Illegal Relationship: प्रदीप उपाध्याय जिस राह पर चल रहा था, वह जहरीले कांटों से भरी हुई थी. प्रेमिका का भाई हिस्ट्रीशीटर है, यह जानने के बाद उसे राधिका से संबंध तोड़ लेने चाहिए थे, लेकिन उस ने जानबूझ कर जो किया उसे तो घातक साबित होना ही था.

उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती के थाना पुरानी बस्ती के थानाप्रभारी रणधीर मिश्र अपने औफिस में बैठे थे, तभी संधौली गांव के चौकीदार बाबूलाल ने उन्हें फोन कर के बताया कि गोरखपुरलखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर डुमरियागंज जाने वाली सड़क के पास एक युवक की लाश पड़ी है. उस की हत्या शायद कहीं और कर के लाश यहां ला कर फेंक दी गई है. जवाब में रणधीर मिश्र ने कहा, ‘‘बाबूलाल, जब तक मैं वहां नहीं पहुंच जाता, तुम लाश के पास रुको. और हां, एक बात का खास खयाल रखना, लाश के पास किसी को जाने मत देना.’’

रणधीर मिश्र ने इस मामले की सूचना पुलिस अधिकारियों को दी और खुद सहयोगियों को साथ ले कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. घटनास्थल पर पहुंच कर पहले उन्होंने वहां मौजूद भीड़ को हटाया, उस के बाद लाश का निरीक्षण करने लगे. मृतक 23-24 साल का नौजवान था. उस के शरीर पर नीले रंग की टीशर्ट, जींस और पैरों में जूते थे. शिनाख्त के लिए लाश की तलाशी ली गई तो उस के पास ऐसी कोई चीज नहीं मिली, जिस से उस की शिनाख्त हो पाती.

युवक की हत्या गला दबा कर की गई थी. उस के गले पर रस्सी के निशान स्पष्ट नजर आ रहे थे. स्थितियां यही बता रही थीं कि युवक की हत्या कहीं और कर के लाश यहां ला कर फेंकी गई थी. चूंकि मृतक नौजवान था, इसलिए पुलिस को मामला अवैध संबंधों में हत्या का लगा. घटनास्थल की सारी जरूरी काररवाई पूरी कर के रणधीर मिश्र ने लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. इस के बाद थाने आ कर उन्होंने चौकीदार बाबूलाल की ओर से हत्या के इस मामले को भादंवि की धारा 302, 201 के तहत अज्ञात के खिलाफ दर्ज करा दिया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो गया कि हत्या रस्सी से गला घोंट कर की गई थी. परेशानी यह थी कि 2 दिन बीत जाने के बाद भी मृतक की शिनाख्त नहीं हुई थी. दूसरी ओर घटना का खुलासा करने के लिए एसपी जटाशंकर सिंह ने सीओ पंकज सिंह की देखरेख में थानाप्रभारी रणधीर मिश्र, सबइंसपेक्टर मोहम्मद शहाबुद्दीन, प्रशिक्षण के लिए आए एसआई दिनेश सरोज, अरविंद कुमार राय, सिपाही योगेंद्र, रामपाल, इंद्रेश यादव, गिरजेश यादव और राहुल सिंह की एक टीम गठित कर दी थी. इस पुलिस टीम ने युवक की शिनाख्त के लिए जिले के अन्य थानों की पुलिस को मृतक की फोटो भेज कर शिनाख्त की कोशिश की, लेकिन कहीं से भी मृतक के बारे में कोई सूचना नहीं मिली.

इस के बाद रणधीर मिश्र ने मृतक की शिनाख्त के लिए बड़ेबड़े पोस्टर छपवा कर जगहजगह चिपकवाए और उस की कौपी व्हाट्सएप, फेसबुक इलेक्ट्रौनिक और प्रिंट मीडिया के माध्यम से बस्ती समेत कई जनपदों में प्रसारित कराए. यही नहीं, कुछ पोस्टर उन्होंने बसों व ट्रेनों में भी चिपकवाए. 25 मार्च, 2016 को जिला अंबेडकरनगर के गांव नूनशिला के रहने वाले चंद्रमणि उर्फ ननकू किसी काम से बस्ती आए थे. उन्होंने बस स्टेशन पर लगे पोस्टर को देखा तो उन्हें लगा कि यह उन के रिश्तेदार प्रदीप उपाध्याय की फोटो है. इस की वजह यह थी कि उन के रिश्तेदार कृष्णदेव उपाध्याय का बेटा प्रदीप उपाध्याय करीब 20 दिनों से गायब था.

उन्होंने गोरखपुर के थाना में इस बात की रिपोर्ट भी दर्ज करा रखी थी. गोरखपुर में रिपोर्ट दर्ज कराने की वजह यह थी कि प्रदीप गोरखपुर में रह कर आईटीआई कर रहा था. चंद्रमणि ने तुरंत कृष्णदेव उपाध्याय को फोन कर के बताया कि बस्ती जिले के बस स्टेशन पर शिनाख्त के लिए एक युवक का फोटोयुक्त पोस्टर चिपकाया गया है, जिस में छपा फोटो उन्हें उन के बेटे प्रदीप का लग रहा है. संयोग से यह घटना उन के बेटे के गायब होने के एक दिन बाद की है. कृष्णदेव उपाध्याय को उस पोस्टर के बारे में पता चला तो वह अपने परिवार के कुछ लोगों और रिश्तेदारों के साथ बस्ती के बस स्टेशन पर जा पहुंचे.

पोस्टर देखते ही उन लोगों ने उस में छपी फोटो की शिनाख्त प्रदीप कुमार उपाध्याय के रूप में कर दी. इस के बाद सभी लोग रोतेबिलखते थाना पुरानी बस्ती पहुंचे, जहां उन्होंने थानाप्रभारी रणधीर मिश्र को बताया कि जो पोस्टर बस्ती के बस स्टेशन पर चिपकाए गए हैं, उस में छपा फोटो उन के बेटे प्रदीप उपाध्याय का है. रणधीर मिश्र ने उन लोगों को मृतक के कपड़े और जूते दिखाए तो उन्हें देख कर यह बात साफ हो गई कि मृतक मूलरूप से फैजाबाद का रहने वाला था और उस ने गोरखपुर में एल्युमिनियम फैक्ट्री के पास किराए का कमरा ले रखा था. वहीं रहते हुए वह आईटीआई कर रहा था. 8 मार्च को बस्ती में चैनपुरवा ओवरब्रिज के नीचे से जो लाश मिली थी, वह प्रदीप कुमार उपाध्याय की ही थी.

मृतक की शिनाख्त तो हो गई, लेकिन पुलिस के लिए अब भी इस हत्याकांड का पर्दाफाश करना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि हत्यारों ने कोई ऐसा सबूत नहीं छोड़ा था, जिस के आधार पर पुलिस हत्या के कारणों का पता लगा कर हत्यारों तक पहुंच पाती. लाश की शिनाख्त के बाद पुलिस टीम गोरखपुर की एल्युमिनियम फैक्ट्री के पास स्थित मृतक प्रदीप के किराए के कमरे पर पहुंची और आसपास के लोगों से पूछताछ की.

इस पूछताछ में पता चला कि मृतक की नान्हू पांडेय से गहरी मित्रता थी. लेकिन किसी बात को ले कर उस का नान्हू से झगड़ा हुआ था. पुलिस को लगा कि हो सकता है यही झगड़ा प्रदीप की हत्या का कारण बना हो. इस के बाद पुलिस ने मृतक प्रदीप के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. पता चला कि उस की जिला गोंडा के थाना मनकापुर के रहने वाले नान्हू से अक्सर बातें होती रहती थीं. इस के अलावा उस की काल डिटेल्स में एक नंबर और मिला, जिस पर सब से ज्यादा बातें हुई थीं. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर एक लड़की का निकला.

इस से पुलिस के सामने हत्या का कारण लगभग स्पष्ट हो गया. यह हत्या आशनाई की वजह से हुई थी, क्योंकि काल डिटेल्स के अनुसार वह लड़की कोई और नहीं, नान्हू पांडेय की बहन थी. इस के बाद पुलिस ने अखिलेश पांडेय उर्फ नान्हू पांडेय के जिला गोंडा थाना मनकापुर के गांव हरसिंहपुरवा स्थित घर छापा मारा. लेकिन वह घर पर नहीं मिला. इस पर पुलिस ने मुखबिरों का जाल बिछा कर नान्हू की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए. इस का नतीजा यह निकला कि पुलिस को नान्हू के छिपे होने के स्थान की जानकारी मिल गई. पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर विश्वास कर के जिला बस्ती के थाना पैकोलिया स्थित नान्हू पांडेय की ससुराल में छापा मारा.

पुलिस को आया देख कर उस ने अपने साले नीरज पांडेय और मित्र सुनील सिंह के साथ भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने तीनों को धर दबोचा. गिरफ्तारी के बाद तीनों को पूछताछ के लिए थाना पुरानी बस्ती लाया गया.

पुलिस ने जब नान्हू से प्रदीप की हत्या के बारे में पूछा तो पहले उस ने बहानेबाजी की, लेकिन जब पुलिस ने सबूतों के आधार पर उसे घेरा तो उस ने प्रदीप की हत्या की बात स्वीकार कर ली. उस ने बताया कि प्रदीप की हत्या उस ने अपने साले नीरज पांडेय, दोस्त सुनील सिंह और बृजकिशोर सिंह के साथ मिल कर 7 मार्च की रात को की थी. हत्या करने के बाद उस ने लाश बस्ती में हाईवे पर फेंक दी थी. हत्या की वजह उस ने अपनी बहन से प्रदीप के अवैध संबंध बताए. उस ने प्रदीप की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

फैजाबाद जिले का रहने वाला प्रदीप कुमार उपाध्याय गोरखपुर स्थित एल्युमिनियम फैक्ट्री के पास किराए का मकान ले कर आईटीआई कर रहा था. उस के पिता कृष्णदेव उपाध्याय रेलवे में थे. इस समय वह वाराणसी में हैं. प्रदीप का ज्यादातर समय गोरखपुर में बीतता था. हां, छुट्टियों में वह जरूर घर चला जाता था. गोरखपुर में ही उस की दोस्ती गोंडा जिले के रहने वाले हिस्ट्रीशीटर अखिलेश कुमार पांडेय उर्फ नान्हू पांडेय से हो गई. दोस्ती की वजह से प्रदीप उस के घर भी आनेजाने लगा.

नान्हू के घर जाने पर प्रदीप ने उस की बहन राधिका (काल्पनिक नाम) को देखा तो पहली ही नजर में वह उस के दिल में उतर गई. उसे पाने की तमन्ना लिए वह गोरखपुर वापस तो आ गया, लेकिन उस के लिए बेचैन रहने लगा. इस के बाद वह राधिका के लिए किसी न किसी बहाने अक्सर नान्हू के घर आनेजाने लगा. परिणामस्वरूप दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. एक समय ऐसा भी आया, जब दोनों दुनिया से बेखबर हो कर प्रेम के समंदर में गोते लगाने लगे. प्रेम गहराया तो राधिका ने कहा, ‘‘प्रदीप, मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकती. अब तुम शादी कर के मुझे अपनी दुलहन बना कर अपने घर ले चलो.’’

प्रदीप ने कहा, ‘‘कुछ दिन सब्र रखो, समय आने पर मैं अपने पिताजी से शादी की बात करूंगा.’’

प्रदीप ने राधिका से शारीरिक संबंध तो बना ही लिए थे, मोबाइल से उस के कुछ अश्लील फोटो भी खींच लिए थे. कहते हैं कि इश्क मुश्क छिपाए नहीं छिपते. इस मामले में भी यही हुआ. आखिर राधिका और प्रदीप के संबंधों की भनक नान्हू को लग गई. वह दोनों पर नजर तो रखने ही लगा, साथ ही उस ने प्रदीप से अपनी बहन से दूर रहने को भी कहा. लेकिन जब उसे पता चला कि प्रदीप और राधिका के संबंध हद से आगे बढ़ गए हैं तो उस ने प्रदीप से कहा कि वह राधिका से शादी कर ले.

प्रदीप ने शादी से तो मना कर ही दिया, साथ ही राधिका के अश्लील चित्रों के आधार पर उसे धमकी भी दी कि अगर उस ने उसे राधिका से मिलने से रोका तो वह उस की बहन के फोटो सार्वजनिक कर देगा. इतना सब होने के बाद भी प्रदीप नान्हू के घर राधिका से मिलने जाता रहा. यह नान्हू की सरासर बेइज्जती थी. उस ने गोरखपुर जा कर प्रदीप से काफी झगड़ा किया और उसे जान से मारने की धमकी दी.

7 मार्च, 2016 को नान्हू ने अपने साले नीरज तथा दोस्त सुनील के साथ मिल कर प्रदीप को ठिकाने लगाने की योजना बनाई और फोन कर के प्रदीप को मिलने के लिए बुलाया. प्रदीप गोरखपुर से बाघ एक्सप्रेस द्वारा मनकापुर आया, जहां पहले से मौजूद नान्हू और उस के साले से प्रदीप की कहासुनी हो गई. इस के बाद नान्हू और नीरज ने प्रदीप को पीटपीट कर अधमरा कर दिया. फिर अपने बदमाश मित्रों सुनील सिंह और बृजकिशोर सिंह को फोन कर के बुलाया और प्रदीप को होंडा सिटी कार में डाल कर बस्ती की ओर चल पड़े. रास्ते में उन्होंने प्रदीप के गले में रस्सी डाल कर कस दी, जिस से उस की मौत हो गई. इस के बाद वे लाश को चैनपुरवा हाईवे ओवरब्रिज के नीचे डाल कर लौट आए. होंडा सिटी कार नान्हू पांडेय की थी.

हत्याभियुक्त अखिलेश पांडेय उर्फ नान्हू पांडेय के ऊपर पहले से ही 12 मुकदमे दर्ज हैं, जिन में लूट, हत्या का प्रयास, छिनैती, गुंडा एक्ट, मारपीट और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराध शामिल हैं. उस के साले नीरज पर भी लूट, हत्या का प्रयास, विस्फोटक अधिनियम, धोखाधड़ी सहित दर्जन भर मुकदमे बस्ती जिले के विभिन्न थानों में दर्ज हैं. तीसरे हत्याभियुक्त सुनील सिंह पर भी गोंडा जिले के विभिन्न थानों में हत्या, लूट, गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट सहित कई मुकदमें दर्ज हैं. चौथा अभियुक्त बृजकिशोर सिंह कथा लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर था.

जबकि पकड़े गए हत्याभियुक्तों को कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया गया था. घटना का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को एसपी ने 5 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है. Illegal Relationship

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित है.

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