Gujarat Crime: यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है, बल्कि यह उस रिश्ते की कहानी है, जहां प्यार ने भरोसा खो दिया और शक ने इंसानियत. नींद में मंगेतर सचिन की हत्या करने वाली रेखा राठवा अब जिंदगी भर जागती रहेगी. सच यही है कि जिस पर सब से ज्यादा भरोसा किया जाता है, वही अगर अविश्वास से भर जाए तो मौत चुपचाप पास आ बैठती है.

सचिन को रेखा राठवा की लापरवाही पसंद नहीं आई. शक की आग में तो वह पहले ही सुलग रहा था, उस दिन रेखा की वह हालत देख कर शक की आग और भड़क उठी. रेखा के क्वार्टर में घुसते ही वह उस से सवाल पर सवाल करने लगा. सचिन के सवालों से आजिज आ कर रेखा ने भी गुस्से में कह दिया, ”जब तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं रहा तो फिर तुम मुझे मेरी हालत पर छोड़ क्यों नहीं देते?’’

सचिन तो गुस्से में था ही. उस ने कहा, ”ठीक है, मैं अब तुम से विवाह नहीं करूंगा.’’

सचिन की इस बात से रेखा सन्न रह गई. उस ने सचिन से इस तरह की उम्मीद नहीं थी. उस ने सचिन से यह जरूर कहा था कि वह उसे उस की हालत पर छोड़ दे, पर उस ने यह नहीं कहा था कि उस से विवाह नहीं करूंगी. इसीलिए सचिन की विवाह नहीं करने की बात सुन कर वह सन्न रह गई.

क्योंकि सचिन के साथ उस की सगाई ही नहीं हो चुकी थी, बल्कि करीब 9 महीने से वह उस के साथ पति की तरह रह रहा था. यह बात लगभग सभी को पता चल चुकी थी. इसलिए अगर सचिन उस से विवाह नहीं करेगा तो दूसरा उस से कौन विवाह करेगा? यही सोच कर वह परेशान हो उठी थी और सचिन को मनाने की कोशिश करने लगी थी. दूसरी ओर सचिन ने रेखा से ही विवाह न करने की बात नहीं कही, बल्कि अपने पापा गणपतभाई राठवा को भी फोन कर दिया था. उस ने जब उन्हें फोन किया तो उस की आवाज कांप रही थी.

कांपती आवाज में ही उस ने कहा, ”पापा, अब मैं रेखा से शादी नहीं करूंगा, क्योंकि वह शादी से मना कर रही है. जो तारीखें तय हुई थीं, जो आर्डर दिए थे, सब कैंसिल कर दो.’’

बेटे की बात सुन कर गणपतभाई अवाक रह गए थे. उन्होंने पूछा, ”बेटा, बात क्या हुई? वह शादी से मना क्यों कर रही है?’’

”वह मुझ से तंग आ गई है. कहती है कि अब बहुत हो गया. शायद उसे कोई और पसंद आ गया है.’’ सचिन ने कहा और फोन काट दिया.

यह आखिरी बार था, जब गणपतभाई ने अपने बेटे की आवाज सुनी थी.

झगड़े के बाद दोनों चुप थे. सचिन थका हुआ था. झगड़ा कर के और थक गया था. इसलिए उस ने रेखा से कहा, ”मेरी तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए मैं सोने जा रहा हूं.’’

इतना कह कर सचिन ने आंखें मूंद लीं तो थका होने की वजह से जल्दी ही उसे नींद आ गई. सचिन बेखबर हो कर सो रहा था, लेकिन रेखा की आंखों में नींद नहीं थी. वह यही सोचसोच कर परेशान हो रही थी कि यह आदमी अभी तक उस के साथ पति की तरह रहता रहा और पत्नी की तरह उस का उपयोग करता रहा. वह उसे हर तरह का सुख देती रही. अब आज अचानक उस पर झूठा आरोप लगा कर उसे अधर में छोड़ रहा है. उस का बनाबनाया घर टूट रहा था, इसलिए वह बेचैन हो उठी थी कि अब उस का क्या होगा? कौन उस से विवाह करेगा?

यही सोच कर रेखा का प्यार नफरत में बदलने लगा. उसे लगा कि सचिन की वजह से उस की जिंदगी बरबाद हो रही है. उस का घर उजड़ रहा है. वह अब कहीं की नहीं रहेगी. और फिर ऐसे में रेखा ने वह फैसला लिया, जो प्रेम से नहीं, नफरत से पैदा हुआ था. उस ने सोचा कि अगर सचिन नहीं रहेगा तो कोई यह नहीं पूछेगा कि सचिन ने उसे क्यों छोड़ दिया. उस के न रहने पर कोई भी उस से बिना पूछे विवाह कर लेगा. इसलिए रेखा ने अपना वही दुपट्टा उठाया, जो कभी उस की खूबसूरती बढ़ाता था, सजनेसंवरने के काम आता था. दुपट्टे को उस ने गहरी नींद में सोए सचिन के गले में फुरती से लपेटा और कस दिया.

बेखबर सो रहा सचिन न चीख सका और न जान बचाने के लिए संघर्ष कर सका. बस, थोड़ा हाथपैर पटक कर शांत हो गया. उस की सांसें थम गईं तो रेखा ने अपने हाथ ढीले छोड़ दिए. इस तरह एक जीवन हमेशा के लिए शांत हो गया. नफरत की आग शांत हुई तो रेखा थोड़ा घबराई कि अब क्या किया जाए? कैसे खुद को कानून के शिकंजे से बचाया जाए? क्योंकि उसे पता था कि अगर वह हत्या के मामले में फंस गई तो पूरी जिंदगी जेल में ही बीतेगी.

सचिन राठवा – रेखा ने नफरत की आग में झुलसते हुए दुपट्टा उठाया और सचिन के गले में कस दिया

पूरी रात वह खुद को बचाने के लिए ही सोचविचार करती रही. सवेरा होने पर वह क्वार्टर से बाहर निकली और पड़ोस में रहने वाले दीपक शाह से बोली, ”भैया, रात को सचिन अच्छाभला सोया था, अब उसे उठा रही हूं तो वह उठ ही नहीं रहा है. थोड़ा अंदर आ कर देखिए तो क्या बात है?’’

दीपक शाह ने अंदर जा कर सचिन को हिलायाडुलाया. वह जिंदा होता, तब तो उठता. दीपक को उस का शरीर एकदम ठंडा लगा. उस ने एंबुलेंस बुलाई और सचिन को सयाजी गायकवाड़ अस्पताल ले गया. अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डौक्टर ने सचिन को देखते ही मृत घोषित कर दिया.

इस के बाद रेखा ने सचिन के पापा को फोन कर के उस के मरने की सूचना दी. दूसरी ओर सचिन को देखने वाले डौक्टर ने सचिन की लाश को गौर से देखा तो उस के गले पर कसने का निशान दिखाई दिया. इसलिए उस ने शक के आधार पर पुलिस को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही बड़ौदा के थाना मकरपुर के एसएचओ ए.एम. गोहिल पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने भी लाश का निरीक्षण किया और फिर उसे कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

रेखा राठवा – सचिन ने जब कहा कि अब वह उससे विवाह न करेगा तो यह सुन कर रेखा सन्न रह गई.

रेखा से पूछताछ की गई तो उस ने पुलिस को भो वही सब बताया, जो पड़ोसी दीपक शाह को बताया था. शक तो पुलिस को भी था कि सचिन की मौत उस तरह नहीं हुई, जैसा रेखा बता रही है, पर बिना सबूत पुलिस कोई काररवाई नहीं कर सकती थी, इसलिए पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करने लगी. उसी बीच सचिन के पापा गणपतभाई राठवा ने भी आ कर पुलिस को बताया कि रात को उन की सचिन से बात हुई थी. तब वह बिलकुल ठीकठाक था. उस ने यह जरूर कहा था कि रेखा अब उस से विवाह करने के लिए मना कर रही है.

रेखा के इसी क्वार्टर में कि गई सचिन राठवा की हत्या 

इस का मतलब है कि रात को रेखा और उस के बीच किसी बात को ले कर झगड़ा हुआ था. हालात रेखा को दोषी बता रहे थे, पर पुलिस के हाथ अभी बंधे थे. इसलिए वह कोई काररवाई नहीं कर पा रही थी. 3 दिनों तक वही कहानी चलती रही कि सचिन सोया तो उठा नहीं, क्योंकि रेखा पुलिस को गुमराह करती रही थी. जबकि डौक्टर का कहना था कि यह स्वाभाविक मौत नहीं है. आखिर डौक्टर की बात तब सच साबित हुई, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी पलट दी.

रिपोर्ट के अनुसार, गला घोंट कर सचिन की हत्या की गई थी. इस के बाद थाना मकरपुरा पुलिस हरकत में आई. एसएचओ ए.एम. गोहिल रेखा को थाने ले आए. थाने में एसीपी प्रणव कटारिया की उपस्थिति में रेखा से पूछताछ शुरू हुई. पहले तो रेखा राठवा वही पुरानी कहानी दोहराती रही. फिर आंसू बहाए. लेकिन जब पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिखा कर सख्ती की तो अंत में उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने रात को दुपट्टे से गला कस कर सचिन की हत्या की थी. इस के बाद सचिन की हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—

गुजरात में ज्यादा ठंड नहीं पड़ती, लेकिन जब पहाड़ी हवाएं चलती हैं तो कहने के लिए थोड़ी ठंड हो जाती है. ऐसी ही ठंड की वह रात बाहर से जितनी शांत थी, भीतर से उतनी ही खौफनाक थी. ठंड होने की वजह से बड़ौदा के प्रतापनगर की रेलवे कालोनी के रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टरों के बीच गलियों में लगभग सन्नाटा पसर चुका था. लेकिन किसी क्वार्टर की खिड़की से टीवी की हलकी आवाज आ रही थी तो कहीं प्रेशर कुकर की सीटी बज रही थी. जबकि उन्हीं क्वार्टरों में से एक छोटे से क्वार्टर के भीतर जीवन और मौत के बीच एक ऐसा फैसला लिया जा रहा था, जिस की गूंज आने वाले दिनों में पूरे बड़ौदा को हिला देने वाली थी.

छोटा उदेपुर के रोजकुवा गांव का रहने वाला सचिन बेहद सीधासादा युवक था. मम्मी को वह बचपन में ही खो चुका था. पापा गणपतभाई ही उस की पूरी दुनिया थे. उस के पास साधन भले सीमित थे, लेकिन सपने बड़े थे. उस का मानना था कि मेहनत और सच्चा प्रेम इंसान को किसी भी मुकाम तक पहुंचा सकता है. छोटा उदेपुर की ही रहने वाली रेखा राठवा बड़ौदा में रेलवे में खलासी की नौकरी करती थी. वह खूबसूरत भी थी, आत्मनिर्भर होने की वजह से आत्मविश्वास से भी भरी हुई थी.

सचिन से जब वह पहली बार मिली थी, तभी उसे लगा था कि यही लड़की उस की अधूरी जिंदगी को पूरा कर देगी. 3 साल पहले इंस्टाग्राम के माध्यम से दोनों की जानपहचान हुई थी. उस के बाद धीरेधीरे दोनों में जानपहचान बढ़ती गई, जो आगे चल कर मुलाकात में बदल गई. जब कई बार मिलना हुआ तो दोनों ने एकदूसरे के फोन नंबर ले लिए. उस के बाद वाट्सऐप पर गुडमार्निंग और गुडनाइट के मैसेज भेजे जाने लगे. कभीकभार फोन पर बातें भी हो जातीं. धीरेधीरे मैसेज भी बढऩे लगे और बातें भी लंबी होने लगीं. एक समय ऐसा आ गया कि दुनियादारी की बातें छोड़ कर प्यार की बातें होने लगीं. इसी के साथ दोनों की पहले सार्वजनिक स्थानों पर फिर एकांत में मुलाकातें होने लगीं, जिस की वजह से दोनों दिल के करीब आते चले गए.

पुलिस ने रेखा से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया 

रेखा का प्यार पा कर सचिन को लगता था कि उस ने जिंदगी की सब से बड़ी दौलत पा ली है. आखिर उसे चाहिए क्या था. रेखा अच्छा कमाती थी, खूबसूरत थी, उसे प्यार भी खूब करती थी. एक युवा का यही सपना होता है. वह खुद भी ड्राइवर था. वह भी अच्छा कमाता था. इसलिए रेखा को पा कर सचिन का यह सपना पूरा हो गया था, लेकिन जब यही प्यार शक की आग में झुलसने लगे तो यह प्यारा रिश्ता जिंदगी के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाता है.

रेलवे में नौकरी होने की वजह से रेखा को रेलवे कालोनी में क्वार्टर मिला हुआ था. वह उस क्वार्टर में अकेली ही रहती थी. एक उम्र के बाद अकेले रहना खलने लगता है. यह अकेलापन तब और काटने दौडऩे लगता है, जब कोई प्यार करने वाला रात को देर तक प्यार भरी बातें करता है. प्यार भरी बातें करने के बाद नींद नहीं आती. ऐसा ही रेखा के भी साथ हो रहा था.

सचिन से बातें करने के बाद उसे भी नींद नहीं आती थी. यही हाल लगभग सचिन का भी था. इसलिए नौकरी, अकेलेपन और भविष्य के बारे में सोच कर दोनों ने साथ रहने का फैसला कर लिया. वह भी चोरीछिपे नहीं, बल्कि फेमिली वालों की सहमति से जल्दी से जल्दी शादी करने का वादा कर के. सचिन ने ही नहीं, रेखा ने भी अपने फेमिली वालों को इस प्रेम विवाह के लिए राजी कर लिया था. अपने बच्चों की खुशी के लिए दोनों के फेमिली वाले खुशीखुशी राजी हो गए थे. उस के बाद दोनों की सगाई कर दी गई और विवाह की तारीख की भी चर्चा शुरू हो गई.

मृतक सचिन राठवा के पापा गणतपतभाई 

गणपतभाई राठवा ही सचिन के पापा भी थे और मम्मी भी. पत्नी यानी सचिन की मम्मी की मौत के बाद उन्होंने ही उसे पालापोसा था, इसलिए रेखा के साथ सगाई होने के बाद वह सोचने लगे थे कि अब उन के बेटे का घर बस जाएगा और वह सुख से रहेगा. पतिपत्नी कमाएंगे और हंसीखुशी से रहेंगे. लेकिन हर रात चैन की नहीं होती. जीवन में ऐसी भी तमाम रातें आती हैं, जो चैन ही नहीं, अच्छीभली जिंदगी छीन लेती हैं. एक दिन गांव से लौटने के बाद रात को सचिन रेखा का फोन उठा कर देखने लगा तो पता चला कि वह लौक है. जबकि पहले ऐसा नहीं होता था.

सचिन ने पूछा तो रेखा ने कहा कि ऐसे ही लौक कर दिया है. फिर उस के फोन से उसे क्या मतलब है? उस का फोन है, वह लौक कर के रखे या ऐसे ही रखे. बस, रेखा की इसी बात से सचिन को शक हो गया. जरूर रेखा किसी और से बात करती है और वाट्सऐप पर चैट करती है. वह देख न ले, इसलिए फोन को लौक कर दिया है. उस समय तो वह कुछ नहीं बोला, पर रेखा पर नजर रखने लगा. सचिन ड्राइवर तो था ही. वह प्राइवेट गाड़ी चलाता था. उस के जाने का तो समय होता था, पर आने का कोई समय नहीं होता था. अकसर वह देर से ही आता था. पर कभीकभार जल्दी भी आ जाता था. जल्दी आने पर उस ने कई बार देखा था कि रेखा घर आते समय किसी से फोन पर बातें करती हुई आती है.

सचिन सोच में पड़ गया कि वह उस से तो इतनी लंबी बातें करती नहीं तो फिर किस से बातें करती है. कहीं किसी और से तो वह प्रेम नहीं करती. यह बात दिमाग में आते ही यानी रेखा पर शक होते ही उस का स्वभाव बदलने लगा था. सचिन को लगने लगा था कि रेखा उस से कुछ छिपा रही है. रेलवे की नौकरी, देर से लौटना, मोबाइल पर बारबार लौक बदलते रहना और किसी से रास्ते भर बातें करते रहना, ये सब बातें उस के मन में जहर घोलने लगीं. आखिर सचिन कब तक इस बात को मन में दबाए घुटता रहता.

एक दिन जब उस ने यह बात रेखा से कही तो वह तुनक कर बोली, ”तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है क्या? मैं दिन भर दूसरों के साथ काम करती हूं. दिन भर काम में व्यस्त रहने की वजह से एकदूसरे से बात नहीं हो पाती. इसलिए छुट्टी होने के बाद साथियों से दिन भर की बातें होती रहती हैं. और दूसरा कुछ नहीं है. तुम बेकार का शक कर के अपना दिमाग मत खराब करो.’’

लेकिन सचिन को तो शक का दीमक लग चुका था, जो उसे अंदर ही अंदर खाने लगा था. इसलिए जब देखो, तब सचिन रेखा को टोकने लगा था. ऐसे में रेखा कई बार झुंझला कर कहती, ”आखिर तुम मुझ पर भरोसा क्यों नहीं करते?’’

एसीपी प्रणव कटारिया

”क्योंकि मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता, इसलिए डर लगता है.’’ सचिन जवाब में कहता.

लेकिन डर और शक जब हद पार कर जाता है तो प्यार का दम घुटने लगता है. सचिन का शक बढ़ता गया और उसी के साथ झगड़ा भी बढ़ता गया. इन झगड़ों में धीरेधीरे आवाज ऊंची होने लगी तो मन में कटुता भी बढऩे लगी. शादी अभी हुई नहीं थी, इसलिए जब भी सचिन और रेखा में झगड़ा होता, रेखा कह देती कि वह उस की ब्याहता नहीं है, जो उस की बातें सहन करेगी. उस का जो मन होगा, वह वही करेगी. उस की रोकटोक बरदाश्त नहीं करेगी. इस पर सचिन को गुस्सा आ जाता और वह भी कहता कि जब शादी के पहले ही उस के ये हाल हैं, तो शादी के बाद वह नौकर बना कर रखेगी.

29 दिसंबर, 2025 की रात पहाड़ी हवाएं चलने की वजह से ठंड कुछ ज्यादा थी. सचिन उस दिन घर जल्दी आ गया था. वह जब घर आया तो रेखा अपनी नौकरी से नहीं आई थी. जबकि उसे काफी पहले ही घर आ जाना चाहिए था. सचिन घर से बाहर आ कर रेखा की राह देखने लगा. लगभग आधे घंटे बाद रेखा फोन पर बातें करती आती दिखाई दी. वह किसी से हंसहंस कर बातें करने में इस कदर तल्लीन थी, जैसे उसे घर पहुंचने की कोई जल्दी नहीं थी. जबकि उसे पता रहा होगा कि अब तक सचिन घर आ गया होगा और उस का इंतजार कर रहा होगा.

उस दिन जैसे ही वह घर लौटी तो देरी से लौटने की बात को ले कर उस की मंगेतर सचिन से तीखी बहस हुई. फिर गुस्से में सचिन के शादी करने से मना करने पर वह अपने भविष्य को ले कर चिंता में पड़ गई. उसे सचिन से नफरत हो गई. इसलिए उसे सबक सिखाने के लिए उस ने उस की गला दबा कर हत्या कर दी. रेखा राठवा ने सचिन की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया तो पुलिस ने उस के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस अब जांच कर रही है कि सचिन की हत्या के मामले में कोई और तो नहीं शामिल था? पुलिस ने सारे सबूत जुटा कर रेखा को जेल भेज दिया है. Gujarat Crime

 

 

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