True Crime Story: रोहित ने अपनी नाबालिग प्रेमिका रूबी के सामने जो शर्त रखी थी, अमूमन उस के लिए जल्दी कोई लड़की तैयार नहीं होती. लेकिन प्रेमी की बात मान कर उस ने सहेली के साथ गलत काम तो कराया ही, अपने बचाव में उस की जान भी ले ली.

मध्य प्रदेश के जिला भिंड के एक गांव के अशोक कुमार बरसों पहले हरियाणा के शहर कालका में आ कर बस गए थे. उन के परिवार में पत्नी सीतारानी के अलावा एक बेटा नरेश और बेटी दीक्षा थी. अशोक और उस की पत्नी सीता कालका की बगल में बसे हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक नगर परवाणू की अलगअलग फर्मों में नौकरी करते थे. अशोक की ड्यूटी सुबह साढ़े 5 बजे से शाम साढ़े 4 बजे तक रहती थी तो वहीं सीतारानी की ड्यूटी सुबह साढ़े 7 बजे से साढ़े 4 बजे तक की होती थी. दोनों ही अपनी ड्यूटी खत्म कर के पैदल ही घर चले आते थे. एक लंबे अरसे से इन की यही दिनचर्या थी.

कालका और परवाणू के बीच केवल 3 किलोमीटर का फासला है. यहां चलने वाली लोकल बसें अकसर ट्रैफिक में फंस जाती हैं, जिस की वजह से यह दूरी तय करने में उन्हें काफी समय लग जाता है. इसलिए यहां के लोग अकसर इस दूरी को पैदल ही तय कर लेते हैं. परवाणू में किराए के मकान मिलते ही नहीं और अगर मिल भी जाते हैं तो उन का किराया इतना ज्यादा होता है कि फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग उसे वहन नहीं कर पाते, इसलिए परवाणू में काम करने वाले अधिकांश लोगों ने अपनी रिहाइश कालका में ही बना रखी है. अशोक भी पिछले 4 सालों से कालका की एक घनी बस्ती में रह रहा था.

उस के बेटे नरेश ने दसवीं पास कर ली थी. आगे की पढ़ाई करने के बजाय वह नौकरी की तलाश में था. बेटी दीक्षा अभी 3 महीने पहले 13 बरस की हुई थी. वह स्थानीय सरकारी स्कूल की नौवीं कक्षा में पढ़ रही थी. इन दिनों उस की सालाना परीक्षाएं चल रही थीं. 11 मार्च, 2016 को दोपहर बाद 2 बजे उसे अपनी परीक्षा देने जाना था. उस दिन उस का भाई अपनी रिश्तेदारी में कालका से बाहर गया था. वह घर में अकेली ही थी. वैसे भी यहां डर जैसी कोई बात नहीं थी. पासपड़ोस में सब इन्हें जानतेपहचानते थे. शाम के वक्त वह अकसर रोजाना गली के बच्चों के साथ खेलती भी थी.

11 मार्च, 2016 की शाम 6 बजे तक वह घर से बाहर नहीं निकली तो कुछ बच्चे उसे खेलने को बुलाने के लिए उस के घर गए. उस का घर खुला हुआ था. बच्चों ने दीक्षा को आवाज लगाई. जवाब न आने पर उन्होंने भीतर जा कर देखा. वहां का दृश्य देख कर उन के होश उड़ गए. अर्धनग्न अवस्था में दीक्षा बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी. बच्चे बाहर आ कर शोर मचाने लगे तो मोहल्ले की औरतें और आदमी वहां आ गए. उन्होंने जा कर देखा तो दीक्षा मृत पड़ी थी. एक जानकार ने अशोक कुमार को फोन कर के कहा उस के यहां कुछ गड़बड़ है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके, वह घर आ जाए.

अशोक ने पत्नी को फोन कर दिया. उस के बाद दोनों साथसाथ पैदल घर की तरफ चल दिए. दोनों को एक ही बात बेचैन कर रही थी कि पता नहीं घर पर क्या हो गया है. खैर, वे तेज कदमों से चलते हुए घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उन के घर के पास काफी भीड़ जमा है. जब उन्होंने देखा कि किसी ने उन की बेटी की हत्या कर दी है तो वे फूटफूट कर रोने लगे. उन के पहुंचने से पहले ही किसी ने पुलिस को फोन कर दिया था.

थाना कालका के थानाप्रभारी उमेद सिंह एसआई रेशम सिंह, हवलदार प्रदीप कुमार, नरेश कुमार, महिला कांस्टेबल जसमीत कौर के अलावा कांस्टेबल रमेश कुमार के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. मामला पहले ही फ्लैश किया जा चुका था. सूचना पा कर कालका क्षेत्र के एसीपी राजेश कुमार व जिला पंचकूला के डीसीपी अनिल धवन भी वहां आ गए थे. पुलिस जांच में पहली ही नजर में मामला दुष्कर्म के बाद हत्या का लग रहा था. इसलिए पुलिस ने मृतका के पिता अशोक कुमार की तरफ से अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया था.

लड़की के नीचे के कपड़े शरीर पर नहीं थे. बिस्तर पर जिस स्थिति में उस की लाश पड़ी थी, उस से साफ लग रहा था कि मरने से पहले उस के साथ दुराचार किया गया था. लेकिन बिना मैडिकल जांच के रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता था. देर शाम क्राइम इनवैस्टीगेशन व फोरैंसिक टीमें घटनास्थल पर पहुंच कर सबूत जुटाने में जुट गईं. मौके की प्रारंभिक काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए कालका के सिविल अस्पताल भेज दिया. अब तक काफी रात घिर आई थी. इस केस को हल करने में पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पाया था.

अगली सुबह एसएमओ डा. एस.एस. नरवाल की निगरानी में डाक्टरों के एक पैनल ने दीक्षा के शव का पोस्टमार्टम कर के रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी. रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताते हुए दुष्कर्म की पुष्टि की गई थी. इस के अलावा मृतका की गरदन व जिस्म के कुछ अन्य हिस्सों पर ऐसे जख्मों के निशान पाए गए थे, जिस से यह बात साबित होती थी कि मरने से पहले मृतका ने हत्यारे से काफी संघर्ष किया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि की गई थी कि दुष्कर्म मरने से पहले किया गया था. मृतका का विसरा निकाल कर रासायनिक परीक्षण के लिए भिजवाने के लिए सुरक्षित रख लिया गया था. दुष्कर्म की पुष्टि हो जाने पर केस में भादंवि की धारा 376 भी जोड़ दी गई. तफ्तीश के नाम पर थाना पुलिस के हाथ अभी खाली थे.

डीसीपी अनिल धवन ने पहले से ही इस केस को गंभीरता से ले रखा था. इस केस का खुलासा करने के लिए उन्होंने पुलिस की 3 टीमें गठित कर दीं. जिन में से एक टीम ने अपनी जांच की शुरुआत मृतका के पड़ोसियों से पूछताछ कर के की. उन से जानकारी मिली कि पिछले कुछ दिनों से दीक्षा के घर के बाहर 2 लड़कों को चक्कर काटते देखा गया था. यह भी पता चला कि सांवले रंग की एक लड़की भी दीक्षा के पास आया करती थी.

पड़ोसियों से हुलिए हासिल कर के पुलिस ने उन के स्कैच तैयार करवाए, साथ ही मृतका का मोबाइल फोन भी चैक किया. पड़ोसियों ने सांवले रंग की जिस लड़की का जिक्र किया था, उसी के हुलिए से मिलतीजुलती एक लड़की का फोटो दीक्षा के वाट्सऐप पर मिल गया. पुलिस ने वह फोटो पड़ोसियों को दिखाया तो उन्होंने इस बात की पुष्टि कर दी कि यही लड़की दीक्षा से मिलने आया करती थी. पर दीक्षा के मातापिता ने उस लड़की को पहचानने से इंकार कर दिया. पुलिस ने वाट्सएप वाली उस लड़की का फोटो दीक्षा के स्कूल की कुछ लड़कियों को दिखाया तो उन्होंने छूटते ही कहा कि यह रूबी है.

वह लड़की भी उसी स्कूल में पढ़ती थी. पिछले साल आठवीं पास कर लेने के बाद इस ने पढ़ाई छोड़ दी थी. स्कूल से रूबी के घर का पता हासिल कर के पुलिस उस के घर पहुंच गई और पूछताछ के लिए उसे थाने ले आई. महिला पुलिस द्वारा उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई तो नाबालिग रूबी पुलिस की शुरुआती पूछताछ में ही टूट गई. इस के बाद उस ने अपनी खास सहेली दीक्षा की हत्या की जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर पुलिस भी हैरान रह गई. 15 साल की रूबी के पिता परवाणू में ही एक चाय की दुकान चलाते थे. स्कूल से लौटने के बाद रूबी अकसर पिता के काम में हाथ बंटाने के लिए दुकान पर बैठ जाया करती थी. उस से बड़ी 2 बहनें और थीं, जिन की शादियां हो चुकी थीं. सब से छोटा एक भाई था, जो परवाणू के एक स्कूल में पढ़ता था.

रूबी की दुकान पर रोहित नाम का एक युवक रोजाना चाय लेने आता था. वह वहीं की एक फैक्ट्री में नौकरी करता था. 22 साल का रोहित मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के गांव मुस्तफाबाद का रहने वाला था. वह करीब 4 साल पहले गांव के एक दोस्त के साथ काम के सिलसिले में परवाणू आया था. यहां उसे सैक्टर-2 स्थित गैसचूल्हा बनाने वाली एक फैक्ट्री में नौकरी मिल गई थी. वहां उस का काम चूल्हों की सफाई करना और फैक्ट्री के लोगों के लिए चाय वगैरह लाना था. रूबी की चाय की दुकान उस की फैक्ट्री के नजदीक थी, इसलिए वह वहीं से फैक्ट्री के कामगारों के लिए चाय लाता था. कई बार उसे दुकान पर रूबी बैठी मिलती थी.

रोहित का चाय का और्डर अन्य ग्राहकों के मुकाबले काफी बड़ा होता था. इस की पेमेंट भी उसी के जरिए होती थी, इसलिए रूबी उस का खास ध्यान रखती थी. रूबी थी तो काफी सांवली, पर उस के नयननक्श अच्छे थे, जिस की वजह से रोहित उसे चाहने लगा था. रूबी को खुश करने के लिए कई बार वह चाय के बिल में 10-12 कप ज्यादा लिखवा कर उसे अपनी फैक्ट्री से अतिरिक्त पैसे दिलवा दिया करता था. अपने पास से भी कई बार उस ने 100-50 का नोट उस के हाथों पर रख कर मुट्ठी बंद कर दी थी. इस से रूबी का झुकाव रोहित की तरफ हो गया. रोहित चौबीसों घंटे फैक्ट्री में रहता था.

फैक्ट्री के वर्करों की छुट्टी हो जाने के बाद एक दिन रोहित ने रूबी को फैक्ट्री में ही बुला लिया. उस दिन दोनों का शारीरिक मिलन हो गया. एक बार जिस्मानी संबंध बनने के बाद उन के बीच इस का सिलसिला चल निकला. पहले रोहित अपनी कमाई से हर महीने कुछ पैसे घर भेज दिया करता था. पर रूबी से संबंध बनने के बाद उस ने घर पैसे भेजने बंद कर दिए. उस ने सारे पैसे रूबी पर लुटाने शुरू कर दिए. रूबी के लिए वह एक तरह से सोने का अंडा देने वाली मुरगी बन गया था.

इसी तरह 2 बरस निकल गए. इस के बाद एक दिन अचानक कुछ ऐसा हो गया कि उन के संबंधों में दरार पड़ गई. दरअसल, एक दिन कालका के मुख्य बाजार में रोहित की रूबी से मुलाकात हुई तो उस के साथ एक गोरीचिट्टी लड़की भी थी. रूबी ने उस लड़की का परिचय अपनी सहेली दीक्षा के रूप में करा कर बताया कि दोनों दूसरी क्लास से आठवीं तक साथसाथ पढ़ी थीं. इसी पहली मुलाकात में रोहित का दिल दीक्षा पर आ गया. इस के बाद रूबी से जब भी उस की मुलाकात होती, वह उस से दीक्षा के बारे में ही बातें करता. इस तरह उस ने दीक्षा के बारे में उस से तमाम जानकारियां हासिल कर लीं.

इस के बाद दीक्षा की झलक पाने के लिए वह उस की गली के चक्कर लगाने लगा. लेकिन दीक्षा न तो किसी से फालतू बातें करती थी और न ही फिजूल में इधरउधर घूमती थी. वह अपनी पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों को समझने वाली गंभीर प्रवृत्ति की लड़की थी. रोहित को जब लगा कि दीक्षा आसानी से उस के जाल में फंसने वाली नहीं है तो उस ने एक योजना बनाई. उस योजना के तहत उस ने एक दिन रूबी से सीधे कहा, ‘‘देख रूबी, मेरा मन तेरी सहेली दीक्षा पर आ गया है.

अगर तू चाहती है कि हमारा और तेरा रिश्ता हमेशा बना रहे तो कैसे भी तू उस से मेरी एक बार अकेले में मुलाकात करवा दे, सिर्फ एक बार. इस के बाद उस की तरफ देखना तो दूर, मैं कभी उस के बारे में सोचूंगा भी नहीं. अगर तुम ने मेरा यह काम नहीं किया तो समझ लो मेरा और तुम्हारा संबंध हमेशा के लिए खत्म.’’

इस तरह की स्थिति में अमूमन लड़कियां अपने प्रेमी से झगड़ा करने लगती हैं. वह अपने प्यार को हरगिज नहीं बंटने देती. पर रूबी न जाने कैसी घटिया सोच वाली लड़की निकली कि वह रोहित की बात मान गई. इतना ही नहीं, प्रेमी की ख्वाहिश पूरी करवाने के लिए वह दीक्षा के यहां जा पहुंची.  वह दीक्षा से रोहित के मन की बात तो कह नहीं सकती थी, पर साहस जुटा कर उस ने दीक्षा से यह जरूर कह दिया कि उस का दोस्त रोहित परीक्षा वाले दिन मिठाई और चौकलेट से उस का मुंह मीठा करा कर उसे अपनी शुभकामनाएं देना चाहता है.

दीक्षा ने इस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इस के बावजूद रूबी ने मिठाई खरीद कर उस में बेहोशी की दवा मिला दी. उस के बाद मिठाई और चौकलेट रोहित को देते हुए बोली, ‘‘वह मान तो गई है, लेकिन सिर्फ एक बार के लिए. तुम मेरे ही साथ उस के घर चलना. मैं दरवाजे पर खड़ी हो कर बाहर का ध्यान रखूंगी और तुम उस के कमरे में चले जाना.’’

रोहित खुश हो गया कि अब उस की इच्छा जल्द पूरी हो जाएगी. रूबी को पता था कि दीक्षा की वार्षिक परीक्षा शुरू हो चुकी है और मांबाप के ड्यूटी पर जाने के बाद वह अकेली ही कमरे पर रहती है. 11 मार्च, 2016 को दोपहर के 2 बजे से दीक्षा का पेपर था. उस दिन 11 बजे रूबी रोहित को ले कर दीक्षा के घर पहुंच गई. उस समय दीक्षा अकेली ही बैड पर बैठ कर पढ़ रही थी. अचानक अपनी सहेली रूबी को आया देख कर दीक्षा खुश हुई. 1-2 मिनट बात करने के बाद रूबी कमरे से बाहर चली गई. कमरे में रोहित और दीक्षा रह गए.

इधरउधर की बातें करते हुए रोहित बैड पर उस के नजदीक पहुंच गया. वह उस के साथ छेड़छाड़ करने लगा तो दीक्षा घबरा गई. उस ने उसे डांटा तो रोहित ने जबरदस्ती उस के मुंह में बेहोशी की दवा मिली मिठाई का टुकड़ा डाल दिया. थोड़ी देर में वह निढाल हो गई. इस के बाद रोहित ने उस के साथ मनमानी की. दवा का असर शायद कम था, जिस से दीक्षा थोड़ी देर में होश में आ गई. वह शोर मचाने को हुई तो रोहित ने उस का मुंह दबा लिया. उस की घुटीघुटी आवाज बाहर आ रही थी, जिसे सुन कर रूबी कमरे में आ गई.

उसे देख कर दीक्षा ने अपने मुंह से रोहित का हाथ हटा कर धमकाया कि वह इस बारे में अपने मम्मीपापा को बता कर उसे ऐसा सबक सिखाएगी कि वह याद रखेगी. इस से रूबी डर गई. उसे लगा कि अगर इस ने अपने मांबाप को यह बात बता दी तो उस की मोहल्ले में बदनामी तो होगी, साथ ही वह जेल भी जाएगी. इस से बचने के लिए रूबी ने पास पड़ा तकिया उठा कर उस के चेहरे पर रख दिया. रोहित ने दीक्षा के हाथ पकड़ लिए, जिस से वह ज्यादा विरोध नहीं कर सकी. कुछ ही देर में सांस घुटने से दीक्षा की मौत हो गई. उस वक्त वह अर्धनग्न अवस्था में थी. उसी अवस्था में वे उसे छोड़ कर चले गए.

रूबी से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसी दिन यानी 13 मार्च, 2016 को रोहित को भी हिरासत में ले लिया. रूबी चूंकि नाबालिग थी, इसलिए  उसे अगले दिन जुवेनाइल कोर्ट में पेश कर के करनाल स्थित नारी निकेतन भेज दिया गया, जबकि रोहित को कालका के प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी श्री दानेश गुप्ता की अदालत में पेश कर 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. रिमांड अवधि में पुलिस ने रोहित से विस्तार से पूछताछ की. इस के बाद उसे फिर से अदालत में पेश कर अंबाला जेल भेज दिया गया. True Crime Story

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. रूबी, दीक्षा और दीक्षा के परिजनों के नाम परिवर्तित हैं)

 

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