Social Crime Story: बेटे की चाह रखने वाले अनिल रस्तोगी ने अपने दोस्त कल्लू तांत्रिक की बातों में आ कर अपनी बेटी को उस के हवाले कर दिया था ताकि वह उस की बलि चढ़ा दे. उस ने सोचा भी नहीं था कि उस का दोस्त उस की बेटी को मारने से पहले उस के साथ दुष्कर्म भी करेगा.

सलोनी का अचानक गायब होना किसी को भी आश्चर्य में डाल सकता था. उस के मातापिता क्या पूरा गांव हैरत में था कि चंद कदम दूर सहेली के घर ट्यूशन पढ़ने गई सलोनी आखिर गई तो कहां गई? उस की सहेली का कहना था कि सलोनी उस के घर आई ही नहीं थी. घरपरिवार वाले, गांव वाले उसे ढूंढढूंढ कर थक गए थे. थाने में उस की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखा दी गई थी, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला था.

सलोनी 15 दिसंबर, 2015 की शाम को अपनी मां सारिका से यह कह कर घर से निकली थी कि वह अपनी सहेली के घर ट्यूशन पढ़ने जा रही है. उस समय उस का पिता अनिल कुमार रस्तोगी अपनी ड्यूटी पर गया था. अनिल बिलारी स्थित अजुध्या शुगर मिल्स में गन्ने की पर्ची काटने का काम करता था. सलोनी ट्यूशन पढ़ कर एक घंटे में लौट आती थी. उस दिन जब वह डेढ़ घंटे तक भी नहीं लौटी तो सारिका उस की सहेली के घर गई. सहेली ने जब यह बताया कि सलोनी वहां आई ही नहीं थी तो सारिका सन्न रह गई. वापस लौट कर उस ने पति के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो पता चला कि उस का फोन बंद है. हैरानपरेशान सारिका को कुछ भी नहीं सूझ रहा था.

रात को करीब 8 बजे जब अनिल रस्तोगी घर लौटा तो नशे में धुत था. सारिका ने उसे सलोनी के गायब होने की बात बताई तो वह बोला, ‘‘मैं तो ड्यूटी से आ रहा हूं, मुझे क्या पता? गई होगी अपनी किसी सहेली के पास, आ जाएगी.’’

नशे की वजह से अनिल रस्तोगी इस स्थिति में नहीं था कि बेटी को खोज सके. लेकिन सारिका ने उस पर दबाव डाला तो वह बेटी को खोजने निकल पड़ा. उस स्थिति में वह न तो किसी के घर जा सकता था और न ही किसी का सहयोग ले सकता था. इसलिए थोड़ी देर इधरउधर भटक कर लौट आया. सारिका ने खाना बना रखा था, वह बेताबी से बेटी का इंतजार कर रही थी. देखने से ही लगता था कि वह बेटी को ले कर बहुत परेशान है. लेकिन अनिल रस्तोगी को न तो बेटी की चिंता थी और न पत्नी की. वह खाना खा कर सो गया.

अनिल रस्तोगी के परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी थी सलोनी और एक बेटा, जो अभी काफी छोटा था. अनिल परिवार सहित अजुध्या शुगर मिल्स की वर्कर्स कालोनी में रहता था. 11 वर्षीया सलोनी स्थानीय सरकारी स्कूल में 7वीं में पढ़ रही थी. घरपरिवार में सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी 15 दिसंबर, 2015 की शाम को सलोनी गायब हो गई थी. सारिका ने वह पूरी रात जागतेजागते गुजारी. रातभर उस के दिमाग में बुरेबुरे खयाल आते रहे. जैसेतैसे सुबह हुई तो उस ने खुद घर से बाहर जा कर कालोनी के लोगों से बात की. कुछ लोगों को साथ ले कर उस ने सलोनी को ढूंढने की कोशिश भी की. यह देख कर अनिल रस्तोगी भी घर से निकल आया था.

जब सलोनी का कोई पता नहीं चला तो लोगों ने सारिका और अनिल को सलाह दी कि हाथ पर हाथ रख कर बैठने से कुछ नहीं होगा, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराओ. बात जब थाने जाने की आई तो अनिल रस्तोगी ने फोन कर के अपने जिगरी दोस्त कल्लू को भी बुला लिया. अनिल रस्तोगी अपने दोस्त कल्लू और कालोनी के कुछ लोगों के साथ स्थानीय थाना बिलारी पहुंचा. थानाप्रभारी तेजेंद्र सिंह यादव उस समय थाने में ही थे.

उन लोगों की बात सुन कर श्री यादव ने सलोनी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी, साथ ही अनिल रस्तोगी से कहा भी, ‘‘हो सकता है, लड़की नाराज हो कर कहीं चली गई हो. इसलिए उसे नातेरिश्तेदारों के यहां ढूंढो. हां, अगर आप की किसी से दुश्मनी हो या फिर किसी पर शक हो तो हमें बताओ, ताकि हम अपने हिसाब से काररवाई कर सकें.’’

अनिल रस्तोगी ने दुश्मनी या किसी पर शक होने की बात से इनकार कर दिया. गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा कर अनिल और उस के साथी लौट आए और सलोनी को ढूंढने लगे. लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उस का कोई पता नहीं चला. सलोनी की मां सारिका का मायका पीलीभीत के न्यूरिया कस्बे में था. सलोनी के गायब होने की खबर पा कर उस के मायके वाले भी आ गए थे. आसपास की अन्य रिश्तेदारियों में भी पता कर लिया गया था. सलोनी का कहीं कोई पता नहीं चल पा रहा था. इस बीच उसे गायब हुए 2 दिन बीत चुके थे.

अनिल रस्तोगी का दोस्त कल्लू बिलारी के निकटवर्ती गांव खंडऊआ का रहने वाला था. उस की पत्नी सालों पहले उसे छोड़ कर किसी और के साथ भाग गई थी. इस के बाद कल्लू ने न तो शादी की थी और न पत्नी को ढूंढने की कोशिश. इस के बजाय वह तंत्रमंत्र और झाड़फूंक करने लगा था. दोस्त होने के नाते वह अनिल रस्तोगी के घर आता रहता था. जिस दिन से सलोनी गायब हुई थी, कल्लू अनिल के साथ ही था. 17 दिसंबर की सुबह अनिल रस्तोगी ने कल्लू से कहा, ‘‘सलोनी को ढूंढढूंढ कर परेशान हो गए हैं, उस का कहीं पता नहीं चल रहा. क्यों न तंत्रमंत्र से उस का पता लगाने की कोशिश की जाए?’’

‘‘हां, तंत्र क्रियाओं से उस का पता तो लग सकता है लेकिन बिना वजह खर्चा हो जाएगा.’’ कल्लू ने अनिल रस्तोगी को समझाने के लिए कहा तो वह छूटते ही बोला, ‘‘मेरी बेटी गायब है और तुम कह रहे हो बिना वजह खर्च हो जाएगा? तुम खर्चे की चिंता मत करो, बस किसी भी तरह मेरी बेटी का पता लगाओ.’’

‘‘ठीक है, तुम जरूरत का सामान मंगा दो, मैं चौकी लगाऊंगा. इस से हमें अवश्य ही सलोनी का पता चल जाएगा.’’

अनिल रस्तोगी ने वह सारा सामान मंगवा लिया, जो कल्लू ने बताया. सामान आ गया तो कल्लू ने पूरे विधिविधान से चौकी लगाई. इस काम में अनिल रस्तोगी ने भी उस की मदद की. कल्लू का लाइव तमाशा देखने के लिए कालोनी के तमाम लोग एकत्र हो गए थे. दिन भर तांत्रिक क्रियाएं करने के बाद शाम को कल्लू ने बताया कि ईष्टदेव को प्रसन्न करने में परेशानी आ रही है, लेकिन वह जल्दी ही प्रसन्न हो जाएंगे. क्रिया पूरी होने के बाद 20 दिसंबर को सलोनी का पता चल पाएगा.

18 और 19 दिसंबर को कल्लू की तांत्रिक क्रियाएं चलती रहीं. हकीकत जानने के लिए 20 दिसंबर को सुबह से ही लोग अनिल रस्तोगी के घर जुटने लगे थे. अंतत: सुबह करीब 9 बजे अपनी तंत्र क्रियाओं में लीन कल्लू ने आंखें बंद कर के विचित्र सी आवाज में बताया, ‘‘सलोनी मर चुकी है. उस की लाश यहां से 3 किलोमीटर दूर बिचौला गांव के किसान जयपाल सिंह के गन्ने के खेत में पड़ी है.’’

उस की बात सुन कर वहां मौजूद सभी लोग चौंके. पलभर के लिए निस्तब्धता छा गई. चंद पलों की उस शांति को भंग किया सारिका के रुदन ने. अविश्वास वाली कोई बात नहीं थी. फिर भी तांत्रिक कल्लू की बातकी सच्चाई जानने के लिए लोगों का एक जत्था सलोनी की लाश की तलाश में निकल पड़ा. अनिल और कल्लू भी साथ थे. कल्लू की बात सही निकली. सलोनी की लाश जयपाल सिंह के गन्ने के खेत में ही पड़ी मिली. लोगों ने तत्काल थाना बिलारी को सूचना दी. खबर मिलते ही थानाप्रभारी तेजेंद्र सिंह यादव पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर जा पहुंचे.

लाश सड़ने लगी थी. मृतका के कपड़े देख कर अनिल रस्तोगी ने बताया कि लाश उस की बेटी सलोनी की ही है. लाश की शिनाख्त हो गई तो तेजेंद्र सिंह यादव ने मुरादाबाद के एसपी देहात प्रमोद कुमार सिंह और एसएसपी नितिन तिवारी को इस मामले की पूरी जानकारी दे दी. 11 वर्षीया बच्ची की हत्या की सूचना मिलते ही एसपी देहात प्रमोद कुमार सिंह घटनास्थल पर जा पहुंचे. उन्होंने भी अपने नजरिए से लाश का मुआयना किया. मृतका की नाक से खून निकला था, जो सूख चुका था. उस के गले पर ऐसे निशान दिख रहे थे, जैसे उस का गला घोंटा गया हो.

एसपी देहात ने मृतका सलोनी के पिता अनिल रस्तोगी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि गायब होने से पहले सलोनी कानों में सोने की बाली, नाक में सोने की लौंग और पैरों में चांदी की पायल पहने हुए थी. जबकि इन में से कोई भी चीज उस के शरीर पर नहीं थी. प्राथमिक काररवाई के बाद पुलिस ने सलोनी की लाश पोस्टमार्टम के लिए मुरादाबाद भिजवा दी. आशंका थी कि सलोनी को मौत के घाट उतारने से पहले उस के साथ दुष्कर्म किया गया था. इस के साथ ही थाना बिलारी में अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया गया.

जिलाधिकारी के आदेश पर 20 दिसंबर, 2015 की रात को ही डा. निर्मल ओझा, डा. सुजाता गौतम और डा. पवन कुमार के पैनल ने सलोनी की लाश का पोस्टमार्टम किया. पोस्टमार्टम से यह बात साफ हो गई कि सलोनी की हत्या गला घोंट कर की गई थी और यह काम उस के गायब होने वाली रात में कर दिया गया था. पोस्टमार्टम में यह भी साफ हो गया था कि मारने से पहले मृतका के साथ दुष्कर्म किया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ने के बाद एसपी (देहात) प्रमोद कुमार सिंह ने थानाप्रभारी बिलारी तेजेंद्र सिंह यादव से कहा कि वह मृतका के परिवार वालों को थाने बुला लें.

इस के बाद प्रमोद कुमार सिंह थाना बिलारी पहुंच गए. तब तक सलोनी के घर वाले आ चुके थे. प्रमोद कुमार सिंह ने मृतका की मां और पिता से विस्तृत पूछताछ की, लेकिन उन की बातों से कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था. तब प्रमोद कुमार सिंह ने थानाप्रभारी तेजेंद्र सिंह यादव से पूछा कि सलोनी की लाश खेत में पड़ी होने की सूचना किस ने दी थी? उन्होंने बताया कि सूचना मृतका के पिता अनिल रस्तोगी ने दी थी. प्रमोद कुमार सिंह ने अनिल रस्तोगी को अलग बैठा कर उस से पूछा कि उसे कैसे पता चला कि सलोनी की लाश 3 किलोमीटर दूर गन्ने के खेत में पड़ी है.

अनिल रस्तोगी ने उन्हें बताया कि जब कई दिन बीत गए तो उस ने लोगों के साथ खेतों में ढूंढना शुरू किया. इसी दौरान जब गन्ने के एक खेत से बदबू आई तो हम लोगों ने अंदर घुस कर देखा. खेत के अंदर सलोनी की लाश पड़ी थी. प्रमोद कुमार सिंह को लग रहा था कि अनिल रस्तोगी कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है. हकीकत जानने के लिए उन्होंने यही बात अकेले में अनिल की पत्नी सारिका से पूछी. सारिका ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर प्रमोद कुमार सिंह चौंके.

सारिका ने बताया कि उस का पति और उस का दोस्त कल्लू दोनों ही तांत्रिक हैं. उन दोनों ने 3 दिन तक साधना कर के अपने ईष्टदेव को प्रसन्न किया था. उसी ने 20 दिसंबर की सुबह को कल्लू को बताया कि सलोनी की लाश बिचौला गांव के जयपाल सिंह के गन्ने के खेत में पड़ी है. सोचने वाली बात यह थी कि अनिल रस्तोगी ने झूठ क्यों बोला? दूसरे यह कि अभी तक कल्लू का नाम कहीं नहीं आया था. जबकि लाश के बारे में उसी ने बताया था. अनिल रस्तोगी थाने में था ही. प्रमोद कुमार सिंह ने थानाप्रभारी तेजेंद्र सिंह यादव से कहा कि वह अपनी टीम के साथ जाएं और कल्लू को तुरंत थाने ले आएं.

कल्लू गांव खंडऊआ का रहने वाला था. पुलिस उस की तलाश में उस के गांव पहुंची तो वह शराब पी रहा था. पुलिस उसे उठा कर थाने ले आई. प्रमोद कुमार सिंह ने अनिल और कल्लू को छोड़ कर सभी को कमरे से बाहर निकाल दिया. इस के बाद उन्होंने दोनों से पूछताछ की. इस पर उन्होंने बताया कि वे दोनों सिद्ध तांत्रिक हैं और उन्होंने अपनी तंत्रविद्या से लाश का पता लगाया था. जाहिर है, यह बात किसी के गले उतरने वाली नहीं थी. प्रमोद कुमार सिंह ने दोनों से मनोवैज्ञानिक ढंग से पूछताछ की. थोड़ी सख्ती भी की गई. इस के बावजूद दोनों खुद को निर्दोष बताते रहे. लेकिन पुलिस के सामने दोनों कब तक जुबान बंद रख सकते थे. उन्होंने प्रमोद कुमार सिंह को जो कुछ बताया, उसे सुन कर वह भी हैरत में रह गए.

हैरान अनिल रस्तोगी भी था, क्योंकि उसे यह तो पता था कि सलोनी की हत्या कर दी गई है, पर यह मालूम नहीं था कि हत्या से पहले उस के साथ दुष्कर्म भी किया गया था. बहरहाल, उन से पूछताछ के बाद जो हकीकत सामने आई, वह कुछ इस प्रकार थी. 17-18 साल पहले अनिल रस्तोगी की शादी पीलीभीत के कस्बा न्यूरिया की रहने वाली सारिका से हुई थी. शादी के 7 साल बाद तक सारिका मां नहीं बन सकी तो अनिल रस्तोगी ने कई तरह के नुस्खे आजमाए. डाक्टर से इलाज भी कराया. आखिरकार सारिका बेटी की मां बन गई. बेटी का नाम रखा गया सलोनी.

3 साल पहले सलोनी जब 8 साल की थी तो सारिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया. लेकिन जन्म के 14 दिनों बाद ही संदिग्ध परिस्थितियों में उस की मौत हो गई. दरअसल, हुआ यह था कि सारिका बच्ची को दूध पिलाने के बाद सुला कर नहाने चली गई थी. बच्ची को ठंड न लगे, यह सोच कर उस ने उसे ठीक से सारिका ने नहाने के बाद बच्ची को देखा तो वह मरी पड़ी थी. नवजात बेटी की मौत के एक साल बाद सारिका फिर मां बनी. इस बार उस ने बेटे को जन्म दिया. बेटे के जन्म से अनिल रस्तोगी और सारिका दोनों ही खुश थे.

पिछले 38 सालों से अनिल रस्तोगी की दोस्ती खंडऊआ गांव के रहने वाले कल्लू से थी. दोनों साथ उठतेबैठते, खातेपीते तो थे ही, एकदूसरे के घर भी आतेजाते थे. कल्लू शादीशुदा था. शादी के कुछ दिनों बाद कल्लू को हरियाणा के जिला झज्जर स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम मिल गया था. कुछ दिन काम कर के जब उस का मन रम गया तो वह अपनी पत्नी को भी झज्जर ले आया. वहीं रहते उस की पत्नी एक अन्य मजदूर के प्रेमजाल में फंस गई. बाद में वह कल्लू का दामन छोड़ कर उसी मजदूर के साथ भाग गई.

पत्नी के चले जाने के बाद कल्लू अपने गांव लौट आया और तंत्रमंत्र और झाडफूंक से लोगों का इलाज करने लगा. वह खुद को सिद्धहस्त (डिग्रीधारी) तांत्रिक बताता था. उसे यह काम कुछ ऐसा रास आया कि उसे इस के अलावा कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ी. अनिल रस्तोगी अपने 38 साल पुराने इस दोस्त की तंत्रविद्या से कुछ ज्यादा ही प्रभावित था. इसलिए वह उसे अकसर अपने घर लाता रहता था.

3 साल पहले जब सारिका दूसरी बेटी की मां बनी थी तो अनिल रस्तोगी ने बेटे की चाहत की बात उसे बताई थी. कल्लू ने कुछ तांत्रिक क्रियाएं करने के बाद उसे बताया था कि वह अपनी छोटी बेटी की बलि चढ़ा दे तो अगली बार बेटा होगा. उस के कहने पर अनिल रस्तोगी ने अपनी 14 दिन की बच्ची का गला दबा कर उसे उस समय मौत के घाट उतार दिया था, जब उस की पत्नी बेटी को सुला कर नहाने गई हुई थी. सारिका को पति पर शक भी हुआ था, लेकिन चाह कर भी यह बात मुंह से नहीं निकाल सकी थी. इसे इत्तफाक ही कहेंगे कि अगली बार जब सारिका मां बनी तो उसे बेटा हुआ.

अनिल रस्तोगी ने इस का सारा श्रेय कल्लू की तांत्रिक क्रियाओं को दिया. उस ने यह बात सारिका को भी बताई कि कल्लू ने उसे 8 महीने पहले ही बता दिया था कि बेटा होगा. अनिल रस्तोगी की बेटी सलोनी 11 साल की हो चुकी थी. वह 7वीं कक्षा में पढ़ रही थी. किशोरावस्था से गुजर रही सलोनी के शरीर में स्त्रियोचित लक्षण नजर आने लगे थे. कल्लू उसे बुरी नजर से देखता था. कई बार उस ने बहाने से उस के शरीर का स्पर्श करने की भी कोशिश की थी. यह बात सारिका से छिपी नहीं थी.

कहते हैं, स्त्रियों में पुरुष की कामुक नजरों को पहचानने की क्षमता होती है. सारिका को जब लगा कि कल्लू की नजर सलोनी पर है तो उस ने अपने पति अनिल से कहा कि वह कल्लू का घर में आनाजाना बंद करा दे. लेकिन उस ने इसे सारिका का वहम बता कर बात खत्म कर दी. अलबत्ता कल्लू को इस बात का पता जरूर चल गया था कि सारिका को उस का घर में आनाजाना पसंद नहीं है.

इधर सारिका फिर से गर्भवती हो गई थी. अनिल रस्तोगी ने यह बात कल्लू को बता कर कहा कि वह इस बार भी बेटा चाहता है. दोस्त के मुंह से यह बात सुन कर कल्लू बोला, ‘‘बेटा तो मिल जाएगा, लेकिन इस के लिए तुम्हें अपनी बेटी सलोनी को मौत के घाट उतारना होगा. वैसे भी तुम्हारी बेटी तुम्हारे लिए ठीक नहीं है. वह गलत नक्षत्र में पैदा हुई थी, इसलिए तुम पर भारी है. उस की वजह से तुम्हारी मौत भी हो सकती है.’’

अनिल रस्तोगी कल्लू पर आंखें बंद कर के विश्वास करता था. वह सलोनी को मौत के घाट उतारने को तैयार हो गया. इस के बाद दोनों ने मिल कर सलोनी को मौत के घाट उतारने का तानाबाना बुन लिया. इस के लिए तारीख तय हुई 15 दिसंबर, 2015. सलोनी हर रोज शाम के समय अपनी सहेली के घर ट्यूशन पढ़ने जाती थी. 15 दिसंबर को जब वह ट्यूशन पढ़ने जाने के लिए घर से निकली तो गली में उसे उस का पिता अनिल मिल गया. उस दिन साप्ताहिक बाजार का दिन था. अनिल रस्तोगी ने सलोनी से कहा, ‘‘बेटी, ट्यूशन थोड़ी देर से या कल पढ़ लेना. घर का कुछ सामान खरीदना है, मेरे साथ बाजार चल. तुझे भी कुछ लेना हो तो खरीद दूंगा.’’

सलोनी पिता की बातों में आ कर साथ चल दी. थोड़ी दूर आगे कल्लू मिल गया तो अनिल ने उसे भी साथ ले लिया. सलोनी उन दोनों की दोस्ती को जानती थी, इसलिए उसे कोई संदेह नहीं हुआ. जब अनिल और कल्लू सलोनी को बाजार की ओर न ले जा कर दूसरे रास्ते पर ले जाने लगे तो उस ने पूछा, ‘‘इधर तो बाजार नहीं है, आप कहां ले जा रहे हैं मुझे?’’

इस पर अनिल ने पहले सोचासमझा, फिर जवाब दिया, ‘‘मुझे बिचौला गांव के एक आदमी से पैसे लेने हैं. उस से पैसे ले कर फिर बाजार चलेंगे.’’

सलोनी ने पिता की बात पर विश्वास कर लिया. उस समय तक शाम ढल चुकी थी. लोगों का आवागमन भी बंद हो चुका था. 2-ढाई किलोमीटर चलने के बाद अनिल रस्तोगी ने सलोनी और कल्लू से कहा, ‘‘तुम दोनों यहीं ठहरो, मैं पैसे ले कर आता हूं. मेरी फोन पर बात हो गई है, जिस से पैसे लेने हैं, वह गांव के बाहर मेरा इंतजार कर रहा है.’ अनिल रस्तोगी बेटी सलोनी और कल्लू को बीच रास्ते में छोड़ कर चला गया. सलोनी बच्ची थी, उसे दुनियादारी की समझ नहीं थी. कल्लू की गलत नजर की भी उसे कोई जानकारी नहीं थी. वैसे भी वह उसे ताऊ कहती थी.

आधा घंटा बीत गया. अंधेरा घिरने में ज्यादा देर नहीं थी. जबकि अनिल अभी तक नहीं लौटा था. सही मौका और वक्त देख कल्लू ने सलोनी से कहा, ‘‘तेरा बाप तो अब तक आया नहीं. चल, चल कर गन्ना खाते हैं. इंतजार तो करना ही पड़ेगा.’’

अच्छा गन्ना लाने के बहाने कल्लू सलोनी को गन्ने के खेत में ले गया. अंदर जा कर जब उस ने सलोनी को दबोचा तो वह चिल्लाई, ‘‘ताऊ, यह क्या कर रहे हो…मुझे छोड़ दो.’’

सलोनी रोईगिड़गिड़ाई, गुहार लगाई, लेकिन कल्लू उस वक्त दरिंदा बना हुआ था. उस ने पहले सलोनी के साथ दुष्कर्म किया और फिर गला दबा कर उस की हत्या कर दी. जब वह मर गई तो कल्लू ने उस के कानों की सोने की बालियां, नाक की लौंग और पैरों की पायल निकाल कर अपनी जेब में डाल लीं. सलोनी को ठिकाने लगा कर वह बिलारी के गांधी मूर्ति चौक पर पहुंचा. वहां अनिल रस्तोगी पहले से ही उस का इंतजार कर रहा था. कल्लू ने सलोनी को ठिकाने लगाने की बात उसे बता दी. उस के साथ दुष्कर्म की बात को वह दबा गया.

इस के बाद दोनों दोस्तों ने गांधी चौराहे के पास वाले ठेके पर जा कर शराब पी. पीनेपिलाने के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए. घर पर सारिका ने जब सलोनी के लापता होने की बात अनिल को बताई तो उस ने उसे ढूंढने का थोड़ा सा नाटक किया. जबकि वह हकीकत जानता था. अनिल रस्तोगी और कल्लू के मुंह से हकीकत जानने के बाद पुलिस ने इस केस में भादंवि की धारा 302 के साथसाथ 364 और 201 और जोड़ दी. दोनों अभियुक्तों को विधिवत गिरफ्तार कर के पुलिस ने उन्हें अदालत पर पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

अंधविश्वास की वजह से सलोनी की तो जान गई ही, अनिल को भी जेल जाना पड़ा. अब उस की पत्नी छोटे से बेटे के साथ अकेली रह गई है. Social Crime Story

—कथा में सलोनी नाम परिवर्तित है

 

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