Love Crime: सीमा ने 10 साल पहले भाग कर दूसरी जाति के रामू के साथ प्रेम विवाह कर लिया था. वह उस के साथ सुखी तो थी ही, उस के 2 बच्चों की मां भी बन गई थी. इतने दिनों बाद भी घर वाले उस के इस प्रेम को बरदाश्त नहीं कर सके और…
अमित ने जीजा के पैर छूते हुए उन का उखड़ा मूड देख कर पूछा, ‘‘क्या बात है जीजाजी, आजआप कुछ नाराज से लग रहे हैं?’’
‘‘नाराजगी की वजह तुम अच्छी तरह जानते हो अमित. 10 साल से हम जिस आग में जल रहे हैं, वह तुम्हें बताने की जरूरत नहीं है.’’
अमित ने बहनोई को समझाने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘जीजाजी, बात काफी पुरानी हो चुकी है, इसलिए अब तो उसे भूल जाना चाहिए.’’
लेकिन जगदीश उस बात को भुलाना नहीं चाहता था, इसलिए उस ने कहा, ‘‘अगर तुम्हारी जगह मैं होता तो परिवार की उस बेइज्जती का बदला ले कर रहता.’’
जगदीश की इस बात से अमित सोच में पड़ गया. उस की बहन सीमा ने जो किया था, क्या वह इतना बड़ा अपराध था कि उस के लिए जीजाजी जो कह रहे हैं, क्या वह उचित है? अमित उर्फ भूरा 23 साल का हो गया था. जब उस की बहन सीमा ने दूसरे जाति के लड़के से शादी कर के घर छोड़ा था, तब वह 10-11 साल का था. खटीक जाति का गंगा सिंह एटा जिले के थाना रिजोर के गांव इब्राहीमपुर में रहता था. उसी का बेटा था अमित. उस के अलावा गंगा सिंह की 4 बेटियां थीं ममता, यशोदा, रमा और सीमा. परिवार बकरियों की खरीदफरोख्त का काम करता था. इस धंधे में इतनी कमाई हो जाती थी कि जिंदगी मजे से चल रही थी.
गंगा सिंह के घर से कुछ ही दूरी पर कुम्हार जाति का काशीराम रहता था. उस के 2 बेटे थे रामू और पुष्पेंद्र. पुष्पेंद्र की शादी रीना से हो गई थी, जबकि रामू अविवाहित था. पड़ोसी होने के नाते गंगा सिंह और काशीराम का एकदूसरे के यहां खूब आनाजाना था. इसी आनेजाने में गंगा सिंह की बेटी सीमा और काशीराम का बेटा रामू एकदूसरे को दिल दे बैठे थे.
सीमा खूबसूरत और हमेशा खुश रहने वाली लड़की थी तो रामू जवान और कामकाजी लड़का था. सीमा उसी जैसे पति के सपने देखती थी. इसीलिए वह जब भी रामू को देखती, उस का दिल धड़क उठता. रामू पढ़ालिखा भी था, जबकि सीमा की जाति में पढ़ेलिखे लड़के कम ही मिलते थे. इस तरह सीमा मन ही मन उसे चाहने लगी थी.
सीमा गांव की अन्य लड़कियों से थोड़ा अलग थी, इसलिए वह लड़कों में आकर्षण का केंद्र थी. लेकिन किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी कि कोई उसे कुछ कह दे. एक दिन सीमा खेतों में बकरियों का चारा लेने गई. वह चारे का बोझ उठाने के लिए इधरउधर देख रही थी. तभी रामू न जाने कहां से आ गया. सीमा ने उसे इशारे से बुलाया तो उस ने पास आ कर कहा, ‘‘सीमा, तुम इतना बड़ा बोझ उठा ले जाओगी?’’
सीमा ने तिरछी नजरों से उसे देखते हुए कहा, ‘‘अब तुम आ गए हो तो इसे संभालोगे नहीं?’’
रामू ने सीमा की आंखों में झांका तो उन में उसे कुछ ऐसा दिखाई दिया, जो उसे अपनी ओर खींच रहा था. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘इस बोझ को तो मैं हंसतेहंसते जीवन भर संभालने को तैयार हूं.’’
‘‘अच्छा, तुम्हें खुद पर इतना गुमान है?’’
‘‘अगर अच्छी सूरत मेरे ऊपर इस तरह मेहरबान है तो मुझे गुमान होगा ही.’’ कह कर रामू ने बोझ उठा लिया.
सीमा ने हैरानी से कहा, ‘‘लाओ, बोझ मुझे दे दो, गांव के किसी ने देख लिया तो बिना मतलब की बातें होंगी.’’
‘‘पड़ोसी पड़ोसी की मदद नहीं करेगा तो और कौन करेगा?’’ रामू ने कहा.
‘‘रामू, बहुत दिनों से मैं तुम से एक बात कहना चाहती हूं.’’
‘‘तो आज कह डालो.’’
‘‘तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो. क्या मैं भी तुम्हें अच्छी लगती हूं?’’
रामू सोच में पड़ गया. अच्छे लगने का मतलब वह अच्छी तरह से समझता था. उस के दिमाग में तुरंत आया कि अगर इस बात की जानकारी खटीकों को हो गई तो बवाल हो जाएगा. वह कुछ कहता, उस के पहले ही सीमा ने अपना हाथ बढ़ा कर कहा, ‘‘मेरा हाथ थाम लो रामू, मैं सिर्फ तुम्हारी हूं.’’
रामू की रगों में जवानी का खून था. वह भी सीमा को पसंद करता था. सीमा के स्पर्श से वह आवेश में आ गया. उस ने सीमा का हाथ थाम कर कहा, ‘‘लो हाथ थाम लिया, अब तुम मेरी हो. मैं जीवन भर तुम्हारा यह हाथ नहीं छोड़ूंगा. इस के लिए मुझे चाहे जो भी करना पड़े.’’
उस दिन दोनों ने एकदूसरे को मन और वचन से अपना तो लिया, लेकिन उन्हें पता था कि उन के प्यार की राह में जाति एक ऐसी बाधा है, जिसे पार करना आसान नहीं होगा. इस के बावजूद उन्होंने प्यार ही नहीं किया, उसे आजीवन निभाने का निर्णय भी ले लिया. रामू को पता था कि शादी के लिए न तो उस के घर वाले राजी होंगे और न सीमा के. इसलिए वह पैसे इकट्ठे करने लगा कि अगर सीमा के साथ उसे घर छोड़ना पड़े तो उस के पास इतने पैसे होने चाहिए कि वह कहीं भी व्यवस्थित हो सके. अगर हाथ में पैसा रहेगा तो वह कहीं भी रह लेगा.
सीमा की 3 तीनों बड़ी बहनों की शादी हो चुकी थीं. सब से बड़ी बहन ममता डुड़ला में जगदीश के साथ ब्याही थी. वह फूल बेचने का काम करता था. सीमा के घर वालों को उस के और रामू के प्यार का पता नहीं चल पाया, लेकिन न जाने कहां से उस के जीजा जगदीश को इस बात की जानकारी हो गई. उस ने ससुराल आ कर सासससुर को खूब खरीखोटी सुनाते हुए कहा, ‘‘तुम लोग एक लड़की नहीं संभाल सके. दूसरे गांव में रह कर मुझे पता चल गया कि सीमा रामू कुम्हार के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है और तुम लोग हो कि आंखें मूंदे बैठे हो.’’
दामाद की बात पर गंगा सिंह के कान खड़े हो गए. उस ने सीमा से पूछा तो उस ने मना करते हुए कहा कि जीजाजी उस पर झूठा इल्जाम लगा रहे हैं, वह रामू से बाहर कभी नहीं मिली. दामाद की बात को गंगा सिंह और निर्मला ने भले ही गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन उन की समझ में यह बात जरूर आ गई थी कि बेटी जवान हो चुकी है, अब इस का ब्याह कर देना चाहिए. उस के लिए लड़के की खोज तो शुरू ही हो गई, उस पर नजर भी रखी जाने लगी.
जबकि जगदीश ने यह दांव चल कर कुछ दूसरा ही सोचा था. वह सीमा की शादी अपने छोटे भाई से करवाना चाहता था. उसे सीमा की ऐसी कमी मिल गई थी, जिस की बदौलत वह सासससुर को बदनामी का डर दिखा कर मौके का फायदा उठाना चाहता था. दरअसल, उस का भाई शराबी और जुआरी तो था ही, कोई कामधंधा भी नहीं करता था. इसलिए सीमा के घर वाले इस रिश्ते के लिए जल्दी तैयार नहीं होते.
मौके का फायदा उठाने के लिए एक दिन जगदीश ससुराल आया और सासससुर से बदनामी की बात कह कर उस ने सीमा की शादी अपने भाई से करने को कहा तो उस की बातें सुन कर सीमा ने गुस्से में कहा, ‘‘जीजा, तुम ने सोच कैसे लिया कि मैं तुम्हारे उस आवारा भाई से शादी कर लूंगी.’’
गंगा सिंह और निर्मला सन्न रह गए. रामू और सीमा के मिलनेजुलने की बात भले ही उन्हें बरदाश्त नहीं थीं, लेकिन वे सीमा की शादी जगदीश के भाई से भी नहीं करना चाहते. उन्होंने दामाद को यह कह कर चुप करा दिया कि इस मामले पर फिर कभी बात करेंगे. सीमा सब कुछ समझ चुकी थी. वह रामू से मिली और उस से साफसाफ कह दिया कि जो भी करना है, जल्दी करो, वरना किसी दिन जगदीश अपने भाई से उस की शादी करा देगा.
गांव में रहते रामू और सीमा की शादी हो नहीं सकती थी. इसलिए एक दिन रामू ने सीमा के साथ गांव छोड़ दिया. पैसे उस ने जमा ही कर रखे थे. वह सीमा को ले कर हरियाणा के शहर पानीपत आ गया और कमरा किराए पर ले कर सीमा के साथ रहने लगा. उस ने सीमा के साथ मंदिर में शादी भी कर ली थी. गुजरबसर के लिए उस ने एक फैक्ट्री में नौकरी भी कर ली थी. इस तरह रामू और सीमा ने जातिबिरादरी के पचड़ों से दूर आ कर अपनी अलग दुनिया बसा ली थी.
लेकिन दूसरी ओर वे जिस दुनिया को छोड़ आए थे, वहां आग लग चुकी थी. सब से ज्यादा नाराज जगदीश था. उस ने पहले तो सासससुर की खूब लानतमलानत की, उस के बाद ससुर को साथ ले कर थाना रिजोर पहुंचा और रामू के खिलाफ सीमा को भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने जितना हो सकता था, रामू के घर वालों को तो परेशान किया ही, कुरकी तक कर डाली, पर रामू और सीमा का कुछ पता नहीं चला. पता चलता भी कैसे, रामू ने घर छोड़ने के बाद उधर झांका ही नहीं. सब कुछ भुला कर रामू और सीमा अपनी दुनिया में खुश थे. उन्होंने घर वालों से पूरी तरह संबंध तोड़ लिए थे. सीमा ने देव को जन्म दिया तो दोनों बेटे के साथ अपनी दुनिया में मस्त हो गई.
लेकिन सीमा के घर वाले उस की इस हरकत को पचा नहीं पा रहे थे. इस की एक वजह यह थी कि बिरादरी वाले सीमा के घर वालों को अपमानित करते रहते थे. सीमा जब घर से भागी थी, तब अमित काफी छोटा था. लेकिन जब वह बड़ा हुआ और बहन के भागने की बात समझ में आई तो उसे लगा कि बहन ने दूसरी जाति के लड़के ताने मार कर के साथ भाग कर अच्छा नहीं किया. रहीसही कसर जगदीश पूरी कर देता था.
एक दिन अचानक गांव में यह बात फैल गई कि रामू, सीमा और बच्चे के साथ फिरोजाबाद में रह रहा है. अमित की नफरत भड़क उठी, लेकिन गंगा सिंह और निर्मला ने उसे समझाया कि जब सीमा रामू के साथ खुश है तो अब उन्हें सब कुछ भुला देना चाहिए. मांबाप के समझाने पर अमित रामू से मिलने गया तो रामू ने उसे गले लगा लिया. इस से अमित को लगा कि रामू इतना बुरा नहीं है, जितना जगदीश उसे बताता रहा है.
इस के बाद सीमा की बहनें भी उस के यहां आनेजाने लगीं. लेकिन रामू ने कभी किसी पर विश्वास नहीं किया. यही वजह थी कि वह सीमा और बेटे को ले कर कभी गांव नहीं गया. उसी बीच बेटी तनु पैदा हुई. अब उन के 2 बच्चे हो गए थे. सब ठीक हो गया था, लेकिन जगदीश के कलेजे की आग अभी तक ठंडी नहीं हुई थी. वह रामू को खत्म कर के सीमा की शादी अपने भाई से करवा कर अपनी उस आग को ठंडी करना चाहता था. इस के लिए वह अमित को अपने साथ मिलाना चाहता था. यही वजह थी कि मौका मिलने पर वह उसे भड़काता रहता था.
एक दिन जगदीश भी सीमा के घर जा पहुंचा. जीजा का आना सीमा को अच्छा नहीं लगा, लेकिन घर आए मेहमान को वह भगा भी नहीं सकती थी. बातचीत में जगदीश ने जब कहा कि उस की वजह से समाज में उन की बड़ी बदनामी हुई है, अगर वह चाहे तो अभी भी सब ठीक हो सकता है. इस पर सीमा ने पूछा कि वह कैसे तो जगदीश ने कहा, ‘‘हम रामू को ठिकाने लगा कर तुम्हारी शादी अपने भाई से करवा देंगे. इस तरह तुम्हारा घर भी बस जाएगा और समाज में हमारी इज्जत भी वापस आ जाएगी.’’
‘‘तो अभी तक तुम्हारे भाई की शादी नहीं हुई? वैसे भी उस आवारा से शादी करेगा ही कौन? जीजाजी, अच्छा यही होगा कि अब तुम चुपचाप यहां से निकल लो, वरना मुझ से बुरा कोई नहीं होगा. एक बात और, अगर किसी ने मेरे पति पर बुरी नजर डाली तो मैं उसे छोड़ूंगी नहीं.’’
जगदीश साली से बेइज्जत हो कर चला तो आया, लेकिन उस ने तय कर लिया कि वह उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा. इस के बाद उस ने रामू को कई बार ठिकाने लगाने की कोशिश की, लेकिन हर बार रामू बच गया.
अब सीमा उस के निशाने पर थी. उस ने सीमा के मौसेरे भाई अशोक और अमित को भड़काना शुरू किया. उस की बातों में आ कर अमित को भी लगने लगा कि सीमा ने जो किया है, उस से उस के परिवार की बड़ी बेइज्जती हुई है, इसलिए उसे जिंदा रहने का हक नहीं. आखिर सब ने मिल कर सीमा के नाम मोत का फरमान जारी कर दिया. रामू फिरोजाबाद के किशननगर में वीरपाल यादव के मकान में किराए पर रहता था.
10 अक्तूबर, 2015 की शाम 4 बजे सीमा ने मकान मालकिन राजबेदी से कहा कि भाई का फोन आया है कि मां की तबीयत बहुत खराब है, इसलिए वह आसफाबाद चौराहे पर उस का इंतजार कर रहा है. वह उस के साथ मां को देखने अस्पताल जा रही है. इस के बाद सीमा अपने 8 साल के बेटे देव और 4 साल की बेटी तनु को ले कर चली गई. आसफाबाद चौराहे पर अमित थ्री व्हीलर लिए खड़ा था. वह सीमा और बच्चों को उस पर बैठा कर इधरउधर घुमाने और लगा. शाम होने लगी तो सीमा ने कहा, ‘‘जल्दी करो, मुझे घर भी जाना है.’’
अमित ने किसी को फोन किया तो थोड़ी ही देर में एक कार उस के पास आ कर रुकी. उस में से जगदीश और अशोक उतरे तो सीमा को शक हुआ. उस ने बच्चों के साथ भागना चाहा तो तीनों ने मारपीट कर बच्चों के साथ उसे कार में बैठाया और जंगल की ओर चल पड़े. अगले दिन थाना नारखी के उमरगढ़ से कुतुबपुर जाने वाले रास्ते पर खेतों के बीच पड़ने वाले एक कुएं में कुछ बच्चों ने एक महिला और 2 बच्चों की लाशें देखीं. शाम का समय था, लोग पंचायत चुनाव में वोट डाल कर लौट रहे थे.
बच्चों ने उन्हें कुएं में 3 लाशें पड़ी होने की बात बताई तो वे कुएं के पास पहुंचे. पुलिस को सूचना दे कर 2 लोग कुएं में उतर गए. नीचे जाने पर पता चला कि औरत और लड़की तो मर चुकी थी, जबकि लड़के की सासें चल रही थीं. उन्होंने लड़के को बाहर निकाला. तब तक पुलिस भी पहुंच गई थी. इंसपेक्टर श्रवण कुमार राणा ने बच्चे को तुरंत जिला अस्पताल भिजवाया. उस के बाद उन्होंने लाशें निकलवाईं. लाशों की शिनाख्त नहीं हो सकी, जिस से अंदाजा लगाया गया कि मृतक यहां के रहने वाले नहीं थे.
दूसरी ओर शाम को रामू घर पहुंचा तो जब मकान मालकिन ने बताया कि सीमा के भाई का फोन आया था और वह बच्चों को ले कर अपनी मां को देखने अस्पताल गई है तो वह सिर थाम कर बैठ गया. उस ने सीमा को फोन किया तो उस का फोन बंद था. उस ने भाई को फोन किया तो पता चला कि गंगा सिंह के घर में ताला लगा है. रामू समझ गया कि कुछ अनहोनी हो गई है. 13 अक्तूबर के अखबार में जब 2 लाशें और एक बेहोश बच्चे के कुएं में मिलने की खबर छपी तो खबर पढ़ कर रामू के पैरों तले की जमीन खिसक गई. वह जिला अस्पताल पहुंचा तो बेटे को देख कर सन्न रह गया. उस ने रोरो कर पुलिस को बताया कि बेहोश बच्चा उस का बेटा है.
इस के बाद पोस्टमार्टम में रखी महिला और बच्ची की लाशों की शिनाख्त उस ने अपनी पत्नी और बेटी के रूप में कर दी. रामू की दुनिया लुट चुकी थी. देव को होश आया तो उस ने सारी बात बता दी. उस के बाद अपराध संख्या 958/15 पर भादंवि की धारा 302, 307, 201 के तहत जगदीश, अशोक और अमित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया.
जगदीश को उसी दिन उस के घर से गिरफ्तार कर लिया गया. उस की गिरफ्तारी की खबर पा कर अमित और अशोक गांव छोड़ कर भाग गए. 9 जनवरी को नए थानाप्रभारी जसपाल सिंह पंवार ने अमित को दिल्ली के गोविंदपुरी से गिरफ्तार कर लिया, लेकिन अशोक कथा लिखे जाने तक पकड़ा नहीं जा सका था. अमिल और जगदीश अपने किए की भले ही सजा पा जाएं, लेकिन उस से रामू की उजड़ी दुनिया तो अब बस नहीं सकती.
अमित का कहना था कि उसे अपनी बहन और उस के बच्चों को मारने का जरा सा भी अफसोस नहीं है, क्योंकि उस की वजह से गांव में उन लोगों की जो बदनामी हुई थी, उस के लिए यही उचित था. Love Crime
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






