक खेल में रजत एकमात्र किरदार था, जो काली स्याही से पटकथा लिख रहा था. रजत के दिमाग में एक बात खटक रही थी कि हत्या के बाद पुलिस उस तक पहुंच सकती है. वह इस से बचने के लिए अपने खिलाफ कोई साक्ष्य या सबूत छोडऩा नहीं चाहता था, इसलिए वह फूंकफूंक कर कदम रख रहा था.
घटना से एक सप्ताह पहले यानी 17 नवंबर, 2025 की रात करीब 9 बजे रजत विमला बुआ से मिलने उस के घर पहुंचा. विमला और उस की मां शांति देवी अपनीअपनी नौकरी से वापस घर लौट चुकी थीं और खाना बना कर वह थोड़ा आराम फरमा रही थीं, तभी रजत उन से मिलने पहुंचा. साथ में एक महंगी शराब की बोतल भी ले आया था. यह तय कर के वह घर से चला था कि विमला बुआ की कलाई से सोने का ब्रेसलेट उड़ा कर ही रहेगा. इसलिए उसे छक कर शराब पिलाऊंगा.
घर में दाखिल होने के बाद रजत ने अपने संस्कार का परिचय देते हुए विमला और शांति के पैर छू कर आशीर्वाद लिया और उन के बगल में खाली पड़ी कुरसी पर जा बैठा. उस समय कमरे में विमला ही बैठी थी और दिन भर की थकी हुई उस की मां शांति देवी आराम करने दूसरे कमरे में जा चुकी थी. विमला और रजत में गप्पें शुरू हुईं. फिर थोड़ी देर बाद किचन में जा कर रजत 2 गिलास ले आया और दोनों में बराबरबराबर पैग बनाया. जाम भरा एक गिलास विमला की ओर बढ़ाया और जाम से भरा दूसरा गिलास खुद थामा. दोनों चियर्स कर के एक ही बार में हलक के नीचे उतार दिए.
फिर बड़ी चालाकी से उस ने बची हुई शराब उस के गिलास में उड़ेल दी. विमला ने वह भी अपने हलक के नीचे उतार ली थी. अब उस की नजर बुआ के चेहरे पर जा टिकी थी कि जैसे ही शराब अपना कमाल दिखाएगी, वैसे ही उस की कलाई से ब्रेसलेट उतार कर घर के और सामानों पर अपना हाथ साफ कर रफूचक्कर हो जाएगा. रजत की योजना धरी का धरी रह गई. घंटों बीत गए थे, शराब का विमला पर जरा भी असर नहीं हुआ और न ही वह मदहोश हुई. यह देख कर उस का माथा भन्ना उठा. जिस घड़ी का काफी देर से वह इंतजार कर रहा था, वो समय ही उसे धोखा दे रहा था.
रात के 12 बज गए. रजत ने जब देखा कि उस का प्लान फेल हो चुका है तो वह बुआ विमला को गुड नाइट कह कर अपने घर को लौट आया. मुंहबोले भतीजे रजत के जाने के बाद विमला भीतर से दरवाजे पर सिटकनी चढ़ा कर खुद भी मां के कमरे में उन के बगल में सो गई. अपनी योजना में असफल हुआ रजत खुद से बुरी तरह चिढ़ गया था. उसे एक अच्छा मौका उस के हाथ से निकल गया, लेकिन उस ने हार नहीं मानी. अपने मंसूबे को कामयाब बनाने के लिए उस ने फिर से प्लान बनाना शुरू किया.
इस बार उस ने अपनी पटकथा में योजना सफल बनाने के बुआ विमला और दादी शांति देवी को मौत के घाट उतारने की योजना बना ली थी. अगले दिन वह बाजार से करीब डेढ़ सौ रुपए की एक हथौड़ी खरीद कर ले आया और जिस कमरे में सोता था, उसी कमरे में बिस्तर के नीचे छिपा दी. इसी हथौड़ी से मांबेटी दोनों का मर्डर करने का उस ने पूरा प्लान तैयार कर लिया था. उस के शातिर दिमाग को तो देखिए, हथौड़ी खरीदते समय रजत अपने दोनों हाथों में ग्लव्स पहने हुए था, ताकि हत्थे पर कहीं भी उस के फिंगरप्रिंट रह न जाएं और इसी के जरिए वह पुलिस के हत्थे चढ़ जाए. रजत एकएक कदम फूंकफूंक कर रख रहा था.
बात 23 नवंबर, 2025 की रात 10 बजे की थी. रम की बोतल ले कर रजत विमला के घर पहुंचा. शांति देवी बाहर के कमरे में लेटी हुई थी और उन्होंने उसे हमेशा की तरह बेटे की तरह बुलाया तो उस ने उन के नजदीक पहुंच कर दादी के पैर छू कर आशीर्वाद लिया. अंदर कमरे में विमला थी. रजत दादी के पास से हो कर उस से मिलने वहां पहुंचा तो उसे देख कर विमला खुश होते हुए बोली, ”खाना बनाने को मन नहीं हो रहा है, रजत.’’

विमला देवी – प्रेमिका का कर्ज उतारने के लिए भतीजा ही कातिल बन गया
अलसाई विमला आगे बोली, ”मन हो रहा है, 2 रोटी सेंक कर कोई दे देता तो उस का बड़ा उपकार होता. काम करतेकरते आज बहुत थक गई हूं.’’
”ऐसा क्यों कह रही हो बुआ?’’ रजत बोला, ”मम्मी को फोन कर के कह दो आप दोनों के लिए खाना पका देंगी.’’
”ये तुम ने अच्छा याद दिलाया भतीजे. अभी भाभी को फोन कर के कह देती हूं हमारे लिए 4 परांठे सेंक कर किसी
से भिजवा दें या फिर मैं खुद ही जा कर लेती आऊंगी.’’
”ये हुई न अच्छी वाली बात बुआ. जब तक आप खाना ले कर आओगी, तब तक मैं आप के थकान मिटाने का एक नायाब बंदोबस्त करता हूं.’’ कहते हुए रजत ने रम की बोतल सामने मेज पर रखी तो उसे देख कर उस की आंखों में एक अजीब सी चमक जाग उठी थी. इसी बीच विमला ने रजत की मम्मी को फोन कर के परांठे बनाने के लिए कह दिया. इधर रजत किचन से 2 गिलास ले कर आया और उस में एकएक पैग बनाया. जल्दी से विमला ने पैग हलक से नीचे उतारा और खुद खाना लेने रजत के घर के लिए निकल गई. तब तक रजत कमरे से निकल कर दादी के पास आ कर बैठ गया था.
थोड़ी देर बाद रजत के घर से खाना ले कर लौटी विमला पर उस ने पैनी नजर डाली तो उसे देख कर वह परेशान हो गया था. पैग का उस पर कोई खास असर ही नहीं दिख रहा था, बल्कि वह पहले जैसी ही नजर आ रही थी. यह देख कर उस की योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा था. इस बार वह हर हाल में अपनी योजना को अंजाम तक पहुंचाना चाहता था.
खाना ले कर विमला अंदर कमरे की ओर बढ़ी तो रजत भी उसी के पीछेपीछे हो लिया था. उस ने खाना किचन में रख दिया और वापस कमरे में लौट आई थी. इधर रात काफी हो चली थी तो शांति देवी सो गई थी. इस के बाद एक बार फिर रजत ने एकएक पैग बनाया और एक पैग विमला की ओर बढ़ाया तो दूसरा पैग खुद पिया. वह सोच रहा था उस के नशे में होते ही अपना काम कर के लौट जाए, लेकिन इस बार भी पिछली वाली कहानी दुहराने को तैयार थी. लेकिन इस बार वह ऐसा होने देना नहीं चाहता था. इसलिए धीरेधीरे रजत के सब्र का पैमाना छलकना शुरू हो गया था और उस के भीतर का शैतान फुंकार मारने लगा था. इस बार के पैग ने भी कोई अपना असर नहीं दिखाया तो गुस्से से उस का चेहरा तमतमा उठा.

सुशीला लखनऊ में रहती थी, मां बहन की हत्या की सूचना मिलते ही गोरखपुर पहुंत गई.
रजत और विमला दोनों पास बैठ कर ही शराब पी रहे थे. योजना फेल होती देख गुस्से से तमतमाया रजत कुरसी से उठा और 2 कदम आगे किचन की ओर बढ़ा. किचन से एक पौलीथिन ली और पहले से पैंट में पीछे खोंस रखी हथौड़ी निकाली. हत्थे पर पौलीथिन चढ़ाई और बिल्ली के माफिक दबेपांव विमला की ओर पलटा और धीरेधीरे आगे बढ़ा और पीछे से उस के सिर पर जोरदार वार किया. वार इतना जोरदार था कि उस के मुंह से दर्दनाक चीख निकली. चीख सुन कर शांति देवी की नींद उचट गई. और उठ कर बिस्तर पर बैठ कर इधरउधर देखने लगी और ‘कौन है…कौन है…’ आवाज देने लगी.
इधर सिर पर खून सवार रजत विमला पर तब तक ताबड़तोड़ वार पर वार करता रहा, जब तक वह मर न गई. विमला को मौत के घाट उतारते ही पकड़े जाने के डर से वह बुरी तरह डर गया, क्योंकि उसे घर में आते हुए शांति देवी ने देखा था. उस से बात भी की थी. कल को वह गवाही दे सकती थी. फिर उस ने विमला के चीखने की आवाज भी सुन ली थी.
ये सारे तथ्य उस के खिलाफ गवाही देने के लिए काफी थे. यह सोच कर रजत के हाथपांव बुरी तरह कांप रहे थे. इस से पहले शांति देवी उस के लिए खतरा बनती, रजत शांति देवी के कमरे की ओर दबेपांव बढ़ा और उसे भी उसी हथौड़ी से सिर पर वार कर के मौत के घाट उतार दिया. फिर रजत ने दोनों मांबेटी को हिलाडुला कर चैक किया कि कहीं वे जीवित तो नहीं हैं, लेकिन दोनों मर चुकी थीं. इस के बाद हथौड़ी शांति देवी के बिस्तर के पास फर्श पर छोड़ दिया और आराम से वाशरूम गया. वहां उस ने हाथ पर लगे खून को धोया. फिर वह कमरे में पहुंचा, जहां विमला की लाश पड़ी थी.
उस की कलाई से सोने का ब्रेसलेट और सोने की अंगूठी उतार अपनी पैंट की जेब में रखी. फिर वहां से अलमारी की ओर बढ़ा. अलमारी के लौकर में शांति देवी के आंख के औपरेशन के लिए रखे साढ़े 4 लाख रुपए, सोने के कई आभूषण और जाते समय विमला की स्कूटी ले कर अपने घर पहुंचा. घर जा कर वह आराम से ऐसे सो गया था, जैसे उस ने कुछ किया ही नहीं था. उस के चेहरे पर जरा सी भी शिकन नहीं थी. खैर, यह सब करतेधरते रात के करीब 2 बज गए थे. आखिरकार, रजत अपनी योजना में सफल हो ही गया था.
अगली सुबह यानी 24 नवंबर, 2025 को विमला जब अपनी नौकरी पर दोपहर 12 बजे तक नहीं पहुंची, तब पड़ोसी और रामा फरनीचर के मालिक रामानंद विश्वकर्मा ने उसे फोन किया. तब उस का मोबाइल स्विच्ड औफ बता रहा था. इस के बाद लगातार कई बार उसे फोन किया. हर बार उस का फोन स्विच्ड औफ ही बता रहा था. यह देख कर उसे बड़ा अजीब लगा. विमला अपना फोन कभी बंद नहीं रखती थी, फिर क्यों फोन बंद आ रहा है?
रामा फरनीचर से 10 फर्लांग आगे विमला का घर स्थित था. रामानंद विश्वकर्मा टहलते हुए उस के घर जा पहुंचे और दरवाजे पर लगी कौलबेल का स्विच कई बार दबाया, लेकिन भीतर से कोई हलचल होती दिखाई नहीं दी तो उन्हें कुछ शक हुआ कि मामला कुछ गड़बड़ है. रामानंद की आवाज सुन कर पड़ोस के लोग भी मौके पर जमा हो गए थे. फिर किसी ने इस की सूचना शाहपुर थाने को दे दी.
सूचना पा कर शाहपुर थाने के एसएचओ नीरज कुमार राय फोर्स के साथ गीता वाटिका कालोनी स्थित घोसीपुरवा मोहल्ला पहुंच गए. फिर वे सीढिय़ों से होते हुए मकान के फस्र्ट फ्लोर पर पहुंचे, जहां शांति देवी और विमला रहती थीं. पुलिस जैसे ही ऊपर कमरे में पहुंची, बिस्तर पर खून से लथपथ शांति देवी की लाश देख चौंक गई. वहां से हो कर जैसे ही पुलिस दूसरे कमरे में दाखिल हुई, खून से सनी एक और लाश देख कर हैरान रह गई.

घटना की जांच करती पुलिस
80 वर्षीय शांति देवी और 50 वर्षीय विमला यानी मांबेटी की नृशंस हत्या की खबर पलभर में जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई थी. दोहरे हत्याकांड की सूचना पा कर मौके पर मोहल्लेवासियों का जमावड़ा लग गया. इंसपेक्टर नीरज ने घटना की सूचना गोरखपुर के एसएसपी राजकरन नैय्यर, एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी, सीओ (कैंट) योगेंद्र सिंह, डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम को दी. दोहरे हत्याकांड की सूचना मिलते ही मौके पर आला अफसर पहुंच गए थे. डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम भी पहुंच कर जांच में जुट गई थी. पुलिस ने मेज के ऊपर स्टील के 2 गिलास देखे. गिलास उठाए तो उन से शराब की स्मैल आ रही थी.
यह देख पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारा कोई जानपहचान वाला रहा होगा. उस ने यहां बैठ कर मृतका के साथ शराब पी होगी. उस के बाद घटना को अंजाम दे कर फरार हो गया होगा. पुलिस ने दोनों गिलास अपने कब्जे में ले लिए. पुलिस दोनों लाशों की गहनता से जांचपड़ताल करने में जुटी हुई थी. शांति देवी की लाश के पास खून से सनी हथौड़ी पड़ी थी. पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर वह अपने कब्जे में ले ली.
फिर खोजी कुत्ते को लाशों को सुंघा कर छोड़ दिया. खोजी कुत्ता घटनास्थल को सूंघते हुए मौके से 200 मीटर दूर पेट्रोल पंप तक पहुंचा, उस के बाद वहीं रुक गया. यह क्रिया उस ने 3 बार दुहराई थी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारा यहां तक पैदल आया होगा. उस के बाद वह किसी वाहन में बैठ कर फरार हो गया होगा. जरूरी काररवाई पूरी कर दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए बाबा राघवदास मैडिकल कालेज, गुलरिहा भिजवा दिया. पुलिस आगे की काररवाई में जुटी हुई थी. किसी का शक रजत की ओर न जाए, इसलिए वह भी मौके पर जा पहुंचा था और सभी के सामने फूटफूट कर घडिय़ाली आंसू बहाने लगा था.
जांचपड़ताल में पता चला कि मांबेटी के अलावा कोई नहीं है. मृतका शांति देवी की सौतन की एक बेटी सुशीला है, जो अपने परिवार के साथ लखनऊ रहती है. वह कभीकभार ही यहां आती है. पड़ोसियों से पुलिस को पता चला कि पास ही में इन का एक मुंहबोला भतीजा रहता है, जिस का नाम रजत है. उस से सुशीला का मोबाइल नंबर मिल सकता है. रजत और उस के घर वाले भी मौके पर आ चुके थे. वे मांबेटी की हत्या से काफी दुखी थे. बल्कि उन्होंने सुशीला को फोन कर के घटना की सूचना भी दे दी थी.
मां और बहन की हत्या की सूचना मिलते ही सुशीला उसी समय लखनऊ से गोरखपुर को रवाना हो गई. 24 नवंबर की देर रात वह गोरखपुर पहुंची और मुंहबोले भतीजे रजत के घर पर ही ठहरी. अगले दिन 25 नवंबर को वह पुलिस के साथ घर पहुंची. घर की अलमारी से सोने के जेवरात और लौकर में रखे नकदी साढ़े 4 लाख गायब थे. सुशीला ने इस की जानकारी पुलिस को दी तो पुलिस के कान खड़े हो गए. यानी घटना को लूटपाट की नीयत से अंजाम दिया गया था.
पते की बात तो यह थी भूतल पर 3 किराएदार रह रहे थे. इतनी बड़ी घटना घट गई थी, लेकिन उन्हें कानोंकान भनक नहीं लगी थी, ऐसा कैसे हो सकता था. यह सोच कर पुलिस परेशान थी. लेकिन सुशीला की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात हत्यारे के खिलाफ धारा 103(1) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर के जांच शुरू कर दी थी. पुलिस के माथे पर उस वक्त चिंता की लकीरें खिंच उठी थीं, जब उसे कातिल के शातिरानेपन का इल्म हुआ था. कातिल जो भी था, इतना शातिर था कि उस ने अपने खिलाफ कोई सबूत नहीं छोड़ा था. मसलन, उस ने न तो गिलास के ऊपर कोई फिंगरप्रिंट छोड़ा था और न ही हथौड़े के हत्थे पर ही.
इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी ने पुलिस को बुरी तरह उलझा कर रख दिया था. पुलिस दोहरे हत्याकांड की जांच लूटपाट को टारगेट कर के आगे बढ़ा रही थी. जांचपड़ताल से यह भी पता चला कि घटना से एक दिन पहले गली में वाहन रखने को ले कर पड़ोसी और शांति देवी के बीच विवाद हुआ था. और तो और संपत्ति को ले कर भी परिवार में विवाद चल रहा था. जांच में पुलिस ने यह ऐंगिल भी हासिल कर लिया.
पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रही थी. पुलिस जांच की एकएक पहलू रजत के आंखों के सामने से हो कर गुजर रही था, क्योंकि सुशीला की परछाईं बन कर रजत हर वक्त उस के साथ मौजूद रहता था. इसलिए पुलिस की हर गतिविधियों की उसे जानकारी हो जाती थी. धीरेधीरे सप्ताह बीत गया था, लेकिन पुलिस अभी तक हत्या की ठोस वजह तक पहुंच नहीं पाई थी कि इन की हत्या क्यों की गई थी?
रजत अपने परफेक्ट मर्डर प्लान पर बहुत खुश था. पुलिस अब तक कातिल को पकडऩा तो दूर की बात उस की परछाईं तक को छू नहीं पाई थी. हत्या के कारणों तक भी पहुंच नहीं पाई थी. यह देख कर वह मन ही मन खुश हो रहा था. इस के बाद रजत ने चोरी के नकदी में से डेढ़ लाख रुपए का कंचन के लिए ऐप्पल कंपनी का मोबाइल खरीद कर गिफ्ट दिया. उस के पापा के सिर पर लदे कर्ज के एवज में भी डेढ़ लाख रुपए उस के पापा को दिया. ताकि वे कर्ज से मुक्ति पा सके.
कंचन महंगे मोबाइल और पापा के सिर से उतरे कर्ज से प्रेमी रजत के एहसानों के तले दब गई थी. लेकिन उसे ये नहीं पता था कि जो मोबाइल और नकदी उस के हाथों में है, वो किसी के खून से रंगे हुए हैं. हालांकि कंचन ने रजत से पूछा भी था कि तुम्हारे पास इतने पैसे कहां से आए? तो उस ने झूठ बोतले हुए कहा, ”तुम तो जानती हो, मैं प्रौपर्टी डीलिंग का काम भी देखता हूं. एक डीलिंग पास हुई थी, उसी में साढ़े 4 लाख रुपए कमीशन मिले वो रुपए हैं ये.’’ रजत ने कंचन को समझाया तो वह उस की बातों को आंख मूंद कर विश्वास कर लिया.

आरोपी रजत कुमार – प्रेमिका के पापा का कर्ज उतारने के लिए बन गया हत्यारा
उन्हीं पैसों में से रजत ने 50 हजार रुपए अपने पापा रामाधार को यह कहते दिए कि उस ने एक प्रौपर्टी की डीलिंग की थी. उस में एक लाख मिला था, जिस में से 50 हजार आप को दे रहा हूं. पता नहीं क्यों रामाधार को बेटे की इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था. पहले दिनों की अपेक्षा इधर उस के हावभाव कुछ बदलेबदले से लग रहे थे और वह कई दिनों से परेशान रह रहा था, लेकिन किसी से कुछ कह नहीं रहा था.
शांति देवी और उन की बेटी विमला की हत्या से वे काफी परेशान थे. क्योंकि दोनों की हत्या के बाद घर से नकदी और सोने के जेवरात की चोरी हुई थी. चोर अथवा कातिल अभी पकड़ा नहीं गया था. रामाधार को बेटे पर शक हो रहा था कि रजत जरूर हम से कुछ छिपा रहा है, उसे कत्ल के बारे में पूरी जानकारी हो सकती है. मानवता का परिचय देते हुए रामाधार शाहपुर थाने पहुंच गए. इंसपेक्टर नीरज कुमार राय से मिल कर रामाधार ने आशंका जताई कि उन्हें अपने बेटे रजत पर शक है, शाहपुर दोहरे हत्याकांड के बारे में बहुत कुछ जानता है, कड़ाई से पूछताछ की जाए तो घटना का खुलासा हो सकता है.
इधर पुलिस ने घटना वाली रात की काल डिटेल्स का गहनतापूर्वक अध्ययन किया तो शक की सूई रजत पर जा कर रुक रही थी. रजत के मोबाइल की लोकेशन घटना वाली रात मौके पर दिख रही थी. वैज्ञानिक साक्ष्यों और पिता रामाधार के शक के आधार पर पुलिस ने करीब 13 दिनों बाद यानी 5 दिसंबर, 2025 को रजत को उस के घर से हिरासत में ले लिया. थाने में उस से कड़ाई से पूछताछ की. रजत पहले नानुकुर करता रहा, खुद को बेगुनाह बताता रहा, लेकिन जब पुलिस ने उस के सामने वैज्ञानिक साक्ष्यों की फेहरिस्त रखी तो कानून के सामने उस ने घुटने टेक दिए और अपना जुर्म कुबूल कर लिया.
यह दोहरा हत्याकांड करीब 13 दिनों से रहस्य बना हुआ था. जिस पर से परदा उठ चुका था. जिस ने भी मुंहबोले भतीजे रजत की करतूत सुनी, सहसा उसे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि जिस पराए रिश्ते पर अपने खून से भी ज्यादा बढ़ कर अंधा विश्वास किया था, उसी ने इतना बड़ा कांड कर डाला. उस के कारनामे से उस के फेमिली वाले भी हतप्रभ थे. और तो और जब प्रेमिका कंचन को प्रेमी रजत की हरकतों के बारे में पता चला तो उस का दिल नफरत से भर उठा था. उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि रजत इतना बड़ा जुर्म कर सकता है.

वारदात वाली जगह से सबूत इकठ्ठा करती फोरैंसिक टीम
रजत के जुर्म कुबूल करने के बाद पुलिस ने लूट के 16.94 ग्राम सोने की चैन, करीब 20 ग्राम गला हुआ सोना, सोने की एक अंगूठी, एक मोबाइल फोन और 50 हजार रुपए नकद उस के कमरे से बरामद किए. अज्ञात में दर्ज मुकदमे को रजत के नाम दर्ज कर लिया गया और हत्या की धारा 103(1) के साथसाथ धारा 305, 315, 317(2) बीएनएस भी बढ़ा दी गईं. उसी दिन दोपहर में पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस में एसएसपी राजकरन नैयर और एसपी (सिटी) अभिनव त्यागी ने संयुक्त प्रैसवार्ता कर शाहपुर गीतावाटिका स्थित मांबेटी दोहरा हत्याकांड का खुलासा कर दिया. फिर आरोपी रजत को अदालत के सामने पेश किया, जहां से उसे बिछिया के मंडलीय कारागार भेेज दिया.
इस दोहरे हत्याकांड के पीछे की रजत ने जो कहानी बताई, इस प्रकार थी—
22 वर्षीय रजत मूलरूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के थाना शाहपुर स्थित घोषीपुरवा का रहने वाला था. उस के परिवार में पेरेंट्स के अलावा 2 बहनें थीं. पापा रामाधार रेलवे में नौकरी करते थे और रिटायर हो चुके थे. उन का छोटा परिवार था और शिक्षित भी था. उन्होंने बेटा और बेटियों की जिंदगी संवारने के लिए पढ़ायालिखाया. जिन संस्कारों की बेडिय़ों में रामाधार अपने बच्चों को बांधना चाहते थे, बेटियां तो बंध गईं, लेकिन बेटा रजत उन की सोच और संस्कारों की पकड़ से हमेशा 2 कदम आगे ही रहता रहा.
दुनिया की चकाचौंध से उस का मनमस्तिष्क सराबोर हो उठा था. अमीरियत की शहंशाही पर सवार हो कर चांदी की थाली में सोने के चम्मच से खाने का ख्वाब देख रहा था, जो मुंगेरी लाल के हसीन सपनों से कम नहीं था. वह पैसा, पैसा और पैसा का पुजारी बन गया था. अमीरजादे और आवारा किस्म के लड़कों की संगत में पढ़ कर रजत का पांव गलत संगत की दलदल में फंसता गया और वह बिगड़ता गया. बेटे के हाथ से निकल जाने से पेरेंट्स दुखी थे. सुधारने के अनेकानेक कोशिशों के बावजूद वे उसे सुधारने में विफल रहे. उन्होंने देखा कि बेटा उन के हाथ से रेत की तरह फिसल रहा है तो उसे उस के हाल पर छोड़ दिया.
रजत का तर्क था कि वह बड़ा हो चुका है, उस में सोचनेसमझने की क्षमता और चीजों कों परखने की ज्ञान आ चुका है, इसलिए वो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है. पढऩा भी चाहता है और पढ़ाई के साथ साथ पैसे भी कमाना चाहता है. घटना के समय रजत पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीए में पढ़ रहा था. पढ़ाई के दौरान ही कंचन से प्रेम हुआ था. दोनों एकदूसरे से प्रेम करते थे. दोनों ने साथ जीने और मरने की कसमें खाई थी.
कंचन एक तरह से रजत की धमनियों में बहने वाला खून थी. उस के बिना जीने की उस ने कल्पना छोड़ दी थी. उसे कभी दुखी देख नहीं सकता था. जमाने की सारी खुशियों से उस का दामन भर देना चाहता था, लेकिन कंचन कुछ चिंतित सी रहती थी. यह देख कर वह बुरी तरह परेशान हो गया था. ”तुम जानती हो कंचन, मैं तुम्हें तकलीफ में देख नहीं सकता.’’ रजत ने कंचन को समझाने की कोशिश की, ”बताओ, आखिर बात क्या हैं? क्यूं आजकल बुझीबुझी सी रहती हो तुम? कहीं तुम्हारी शान में मेरे से तो कोई गुस्ताखी तो नहीं हो गई है? आखिर बात क्या है बताओगी तो ही सोल्यूशन निकालूंगा न.’’
”नहीं, रजत. ऐसी कोई बात नहीं हैं. तुम से कोई गलती नहीं हुई है.’’ कंचन ने बुझे मन से जवाब दिया.
रजत ने कहा, ”तो फिर कौन सी परेशानी तुम्हें सताए जा रही है, जो इतनी गुमसुम सी रहती हो? तुम्हें परेशान और गुमसुम देख कर मेरा दिल परेशान हुए जा रहा है.’’
”नाहक परेशान हो रहे हो रजत. कहा न, कोई बात नहीं है.’’
”तो तुम ऐसे नहीं बताओगी.’’ कंचन के बेहद करीब पहुंच कर आगे बोला था रजत, ”तुम मुझ से प्यार करती हो कि नहीं?’’
”हां, बहुत प्यार करती हूं.’’
”मुझ पर भरोसा रखती हो?’’
”खुद से भी ज्यादा.’’
”मुझ से प्यार भी करती हो, भरोसा भी रखती हो तो अपने दिल की बात मुझ से शेयर क्यों नहीं करती कि तुम्हें कौन सी परेशानी खाए जा रही है, जो तुम मुझे बताना नहीं चाहती.’’
”मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से कोई और भी परेशान हो.’’ कहतेकहते कंचन की आंखें डबडबा गईं.
”तुम रो क्यों रहीं हो?’’ कंचन की आंखों में आंसू देखकर रजत तड़प उठा, ”आखिर बात क्या है, तुम बता क्यों नहीं हो मेरे को?’’
”मुझे पता है मेरी तकलीफ, मेरी परेशानी जानकर तुम बुरी तरह परेशान हो जाओगे, इसलिए मैं कुछ बताने के पक्ष में नहीं थी.’’
”तुम कब से तेरामेरा करने लगी.’’ तड़प उठा था रजत, ”यह कह कर तुम ने मुझे पलभर में पराया कर दिया.’’
”मेरे कहने का वो मतलब नहीं था, जो तुम समझ रहे हो.’’
”छोड़ कंचन. तुम इतनी सयानी हो गई हो कि अपनी तकलीफों, अपनी परेशानियों को खुद अकेले सौल्व कर सकती हो, तुम्हारी नजरों में अब मेरी कोई अहमियत नहीं रही.’’
”ओह, रजत. मैं तुम्हें कैसे समझाऊं कि मैं तुम्हें परेशान नहीं करना चाहती थी, इसीलिए तुम्हें अपनी परेशानी बताना नहीं चाहती थी. मैं जानती हूं कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकते हो, किसी भी हद तक जा सकते हो.’’
”जब तुम जानती हो, मैं तुम्हें किसी परेशानी या किसी तकलीफ में देख नहीं सकता, तुम्हारे लिए किसी भी हद को पार कर सकता हूं तो तुम बता क्यों नहीं देती कि तुम्हारी परेशानी क्या है?’’
कंचन बोली, ”बताती हूं, बाबा. बताती हूं. घर की परेशानियों में पापा इतना परेशान रहते हैं कि पूरा परिवार उन की परेशानियों से दुखी है. ऊपर से कर्ज है कि सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ा है. पापा की समझ में नहीं आ रहा है कि कर्ज चुकता कैसे करें.’’
”तो ये बात है, इसलिए दुखी हो.’’ रजत सिर हिलाते हुए आगे कहा, ”बाई दि वे कितना कर्ज होगा अंकल पर.’’
”यही कोई डेढ़ लाख.’’
”डेढ़ लाख!’’ सुन कर रजत चौंक पड़ा, ”इतने पैसे तो मेरे पास नहीं है, होता तो मैं अभी दे देता. फिर इतनी बड़ी रकम घर वालों से मांग भी नहीं सकता. थोड़ा वक्त दो, कहीं न कहीं से मैं इंतजाम करने की पूरी कोशिश करता हूं.’’
”डेढ़ लाख के रकम कुछ कम नहीं होती है रजत. कैसे इंतजाम करोंगे?’’
”कैसे इंतजाम करूंगा? यह तुम मुझ पर छोड़ दो.’’ कुछ पल सोचते हुए आगे कहा, ”कहीं न कहीं से मैं बंदोबस्त कर लूंगा, तुम चिंता मत करो. बस, तुम मुसकराती रहा करो. जब तुम मुसकराती हो तो बंद कलियां खिल उठती हैं, आवारा भौंरे गुनगुना उठते हैं.’’
”मस्का न मारो.’’
”मस्का मैं कहां मार रहा हूं.’’
”तो फिर इतनी रकम कहां से लाओगे.’’
”कहा न, तुम इस की चिंता छोड़ दो. मैं कहीं न कहीं से इंतजाम कर लूंगा.’’
”बताओ तो सही, आखिर कहां से ले आओगे पैसे?’’
”समय आने पर बता दूंगा कि मैं ने पैसे कहां से इंतजाम किए थे, अब इस टौपिक पर कोई डिसकस नहीं करोगी, समझी. सुनो…’’
”क्या?’’
”मेरी फीस तो मुझे अदा करती जाओ.’’ रजत मुसकराते हुए बोला था. उस समय कमरे में दोनों के बीच गहरे सन्नाटे का पहरा था. उस की बात सुन कर कंचन का दिल जोरजोर से धड़कने लगा था. प्रेमी रजत उस से क्या चाहता था वह समझ चुकी थी, तभी तो शरम से खुद में सिमटी जा रही थी.
”कहां से दूं तुम्हारी फीस?’’ कहते हुए कंचन का चेहरा शरम से लाल गया था.
”अपनी आंखें बंद करो, मैं खुद ही तुम से फीस वसूल लूंगा.’’ यह कहते हुए रजत कंचन के और करीब आ गया तो कंचन आंखें बंद कर अपनी जगह स्थिर हो गई.
अपने करीब रजत को महसूस कर उस के संपूर्ण जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ गई थी. फिर क्या था प्रेमी युगल आलिंगनबद्ध हो प्रेमरस में डूब गए. उस के बाद रजत अपने घर लौट गया और कंचन का रोमरोम खिल उठा था.
रास्ते भर रजत यही सोचता रहा कि कंचन की नजरों में खुद को ऊंचा दिखाने के लिए पैसों के इंतजाम करने की हामी भर तो दी, लेकिन इतनी बड़ी रकम कहां से लाऊंगा? कौन देगा मुझे इतने पैसे? क्या करूं अब मैं? कहां से ले आऊं इतनी बड़ी रकम?
घर वालों से पैसे मांग नहीं सकता वरना वो पूछेंगे कि इतने पैसों की जरूरत तुम्हें क्यों आन पड़ी या इतने पैसों का क्या करोगे? फिर उन्हें मैं क्या जबाव दूंगा. ऐसे में तो मेरी पोलपट्टी खुल जाएगी और उन्हें हमारे रिश्तों के बारे में पता चल जाएगा. नहींनहीं ऐसा नहीं करना है. इस के लिए कुछ और ही सोचना होगा, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.
रजत रास्ते भर सोचता हुआ घर की ओर बढ़ रहा था. अचानक उस की आंखों के सामने विमला बुआ के हाथों में पड़ा सोने का ब्रेसलेट चमक उठा. उस की चमक से रजत का चेहरा खुशियों से खिल उठा. जिस रास्ते की उसे तलाश थी, आखिरकार वह रास्ता मिल ही गया था. उस ने अपना इरादा मजबूत किया और विमला बुआ का सोने का ब्रेसलेट चुराने का फैसला किया. ये फैसला कर के ही वो खुशी से झूम उठा था. ये बात घटना से करीब 3-4 महीने पहले की थी.
विमला, जिसे वो बुआ कह कर बुलाता था, दरअसल वह उस की सगी बुआ नहीं थी. मोहल्ले में रहने के नाते उस घर से उस का काफी लगाव हो गया था. इसी रिश्ते से उसे बुआ कह कर बुलाता था. विमला अपनी 80 साल की वृद्ध मां शांति देवी के साथ रहती थी. दोनों मांबेटी के अलावा उन का अपना कोई और सहारा नहीं था. रजत ही गाहेबगाहे उन के दुखसुख में खड़ा रहता था. दोनों मांबेटी उस पर अंधा विश्वास करती थीं. उन के घर के कोनेकोने से परिचित था रजत.
रजत जानता कि विमला बुआ और शांति दादी के घर में कहां क्या सामान रखा है. उसे यह भी पता था कि इन दिनों बुआ ने अपने घर की अलमारी में साढ़े 4 लाख रुपए कैश रखा है. सोने के काफी सारे जेवरात भी उन के पास हैं. यह सारे सामान उस के हाथ लग जाएं तो वह प्रेमिका कंचन की नजरों में हीरो बन जाएगा और उस के पापा के सिर पर लदा कर्ज भी उतार देगा. तब कंचन जीवन भर उस की कर्जदार ही बनी रहेगी. कभी सिर उठा कर उस से बात करने की हिम्मत जुटा नहीं पाएगी, अगर ऐसा हो जाए तो?
मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की तरह रजत खुली आंखों से सपने देखता रहा. और वो ये सोचता रहा कि सपने को कैसे हकीकत में बदले? वो अपने जीते जी पैसे और गहने देने से रही और उसे हासिल करना उस का लक्ष्य बन गया है, चाहे जैसे भी संभव हो? उस दिन के बाद से रजत की नजर विमला के सोने के ब्रेसलेट, पैसों और जेवरात पर गड़ गई थी. उसे पाने की हसरत उस के दिलोदिमाग पर हलचल मचाने लगी थी. रजत जानता था विमला बुआ शराब की शौकीन है, शराब पीती है. क्यों न उसे शराब पिला कर जब वो नशे में पूरी तरह डूब जाए तो उस का ब्रेसलेट चुरा लूं.
यह आइडिया दिमाग में आने के बाद से रजत का विमला के घर आनाजाना काफी बढ़ गया था. जब भी वह आता था देर में ही आता था. तब तक विमला काम से वापस घर लौट आती थी. मोहल्ले में ही एक फरनीचर की दुकान पर वह नौकरी करती थी और शाहपुर थानाक्षेत्र के इंजीनियरिंग गेट के सामने उस की मां शांति देवी चाय की दुकान चलाती थी. देर रात तक वह घर लौटती थी, इसलिए रजत उन से मिलने रात में घर जाता था.
इस बीच उस ने विमला के ब्रेसलेट चुराने की कई बार कोशिश की, लेकिन अपने मकसद में कामयाब नहीं हुआ. इस से वह परेशान रहने लगा था, लेकिन उस के दिमाग से ब्रेसलेट, पैसे और जेवरात के खयाल दूर नहीं हुए और उसे पाने के लिए बारबार एक नई कोशिश करता रहा. प्रेमिका के पिता के सिर के कर्ज उतारने के लिए उस ने दशकों पहले बने खून जैसे रिश्ते को धोखे के चाकू से पलभर में वार करके दागदार बना दिया था. 75 वर्षीया शांति देवी की जिंदगी की कहानी भी बड़ी अजीबोगरीब थी. पति रामनरेश जायसवाल की वो दूसरी पत्नी थी. पहली पत्नी से एक बेटी थी, जिस का नाम सुशीला था. उस से कोई बेटा नहीं था तो रामनरेश ने दूसरी शादी शांति से की.
दूसरी पत्नी से 3 बेटियां हुईं, जिस में 2 बेटियों ने लव मैरिज कर के अपना घर बसा लिया. इस के बाद फिर पलट कर कभी घर नहीं लौटीं. तीसरी बेटी विमला थी. विमला का रहनसहन बचपन से ही लड़कों जैसा था. दशकों पहले रामनरेश की स्वाभाविक मौत हो गई तो शांति देवी अकेली हो गई. बड़ी बेटी सुशीला की शादी हो चुकी थी. वो अपने परिवार के साथ लखनऊ में रहती थी. कभीकभार ही मम्मी से मिलने गोरखपुर आती थी.

डर्बल मर्डर का खुलासा करते पुलिस अधिकारी
विमला मम्मी को अकेला छोडऩा नहीं चाहती थी. इसलिए उस ने आजीवन शादी न करने का फैसला किया और अपने वचन पर अडिग रही. मांबेटी दोनों साथसाथ रहती थीं. शाहपुर में 2 मंजिला मकान था. नीचे वाले हिस्से को उन्होंने किराए पर दे दिया था. समय काटने को दोनों ने अपनेअपने पसंद के काम तलाश लिए थे. दोनों की जिंदगी मजे से कट रही थी. लेकिन शायद नियति को तो कुछ और ही मंजूर था.
कथा लिखे जाने तक पुलिस ने रजत के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था. खून से सने प्रेमी के हाथ कंचन के लिए तकलीफदेह बन कर रह गए थे. उस ने रजत से कभी नहीं चाहा था कि वह पापा के सिर से कर्ज उतारने के लिए अपनों के खून से हाथ रंगे. कंचन उस दिन को कोसती थी, जिस दिन उस की पहली मुलाकात रजत से हुई थी. रजत के इस घिनौने फैसले से वह बुरी तरह मर्माहत है. कथा लिखे जाने तक रजत जेल की सलाखों के पीछे कैद था. उस के हाल पर फेमिली वालों ने उसे वैसा ही छोड़ दिया था. Gorakhpur Crime
(कथा में कंचन परिवर्तित नाम है.)






